विदेश

ट्रम्प ग्रीनलैंड का फ्यूचर स्विट्जरलैंड में तय करेंगे
Trump's New Map: कनाडा और ग्रीनलैंड को दिखाया अमेरिका का हिस्सा; दावोस में नाटो चीफ संग इमरजेंसी बैठक; ग्रीनलैंड में सैन्य विमान तैनात।

ट्रम्प का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान: ग्रीनलैंड पर नाटो चीफ से फोन पर बात, दावोस में होगी इमरजेंसी बैठक; सोशल मीडिया पर शेयर किया ग्रीनलैंड-कनाडा-वेनेजुएला वाला 'नया नक्शा' वाशिंगटन/नुउक | 20 जनवरी 2026 दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को नाटो (NATO) चीफ मार्क रूट से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद ग्रीनलैंड मुद्दे को सुलझाने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादित नक्शा पोस्ट किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा दुनिया भर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 1. ट्रम्प और नाटो चीफ की 'दावोस डील' ट्रम्प ने मार्क रूट के साथ हुई बातचीत को 'अति प्रभावशाली' बताया। शांति के लिए ताकत: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है। उन्होंने कहा, "दुनिया में शांति केवल ताकत के जरिए ही आ सकती है, और अमेरिका सबसे ताकतवर है।" रूट का संदेश: ट्रम्प ने मार्क रूट का एक निजी संदेश साझा किया जिसमें रूट ने ट्रम्प की सीरिया और गाजा नीतियों की प्रशंसा की और ग्रीनलैंड मामले में 'रास्ता निकालने' की प्रतिबद्धता जताई। दावोस बैठक: ग्रीनलैंड के भविष्य और डेनमार्क के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए दावोस में अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की बैठक होगी। 2. ग्रीनलैंड में सैन्य टकराव की आहट: अमेरिका और डेनमार्क ने भेजे विमान कूटनीति के साथ-साथ जमीन पर सैन्य हलचल भी तेज हो गई है: अमेरिकी विमान: अमेरिका ने NORAD (North American Aerospace Defense Command) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) भेजा है। कमांड ने इसे 'नियमित रक्षा गतिविधि' बताया है। डेनमार्क का जवाब: डेनमार्क ने भी चुप बैठने के बजाय सोमवार को कई विमानों के जरिए अतिरिक्त सैनिक और भारी सैन्य उपकरण ग्रीनलैंड पहुंचाए। यूरोपीय मोर्चेबंदी: जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले ही 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत वहां अपने सैनिक भेज चुके हैं, जिसे ट्रम्प प्रशासन एक चुनौती के रूप में देख रहा है। 📊 ग्रीनलैंड का सैन्य ढांचा: वर्तमान तैनाती पक्ष यूनिट / बेस सैनिक संख्या मुख्य कार्य अमेरिका पिटुफिक स्पेस बेस (थुले) ~150-200 मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी। डेनमार्क जॉइंट आर्कटिक कमांड ~150-200 संप्रभुता रक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू। स्पेशल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल 12-14 कुत्तों की स्लेज से आर्कटिक गश्त। NATO (EU) आर्कटिक एंड्योरेंस ~40-50 राजनीतिक एकजुटता का संदेश। 3. 'ग्रेटर अमेरिका' मैप: कनाडा और वेनेजुएला पर नजर? ट्रम्प द्वारा साझा किए गए नक्शे ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विस्तारवाद: नक्शे में न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में रंगा गया है। कनाडा का रुख: कनाडा ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के चरम विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिका के तेल समृद्ध देश वेनेजुएला को अमेरिकी नक्शे में दिखाना ट्रम्प की ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। 4. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए 'गोल्ड माइन' क्यों है? ट्रम्प की इस जिद के पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) का भंडार है। वर्तमान में चीन इनका 90% उत्पादन नियंत्रित करता है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चीन की निर्भरता खत्म कर देगा। नई शिपिंग रूट्स: ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, जिससे आर्कटिक में नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं। अमेरिका इन रास्तों पर अपना प्रभुत्व चाहता है। मिसाइल डिफेंस: यह रूस और अमेरिका के बीच सबसे छोटा हवाई मार्ग है, जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। रणनीतिक घेराबंदी: यहाँ से अमेरिका रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर सीधी नजर रख सकता है। 5. कानूनी पेच: क्या ग्रीनलैंड को खरीदा जा सकता है? नाटो के नियमों के मुताबिक, यह प्रक्रिया लगभग असंभव है: Article 5 का उल्लंघन: अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सदस्य हैं। एक सदस्य दूसरे की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। जनमत संग्रह (Referendum): 2009 के 'सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट' के अनुसार, ग्रीनलैंड के लोग केवल जनमत संग्रह के जरिए ही स्वतंत्र हो सकते हैं या किसी अन्य देश के साथ जुड़ने का फैसला ले सकते हैं। डेनिश संसद की मंजूरी भी अनिवार्य है। 6. आर्थिक युद्ध: यूरोप का 'ट्रेड बाजूका' यूरोपीय संघ (EU) ने ट्रम्प के 10% टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रेड बाजूका: EU अपने 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' का इस्तेमाल कर अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने और 750 बिलियन डॉलर के ऊर्जा समझौते को रद्द करने की धमकी दे रहा है। 1 फरवरी की डेडलाइन: ट्रम्प का टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक संबंध अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुँच सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे
ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया 10% टैरिफ; जवाब में NATO ने तैनात किए सैनिक; ट्रेड वॉर की शुरुआत।

ट्रम्प बनाम यूरोप: ग्रीनलैंड पर 'आर्कटिक वॉर'; 8 देशों पर 10% टैरिफ लगा, जवाब में EU ने तैनात किए सैनिक और लोड किया 'ट्रेड बाजूका' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूरोपीय देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर विवाद अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की धमकियों और 'खरीदने' की जिद के जवाब में, डेनमार्क और उसके 8 नाटो (NATO) सहयोगियों ने सैन्य मोर्चा खोल दिया है। इसके पलटवार में ट्रम्प ने इन देशों पर 10% से 25% तक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है, जिसे यूरोपीय नेताओं ने 'ब्लैकमेल' करार दिया है। 1. 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस': ग्रीनलैंड में यूरोपीय फौज की एंट्री डेनमार्क की अगुवाई में ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक में 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' शुरू किया गया है। यह एक सैन्य अभ्यास है, लेकिन इसका संदेश पूरी तरह राजनीतिक है। किसने कितने सैनिक भेजे: फ्रांस ने अपनी घातक 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री के 15 सैनिक भेजे हैं। जर्मनी ने 13, जबकि नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड्स ने प्रतीकात्मक रूप से 2-2 सैनिक तैनात किए हैं। ब्रिटेन ने भी अपना सैन्य अधिकारी भेजा है। मकसद: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि यह संख्या भले छोटी है, लेकिन यह नाटो की एकजुटता का प्रमाण है। यह अमेरिका को संदेश है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। 2. ट्रम्प का 'टैरिफ हथियार': 1 फरवरी से लागू होगी सजा यूरोपीय देशों की सैन्य सक्रियता से भड़के ट्रम्प ने शनिवार (17 जनवरी) को Truth Social पर एक कड़ा फैसला सुनाया। 10% टैरिफ: डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 1 फरवरी से 10% अतिरिक्त टैक्स लगेगा। 25% की चेतावनी: ट्रम्प ने कहा कि अगर 1 जून तक ग्रीनलैंड की 'खरीद' पर डील नहीं हुई, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। तर्क: ट्रम्प का दावा है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं और केवल अमेरिका ही इसे बचा सकता है। 3. 'ट्रेड बाजूका' (Anti-Coercion Instrument): यूरोप का पलटवार यूरोपीय संघ (EU) अब अमेरिका के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियार 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' (जिसे ट्रेड बाजूका कहा जाता है) को सक्रिय करने की तैयारी में है। क्या है यह हथियार: इसके तहत EU उन देशों पर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है जो उसे आर्थिक रूप से डराने की कोशिश करते हैं। इसमें अमेरिकी टेक कंपनियों (गूगल, एप्पल आदि) पर पाबंदी और 93 अरब यूरो के अमेरिकी सामान पर काउंटर-टैरिफ शामिल है। मंजूरी पर रोक: यूरोपीय सांसदों ने अमेरिका के साथ होने वाले नए ट्रेड एग्रीमेंट (0% टैरिफ डील) को 'होल्ड' पर डाल दिया है। 📊 ग्रीनलैंड विवाद: क्यों भिड़े हैं दुनिया के दो बड़े दोस्त? रणनीतिक कारण विवरण मिलिट्री बेस अमेरिका का 'थुले एयर बेस' यहाँ है, जो रूस पर नजर रखने के लिए फ्रंटलाइन है। खनिज संपदा यहाँ Rare Earth Elements के विशाल भंडार हैं, जिन पर अभी चीन का एकाधिकार है। शिपिंग रूट्स बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं, जो व्यापार के लिए बेहद अहम हैं। नाटो कानून नाटो का Article 5 कहता है कि एक सदस्य पर हमला सब पर हमला है। 4. 'ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री': अगला बड़ा नाटो मिशन यूरोपीय देश अब 'आर्कटिक सेंट्री' (Baltic Sentry की तर्ज पर) नाम से एक स्थायी मिशन बनाने पर विचार कर रहे हैं। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के मुताबिक, इसमें कई महीने लग सकते हैं, लेकिन इसका लक्ष्य ग्रीनलैंड के आसपास 24x7 सैन्य निगरानी रखना होगा ताकि कोई भी देश (सहित अमेरिका) वहां एकतरफा कार्रवाई न कर सके। 5. क्या ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं? कानूनी तौर पर यह नामुमकिन के करीब है: नाटो संधियाँ: एक नाटो देश दूसरे पर हमला नहीं कर सकता। स्वतंत्रता का नियम: 2009 के एक्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड के लोग खुद तय करेंगे कि उन्हें किसके साथ रहना है। जनमत संग्रह (Referendum) के बिना कोई बदलाव नहीं हो सकता। जनता का विरोध: नुउक और कोपेनहेगन की सड़कों पर "Hands Off Greenland" के पोस्टर लेकर हजारों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 19, 2026 0
दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला
ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

