अमेरिका

ट्रम्प ग्रीनलैंड का फ्यूचर स्विट्जरलैंड में तय करेंगे
Trump's New Map: कनाडा और ग्रीनलैंड को दिखाया अमेरिका का हिस्सा; दावोस में नाटो चीफ संग इमरजेंसी बैठक; ग्रीनलैंड में सैन्य विमान तैनात।

ट्रम्प का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान: ग्रीनलैंड पर नाटो चीफ से फोन पर बात, दावोस में होगी इमरजेंसी बैठक; सोशल मीडिया पर शेयर किया ग्रीनलैंड-कनाडा-वेनेजुएला वाला 'नया नक्शा' वाशिंगटन/नुउक | 20 जनवरी 2026 दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को नाटो (NATO) चीफ मार्क रूट से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद ग्रीनलैंड मुद्दे को सुलझाने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादित नक्शा पोस्ट किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा दुनिया भर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 1. ट्रम्प और नाटो चीफ की 'दावोस डील' ट्रम्प ने मार्क रूट के साथ हुई बातचीत को 'अति प्रभावशाली' बताया। शांति के लिए ताकत: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है। उन्होंने कहा, "दुनिया में शांति केवल ताकत के जरिए ही आ सकती है, और अमेरिका सबसे ताकतवर है।" रूट का संदेश: ट्रम्प ने मार्क रूट का एक निजी संदेश साझा किया जिसमें रूट ने ट्रम्प की सीरिया और गाजा नीतियों की प्रशंसा की और ग्रीनलैंड मामले में 'रास्ता निकालने' की प्रतिबद्धता जताई। दावोस बैठक: ग्रीनलैंड के भविष्य और डेनमार्क के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए दावोस में अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की बैठक होगी। 2. ग्रीनलैंड में सैन्य टकराव की आहट: अमेरिका और डेनमार्क ने भेजे विमान कूटनीति के साथ-साथ जमीन पर सैन्य हलचल भी तेज हो गई है: अमेरिकी विमान: अमेरिका ने NORAD (North American Aerospace Defense Command) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) भेजा है। कमांड ने इसे 'नियमित रक्षा गतिविधि' बताया है। डेनमार्क का जवाब: डेनमार्क ने भी चुप बैठने के बजाय सोमवार को कई विमानों के जरिए अतिरिक्त सैनिक और भारी सैन्य उपकरण ग्रीनलैंड पहुंचाए। यूरोपीय मोर्चेबंदी: जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले ही 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत वहां अपने सैनिक भेज चुके हैं, जिसे ट्रम्प प्रशासन एक चुनौती के रूप में देख रहा है। 📊 ग्रीनलैंड का सैन्य ढांचा: वर्तमान तैनाती पक्ष यूनिट / बेस सैनिक संख्या मुख्य कार्य अमेरिका पिटुफिक स्पेस बेस (थुले) ~150-200 मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी। डेनमार्क जॉइंट आर्कटिक कमांड ~150-200 संप्रभुता रक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू। स्पेशल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल 12-14 कुत्तों की स्लेज से आर्कटिक गश्त। NATO (EU) आर्कटिक एंड्योरेंस ~40-50 राजनीतिक एकजुटता का संदेश। 3. 'ग्रेटर अमेरिका' मैप: कनाडा और वेनेजुएला पर नजर? ट्रम्प द्वारा साझा किए गए नक्शे ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विस्तारवाद: नक्शे में न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में रंगा गया है। कनाडा का रुख: कनाडा ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के चरम विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिका के तेल समृद्ध देश वेनेजुएला को अमेरिकी नक्शे में दिखाना ट्रम्प की ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। 4. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए 'गोल्ड माइन' क्यों है? ट्रम्प की इस जिद के पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) का भंडार है। वर्तमान में चीन इनका 90% उत्पादन नियंत्रित करता है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चीन की निर्भरता खत्म कर देगा। नई शिपिंग रूट्स: ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, जिससे आर्कटिक में नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं। अमेरिका इन रास्तों पर अपना प्रभुत्व चाहता है। मिसाइल डिफेंस: यह रूस और अमेरिका के बीच सबसे छोटा हवाई मार्ग है, जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। रणनीतिक घेराबंदी: यहाँ से अमेरिका रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर सीधी नजर रख सकता है। 5. कानूनी पेच: क्या ग्रीनलैंड को खरीदा जा सकता है? नाटो के नियमों के मुताबिक, यह प्रक्रिया लगभग असंभव है: Article 5 का उल्लंघन: अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सदस्य हैं। एक सदस्य दूसरे की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। जनमत संग्रह (Referendum): 2009 के 'सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट' के अनुसार, ग्रीनलैंड के लोग केवल जनमत संग्रह के जरिए ही स्वतंत्र हो सकते हैं या किसी अन्य देश के साथ जुड़ने का फैसला ले सकते हैं। डेनिश संसद की मंजूरी भी अनिवार्य है। 6. आर्थिक युद्ध: यूरोप का 'ट्रेड बाजूका' यूरोपीय संघ (EU) ने ट्रम्प के 10% टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रेड बाजूका: EU अपने 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' का इस्तेमाल कर अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने और 750 बिलियन डॉलर के ऊर्जा समझौते को रद्द करने की धमकी दे रहा है। 1 फरवरी की डेडलाइन: ट्रम्प का टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक संबंध अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुँच सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे
ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया 10% टैरिफ; जवाब में NATO ने तैनात किए सैनिक; ट्रेड वॉर की शुरुआत।

ट्रम्प बनाम यूरोप: ग्रीनलैंड पर 'आर्कटिक वॉर'; 8 देशों पर 10% टैरिफ लगा, जवाब में EU ने तैनात किए सैनिक और लोड किया 'ट्रेड बाजूका' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूरोपीय देशों के बीच ग्रीनलैंड को लेकर विवाद अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में मिलाने की धमकियों और 'खरीदने' की जिद के जवाब में, डेनमार्क और उसके 8 नाटो (NATO) सहयोगियों ने सैन्य मोर्चा खोल दिया है। इसके पलटवार में ट्रम्प ने इन देशों पर 10% से 25% तक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है, जिसे यूरोपीय नेताओं ने 'ब्लैकमेल' करार दिया है। 1. 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस': ग्रीनलैंड में यूरोपीय फौज की एंट्री डेनमार्क की अगुवाई में ग्रीनलैंड की राजधानी नुउक में 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' शुरू किया गया है। यह एक सैन्य अभ्यास है, लेकिन इसका संदेश पूरी तरह राजनीतिक है। किसने कितने सैनिक भेजे: फ्रांस ने अपनी घातक 27वीं माउंटेन इन्फैंट्री के 15 सैनिक भेजे हैं। जर्मनी ने 13, जबकि नॉर्वे, फिनलैंड और नीदरलैंड्स ने प्रतीकात्मक रूप से 2-2 सैनिक तैनात किए हैं। ब्रिटेन ने भी अपना सैन्य अधिकारी भेजा है। मकसद: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि यह संख्या भले छोटी है, लेकिन यह नाटो की एकजुटता का प्रमाण है। यह अमेरिका को संदेश है कि ग्रीनलैंड की संप्रभुता से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। 2. ट्रम्प का 'टैरिफ हथियार': 1 फरवरी से लागू होगी सजा यूरोपीय देशों की सैन्य सक्रियता से भड़के ट्रम्प ने शनिवार (17 जनवरी) को Truth Social पर एक कड़ा फैसला सुनाया। 10% टैरिफ: डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूके, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामान पर 1 फरवरी से 10% अतिरिक्त टैक्स लगेगा। 25% की चेतावनी: ट्रम्प ने कहा कि अगर 1 जून तक ग्रीनलैंड की 'खरीद' पर डील नहीं हुई, तो इस टैरिफ को बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा। तर्क: ट्रम्प का दावा है कि रूस और चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं और केवल अमेरिका ही इसे बचा सकता है। 3. 'ट्रेड बाजूका' (Anti-Coercion Instrument): यूरोप का पलटवार यूरोपीय संघ (EU) अब अमेरिका के खिलाफ अपने सबसे शक्तिशाली आर्थिक हथियार 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' (जिसे ट्रेड बाजूका कहा जाता है) को सक्रिय करने की तैयारी में है। क्या है यह हथियार: इसके तहत EU उन देशों पर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है जो उसे आर्थिक रूप से डराने की कोशिश करते हैं। इसमें अमेरिकी टेक कंपनियों (गूगल, एप्पल आदि) पर पाबंदी और 93 अरब यूरो के अमेरिकी सामान पर काउंटर-टैरिफ शामिल है। मंजूरी पर रोक: यूरोपीय सांसदों ने अमेरिका के साथ होने वाले नए ट्रेड एग्रीमेंट (0% टैरिफ डील) को 'होल्ड' पर डाल दिया है। 📊 ग्रीनलैंड विवाद: क्यों भिड़े हैं दुनिया के दो बड़े दोस्त? रणनीतिक कारण विवरण मिलिट्री बेस अमेरिका का 'थुले एयर बेस' यहाँ है, जो रूस पर नजर रखने के लिए फ्रंटलाइन है। खनिज संपदा यहाँ Rare Earth Elements के विशाल भंडार हैं, जिन पर अभी चीन का एकाधिकार है। शिपिंग रूट्स बर्फ पिघलने से नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं, जो व्यापार के लिए बेहद अहम हैं। नाटो कानून नाटो का Article 5 कहता है कि एक सदस्य पर हमला सब पर हमला है। 4. 'ऑपरेशन आर्कटिक सेंट्री': अगला बड़ा नाटो मिशन यूरोपीय देश अब 'आर्कटिक सेंट्री' (Baltic Sentry की तर्ज पर) नाम से एक स्थायी मिशन बनाने पर विचार कर रहे हैं। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के मुताबिक, इसमें कई महीने लग सकते हैं, लेकिन इसका लक्ष्य ग्रीनलैंड के आसपास 24x7 सैन्य निगरानी रखना होगा ताकि कोई भी देश (सहित अमेरिका) वहां एकतरफा कार्रवाई न कर सके। 5. क्या ट्रम्प ग्रीनलैंड पर कब्जा कर सकते हैं? कानूनी तौर पर यह नामुमकिन के करीब है: नाटो संधियाँ: एक नाटो देश दूसरे पर हमला नहीं कर सकता। स्वतंत्रता का नियम: 2009 के एक्ट के मुताबिक, ग्रीनलैंड के लोग खुद तय करेंगे कि उन्हें किसके साथ रहना है। जनमत संग्रह (Referendum) के बिना कोई बदलाव नहीं हो सकता। जनता का विरोध: नुउक और कोपेनहेगन की सड़कों पर "Hands Off Greenland" के पोस्टर लेकर हजारों लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 19, 2026 0
अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी
ट्रम्प की चेतावनी के बाद झुका ईरान, रुकी 800 लोगों की फांसी; अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध।

