वाशिंगटन डीसी | 25 फरवरी 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार सुबह (भारतीय समयानुसार) अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में अपना बहुप्रतीक्षित 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (SOTU) भाषण दिया। लगभग 1 घंटा 50 मिनट तक चले इस मैराथन संबोधन में ट्रम्प ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का गुणगान किया, वैश्विक संघर्षों में अपनी भूमिका का दावा किया और विरोधियों पर तीखे प्रहार किए।
जहाँ रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रम्प का स्वागत "फोर मोर ईयर्स" के नारों और तालियों से किया, वहीं डेमोक्रेटिक सांसदों ने उनके दावों को "झूठ का पुलिंदा" करार देते हुए सदन में ही विरोध प्रदर्शन किया।
यहाँ ट्रम्प के भाषण की प्रमुख घोषणाएं, विवाद और वैश्विक प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है:
ट्रम्प ने एक बार फिर दक्षिण एशिया के दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच मध्यस्थता का श्रेय खुद को लिया।
3.5 करोड़ मौतों का दावा: ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अपनी कूटनीति से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका। उन्होंने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के हवाले से दावा किया कि इस जंग में साढ़े तीन करोड़ लोगों की जान जा सकती थी।
भारत का रुख: गौरतलब है कि भारत ने ट्रम्प के इस तरह के दावों को पहले भी 'काल्पनिक' और 'तथ्यहीन' बताकर खारिज किया है। भारत का हमेशा से स्टैंड रहा है कि पाकिस्तान के साथ मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है।
ट्रम्प ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया:
हमले का दावा: राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले साल जुलाई में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।
मिसाइल खतरा: उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक मार कर सकती हैं।
प्रदर्शनकारियों की मौत: ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान ने हालिया महंगाई विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अपने ही 32,000 नागरिकों की हत्या की है।
वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य दखल के करीब डेढ़ महीने बाद ट्रम्प ने वहां की स्थिति को अपनी जीत बताया:
तेल उत्पादन: ट्रम्प ने दावा किया कि वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण के बाद वहां उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई है।
दोस्ती का हाथ: उन्होंने वेनेजुएला को अमेरिका का नया रणनीतिक साझेदार और दोस्त करार दिया, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई।
ट्रम्प ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर कई बड़े आंकड़े पेश किए:
एनर्जी बूम: उन्होंने बताया कि उनकी नीतियों की वजह से अमेरिका में तेल का उत्पादन रोजाना 6 लाख बैरल बढ़ गया है।
15% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को रद्द करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ट्रम्प ने नया 15% वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की।
महंगाई: ट्रम्प ने पिछले डेमोक्रेटिक शासन को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराया और वादा किया कि उनकी नीतियां कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक नीचे लाएंगी।
भाषण के दौरान सदन में जबरदस्त राजनीतिक तनाव देखने को मिला:
एपस्टीन विवाद: डेमोक्रेटिक सांसदों ने जेफ्री एपस्टीन के मामलों के पीड़ितों को गैलरी में बिठाया था ताकि ट्रम्प पर फाइलों को सार्वजनिक करने का दबाव बनाया जा सके। हालांकि, ट्रम्प ने अपने पूरे भाषण में 'एपस्टीन फाइल' का जिक्र तक नहीं किया।
इल्हान उमर का हमला: सोमाली-अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने ट्रम्प को हत्यारा कहा, जिस पर ट्रम्प ने उन्हें मंच से ही "शर्म करने" की सलाह दी।