खामेनेई का 'खूनी प्लान': ईरान में नरसंहार के लिए बुलाए 5,000 इराकी लड़ाके; जब सेना ने अपनों पर गोली चलाने से किया इनकार, तब विदेशी मिलिशिया ने मचाई तबाही तेहरान/न्यूयॉर्क | 17 जनवरी 2026 ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जारी ऐतिहासिक विद्रोह को कुचलने के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। CNN और न्यूयॉर्क पोस्ट की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए इराक से 5,000 से अधिक कट्टरपंथी शिया लड़ाकों को तैनात किया है। यह खुलासा तब हुआ है जब ईरान की अपनी सेना और सुरक्षा बलों ने अपने ही नागरिकों पर सीधी गोलीबारी करने से मना कर दिया था। विदेशी लड़ाकों के इस 'नरसंहार' के बाद ईरान की सड़कों पर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। 1. खामेनेई की रणनीति: सेना के इनकार के बाद विदेशी 'भाड़े के सैनिक' रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनों के दूसरे हफ्ते में ईरानी सेना के भीतर असंतोष फैलने लगा था। कई सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। सहानुभूति का डर: खामेनेई को डर था कि स्थानीय पुलिस और सेना के जवान अपने ही भाई-बहनों और रिश्तेदारों के प्रति नरम पड़ सकते हैं। विदेशी लड़ाकों का चुनाव: इसीलिए जान-बूझकर ऐसे लड़ाकों को बुलाया गया जिनकी ईरान के लोगों के साथ कोई भाषाई या भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। ये लड़ाके अरबी भाषी हैं, जबकि ईरान की मुख्य भाषा फारसी है। इससे प्रदर्शनकारियों और लड़ाकों के बीच सहानुभूति पनपने की कोई गुंजाइश नहीं रही। 2. 'तीर्थयात्री' बनकर आईं मौत की बसें इन लड़ाकों को ईरान लाने के लिए एक बेहद गुप्त और शातिर तरीका अपनाया गया। धार्मिक कवर: 11 जनवरी को इराक-ईरान बॉर्डर पर 60 से ज्यादा बसों का काफिला देखा गया। इराकी गृह मंत्रालय के अधिकारी अली डी. के अनुसार, इन्हें 'तीर्थयात्री' बताया गया। पहचान: इन बसों में न तो महिलाएं थीं, न बच्चे और न ही बुजुर्ग। सभी लड़ाके जवान थे और उन्होंने एक जैसी काली टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्हें इराक के मायसान, वासित और दियाला प्रांतों के रास्ते ईरान में दाखिल कराया गया। संगठन: ये लड़ाके पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के तहत आने वाले कताइब हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा और बद्र संगठन जैसे कट्टरपंथी समूहों से जुड़े हैं, जिन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ही पैसा और हथियार देती है। 📊 ईरान नरसंहार: डेटा और जमीनी हकीकत श्रेणी विवरण और साक्ष्य कुल विदेशी लड़ाके 5,000+ (शुरुआती अनुमान 800 था)। मौतों का आंकड़ा अब तक लगभग 3,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। प्रमुख हथियार सड़कों पर तैनात लड़ाकों के पास भारी मशीनगन और ड्रोन हैं। वर्तमान स्थिति तेहरान और प्रमुख शहरों में 'कब्रिस्तान जैसी शांति'। सेंसरशिप 180 घंटे से अधिक का इंटरनेट ब्लैकआउट जारी। 3. सड़कों पर मशीनगन और ड्रोन का पहरा तेहरान के निवासियों ने जो दास्तां सुनाई है, वह किसी डरावनी फिल्म जैसी है। मशीनगन का खौफ: एक प्रत्यक्षदर्शी ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, "विदेशी लड़ाके अरबी में चिल्ला रहे थे और जो भी घर से बाहर दिख रहा था, उस पर सीधे फायर कर रहे थे। उन्होंने सरकारी इमारतों और चौराहों पर कब्जा कर लिया है।" ड्रोन निगरानी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 और 17 जनवरी को तेहरान के आसमान में लगातार निगरानी ड्रोन उड़ते देखे गए। इसी डर के कारण फिलहाल सड़कों पर प्रदर्शनकारी नजर नहीं आ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की चिंता: ओस्लो स्थित 'ईरान मानवाधिकार' (IHR) के महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने चेतावनी दी है कि यह 'शांति' केवल डर के कारण है, और विदेशी लड़ाकों की तैनाती अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। 4. इराक के ये लड़ाके ईरान के प्रति वफादार क्यों? ये मिलिशिया ग्रुप भले ही इराक के हैं, लेकिन इनका 'रिमोट कंट्रोल' तेहरान में है। ट्रेनिंग और फंडिंग: IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) इन समूहों को सालाना करोड़ों डॉलर की मदद और हथियारों की सप्लाई करती है। वफादारी: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन लड़ाकों की पहली निष्ठा इराक की सरकार के प्रति नहीं, बल्कि अयातुल्ला खामेनेई के प्रति है। यही कारण है कि वे खामेनेई की सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या
गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

बांग्लादेश: गाजीपुर में हिंदू कारोबारी की फावड़े से काटकर हत्या; कर्मचारी को बचाने आए लिटन घोष पर हमला; भारत ने जताई गहरी चिंता गाजीपुर (बांग्लादेश) | 17 जनवरी 2026 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार (17 जनवरी) को गाजीपुर जिले के कलिगंज में एक 55 वर्षीय हिंदू कारोबारी लिटन चंद्र घोष की पीट-पीटकर और फावड़े से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब लिटन अपनी दुकान में काम करने वाले एक नाबालिग हिंदू कर्मचारी को कट्टरपंथियों के हमले से बचाने की कोशिश कर रहे थे। 1. मामूली विवाद और मौत का तांडव घटना सुबह करीब 11 बजे कलिगंज नगरपालिका क्षेत्र के बरनगर रोड स्थित 'बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल' में हुई। विवाद की शुरुआत: मसूम मिया (28) नाम का युवक दुकान पर आया और 17 साल के कर्मचारी अनंत दास के साथ किसी मामूली बात पर उलझ गया। देखते ही देखते मसूम ने नाबालिग कर्मचारी को पीटना शुरू कर दिया। पूरा परिवार बना हमलावर: विवाद बढ़ा तो मसूम के पिता मोहम्मद स्वपन मिया (55) और मां मजीदा खातून (45) भी मौके पर पहुँच गए। बीच-बचाव की कीमत: दुकान मालिक लिटन चंद्र घोष ने जब अपने कर्मचारी अनंत को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर हमला बोल दिया। इसी दौरान लिटन के सिर पर फावड़े (Spade) से जोरदार वार किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 2. आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों को दबोचा हत्या की खबर मिलते ही स्थानीय हिंदू समुदाय और व्यापारियों में भारी गुस्सा फैल गया। नागरिक कार्रवाई: वहां मौजूद लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे तीनों आरोपियों (पिता, माता और बेटे) को चारों तरफ से घेरकर पकड़ लिया। पुलिस हिरासत: कलिगंज थाने के प्रभारी (OC) मोहम्मद जाकिर हुसैन ने बताया कि तीनों आरोपियों—स्वपन मिया, मजीदा खातून और मसूम मिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। 📊 बांग्लादेश में अल्पसंख्यक: बढ़ता खतरा और डेटा श्रेणी विवरण मृतक लिटन चंद्र घोष उर्फ काली (55 वर्ष), हिंदू कारोबारी। आरोपी मसूम मिया, स्वपन मिया और मजीदा खातून (एक ही परिवार के)। अल्पसंख्यक आबादी बांग्लादेश में अब हिंदू, सूफी और ईसाई 10% से भी कम बचे हैं। भारत का रुख "अल्पसंख्यकों पर हमलों का पैटर्न चिंताजनक" - विदेश मंत्रालय। चुनाव का साया फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा में 40% की वृद्धि। 3. भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: "सांप्रदायिक हिंसा का डरावना पैटर्न" भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया है। रणधीर जायसवाल (प्रवक्ता): उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का एक खतरनाक पैटर्न देख रहे हैं। कट्टरपंथ का बचाव: भारत ने चिंता जताई कि कई बार इन हमलों को 'निजी रंजिश' का नाम देकर दबा दिया जाता है, जिससे कट्टरपंथियों को और बल मिलता है। भारत ने मांग की है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इन घटनाओं से सख्ती से निपटे। 4. सत्तापलट के बाद सुलगता बांग्लादेश 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में इस्लामी संगठनों (जैसे हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी) की सक्रियता बढ़ गई है। असुरक्षा का माहौल: 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के अनुसार, अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों को निशाना बनाना अब आम बात हो गई है। यूनुस सरकार का दावा: हालांकि, अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत के दावों को यह कहकर खारिज किया है कि ये खबरें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं, लेकिन लिटन घोष जैसी घटनाएं जमीनी हकीकत को बयां कर रही हैं।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी
ट्रम्प की चेतावनी के बाद झुका ईरान, रुकी 800 लोगों की फांसी; अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध।

ईरान पर UNSC की आपात बैठक: अमेरिका की 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी; ट्रम्प के खौफ से 800 की फांसी रुकी; 180 घंटे से देश में 'डिजिटल ब्लैकआउट' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गुरुवार (15 जनवरी 2026) को ईरान संकट पर हुई आपात बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नरसंहार रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके पास 'सभी विकल्प' खुले हैं। 1. माइक वाल्ट्ज का अल्टीमेटम: "ट्रम्प एक्शन वाले इंसान हैं" UNSC में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान के शासन को आईना दिखाते हुए कहा कि दुनिया अब और खामोश नहीं रहेगी। बहादुरी को सलाम: वाल्ट्ज ने उन ईरानी प्रदर्शनकारियों की सराहना की जो गोलियों के सामने खड़े होकर आजादी मांग रहे हैं। सीधी चेतावनी: उन्होंने कहा कि ट्रम्प केवल बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं। ईरान को समझ लेना चाहिए कि अगर क्रूरता नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस का दावा: प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पुष्टि की कि ट्रम्प के सीधे दबाव के कारण ही ईरान ने अंतिम समय में 800 कैदियों की फांसी टाल दी है। 2. ईरान का पलटवार: "टकराव नहीं, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे" ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को 'झूठा' और 'दुष्प्रचार' बताया। इल्जाम: ईरान का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं जो अशांति फैलाकर 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना चाहती हैं। जवाबी हमला: दर्जी ने कहा कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 📊 ईरान संकट: UNSC की बैठक के मुख्य बिंदु और डेटा श्रेणी विवरण और आंकड़े मौत का तांडव मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए। गिरफ्तारियां अब तक 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद। नए प्रतिबंध अमेरिका ने अली लारीजानी समेत 18 व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया। डिजिटल ब्लैकआउट 8 जनवरी से अब तक 180+ घंटे से इंटरनेट बंद (कनेक्टिविटी महज 1%)। वैश्विक रुख अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस (निंदा) बनाम रूस, चीन (हस्तक्षेप का विरोध)। 3. रूस और पश्चिमी देशों के बीच 'कोल्ड वॉर' सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर दुनिया दो धड़ों में बंट गई है: रूस की आपत्ति: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आक्रामकता को सही ठहराने के लिए UNSC का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट खून-खराबे में डूब जाएगा। यूरोपीय देशों का रुख: ब्रिटेन और फ्रांस ने ईरान की कार्रवाई को "क्रूर दमन" बताया और तेहरान पर नए कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया। 4. 180 घंटे का सन्नाटा: ईरान में 'डिजिटल दीवार' ईरान में इंटरनेट की स्थिति को 'डिजिटल ब्लैकआउट' घोषित किया गया है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 9 करोड़ की आबादी को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उद्देश्य: सरकार नहीं चाहती कि सुरक्षा बलों की बर्बरता के वीडियो दुनिया तक पहुँचें। प्रभाव: बैंकिंग सेवाएं, फोन लाइनें और सोशल मीडिया पूरी तरह ठप हैं। यह ईरान के इतिहास की सबसे लंबी सेंसरशिप है। 5. क्यों सुलग रहा है ईरान? (प्रमुख कारण) आर्थिक पतन: रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है ($1 = ~14.5 लाख रियाल)। महंगाई की मार: चाय और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों पर 70% तक महंगाई बढ़ गई है। सत्ता के खिलाफ गुस्सा: प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का इस्तीफा और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ट्रम्प पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत 75 देशों के लिए वीजा सर्विस रोकेंगे
अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा रोका; पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सूची में शामिल।