ईरान पर UNSC की आपात बैठक: अमेरिका की 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी; ट्रम्प के खौफ से 800 की फांसी रुकी; 180 घंटे से देश में 'डिजिटल ब्लैकआउट' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गुरुवार (15 जनवरी 2026) को ईरान संकट पर हुई आपात बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नरसंहार रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके पास 'सभी विकल्प' खुले हैं। 1. माइक वाल्ट्ज का अल्टीमेटम: "ट्रम्प एक्शन वाले इंसान हैं" UNSC में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान के शासन को आईना दिखाते हुए कहा कि दुनिया अब और खामोश नहीं रहेगी। बहादुरी को सलाम: वाल्ट्ज ने उन ईरानी प्रदर्शनकारियों की सराहना की जो गोलियों के सामने खड़े होकर आजादी मांग रहे हैं। सीधी चेतावनी: उन्होंने कहा कि ट्रम्प केवल बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं। ईरान को समझ लेना चाहिए कि अगर क्रूरता नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस का दावा: प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पुष्टि की कि ट्रम्प के सीधे दबाव के कारण ही ईरान ने अंतिम समय में 800 कैदियों की फांसी टाल दी है। 2. ईरान का पलटवार: "टकराव नहीं, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे" ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को 'झूठा' और 'दुष्प्रचार' बताया। इल्जाम: ईरान का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं जो अशांति फैलाकर 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना चाहती हैं। जवाबी हमला: दर्जी ने कहा कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 📊 ईरान संकट: UNSC की बैठक के मुख्य बिंदु और डेटा श्रेणी विवरण और आंकड़े मौत का तांडव मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए। गिरफ्तारियां अब तक 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद। नए प्रतिबंध अमेरिका ने अली लारीजानी समेत 18 व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया। डिजिटल ब्लैकआउट 8 जनवरी से अब तक 180+ घंटे से इंटरनेट बंद (कनेक्टिविटी महज 1%)। वैश्विक रुख अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस (निंदा) बनाम रूस, चीन (हस्तक्षेप का विरोध)। 3. रूस और पश्चिमी देशों के बीच 'कोल्ड वॉर' सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर दुनिया दो धड़ों में बंट गई है: रूस की आपत्ति: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आक्रामकता को सही ठहराने के लिए UNSC का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट खून-खराबे में डूब जाएगा। यूरोपीय देशों का रुख: ब्रिटेन और फ्रांस ने ईरान की कार्रवाई को "क्रूर दमन" बताया और तेहरान पर नए कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया। 4. 180 घंटे का सन्नाटा: ईरान में 'डिजिटल दीवार' ईरान में इंटरनेट की स्थिति को 'डिजिटल ब्लैकआउट' घोषित किया गया है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 9 करोड़ की आबादी को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उद्देश्य: सरकार नहीं चाहती कि सुरक्षा बलों की बर्बरता के वीडियो दुनिया तक पहुँचें। प्रभाव: बैंकिंग सेवाएं, फोन लाइनें और सोशल मीडिया पूरी तरह ठप हैं। यह ईरान के इतिहास की सबसे लंबी सेंसरशिप है। 5. क्यों सुलग रहा है ईरान? (प्रमुख कारण) आर्थिक पतन: रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है ($1 = ~14.5 लाख रियाल)। महंगाई की मार: चाय और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों पर 70% तक महंगाई बढ़ गई है। सत्ता के खिलाफ गुस्सा: प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का इस्तीफा और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ट्रम्प पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत 75 देशों के लिए वीजा सर्विस रोकेंगे
अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा रोका; पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सूची में शामिल।

अमेरिका का 'वीजा बैन' (2026): 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेस पर रोक; पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत भारत के 6 पड़ोसी देश शामिल ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिका के इमिग्रेशन इतिहास का सबसे बड़ा और कड़ा फैसला लेते हुए 21 जनवरी 2026 से दुनिया के 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा (स्थायी निवास) की प्रक्रिया को पूरी तरह से रोकने का ऐलान किया है। इस सूची में भारत के पड़ोसी देश—पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार और अफगानिस्तान शामिल हैं। यह फैसला अमेरिकी विदेश मंत्रालय (State Department) के एक गुप्त मेमो के आधार पर लिया गया है, जिसका उद्देश्य अमेरिका आने वाले विदेशियों की संख्या में भारी कटौती करना और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले 'वेलफेयर' के बोझ को कम करना है। 1. 'पब्लिक चार्ज' का डर: क्यों रोका गया वीजा? अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अपनी कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन लोगों को रोकने का फैसला किया है, जो अमेरिका आकर सरकारी मदद या वेलफेयर योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं। तर्क: ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि जो लोग खुद का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं, वे अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे का अनुचित लाभ उठाते हैं। सत्यापन प्रक्रिया: दूतावासों को निर्देश दिए गए हैं कि जब तक आवेदकों की वित्तीय स्थिति और सत्यापन की प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक वीजा आवेदन खारिज किए जाएं। सोशल मीडिया जांच: ट्रम्प प्रशासन अब सभी वीजा आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी गहन जांच करेगा ताकि उनकी विचारधारा और गतिविधियों का पता लगाया जा सके। 2. बैन वाले देशों की सूची (एशिया और पड़ोसी देश) एशिया के 22 देशों पर इस कड़े कानून का असर पड़ा है। विशेष रूप से भारत के आसपास के देशों की स्थिति चिंताजनक है: भारत के पड़ोसी: पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार (बर्मा) और अफगानिस्तान। मध्य पूर्व और अन्य: ईरान, इराक, सीरिया, यमन, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और थाईलैंड। 📊 बैन का दायरा और प्रभाव प्रभावित वर्ग स्थिति इमिग्रेंट वीजा (Green Card) पूरी तरह से निलंबित (Suspended); नई समीक्षा होने तक कोई प्रोसेस नहीं। टूरिस्ट/बिजनेस वीजा फिलहाल इस फैसले से बाहर, लेकिन जांच और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सोशल मीडिया ऑडिट अनिवार्य; अब आपकी पोस्ट्स तय करेंगी कि आपको वीजा मिलेगा या नहीं। फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 दर्शक आ सकेंगे, लेकिन सख्त सुरक्षा स्क्रीनिंग और वेरिफिकेशन के बाद। 3. ट्रम्प की 'यूरोपीय प्राथमिकता' और डिपोर्टेशन का आंकड़ा राष्ट्रपति ट्रम्प का विजन स्पष्ट है—वे गैर-यूरोपीय देशों से होने वाले इमिग्रेशन को सीमित करना चाहते हैं। बयानबाजी: ट्रम्प ने सोमालिया जैसे देशों के बजाय नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क जैसे स्कैंडिनेवियाई देशों के लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही है। रिकॉर्ड रद्दीकरण: ट्रम्प की वापसी के बाद से अब तक 1 लाख से ज्यादा वीजा रद्द किए जा चुके हैं। महा-डिपोर्टेशन: पिछले एक महीने में 6 लाख से ज्यादा लोगों को जबरन निकाला गया है, जबकि 25 लाख लोग डर के कारण खुद अमेरिका छोड़कर चले गए हैं। 4. घटना जिसने आग में घी का काम किया नवंबर 2025 में व्हाइट हाउस के पास हुई एक गोलीबारी की घटना, जिसमें एक अफगान नागरिक शामिल था, ने ट्रम्प प्रशासन को 'थर्ड वर्ल्ड' देशों के खिलाफ सख्त होने का बड़ा मौका दे दिया। इसके बाद से ही इमिग्रेशन को स्थायी रूप से रोकने की मांग तेज हो गई थी।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा
ईरानी विदेश मंत्री बोले- फांसी की कोई योजना नहीं; भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी।