सांसद अल ग्रीन को निकाला गया: "काले लोग बंदर नहीं होते" का पोस्टर दिखाने पर डेमोक्रेटिक सांसद अल ग्रीन को मार्शल द्वारा सदन से बाहर कर दिया गया।
| विषय | ट्रम्प का दावा / घोषणा | विपक्ष (डेमोक्रेट्स) की प्रतिक्रिया |
| विदेश नीति | भारत-पाक परमाणु युद्ध रुकवाया (3.5 करोड़ जानें बचाईं)। | इसे पूरी तरह झूठ और ध्यान भटकाने वाला बताया। |
| ईरान | परमाणु कार्यक्रम नष्ट कर दिया, मिसाइल खतरा बरकरार। | ईरान के साथ अकारण युद्ध की योजना बनाने का आरोप। |
| गाजा | सीजफायर और बंधकों की रिहाई को बड़ी जीत बताया। | मानवीय संकट को नजरअंदाज करने की बात कही। |
| अर्थव्यवस्था | 15% वैश्विक टैरिफ और तेल उत्पादन में वृद्धि। | टैरिफ को अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ बताया। |
| वेनेजुएला | कब्जा सफल, तेल उत्पादन बढ़ा, नया दोस्त बना। | संप्रभु देश पर अवैध कब्जे का विरोध किया। |
डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से वर्जीनिया की गवर्नर एबिगेल स्पैनबर्गर ने आधिकारिक जवाब दिया:
तानाशाहों के आगे समर्पण: उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रम्प पुतिन जैसे तानाशाहों के सामने झुक रहे हैं और चीन को तकनीकी बढ़त सौंप रहे हैं।
लोकतंत्र को खतरा: विपक्ष ने कहा कि ट्रम्प संघीय एजेंटों का उपयोग अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कर रहे हैं और बिना वारंट के गिरफ्तारियां करवा रहे हैं।
भटकाने की राजनीति: स्पैनबर्गर ने कहा कि राष्ट्रपति असली समस्याओं (जैसे स्वास्थ्य सेवा और क्लाइमेट चेंज) का समाधान देने के बजाय केवल अपना चेहरा चमका रहे हैं।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
ट्रम्प का 'स्टेट ऑफ द यूनियन' भाषण: भारत-पाक परमाणु जंग रुकवाने का 101वीं बार दावा; ईरान-वेनेजुएला पर बड़ी घोषणाएं और संसद में भारी हंगामा वाशिंगटन डीसी | 25 फरवरी 2026 अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार सुबह (भारतीय समयानुसार) अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) में अपना बहुप्रतीक्षित 'स्टेट ऑफ द यूनियन' (SOTU) भाषण दिया। लगभग 1 घंटा 50 मिनट तक चले इस मैराथन संबोधन में ट्रम्प ने अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति का गुणगान किया, वैश्विक संघर्षों में अपनी भूमिका का दावा किया और विरोधियों पर तीखे प्रहार किए। जहाँ रिपब्लिकन सांसदों ने ट्रम्प का स्वागत "फोर मोर ईयर्स" के नारों और तालियों से किया, वहीं डेमोक्रेटिक सांसदों ने उनके दावों को "झूठ का पुलिंदा" करार देते हुए सदन में ही विरोध प्रदर्शन किया। यहाँ ट्रम्प के भाषण की प्रमुख घोषणाएं, विवाद और वैश्विक प्रभाव का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर 'परमाणु युद्ध' का दावा ट्रम्प ने एक बार फिर दक्षिण एशिया के दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच मध्यस्थता का श्रेय खुद को लिया। 3.5 करोड़ मौतों का दावा: ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने अपनी कूटनीति से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु युद्ध को रोका। उन्होंने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के हवाले से दावा किया कि इस जंग में साढ़े तीन करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। भारत का रुख: गौरतलब है कि भारत ने ट्रम्प के इस तरह के दावों को पहले भी 'काल्पनिक' और 'तथ्यहीन' बताकर खारिज किया है। भारत का हमेशा से स्टैंड रहा है कि पाकिस्तान के साथ मुद्दे द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है। 2. ईरान को सीधी चेतावनी और न्यूक्लियर प्रोग्राम ट्रम्प ने ईरान को लेकर बेहद आक्रामक रुख अपनाया: हमले का दावा: राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले साल जुलाई में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जरिए ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था। मिसाइल खतरा: उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक मार कर सकती हैं। प्रदर्शनकारियों की मौत: ट्रम्प ने आरोप लगाया कि ईरान ने हालिया महंगाई विरोधी प्रदर्शनों के दौरान अपने ही 32,000 नागरिकों की हत्या की है। 