अमेरिका का 'वीजा बैन' (2026): 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेस पर रोक; पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत भारत के 6 पड़ोसी देश शामिल ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका के इमिग्रेशन इतिहास का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए 21 जनवरी 2026 से दुनिया के 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा (स्थायी निवास) की प्रक्रिया को पूरी तरह से रोकने का ऐलान किया है। इस सूची में भारत के पड़ोसी देश—पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। यह फैसला अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) के एक गुप्त मेमो के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका आने वाले विदेशियों की संख्या में भारी कटौती करना और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले 'वेलफेयर' के बोझ को कम करना है। 1. 'पब्लिक चार्ज' का डर: क्यों रोका गया वीजा? अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन लोगों को रोकने का फैसला किया है, जो अमेरिका आकर सरकारी मदद या वेलफेयर योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं। तर्क: ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि जो लोग खुद का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, वे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे का अनुचित लाभ उठाते हैं। सत्यापन प्रक्रिया: दूतावासों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक आवेदकों की वित्तीय स्थिति और सत्यापन की प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक वीजा आवेदन खारिज किए जाएं। सोशल मीडिया जांच: ट्रम्प प्रशासन अब सभी वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी गहन जांच करेगा ताकि उनकी विचारधारा और गतिविधियों का पता लगाया जा सके। 2. बैन वाले देशों की सूची (एशिया और पड़ोसी देश) एशिया के 22 देशों पर इस कड़े कानून का असर पड़ा है। विशेष रूप से भारत के आसपास के देशों की स्थिति चिंताजनक है: भारत के पड़ोसी: पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार (बर्मा) और अफगानिस्तान। मध्य पूर्व और अन्य: ईरान, इराक, सीरिया, यमन, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और थाईलैंड। 📊 बैन का दायरा और प्रभाव प्रभावित वर्ग स्थिति इमिग्रेंट वीजा (Green Card) पूरी तरह से निलंबित (Suspended); नई समीक्षा होने तक कोई प्रोसेस नहीं। टूरिस्ट/बिजनेस वीजा फिलहाल इस फैसले से बाहर, लेकिन जांच और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सोशल मीडिया ऑडिट अनिवार्य; अब आपकी पोस्ट्स तय करेंगी कि आपको वीजा मिलेगा या नहीं। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 दर्शक आ सकेंगे, लेकिन सख्त सुरक्षा स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन के बाद। 3. ट्रम्प की 'यूरोपीय प्राथमिकता' और डिपोर्टेशन का आंकड़ा राष्ट्रपति ट्रम्प का विजन स्पष्ट है—वे गैर-यूरोपीय देशों से होने वाले इमिग्रेशन को सीमित करना चाहते हैं। बयानबाजी: ट्रम्प ने सोमालिया जैसे देशों के बजाय नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क जैसे स्कैंडिनेवियाई देशों के लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही है। रिकॉर्ड रद्दीकरण: ट्रम्प की वापसी के बाद से अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए जा चुके हैं। महा-डिपोर्टेशन: पिछले एक महीने में 6 लाख से ज्यादा लोगों को जबरन निकाला गया है, जबकि 25 लाख लोग डर के कारण खुद अमेरिका छोड़कर चले गए हैं। 4. घटना जिसने आग में घी का काम किया नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के पास हुई एक गोलीबारी की घटना, जिसमें एक अफगान नागरिक शामिल था, ने ट्रम्प प्रशासन को 'थर्ड वर्ल्ड' देशों के खिलाफ सख्त होने का बड़ा मौका दे दिया। इसके बाद से ही इमिग्रेशन को स्थायी रूप से रोकने की मांग तेज हो गई थी।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी वॉरशिप
ट्रम्प का ईरान पर 'साउदर्न स्पीयर' जैसा हमला? दक्षिण चीन सागर से रवाना हुआ अमेरिकी नौसेना का सबसे ताकतवर बेड़ा।

ईरान की घेराबंदी: दक्षिण चीन सागर से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हुआ अमेरिकी 'सुपरकैरियर' USS अब्राहम लिंकन; क्या वेनेजुएला की तर्ज पर होगा हमला? ईरान में 19 दिनों से जारी ऐतिहासिक जन-विद्रोह के बीच अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य चाल चल दी है। अमेरिकी नौसेना का घातक परमाणु-शक्ति संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अपने पूरे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' के साथ दक्षिण चीन सागर को छोड़कर मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो चुका है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया था और क्षेत्र में तनाव चरम पर है। 1. USS अब्राहम लिंकन: समुद्र पर तैरता एक अभेद्य किला USS अब्राहम लिंकन केवल एक जहाज नहीं, बल्कि एक पूरी सैन्य शक्ति है। इसके मिडिल ईस्ट पहुँचने का मतलब है कि अमेरिका किसी भी समय बड़े स्तर पर 'ऑपरेशन' शुरू कर सकता है। न्यूक्लियर पावर: यह जहाज परमाणु ऊर्जा से चलता है, जिसका मतलब है कि इसे ईंधन के लिए बार-बार रुकने की जरूरत नहीं है। कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (CSG-3): लिंकन अकेला नहीं आ रहा है। इसके साथ 3-6 गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (जो मिसाइल डिफेंस में माहिर हैं), 1-2 न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बियां (जो टॉमहॉक मिसाइलों से लैस हैं) और लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज भी शामिल हैं। हवाई ताकत: इस पर 65 से 70 घातक विमान तैनात हैं, जिनमें F-35C लाइटनिंग II और F/A-18 सुपर हॉर्नेट शामिल हैं। 2. वेनेजुएला मॉडल: क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? विशेषज्ञ इस तैनाती की तुलना हाल ही में हुए 'ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर' (वेनेजुएला) से कर रहे हैं। पैटर्न: अगस्त 2025 में भी ट्रम्प ने इसी तरह USS गेराल्ड आर. फोर्ड को वेनेजुएला के तट पर तैनात किया था। परिणाम: जनवरी 2026 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने अचानक छापेमारी कर राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ लिया और सत्ता पलट दी। ईरान का डर: जिस तरह वेनेजुएला में 'घेराबंदी' के बाद सर्जिकल स्ट्राइक हुई, ईरान को डर है कि लिंकन की मौजूदगी तेहरान के लिए अंत की शुरुआत हो सकती है। 📊 सैन्य तुलना: अमेरिका बनाम ईरान शक्ति का पैमाना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ईरान (Islamic Republic) सैन्य बजट/रैंक दुनिया में नंबर 1 दुनिया में 16वां विमान (Airpower) 13,000+ (F-35, B-2 शामिल) ~500 (ज्यादातर पुराने रूसी/चीनी) नौसैनिक बेड़ा 11 सुपरकैरियर, 60+ पनडुब्बियां छोटी पनडुब्बियां, गश्ती नावें मुख्य ताकत ग्लोबल स्ट्राइक, सैटेलाइट इंटेलिजेंस मिसाइल आर्सेनल (2000 किमी रेंज), ड्रोन रणनीतिक हथियार टॉमहॉक, न्यूक्लियर सबमरीन हॉर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक करने की क्षमता 3. 'पोश्चर चेंज': कतर बेस से कर्मचारियों की निकासी अमेरिकी अधिकारियों ने कतर के अल उदैद एयर बेस (मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा बेस) से कुछ गैर-जरूरी कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है। उद्देश्य: इसे आधिकारिक तौर पर 'पोश्चर चेंज' कहा जा रहा है, लेकिन इसका असली मकसद संभावित ईरानी मिसाइल हमले की स्थिति में अमेरिकी हताहतों की संख्या को कम करना है। विशेषज्ञों की राय: B-2 बॉम्बर या लंबी दूरी की मिसाइलों के बजाय पूरे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' को बुलाने का मतलब है कि अमेरिका केवल एक "हिट एंड रन" हमला नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की तैयारी कर रहा है। 4. ईरान में गृहयुद्ध और 'नो फ्लाई जोन' ईरान के भीतर 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शन अब अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता को हिला रहे हैं। आर्थिक पतन: रियाल की कीमत शून्य के बराबर पहुँच चुकी है ($1 = 14.5 लाख रियाल)। हवाई क्षेत्र पर पाबंदी: ईरान ने कुछ घंटों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया, जिससे एयर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। अब भारतीय विमान ईरान को छोड़कर दूसरे रास्तों से जा रहे हैं। दमन: सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक 2,000 से 12,000 मौतों का दावा किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का दबाव बढ़ गया है।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा
ईरानी विदेश मंत्री बोले- फांसी की कोई योजना नहीं; भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी।

ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रम्प की 'भयानक' चेतावनी के आगे झुका तेहरान; प्रदर्शनकारियों की फांसी पर लगी रोक, अयातुल्ला शासन में बड़ी दरार ईरान में जारी गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सीधी सैन्य कार्रवाई और "भयानक परिणाम" भुगतने की धमकी के बाद ईरान सरकार बैकफुट पर आ गई है। तेहरान ने 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी सहित अन्य कैदियों को फांसी देने के अपने फैसले को फिलहाल टाल दिया है। 1. ट्रम्प का 'अल्टीमेटम' और ईरान का यू-टर्न बुधवार (14 जनवरी 2026) को दुनिया ने देखा कि कैसे एक 'ट्वीट' और सख्त चेतावनी ने फांसी के फंदे को रोक दिया। ट्रम्प की धमकी: राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट कहा था, "अगर ईरान ने फांसी देना जारी रखा, तो आप कुछ ऐसा देखेंगे जो पहले कभी नहीं देखा (भयानक)।" * ईरान का जवाब: धमकी के कुछ ही घंटों बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने 'फॉक्स न्यूज' पर आकर सफाई दी कि "फांसी देने की हमारी कोई योजना नहीं है।" सुलतानी की जान बची: इरफान सुल्तानी, जिन्हें 'ईश्वर के खिलाफ युद्ध' (मोहरेबेह) के आरोप में आज फांसी दी जानी थी, उनकी सजा फिलहाल रोक दी गई है। 2. ईरान की जवाबी धमकी: "इस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी" हालाँकि ईरान फांसी से पीछे हट गया है, लेकिन उसने अमेरिका को सीधी जान से मारने की धमकी दी है। प्रोपेगैंडा वीडियो: ईरान के सरकारी टीवी पर पर्शियन भाषा में एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें 2024 के बटलर (पेंसिल्वेनिया) हमले की फुटेज दिखाई गई और संदेश दिया गया कि "इस बार ट्रम्प का बचना नामुमकिन है।" ट्रम्प का रुख: ट्रम्प ने इस धमकी को नजरअंदाज करते हुए निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी जनता पहलवी को नेता चुनती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। 📊 ईरान संकट: अब तक के ताज़ा आंकड़े और प्रभाव श्रेणी ताज़ा रिपोर्ट और डेटा मौत का आंकड़ा 3,428 (NGO दावा) से 12,000 (ईरान इंटरनेशनल) तक। गिरफ्तारियां 10,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी जेलों में बंद। आर्थिक स्थिति महंगाई 70% पार; रियाल की वैल्यू मिट्टी के बराबर। हवाई क्षेत्र बुधवार को 2 घंटे के लिए 'नो फ्लाई जोन' घोषित। भारतीय नागरिक 10,000+ भारतीय फंसे; सरकार ने देश छोड़ने को कहा। 3. 'नो फ्लाई जोन' और भारत की एडवायजरी ईरान और अमेरिका के बीच मिसाइल युद्ध की आशंका ने वैश्विक हवाई यातायात को अस्त-व्यस्त कर दिया है। एयरलाइंस पर असर: ईरान ने बुधवार को अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे इंडिगो, एयर इंडिया और लुफ्थांसा जैसी कंपनियों की उड़ानों में देरी हुई। एयर इंडिया अब ईरानी क्षेत्र को छोड़कर दूसरे लंबे रास्तों का उपयोग कर रही है। भारत की चेतावनी: विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एडवायजरी जारी कर सभी भारतीयों (छात्र, व्यापारी, पर्यटक) को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कड़ी बात की है। 4. विद्रोह की जड़: क्यों जल रहा है ईरान? यह प्रदर्शन 1979 की क्रांति के बाद का सबसे बड़ा विद्रोह है: आर्थिक बदहाली: ब्रेड और चाय जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। व्यापारियों की हड़ताल ने अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया है। सत्ता परिवर्तन की मांग: अयातुल्ला खामेनेई के 37 साल के शासन के खिलाफ युवा सड़कों पर हैं। वे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। दमन: सुरक्षा बलों द्वारा सरेआम की जा रही गोलीबारी ने गुस्से को और भड़का दिया है।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत
Thailand Train Accident: थाईलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 की मौत, 67 घायल; छात्रों से भरी थी ट्रेन।