ईरान-अमेरिका तनाव: ट्रम्प की 'भयानक' चेतावनी के आगे झुका तेहरान; प्रदर्शनकारियों की फांसी पर लगी रोक, अयातुल्ला शासन में बड़ी दरार ईरान में जारी गृहयुद्ध जैसी स्थिति के बीच एक बड़ी कूटनीतिक जीत की खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सीधी सैन्य कार्रवाई और "भयानक परिणाम" भुगतने की धमकी के बाद ईरान सरकार बैकफुट पर आ गई है। तेहरान ने 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुल्तानी सहित अन्य कैदियों को फांसी देने के अपने फैसले को फिलहाल टाल दिया है। 1. ट्रम्प का 'अल्टीमेटम' और ईरान का यू-टर्न बुधवार (14 जनवरी 2026) को दुनिया ने देखा कि कैसे एक 'ट्वीट' और सख्त चेतावनी ने फांसी के फंदे को रोक दिया। ट्रम्प की धमकी: राष्ट्रपति ट्रम्प ने स्पष्ट कहा था, "अगर ईरान ने फांसी देना जारी रखा, तो आप कुछ ऐसा देखेंगे जो पहले कभी नहीं देखा (भयानक)।" * ईरान का जवाब: धमकी के कुछ ही घंटों बाद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने 'फॉक्स न्यूज' पर आकर सफाई दी कि "फांसी देने की हमारी कोई योजना नहीं है।" सुलतानी की जान बची: इरफान सुल्तानी, जिन्हें 'ईश्वर के खिलाफ युद्ध' (मोहरेबेह) के आरोप में आज फांसी दी जानी थी, उनकी सजा फिलहाल रोक दी गई है। 2. ईरान की जवाबी धमकी: "इस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी" हालाँकि ईरान फांसी से पीछे हट गया है, लेकिन उसने अमेरिका को सीधी जान से मारने की धमकी दी है। प्रोपेगैंडा वीडियो: ईरान के सरकारी टीवी पर पर्शियन भाषा में एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें 2024 के बटलर (पेंसिल्वेनिया) हमले की फुटेज दिखाई गई और संदेश दिया गया कि "इस बार ट्रम्प का बचना नामुमकिन है।" ट्रम्प का रुख: ट्रम्प ने इस धमकी को नजरअंदाज करते हुए निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी जनता पहलवी को नेता चुनती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। 📊 ईरान संकट: अब तक के ताज़ा आंकड़े और प्रभाव श्रेणी ताज़ा रिपोर्ट और डेटा मौत का आंकड़ा 3,428 (NGO दावा) से 12,000 (ईरान इंटरनेशनल) तक। गिरफ्तारियां 10,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी जेलों में बंद। आर्थिक स्थिति महंगाई 70% पार; रियाल की वैल्यू मिट्टी के बराबर। हवाई क्षेत्र बुधवार को 2 घंटे के लिए 'नो फ्लाई जोन' घोषित। भारतीय नागरिक 10,000+ भारतीय फंसे; सरकार ने देश छोड़ने को कहा। 3. 'नो फ्लाई जोन' और भारत की एडवायजरी ईरान और अमेरिका के बीच मिसाइल युद्ध की आशंका ने वैश्विक हवाई यातायात को अस्त-व्यस्त कर दिया है। एयरलाइंस पर असर: ईरान ने बुधवार को अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया, जिससे इंडिगो, एयर इंडिया और लुफ्थांसा जैसी कंपनियों की उड़ानों में देरी हुई। एयर इंडिया अब ईरानी क्षेत्र को छोड़कर दूसरे लंबे रास्तों का उपयोग कर रही है। भारत की चेतावनी: विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एडवायजरी जारी कर सभी भारतीयों (छात्र, व्यापारी, पर्यटक) को तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कड़ी बात की है। 4. विद्रोह की जड़: क्यों जल रहा है ईरान? यह प्रदर्शन 1979 की क्रांति के बाद का सबसे बड़ा विद्रोह है: आर्थिक बदहाली: ब्रेड और चाय जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें आसमान छू रही हैं। व्यापारियों की हड़ताल ने अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया है। सत्ता परिवर्तन की मांग: अयातुल्ला खामेनेई के 37 साल के शासन के खिलाफ युवा सड़कों पर हैं। वे क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। दमन: सुरक्षा बलों द्वारा सरेआम की जा रही गोलीबारी ने गुस्से को और भड़का दिया है।

रवि चौहान जनवरी 15, 2026 0
ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जे से कम कुछ मंजूर नहीं
क्या ग्रीनलैंड बनेगा अमेरिका का 51वां राज्य? NATO टूटने का खतरा; डेनमार्क की चेतावनी।

ट्रम्प का 'ग्रीनलैंड मिशन': 51वें राज्य की तैयारी और NATO टूटने की चेतावनी; जानें क्यों इस बर्फीले द्वीप पर छिड़ा है 'वर्ल्ड वॉर' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की अपनी जिद दोहराई है। ट्रम्प ने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा बताते हुए साफ कर दिया है कि उन्हें "कब्जे से कम कुछ भी मंजूर नहीं" है। इस बयान ने न केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को नाराज कर दिया है, बल्कि NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। 1. ट्रम्प की 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट: "NATO को साथ देना होगा" बुधवार (14 जनवरी 2026) को ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा और 'गोल्डन डोम' (नया मिसाइल डिफेंस सिस्टम) के लिए ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है। रूस-चीन का डर: ट्रम्प का दावा है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे। NATO को चेतावनी: ट्रम्प ने कहा कि NATO को इस मिशन में अमेरिका का साथ देना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की सैन्य ताकत के बिना NATO का कोई अस्तित्व नहीं है। 2. 'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट' (2026) 12 जनवरी 2026 को अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन ने संसद में एक ऐतिहासिक बिल पेश किया, जिसका नाम है—'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट'। लक्ष्य: ग्रीनलैंड को डेनमार्क से अलग कर अमेरिका का 51वां राज्य बनाना। शक्ति: यह बिल राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने के लिए "जरूरी कदम" उठाने का कानूनी अधिकार देता है। प्रस्ताव: रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ग्रीनलैंड के नागरिकों को अमेरिका में शामिल होने के बदले $10,000 से $100,000 (करीब 84 लाख रुपये) तक देने की योजना पर विचार कर रहा है। 3. ग्रीनलैंड और डेनमार्क का पलटवार: "हम बिकाऊ नहीं हैं" ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन (34) ने ट्रम्प के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। नीलसन का बयान: "अगर हमें डेनमार्क और अमेरिका में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो हम डेनमार्क को चुनेंगे। हम कोई सामान नहीं हैं जिसे खरीदा जा सके।" डेनमार्क की चेतावनी: पीएम मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी जबरदस्ती की कार्रवाई NATO के अंत की शुरुआत होगी। डेनमार्क ने अपनी सेना को 'शूट फर्स्ट' (पहले गोली चलाओ) के आदेश दिए हैं। 📊 ग्रीनलैंड का गणित: क्यों है यह इतना खास? विशेषता विवरण क्षेत्रफल 21.6 लाख वर्ग किमी (दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप) आबादी मात्र 57,000 लोग खनिज भंडार दुर्लभ पृथ्वी धातु (Rare Earth Elements), यूरेनियम, तांबा और तेल (लगभग 28 अरब बैरल)। रणनीतिक स्थान उत्तरी ध्रुव (Arctic) के पास, जहाँ से रूस और यूरोप पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिकी बेस पिटुफिक स्पेस बेस (Thule): यहाँ अमेरिका का अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम लगा है। 4. सैन्य कार्रवाई का 'प्लान' और आंतरिक विरोध मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे डेली मेल) के अनुसार, ट्रम्प ने JSOC (जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड) को ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्लान बनाने को कहा है। सेना का रुख: अमेरिकी सैन्य अधिकारी इस विचार का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक मित्र देश (डेनमार्क) पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। मिड-टर्म इलेक्शन: विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प इस मुद्दे का इस्तेमाल घरेलू राजनीति में ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं ताकि आगामी चुनावों में वोट हासिल किए जा सकें। 5. क्या NATO टूट जाएगा? डेनमार्क 1949 से NATO का सदस्य है। NATO की धारा 5 के अनुसार, किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो तकनीकी रूप से अमेरिका एक NATO सहयोगी पर हमला करेगा। इससे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश अमेरिका के खिलाफ खड़े हो सकते हैं, जिससे 76 साल पुराना यह रक्षा संगठन बिखर सकता है।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज
क्या रद्द होंगे ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ? भारत और चीन की नजर; IEEPA कानून का सच।

ट्रम्प के 'टैरिफ राज' पर सुप्रीम कोर्ट का महाफैसला आज: राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों या संसद के अधिकार की होगी जीत? अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट आज यानी बुधवार (14 जनवरी 2026) को एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाला है, जो न केवल अमेरिका बल्कि भारत, चीन और यूरोप सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा। यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ की वैधता पर आधारित है। ट्रम्प ने खुद चेतावनी दी है कि यदि फैसला उनके खिलाफ आया, तो अमेरिका के लिए "WE'RE SCREWED" (हमारी शामत आ जाएगी), क्योंकि सरकार को अरबों डॉलर रिफंड करने होंगे। 1. विवाद की जड़: क्या राष्ट्रपति 'सुपर-पावर' है? अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति ट्रम्प ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए दुनिया भर से आने वाले सामानों पर भारी आयात शुल्क (Tariff) लगा दिया था। ट्रम्प का तर्क: इन टैरिफ से अमेरिका को 600 अरब डॉलर से ज्यादा का राजस्व मिला। यह पैसा अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करता है और विदेशी निर्भरता कम करता है। विरोधियों का तर्क: 12 राज्यों और दर्जनों कंपनियों ने अदालत में कहा कि टैरिफ लगाना दरअसल 'टैक्स' वसूलना है। अमेरिकी संविधान के अनुसार, टैक्स लगाने का अधिकार केवल संसद (Congress) के पास है। राष्ट्रपति ने अपनी सीमा लांघी है। 2. 49 साल पुराना कानून: IEEPA (1977) का 'अनोखा' इस्तेमाल ट्रम्प ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का सहारा लिया। इतिहास: 1977 में बना यह कानून राष्ट्रपति को युद्ध या असाधारण संकट के समय विदेशी संपत्ति फ्रीज करने की शक्ति देता है। विवाद: ट्रम्प पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने इसका उपयोग 'टैरिफ' लगाने के लिए किया। उन्होंने "व्यापार घाटे" (Trade Deficit) और "नशीली दवाओं की तस्करी" को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। कोर्ट का सवाल: क्या व्यापारिक घाटा सच में ऐसी इमरजेंसी है जिसके लिए संसद को बाईपास किया जा सके? 📊 फैसले के दो संभावित परिणाम और उनका असर यदि फैसला ट्रम्प के पक्ष में आया यदि फैसला ट्रम्प के खिलाफ आया टैरिफ जारी रहेंगे: अमेरिकी खजाने में अरबों डॉलर का प्रवाह जारी रहेगा। टैरिफ रद्द होंगे: अमेरिका को कंपनियों का पैसा (करीब $150-$195 बिलियन) लौटाना होगा। राष्ट्रपति की शक्ति बढ़ेगी: भविष्य के राष्ट्रपति भी बिना संसद के वैश्विक व्यापार बदल सकेंगे। संसद की शक्ति बहाल: कोर्ट यह स्पष्ट करेगा कि केवल कांग्रेस ही टैक्स/टैरिफ तय कर सकती है। व्यापार युद्ध: चीन और यूरोप भी अमेरिका पर जवाबी टैक्स लगाकर तनाव बढ़ाएंगे। ग्लोबल मार्केट में तेजी: भारत, चीन और यूरोप के निर्यातकों को भारी राहत मिलेगी। महंगाई: अमेरिका में आयातित सामान महंगे रहेंगे, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा। कीमतें घटेंगी: अमेरिका में इलेक्ट्रॉनिक सामान और रोजमर्रा की चीजें सस्ती हो सकती हैं। 3. भारत पर असर: 50% टैरिफ का 'चक्रव्यूह' भारत इस फैसले का सबसे ज्यादा इंतजार कर रहा है क्योंकि भारतीय निर्यातक इस समय सबसे भारी बोझ तले दबे हैं: 25% जनरल टैरिफ: सभी भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया। 25% पेनल्टी टैरिफ: भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण अगस्त 2025 में लगाया गया था। ताज़ा स्थिति: ट्रम्प ने हाल ही में ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर भी 25% एक्स्ट्रा टैरिफ की धमकी दी है। भारत का कहना है कि वह केवल मानवीय आधार पर (दवा/भोजन) ही ईरान से व्यापार कर रहा है, जो प्रतिबंधों के बाहर है। 4. निचली अदालतों का रुख और सुप्रीम कोर्ट की 'चिंता' निचली अदालतों (Federal Circuit Courts) ने पहले ही इन टैरिफ को 'गैर-कानूनी' करार दिया था। नवंबर 2025 में हुई मौखिक बहस के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के 6-3 बहुमत वाले रूढ़िवादी जजों ने भी ट्रम्प प्रशासन की दलीलों पर "गहरी चिंता" व्यक्त की थी। जजों का मानना है कि टैरिफ लगाने की बेलगाम शक्ति राष्ट्रपति को देना खतरनाक हो सकता है। 💡 क्या होगा अगर ट्रम्प हार गए? (बैकअप प्लान) व्हाइट हाउस के अधिकारियों (जैसे केविन हैसेट) ने संकेत दिया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला खिलाफ आता है, तो वे Section 232 या अन्य व्यापार कानूनों के तहत टैरिफ को 'तुरंत' फिर से लागू करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, रिफंड का मुद्दा (करीब ₹12 लाख करोड़ से ज्यादा) अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए "बड़ा सिरदर्द" साबित होगा।