3. वेनेजुएला: अमेरिका का 'नया दोस्त' वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य दखल के करीब डेढ़ महीने बाद ट्रम्प ने वहां की स्थिति को अपनी जीत बताया: तेल उत्पादन: ट्रम्प ने दावा किया कि वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों पर नियंत्रण के बाद वहां उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई है। दोस्ती का हाथ: उन्होंने वेनेजुएला को अमेरिका का नया रणनीतिक साझेदार और दोस्त करार दिया, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई। 4. घरेलू नीतियां: महंगाई, तेल और टैरिफ ट्रम्प ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर कई बड़े आंकड़े पेश किए: एनर्जी बूम: उन्होंने बताया कि उनकी नीतियों की वजह से अमेरिका में तेल का उत्पादन रोजाना 6 लाख बैरल बढ़ गया है। 15% ग्लोबल टैरिफ: सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को रद्द करने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ट्रम्प ने नया 15% वैश्विक टैरिफ लागू करने की घोषणा की। महंगाई: ट्रम्प ने पिछले डेमोक्रेटिक शासन को महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराया और वादा किया कि उनकी नीतियां कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक नीचे लाएंगी। 5. संसद के भीतर का ड्रामा: एपस्टीन पीड़ितों की मौजूदगी भाषण के दौरान सदन में जबरदस्त राजनीतिक तनाव देखने को मिला: एपस्टीन विवाद: डेमोक्रेटिक सांसदों ने जेफ्री एपस्टीन के मामलों के पीड़ितों को गैलरी में बिठाया था ताकि ट्रम्प पर फाइलों को सार्वजनिक करने का दबाव बनाया जा सके। हालांकि, ट्रम्प ने अपने पूरे भाषण में 'एपस्टीन फाइल' का जिक्र तक नहीं किया। इल्हान उमर का हमला: सोमाली-अमेरिकी सांसद इल्हान उमर ने ट्रम्प को हत्यारा कहा, जिस पर ट्रम्प ने उन्हें मंच से ही "शर्म करने" की सलाह दी। सांसद अल ग्रीन को निकाला गया: "काले लोग बंदर नहीं होते" का पोस्टर दिखाने पर डेमोक्रेटिक सांसद अल ग्रीन को मार्शल द्वारा सदन से बाहर कर दिया गया। 📊 ट्रम्प के भाषण के मुख्य बिंदु: एक नजर में विषय ट्रम्प का दावा / घोषणा विपक्ष (डेमोक्रेट्स) की प्रतिक्रिया विदेश नीति भारत-पाक परमाणु युद्ध रुकवाया (3.5 करोड़ जानें बचाईं)। इसे पूरी तरह झूठ और ध्यान भटकाने वाला बताया। ईरान परमाणु कार्यक्रम नष्ट कर दिया, मिसाइल खतरा बरकरार। ईरान के साथ अकारण युद्ध की योजना बनाने का आरोप। गाजा सीजफायर और बंधकों की रिहाई को बड़ी जीत बताया। मानवीय संकट को नजरअंदाज करने की बात कही। अर्थव्यवस्था 15% वैश्विक टैरिफ और तेल उत्पादन में वृद्धि। टैरिफ को अमेरिकी उपभोक्ताओं पर बोझ बताया। वेनेजुएला कब्जा सफल, तेल उत्पादन बढ़ा, नया दोस्त बना। संप्रभु देश पर अवैध कब्जे का विरोध किया। 6. विपक्ष का पलटवार: "चीन-रूस के आगे सरेंडर सरकार" डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से वर्जीनिया की गवर्नर एबिगेल स्पैनबर्गर ने आधिकारिक जवाब दिया: तानाशाहों के आगे समर्पण: उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रम्प पुतिन जैसे तानाशाहों के सामने झुक रहे हैं और चीन को तकनीकी बढ़त सौंप रहे हैं। लोकतंत्र को खतरा: विपक्ष ने कहा कि ट्रम्प संघीय एजेंटों का उपयोग अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कर रहे हैं और बिना वारंट के गिरफ्तारियां करवा रहे हैं। भटकाने की राजनीति: स्पैनबर्गर ने कहा कि राष्ट्रपति असली समस्याओं (जैसे स्वास्थ्य सेवा और क्लाइमेट चेंज) का समाधान देने के बजाय केवल अपना चेहरा चमका रहे हैं।