थाईलैंड ट्रेन हादसा: 65 फीट ऊंचाई से पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 लोगों की मौत, 67 घायल; ट्रेन में सवार थे 195 छात्र थाईलैंड के नाखोन राचासिमा प्रांत में बुधवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना हुई। एक निर्माणाधीन रेल ब्रिज पर काम कर रही विशालकाय क्रेन अचानक 65 फीट की ऊंचाई से तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन पर गिर गई। इस जघन्य हादसे में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और 67 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। 1. कैसे हुआ हादसा? (घटनाक्रम) समय और स्थान: यह दुर्घटना बुधवार को नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी की ओर जा रही थी। तेज रफ्तार: हादसे के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। अचानक प्रहार: रेल ब्रिज के निर्माण में लगी क्रेन अचानक ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिर गई। क्रेन का वजन और ऊंचाई इतनी अधिक थी कि ट्रेन का एक डिब्बा दो हिस्सों में कट गया। आग और विस्फोट: स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्रेन गिरने के बाद दो जोरदार धमाके हुए और डिब्बों में भीषण आग लग गई। 2. हताहतों का विवरण: डिब्बों में फंसे थे छात्र ट्रेन में कुल 195 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्कूल के छात्र थे। मौत: अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव दल ने मलबे से शव निकालने का काम जारी रखा है। घायल: 67 घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। ड्राइवर की स्थिति: क्रेन इतनी अचानक गिरी कि ड्राइवर को आपातकालीन ब्रेक लगाने का भी मौका नहीं मिला। 📸 हादसे की भयावहता: मुख्य बिंदु विवरण प्रभाव क्रेन की ऊंचाई 65 फीट से सीधी टक्कर। ट्रेन की गति 120 किमी/घंटा। नुकसान ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे, दो हिस्सों में कटे और आग लगी। रेस्क्यू ऑपरेशन कटर मशीनों से डिब्बे काटकर यात्रियों को निकाला गया। 3. जांच और लापरवाही के सवाल रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच की जा रही है: सुरक्षा नियमों का उल्लंघन: क्या ब्रिज निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? तकनीकी विफलता: क्या क्रेन में कोई यांत्रिक खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है?

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी
eT Terrorist Abu Musa Threatens Hindus: 'गर्दन काटने' की धमकी; पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड अबू मूसा PoK में सक्रिय।

लश्कर आतंकी अबू मूसा की 'गर्दन काटने' की धमकी: PoK में उगल रहा जहर; पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड और पाकिस्तानी नेताओं पर भी हमला आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के ऑपरेटिंग कमांडर अबू मूसा कश्मीरी का एक बेहद भड़काऊ वीडियो सामने आया है, जिसमें वह खुलेआम हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और कश्मीर में 'जिहाद' की बात कर रहा है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में दिए गए इस भाषण में मूसा ने न केवल भारत को धमकी दी, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व को भी 'इस्लाम विरोधी' करार देकर अपनी ही सरकार को चुनौती दी है। 1. अबू मूसा की धमकी: "भीख से नहीं, गर्दन काटने से मिलेगी आजादी" लश्कर से जुड़े संगठन 'जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट' (JKUM) के सदस्य अबू मूसा ने अपने संबोधन में कट्टरपंथ और हिंसा का खुला समर्थन किया। हिंसा का आह्वान: मूसा ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का हल केवल 'जिहाद' में है। उसने भड़काऊ बयान देते हुए कहा कि आजादी भीख मांगने से नहीं, बल्कि हिंदुओं की गर्दन काटने से मिलेगी। इजराइल-गाजा से तुलना: उसने कश्मीर की स्थिति की तुलना गाजा और फिलिस्तीन से की। मूसा का दावा है कि जिस तरह हमास ने इजराइल को चुनौती दी, वैसा ही कश्मीर में भी किया जाएगा। उसने कहा, "जब इजराइल को घुटने पर ले आए, तो कश्मीर में भी करेंगे।" 2. पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड: कौन है अबू मूसा? अबू मूसा केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, वह भारतीय सुरक्षा बलों की हिटलिस्ट में शामिल एक खतरनाक आतंकी हैंडलर है। 22 अप्रैल 2025 का हमला: पिछले साल पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले का मास्टरमाइंड अबू मूसा को ही माना जाता है। पाकिस्तानी हैंडलर: जांच में सामने आया था कि PoK से दो हैंडलर—अबू मूसा और रिजवान हनीफ—आतंकियों को निर्देश दे रहे थे। आतंकी ट्रेनिंग: मूसा ने ही पाकिस्तान के मुरीदके में अफगान लड़ाकों को कश्मीर में घुसपैठ और हमले के लिए विशेष ट्रेनिंग दी थी। वह लश्कर के खूंखार आतंकी सैफुल्लाह कसूरी का बेहद करीबी माना जाता है। 📊 लश्कर की आतंकी प्रोफाइल: अबू मूसा और उसकी गतिविधियां श्रेणी विवरण और जानकारी नाम अबू मूसा कश्मीरी संगठन लश्कर-ए-तैयबा / जम्मू कश्मीर यूनाइटेड मूवमेंट (JKUM) प्रमुख अपराध पहलगाम हमला (अप्रैल 2025), मुरीदके में ट्रेनिंग कैंप का संचालन। विचारधारा गाजा-फिलिस्तीन की तर्ज पर कश्मीर में 'जिहाद' का समर्थक। वर्तमान स्थिति पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सक्रिय, घुसपैठ का मास्टरमाइंड। 3. 'पालतू सांप' अब पाकिस्तान को ही डसने लगे! हैरानी की बात यह है कि ये आतंकी अब अपने ही आकाओं (पाकिस्तान सरकार और सेना) पर सवाल उठा रहे हैं। पाकिस्तानी नेताओं को चुनौती: मूसा ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान के नेता इस्लामी सिद्धांतों से भटक गए हैं। उसने कहा कि जो नेता जिहाद के लिए प्रतिबद्ध नहीं है, उसे हुकूमत करने का हक नहीं है। उसने मुजफ्फराबाद में पाक पीएम शहबाज शरीफ के सामने भी यह बात कहने का दावा किया। अशफाक राणा का तंज: लश्कर के एक अन्य कमांडर अशफाक राणा ने सीधे जनरल आसिम मुनीर को निशाने पर लिया। उसने कहा कि IMF से मिला कर्ज अधिकारियों ने बर्बाद किया। यदि यह पैसा सही जगह लगता, तो पाकिस्तान आज ब्रिटेन या स्पेन से ज्यादा विकसित होता। उसने दावा किया कि पाकिस्तान में पैदा होने वाला हर बच्चा कर्ज के बोझ के साथ जन्म ले रहा है। 4. भारतीय सुरक्षा बलों का कड़ा रुख आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि सीमा पार 8 आतंकी कैंप अभी भी सक्रिय हैं। ऑपरेशन सिंदूर: भारतीय सेना 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत सीमा पार आतंकी ढांचे को नष्ट कर रही है। हाई अलर्ट: अबू मूसा जैसे आतंकियों के भड़काऊ वीडियो सामने आने के बाद कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जा सके।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जे से कम कुछ मंजूर नहीं
क्या ग्रीनलैंड बनेगा अमेरिका का 51वां राज्य? NATO टूटने का खतरा; डेनमार्क की चेतावनी।

ट्रम्प का 'ग्रीनलैंड मिशन': 51वें राज्य की तैयारी और NATO टूटने की चेतावनी; जानें क्यों इस बर्फीले द्वीप पर छिड़ा है 'वर्ल्ड वॉर' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की अपनी जिद दोहराई है। ट्रम्प ने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा बताते हुए साफ कर दिया है कि उन्हें "कब्जे से कम कुछ भी मंजूर नहीं" है। इस बयान ने न केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को नाराज कर दिया है, बल्कि NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। 1. ट्रम्प की 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट: "NATO को साथ देना होगा" बुधवार (14 जनवरी 2026) को ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा और 'गोल्डन डोम' (नया मिसाइल डिफेंस सिस्टम) के लिए ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है। रूस-चीन का डर: ट्रम्प का दावा है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे। NATO को चेतावनी: ट्रम्प ने कहा कि NATO को इस मिशन में अमेरिका का साथ देना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की सैन्य ताकत के बिना NATO का कोई अस्तित्व नहीं है। 2. 'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट' (2026) 12 जनवरी 2026 को अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन ने संसद में एक ऐतिहासिक बिल पेश किया, जिसका नाम है—'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट'। लक्ष्य: ग्रीनलैंड को डेनमार्क से अलग कर अमेरिका का 51वां राज्य बनाना। शक्ति: यह बिल राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने के लिए "जरूरी कदम" उठाने का कानूनी अधिकार देता है। प्रस्ताव: रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ग्रीनलैंड के नागरिकों को अमेरिका में शामिल होने के बदले $10,000 से $100,000 (करीब 84 लाख रुपये) तक देने की योजना पर विचार कर रहा है। 3. ग्रीनलैंड और डेनमार्क का पलटवार: "हम बिकाऊ नहीं हैं" ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन (34) ने ट्रम्प के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। नीलसन का बयान: "अगर हमें डेनमार्क और अमेरिका में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो हम डेनमार्क को चुनेंगे। हम कोई सामान नहीं हैं जिसे खरीदा जा सके।" डेनमार्क की चेतावनी: पीएम मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी जबरदस्ती की कार्रवाई NATO के अंत की शुरुआत होगी। डेनमार्क ने अपनी सेना को 'शूट फर्स्ट' (पहले गोली चलाओ) के आदेश दिए हैं। 📊 ग्रीनलैंड का गणित: क्यों है यह इतना खास? विशेषता विवरण क्षेत्रफल 21.6 लाख वर्ग किमी (दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप) आबादी मात्र 57,000 लोग खनिज भंडार दुर्लभ पृथ्वी धातु (Rare Earth Elements), यूरेनियम, तांबा और तेल (लगभग 28 अरब बैरल)। रणनीतिक स्थान उत्तरी ध्रुव (Arctic) के पास, जहाँ से रूस और यूरोप पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिकी बेस पिटुफिक स्पेस बेस (Thule): यहाँ अमेरिका का अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम लगा है। 4. सैन्य कार्रवाई का 'प्लान' और आंतरिक विरोध मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे डेली मेल) के अनुसार, ट्रम्प ने JSOC (जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड) को ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्लान बनाने को कहा है। सेना का रुख: अमेरिकी सैन्य अधिकारी इस विचार का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक मित्र देश (डेनमार्क) पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। मिड-टर्म इलेक्शन: विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प इस मुद्दे का इस्तेमाल घरेलू राजनीति में ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं ताकि आगामी चुनावों में वोट हासिल किए जा सकें। 5. क्या NATO टूट जाएगा? डेनमार्क 1949 से NATO का सदस्य है। NATO की धारा 5 के अनुसार, किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो तकनीकी रूप से अमेरिका एक NATO सहयोगी पर हमला करेगा। इससे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश अमेरिका के खिलाफ खड़े हो सकते हैं, जिससे 76 साल पुराना यह रक्षा संगठन बिखर सकता है।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज
क्या रद्द होंगे ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ? भारत और चीन की नजर; IEEPA कानून का सच।