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
भारत पर 500% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका
भारत पर 500% टैरिफ का खतरा; ट्रंप की नई तेल नीति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव।

'सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025': ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या वैश्विक व्यापार युद्ध का आगाज? 1. क्या है SRA 2025? (विस्तृत विवरण) यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट रिचर्ड ब्लूमेंथल द्वारा संयुक्त रूप से पेश किया गया है। इसे 'बाइपार्टिसन' (द्विदलीय) समर्थन प्राप्त है, जिसका अर्थ है कि इसे अमेरिकी संसद के दोनों पक्षों का मजबूत साथ मिला है। मुख्य लक्ष्य: रूस के उन राजस्व स्रोतों को सुखाना, जो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में ईंधन का काम कर रहे हैं। सेकेंडरी सैंक्शन (Secondary Sanctions): इस कानून के तहत अमेरिका उन देशों या कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाएगा जो रूस के साथ कारोबार जारी रखेंगे। इसका सीधा मतलब है— "यदि आप रूस के साथ व्यापार करते हैं, तो आप अमेरिका के साथ व्यापार नहीं कर पाएंगे।" कानूनी पेच: इस एक्ट के पारित होने के बाद, कोई भी अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी मर्जी से इन प्रतिबंधों को नहीं हटा पाएगा। इसके लिए संसद (कांग्रेस) की मंजूरी अनिवार्य होगी। 2. 500% टैरिफ: भारत के लिए 'आर्थिक बम' बिल में सबसे विवादित हिस्सा रूस से तेल खरीदने वाले देशों (भारत, चीन, ब्राजील) पर 500% तक आयात शुल्क (Tariff) लगाने का प्रावधान है। मौजूदा स्थिति: भारत पर पहले से ही 50% का संचयी टैरिफ (25% सामान्य + 25% रूसी तेल दंड) लग रहा है। संभावित प्रभाव: यदि टैरिफ बढ़कर 500% हो जाता है, तो भारतीय सामान (आईटी सेवाएं, कपड़ा, फार्मा, इंजीनियरिंग उत्पाद) अमेरिकी बाजार में इतने महंगे हो जाएंगे कि उनकी बिक्री लगभग बंद हो जाएगी। निर्यात संकट: भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) लगभग 40 बिलियन डॉलर से अधिक है, जो इस टैरिफ के कारण शून्य पर आ सकता है। 📊 भारत-रूस तेल आयात और टैरिफ की स्थिति वर्ष रूस से तेल आयात (प्रतिदिन) अमेरिका द्वारा टैरिफ (भारत पर) 2021 0.1 मिलियन बैरल 0% 2023 (पीक) 2.0 मिलियन बैरल 0% 2025 (दिसंबर) 1.2 मिलियन बैरल 50% 2026 (अनुमानित) 1.0 मिलियन बैरल से कम 500% (SRA बिल पास होने पर) 3. भारत की जवाबी रणनीति और कूटनीतिक प्रयास भारत इस दबाव के बावजूद अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आयात में कमी: आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने दिसंबर 2025 में रूसी तेल का आयात घटाकर 1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन कर दिया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जनवरी 2026 के लिए रूसी कार्गो की कोई बुकिंग नहीं की है। अमेरिका से तेल की खरीद: भारत ने अपनी ऊर्जा निर्भरता को संतुलित करने के लिए अमेरिका से तेल का आयात 90% तक बढ़ा दिया है। राजदूत का प्रयास: भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने ट्रंप प्रशासन से अपील की है कि भारत पर लगे अतिरिक्त दंड को हटाया जाए क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। 4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर इस बिल के प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेंगे: ग्लोबल ऑयल मार्केट: यदि भारत और चीन रूसी तेल खरीदना बंद करते हैं, तो कच्चे तेल की मांग मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) में बढ़ेगी, जिससे वैश्विक कीमतें $130 प्रति बैरल तक जा सकती हैं। रुपये की गिरावट: व्यापार घाटा बढ़ने से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुँच सकता है। चीन-रूस का जुड़ाव: अमेरिकी दबाव के कारण रूस और चीन एक-दूसरे के और करीब आ सकते हैं, जो अमेरिका के लिए एक नई सुरक्षा चुनौती होगी।

रवि चौहान जनवरी 8, 2026 0
अमेरिकी ऑपरेशन में जख्मी हुईं मादुरो की पत्नी
Cilia Flores Injured in US Operation: न्यूयॉर्क कोर्ट में घायल अवस्था में पेश हुईं सिलिया फ्लोरेस; मादुरो ने खुद को बताया निर्दोष।

⚖️ न्यूयॉर्क कोर्ट में मादुरो-फ्लोरेस: पट्टियों में लिपटी 'फर्स्ट कॉम्बैटेंट' और बेबस पूर्व राष्ट्रपति; क्या यह एक युग का अंत है? 1. कोर्ट रूम का मंजर: घायल और थके हुए मादुरो-फ्लोरेस सोमवार को मैनहट्टन की फेडरल कोर्ट में जब निकोलस मादुरो और सिलिया फ्लोरेस को पेश किया गया, तो उनकी शारीरिक स्थिति ने अमेरिकी सेना के 'ऑपरेशन वेनेजुएला' की गंभीरता को उजागर कर दिया। फ्लोरेस की चोटें: 69 साल की सिलिया फ्लोरेस के चेहरे पर दो पट्टियां थीं। उनकी दाहिनी आंख के पास गहरा नीला निशान और माथे पर चोट साफ दिख रही थी। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि उन्हें पसलियों में फ्रैक्चर है और उन्हें तुरंत एक्स-रे और चिकित्सा देखभाल की जरूरत है। मादुरो का बचाव: मादुरो ने खुद को 'शरीफ इंसान' बताते हुए कोकीन तस्करी और हथियारों के सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने स्पेनिश में कहा, "मैं निर्दोष हूँ।" अदालती निर्देश: जज एल्विन हेलरस्टीन ने मानवीय आधार पर फ्लोरेस को तुरंत उचित इलाज मुहैया कराने का आदेश दिया है। 2. कौन हैं सिलिया फ्लोरेस? 'चाविस्मो' की असली शक्ति सिलिया फ्लोरेस केवल निकोलस मादुरो की पत्नी नहीं हैं, बल्कि वेनेजुएला की राजनीति का एक स्तंभ रही हैं। उन्हें 'फर्स्ट लेडी' के बजाय 'फर्स्ट कॉम्बैटेंट' (Cilia Flores: The First Combatant) कहा जाता है। कानूनी विशेषज्ञ और चावेज की रक्षक: फ्लोरेस पेशे से वकील हैं। 1992 में जब ह्यूगो चावेज ने तख्तापलट की कोशिश की और जेल गए, तब फ्लोरेस ने ही उनकी कानूनी टीम का नेतृत्व किया और 1994 में उनकी रिहाई सुनिश्चित की। संसदीय इतिहास: वे वेनेजुएला की संसद (National Assembly) की अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने देश की अटॉर्नी जनरल के रूप में भी काम किया। चाविस्मो आंदोलन: चाविस्मो का मूल उद्देश्य तेल की कमाई को गरीबों में बांटना था। फ्लोरेस इस आंदोलन की वैचारिक रक्षक मानी जाती हैं। 3. मादुरो और फ्लोरेस की प्रेम कहानी और सत्ता का सफर 30 साल का साथ: मादुरो और फ्लोरेस की मुलाकात 1990 के दशक में चाविस्मो आंदोलन के दौरान हुई थी। फ्लोरेस मादुरो से 6 साल बड़ी हैं। सत्ता का हस्तांतरण: 2013 में ह्यूगो चावेज की मृत्यु के बाद, मादुरो ने सत्ता संभाली। फ्लोरेस पर्दे के पीछे रहकर सरकार के फैसलों को प्रभावित करती रहीं। 📊 मादुरो और फ्लोरेस पर लगे गंभीर आरोप अमेरिकी न्याय विभाग ने उन पर 'नार्को-टेररिज्म' (Narco-Terrorism) के आरोप लगाए हैं। आरोप विवरण संभावित सजा कोकीन तस्करी अमेरिका में सैकड़ों टन ड्रग्स भेजने की साजिश। उम्रकैद हथियार अपराध अवैध हथियारों का इस्तेमाल और वितरण। 30 साल से उम्रकैद भ्रष्टाचार तेल की कमाई का निजी इस्तेमाल और रिश्वतखोरी। भारी जुर्माना और जेल मानवता के खिलाफ अपराध विरोधियों का दमन और मानवाधिकार उल्लंघन। अंतरराष्ट्रीय दंड 4. विवाद और भाई-भतीजावाद (Nepotism) फ्लोरेस का करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। भतीजों की गिरफ्तारी: 2017 में फ्लोरेस के दो भतीजों को अमेरिका में 18 साल की सजा सुनाई गई थी। वे राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान (Presidential Hangar) का इस्तेमाल करके अमेरिका में कोकीन भेजने की कोशिश कर रहे थे। रिश्वत के आरोप: 'द गार्जियन' की रिपोर्ट के अनुसार, उन पर 2007 में एक बड़े ड्रग तस्कर और एंटी-ड्रग विभाग के बीच डील कराने के लिए लाखों डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप है। प्रतिबंध: 2018 में अमेरिका और कनाडा ने उनकी संपत्तियों को फ्रीज कर दिया और उन पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए थे। 5. अमेरिकी कार्रवाई की वैधता पर सवाल मादुरो और उनके समर्थकों का दावा है कि 2 जनवरी की रात को अमेरिकी सेना द्वारा उन्हें 'अगवा' करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। अमेरिकी पक्ष: अमेरिका का कहना है कि मादुरो एक अवैध राष्ट्रपति थे और उन पर लगे नार्को-टेररिज्म के आरोपों के कारण उन्हें गिरफ्तार करना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी था। वैश्विक असर: रूस और चीन ने इस गिरफ्तारी को 'संप्रभुता का कत्ल' बताया है, जबकि कई लैटिन अमेरिकी देश इसे तानाशाही के अंत के रूप में देख रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 6, 2026 0
रूस से भारत का तेल आयात घटने पर ट्रम्प बोले
Trump on India-Russia Oil: "PM Modi wanted to please me"; भारत ने रूस से तेल आयात घटाया; 50% टैरिफ हटाने की मांग।

