उत्तर प्रदेश

'यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं'
Saharanpur News: दिल्ली-देहरादून हाईवे पर हिंदू रक्षा दल की भड़काऊ करतूत; 'मुसलमानों के लिए सड़क नहीं' लिखने पर विवाद।

सहारनपुर हाईवे पर भड़काऊ करतूत: 'हिंदू रक्षा दल' की महिला कार्यकर्ताओं ने सड़क पर लिखी नफरत की इबारत; पिंकी चौधरी ने ली जिम्मेदारी सहारनपुर | 27 फरवरी 2026 उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे (NH-72A) पर हिंदू रक्षा दल की महिला कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक संपत्ति पर मुस्लिम विरोधी भड़काऊ नारे लिखने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। यहाँ इस पूरे मामले, संगठन के विवादित इतिहास और वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. घटना का विवरण: हाईवे पर नफरत का 'स्प्रे' यह शर्मनाक घटना सहारनपुर के बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डाट मंदिर और मोहण्ड के पास एलिवेटेड रोड की है। भड़काऊ संदेश: गुरुवार देर शाम दो युवतियां, जिन्होंने गले में भगवा गमछा डाला हुआ था, हाईवे किनारे सीमेंटेड ब्लॉक्स और रेलिंग पर स्प्रे पेंट से लिखती नजर आईं। उन्होंने अंग्रेजी में लिखा— "This road is not allowed for Muslims" और हिंदी में लिखा— "यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है।" वीडियो और नारेबाजी: संदेश लिखने के बाद युवतियों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाए। इस पूरी घटना का एक युवक वीडियो बना रहा था, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पहचान का सुराग: वीडियो के अंत में उत्तराखंड नंबर की एक लाल रंग की स्विफ्ट कार दिखाई दे रही है, जिसका इस्तेमाल आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद वहां से भागने के लिए कर रहे थे। 2. पिंकी चौधरी का बयान: "हां, हमने ही लिखा है" हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र उर्फ पिंकी चौधरी ने इस कृत्य की जिम्मेदारी लेते हुए एक विवादित बयान दिया है। तर्क: पिंकी चौधरी ने दावा किया कि यह उनकी महिला कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया कार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि "जब मुसलमान सड़क पर चलने का टैक्स नहीं देते, तो वे सड़क पर क्यों चलते हैं?" संगठन के इस खुले समर्थन ने पुलिस के लिए आरोपियों तक पहुंचना और भी आसान बना दिया है, हालांकि यह सामाजिक तनाव को बढ़ावा देने वाला बयान माना जा रहा है। 3. हिंदू रक्षा दल: विवादों और गिरफ्तारियों का लंबा इतिहास यह संगठन और इसके अध्यक्ष पिंकी चौधरी लंबे समय से विवादों के केंद्र में रहे हैं। इनका कार्य करने का तरीका अक्सर कानून की सीमाओं को पार करता रहा है: घटना की अवधि स्थान विवरण सितंबर 2025 गाजियाबाद "सुरक्षा" के नाम पर घरों में तलवारें और फरसे बांटे। पिंकी चौधरी और उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2024 गाजियाबाद झुग्गी बस्ती में रहने वालों को "बांग्लादेशी" बताकर मारपीट की और तोड़फोड़ की। पुलिस ने जेल भेजा था। मई 2024 देहरादून कश्मीरी मुसलमानों को शहर से बाहर निकालने की धमकी दी और "इलाज" करने की बात कही। अगस्त 2021 जंतर-मंतर, दिल्ली मुस्लिम विरोधी नारेबाजी और भड़काऊ भाषण के आरोप में पिंकी चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी। 4. पुलिस की कार्रवाई और कानूनी स्थिति सहारनपुर पुलिस ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया है: जांच शुरू: बिहारीगढ़ पुलिस ने वीडियो फुटेज और कार के नंबर के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है। धाराएं: सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने (Hate Speech) की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। अलर्ट: सहारनपुर बॉर्डर और हाईवे पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा ऐसी किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दिया जा सके। 5. सामाजिक और कानूनी प्रभाव हाईवे जैसी सार्वजनिक संपत्तियां देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं। संविधान के अनुच्छेद 15 और 19 के तहत धर्म के आधार पर सार्वजनिक स्थानों के उपयोग पर रोक लगाना गैर-कानूनी है। हिंदू रक्षा दल की यह करतूत न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह दिल्ली-देहरादून जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करती है।

रवि चौहान फ़रवरी 27, 2026 0
शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक
Shankaracharya Avimukteshwaranand Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर लगाई रोक; नार्को टेस्ट की दी चुनौती।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक; बोले- "झूठे मुकदमे से सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश हुई" प्रयागराज/वाराणसी | 27 फरवरी 2026 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक बड़ी अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति जितेन्द्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यहाँ इस अदालती कार्यवाही, शंकराचार्य के बयान और इस पूरे विवाद की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. हाईकोर्ट की सुनवाई: "जांच में सहयोग करें, गिरफ्तारी नहीं होगी" हाईकोर्ट में गुरुवार को लंबी बहस हुई। शंकराचार्य का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने रखा, जबकि सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल पेश हुए। कोर्ट का आदेश: अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक अग्रिम जमानत पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, पुलिस शंकराचार्य को गिरफ्तार नहीं कर सकती। हालांकि, उन्हें पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। अगली सुनवाई: इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में तय की गई है। शिकायतकर्ता का रुख: आशुतोष महाराज की वकील रीना सिंह ने कोर्ट में मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए गिरफ्तारी की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत बरकरार रखी है। 2. शंकराचार्य का पलटवार: "सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं" गिरफ्तारी पर रोक लगने के बाद शंकराचार्य ने काशी में मीडिया से बात की। उनके चेहरे पर संतोष था और उन्होंने इसे धर्म की जीत बताया। बदनाम करने की साजिश: शंकराचार्य ने कहा, "शंकराचार्य जैसी सर्वोच्च संस्था को कीचड़ में घसीटने की कोशिश की गई। पूरे देश का हिंदू समाज आशंकित था कि उनके गुरु ने क्या किया है। लेकिन यह मुकदमा पूरी तरह झूठ की बुनियाद पर खड़ा है।" बटुकों पर दावा: उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बच्चों (बटुकों) के शोषण का दावा किया जा रहा है, वे कभी उनके आश्रम में रहे ही नहीं। नार्को टेस्ट की चुनौती: शंकराचार्य ने कहा कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं। उन्होंने मांग की कि सच सामने लाने के लिए उनका नार्को टेस्ट कराया जाए, ताकि साजिशकर्ताओं के चेहरे बेनकाब हों। 📊 केस की टाइमलाइन: विवाद की शुरुआत से हाईकोर्ट तक तारीख घटनाक्रम 18 जनवरी 2026 प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ। 24 जनवरी 2026 आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से बच्चों के यौन शोषण की शिकायत की। 8 फरवरी 2026 पुलिस कार्रवाई न होने पर पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 21 फरवरी 2026 पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में FIR दर्ज हुई। 24 फरवरी 2026 शंकराचार्य ने पुलिस अधिकारियों पर साजिश का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। 26 फरवरी 2026 मेडिकल रिपोर्ट में कुकर्म की पुष्टि होने का पुलिसिया दावा सामने आया। 27 फरवरी 2026 इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई। 3. साजिश और धमकियों का दौर इस हाई-प्रोफाइल मामले में केवल आरोप-प्रत्यारोप ही नहीं, बल्कि जानलेवा धमकियां भी शामिल हो गई हैं: वकील को धमकी: शंकराचार्य के वकील श्रीनाथ त्रिपाठी को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। आरोपी गिरफ्तार: पुलिस ने 20 घंटे के भीतर आरोपी अजीत कुमार सरोज को गिरफ्तार कर लिया। वह कानून का छात्र है। उसने कबूल किया कि उसने अपने पड़ोसी को फंसाने के लिए वकील को धमकी भरा मैसेज भेजा था। 4. क्या है 'कुकर्म' का पूरा मामला? शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (जो जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं) का आरोप है कि महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान आश्रम में रहने वाले बच्चों का यौन शोषण किया गया। पीड़ित का दावा: 'आज तक' को दिए साक्षात्कार में एक पीड़ित बटुक ने कहा कि वह पढ़ाई के लिए आश्रम गया था, लेकिन वहां उसका शोषण हुआ। मेडिकल रिपोर्ट: पुलिस सूत्रों का कहना है कि बच्चों के मेडिकल परीक्षण में 'पेनिट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' की पुष्टि हुई है। हालांकि, बचाव पक्ष इसे फर्जी बता रहा है। 5. विद्यामठ में जश्न और रंगभरी एकादशी हाईकोर्ट के आदेश के बाद वाराणसी स्थित शंकराचार्य के विद्यामठ में दिवाली जैसा माहौल दिखा। शिष्यों ने "धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो" के नारे लगाए। मठ में रंगभरी एकादशी और होली की तैयारियां और तेज हो गई हैं। अनुयायियों का मानना है कि यह शंकराचार्य को फंसाने की राजनीतिक और धार्मिक साजिश है।

रवि चौहान फ़रवरी 27, 2026 0
पिता के शव को बाथरूम में काटा, नीले-ड्रम में छिपाया
Lucknow Murder: लखनऊ में नीट (NEET) के दबाव में बेटे ने की पिता की हत्या; आरी से काटकर ड्रम में भरे टुकड़े।