ट्रम्प के 'टैरिफ राज' पर सुप्रीम कोर्ट का महाफैसला आज: राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों या संसद के अधिकार की होगी जीत? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज यानी बुधवार (14 जनवरी 2026) को एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाला है, जो न केवल अमेरिका बल्कि भारत, चीन और यूरोप सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर आधारित है। ट्रम्प ने खुद चेतावनी दी है कि यदि फैसला उनके खिलाफ आया, तो अमेरिका के लिए "WE'RE SCREWED" (हमारी शामत आ जाएगी), क्योंकि सरकार को अरबों डॉलर रिफंड करने होंगे। 1. विवाद की जड़: क्या राष्ट्रपति 'सुपर-पावर' है? अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया भर से आने वाले सामानों पर भारी आयात शुल्क (Tariff) लगा दिया था। ट्रम्प का तर्क: इन टैरिफ से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से ज्यादा का राजस्व मिला। यह पैसा अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करता है और विदेशी निर्भरता कम करता है। विरोधियों का तर्क: 12 राज्यों और दर्जनों कंपनियों ने अदालत में कहा कि टैरिफ लगाना दरअसल 'टैक्स' वसूलना है। अमेरिकी संविधान के अनुसार, टैक्स लगाने का अधिकार केवल संसद (Congress) के पास है। राष्ट्रपति ने अपनी सीमा लांघी है। 2. 49 साल पुराना कानून: IEEPA (1977) का 'अनोखा' इस्तेमाल ट्रम्प ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लिया। इतिहास: 1977 में बना यह कानून राष्ट्रपति को युद्ध या असाधारण संकट के समय विदेशी संपत्ति फ्रीज करने की शक्ति देता है। विवाद: ट्रम्प पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने इसका उपयोग 'टैरिफ' लगाने के लिए किया। उन्होंने "व्यापार घाटे" (Trade Deficit) और "नशीली दवाओं की तस्करी" को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। कोर्ट का सवाल: क्या व्यापारिक घाटा सच में ऐसी इमरजेंसी है जिसके लिए संसद को बाईपास किया जा सके? 📊 फैसले के दो संभावित परिणाम और उनका असर यदि फैसला ट्रम्प के पक्ष में आया यदि फैसला ट्रम्प के खिलाफ आया टैरिफ जारी रहेंगे: अमेरिकी खजाने में अरबों डॉलर का प्रवाह जारी रहेगा। टैरिफ रद्द होंगे: अमेरिका को कंपनियों का पैसा (करीब $150-$195 बिलियन) लौटाना होगा। राष्ट्रपति की शक्ति बढ़ेगी: भविष्य के राष्ट्रपति भी बिना संसद के वैश्विक व्यापार बदल सकेंगे। संसद की शक्ति बहाल: कोर्ट यह स्पष्ट करेगा कि केवल कांग्रेस ही टैक्स/टैरिफ तय कर सकती है। व्यापार युद्ध: चीन और यूरोप भी अमेरिका पर जवाबी टैक्स लगाकर तनाव बढ़ाएंगे। ग्लोबल मार्केट में तेजी: भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को भारी राहत मिलेगी। महंगाई: अमेरिका में आयातित सामान महंगे रहेंगे, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा। कीमतें घटेंगी: अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक सामान और रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं। 3. भारत पर असर: 50% टैरिफ का 'चक्रव्यूह' भारत इस फैसले का सबसे ज्यादा इंतजार कर रहा है क्योंकि भारतीय निर्यातक इस समय सबसे भारी बोझ तले दबे हैं: 25% जनरल टैरिफ: सभी भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया। 25% पेनल्टी टैरिफ: भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अगस्त 2025 में लगाया गया था। ताज़ा स्थिति: ट्रम्प ने हाल ही में ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी 25% एक्स्ट्रा टैरिफ की धमकी दी है। भारत का कहना है कि वह केवल मानवीय आधार पर (दवा/भोजन) ही ईरान से व्यापार कर रहा है, जो प्रतिबंधों के बाहर है। 4. निचली अदालतों का रुख और सुप्रीम कोर्ट की 'चिंता' निचली अदालतों (Federal Circuit Courts) ने पहले ही इन टैरिफ को 'गैर-कानूनी' करार दिया था। नवंबर 2025 में हुई मौखिक बहस के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के 6-3 बहुमत वाले रूढ़िवादी जजों ने भी ट्रम्प प्रशासन की दलीलों पर "गहरी चिंता" व्यक्त की थी। जजों का मानना है कि टैरिफ लगाने की बेलगाम शक्ति राष्ट्रपति को देना खतरनाक हो सकता है। 💡 क्या होगा अगर ट्रम्प हार गए? (बैकअप प्लान) व्हाइट हाउस के अधिकारियों (जैसे केविन हैसेट) ने संकेत दिया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला खिलाफ आता है, तो वे Section 232 या अन्य व्यापार कानूनों के तहत टैरिफ को 'तुरंत' फिर से लागू करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, रिफंड का मुद्दा (करीब ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा) अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए "बड़ा सिरदर्द" साबित होगा।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
ईरान में हालात बिगड़े, भारतीयों को तुरंत निकलने की सलाह
भारतीयों को तुरंत देश छोड़ने के आदेश; इरफान सुल्तानी को फांसी आज; ट्रम्प ने दी 25% टैरिफ की धमकी।

ईरान में 'डेथ वॉर': भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी, नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने का आदेश; प्रदर्शनकारी सुल्तानी को आज दी जाएगी फांसी ईरान में 18 दिनों से जारी सरकार विरोधी विद्रोह अब एक खौफनाक मोड़ पर पहुँच गया है। स्थिति की गंभीरता और किसी भी समय अमेरिकी हमले की आशंका को देखते हुए भारत सरकार ने बुधवार को एक आपातकालीन एडवायजरी जारी कर सभी भारतीयों को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है। दूसरी ओर, तेहरान यूनिवर्सिटी में आज सैंकड़ों शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार होना है, जबकि 26 साल के एक प्रदर्शनकारी की फांसी की खबर ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। 1. भारत सरकार की सख्त एडवायजरी: "तुरंत निकलें भारतीय" ईरान में बिगड़ते सुरक्षा हालातों के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने बुधवार (14 जनवरी 2026) को नई चेतावनी जारी की है। किसके लिए: छात्र, तीर्थयात्री, व्यापारी और पर्यटक—सभी भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान से निकलने को कहा गया है। सावधानी: जो लोग अभी नहीं निकल पा रहे, उन्हें भीड़भाड़ और विरोध स्थलों से दूर रहने की सलाह दी गई है। संपर्क: भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और स्थानीय मीडिया पर नजर रखने को कहा है। कश्मीरी परिवारों में खौफ: ईरान में करीब 2000 कश्मीरी छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। इंटरनेट बंद होने के कारण घाटी में उनके माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरे सदमे में हैं। 2. इरफान सुल्तानी की फांसी: 'ईश्वर के खिलाफ जंग' का आरोप ईरान सरकार ने विद्रोह को कुचलने के लिए फास्ट-ट्रैक फांसी का रास्ता अपनाया है। पहला शिकार: 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी को आज फांसी दी जा सकती है। 8 जनवरी को पकड़े गए सुल्तानी को मात्र 3 दिन में मौत की सजा सुना दी गई। क्या है आरोप: उन पर 'मोहरेबेह' (भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना) का आरोप है। सुल्तानी को न वकील मिला, न अपील का मौका। परिवार को अंतिम विदाई के लिए केवल 10 मिनट दिए गए। मकसद: मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह फांसी जनता में डर पैदा करने के लिए दी जा रही है ताकि 10 हजार से ज्यादा गिरफ्तार प्रदर्शनकारी चुप हो जाएं। 📊 ईरान गृहयुद्ध: मौत और तबाही का खौफनाक मंजर श्रेणी ताज़ा आंकड़े (विभिन्न स्रोतों से) कुल मौतें (दावा) 12,000 (ईरान इंटरनेशनल के अनुसार) पुष्ट मौतें 2,550+ (ह्यूमन राइट्स एजेंसी के अनुसार) सुरक्षा बल ढेर 147 सैनिक और पुलिसकर्मी मारे गए हिंसा का दायरा ईरान के सभी 31 प्रांतों में 600+ प्रदर्शन करेंसी का हाल रियाल की कीमत शून्य के करीब (₹1 = 12,658 रियाल) 3. ट्रम्प की 'आर्थिक और सैन्य' बिसात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान की घेराबंदी करने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई है: 25% टैरिफ: ट्रम्प ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों (चीन, यूएई और भारत) पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। सरकारी इमारतों पर कब्जा: ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों को सलाह दी है कि वे सरकारी संस्थानों पर कब्जा कर लें और हत्यारों के नाम नोट कर लें। सीक्रेट मीटिंग: ट्रम्प के प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ने निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी से गुपचुप मुलाकात की है, जिसे ईरान में तख्तापलट की तैयारी माना जा रहा है। 4. खाड़ी देशों की शांति की कोशिशें सऊदी अरब, कतर और ओमान इस समय सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा: इन देशों को डर है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, तो पूरा मिडिल ईस्ट आग की चपेट में आ जाएगा, जिसका असर तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। डिप्लोमेसी: ये देश ट्रम्प और ईरानी अधिकारियों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं ताकि सैन्य टकराव को टाला जा सके।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
अमेरिका में ईरान विरोधी रैली में ट्रक घुसा
लॉस एंजिलिस में प्रदर्शनकारियों पर ट्रक हमला; ट्रम्प की सैन्य हमले की चेतावनी; खामेनेई शासन का इजराइल को धमकी।

ईरान संकट: अमेरिका में रैली पर ट्रक हमला; ट्रम्प की 'रेड लाइन' चेतावनी और ईरान की जवाबी धमकी ईरान में जारी जन-विद्रोह की आग अब सात समंदर पार अमेरिका तक पहुँच गई है। लॉस एंजिलिस में ईरान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर एक ट्रक चढ़ा दिया गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। वहीं, व्हाइट हाउस से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान अब 'रेड लाइन' पार कर रहा है और अमेरिका सैन्य विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहा है। 1. लॉस एंजिलिस में खौफ: प्रदर्शनकारियों पर चढ़ा ट्रक रविवार दोपहर लॉस एंजिलिस के वेस्टवुड इलाके में सैकड़ों लोग ईरान के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में मार्च निकाल रहे थे। हमला: वेटरन एवेन्यू पर एक ट्रक अचानक रैली में घुस गया, जिससे भगदड़ मच गई। भीड़ का गुस्सा: जान बचाने के बाद गुस्साए लोगों ने ट्रक ड्राइवर को पकड़कर उस पर हमला करने की कोशिश की। पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है कि यह महज एक हादसा था या कोई सोची-समझी साजिश। 2. ट्रम्प का अल्टीमेटम: "ईरान रेड लाइन क्रॉस कर रहा है" अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के ताजा हालातों पर सख्त रुख अपनाते हुए कई बड़ी बातें कहीं: सैन्य ब्रीफिंग: ट्रम्प को ईरान पर संभावित हवाई हमलों और अन्य सैन्य विकल्पों की जानकारी दी गई है। बातचीत का प्रस्ताव: ट्रम्प का दावा है कि ईरान 'पिटते-पिटते' थक गया है और अब बातचीत का प्रस्ताव दे रहा है। हालांकि, ट्रम्प ने कहा कि बढ़ती मौतों के कारण उन्हें बातचीत से पहले एक्शन लेना पड़ सकता है। रेड लाइन: जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या ईरान सीमा लांघ चुका है, तो ट्रम्प ने कहा, "ऐसा लग रहा है कि वे ऐसा करने लगे हैं।" 📊 ईरान विद्रोह: खौफनाक जमीनी हकीकत श्रेणी ताज़ा आंकड़े (HRANA के अनुसार) कुल मौतें 544 (8 बच्चों समेत) गिरफ्तारियां 10,681 लोग हिरासत में महंगाई खाने-पीने की चीजों में 72% की बढ़ोत्तरी मुद्रा का गिरना 1.45 मिलियन रियाल प्रति डॉलर (दिसंबर 2025) 3. ईरान का पलटवार: "अमेरिकी बेस और इजराइल हमारे निशाने पर" ईरानी नेतृत्व ने झुकने के बजाय युद्ध की धमकी दी है। संसद में हंगामा: ईरानी संसद में सांसदों ने 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगाए। स्पीकर मोहम्मद बागर गालीबाफ ने कहा कि अगर हमला हुआ, तो क्षेत्र के सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, शिप्स और इजराइल को निशाना बनाया जाएगा। विदेशी साजिश का आरोप: विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाने का आरोप लगाया और इसे इजराइली एजेंसी मोसाद की साजिश करार दिया। भारतीयों की खबर: ईरान ने उन अफवाहों को सिरे से खारिज किया है जिनमें भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी की बात कही गई थी। 4. भविष्य की राह: रजा पहलवी और 'आजाद ईरान' 47 साल के इस्लामी शासन के बाद अब लोग विकल्प तलाश रहे हैं। प्रिंस की वापसी: अमेरिका में निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने ऐलान किया है कि वह जल्द ही ईरान लौटेंगे। GenZ का गुस्सा: ईरान की युवा पीढ़ी आर्थिक बदहाली और 62% टैक्स बढ़ने के प्रस्ताव से भड़की हुई है। वे पहलवी को एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक उम्मीद के रूप में देख रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 12, 2026 0
ट्रम्प को ईरान पर हमले का प्लान बताया गया
ट्रंप को दी गई हमलों की ब्रीफिंग; प्रिंस पहलवी की वतन वापसी; ईरान में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत।