बांग्लादेश: सत्ता संभालते ही तारिक रहमान का सेना में 'बड़ा क्लीन स्वीप'; इंटेलिजेंस और कमांड पदों पर तैनात किए वफादार, विपक्ष ने लगाया 'चुनावी हेरफेर' का आरोप ढाका | 23 फरवरी 2026 बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक और सैन्य गलियारों में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। 17 फरवरी को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के कुछ ही दिनों के भीतर तारिक रहमान ने बांग्लादेशी सेना के ढांचे में आमूलचूल बदलाव कर दिए हैं। रविवार और सोमवार को जारी किए गए आदेशों के तहत सेना के सबसे संवेदनशील पदों—इंटेलिजेंस (DGFI), ऑपरेशनल कमांड और फील्ड डिविजन्स—पर नए चेहरों की नियुक्ति की गई है। यहाँ इस सैन्य फेरबदल, इसके पीछे की रणनीतिक वजहों और तारिक रहमान सरकार के सामने खड़ी चुनौतियों का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सैन्य फेरबदल: कौन कहाँ नियुक्त हुआ? प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने सोमवार को आर्म्ड फोर्स डिवीजन (AFD) में औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण किया और प्रमुख नियुक्तियों पर मुहर लगाई: इंटेलिजेंस (DGFI) में बदलाव: मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को 'डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस' (DGFI) का नया डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। उन्होंने मेजर जनरल मोहम्मद जहांगीर आलम की जगह ली है। DGFI बांग्लादेश की सबसे शक्तिशाली खुफिया इकाई मानी जाती है। चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS): लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान को सेना का नया CGS बनाया गया है। यह पद सेना की रणनीतिक योजना और ऑपरेशंस के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO): लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान को सशस्त्र बल डिवीजन का PSO नियुक्त किया गया है। निवर्तमान PSO लेफ्टिनेंट जनरल एसएम कामरुल हसन को विदेश मंत्रालय भेज दिया गया है। भारत से वापसी: भारत में तैनात रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को मेजर जनरल के पद पर प्रमोट कर वापस बुला लिया गया है। उन्हें अब 55वीं इन्फैंट्री डिविजन का जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) बनाया गया है। अन्य फील्ड कमांड: मेजर जनरल फिरदोस हसन सलीम को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 24वीं इन्फैंट्री डिविजन (चटगांव) का GOC नियुक्त किया गया है। 2. फेरबदल के पीछे की रणनीतिक वजहें विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल नियमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि 'पावर कंसोलिडेशन' (सत्ता का सुदृढ़ीकरण) की एक सोची-समझी कोशिश है: सेना पर पकड़ मजबूत करना: छात्र आंदोलन (फरवरी 2024) के बाद मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कई पदों पर अपनी पसंद के अधिकारी नियुक्त किए थे। तारिक रहमान अपनी नई BNP सरकार के प्रति वफादार अधिकारियों को अहम पदों पर चाहते हैं ताकि तख्तापलट या बगावत की किसी भी संभावना को खत्म किया जा सके। पुरानी व्यवस्था का अंत: शेख हसीना और मुहम्मद यूनुस के दौर के अधिकारियों को महत्वपूर्ण कमान पदों से हटाकर राजदूत बनाकर विदेशों में भेजा जा रहा है या 'रिटायरमेंट लीव' पर भेजा गया है। रणनीतिक स्थिरता: नई सरकार चाहती है कि सेना का नेतृत्व ऐसा हो जो BNP के राजनीतिक एजेंडे और सुरक्षा विजन के साथ तालमेल बिठा सके। 