लखनऊ हत्याकांड: नीट (NEET) के दबाव में बेटे ने की पिता की 'तालिबानी' हत्या; आरी से किए शव के टुकड़े, सिर 21 किमी दूर फेंका लखनऊ | 24 फरवरी 2026 उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके आशियाना में एक ऐसा जघन्य हत्याकांड सामने आया है, जिसने रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक मानवेंद्र सिंह की उनके 21 साल के इकलौते बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी। हत्या इतनी क्रूर थी कि आरोपी ने पिता के शव को आरी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया और सिर को कार में रखकर शहर से 21 किलोमीटर दूर फेंक आया। यहाँ इस सनसनीखेज वारदात, हत्या की वजह और पुलिस जांच का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. वारदात का खौफनाक घटनाक्रम यह घटना आशियाना कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-L की है। 20 फरवरी की सुबह करीब 4:30 बजे घर में विवाद शुरू हुआ, जो मौत के तांडव में बदल गया। गोली मारकर हत्या: बहस के दौरान अक्षत ने पिता की लाइसेंसी राइफल उठाई और उन्हें गोली मार दी। मानवेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। शव के टुकड़े और आरी का इस्तेमाल: हत्या के बाद अक्षत घबराया नहीं, बल्कि उसने बेहद ठंडे दिमाग से शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। वह बाजार से आरी खरीदकर लाया। उसने पिता के शव को तीसरे फ्लोर से ग्राउंड फ्लोर के एक खाली कमरे में शिफ्ट किया और वहां शव के टुकड़े किए। सिर और धड़ को अलग किया: आरोपी ने सिर काटकर एक थैले में रखा और अपनी कार से 21 किमी दूर सदरौना (काकोरी) के पास फेंक दिया। बाकी धड़ और अंगों को पॉलीथिन में पैक कर एक नीले ड्रम में भर दिया। साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश: घर में खून की दुर्गंध न फैले, इसके लिए वह लगातार रूम स्प्रे छिड़कता था। बाकी हिस्सों को वह तारपिन के तेल से जलाने की फिराक में था। 2. बहन बनी चश्मदीद: "किसी को बताया तो मार डालूंगा" वारदात के वक्त अक्षत की 17 साल की छोटी बहन कृति (कक्षा 11 की छात्रा) वहीं मौजूद थी। धमकी और बंधक: पिता को मरता देख जब बहन चिल्लाई, तो अक्षत ने उस पर राइफल तान दी। उसने धमकी दी कि "अगर किसी को भी कानो-कान खबर हुई, तो अगला नंबर तुम्हारा होगा।" डर के मारे बहन तीन दिनों तक घर के अंदर कैद रही और किसी को कुछ नहीं बता सकी। 3. हत्या की वजह: करियर का दबाव और 'जनरेशन गैप' पुलिस पूछताछ में जो कारण सामने आया, वह आज के समाज की एक कड़वी सच्चाई है: NEET बनाम बिजनेस: मानवेंद्र सिंह चाहते थे कि उनका इकलौता बेटा डॉक्टर बने और NEET क्वालीफाई करके MBBS करे। वहीं, बीकॉम कर रहे अक्षत का मन पढ़ाई में नहीं था। होटल खोलने की जिद: अक्षत अपने पिता पर दबाव बना रहा था कि पैथोलॉजी लैब बंद करके वहां एक लॉन या रेस्टोरेंट खोला जाए। उसका मानना था कि इसमें ज्यादा कमाई है। इसी 'करियर क्लैश' ने बेटे को कातिल बना दिया। 📊 वारदात से जुड़ी मुख्य जानकारी विवरण तथ्य मृतक का नाम मानवेंद्र सिंह (पैथोलॉजी लैब मालिक) आरोपी अक्षत प्रताप सिंह (21 वर्ष, बेटा) हथियार पिता की लाइसेंसी राइफल और आरी वारदात की तारीख 20 फरवरी 2026 (सुबह 4:30 बजे) खुलासा 23 फरवरी 2026 (गुमशुदगी की रिपोर्ट के बाद) लोकेशन सेक्टर-L, आशियाना, लखनऊ 4. पुलिस को कैसे हुआ शक? वारदात के तीन दिन बाद, सोमवार को अक्षत खुद आशियाना थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी दर्ज कराई। उसने कहानी गढ़ी कि पिता दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे और लौटे नहीं। संदिग्ध हाव-भाव: पूछताछ के दौरान अक्षत बार-बार बयान बदल रहा था और घबरा रहा था। पुलिस को उसके मोबाइल की लोकेशन और कार की सफाई पर शक हुआ। सख्ती से पूछताछ: जब पुलिस ने कड़ाई की, तो उसने पहले 'आत्महत्या' की कहानी सुनाई, लेकिन अंत में टूट गया और हत्या की बात कबूल कर ली। 5. पड़ोसी और परिवार: "मेघनाद का रोल करता था अक्षत" पड़ोसियों के मुताबिक, मानवेंद्र सिंह बहुत मिलनसार व्यक्ति थे और मोहल्ले की रामलीला में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। पुराना इतिहास: चार साल पहले भी अक्षत 6 पन्नों का पत्र लिखकर घर से भाग गया था, जिसमें उसने डॉक्टर न बनने की बात लिखी थी। अकेलापन: 9 साल पहले मां की मौत के बाद मानवेंद्र ही बच्चों को पाल रहे थे। उनके भाई यूपी पुलिस में हैं और पिता (आरोपी के दादा) भी रिटायर्ड पुलिसकर्मी हैं। 6. वर्तमान स्थिति: सिर की तलाश जारी देर रात तक फॉरेंसिक टीम और पुलिस घर की जांच करती रही। पुलिस ने ड्रम से धड़ बरामद कर लिया है, लेकिन सिर अब भी गायब है। अक्षत को साथ लेकर पुलिस उन इलाकों में तलाशी ले रही है जहां उसने अवशेष फेंकने का दावा किया है।

रवि चौहान फ़रवरी 24, 2026 0
मेरठ में परिवार के 6 लोग घर में जिंदा जले:इनमें जुड़वां बेटियों समेत 5 बच्चे
Meerut Fire Tragedy: मेरठ में भीषण आग; 6 माह की जुड़वां बच्चियों समेत परिवार के 6 सदस्यों की मौत, पूरे शहर में मातम।

मेरठ अग्निकांड: तीन मंजिला मकान में 6 जिंदगियां राख; जुड़वां बच्चियों समेत 5 बच्चों और मां की मौत, पड़ोसियों ने दीवार तोड़कर निकाले शव मेरठ | 24 फरवरी 2026 उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के किदवई नगर में सोमवार देर रात एक कपड़ा कारोबारी के तीन मंजिला घर में भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के 6 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिनमें 6 महीने की दो जुड़वां बच्चियां और तीन अन्य मासूम बच्चे शामिल हैं। हादसे के वक्त घर के पुरुष मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे, जिससे घर में केवल महिलाएं और बच्चे ही मौजूद थे। यहाँ इस हृदयविदारक घटना, रेस्क्यू ऑपरेशन और पीड़ित परिवार की स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. कैसे शुरू हुआ मौत का तांडव? हादसा किदवई नगर की गली नंबर-1 में स्थित इकबाल अहमद के मकान में हुआ। इकबाल और उनके बेटे कपड़ों का कारोबार करते हैं। ग्राउंड फ्लोर बना था गोदाम: घर के निचले हिस्से (ग्राउंड फ्लोर) में भारी मात्रा में कपड़ों का स्टॉक रखा हुआ था। रात करीब 8 से 9 बजे के बीच अचानक यहाँ आग लग गई। शॉर्ट सर्किट की आशंका: शुरुआती जांच में आग लगने का कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। कपड़ों की मौजूदगी के कारण लपटें कुछ ही मिनटों में इतनी विकराल हो गईं कि सीढ़ियों का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। पुरुषों की अनुपस्थिति: जिस वक्त आग लगी, इकबाल अहमद और उनके चार बेटे पास की मस्जिद में नमाज पढ़ने गए थे, जबकि एक बेटा प्रयागराज में था। घर में 12 लोग (महिलाएं और बच्चे) फंसे रह गए। 2. रेस्क्यू और वो 'घातक' फैसला आग लगते ही मोहल्ले में चीख-पुकार मच गई। पड़ोसियों ने तत्परता दिखाते हुए बचाव कार्य शुरू किया: फर्स्ट फ्लोर का रेस्क्यू: पड़ोसियों ने सीढ़ी लगाकर पहली मंजिल (First Floor) की खिड़की से 5 लोगों (तीन महिलाएं और दो बच्चे) को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। सेकंड फ्लोर पर फंसी मौत: दूसरी मंजिल पर आसिम की पत्नी रुखसार (30) अपने बच्चों के साथ मौजूद थी। जब उसने नीचे आग और धुआं देखा, तो वह बुरी तरह डर गई। बचने के लिए उसने बच्चों समेत खुद को कमरे के अंदर बंद कर लिया। यही फैसला उनके लिए घातक साबित हुआ। दीवार तोड़कर पहुंचे बचावकर्मी: संकरी गलियों के कारण फायर ब्रिगेड को पहुंचने में देरी हुई। अंततः पड़ोसी की दीवार तोड़कर दमकलकर्मी अंदर पहुंचे, लेकिन तब तक कमरे में मौजूद सभी लोग धुएं और तपिश के कारण दम तोड़ चुके थे। 3. मृतकों का विवरण: मासूमों ने किसी का क्या बिगाड़ा था? मंगलवार सुबह जब एक साथ 6 जनाजे उठे, तो पूरे मेरठ की आंखें नम थीं। हादसे में जान गंवाने वाले सदस्य: नाम आयु / संबंध स्थिति रुखसार 30 वर्ष (आसिम की पत्नी) दम घुटने और जलने से मौत अनाबिया 6 माह (जुड़वां बेटी) मृत घोषित इनायत 6 माह (जुड़वां बेटी) मृत घोषित अकदस 3 वर्ष (बेटा) मृत घोषित महविश 12 वर्ष (भतीजी) मृत घोषित हम्माद 4 वर्ष (भतीजा) मृत घोषित 4. प्रशासन की कार्रवाई और जांच हादसे की सूचना मिलते ही एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर और डीआईजी कलानिधि नैथानी मौके पर पहुंचे। जांच के आदेश: जिलाधिकारी (DM) ने विद्युत विभाग और फायर सेफ्टी के अफसरों को 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। संकरी गलियों की चुनौती: एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि इलाका बेहद घना है, जिससे फायर टेंडर को अंदर ले जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। फायर फाइटर्स ने छतों के रास्ते अंदर घुसकर आग पर काबू पाया। गैस लीकेज का एंगल: पुलिस जहाँ शॉर्ट सर्किट को वजह मान रही है, वहीं स्थानीय लोगों का दावा है कि घर में गैस लीकेज की वजह से आग ने इतना विकराल रूप लिया। 5. सिसकते परिजन और अंतिम विदाई मंगलवार सुबह नौचंदी स्थित बाले मियां कब्रिस्तान में सभी 6 मृतकों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। आसिम का विलाप: अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों को खो चुके आसिम की हालत देखकर हर कोई रो पड़ा। रिश्तेदारों ने उसे संभाला, लेकिन उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी। दादी की हालत: बच्चों की दादी अमीर बानो अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं। उन्हें फिलहाल इस दुखद खबर से दूर रखा गया है कि उनकी बहू और पोते-पोतियां अब इस दुनिया में नहीं हैं। राजनीतिक संवेदनाएं: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

रवि चौहान फ़रवरी 24, 2026 0
अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर में बच्चों से कुकर्म का आरोप
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप; रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी पहुंचे कोर्ट।