ईरान में 'आर-पार' की जंग: अमेरिका ने ट्रम्प को दिए सैन्य हमले के विकल्प; खामेनेई की 'फांसी' वाली धमकी और प्रिंस पहलवी की वतन वापसी ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शन अब एक अंतरराष्ट्रीय युद्ध की आहट में बदल गए हैं। दो हफ्तों से जारी हिंसा और 217 से अधिक मौतों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वहीं, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को 'खुदा का दुश्मन' करार देते हुए मौत की सजा देने की तैयारी कर ली है। 1. ट्रम्प की 'मिलिट्री ब्रीफिंग' और हमले की योजना न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन में हलचल तेज है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रपति ट्रम्प को ईरान पर हमले के विभिन्न 'विकल्पों' की जानकारी दी है। हस्तक्षेप की शर्त: यदि ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों का दमन जारी रखते हैं, तो ट्रम्प हवाई हमले या अन्य सैन्य कदम उठा सकते हैं। ट्रम्प का संदेश: ट्रम्प ने सीधे तौर पर कहा, "ईरान आजादी की ओर देख रहा है और अमेरिका मदद के लिए पूरी तरह तैयार है।" हाई अलर्ट पर इजराइल: इजराइल की सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर हैं। पीएम नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बातचीत में ईरान में 'अमेरिकी दखल' की संभावनाओं पर गंभीर चर्चा हुई है। 📊 ईरान: आंतरिक संघर्ष और दमन के आंकड़े श्रेणी विवरण (जनवरी 2026 तक) कुल मौतें 217 प्रदर्शनकारी (मुख्यतः गोली लगने से) गिरफ्तारियां 2600 से अधिक लोग जेलों में बंद महंगाई दर खाद्य वस्तुओं में 72%, दवाओं में 50% वृद्धि मुद्रा का गिरना 1.45 मिलियन रियाल प्रति डॉलर (ऐतिहासिक गिरावट) प्रशासनिक कदम तेहरान में बिजली कटौती और इंटरनेट ब्लैकआउट 2. ईरान की 'फांसी' वाली धमकी और जवाबी हमला ईरान सरकार ने अब 'सॉफ्ट पावर' के बजाय 'आतंक' का रास्ता चुना है। 'खुदा के दुश्मन': ईरान के अटॉर्नी जनरल ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों को 'मोहरेबेह' (खुदा के खिलाफ युद्ध) का दोषी मानकर फांसी दी जाएगी। इजराइल-अमेरिका को चेतावनी: संसद के स्पीकर बागेर कालिबाफ ने कहा कि अगर हमला हुआ, तो ईरान सीधे तौर पर इजराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा। 3. प्रिंस रजा पहलवी: वतन वापसी और 'क्रांति' का आह्वान 50 साल से अमेरिका में निर्वासित जीवन जी रहे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी अब इस आंदोलन के सबसे बड़े नेता बनकर उभरे हैं। सड़कों पर उतरने की अपील: पहलवी ने आज शाम 6 बजे फिर से बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने को कहा है। उन्होंने दावा किया कि खामेनेई का दमनकारी तंत्र टूट रहा है और सुरक्षा बल आदेश मानने से मना कर रहे हैं। वतन वापसी: 65 वर्षीय पहलवी ने घोषणा की है कि वे जल्द ही ईरान लौटेंगे ताकि "राष्ट्रीय क्रांति" की जीत में जनता के साथ खड़े हो सकें। लंदन में प्रदर्शन: ब्रिटेन में भी प्रदर्शनकारियों ने ईरानी दूतावास से इस्लामी गणराज्य का झंडा हटाकर शाह के दौर का 'शेर और सूरज' वाला झंडा फहरा दिया। 4. आर्थिक बदहाली: विद्रोह का असली ईंधन ईरान की सड़कों पर 'GenZ' के उतरने की सबसे बड़ी वजह पेट की भूख है। बजट और टैक्स: 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आग में घी का काम किया है। तेल पर निर्भरता: ईरान 90% तेल चीन को बेचता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और व्यापार घाटे (15 बिलियन डॉलर) ने देश की कमर तोड़ दी है। बिजली संकट: तेहरान में अंधेरा कर प्रदर्शनों को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लोग मोबाइल फ्लैश जलाकर सड़कों पर डटे हैं।

रवि चौहान जनवरी 11, 2026 0
ईरान में हिंसक प्रदर्शन, 217 लोगों की मौत का दावा
Iran Protests 2026: 217 की मौत; खामेनेई की ट्रम्प को चुनौती; प्रिंस रजा पहलवी की वतन वापसी का ऐलान; तेहरान में महा-विद्रोह।

ईरान में 'खूनी' विद्रोह: 217 की मौत और अयातुल्ला शासन की सीधी चेतावनी; प्रिंस रजा पहलवी ने किया वतन वापसी का ऐलान ईरान इस समय अपनी आधुनिक तारीख के सबसे हिंसक और निर्णायक दौर से गुजर रहा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद यह पहला मौका है जब देश का 'अयातुल्ला शासन' अपनी जड़ें हिलते हुए देख रहा है। 13 दिनों से चल रहे इस आंदोलन में अब तक 217 लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है, और हालात गृहयुद्ध (Civil War) की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। 1. तेहरान में 'खूनी शुक्रवार': अस्पतालों से डराने वाले आंकड़े टाइम मैगजीन की रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। राजधानी तेहरान के केवल 6 अस्पतालों में 217 प्रदर्शनकारियों की मौत दर्ज की गई है। गोलीबारी का आदेश: चश्मदीदों के मुताबिक, सुरक्षा बलों ने गुरुवार रात प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलाईं। मरने वालों में ज्यादातर युवा और छात्र हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की धमकी: ईरानी सेना (IRGC) के अधिकारी ने सरकारी टीवी पर खुलेआम चेतावनी दी— "अपने बच्चों को सड़कों से हटा लो, अगर उन्हें गोली लगी तो शिकायत मत करना।" यह बयान दिखाता है कि शासन अब किसी भी हद तक जाने को तैयार है। मस्जिद में आग: प्रदर्शनकारियों ने तेहरान की अल रसूल मस्जिद में आग लगाकर अपना गुस्सा जाहिर किया है, जो शासन के धार्मिक प्रतीकों पर सीधा हमला है। 📊 ईरान: आर्थिक बदहाली और विद्रोह के कारण समस्या वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026) जनता पर प्रभाव मुद्रा (रियाल) 1.45 मिलियन प्रति डॉलर बचत की कीमत रद्दी के बराबर। खाद्य महंगाई 72% की भारी वृद्धि मध्यम वर्ग भुखमरी की कगार पर। दवाओं की कीमत 50% से अधिक की बढ़ोतरी स्वास्थ्य सेवाएं पहुँच से बाहर। टैक्स वृद्धि 2026 बजट में 62% का प्रस्ताव जनता में 'कर विद्रोह' की भावना। जीडीपी ग्रोथ मात्र 0.3% रोजगार के अवसर पूरी तरह ठप। 2. खामेनेई बनाम ट्रम्प: कूटनीतिक महासंग्राम सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने शनिवार को राष्ट्र को संबोधित किया, लेकिन उनके भाषण में समाधान के बजाय 'धमकी' अधिक थी। विदेशी एजेंटों का आरोप: खामेनेई ने कहा कि ये प्रदर्शनकारी अमेरिका और इजराइल के 'भाड़े के सैनिक' हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे ट्रंप को खुश करने के लिए देश को बर्बाद न करें। ट्रम्प की सैन्य धमकी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोबारा चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम नहीं रोका, तो अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। यह बयान ईरान के भीतर और बाहर दोनों जगह खलबली मचा रहा है। परमाणु समझौते की अनिश्चितता: इस हिंसा के बाद ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध और कड़े होना तय है, जिससे व्यापार घाटा 15 बिलियन डॉलर के पार जा सकता है। 3. प्रिंस रजा पहलवी की वापसी: 'क्रांति' का नया चेहरा? विद्रोह के बीच सबसे बड़ी खबर क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की वतन वापसी का ऐलान है। 50 साल का निर्वासन: 65 वर्षीय रजा पहलवी, जो 1979 में हटाए गए शाह के बेटे हैं, ने सोशल मीडिया पर लिखा कि वे अपनी 'राष्ट्रीय क्रांति' की जीत में शामिल होने के लिए ईरान लौट रहे हैं। लोकतांत्रिक विकल्प: ईरान की युवा पीढ़ी (GenZ) अयातुल्ला के सख्त धार्मिक कानूनों के बजाय पहलवी के 'धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक' मॉडल की ओर आकर्षित हो रही है। शाह की वापसी के नारे: सड़कों पर लोग खुमैनी और खामेनेई की तस्वीरें जलाकर उनमें सिगरेट सुलगा रहे हैं और शाह की वापसी के नारे लगा रहे हैं। 4. ईरान की इकोनॉमी: तेल पर निर्भर और टूटती हुई ईरान का पूरा आर्थिक ढांचा तेल निर्यात पर टिका है, जो अब ढहने की कगार पर है। चीन पर निर्भरता: ईरान अपना 90% तेल चीन को बेचता है। यदि प्रदर्शनों के कारण तेल उत्पादन या सप्लाई चेन बाधित होती है, तो ईरान का खजाना पूरी तरह खाली हो जाएगा। बिजली-पानी की किल्लत: गिरती अर्थव्यवस्था के कारण बुनियादी सुविधाओं (Infrastructure) का बुरा हाल है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

रवि चौहान जनवरी 10, 2026 0
ईरान के 100 शहरों में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन
Iran Protests 2026: 100 शहरों में 'खामेनेई को मौत' के नारे; प्रिंस रजा पहलवी की वापसी की मांग; ट्रम्प की सैन्य हमले की धमकी।