🛢️ ट्रम्प का दावा: "मोदी मुझे खुश करना चाहते थे, इसलिए रूस से तेल कम खरीदा"; 50% टैरिफ के दबाव में झुका भारत? 1. ट्रम्प का बयान: व्यापारिक शक्ति का प्रदर्शन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' और टैरिफ नीति का असर दिखने लगा है। "मोदी अच्छे इंसान हैं": ट्रम्प ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे जानते थे कि मैं (ट्रम्प) रूसी तेल खरीद से खुश नहीं हूँ, इसलिए उन्होंने आयात घटाया। टैरिफ की धमकी: ट्रम्प ने सीधे शब्दों में कहा कि हम व्यापार करते हैं और टैरिफ बढ़ा सकते हैं—यही वह डर था जिसने भारत को अपनी ऊर्जा नीति बदलने पर मजबूर किया। 2. टैरिफ का गणित: भारत पर 50% का भारी बोझ अमेरिका ने भारत के निर्यात पर दो चरणों में कुल 50% टैरिफ लगा दिया है, जो किसी भी देश के लिए बहुत बड़ा आर्थिक झटका है: 25% रेसिप्रोकल टैरिफ: यह 'जैसे को तैसा' नीति के तहत लगाया गया। 25% रूसी तेल पेनाल्टी: रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध को 'फंड' करने के आरोप में यह एक्स्ट्रा टैक्स लगाया गया। भारत की मांग: भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी सीनेटरों से अपील की है कि इस 50% बोझ को घटाकर 15% पर लाया जाए ताकि भारतीय निर्यातकों को सांस लेने की जगह मिले। 📊 भारत का रूसी तेल आयात: गिरावट के आंकड़े भारत ने 4 साल में पहली बार रूस से अपनी निर्भरता घटाई है। महीना (वर्ष 2025) आयात (बैरल प्रति दिन) स्थिति नवंबर 17.7 लाख बैरल स्थिर दिसंबर 12 लाख बैरल -32% की गिरावट जनवरी 2026 (अनुमानित) 10 लाख बैरल से कम भारी कटौती 3. रूस से मोहभंग की असली वजह: डिस्काउंट का खत्म होना सिर्फ अमेरिकी दबाव ही नहीं, बल्कि आर्थिक गणित भी रूस के खिलाफ जा रहा है: छूट में भारी कमी: युद्ध की शुरुआत में रूस $20-25 का डिस्काउंट दे रहा था, जो अब घटकर मात्र $1.5 से $2 रह गया है। महंगा ट्रांसपोर्ट: रूस से तेल लाने में शिपिंग और बीमा का खर्च इतना बढ़ गया है कि $2 की छूट का कोई मतलब नहीं रह जाता। सऊदी-अमेरिका की वापसी: अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत $63 के करीब है, जिससे सऊदी अरब, यूएई और खुद अमेरिका का तेल भारत के लिए अधिक किफायती और "भरोसेमंद" हो गया है। 4. राजदूत की कूटनीति: सीनेटर ग्राहम के घर 'डिनर डिप्लोमेसी' अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुलासा किया कि भारतीय राजदूत ने उन्हें अपने घर बुलाकर यह भरोसा दिलाया कि भारत अब रूस से दूरी बना रहा है। भारत का एकमात्र लक्ष्य अब अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% एक्स्ट्रा टैरिफ को हटवाना है ताकि भारत-अमेरिका ट्रेड डील का रास्ता साफ हो सके।

रवि चौहान जनवरी 5, 2026 0
ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को धमकी दी
Trump Threatens Delcy Rodriguez: ट्रंप की डेल्सी रोड्रिग्ज को चेतावनी; UNSC की इमरजेंसी मीटिंग; मादुरो की आज कोर्ट में पेशी।

🌏 ट्रंप का अल्टीमेटम: "बात मानो वरना मादुरो से भी बुरा हाल होगा"; वेनेजुएला पर कब्जे को लेकर दुनिया दो ध्रुवों में बंटी 1. ट्रंप की 'धमकी' और कूटनीतिक दबाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वेनेजुएला में अब वही होगा जो अमेरिका चाहेगा। डेल्सी रोड्रिग्ज को चेतावनी: 'द अटलांटिक' को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यदि अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने अमेरिका के 'एजेंडे' का पालन नहीं किया, तो उनका हाल मादुरो से भी ज्यादा खराब हो सकता है। मादुरो इस समय न्यूयॉर्क की एक जेल में बंद हैं। सैन्य तैनाती का विकल्प: ट्रंप ने 'न्यूयॉर्क पोस्ट' से बातचीत में संकेत दिया कि यदि रोड्रिग्ज सहयोग करती हैं, तो वेनेजुएला में बड़े पैमाने पर अमेरिकी सेना तैनात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यानी, अमेरिका बिना युद्ध के वहां के संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण चाहता है। तेल पर नजर: ट्रंप ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि वेनेजुएला एक 'मरा हुआ देश' है और अमेरिका को उसे पुनर्जीवित करने के बदले वहां के तेल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक 'पूरी पहुंच' चाहिए। 2. डेल्सी रोड्रिग्ज का स्टैंड: शांति या आत्मसमर्पण? अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने मादुरो की गिरफ्तारी की आलोचना तो की है, लेकिन साथ ही वे अमेरिका के साथ टकराव से बचने की कोशिश भी कर रही हैं। सहयोग की अपील: रोड्रिग्ज ने पहली काउंसिल बैठक के बाद कहा कि वेनेजुएला 'युद्ध नहीं, शांति' चाहता है। उन्होंने ट्रंप से अपील की है कि दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में रहकर 'संवाद और सहयोग' का एजेंडा तैयार करें। दोहरा संकट: एक तरफ उन पर मादुरो के वफादारों का दबाव है कि वे अमेरिका का विरोध करें, वहीं दूसरी तरफ ट्रंप की सीधी धमकी उन्हें 'सहयोग' करने पर मजबूर कर रही है। 📊 वेनेजुएला संकट: प्रमुख पक्ष और उनका रुख पक्ष स्टैंड/भूमिका मुख्य बयान/एक्शन डोनाल्ड ट्रंप आक्रामक/नियंत्रणकारी "वेनेजुएला की कमान अब हमारे हाथ में है।" डेल्सी रोड्रिग्ज रक्षात्मक/अंतरिम प्रमुख "हम टकराव नहीं, सहयोग और शांति चाहते हैं।" चीन (शी जिनपिंग) संप्रभुता का समर्थक "कोई देश खुद को दुनिया का जज न समझे।" क्यूबा सैन्य सहयोगी हमले में क्यूबा के 32 अधिकारियों की मौत, शोक घोषित। मार्को रूबियो अमेरिकी विदेश मंत्री "यह कब्जा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बहाली है।" 3. मादुरो की अदालती पेशी: मैनहैटन में 'ग्लोबल ट्रायल' आज का दिन ऐतिहासिक है क्योंकि एक संप्रभु राष्ट्र के पूर्व राष्ट्रपति को अमेरिका की एक फेडरल कोर्ट में अपराधी के रूप में पेश किया जाएगा। आरोप: निकोलस मादुरो पर नार्को-टेररिज्म (ड्रग तस्करी) और हथियारों के अवैध व्यापार के गंभीर आरोप हैं। पत्नी भी शामिल: मादुरो की पत्नी सीलिया फ्लोरेस पर भी अपहरण और हत्याओं के आदेश देने का केस दर्ज किया गया है। सुरक्षा: उन्हें मैनहैटन की उसी जेल (MDC) में रखा गया है जहाँ दुनिया के सबसे खूंखार कैदी बंद हैं। 4. चीन का कड़ा प्रहार: "दुनिया का जज न बने अमेरिका" वेनेजुएला में अमेरिका की दखलंदाजी पर चीन सबसे ज्यादा मुखर है, क्योंकि वहां चीन के अरबों डॉलर का निवेश दांव पर लगा है। शी जिनपिंग का संदेश: चीनी राष्ट्रपति ने आयरलैंड के PM से मुलाकात के दौरान कहा कि बड़ी शक्तियों को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बिना उसे 'एकतरफा फैसला लेने वाली ताकत' बताया। आर्थिक हित: चीन ने 2024 में वेनेजुएला से $1.6 बिलियन का सामान खरीदा था। चीन को डर है कि अमेरिका वहां के तेल पर कब्जा कर चीन की ऊर्जा आपूर्ति को बाधित कर सकता है। 5. क्यूबा का नुकसान: 32 अधिकारियों की मौत वेनेजुएला में चल रहे इस ऑपरेशन में केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि क्यूबा के अधिकारी भी मारे गए हैं। सैन्य मिशन: क्यूबा ने पुष्टि की है कि अमेरिकी हमले में उसके 32 अधिकारी मारे गए। ये अधिकारी वहां पुलिस और सेना को प्रशिक्षण दे रहे थे। क्यूबा ने दो दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है, जिससे कैरेबियाई क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