शंकराचार्य बनाम रामभद्राचार्य शिष्य: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप; पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर, 20 फरवरी को अगली सुनवाई प्रयागराज | 11 फरवरी 2026 धर्मनगरी प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ विवाद अब अदालती दहलीज तक पहुंच गया है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने अविमुक्तेश्वरानंद के गुरुकुल में बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse) का दावा करते हुए प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला केवल धार्मिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें अब गंभीर आपराधिक आरोप और आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग भी जुड़ गई है। 1. पॉक्सो कोर्ट में याचिका: क्या हैं गंभीर आरोप? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार भी हैं, ने 8 फरवरी को कोर्ट में याचिका दायर की। उनके आरोपों का सारांश नीचे दिया गया है: यौन शोषण का दावा: आशुतोष महाराज ने दो नाबालिग बच्चों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुकुल की आड़ में बच्चों का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। गुरु-सेवा के नाम पर कुकर्म: याचिका में आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी बच्चों को यह कहकर डराते थे कि यह 'गुरु-सेवा' है और इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने दावा किया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सोने के लिए मजबूर किया जाता था। समय और स्थान: आरोप है कि यह शोषण पिछले एक साल से चल रहा है। महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी मेला क्षेत्र में बच्चों के साथ कुकर्म किया गया। अवैध गतिविधियां: याचिका में यह भी कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के पास आय से अधिक संपत्ति है और उनके शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। 2. विवाद की पृष्ठभूमि: मौनी अमावस्या और पालकी विवाद इस कानूनी लड़ाई की जड़ें 18 जनवरी 2026 को हुए माघ मेले के विवाद में छिपी हैं: पालकी रोकी गई: मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोक दी थी। पुलिस ने उन्हें पैदल संगम जाने को कहा, जिसे शंकराचार्य के शिष्यों ने अपमान माना। धक्का-मुक्की और हिरासत: पुलिस और शिष्यों के बीच हुई झड़प में पालकी का क्षत्रप टूट गया और कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। इससे नाराज होकर शंकराचार्य बिना स्नान किए ही लौट गए। विवाद के बाद शिकायत: इस घटना के ठीक 6 दिन बाद, 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से पहली शिकायत की। 3. दो धाराओं में शिकायत: फर्जी लेटरपैड का मामला आशुतोष महाराज ने केवल शोषण ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए हैं: शंकराचार्य पद पर सवाल: शिकायत में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बताकर फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल कर रहे हैं। भ्रामक दस्तावेज: आरोप है कि प्रशासन को गुमराह करने के लिए "ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर" के नाम से फर्जी पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिनकी कोई कानूनी वैधता नहीं है। 4. रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच जुबानी जंग इस विवाद ने संतों के दो बड़े गुटों को आमने-सामने ला खड़ा किया है: रामभद्राचार्य का पक्ष: उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि संगम तक पालकी ले जाने का कोई नियम नहीं है। अविमुक्तेश्वरानंद को सही नोटिस दिया गया था। अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: उन्होंने रामभद्राचार्य पर कटाक्ष करते हुए कहा, "उन्हें लोग गंभीरता से नहीं लेते। वे हमारे कुल के नहीं हैं, वरना हमारा दर्द समझते।" 📊 अदालती कार्यवाही और घटनाक्रम तिथि घटनाक्रम 18 जनवरी मौनी अमावस्या पर पालकी विवाद हुआ। 24-27 जनवरी पुलिस कमिश्नर और माघ मेला एसपी को ईमेल/डाक से शिकायत भेजी गई। 8 फरवरी आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर की। 10 फरवरी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने कोर्ट में जवाब दाखिल किया और आरोपों को नकारा। 20 फरवरी दोनों पक्षों के वकीलों के बीच कोर्ट में अगली बहस और सुनवाई होगी। 5. अविमुक्तेश्वरानंद पक्ष की प्रतिक्रिया जब इन आरोपों पर अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर से संपर्क किया गया, तो उनके शिष्य मुकुलानंद ने बताया कि महाराज जी शाम को संगत में बैठेंगे, तब वे इन प्रश्नों का उत्तर देंगे। फिलहाल उनके वकीलों ने इन सभी आरोपों को निराधार और षड्यंत्र का हिस्सा बताया है।

रवि चौहान फ़रवरी 11, 2026 0
पत्नी के साथ पंखे पर लटके मिले रिटायर्ड दरोगा
मेरठ में रिटायर्ड दरोगा और पत्नी ने की आत्महत्या; एक ही पंखे पर लटके मिले शव, अकेलापन या कोई और राज?

मेरठ में सनसनी: रिटायर्ड दरोगा और पत्नी ने एक ही पंखे पर फंदा लगाकर दी जान; अखबार मेज पर खुला मिला, सुसाइड की गुत्थी उलझी मेरठ | 11 फरवरी 2026 उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रक्षापुरम इलाके में बुधवार सुबह एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई। एक रिटायर्ड दरोगा और उनकी पत्नी के शव उनके घर के अंदर एक ही पंखे से लटके हुए मिले। पुलिस और फॉरेंसिक विभाग इस मामले की जांच में जुटे हैं, लेकिन घर के हालात और परिजनों के बयान इस घटना को और भी रहस्यमयी बना रहे हैं। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और अब तक हुई जांच का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. घटना का खुलासा: जब मेड पहुंची काम पर गंगानगर थाना क्षेत्र से सटे रक्षापुरम सेक्टर-4 में यह दर्दनाक हादसा हुआ। समय: बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे। पहचान: रिटायर्ड दरोगा लल्लू सिंह (68 वर्ष) और उनकी पत्नी संतोष। कैसे पता चला: जब घर पर रोज की तरह काम करने वाली मेड पहुंची, तो उसने दरवाजा खुला देखा। अंदर जाने पर कमरे का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। दोनों के शव एक ही पंखे पर अलग-अलग फंदे से लटके हुए थे। 2. कौन थे लल्लू सिंह और क्या है उनका पारिवारिक बैकग्राउंड? लल्लू सिंह का जीवन और उनका परिवार मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से गहराई से जुड़ा था: नौकरी और रिटायरमेंट: लल्लू सिंह मूल रूप से हापुड़ के ग्राम ददारा श्यामपुर के निवासी थे। वह उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा थे और उनकी आखिरी पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में थी, जहाँ से वे 2020 में रिटायर हुए थे। मकान: रक्षापुरम का यह घर उन्होंने करीब 20 साल पहले अपनी सर्विस के दौरान ही बना लिया था, ताकि रिटायरमेंट के बाद सुकून से रह सकें। बेटा: उनका एक बेटा संदीप है, जो पहले एयरपोर्ट पर कार्यरत था और 2022 में रिटायर होकर वापस आ गया। फिलहाल संदीप बैंकिंग की तैयारी कर रहा है और अपने परिवार के साथ मेरठ की ही गंगा धाम कॉलोनी में रहता है। 3. 'अकेलापन' या कुछ और? पुलिस की जांच के मुख्य बिंदु पुलिस की प्रारंभिक जांच में 'अकेलापन' मौत की एक संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन कई ऐसे तथ्य हैं जो सुसाइड पर सवाल खड़े कर रहे हैं: अखबार का खुला मिलना: पुलिस को कमरे में मेज पर अखबार खुला हुआ मिला। ऐसा लग रहा था मानो कोई उसे अभी-अभी पढ़ रहा था। सामान्यतः सुसाइड करने वाला व्यक्ति मानसिक तनाव में होता है और ऐसी दिनचर्या (अखबार पढ़ना) संदिग्ध लगती है। शवों की स्थिति: डॉक्टरों और फॉरेंसिक टीम के अनुसार, शव पूरी तरह अकड़ चुके थे, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत घटना की जानकारी मिलने से 7-8 घंटे पहले (यानी मंगलवार रात) हो चुकी थी। व्यवहार: पड़ोसियों का कहना है कि लल्लू सिंह और संतोष बहुत अनुशासित थे। लल्लू सिंह सुबह 5 बजे उठकर पौधों में पानी देते थे और सफाई करते थे, जबकि संतोष दूध और घर का अन्य सामान लाने बाहर जाया करती थीं। मंगलवार शाम भी उन्हें दूध लाते देखा गया था। 📊 मेरठ सुसाइड केस: एक नजर में तथ्य विवरण जानकारी मृतक लल्लू सिंह (68) और संतोष स्थान सेक्टर-4, रक्षापुरम, मेरठ रिटायरमेंट 2020 (मुजफ्फरनगर से) मौत का समय मंगलवार रात (संभावित) जांच अधिकारी एसपी देहात अभिजीत कुमार, IPS बजरंग प्रसाद सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ 4. परिजनों और रिश्तेदारों का शक लल्लू सिंह के भांजे सत्येंद्र चौधरी और अन्य रिश्तेदारों का मानना है कि यह आत्महत्या नहीं हो सकती: खुशमिजाज स्वभाव: रिश्तेदारों के अनुसार, दोनों बहुत खुशमिजाज थे और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। भविष्य की योजनाएं: हाल ही में उन्होंने अपने गांव हापुड़ में दो बीघा जमीन खरीदी थी और वहां खेती कर रहे थे। मंगलवार को ही वे गांव होकर लौटे थे। जो व्यक्ति भविष्य के लिए संपत्ति खरीद रहा हो और गांव में सक्रिय हो, वह अचानक सुसाइड क्यों करेगा? 5. पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई सूचना मिलते ही एसपी देहात अभिजीत कुमार और IPS (अंडर ट्रेनी) बजरंग प्रसाद मौके पर पहुंचे। निरीक्षण: अधिकारियों ने उस कमरे का बारीकी से निरीक्षण किया जहां पंखे से शव लटके मिले थे। पूछताछ: बेटे संदीप और पड़ोसियों से पूछताछ की गई है। पोस्टमार्टम: शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह (दम घुटने से मौत या कुछ और) साफ हो पाएगी।

रवि चौहान फ़रवरी 11, 2026 0
शादाब जकाती बोले- दोषी निकला तो अपना गला काट लूंगा
मेरठ के रील स्टार शादाब जकाती पर बंधक बनाने का केस दर्ज; एसएसपी के आदेश पर हुई कार्रवाई; शादाब ने दी सफाई।

शादाब जकाती पर FIR: '10 वाला बिस्कुट' फेम इन्फ्लुएंसर पर बंधक बनाने और शोषण का केस; एसएसपी की फटकार के बाद जागी मेरठ पुलिस मेरठ | 6 फरवरी 2026 '10 वाला बिस्कुट' रील से देशभर में मशहूर हुए मेरठ के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर शादाब जकाती की मुश्किलें अब कानूनी पचड़े में बदल गई हैं। झारखंड की रहने वाली महिला यूट्यूबर चांदनी उर्फ तबस्सुम के गंभीर आरोपों के बाद, मेरठ पुलिस ने शादाब के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई तब हुई जब पीड़िता ने एसएसपी ऑफिस पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। यहाँ इस मामले के ताजा अपडेट्स और पूरी कहानी दी गई है: 1. एसएसपी की दखल के बाद दर्ज हुई FIR पीड़िता चांदनी ने आरोप लगाया कि जब वह दो दिन पहले इंचौली थाने गई थी, तो दरोगा ने उसे भगा दिया था और शादाब को 'शरीफ' बताया था। पुलिस को फटकार: शुक्रवार सुबह चांदनी अपने पति और बच्चे के साथ एसएसपी ऑफिस पहुंची। आपबीती सुनने के बाद एसएसपी ने इंचौली पुलिस को कड़ी फटकार लगाई, जिसके बाद तुरंत मुकदमा दर्ज किया गया। धमकियों का साया: चांदनी का कहना है कि केस दर्ज होने के बाद उसे धमकियां मिल रही हैं और उसके मकान मालिक ने उसे घर खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है। 2. संगीन आरोप: बंधक बनाना और अश्लील कंटेंट चांदनी ने शादाब जकाती पर रील बनाने के बहाने शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं: एक साल तक कैद: आरोप है कि शादाब ने महिला को एक साल तक बंधक बनाकर रखा और घर के सारे काम कराए। पत्नी पर मारपीट का आरोप: चांदनी ने बताया कि शादाब की पत्नी साजिया ने 15 जनवरी को उसके साथ मारपीट की और उसे बदनाम करने की धमकी दी। अश्लील कंटेंट का दावा: पीड़िता के अनुसार, शादाब मोटिवेशनल वीडियो की आड़ में अश्लील कंटेंट तैयार करता है और कई महिलाओं का इसी तरह शोषण कर चुका है। 3. शादाब जकाती की सफाई: "गर्दन काट लूंगा" मुकदमा दर्ज होने के बाद शादाब जकाती ने 'X' (ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट कर अपना पक्ष रखा: मदद का दावा: शादाब ने कहा कि उन्होंने महिला के बच्चे की स्कूल फीस भरी और उसे किताबें दिलाईं। चुनौती: उन्होंने वीडियो में कहा, "अगर मेरी जरा सी भी गलती निकल आए, तो मैं अपनी गर्दन खुद काट लूंगा।" 📊 शादाब जकाती: विवादों का पुराना नाता घटना विवरण पहचान '10 वाला बिस्कुट कितने का है' रील से ग्लोबल फेम। पिछली गिरफ्तारी एक बच्ची और उसकी मां पर 'Kiss' मांगने और अभद्र कमेंट करने वाले वीडियो के लिए। ताजा केस बंधक बनाना, मारपीट, शोषण और जान से मारने की धमकी (FIR दर्ज)। करियर सऊदी अरब में पूर्व ड्राइवर, अब मेरठ का मशहूर रील स्टार। 4. पुलिस की अगली कार्रवाई इंचौली थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने पुष्टि की है कि पीड़िता द्वारा उपलब्ध कराई गई रील्स और सबूतों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब शादाब जकाती और उसके परिवार से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