रान में 'क्रांति 2.0': महंगाई, तानाशाही और दमन के बीच 100 शहरों में महा-विद्रोह; क्या गिरेगा खामेनेई का साम्राज्य? ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे गंभीर संकट से गुजर रहा है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के 47 साल बाद, ईरान की गलियां एक बार फिर "आजादी" और "बदलाव" के नारों से गूंज रही हैं। 13 दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन ने अब एक पूर्ण जन-आंदोलन का रूप ले लिया है, जिसने अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार की नींव हिला दी है। 1. 100 शहर, एक मांग: "इस्लामिक रिपब्लिक का अंत" CNN और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन अब केवल तेहरान तक सीमित नहीं हैं। यह ईरान के सुदूर कोनों, जैसे कि मशहद, शिराज, इस्फ़हान और तबरीज़ तक फैल चुके हैं। हिंसा का तांडव: सुरक्षा बलों की बर्बरता में अब तक 45 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे दुखद पहलू यह है कि इनमें 8 बच्चे भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना चरम पर है कि उन्होंने सरकारी इमारतों को आग लगा दी है और एक पुलिस अधिकारी की हत्या की भी पुष्टि हुई है। सामूहिक गिरफ्तारियां: अब तक 2,270 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। तेहरान की एविन जेल (Evin Prison) एक बार फिर राजनीतिक कैदियों से भर गई है। डिजिटल ब्लैकआउट: सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बंद कर दिया है। नेटब्लॉक्स (NetBlocks) ने इसे "हिंसक दमन को दुनिया की नजरों से छिपाने की कोशिश" बताया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इलॉन मस्क की 'स्टारलिंक' सैटेलाइट सर्विस का इस्तेमाल कर वीडियो साझा कर रहे हैं। 2. आर्थिक नरक: रियाल का पतन और महंगाई की मार इस विद्रोह की सबसे बड़ी और बुनियादी वजह आर्थिक बदहाली है। ईरान की जनता के पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा है। मुद्रा का गिरना: दिसंबर 2025 में ईरानी रियाल 1.45 मिलियन प्रति डॉलर के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच गया। 2024 के मुकाबले इसकी कीमत आधी रह गई है। महंगाई बम: खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और जीवन रक्षक दवाओं में 50% की बढ़ोतरी हुई है। आम ईरानी के लिए अब दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। टैक्स का बोझ: सरकार ने संकट से निपटने के लिए 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जिसने जनता के गुस्से को ज्वालामुखी बना दिया। 3. 'शाह' की वापसी के नारे: क्राउन प्रिंस रजा पहलवी 47 साल बाद ईरान की सड़कों पर एक ऐसी आवाज सुनाई दे रही है जो दशकों से खामोश थी— "शाह पहलवी लौटेंगे।" निर्वासित प्रिंस की अपील: 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी, जो 1979 में हटाए गए शाह के बेटे हैं, ने अमेरिका से लोगों को सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। युवाओं की पसंद: ईरान की GenZ (जेन-जी) आबादी, जो सख्त धार्मिक कानूनों और बेरोजगारी से तंग आ चुकी है, अब पहलवी को एक "धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक" विकल्प के रूप में देख रही है। उन्हें लगता है कि पहलवी की वापसी ही ईरान को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से निकाल सकती है। ऐतिहासिक चक्र: विडंबना देखिए कि 1979 में शाह को हटाने के लिए प्रदर्शन हुए थे, और आज 2026 में शाह की वापसी के लिए लोग जान दे रहे हैं। 📊 ईरान की अर्थव्यवस्था का विश्लेषण (2024-2026) श्रेणी स्थिति / डेटा प्रभाव मुद्रा मूल्य (Rial) 1.45M / USD बचत और क्रय शक्ति खत्म खाद्य मुद्रास्फीति 72% कुपोषण और गरीबी में वृद्धि व्यापार घाटा (2025) 15 बिलियन डॉलर विदेशी भंडार में भारी कमी जीडीपी वृद्धि 0.3% बेरोजगारी और आर्थिक स्थिरता का अभाव मुख्य तेल खरीदार चीन (90%) प्रतिबंधों के कारण एक ही देश पर निर्भरता 4. ट्रम्प की 'हमले' की धमकी और वैश्विक प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। सैन्य कार्रवाई की चेतावनी: ट्रम्प ने स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान ने अपने लोगों का कत्लेआम नहीं रोका, तो अमेरिका "बहुत जोरदार तरीके से" ईरान पर सैन्य हमला करेगा। यह बयान तेहरान के शासकों के लिए सीधा अल्टीमेटम है। यूरोपीय समर्थन: स्वीडन और बेल्जियम जैसे देशों ने भी प्रदर्शनकारियों के साहस की तारीफ की है और ईरानी सरकार के दमन की निंदा की है। चीन का पेच: ईरान अपना 90% तेल चीन को बेचता है। अगर प्रदर्शनों के कारण तेल उत्पादन रुकता है, तो चीन की ऊर्जा सुरक्षा पर भी खतरा मंडराएगा, जो इस मामले को और जटिल बनाता है। 5. क्यों खास है यह प्रदर्शन? (47 साल बनाम 13 दिन) यह आंदोलन पिछले प्रदर्शनों (जैसे 2022 का महसा अमीनी आंदोलन) से अलग है क्योंकि: नेतृत्व की मांग: इस बार लोग सिर्फ विरोध नहीं कर रहे, बल्कि रजा पहलवी के रूप में एक वैकल्पिक नेतृत्व की मांग कर रहे हैं। आर्थिक + धार्मिक: यह सिर्फ हिजाब या व्यक्तिगत आजादी की लड़ाई नहीं है, बल्कि भूख और अस्तित्व की लड़ाई है। GenZ का नेतृत्व: 20 साल से कम उम्र के युवा, जिन्होंने कभी शाह का दौर नहीं देखा, वे ही सबसे आगे रहकर सुरक्षा बलों की गोलियों का सामना कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 9, 2026 0
भारत पर 500% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका
भारत पर 500% टैरिफ का खतरा; ट्रंप की नई तेल नीति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।

'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025': ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या वैश्विक व्यापार युद्ध का आगाज? 1. क्या है SRA 2025? (विस्तृत विवरण) यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया गया है। इसे 'बाइपार्टिसन' (द्विदलीय) समर्थन प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि इसे अमेरिकी संसद के दोनों पक्षों का मजबूत साथ मिला है। मुख्य लक्ष्य: रूस के उन राजस्व स्रोतों को सुखाना, जो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में ईंधन का काम कर रहे हैं। सेकेंडरी सैंक्शन (Secondary Sanctions): इस कानून के तहत अमेरिका उन देशों या कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाएगा जो रूस के साथ कारोबार जारी रखेंगे। इसका सीधा मतलब है— "यदि आप रूस के साथ व्यापार करते हैं, तो आप अमेरिका के साथ व्यापार नहीं कर पाएंगे।" कानूनी पेच: इस एक्ट के पारित होने के बाद, कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी मर्जी से इन प्रतिबंधों को नहीं हटा पाएगा। इसके लिए संसद (कांग्रेस) की मंजूरी अनिवार्य होगी। 2. 500% टैरिफ: भारत के लिए 'आर्थिक बम' बिल में सबसे विवादित हिस्सा रूस से तेल खरीदने वाले देशों (भारत, चीन, ब्राजील) पर 500% तक आयात शुल्क (Tariff) लगाने का प्रावधान है। मौजूदा स्थिति: भारत पर पहले से ही 50% का संचयी टैरिफ (25% सामान्य + 25% रूसी तेल दंड) लग रहा है। संभावित प्रभाव: यदि टैरिफ बढ़कर 500% हो जाता है, तो भारतीय सामान (आईटी सेवाएं, कपड़ा, फार्मा, इंजीनियरिंग उत्पाद) अमेरिकी बाजार में इतने महंगे हो जाएंगे कि उनकी बिक्री लगभग बंद हो जाएगी। निर्यात संकट: भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) लगभग 40 बिलियन डॉलर से अधिक है, जो इस टैरिफ के कारण शून्य पर आ सकता है। 📊 भारत-रूस तेल आयात और टैरिफ की स्थिति वर्ष रूस से तेल आयात (प्रतिदिन) अमेरिका द्वारा टैरिफ (भारत पर) 2021 0.1 मिलियन बैरल 0% 2023 (पीक) 2.0 मिलियन बैरल 0% 2025 (दिसंबर) 1.2 मिलियन बैरल 50% 2026 (अनुमानित) 1.0 मिलियन बैरल से कम 500% (SRA बिल पास होने पर) 3. भारत की जवाबी रणनीति और कूटनीतिक प्रयास भारत इस दबाव के बावजूद अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आयात में कमी: आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने दिसंबर 2025 में रूसी तेल का आयात घटाकर 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जनवरी 2026 के लिए रूसी कार्गो की कोई बुकिंग नहीं की है। अमेरिका से तेल की खरीद: भारत ने अपनी ऊर्जा निर्भरता को संतुलित करने के लिए अमेरिका से तेल का आयात 90% तक बढ़ा दिया है। राजदूत का प्रयास: भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने ट्रंप प्रशासन से अपील की है कि भारत पर लगे अतिरिक्त दंड को हटाया जाए क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। 4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर इस बिल के प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेंगे: ग्लोबल ऑयल मार्केट: यदि भारत और चीन रूसी तेल खरीदना बंद करते हैं, तो कच्चे तेल की मांग मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) में बढ़ेगी, जिससे वैश्विक कीमतें $130 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। रुपये की गिरावट: व्यापार घाटा बढ़ने से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच सकता है। चीन-रूस का जुड़ाव: अमेरिकी दबाव के कारण रूस और चीन एक-दूसरे के और करीब आ सकते हैं, जो अमेरिका के लिए एक नई सुरक्षा चुनौती होगी।

रवि चौहान जनवरी 8, 2026 0
अमेरिकी ऑपरेशन में जख्मी हुईं मादुरो की पत्नी
Cilia Flores Injured in US Operation: न्यूयॉर्क कोर्ट में घायल अवस्था में पेश हुईं सिलिया फ्लोरेस; मादुरो ने खुद को बताया निर्दोष।