📊 बांग्लादेश की नई सैन्य और राजनीतिक व्यवस्था पद नया अधिकारी पूर्व भूमिका प्रधानमंत्री तारिक रहमान (BNP) 17 फरवरी 2026 को शपथ ली चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद मैनूर रहमान आर्मी ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख DGFI डायरेक्टर मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी आर्मी मुख्यालय PSO (आर्म्ड फोर्सेस) लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुशफिकुर रहमान GOC, 24वीं इन्फैंट्री डिविजन GOC, 55वीं डिविजन मेजर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान भारत में रक्षा सलाहकार 3. भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर संभावित असर नई दिल्ली में तैनात रक्षा सलाहकार की वापसी और बांग्लादेश में मिलिट्री लीडरशिप के बदलने से द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ना तय है: नया मिलिट्री संवाद: भारत और बांग्लादेश के बीच सैन्य सहयोग बहुत गहरा रहा है। नई नियुक्तियों के बाद दिल्ली और ढाका के बीच रक्षा संवाद के नए चैनल स्थापित होंगे। संतुलन की चुनौती: तारिक रहमान की सरकार को भारत के साथ सुरक्षा चिंताओं (जैसे सीमा प्रबंधन और आतंकवाद) पर फिर से तालमेल बिठाना होगा, क्योंकि नई लीडरशिप की प्राथमिकताएं पिछली सरकारों से अलग हो सकती हैं। 4. विपक्ष का 'चुनावी इंजीनियरिंग' का आरोप सेना में इस बड़े फेरबदल के बीच तारिक रहमान की लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठने लगे हैं: चुनाव में गड़बड़ी: जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) जैसे विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि 12 फरवरी के चुनाव में 'इंजीनियरिंग' की गई थी। भारी बहुमत पर शक: विपक्ष का कहना है कि 20 साल बाद BNP को मिली 200 से ज्यादा सीटें वास्तविक जनादेश नहीं, बल्कि नतीजों में की गई हेरफेर का परिणाम हैं। तानाशाही का डर: विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि सेना में यह बदलाव उन लोगों को डराने के लिए है जो चुनाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। 5. निष्कर्ष: क्या तारिक रहमान को मिलेगी स्थिरता? सेना में किया गया यह 'सर्जिकल ऑपरेशन' तारिक रहमान को तात्कालिक सुरक्षा तो प्रदान कर सकता है, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर असंतोष बढ़ा सकता है। अगर वे सेना के माध्यम से सत्ता को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं, तो छात्र संगठनों और विपक्षी दलों के बीच एक बार फिर आंदोलन की चिंगारी भड़क सकती है। अगले कुछ महीने बांग्लादेश की आंतरिक सुरक्षा और लोकतांत्रिक भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।
Gemini said ईरान पर हमले के लिए ब्रिटेन का 'नो': ट्रम्प और स्टार्मर के बीच बढ़ी तल्खी; डिएगो गार्सिया को लेकर चागोस समझौते पर मंडराया संकट लंदन/वॉशिंगटन | 21 फरवरी 2026 हिंद महासागर की लहरों के बीच स्थित एक छोटा सा द्वीप डिएगो गार्सिया आज वैश्विक राजनीति और युद्ध की आहट का केंद्र बन गया है। ब्रिटेन ने अमेरिका के उस अनुरोध को ठुकरा दिया है, जिसमें ईरान पर संभावित हमले के लिए ब्रिटिश सैन्य ठिकानों (एयरबेस) के इस्तेमाल की अनुमति मांगी गई थी। इस फैसले ने दशकों पुरानी ब्रिटेन-अमेरिका की 'विशेष दोस्ती' (Special Relationship) में दरार पैदा कर दी है, जिसका सीधा असर अब चागोस द्वीप समूह के भविष्य पर पड़ता दिख रहा है। यहाँ इस भू-राजनीतिक टकराव, डिएगो गार्सिया के सामरिक महत्व और ट्रम्प-स्टार्मर विवाद का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. ब्रिटेन का इनकार: क्यों पीछे हटा लंदन? डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान मिशन के लिए RAF फेयरफोर्ड और डिएगो गार्सिया के इस्तेमाल की इजाजत देने से मना कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय कानून का डर: ब्रिटेन को डर है कि यदि वह ईरान पर किसी ऐसे हमले में शामिल होता है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'अवैध' माना जाए, तो उसे भी युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इराक युद्ध की सीख: इराक और अफगानिस्तान युद्धों के बाद ब्रिटेन की जनता और राजनीति में 'बिना ठोस कानूनी आधार' के सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के प्रति गहरी अरुचि है। संप्रभुता का अधिकार: समझौतों के अनुसार, ब्रिटेन के किसी भी बेस से हमला करने के लिए ब्रिटिश पीएम की स्पष्ट सहमति अनिवार्य है। 