रवि चौहान फ़रवरी 6, 2026 0
मेरठ के इंफ्लुएंसर शादाब जकाती पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप; बंधक बनाने और शोषण का दावा।
मेरठ के इंफ्लुएंसर शादाब जकाती पर महिला ने लगाए गंभीर आरोप; बंधक बनाने और शोषण का दावा।

शादाब जकाती पर गंभीर आरोप: '10 वाला बिस्कुट' फेम इंफ्लुएंसर ने महिला को बनाया बंधक; अश्लील कंटेंट और शोषण का दावा मेरठ | 5 फरवरी 2026 '10 वाला बिस्कुट कितने का...' रील से रातों-रात मशहूर हुए मेरठ के सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर शादाब जकाती बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं। झारखंड की रहने वाली एक महिला यूट्यूबर ने उन पर एक साल तक बंधक बनाकर रखने, घरेलू काम कराने और शारीरिक व मानसिक शोषण करने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। यहाँ इस पूरे विवाद की मुख्य बातें दी गई हैं: 1. पीड़िता का आरोप: "शादाब ने जिंदगी बर्बाद की" पीड़िता चांदनी उर्फ तबस्सुम (यूट्यूबर) ने मेरठ के इंचौली थाने में तहरीर दी है: बंधक और धमकी: चांदनी का दावा है कि शादाब ने उसे काम देने के बहाने बुलाया और एक साल तक घर में बंधक बनाकर रखा। विरोध करने पर उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी गई। अश्लील कंटेंट: महिला का आरोप है कि शादाब मोटिवेशनल वीडियो के नाम पर अश्लील कंटेंट बनाता है और महिलाओं का शोषण करता है। मारपीट: आरोप है कि 15 जनवरी को शादाब की पत्नी साजिया ने भी चांदनी के साथ बुरी तरह मारपीट की, जिसके बाद वह सुसाइड करने वाली थी, लेकिन पति के साथ मिलने पर उसने पुलिस की शरण ली। 2. कौन है शादाब जकाती? शादाब जकाती मेरठ के इंचौली क्षेत्र का रहने वाला है और सऊदी अरब में ड्राइवर रह चुका है। फेमस रील: उसका डायलॉग "10 वाला बिस्कुट कितने का है जी..." इतना वायरल हुआ कि इसे बादशाह, रिंकू सिंह और कुलदीप यादव जैसे दिग्गजों ने कॉपी किया। विवादित इतिहास: शादाब पहले भी एक वीडियो के लिए गिरफ्तार हो चुका है, जिसमें उसने एक बच्ची की मां पर अभद्र कमेंट किए थे और बदले में 'KISS' की मांग की थी। 📊 शादाब जकाती केस: अब तक क्या हुआ? पक्ष विवरण पीड़िता चांदनी (झारखंड), 2017 से मेरठ में निवासी। आरोप बंधक बनाना, अश्लील कंटेंट निर्माण, मारपीट, शोषण। पुलिस कार्रवाई इंचौली थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है; अभी FIR दर्ज होना बाकी है। शादाब का पक्ष शादाब की ओर से अभी कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। 3. पुलिस का बयान इंचौली थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार त्रिपाठी के अनुसार, महिला की तहरीर मिल गई है। आरोप काफी गंभीर हैं, इसलिए मामले की गहराई से जांच की जा रही है। जांच के बाद ही मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

रवि चौहान फ़रवरी 5, 2026 0
अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो
Shankaracharya Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration: माघ मेला प्रशासन ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम; शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस चस्पा।

प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य की पदवी पर आर-पार; प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'क्या अब प्रशासन तय करेगा कि मैं शंकराचार्य हूं या नहीं?' प्रयागराज | 20 जनवरी 2026 संगम नगरी प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद ने अब बेहद उग्र रूप ले लिया है। मेला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शंकराचार्य के शिविर पर नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर यह साबित करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिख रहे हैं। वहीं, सड़क पर धरना दे रहे अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और संतों का अपमान करार दिया है। 1. रात 12 बजे नोटिस और सुबह की गहमागहमी प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब कानूनी नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मिडनाइट ड्रामा: सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। हालांकि, शिष्यों ने यह कहकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। नोटिस चस्पा: मंगलवार सुबह प्रशासन ने दोबारा शिविर का रुख किया और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। मुख्य आधार: नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के पद पर अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने पर रोक लगाई गई थी। 2. अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: 'प्रशासन की बंदूक, सुप्रीम कोर्ट का कंधा' नोटिस के जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सरकार के विरोधाभास: उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान खुद सरकार ने एक आधिकारिक पत्रिका छापी थी, जिसमें उन्हें 'शंकराचार्य' के रूप में संबोधित किया गया था। अब प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। पद की गरिमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई जिलाधिकारी या देश का राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही करेंगे। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं, अब प्रशासन को और क्या प्रमाण चाहिए?" 📊 विवाद के मुख्य बिंदु: पद, परंपरा और कानून श्रेणी प्रशासन का तर्क (नोटिस) शंकराचार्य का तर्क (जवाब) कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केस लंबित रहने तक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। कोर्ट ने पद पर बैठने से रोका है, लेकिन मान्यता संतों से मिलती है। शिविर का बोर्ड बोर्ड पर "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" लिखना कोर्ट की अवहेलना है। सरकार ने खुद अपनी पत्रिका में मुझे शंकराचार्य छापा है। मान्यता पदवी विवादित है (अविमुक्तेश्वरानंद बनाम वासुदेवानंद)। अन्य पीठों के शंकराचार्य मुझे स्वीकार करते हैं, यही सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्तमान स्थिति 24 घंटे में प्रमाण देने का अल्टीमेटम। जब तक माफी नहीं, तब तक आश्रम में प्रवेश नहीं; फुटपाथ पर रहेंगे। 3. मौनी अमावस्या का वो विवाद जिसने आग सुलगाई इस पूरे विवाद की जड़ 18 फरवरी (मौनी अमावस्या) को हुई घटना है। पालकी रोकने पर बवाल: शंकराचार्य पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। झड़प और हिरासत: शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पालकी को खींचकर संगम से 1 किमी दूर कर दिया था। प्रायश्चित धरना: इसी अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने शिविर त्याग दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर मेले में आएंगे, लेकिन प्रशासन के व्यवहार के विरोध में फुटपाथ पर ही रहेंगे। 4. ज्योतिषपीठ का पुराना विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है। प्रशासन इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक पदवी को चुनौती दे रहा है, जबकि शंकराचार्य इसे अपनी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
ठाकुर लड़के-दलित लड़की की लव स्टोरी
जेल में पारस सोम का खुलासा; 'रूबी ने दी थी भागने की सलाह, उसी के जूते पहनकर भागा था'; 3 साल की लवस्टोरी का सच।

मेरठ का सुनीता हत्याकांड: जेल में पारस सोम ने कबूली 3 साल की 'अधूरी लवस्टोरी'; बोला- 'रूबी ने भागने की जिद की, उसने मुझे अपने जूते तक दे दिए' मेरठ | 17 जनवरी 2026 मेरठ के चर्चित सुनीता हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। हत्या के मुख्य आरोपी पारस सोम से उसके वकील बलराम सोम ने मेरठ जिला जेल के मुलाकाती कमरे में करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस दौरान पारस ने अपनी और रूबी की 3 साल पुरानी प्रेम कहानी का खुलासा किया। पारस का दावा है कि वह निर्दोष है और पूरी साजिश रूबी के परिवार की ओर से उसकी शादी कहीं और तय करने के बाद शुरू हुई थी। 1. 9वीं का छात्र और 12वीं की छात्रा: स्कूल से शुरू हुआ सफर पारस ने बताया कि उनके प्यार की शुरुआत गांव के जनता इंटर कॉलेज से हुई थी। पहली मुलाकात: पारस तब 9वीं में था और रूबी 12वीं की छात्रा थी। उम्र में रूबी उससे बड़ी थी। स्कूल में पानी पीने के दौरान हुई एक मुस्कुराहट दोस्ती में बदल गई। शादी में इकरार: स्कूल छूटने के बाद करीब 3 साल पहले गांव की एक शादी में दोनों दोबारा मिले। वहीं से उनकी दोस्ती ने प्यार का रूप लिया। पारस ने बताया कि वे घंटों फोन पर बात करते थे और रूबी उसे 'लव लेटर' भी भेजती थी। 2. जब परिवार को पता चला 'अफेयर' का सच साल 2024 में दोनों के रिश्ते की खबर पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद स्थितियां बिगड़ गईं: पंचायती समझौता: दोनों परिवारों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पारस से उसका मोबाइल छीन लिया गया। छिपकर बातचीत: मोबाइल न होने पर पारस अपनी मां के फोन से या दोस्तों के फोन से रूबी से बात करता था। रूबी भी उसे कॉल करती थी। पारस का दावा है कि उसके पास आज भी वे चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स सुरक्षित हैं। 3. भागने की प्लानिंग: "जबरन शादी नहीं करूंगी" पारस के अनुसार, रूबी के घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर चुके थे। रूबी का अल्टीमेटम: रूबी ने अपने माता-पिता से साफ कह दिया था कि वह पारस के अलावा किसी से शादी नहीं करेगी। भागने की जिद: पारस ने वकील को बताया कि भागने की पूरी योजना रूबी की थी। उसने फोन पर रोते हुए कहा था, "हमें घर से भागना ही होगा, वरना ये लोग मेरी शादी जबरन करा देंगे।" 📊 केस फाइल: पारस और रूबी की फरारी का सच घटनाक्रम विवरण हत्या का दिन पारस का दावा है कि उसने सुनीता (रूबी की मां) को नहीं मारा, वह निर्दोष है। नंगे पांव फरारी कपसाड़ से भागते समय पारस का जूता नहर में बह गया। तब रूबी ने अपने जूते उतारकर पारस को दिए। सफर ट्रक से लिफ्ट लेकर सहारनपुर पहुंचे। पकड़े जाने के समय भी पारस ने रूबी के ही जूते पहने थे। पारस की मांग "मैं आज भी रूबी से शादी करना चाहता हूं, वह दबाव में झूठ बोल रही है।" 4. रूबी के यू-टर्न पर पारस का दर्द जेल में पारस इस बात को लेकर सबसे ज्यादा परेशान दिखा कि रूबी अब उसके खिलाफ बयान क्यों दे रही है। दबाव का शक: पारस ने वकील से कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा वह झूठ क्यों बोल रही है। शायद उसके घरवाले उसे डरा रहे हैं या बंधक बना लिया है।" सबूतों का दावा: पारस ने बताया कि उसके पास रूबी के लिखे लव लेटर, साथ में खिंचवाई गई फोटो और चैट्स के बैकअप मौजूद हैं, जो वह कोर्ट में पेश करेगा। 5. वकील का पक्ष: "पारस अभी सदमे में है" वकील बलराम सोम के अनुसार, पारस फिलहाल मानसिक तनाव और घबराहट में है। कानूनी रणनीति: बचाव पक्ष अब उन कॉल डिटेल्स और मैसेज को जुटाने में लगा है, जो यह साबित कर सकें कि रूबी अपनी मर्जी से पारस के साथ गई थी। अगली मुलाकात: वकील अब पारस की मुलाकात उसके माता-पिता से कराएंगे ताकि वह सामान्य हो सके और घटना वाली रात का पूरा विवरण दे सके।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
सोनू हत्याकांड- मेरठ कमिश्नरी पर प्रदर्शन
मेरठ में कश्यप समाज का बड़ा प्रदर्शन; 'जिंदा जलाने' के आरोपी को बचाने का आरोप; बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल।