⚖️ न्यूयॉर्क कोर्ट में मादुरो-फ्लोरेस: पट्टियों में लिपटी 'फर्स्ट कॉम्बैटेंट' और बेबस पूर्व राष्ट्रपति; क्या यह एक युग का अंत है? 1. कोर्ट रूम का मंजर: घायल और थके हुए मादुरो-फ्लोरेस सोमवार को मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में जब निकोलस मादुरो और सिलिया फ्लोरेस को पेश किया गया, तो उनकी शारीरिक स्थिति ने अमेरिकी सेना के 'ऑपरेशन वेनेजुएला' की गंभीरता को उजागर कर दिया। फ्लोरेस की चोटें: 69 साल की सिलिया फ्लोरेस के चेहरे पर दो पट्टियां थीं। उनकी दाहिनी आंख के पास गहरा नीला निशान और माथे पर चोट साफ दिख रही थी। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें पसलियों में फ्रैक्चर है और उन्हें तुरंत एक्स-रे और चिकित्सा देखभाल की जरूरत है। मादुरो का बचाव: मादुरो ने खुद को 'शरीफ इंसान' बताते हुए कोकीन तस्करी और हथियारों के सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने स्पेनिश में कहा, "मैं निर्दोष हूँ।" अदालती निर्देश: जज एल्विन हेलरस्टीन ने मानवीय आधार पर फ्लोरेस को तुरंत उचित इलाज मुहैया कराने का आदेश दिया है। 2. कौन हैं सिलिया फ्लोरेस? 'चाविस्मो' की असली शक्ति सिलिया फ्लोरेस केवल निकोलस मादुरो की पत्नी नहीं हैं, बल्कि वेनेजुएला की राजनीति का एक स्तंभ रही हैं। उन्हें 'फर्स्ट लेडी' के बजाय 'फर्स्ट कॉम्बैटेंट' (Cilia Flores: The First Combatant) कहा जाता है। कानूनी विशेषज्ञ और चावेज की रक्षक: फ्लोरेस पेशे से वकील हैं। 1992 में जब ह्यूगो चावेज ने तख्तापलट की कोशिश की और जेल गए, तब फ्लोरेस ने ही उनकी कानूनी टीम का नेतृत्व किया और 1994 में उनकी रिहाई सुनिश्चित की। संसदीय इतिहास: वे वेनेजुएला की संसद (National Assembly) की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने देश की अटॉर्नी जनरल के रूप में भी काम किया। चाविस्मो आंदोलन: चाविस्मो का मूल उद्देश्य तेल की कमाई को गरीबों में बांटना था। फ्लोरेस इस आंदोलन की वैचारिक रक्षक मानी जाती हैं। 3. मादुरो और फ्लोरेस की प्रेम कहानी और सत्ता का सफर 30 साल का साथ: मादुरो और फ्लोरेस की मुलाकात 1990 के दशक में चाविस्मो आंदोलन के दौरान हुई थी। फ्लोरेस मादुरो से 6 साल बड़ी हैं। सत्ता का हस्तांतरण: 2013 में ह्यूगो चावेज की मृत्यु के बाद, मादुरो ने सत्ता संभाली। फ्लोरेस पर्दे के पीछे रहकर सरकार के फैसलों को प्रभावित करती रहीं। 📊 मादुरो और फ्लोरेस पर लगे गंभीर आरोप अमेरिकी न्याय विभाग ने उन पर 'नार्को-टेररिज्म' (Narco-Terrorism) के आरोप लगाए हैं। आरोप विवरण संभावित सजा कोकीन तस्करी अमेरिका में सैकड़ों टन ड्रग्स भेजने की साजिश। उम्रकैद हथियार अपराध अवैध हथियारों का इस्तेमाल और वितरण। 30 साल से उम्रकैद भ्रष्टाचार तेल की कमाई का निजी इस्तेमाल और रिश्वतखोरी। भारी जुर्माना और जेल मानवता के खिलाफ अपराध विरोधियों का दमन और मानवाधिकार उल्लंघन। अंतरराष्ट्रीय दंड 4. विवाद और भाई-भतीजावाद (Nepotism) फ्लोरेस का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। भतीजों की गिरफ्तारी: 2017 में फ्लोरेस के दो भतीजों को अमेरिका में 18 साल की सजा सुनाई गई थी। वे राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान (Presidential Hangar) का इस्तेमाल करके अमेरिका में कोकीन भेजने की कोशिश कर रहे थे। रिश्वत के आरोप: 'द गार्जियन' की रिपोर्ट के अनुसार, उन पर 2007 में एक बड़े ड्रग तस्कर और एंटी-ड्रग विभाग के बीच डील कराने के लिए लाखों डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप है। प्रतिबंध: 2018 में अमेरिका और कनाडा ने उनकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया और उन पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए थे। 5. अमेरिकी कार्रवाई की वैधता पर सवाल मादुरो और उनके समर्थकों का दावा है कि 2 जनवरी की रात को अमेरिकी सेना द्वारा उन्हें 'अगवा' करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। अमेरिकी पक्ष: अमेरिका का कहना है कि मादुरो एक अवैध राष्ट्रपति थे और उन पर लगे नार्को-टेररिज्म के आरोपों के कारण उन्हें गिरफ्तार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी था। वैश्विक असर: रूस और चीन ने इस गिरफ्तारी को 'संप्रभुता का कत्ल' बताया है, जबकि कई लैटिन अमेरिकी देश इसे तानाशाही के अंत के रूप में देख रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 6, 2026 0
डेनमार्क की PM बोलीं-ग्रीनलैंड पर हमला किया तो NATO खत्म
Trump Greenland Conflict 2026: डेनमार्क की चेतावनी— ग्रीनलैंड पर हमला हुआ तो खत्म हो जाएगा NATO; मोनरो डॉक्ट्रिन का सच।

ग्रीनलैंड संकट: अमेरिका बनाम यूरोप; ट्रम्प की 'कब्जे' की धमकी से नाटो (NATO) के अस्तित्व पर खतरा 1. ताजा विवाद: ट्रम्प का "20 दिन" वाला अल्टीमेटम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद पत्रकारों से बात करते हुए एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह अगले 20 दिनों में ग्रीनलैंड को लेकर अपनी योजना स्पष्ट करेंगे। सैन्य कार्रवाई के संकेत: ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है। उत्तेजक सोशल मीडिया पोस्ट: विवाद तब और भड़क गया जब व्हाइट हाउस अधिकारी स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे के रंगों में रंगा हुआ पोस्ट किया और कैप्शन लिखा— "जल्द ही" (Soon)। 2. डेनमार्क की कड़ी चेतावनी: "NATO खत्म हो जाएगा" डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने टीवी इंटरव्यू में स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को आईना दिखाया है। संप्रभुता का सम्मान: उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और यह डेनमार्क साम्राज्य का एक स्वायत्त हिस्सा है। नाटो आर्टिकल 5 का उल्लंघन: नाटो के नियमों के अनुसार, किसी सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। फ्रेडरिकसन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपने ही सहयोगी (डेनमार्क/ग्रीनलैंड) पर हमला करता है, तो नाटो की पूरी साख और व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। 📊 ग्रीनलैंड का रणनीतिक और आर्थिक महत्व अमेरिका आखिर ग्रीनलैंड को हर हाल में क्यों पाना चाहता है? इसके पीछे चार मुख्य कारण हैं: क्षेत्र महत्व का कारण सैन्य रणनीति आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की मिसाइलों पर नजर रखने के लिए सर्वोत्तम स्थान। खनिज संसाधन रेयर अर्थ एलिमेंट्स, तेल और गैस के विशाल भंडार, जो चीन पर निर्भरता कम कर सकते हैं। शिपिंग रूट्स बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री व्यापारिक रास्तों पर नियंत्रण की संभावना। थुले एयर बेस अमेरिका का सबसे उत्तरी बेस, जो मिसाइल चेतावनी प्रणाली के लिए "फ्रंट लाइन" है। 3. यूरोपीय देशों का एकजुट मोर्चा फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों के नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर डेनमार्क का समर्थन किया है। आर्कटिक की सुरक्षा: यूरोपीय नेताओं के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की स्थिरता के लिए अनिवार्य है। रूस-चीन का फैक्टर: रूस और चीन आर्कटिक में अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। यूरोप चाहता है कि अमेरिका वहां एक 'साझेदार' (Partner) की तरह रहे, न कि 'कब्जा करने वाली ताकत' (Occupier) की तरह। 4. मोनरो डॉक्ट्रिन (Monroe Doctrine) का साया ट्रम्प ने वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए 1823 की 'मोनरो डॉक्ट्रिन' का हवाला दिया। क्या है यह नीति: इसके तहत अमेरिका ने 200 साल पहले घोषणा की थी कि पश्चिमी गोलार्ध (उत्तर और दक्षिण अमेरिका) में किसी भी यूरोपीय दखल को अमेरिका के खिलाफ हमला माना जाएगा। ट्रम्प का विस्तार: ट्रम्प अब इस नीति को आधुनिक संदर्भ में 'अपडेट' कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि अमेरिका अपने पड़ोस और रणनीतिक क्षेत्रों (जैसे ग्रीनलैंड) में किसी भी बाहरी या आंतरिक विरोध को सैन्य बल से दबाने का अधिकार रखता है। 5. ग्रीनलैंड का रुख: "हमारा देश बिकने वाला नहीं" ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रम्प के बयानों को 'अनादर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को वेनेजुएला के साथ जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करना पूरी तरह गलत है। ग्रीनलैंड एक स्वायत्त लोकतांत्रिक देश है और इसकी जनता अपनी किस्मत का फैसला खुद करेगी।

रवि चौहान जनवरी 6, 2026 0
बांग्लादेश में 18 दिन में छठे हिंदू की हत्या
Hindu Genocide in Bangladesh 2026: 18 दिन में 6 हत्याएं; नरसिंदी में शरत चक्रवर्ती और जेसोर में राणा बैरागी की हत्या।

बांग्लादेश में हिंदुओं का 'डेथ वैली' (Death Valley) सफर: 18 दिन में 6 हत्याएं, विधवा से गैंगरेप और खौफ का साया 1. ताजा हत्याकांड: नरसिंदी में शरत चक्रवर्ती की हत्या सोमवार रात नरसिंदी जिले के पलाश उपजिला में एक और हिंदू रक्त बहाया गया। घटना: 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि अपनी किराना दुकान पर थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। भविष्यवाणी सच हुई: विडंबना देखिए कि शरत ने 19 दिसंबर को फेसबुक पर पोस्ट लिखकर अपने इलाके को 'मौत की घाटी' (Death Valley) बताया था। उनकी वह आशंका सोमवार रात सच साबित हुई। मौत: अस्पताल ले जाते समय उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। यह 18 दिनों में छठी हिंदू हत्या है। 2. जेसोर में पत्रकार और व्यापारी की हत्या 5 जनवरी को जेसोर जिले के मोनिरामपुर में एक और बर्बरता सामने आई। राणा प्रताप बैरागी: राणा न केवल एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे, बल्कि 'दैनिक बीडी खबर' अखबार के कार्यकारी संपादक भी थे। हत्या का तरीका: बाइक सवार तीन हमलावर उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए और सिर में बेहद नजदीक से गोली मार दी। पुलिस को मौके से 7 खाली कारतूस मिले हैं, जो हमले की क्रूरता को दर्शाते हैं। 📊 18 दिनों का 'खूनी' रिकॉर्ड: हिंदुओं पर सिलसिलेवार हमले दिनांक मृतक का नाम जिला हमला का तरीका 19 दिसंबर दीपू चंद्र - ईशनिंदा का आरोप/भीड़ द्वारा हत्या 24 दिसंबर अमृत मंडल - पीट-पीटकर हत्या (Lynching) 29 दिसंबर बजेंद्र बिस्वास मैमनसिंह गोली मारकर हत्या 3 जनवरी (पहचान गुप्त) झेनाइदह विधवा से गैंगरेप और मारपीट 5 जनवरी राणा प्रताप बैरागी जेसोर सिर में गोली मारी गई 6 जनवरी शरत चक्रवर्ती नरसिंदी धारदार हथियार से हमला 3. रूह कंपा देने वाली दरिंदगी: विधवा से गैंगरेप और प्रताड़ना झेनाइदह जिले के कालीगंज में जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। वारदात: 3 जनवरी को 44 वर्षीय एक हिंदू विधवा महिला के घर में घुसकर आरोपियों (शाहीन और हसन) ने पहले उसके रिश्तेदारों को कमरे में बंद किया, फिर महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया। तालिबानी सजा: बलात्कार के बाद आरोपियों ने महिला के बाल काट दिए, उसे नग्न अवस्था में पेड़ से बांधकर पीटा और पूरी घटना का वीडियो बनाया। वजह: जमीन विवाद और जबरन वसूली। आरोपी शाहीन महिला से पैसे मांगकर उसे लंबे समय से प्रताड़ित कर रहा था। महिला का 10 साल का मासूम बेटा इस पूरी वहशियाना हरकत का चश्मदीद बना। 4. 'डेथ वैली' बनता बांग्लादेश: अल्पसंख्यकों का पलायन बांग्लादेश में वर्तमान अंतरिम सरकार के दौरान कट्टरपंथी संगठनों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे सरेआम हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। निशाने पर हिंदू नेता और व्यापारी: चुन-चुनकर उन हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं या समाज में प्रभावशाली हैं (जैसे पत्रकार राणा प्रताप या नेता गोबिंद प्रमाणिक)। पुलिस की निष्क्रियता: लगभग हर मामले में पुलिस 'जांच' का आश्वासन देती है, लेकिन गिरफ्तारियां बहुत कम या न के बराबर हो रही हैं।

रवि चौहान जनवरी 6, 2026 0
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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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रवि चौहान जनवरी 21, 2026 0