2. ट्रम्प की नाराजगी और 'चागोस' पर पलटवार ब्रिटेन के इस 'असहयोग' से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बेहद खफा हैं। उन्होंने इसका बदला लेने के लिए चागोस द्वीप समूह के मुद्दे को हथियार बनाया है: समझौते से समर्थन वापसी: कीर स्टार्मर सरकार ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने का जो ऐतिहासिक समझौता किया था, ट्रम्प ने अब उससे अमेरिकी समर्थन वापस ले लिया है। "बहुत बड़ी गलती": ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि डिएगो गार्सिया जैसा अहम रणनीतिक ठिकाना छोड़ना एक ऐतिहासिक भूल होगी। उन्होंने 100 साल की लीज जैसे फैसलों को कमजोर नीति करार दिया। ईरान के खिलाफ कंट्रोल: ट्रम्प का मानना है कि यदि ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता, तो अमेरिका को हिंद महासागर में पूर्ण नियंत्रण वाले बेस की जरूरत होगी। 3. डिएगो गार्सिया: ईरान के लिए क्यों है यह 'किलर' बेस? ईरान पर हमले के लिए डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए किसी 'तुरुप के इक्के' से कम नहीं है। इसकी अहमियत के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: दूरी और सुरक्षा: यह ईरान की राजधानी तेहरान से लगभग 3,800 किलोमीटर दूर है। यह दूरी इतनी है कि अमेरिकी बमवर्षक ईरान की मिसाइलों की रेंज से बाहर रहते हुए हमला कर सकते हैं। भारी बमवर्षकों का घर: यहाँ का रनवे इतना बड़ा है कि B-2 स्टील्थ और B-52 जैसे विशालकाय परमाणु सक्षम बमवर्षक यहाँ से उड़ान भर सकते हैं। गहरे पानी का बंदरगाह: यहाँ गहरे पानी की प्राकृतिक गोदी है, जहाँ अमेरिकी विमानवाहक पोत और परमाणु पनडुब्बियां ईंधन और गोला-बारूद भर सकती हैं। निगरानी केंद्र: यह हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है, जहाँ से पूरे मध्य-पूर्व और एशिया पर नजर रखी जा सकती है। 📊 चागोस आइलैंड्स: विवाद और इतिहास कालखंड घटनाक्रम 1814 ब्रिटेन ने नेपोलियन को हराकर चागोस आइलैंड्स पर कब्जा किया। 1965 मॉरीशस से अलग कर इसे 'ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र' बनाया गया। 1970 का दशक अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर डिएगो गार्सिया पर सैन्य बेस बनाया। 2019 अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने ब्रिटेन को ये द्वीप मॉरीशस को लौटाने का आदेश दिया। 2024-25 लेबर पार्टी (स्टार्मर सरकार) ने मॉरीशस को द्वीप लौटाने का समझौता किया। Export to Sheets 4. ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों में खटास की 4 बड़ी वजहें सालों पुराने मित्र देशों के बीच आज कई मुद्दों पर मतभेद सतह पर आ गए हैं: कानून बनाम ताकत: ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय नियमों और संधियों (International Law) को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति सख्त सैन्य कार्रवाई में यकीन रखती है। चागोस का भविष्य: ब्रिटेन कानूनी विवाद खत्म करने के लिए मॉरीशस को द्वीप लौटाना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे हिंद महासागर में अपनी पकड़ कमजोर होना मान रहा है। आर्थिक बोझ: चागोस समझौते पर करीब 35 बिलियन पाउंड (4 लाख करोड़ रुपये) का खर्च आना है, जिसे अमेरिका फिजूलखर्ची मान रहा है। ग्रीनलैंड और अन्य मुद्दे: ट्रम्प की ग्रीनलैंड खरीदने की इच्छा और डेनमार्क के साथ उनके व्यवहार ने भी ब्रिटेन जैसे यूरोपीय सहयोगियों को असहज किया है। 5. निष्कर्ष: क्या युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया? ब्रिटेन के इनकार के बावजूद, ट्रम्प प्रशासन ईरान के प्रति अपने कड़े रुख पर अड़ा हुआ है। डिएगो गार्सिया का नियंत्रण अब एक बड़ी कूटनीतिक जंग बन चुका है। यदि ब्रिटेन अपने रुख पर कायम रहता है, तो अमेरिका हिंद महासागर में अपनी रणनीति बदल सकता है, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा और व्यापार मार्गों पर पड़ेगा।