मेरठ का सोनू हत्याकांड: कमिश्नरी पर कश्यप समाज का 'महाआक्रोश'; 'बुलडोजर' और 'जातिवाद' के आरोपों से गरमाई सियासत; 80 हजार की लूट और जिंदा जलाने की दहला देने वाली कहानी मेरठ (उत्तर प्रदेश) | 16 जनवरी 2026 मेरठ का ज्वालागढ़ क्षेत्र आज एक बार फिर सुलग उठा है। सोनू कश्यप की नृशंस हत्या के विरोध में शुक्रवार को कश्यप और निषाद समाज ने कमिश्नरी पार्क पर धावा बोल दिया। भारी पुलिस बल, PAC की दो कंपनियों और बैरिकेडिंग के बावजूद हजारों की संख्या में लोग 'सोनू को न्याय दो' के नारे लगाते हुए धरने पर बैठ गए हैं। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि 'OBC बनाम ठाकुर' की राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आरोपी मुख्यमंत्री की बिरादरी से है, इसलिए पुलिस उसे बचा रही है। 1. दहला देने वाली वारदात: 80 हजार की लूट और जिंदा जलाया ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, यह हत्याकांड किसी भी रूह को कंपा देने वाला है। आखिरी बातचीत: सोनू की मौसी मदनवती ने बताया कि 5 जनवरी को सोनू ने फोन कर कहा था, "मौसी, मैं 80 हजार रुपए लेकर आ रहा हूं, भैया के साथ मिलकर नई बाइक खरीदेंगे।" * क्रूरता की हद: सोनू को बाइक तो क्या मिली, उसकी जान ले ली गई। पहले उसके सिर पर ईंट से हमला किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पहचान छिपाने के लिए उसके शरीर पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया गया। लूट: परिजनों का आरोप है कि सोनू के पास मौजूद 80 हजार रुपए गायब हैं, जिसका पुलिस ने कोई हिसाब नहीं दिया है। 2. प्रदर्शनकारियों की 5 प्रमुख मांगें सोनू के परिजनों और कश्यप समाज ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं: निष्पक्ष जांच: पुलिस केवल एक 'नाबालिग ऑटो ड्राइवर' को पकड़कर पल्ला झाड़ रही है, जबकि परिवार का दावा है कि इसमें कई रसूखदार लोग शामिल हैं। आर्थिक सहायता: गरीब परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद मुआवजे की तत्काल मांग। सरकारी नौकरी: सोनू की बड़ी बहन आरती कश्यप को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। सुरक्षा: गवाहों और परिवार को जान का खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग। रुपयों की बरामदगी: लूटे गए 80 हजार रुपए बरामद कर परिवार को सौंपे जाएं। 📊 मेरठ लाइव अपडेट: पल-पल की हलचल समय घटनाक्रम और अपडेट 02:02 PM सोनू की बहन आरती कश्यप का रो-रोकर बुरा हाल; कहा- पुलिस हमारे समर्थकों को रोक रही है। 02:30 PM आगरा, मुजफ्फरनगर और शामली से समर्थकों का पहुंचना जारी; पुलिस ने शहर की सीमाओं पर की नाकाबंदी। 03:44 PM सपा MLC किरण पाल को पुलिस ने सराधना पुल पर रोका; वे समर्थकों संग हाईवे पर ही धरने पर बैठे। 04:57 PM VIP पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का तीखा हमला- "पिछड़ा वर्ग का आरोपी होता तो अब तक बुलडोजर चल गया होता।" 06:48 PM कमिश्नरी पार्क छावनी में तब्दील; कश्यप समाज ने रात भर धरना देने का किया ऐलान। 3. 'बुलडोजर' और 'जातिवाद' पर छिड़ी जंग विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और कश्यप समाज के नेताओं ने सरकार की 'बुलडोजर नीति' पर सवाल उठाए हैं। पक्षपात का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बुलडोजर बिरादरी देखकर चलता है। अगर अपराधी ठाकुर समाज का है, तो कानून ढीला हो जाता है। वोट की चोट: "हम सरकार बना सकते हैं तो गिरा भी सकते हैं।" निषाद पार्टी और कश्यप समाज के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला, तो आगामी चुनावों में भाजपा को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 4. पुलिस का 'हाउस अरेस्ट' और घेराबंदी प्रशासन ने इस महापंचायत को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। नजरबंदी: आजाद समाज पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीव पाल समेत कई नेताओं को उनके घरों में ही 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर दिया गया है। सुरक्षा घेरा: कमिश्नरी पार्क की ओर आने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है ताकि भीड़ और न बढ़ सके।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ब्लू ड्रम केस में फरवरी तक हो सकती है सजा
मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत मर्डर केस में फरवरी में आएगा फैसला; पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को हो सकती है फांसी।

मेरठ 'ब्लू ड्रम' हत्याकांड: फरवरी 2026 तक आ सकता है फैसला; मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ की कातिल पत्नी और प्रेमी को मौत की सजा की मांग मेरठ के सबसे सनसनीखेज 'ब्लू ड्रम' मर्डर केस में इंसाफ की घड़ी करीब आ गई है। मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में आरोपी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फरवरी 2026 के अंत तक सजा सुनाई जा सकती है। सरकारी अधिवक्ता और पीड़ित पक्ष के वकीलों की तेज पैरवी ने इस केस को फाइनल स्टेज तक पहुंचा दिया है। 1. ट्रायल का स्टेटस: फरवरी में फैसले की प्रबल संभावना शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, सौरभ हत्याकांड का मुकदमा अब अपने अंतिम चरण (Final Phase) में है। गवाहियां लगभग पूरी: केस में अब तक 14 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अंतिम साक्ष्य: अब केवल 2-3 तकनीकी गवाहों की गवाही शेष है। इसमें मुख्य रूप से फॉरेंसिक फील्ड यूनिट इंचार्ज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (CCTV और मोबाइल डेटा) का 65B सर्टिफिकेट देने वाले विशेषज्ञ की गवाही होनी है। फाइनल आर्गुमेंट: इन गवाहियों के तुरंत बाद कोर्ट में अंतिम बहस शुरू होगी। जिस तेजी से सुनवाई हो रही है, माना जा रहा है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह तक अदालत अपना फैसला सुना देगी। 2. जघन्य हत्याकांड: रिश्तों का कत्ल और क्रूरता की हदें सौरभ राजपूत की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय क्रूरता की पराकाष्ठा थी। वकीलों ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (विरलतम से विरल) श्रेणी का मामला बताया है। तीन टुकड़ों में लाश: आरोपियों ने सौरभ की हत्या के बाद उसके शरीर को तीन हिस्सों में काट दिया था। गर्दन और हाथों के पंजों को शरीर से अलग कर दिया गया था। सीमेंट से सील ड्रम: सबूत मिटाने के लिए शव को एक नीले ड्रम में डालकर उसमें सीमेंट भर दिया गया था, ताकि गंध बाहर न आए और लाश कभी न मिले। विश्वासघात: पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते का कत्ल करते हुए मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। 📊 केस फाइल: सौरभ राजपूत मर्डर मिस्ट्री विवरण प्रमुख जानकारी पीड़ित सौरभ राजपूत (मर्चेंट नेवी ऑफिसर) मुख्य आरोपी मुस्कान (पत्नी) और साहिल (प्रेमी) जेल की स्थिति दोनों 17 मार्च 2025 से मेरठ जिला जेल में बंद हैं। अपराध की प्रकृति हत्या, साक्ष्य मिटाना, आपराधिक साजिश (धारा 302, 201, 120B)। संभावित सजा मृत्युदंड (Fanging) या आजीवन कारावास। 3. क्या मुस्कान की नवजात बच्ची से सजा कम होगी? हाल ही में आरोपी मुस्कान ने जेल में एक बच्ची को जन्म दिया है। इस पर कानूनी विशेषज्ञों का रुख स्पष्ट है: सजा पर असर नहीं: कानून के अनुसार, जेल में महिला बंदी के बच्चे के पालन-पोषण का अलग प्रावधान है। 6 साल तक बच्चा मां के साथ जेल में रह सकता है, लेकिन यह मां के अपराध की गंभीरता या उसकी सजा को कम करने का आधार नहीं बन सकता। समान रोल, समान सजा: अभियोजन पक्ष का दावा है कि साहिल और मुस्कान दोनों का उद्देश्य और अपराध में भागीदारी 'समान' थी, इसलिए दोनों को फांसी या उम्रकैद की समान सजा मिलनी तय है। 4. मेरठ पुलिस और साक्ष्यों की मजबूती पुलिस ने इस केस में इलेक्ट्रॉनिक और साइंटिफिक साक्ष्यों का ऐसा जाल बुना है जिससे आरोपियों का बचना नामुमकिन माना जा रहा है। CCTV फुटेज: ड्रम ले जाते हुए और सामान खरीदते हुए आरोपियों की फुटेज। मोबाइल लोकेशन: हत्या के समय और शव को ठिकाने लगाने के दौरान दोनों की लोकेशन एक ही स्थान पर पाई गई। DNA रिपोर्ट: ड्रम से मिले अवशेषों का सौरभ के परिवार से मिलान।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
मेरठ सोनू कश्यप हत्याकांड पर शुरू हुई सियासत
रोनू कश्यप हत्याकांड पर भड़की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने की मुआवजे की मांग; 18 को महापंचायत।