रवि चौहान जनवरी 5, 2026 0
अमेरिका का वेनेजुएला पर हमला, राष्ट्रपति को पकड़ा
US Attacks Venezuela: निकोलस मादुरो गिरफ्तार; ट्रंप ने वेनेजुएला राष्ट्रपति को पकड़ने का किया दावा; ला ग्वाइरा पोर्ट तबाह।

अमेरिका-वेनेजुएला युद्ध: राष्ट्रपति मादुरो गिरफ्तार; ट्रंप का 'सर्जिकल स्ट्राइक' और दुनिया में हड़कंप 1. रात का ऑपरेशन: बेडरूम से पकड़े गए मादुरो अमेरिकी सेना ने बीती रात "ऑपरेशन वेनेजुएला फ्रीडम" के तहत एक अत्यंत गोपनीय और सटीक हमला किया। हमले का समय: भारतीय समयानुसार शनिवार सुबह 11:30 बजे (स्थानीय समय रात 2 बजे) अमेरिकी फाइटर जेट्स और मिसाइलों ने वेनेजुएला के 4 प्रमुख शहरों पर हमला बोला। गिरफ्तारी का नाटकीय घटनाक्रम: CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के कमांडो सीधे राष्ट्रपति भवन में दाखिल हुए। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया एडेला को उनके बेडरूम से हिरासत में लिया गया। उन्हें तुरंत एक सुरक्षित और अज्ञात स्थान पर (संभवतः अमेरिका) ले जाया गया है। रणनीतिक हमले: अमेरिकी मिसाइलों ने वेनेजुएला के ला ग्वाइरा पोर्ट और प्रमुख सैन्य अड्डों को तबाह कर दिया ताकि कोई जवाबी कार्रवाई न हो सके। 2. डोनाल्ड ट्रंप का ऐलान और प्रेस कॉन्फ्रेंस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे ऑपरेशन की सफलता की पुष्टि सोशल मीडिया के जरिए की। ट्रंप का संदेश: "वेनेजुएला का तानाशाह अब हमारे कब्जे में है। न्याय होकर रहेगा।" प्रेस कॉन्फ्रेंस: राष्ट्रपति ट्रंप भारतीय समयानुसार आज रात 9:30 बजे (अमेरिकी समय सुबह 11 बजे) व्हाइट हाउस से दुनिया को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान मादुरो पर लगने वाले अंतरराष्ट्रीय आरोपों और वेनेजुएला के भविष्य पर ब्लूप्रिंट पेश किया जाएगा। 3. वेनेजुएला की स्थिति: इमरजेंसी और सन्नाटा पकड़े जाने से ठीक एक घंटे पहले मादुरो ने देश को संबोधित करते हुए इमरजेंसी (आपातकाल) की घोषणा की थी और इसे "साम्राज्यवादी हमला" बताया था। हालांकि, उनकी गिरफ्तारी के बाद वेनेजुएला की सेना और प्रशासन में भारी असमंजस की स्थिति है। सड़कों पर सन्नाटा है और संचार माध्यमों पर कड़ा पहरा है। 📊 वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के 3 मुख्य आधार कारण विवरण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा अमेरिका का आरोप है कि मादुरो सरकार अमेरिकी मुख्य भूमि पर हमले की साजिश रच रही थी। लोकतंत्र की बहाली ट्रंप प्रशासन के अनुसार वेनेजुएला में चुनाव प्रक्रिया और मानवाधिकारों को पूरी तरह कुचल दिया गया था। अवैध गतिविधियां अमेरिका ने मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय नार्को-टेररिज्म (नशीले पदार्थों की तस्करी) और हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं।

रवि चौहान जनवरी 3, 2026 0
अमेरिका की भारत को चेतावनी- चीन दोहरी चाल चल रहा
Pentagon Report 2025: चीन की 'दोहरी चाल' का पर्दाफाश; LAC पर शांति का दिखावा और पाकिस्तान-बांग्लादेश में सैन्य घेराबंदी

पेंटागन रिपोर्ट 2025: चीन की 'दोहरी चाल' का खुलासा; भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैन्य किलेबंदी 1. ⚔️ LAC पर तनाव कम करना: एक सोची-समझी रणनीति रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पीछे हटने (Disengagement) की चीन की सहमति का उद्देश्य सीमा विवाद सुलझाना नहीं, बल्कि रणनीतिक है। अमेरिका से दूरी: चीन चाहता है कि भारत के साथ रिश्ते 'सामान्य' दिखें ताकि भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकी को रोका जा सके। भरोसे का संकट: पेंटागन का मानना है कि भारत-चीन के बीच विश्वास की कमी ऐतिहासिक स्तर पर है। चीन अरुणाचल प्रदेश को ताइवान और दक्षिण चीन सागर के समान ही 'प्रमुख राष्ट्रीय हित' मानता है और इस पर अपना दावा छोड़ने को तैयार नहीं है। 2. 🇵🇰 पाकिस्तान: चीन का 'हथियार डिपो' और सैन्य ठिकाना पेंटागन ने चेतावनी दी है कि चीन पाकिस्तान को भारत के खिलाफ एक सैन्य मोहरे के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सैन्य सप्लाई: 2020 से अब तक चीन ने पाकिस्तान को 36 J-10C लड़ाकू विमान सौंपे हैं। दोनों देश मिलकर JF-17 फाइटर जेट बना रहे हैं। इसके अलावा, चीनी ड्रोन और नौसैनिक उपकरणों से पाकिस्तान की मारक क्षमता बढ़ाई जा रही है। संयुक्त अभ्यास और बेस: दिसंबर 2024 में हुए संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभ्यास के पीछे का असली मकसद पाकिस्तान की धरती पर चीनी सैन्य ठिकानों (Military Bases) की नींव रखना है। इससे भारत के पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों पर चीन की सीधी मौजूदगी बढ़ जाएगी। 3. ⚓ 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' का विस्तार: बांग्लादेश और 21 अन्य देश चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अपनी पहुंच को सुदूर समुद्रों तक ले जाने के लिए 21 देशों में नए सैन्य बेस बनाने की योजना बना रही है। भारत के पड़ोस में: चीन की नजर बांग्लादेश पर है, जहाँ वह एक लॉजिस्टिक और मिलिट्री बेस बनाना चाहता है। यह बंगाल की खाड़ी में भारत के प्रभाव को सीधे चुनौती देगा। खुफिया जाल: ये ठिकाने केवल सैनिकों के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर रखने वाले 'इंटेलिजेंस हब' के रूप में काम करेंगे। इनका फोकस मलक्का और होरमुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों (Choke Points) पर है। 4. 🚀 2049 का लक्ष्य: 'वर्ल्ड-क्लास' सेना और ताइवान पर नजर शी जिनपिंग का लक्ष्य 2049 तक चीन को दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य महाशक्ति बनाना है। 2027 के टार्गेट: चीन 2027 तक ताइवान के खिलाफ निर्णायक जीत हासिल करने और परमाणु क्षेत्र में अमेरिका की बराबरी करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। नेशनल टोटल वॉर: चीन 'संपूर्ण राष्ट्र की शक्ति' झोंकने वाली रणनीति पर काम कर रहा है। उसने साइबर हमलों (जैसे वोल्ट टाइफून) और अंतरिक्ष क्षमताओं में भारी निवेश किया है ताकि युद्ध की स्थिति में अमेरिका के संचार तंत्र को ठप किया जा सके। 5. 🛡️ अमेरिका का रुख: ताकत के जरिए शांति अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि वे चीन को नीचा नहीं दिखाना चाहते, लेकिन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में किसी भी एक देश का प्रभुत्व स्वीकार नहीं करेंगे। अमेरिका 'मजबूत सैन्य उपस्थिति' के जरिए चीन को आक्रामक कदम उठाने से रोकना चाहता है।

रवि चौहान दिसम्बर 24, 2025 0
ट्रम्प ने सालभर में ₹18 हजार करोड़ चंदा लिया
ट्रम्प की 'फंडिंग मशीन': 18 हजार करोड़ का चंदा और रिटर्न गिफ्ट का विवाद