मेरठ का 'ज्वालागढ़ कांड': रोनू कश्यप की 'क्रूर' हत्या पर गरमाई यूपी की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा; 18 को महापंचायत मेरठ का सरधना क्षेत्र इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उससे सटे ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक रोनू उर्फ सोनू कश्यप (28) की वीभत्स हत्या ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ पुलिस इसे आपसी विवाद और नाबालिग का कृत्य बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ज़िंदा जलाने' की अमानवीय घटना करार देकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहा है। 1. क्या है ज्वालागढ़ कांड? (क्राइम फाइल) 5 जनवरी 2026 (सोमवार) को मेरठ के सरधना में अक्खेपुर-रार्धना रोड पर एक अधजली लाश मिली। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के रोनू कश्यप के रूप में हुई। पुलिस की थ्योरी: पुलिस के अनुसार, रोनू और एक 16 वर्षीय टेंपो चालक के बीच टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पहले रोनू को शराब पिलाई, फिर ईंट से सिर वार कर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घसीटकर पत्तों और मोबिल ऑयल से जला दिया। परिजनों का आरोप: परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि रोनू को ज़िंदा जलाया गया है और इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई लोग शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि रोनू से 80,000 रुपये भी लूटे गए थे। 📊 पीड़ित परिवार की मार्मिक स्थिति सदस्य स्थिति रोनू कश्यप (मृतक) परिवार का इकलौता सहारा, मुंबई में हलवाई का काम करता था। बुजुर्ग माँ गंभीर रूप से बीमार, बेटे की शादी के सपने देख रही थीं। बड़ा भाई टीबी (TB) का मरीज, लंबे समय से इलाज चल रहा है। बड़ी बहन अविवाहित, दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। मकसद रोनू अपनी शादी के लिए लड़की देखने मुजफ्फरनगर से गांव आया था। 2. सियासी 'ज्वाला': अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर के कड़े तेवर इस घटना ने ठाकुर बनाम कश्यप (पिछड़ा वर्ग) का रंग ले लिया है, जिससे विपक्ष को 'PDA' और 'दलित-पिछड़ा' राजनीति को धार देने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव (सपा): उन्होंने इसे 'दबंगों का कुकृत्य' बताते हुए ट्वीट किया— "हम पूरे PDA समाज की तरफ से आवाज़ उठाते हैं। न्याय हो!" मायावती (BSP): बसपा सुप्रीमो ने इसे अति क्रूर और शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने शासन-प्रशासन से अपराधियों के मन में 'कानून का डर' पैदा करने की मांग की। चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नगीना सांसद ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी व मुआवजा मिले। चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया है। नरेंद्र कश्यप (राज्यमंत्री): सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के लिए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप 14 जनवरी को मेरठ पहुँच रहे हैं। 3. स्थानीय विरोध और 18 जनवरी की महापंचायत अतुल प्रधान की सक्रियता: सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलकर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया है। कश्यप समाज का आक्रोश: 12 जनवरी को मुजफ्फरनगर डीएम कार्यालय पर भारी प्रदर्शन हुआ। अब कश्यप समाज ने 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दौराला में एक विशाल 'शोक सभा' और पंचायत बुलाई है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। 4. पुलिस की जांच और 'नाबालिग' का पेंच मेरठ पुलिस के लिए यह केस सिरदर्द बन गया है। साक्ष्य: पुलिस ने शराब के पाउच के बारकोड और ठेके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से आरोपी को ट्रैक किया। विवाद: पुलिस ने 24 घंटे में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए केवल एक नाबालिग पर ठीकरा फोड़ रही है।

रवि चौहान जनवरी 13, 2026 0
बच्चे की तरह भाई से चिपकी कपसाड़ कांड पीड़िता
रूबी पहुंची घर; वीडियो में दिखे सजे हाथ और नया सूट, उठी शादी की चर्चा; आरोपी पारस के नाबालिग होने का दावा।

मेरठ: रूबी की घर वापसी और 'सजे हाथों' का रहस्य; आरोपी पारस के नाबालिग होने का दावा; भावुक भाई ने गले लगा कर कहा- 'तू आ गई, इतना काफी है' मेरठ के चर्चित कपसाड़ कांड की पीड़िता रूबी 5 दिन बाद आखिरकार अपने घर पहुँच गई है। 12 जनवरी की रात लगभग 8 बजे पुलिस सुरक्षा के बीच उसे परिजनों को सौंपा गया। हालांकि, रूबी की बरामदगी के बाद सामने आए एक वीडियो और आरोपी पारस की उम्र को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। 1. घर वापसी और 'वाइन कलर' के सूट की चर्चा आशा ज्योति केंद्र से निकलते वक्त रूबी को शॉल और कंबल से पूरी तरह ढका गया था, लेकिन सुरक्षा घेरे से कार तक पहुँचने के दौरान उसके पहनावे ने सबका ध्यान खींचा। मैचिंग नेलपेंट और सजावटी सूट: वीडियो में रूबी वाइन (गहरे लाल) रंग का गोटेदार नया सूट और हाथों में मैचिंग नेलपेंट लगाए नजर आ रही है। गले में लाल रंग का सजावटी दुपट्टा भी चर्चा का विषय है। सवाल और कयास: 8 जनवरी को रूबी मजदूरी (गन्ना छीलने) के लिए पुराने कपड़ों में घर से निकली थी। चर्चा है कि फरारी के दौरान उसके पास ये नए सजावटी कपड़े और नेलपेंट कहाँ से आए? क्या रूबी और पारस ने इस दौरान शादी कर ली थी? भावुक क्षण: कार में बैठते ही बड़े भाई नरसी ने रूबी को सीने से लगा लिया। रूबी अपनी मां को न बचा पाने के गम में रोती रही, जिस पर भाई ने ढांढस बंधाया— "मां चली गई उसका अफसोस है, लेकिन तू सही-सलामत आ गई, हमारे लिए इतना ही काफी है।" 2. आरोपी पारस: बालिग या नाबालिग? इस मामले में एक और बड़ा कानूनी पेंच फंस गया है। आरोपी पारस सोम के दस्तावेजों के आधार पर उसके नाबालिग होने का दावा किया जा रहा है। दस्तावेजी उम्र: आरोपी के वकील बलराम सोम के अनुसार, पारस की उम्र 18 साल पूरा होने में अभी 4 महीने बाकी हैं। कानूनी प्रभाव: यदि पारस नाबालिग सिद्ध होता है, तो उसे जिला जेल में नहीं रखा जा सकता। उसे किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के सामने पेश कर बाल सुधार गृह भेजा जाएगा। मंगलवार को वकील कोर्ट में इसके पुख्ता दस्तावेज पेश करेंगे। पुलिस की स्थिति: पुलिस ने पारस को न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेजा है, लेकिन उम्र के विवाद के बाद अब उसकी बोन-मैरो टेस्ट या मार्कशीट की जांच अनिवार्य हो गई है। 📊 रूबी केस: घटना से घर वापसी तक तारीख घटनाक्रम 8 जनवरी खेत जाते समय मां की हत्या और रूबी का कथित अपहरण। 10 जनवरी सहारनपुर/रुड़की से पारस और रूबी की बरामदगी। 11 जनवरी एसीजेएम-2 कोर्ट में रूबी के धारा 164 के तहत बयान दर्ज। 12 जनवरी काउंसलिंग के बाद रात 8 बजे रूबी को परिजनों को सौंपा गया। वर्तमान स्थिति रूबी घर पर सुरक्षित; गांव में भारी पुलिस बल और कैमरे तैनात। 3. सुरक्षा के कड़े इंतजाम कपसाड़ गांव में अभी भी तनावपूर्ण शांति है। रूबी की सुरक्षा को देखते हुए उसके घर के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस का कड़ा पहरा है। पुलिस अधिकारी अब रूबी के 164 के बयानों और पारस की उम्र के दस्तावेजों के आधार पर चार्जशीट तैयार करने में जुटे हैं।

रवि चौहान जनवरी 13, 2026 0
'मेरा रूबी से 3 साल पुराना अफेयर, मैं निर्दोष हूं'
पारस सोम जेल भेजा गया; कोर्ट में कहा- 'रिश्ता सच्चा है'; रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा।

मेरठ हत्याकांड: "जज साहब! मैं निर्दोष हूं, हमारा रिश्ता सच्चा है" — कोर्ट में पारस की गुहार; 14 दिन की जेल, रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा मेरठ के कपसाड़ गांव में मां की हत्या और बेटी के कथित अपहरण मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी पारस सोम ने मेरठ की कोर्ट में खुद को बेगुनाह बताते हुए इस पूरी घटना को 'प्रेम प्रसंग' का नाम दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पारस को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। यहाँ इस पूरे कानूनी ड्रामे और पुलिस की जांच का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. कोर्ट रूम ड्रामा: पारस सोम की दलील विशेष सीजेएम विकास सावन की कोर्ट में पेशी के दौरान पारस सोम ने भावुक होकर जज के सामने अपनी बात रखी। बयान: "जज साहब! मैं निर्दोष हूं। मेरा और रूबी का रिश्ता 3 साल पुराना और सच्चा है। कोई किडनैपिंग नहीं हुई, वह अपनी मर्जी से मेरे साथ आई थी।" बचाव पक्ष का दावा: पारस के वकील बलराम सोम का कहना है कि उनके मुवक्किल को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और वे जेल में मिलकर पूरी सच्चाई सामने लाएंगे। न्यायिक आदेश: कोर्ट ने पारस को जेल भेज दिया है। दूसरी ओर, रूबी को एसीजेएम-2 नम्रता की कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। 📍 फरारी की पूरी टाइमलाइन (60 घंटे का घटनाक्रम) तारीख समय स्थान और गतिविधि 8 जनवरी दोपहर कपसाड़ में हत्या के बाद पारस और रूबी खतौली पहुँचे। 8 जनवरी रात दिल्ली के एक होटल में रुके। यहाँ रूबी को मां की मौत की खबर मिली। 9 जनवरी दिन गुरुग्राम में दोस्त के यहाँ रुके; मीडिया के जरिए गांव के हालात देखे। 9 जनवरी रात गुरुग्राम से ट्रेन पकड़कर सहारनपुर (टपरी गांव) अपनी बहन के घर पहुँचे। 10 जनवरी शाम हरिद्वार जाते समय रुड़की रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने दोनों को दबोचा। 2. एसएसपी मेरठ का बयान: "4 राज्यों के 7 जिलों में दबिश" एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने सफल ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया: पुलिस की तत्परता: 10 से ज्यादा टीमें गठित की गई थीं। 60 घंटों के भीतर आरोपी को अरेस्ट और युवती को सकुशल बरामद किया गया। ट्रैकिंग: मैनुअल मुखबिरी, इंटेलिजेंस और सर्विलांस के जरिए पुलिस ने इनका पीछा किया। 4 राज्यों के 7 जिलों में पुलिस ने छापे मारे थे। मेडिकल और बयान: युवती का मेडिकल कराया गया है और कोर्ट में उसके बयान दर्ज कराए जा रहे हैं। इन्हीं बयानों के आधार पर मुकदमे में आगे की धाराएं बढ़ाई जाएंगी। 3. सियासत और गांव का तनाव यह मामला दलित बनाम राजपूत होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। चंद्रशेखर और अतुल प्रधान: सांसद चंद्रशेखर आजाद और सपा विधायक अतुल प्रधान के हस्तक्षेप के बाद गांव में भारी पुलिस बल और आरएएफ (RAF) तैनात है। अंतिम संस्कार: वारदात के 30 घंटे बाद और प्रशासन द्वारा 10 लाख की मदद के आश्वासन के बाद ही मृतका का अंतिम संस्कार हो सका था।

रवि चौहान जनवरी 12, 2026 0
मेरठ में अगवा करके दलित लड़की को दिल्ली ले गया
रूबी और पारस सहारनपुर से गिरफ्तार; 3 साल के अफेयर की कहानी आई सामने; मेरठ कोर्ट में पेशी आज।

मेरठ हत्याकांड में नया मोड़: 'अफेयर' के लिए मां की हत्या और फिर फरार; सहारनपुर से पकड़े गए रूबी और पारस मेरठ के कपसाड़ गांव में हुए चर्चित हत्याकांड और युवती के अपहरण मामले ने अब एक बिल्कुल नया मोड़ ले लिया है। पुलिस कस्टडी में आरोपी पारस सोम ने जो खुलासे किए हैं, उन्होंने शुरुआती 'अपहरण' की कहानी को 'प्रेम प्रसंग और आपसी सहमति से भागने' की ओर मोड़ दिया है। हालांकि, मां की बेरहमी से हत्या का आरोप अभी भी पारस पर बरकरार है। 1. 3 साल का अफेयर और भागने का खौफनाक अंत पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी पारस सोम ने बताया कि वह और रूबी पिछले तीन सालों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। शादी का दबाव: हाल ही में रूबी के परिजनों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। इसी बात से परेशान होकर दोनों ने घर छोड़कर भागने का प्लान बनाया। हत्या की वजह: 8 जनवरी को जब दोनों भागने वाले थे, तब मां सुनीता ने इसका विरोध किया। गुस्से में आकर पारस ने फरसे से हमला कर उनकी हत्या कर दी और रूबी को साथ ले गया। अंतिम संस्कार का विवाद: इस खौफनाक वारदात के बाद परिवार 30 घंटे तक अंतिम संस्कार न करने पर अड़ा रहा, जिसे प्रशासन ने 10 लाख के मुआवजे और न्याय के भरोसे के बाद शांत कराया। 📍 फरारी का रूट: कपसाड़ से सहारनपुर तक का सफर तारीख स्थान क्या हुआ? 8 जनवरी खतौली वारदात के बाद पारस अपनी रिश्तेदारी में पहुँचा। 8 जनवरी रात दिल्ली एक होटल में रात बिताई, यहीं रूबी को माँ की मौत का पता चला। 9 जनवरी गुरुग्राम पारस अपने दोस्त के यहाँ रुका और मीडिया पर नजर रखी। 9 जनवरी रात सहारनपुर गुरुग्राम से ट्रेन पकड़कर टपरी (सहारनपुर) अपनी बहन के घर पहुँचे। 10 जनवरी रुड़की स्टेशन हरिद्वार जाते समय पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। 2. सर्विलांस और पुलिस की घेराबंदी पारस का मोबाइल लगातार पुलिस की रडार पर था। एक कॉल और गिरफ्तारी: शनिवार को हरिद्वार जाते समय पारस ने एक सह-यात्री के फोन से अपने पूर्व मालिक (झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र) को फोन किया। मेरठ पुलिस ने लोकेशन मिलते ही हरिद्वार पुलिस को अलर्ट किया। रुड़की में ट्रैप: हरिद्वार एसएसपी के निर्देश पर रुड़की रेलवे स्टेशन की घेराबंदी की गई और ट्रेन पहुँचते ही दोनों को हिरासत में ले लिया गया। देर रात दोनों को मेरठ लाया गया। 3. कानूनी स्थिति और कोर्ट में पेशी आज पुलिस दोनों को विशेष सीजेएम कोर्ट (Special CJM Court) में पेश करेगी। रूबी के बयान: रूबी के बयानों पर सबकी नजर है। यदि वह कोर्ट में पारस के दावों की पुष्टि करती है, तो केस की दिशा बदल सकती है। फिलहाल उसे 'आशा ज्योति केंद्र' की कस्टडी में रखा गया है। सुनीता हत्याकांड: पुलिस का कहना है कि दोनों को हत्या का आरोपी बनाया जाएगा। रूबी के बयानों के आधार पर मुकदमे में अपहरण के बजाय अन्य गंभीर धाराएं जोड़ी जाएंगी। 4. गरमाई सियासत: चंद्रशेखर और अतुल प्रधान की एंट्री चूंकि मामला दलित युवती और राजपूत युवक से जुड़ा है, इसलिए राजनीतिक तनाव चरम पर है। अतुल प्रधान: सपा विधायक की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और वे धरने पर बैठे। चंद्रशेखर आजाद: शनिवार को सांसद चंद्रशेखर आजाद बैरिकेडिंग कूदकर पैदल ही गांव की ओर निकल पड़े। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और न्याय की मांग की। सुरक्षा: गांव में तनाव को देखते हुए आरएएफ (RAF) और 10 थानों की पुलिस अब भी तैनात है।

रवि चौहान जनवरी 11, 2026 0
मेरठ में दलित मां का 30 घंटे बाद अंतिम संस्कार; सपा विधायक- पुलिस में धक्का-मुक्की
मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण मामले में 30 घंटे बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

मेरठ दलित महिला हत्याकांड और अपहरण: 30 घंटे के तनाव के बाद अंतिम संस्कार; 'बुलडोजर' और 'न्याय' की मांग के बीच सुलगता कपसाड़ गांव उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाड़ गांव इस समय एक भीषण सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की गिरफ्त में है। एक दलित महिला की बेरहमी से हत्या और उसकी युवा बेटी के अपहरण ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। 1. घटनाक्रम: खेत की पगडंडी से शुरू हुआ मातम गुरुवार की सुबह मेरठ के कपसाड़ गांव में एक सामान्य दिन की शुरुआत हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते यहाँ चीख-पुकार मच गई। दुस्साहस: एक दलित महिला अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थी। रास्ते में आरोपी कंपाउंडर पारस ने लड़की के साथ छेड़छाड़ की। हत्या और अपहरण: जब माँ ने अपनी बेटी की अस्मत बचाने के लिए विरोध किया, तो आरोपी ने आव देखा न ताव और फरसे (धारदार हथियार) से हमला कर माँ की नृशंस हत्या कर दी। इसके बाद वह लड़की को जबरन अगवा कर फरार हो गया। शादी की खुशियां मातम में: पीड़िता के पिता सत्येंद्र ने रोते हुए बताया कि बेटी की शादी तय हो चुकी थी। मई की तारीख को बदलकर अप्रैल का मुहूर्त निकलवाना था, लेकिन एक झटके में सब बर्बाद हो गया। 2. 30 घंटे का 'डेडलॉक' और प्रशासनिक कवायद घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया था। उनकी मांग थी कि जब तक बेटी सकुशल नहीं मिलती और आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, वे टस से मस नहीं होंगे। भारी सुरक्षा बल: गांव में तनाव को देखते हुए 10 थानों की फोर्स, आरएएफ (RAF) और पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई। पूरा गांव एक छावनी में तब्दील हो गया। प्रशासन का समझौता: 30 घंटे की लंबी जद्दोजहद और मान-मनौव्वल के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। प्रशासन ने तुरंत 10 लाख रुपये का चेक सौंपा। अंतिम संस्कार: भारी सुरक्षा के बीच मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन गांव में अब भी गुस्सा शांत नहीं हुआ है। 📊 पीड़ित परिवार की 4 प्रमुख मांगें और सरकारी आश्वासन मांग स्थिति / आश्वासन बेटी की सकुशल बरामदगी पुलिस की 5 टीमें और क्राइम ब्रांच लगातार दबिश दे रही हैं। 50 लाख की आर्थिक मदद 10 लाख दिए गए, बाकी के लिए शासन को फाइल भेजी गई। सरकारी नौकरी परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार नौकरी का आश्वासन। शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा की दृष्टि से शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर विचार। 3. राजनीति का अखाड़ा बना कपसाड़: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष इस घटना ने मेरठ की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। अतुल प्रधान बनाम पुलिस: सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान जब गांव पहुँचे, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की हुई। उन्हें गांव के बाहर रोका गया, जहाँ वे समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। ढाई घंटे बाद उन्हें मिलने की अनुमति मिली। अखिलेश यादव का हस्तक्षेप: सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पीड़ित पिता से फोन पर बात की और 3 लाख रुपये की निजी आर्थिक मदद की घोषणा की। संगीत सोम की एंट्री: बीजेपी के कद्दावर नेता संगीत सोम भी गांव पहुँचे और परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। आजाद समाज पार्टी और भाकियू: चंद्रशेखर आजाद की पार्टी और किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। 4. भाई की आशंका: "मेरी बहन के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए" पीड़िता के भाई नरसिंह का बयान दिल दहला देने वाला है। उसने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और आरोपी ने अभी तक कोई सुराग नहीं छोड़ा है। बुलडोजर की मांग: परिजनों की मांग है कि आरोपी पारस के घर पर बुलडोजर चलाया जाए ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो। अनहोनी का डर: भाई को डर है कि आरोपी उसकी बहन को नुकसान पहुँचा सकता है।

रवि चौहान जनवरी 9, 2026 0
यूपी SIR - हर पांचवां वोटर लिस्ट से बाहर
UP SIR Draft Voter List 2026: 2.89 Crore Names Deleted; हर 5वां वोटर लिस्ट से बाहर; अपना नाम कैसे चेक करें?

यूपी वोटर लिस्ट का महा-शुद्धिकरण: 2.89 करोड़ नाम कटे; हर 5वां वोटर लिस्ट से बाहर, जानें क्या आपका नाम सुरक्षित है? 1. आंकड़ों का विश्लेषण: कहाँ और क्यों कटे इतने नाम? उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या 15.44 करोड़ से घटकर अब 12.55 करोड़ रह गई है। चुनाव आयोग ने इस सफाई के पीछे तीन मुख्य कारण बताए हैं: शिफ्टेड (2.17 करोड़): सबसे बड़ी संख्या उन लोगों की है जो अपना निवास स्थान छोड़कर कहीं और बस गए हैं। मृत (46.23 लाख): डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए उन लोगों के नाम हटाए गए हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन नाम सूची में दर्ज थे। डुप्लीकेट (25.47 लाख): सॉफ्टवेयर की मदद से उन वोटर्स को पकड़ा गया जिनका नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज था। जिलावार स्थिति: सर्वाधिक कटौती: राजधानी लखनऊ में सबसे ज्यादा 12 लाख नाम कटे हैं। न्यूनतम कटौती: ललितपुर जिले में सबसे कम 95 हजार नाम हटाए गए हैं। 2. देशव्यापी तस्वीर: यूपी ही नहीं, पूरे भारत में 'सफाई' यूपी से पहले 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR लिस्ट लागू हो चुकी है, जहाँ कुल 3.69 करोड़ नाम हटाए गए। प्रमुख राज्य: तमिलनाडु (97 लाख), गुजरात (73 लाख), पश्चिम बंगाल (58.20 लाख), मध्य प्रदेश (42.74 लाख) और राजस्थान (41.85 लाख)। 📊 मतदाता सूची में बदलाव: एक नज़र में विवरण संख्या / विवरण पुरानी कुल संख्या 15.44 करोड़ नई ड्राफ्ट संख्या 12.55 करोड़ कुल नाम कटे 2.89 करोड़ (18%) दावे-आपत्ति की अंतिम तिथि 6 फरवरी 2026 अंतिम सूची का प्रकाशन 6 मार्च 2026 3. राजनीतिक घमासान: अखिलेश यादव का मोर्चा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बड़े बदलाव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट बताते हुए कहा कि अगर वैध नामों को नहीं जोड़ा गया, तो यह गुस्सा जन आंदोलन का रूप ले लेगा। विपक्ष का आरोप है कि नाम काटने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। 4. आपके काम की बात: नाम कट गया है तो क्या करें? अगर ड्राफ्ट लिस्ट में आपका नाम नहीं है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपके पास 6 फरवरी 2026 तक का समय है। नाम जोड़ने के लिए (नया वोटर या कटा हुआ नाम): फॉर्म-6 भरें। नाम कटवाने के लिए: फॉर्म-7 भरें। सुधार या स्थान परिवर्तन के लिए: फॉर्म-8 भरें। विदेशियों (NRI) के लिए: फॉर्म-6A भरें। कैसे चेक करें नाम? आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in या ceouttarpradesh.nic.in पर जाएं। अपना राज्य, जिला और विधानसभा क्षेत्र चुनें। अपने बूथ की पीडीएफ (PDF) डाउनलोड करें और नाम सर्च करें। आप 1950 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके भी मदद ले सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 6, 2026 0
28 साल बाद ‘मृत’ माने गए बुजुर्ग जिंदा लौटे
Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर में SIR सर्वे ने 28 साल बाद बिछड़े को मिलवाया; मृत मान लिया गया शरीफ लौटा घर।