🇺🇸 ट्रम्प 2.0: 18 हजार करोड़ का चंदा और 'दान के बदले इनाम' का बड़ा खेल; न्यूयॉर्क टाइम्स का सनसनीखेज खुलासा 1. 💰 चंदे का विशाल अंबार और "मैगा इंक" (MAGA Inc.) ट्रम्प की टीम ने फंड जुटाने के लिए एक सुनियोजित ढांचा तैयार किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका MAGA Inc. नाम के सुपर PAC (Political Action Committee) की है। बड़ा कलेक्शन: नवंबर 2024 से जून 2025 के बीच केवल इस संगठन ने 200 मिलियन डॉलर जुटाए। ऐतिहासिक शपथ ग्रहण: ट्रम्प के शपथ ग्रहण समारोह के लिए 240 मिलियन डॉलर इकट्ठा किए गए, जो अमेरिकी इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति के लिए सबसे अधिक है। व्हाइट हाउस बॉलरूम: व्हाइट हाउस में एक भव्य बॉलरूम बनाने के नाम पर 350 मिलियन डॉलर जुटाए जा रहे हैं, जिसमें 999 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। 2. 🤝 दानदाताओं की प्रोफाइल: पिचाई और नडेला समेत दिग्गज शामिल रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 346 बड़े दानदाता ऐसे हैं जिन्होंने 2.5 लाख डॉलर से अधिक का चंदा दिया। भारतवंशी बिजनेसमैन: सुंदर पिचाई (अल्फाबेट) और सत्या नडेला (माइक्रोसॉफ्ट) सहित 6 प्रमुख भारतवंशी उद्यमी ट्रम्प के डिनर और कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं। कॉर्पोरेट दिग्गज: मार्क जुकरबर्ग, बिल गेट्स और टिम कुक जैसे अधिकारियों ने भी व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति के साथ निजी मुलाकातों और रात्रिभोज में हिस्सा लिया। 3. ⚖️ दान के बदले 'डील': किसे क्या मिला? हालांकि व्हाइट हाउस इन आरोपों को नकारता है, लेकिन रिपोर्ट में 'पैसे और फायदे' के बीच एक स्पष्ट पैटर्न दिखाया गया है: सरकारी ठेके: टेक कंपनी पैलेंटिर (Palantir) ने करीब 1.5 करोड़ डॉलर का दान दिया और बदले में उसे इमिग्रेशन विभाग के सॉफ्टवेयर जैसे सैकड़ों मिलियन डॉलर के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट मिले। डिप्लोमैटिक पद: एक दंपती ने 15 लाख डॉलर का चंदा दिया और कुछ समय बाद उनके बेटे को फिनलैंड में अमेरिकी राजदूत नियुक्त कर दिया गया। मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट: इंजीनियरिंग फर्म पार्सन्स ने बॉलरूम प्रोजेक्ट के लिए पैसे दिए और अब वह 'गोल्डन डोम' मिसाइल डिफेंस सिस्टम के अरबों डॉलर के ठेकों की रेस में सबसे आगे है। राष्ट्रपति की माफी (Pardons): कई मामलों में उन लोगों को या उनके परिवार को राष्ट्रपति की विशेष माफी मिली, जिन्होंने ट्रम्प के फंड में भारी निवेश किया था। 4. ⛽ उद्योग जगत और नीतिगत बदलाव चंदे का असर अमेरिकी नीतियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है: क्रिप्टोकरेंसी: क्रिप्टो कंपनियों ने लाखों डॉलर दिए, जिसके बाद सरकार ने उनके खिलाफ चल रही कई जांचें बंद कर दीं और क्रिप्टो-फ्रेंडली नीतियां अपनाईं। ऊर्जा क्षेत्र: तेल और कोयला कंपनियों को पर्यावरण नियमों में ढील और नई ड्रिलिंग साइट्स की अनुमति मिली। डिफेंस जायंट्स: लॉकहीड मार्टिन और बोइंग जैसी कंपनियों को फाइटर जेट सौदों में बड़े फायदे मिले। 5. 🕵️ गोपनीयता और भविष्य की योजनाएं ट्रम्प का यह पूरा सिस्टम काफी गुप्त रखा गया है। 'अमेरिका 250' और 'व्हाइट हाउस हिस्टोरिकल एसोसिएशन' जैसे संगठनों के जरिए लिए गए दान में दाताओं के नाम सार्वजनिक करना अनिवार्य नहीं है। अगला लक्ष्य: ट्रम्प अब अपनी राष्ट्रपति लाइब्रेरी के लिए 950 मिलियन डॉलर और 'फ्रीडम 250' कैंपेन के लिए भारी फंड जुटाने की तैयारी में हैं।

रवि चौहान दिसम्बर 23, 2025 0
ट्रम्प की यौन अपराधी के साथ वाली फोटो गायब
Epstein Files Controversy: वेबसाइट से गायब हुईं डोनाल्ड ट्रम्प की 16 फाइलें; बिल क्लिंटन का पलटवार और फाइलों में 'आयुर्वेद' का चौंकाने वाला सच

एपस्टीन फाइल्स का रहस्य: वेबसाइट से गायब हुईं ट्रम्प की तस्वीरें; बिल क्लिंटन का 'बलि का बकरा' वाला दावा और आयुर्वेद का जिक्र 1. 🔍 गायब फाइलें और ट्रम्प-एपस्टीन कनेक्शन शुक्रवार को जारी दस्तावेजों के बाद शनिवार रात को वेबसाइट से 16 फाइलें अचानक हटा ली गईं। रॉयटर्स के अनुसार, इन फाइलों में वह चर्चित तस्वीर (फाइल 468) भी शामिल थी, जिसमें डोनाल्ड ट्रम्प, मेलानिया ट्रम्प, जेफ्री एपस्टीन और गिजलेन मैक्सवेल एक साथ नजर आ रहे थे। फ्लाइट लॉग्स का सच: हालांकि नए जारी रिकॉर्ड्स में ट्रम्प का नाम कम है, लेकिन पुराने फ्लाइट लॉग्स बताते हैं कि ट्रम्प ने 1993 से 1997 के बीच 7 बार एपस्टीन के 'लोलिता एक्सप्रेस' जेट से यात्रा की थी। विवादित बयान: 2002 में ट्रम्प ने एपस्टीन को 'कमाल का आदमी' बताया था और कहा था कि "हम दोनों को कम उम्र की खूबसूरत लड़कियां पसंद हैं।" हालांकि, बाद में ट्रम्प ने कहा कि 15 साल पहले एक प्रॉपर्टी विवाद के बाद उन्होंने एपस्टीन से संबंध तोड़ लिए थे। 2. 🏛️ बिल क्लिंटन की मुश्किलें और बचाव दस्तावेजों में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की तस्वीरें सबसे ज्यादा विवाद पैदा कर रही हैं। व्हाइट हाउस के दौरे: रिपोर्टों के मुताबिक, क्लिंटन के कार्यकाल के दौरान एपस्टीन 17 बार व्हाइट हाउस गया था। क्लिंटन पद छोड़ने के बाद भी एपस्टीन के विमान से अफ्रीका और एशिया की यात्राओं पर गए थे। 'बलि का बकरा' थ्योरी: क्लिंटन के प्रवक्ता एंजेल उरेना ने आरोप लगाया है कि मौजूदा प्रशासन असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए क्लिंटन को निशाना बना रहा है। प्रवक्ता का दावा है कि क्लिंटन ने 2005 में ही एपस्टीन से दूरी बना ली थी। 3. 🧘 फाइलों में 'आयुर्वेद' और मसाज का काला सच इन फाइलों में भारत की प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति का भी चौंकाने वाला जिक्र है। डिटॉक्स के नाम पर शोषण: दस्तावेजों में 'द आर्ट ऑफ गिविंग मसाज' जैसे लेख मिले हैं, जिनमें तिल के तेल से बॉडी डिटॉक्स करने की बात कही गई है। प्रशिक्षण और निर्देश: फाइलों में लड़कियों को 'बेबी मसाज ट्रेनिंग' देने के स्टेप-बाय-स्टेप निर्देश मिले हैं। इन निर्देशों में लड़कियों को बताया जाता था कि क्लाइंट्स (अमीर लोगों) को कैसे मसाज देनी है, जिसमें कई अश्लील प्रक्रियाएं भी शामिल थीं। 4. ⚖️ पारदर्शिता की कमी: "पीड़ितों के साथ धोखा" भले ही 3 लाख दस्तावेज जारी हुए हों, लेकिन पीड़ितों और सांसदों ने इसे 'अधूरा न्याय' करार दिया है। ब्लैक आउट (Redacted) फाइलें: जारी दस्तावेजों में हजारों पन्ने ऐसे हैं जिन्हें पूरी तरह काला कर दिया गया है। 119 पन्नों का एक पूरा सेट पूरी तरह से 'ब्लैक आउट' है। गायब मुख्य दस्तावेज: FBI द्वारा लिए गए पीड़ितों के इंटरव्यू और वह महत्वपूर्ण रिकॉर्ड्स जिनमें एपस्टीन को संघीय सजा के बजाय मामूली सजा देने का फैसला हुआ था, वे अब भी गायब हैं। पीड़ितों का गुस्सा: पीड़िता जेस माइकल्स और मरीना लार्सेडा ने कहा कि "ये तस्वीरें बेकार हैं, सरकार अब भी प्रभावशाली लोगों के नाम छिपाकर हमें धोखा दे रही है।" 5. ✈️ 'लोलिता एक्सप्रेस' और 14 साल की बच्ची की गवाही दस्तावेजों में एक FBI एजेंट की दिल दहला देने वाली गवाही सामने आई है। ट्रैपिंग का तरीका: एजेंट ने बताया कि कैसे एक 14 साल की बच्ची को स्कूल छोड़ने के बाद झांसा देकर एपस्टीन के पास लाया गया। उसे बताया गया कि एक अमीर आदमी को मसाज देने के बदले उसे मोटी रकम मिलेगी, लेकिन बाद में उसका यौन शोषण किया गया। लड़कियों का नेटवर्क: गवाही के मुताबिक, एक लड़की ने एपस्टीन के लिए 20 से 50 अन्य लड़कियों का नेटवर्क तैयार किया था।