SIR की शक्ति: मुजफ्फरनगर में 28 साल बाद 'जिंदा' लौटे शरीफ; कागजों की तलाश ने अपनों से मिलवाया 1. 1997 से लापता और मान लिए गए थे 'मृत' खतौली के मोहल्ला बालक राम के रहने वाले मोहम्मद शरीफ (70) साल 1997 में अपनी दूसरी पत्नी के साथ पश्चिम बंगाल चले गए थे। संपर्क टूटा: शुरुआती दौर में लैंडलाइन के जरिए बात होती रही, लेकिन धीरे-धीरे संपर्क पूरी तरह खत्म हो गया। तलाश की हार: परिजनों ने पश्चिम बंगाल के खड़गपुर और आसनसोल की खाक छानी, लेकिन शरीफ का कोई सुराग नहीं मिला। थक-हारकर करीब 20 साल पहले परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था। 2. सरकारी प्रक्रिया बनी घर वापसी का जरिया पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) सर्वे के दौरान शरीफ को अपने मूल निवास के दस्तावेजों की सख्त जरूरत पड़ी। दस्तावेजों की मजबूरी: इसी जरूरत ने 28 साल बाद शरीफ के कदम उनके पैतृक गांव खतौली की ओर मोड़ दिए। अचानक वापसी: जब शरीफ अचानक अपने घर के सामने खड़े हुए, तो भतीजे अकलिम और अन्य रिश्तेदारों को लगा कि कोई मजाक कर रहा है, लेकिन सामने साक्षात 'चाचा' को पाकर सबकी आंखें नम हो गईं। 3. अपनों को खोने का गम और पाने की खुशी 28 साल के इस लंबे अंतराल ने बहुत कुछ बदल दिया था। शरीफ जब लौटे, तो उन्हें पता चला कि उनके दादा और कई करीबी अब इस दुनिया में नहीं रहे। अपने नाती-पोतों को पहली बार देख शरीफ फूट-फूटकर रो पड़े। मोहल्ले में मेले जैसा माहौल हो गया और रिश्तेदारों ने वीडियो कॉल के जरिए इस ऐतिहासिक पल का लुत्फ उठाया। 4. बंगाल में बसी है नई दुनिया शरीफ ने बताया कि वह बंगाल के वेदनापुर में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खुशहाल जीवन बिता रहे हैं। उस दौर में संचार साधनों की कमी के कारण वे चाहकर भी संपर्क नहीं कर सके। अब जरूरी दस्तावेज लेकर वे वापस बंगाल रवाना हो गए हैं, लेकिन इस बार उनका परिवार उनके साथ 'जुड़ा' हुआ है।

रवि चौहान जनवरी 1, 2026 0
70 लाख घूस लेते महिला IRS अफसर समेत 5 गिरफ्तार
झांसी CBI रेड: IRS प्रभा भंडारी और 2 सुपरिटेंडेंट ₹70 लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार; ₹1.60 करोड़ कैश जब्त।

⚖️ झांसी में CBI का मेगा ऑपरेशन: IRS प्रभा भंडारी समेत 5 गिरफ्तार; ₹1.60 करोड़ कैश और सोने का जखीरा बरामद 1. भ्रष्टाचार का हाई-प्रोफाइल 'ट्रैप': ₹70 लाख लेते रंगे हाथों पकड़ी गईं डिप्टी कमिश्नर उत्तर प्रदेश के झांसी में सीबीआई (CBI) ने भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। केंद्रीय जीएसटी (CGST) विभाग की डिप्टी कमिश्नर और आईआरएस (IRS) अधिकारी प्रभा भंडारी को उनके दो सहयोगियों के साथ ₹70 लाख की रिश्वत लेते हुए बीच सड़क पर गिरफ्तार किया गया। कौन-कौन हुए गिरफ्तार: इस कार्रवाई में डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के अलावा सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा को दबोचा गया है। साथ ही, घूस की सेटिंग करने वाले वकील नरेश कुमार गुप्ता और रिश्वत देने वाले कारोबारी राजू मंगनानी (जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक) को भी गिरफ्तार किया गया है। डील की हकीकत: सीबीआई के अनुसार, ये अधिकारी एक फर्म पर हुई छापेमारी के मामले को रफा-दफा करने और टैक्स चोरी की फाइल दबाने के लिए ₹1.5 करोड़ की मांग कर रहे थे। ₹70 लाख इस घूस की पहली किस्त थी। 2. बरामदगी ने उड़ाए होश: नोटों के पहाड़ और बेहिसाब जेवर गिरफ्तारी के बाद जब सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने आरोपियों के घरों और ठिकानों की तलाशी ली, तो वहां काली कमाई का अंबार मिला। नकद राशि: तलाशी के दौरान कुल ₹1.60 करोड़ नकद (Cash) बरामद किए गए हैं। इसमें ₹70 लाख रिश्वत के थे और ₹90 लाख उनके निजी ठिकानों से मिले। सोना और संपत्तियां: भारी मात्रा में सोने और चांदी के आभूषण बरामद हुए हैं। इसके अलावा, कई बेनामी संपत्तियों और रियल एस्टेट निवेश के दस्तावेज भी सीबीआई ने जब्त किए हैं, जिनकी जांच जारी है। 3. 'ऑपरेशन झांसी' की पूरी कहानी: 12 दिन पहले शुरू हुआ खेल यह पूरा मामला 19 दिसंबर को शुरू हुआ था, जब प्रभा भंडारी के नेतृत्व में सीजीएसटी टीम ने 'जय दुर्गा हार्डवेयर' पर छापा मारा था। सेटिंग का जाल: छापेमारी के बाद विभाग ने भारी टैक्स चोरी का दावा किया था। इसी मामले को खत्म करने के लिए वकील नरेश गुप्ता के जरिए सेटिंग का खेल शुरू हुआ। सीबीआई की मुस्तैदी: सीबीआई को इस डील की गुप्त सूचना मिल गई थी। जांच एजेंसी ने मंगलवार को ही केस दर्ज किया और बिना स्थानीय पुलिस को बताए झांसी में घेराबंदी कर दी। बुधवार शाम को जैसे ही घूस का लेनदेन हुआ, टीम ने सभी को दबोच लिया।

रवि चौहान दिसम्बर 31, 2025 0
संगीत सोम बोले-शाहरुख खान गद्दार, बांग्लादेशी क्रिकेटर को खरीदा
संगीत सोम का शाहरुख खान पर हमला: "गद्दार" बोलकर KKR से बांग्लादेशी खिलाड़ी निकालने की दी चेतावनी।

🚩 संगीत सोम का तीखा हमला: "शाहरुख जैसे गद्दार देश बर्दाश्त नहीं करेंगे" मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान संगीत सोम ने बांग्लादेशी क्रिकेटर नाहिद राणा (जिन्हें KKR ने खरीदा है) के चयन पर कड़ी आपत्ति जताई। शाहरुख खान पर निशाना: सोम ने कहा कि शाहरुख खान जैसे लोग देश के पैसे से बांग्लादेशी खिलाड़ियों को पाल रहे हैं, जबकि वहां हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है। उन्होंने शाहरुख को 'गद्दार' तक कह डाला। खिलाड़ी को चेतावनी: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेशी खिलाड़ी भारत में खेलने आएगा, तो वह यहां से सुरक्षित बाहर कदम नहीं रख पाएगा। तर्क: सोम का कहना है कि जब पाकिस्तान के खिलाड़ी भारत में नहीं खेल सकते, तो बांग्लादेश के क्यों? जहां प्रधानमंत्री मोदी को गालियां दी जा रही हैं और हिंदुओं का उत्पीड़न हो रहा है। 🕉️ देवकी नंदन ठाकुर की चेतावनी: "KKR का बहिष्कार करेंगे हिंदू" मथुरा में कथा के दौरान देवकी नंदन ठाकुर ने भी कड़ा रुख अपनाया: हीरो से जीरो: उन्होंने शाहरुख खान को याद दिलाया कि उन्हें भारतीयों ने ही हीरो बनाया है, और वही जनता उन्हें 'जीरो' भी बना सकती है। निष्कासन की मांग: उन्होंने मांग की कि KKR तुरंत बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम से बाहर करे। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पूरा हिंदू समाज KKR और उसकी टीम का बहिष्कार करेगा। संवेदना का सवाल: उन्होंने पूछा कि क्या KKR मालिक को उस 6 साल की हिंदू बच्ची के जलाए जाने का दुख नहीं है, जो बांग्लादेश में हिंसा का शिकार हुई? 📝 संगीत सोम के बयान की 5 बड़ी बातें गद्दारों पर नजर: देश के अंदर छिपे गद्दारों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है, जो अलग-अलग तरीके से भारत को कमजोर कर रहे हैं। कानून-व्यवस्था: यूपी में भाजपा सरकार ने अतीक और मुख्तार जैसे माफियाओं का सफाया कर सुरक्षा का माहौल बनाया है। चुनाव का दावा: आगामी चुनावों में भाजपा 350 से अधिक सीटें जीतेगी और विपक्ष 20-30 सीटों पर सिमट जाएगा। विदेशी सम्मान: पीएम मोदी के नेतृत्व में आज अमेरिका समेत पूरी दुनिया भारत का सम्मान कर रही है। बहिष्कार का आह्वान: बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ रेप और हत्याएं हो रही हैं, ऐसे में वहां के खिलाड़ियों का स्वागत भारत में नहीं होगा। 🔍 विवाद की जड़ (Context) हाल ही में आईपीएल ऑक्शन में KKR ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज नाहिद राणा को ₹9.5 करोड़ में खरीदा है। बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी हिंसा और वहां की अंतरिम सरकार के भारत विरोधी बयानों के कारण भारत में इस खरीद का भारी विरोध हो रहा है। क्या आप चाहते हैं कि मैं इस विवाद पर सोशल मीडिया पर चल रहे 'Boycott KKR' ट्रेंड की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करूँ?

रवि चौहान दिसम्बर 31, 2025 0
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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

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शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक
उत्तर प्रदेश

Shankaracharya Avimukteshwaranand Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर लगाई रोक; नार्को टेस्ट की दी चुनौती।

रवि चौहान फ़रवरी 27, 2026 0