रवि चौहान दिसम्बर 21, 2025 0
एपस्टीन सेक्स स्कैंडल में सबसे बड़ा खुलासा
Epstein Files Released: बिल क्लिंटन, माइकल जैक्सन और प्रिंस एंड्रयू की तस्वीरें सार्वजनिक; ट्रम्प के आदेश पर न्याय विभाग का बड़ा एक्शन

एपस्टीन फाइल्स का धमाका: बिल क्लिंटन, माइकल जैक्सन और प्रिंस एंड्रयू की तस्वीरें सार्वजनिक; 3 लाख दस्तावेजों का कच्चा चिट्ठा 1. 🖼️ वायरल तस्वीरें: क्या कह रही हैं ये फाइलें? जारी किए गए दस्तावेजों में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की तस्वीरों की हो रही है। पूल पार्टी और पूल साइड फोटोज: क्लिंटन कई महिलाओं के साथ स्विमिंग पूल और हॉट टब में नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में वे शांटे डेविस के साथ दिख रहे हैं, जिन्होंने बाद में एपस्टीन के खिलाफ गवाही दी थी। दिग्गजों का जमघट: एक ग्रुप फोटो में माइकल जैक्सन, बिल क्लिंटन और मशहूर होस्ट ओप्रा विन्फ्रे साथ नजर आ रहे हैं। ब्रिटिश प्रिंस एंड्रयू: प्रिंस एंड्रयू की एक बेहद विवादास्पद फोटो सामने आई है जिसमें वे कई महिलाओं के साथ लेटे हुए हैं। उनके साथ एपस्टीन की मुख्य साथी घिसलीन मैक्सवेल भी मौजूद हैं। प्राइवेट जेट: एपस्टीन और मैक्सवेल की अपने प्राइवेट जेट (जिसे 'लोलिता एक्सप्रेस' कहा जाता था) के अंदर की भी तस्वीरें जारी हुई हैं। 2. ⚖️ डोनाल्ड ट्रम्प का आदेश और न्याय विभाग की कार्रवाई यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जेल में संदिग्ध मौत के बाद से ही इन फाइलों को सार्वजनिक करने की मांग उठ रही थी। 30 दिन की डेडलाइन: राष्ट्रपति ट्रम्प ने 18 नवंबर को एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें न्याय विभाग को 30 दिनों के भीतर एपस्टीन से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने का आदेश दिया गया था। अधूरा खुलासा: हालांकि विभाग ने 3 लाख फाइलें जारी कीं, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि कुछ संवेदनशील दस्तावेज 'राष्ट्रीय सुरक्षा' और चल रही जांचों के कारण अभी रोके गए हैं। 3. 🚩 बिल क्लिंटन का बचाव: "मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है" इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद बिल क्लिंटन के प्रवक्ता ने तीखा बयान जारी किया है। निशाना बनाने का आरोप: प्रवक्ता ने कहा कि 20 साल पुरानी और धुंधली तस्वीरों का सहारा लेकर क्लिंटन को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। ट्रम्प पर पलटवार: क्लिंटन कैंप का कहना है कि इस केस से पूर्व राष्ट्रपति का कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें महज 'बलि का बकरा' बनाया जा रहा है। 4. 🕵️ घिसलीन मैक्सवेल की साजिश: कैसे फंसती थीं नाबालिग लड़कियां? दस्तावेजों में खुलासा हुआ है कि एपस्टीन की गर्लफ्रेंड घिसलीन मैक्सवेल किस तरह नाबालिग लड़कियों का शिकार करती थीं। लालच और दोस्ती: मैक्सवेल 1994 से 1997 के बीच नाबालिग लड़कियों से दोस्ती करती थीं, उन्हें शॉपिंग और फिल्मों का लालच देती थीं। कर्ज के जाल में फंसाना: मैक्सवेल लड़कियों को मसाज देने के लिए मजबूर करती थीं। एपस्टीन उन्हें पैसे देता था और मैक्सवेल उन्हें पैसे लेने के लिए उकसाती थीं ताकि वे खुद को कर्जदार महसूस करें और शोषण का विरोध न कर सकें। 5. 💔 पीड़ितों का आक्रोश: "यह पारदर्शिता नहीं, धोखा है" खुलासे के बावजूद पीड़ितों में भारी निराशा है। लीसा फिलिप्स और जेस माइकल्स: एपस्टीन की पीड़ितों ने CNN से बातचीत में कहा कि न्याय विभाग ने अधिकांश फाइलों को 'ब्लैक आउट' (Redacted) कर दिया है। 119 पन्नों की एक फाइल तो पूरी तरह काली कर दी गई है। डेटा सर्च में मुश्किल: पीड़ितों का आरोप है कि डेटा को इतना भारी (Heavy) और अव्यवस्थित तरीके से जारी किया गया है कि उसमें से काम की जानकारी ढूंढना असंभव है। उनका दावा है कि विभाग पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय प्रभावशाली लोगों को बचा रहा है। 6. 🏛️ कूटनीतिक और राजनीतिक संकट इस खुलासे के बाद अमेरिकी राजनीति में नया मोड़ आ गया है। महाभियोग की तैयारी: भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी के खिलाफ महाभियोग लाने पर विचार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि न्याय विभाग ने कानून का उल्लंघन करते हुए पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। ट्रम्प समर्थकों की प्रतिक्रिया: जहाँ दक्षिणपंथी समर्थकों को बड़े धमाके की उम्मीद थी, वहीं फाइलों में जानकारी 'एडिट' होने के कारण उनकी प्रतिक्रिया फिलहाल ठंडी नजर आ रही है।

रवि चौहान दिसम्बर 20, 2025 0
ट्रम्प के गोल्ड कार्ड
Trump Gold Card Visa News: ट्रम्प गोल्ड कार्ड की 9 करोड़ फीस पर मचा बवाल; 20 अमेरिकी राज्यों ने किया मुकदमा | US Visa Rules 2025

ट्रम्प गोल्ड कार्ड विवाद: 9 करोड़ की फीस पर 20 राज्यों का मुकदमा और भविष्य की चुनौतियां 1. ⚖️ कानूनी मोर्चा: 20 राज्यों बनाम व्हाइट हाउस कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा के नेतृत्व में न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और इलिनॉय समेत 20 अमेरिकी राज्यों ने इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्यों का तर्क: यह फीस वृद्धि पूरी तरह 'गैर-कानूनी' है। राज्यों का कहना है कि संसद (Congress) की मंजूरी के बिना प्रशासनिक स्तर पर इतनी बड़ी फीस वसूलना 'प्रशासनिक प्रक्रिया अधिनियम' (APA) का उल्लंघन है। जनहित पर असर: राज्यों ने चेतावनी दी है कि इस फीस के कारण विदेशों से आने वाले डॉक्टर, शिक्षक और इंजीनियर अमेरिका नहीं आ पाएंगे। इससे अस्पतालों और स्कूलों में पहले से चल रही कर्मियों की कमी और गहरा जाएगी। प्रोसेसिंग लागत बनाम फीस: याचिका के अनुसार, पहले H-1B वीजा की फीस 1,000 से 7,500 डॉलर के बीच होती थी। 1 मिलियन डॉलर की नई फीस वास्तविक प्रोसेसिंग लागत से सैकड़ों गुना ज्यादा है। 2. 🏥 अमेरिका में बुनियादी सेवाओं पर संकट अमेरिकी शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 75% डिस्ट्रिक्ट स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। विशेष रूप से साइंस, गणित और स्पेशल एजुकेशन के लिए विदेशी टैलेंट पर निर्भरता अधिक है। हेल्थकेयर: 2036 तक अमेरिका में 86,000 डॉक्टरों की कमी का अनुमान है। अगर एक डॉक्टर को बुलाने के लिए अस्पताल को 9 करोड़ रुपये देने पड़े, तो ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा जाएंगी। 3. 💳 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' क्या है और यह कैसे काम करता है? डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के तहत लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य दुनिया के सबसे अमीर और सबसे प्रतिभाशाली लोगों को सीधे अमेरिका लाना है। फीस संरचना: व्यक्तिगत आवेदक के लिए 1 मिलियन डॉलर (9 करोड़ रुपये), जबकि कंपनियों (कॉर्पोरेट) के लिए प्रति कर्मचारी 2 मिलियन डॉलर (18 करोड़ रुपये)। EB-1 और EB-2 का विकल्प: यह गोल्ड कार्ड मौजूदा ग्रीन कार्ड श्रेणियों (EB-1 और EB-2) की जगह लेगा। सुविधाएं: गोल्ड कार्ड धारक को पासपोर्ट और वोट देने के अधिकार को छोड़कर बाकी सभी सुविधाएं अमेरिकी नागरिकों जैसी मिलेंगी। इसमें 'अनलिमिटेड रेजिडेंसी' (स्थायी निवास) का अधिकार मिलता है। 4. 💎 जल्द आने वाला 'प्लेटिनम कार्ड' गोल्ड कार्ड के बाद अब ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड की चर्चा है, जिसकी फीस लगभग 5 मिलियन डॉलर (45 करोड़ रुपये) होने की उम्मीद है। टैक्स छूट: प्लेटिनम कार्ड धारकों को सबसे बड़ा फायदा यह मिलेगा कि उन्हें विदेश से होने वाली आय (Global Income) पर अमेरिका में कोई टैक्स नहीं देना होगा। उन्हें साल में 270 दिन अमेरिका में रहने की अनुमति मिलेगी। 5. 🔍 कड़े जांच नियम और सोशल मीडिया स्क्रूटनी सिर्फ पैसा ही काफी नहीं होगा; ट्रम्प प्रशासन ने सुरक्षा जांच को भी सख्त कर दिया है। अब आवेदकों को अपने पिछले 5 साल का सोशल मीडिया रिकॉर्ड देना होगा। होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के अनुसार, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल वही लोग आएं जो अमेरिका की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था में सकारात्मक योगदान दे सकें। 6. 🇮🇳 भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव अमेरिका में तकनीकी और चिकित्सा क्षेत्र में 70% से अधिक पेशेवर भारत से आते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी भारी फीस के कारण भारतीय टैलेंट अब कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी या ब्रिटेन जैसे देशों का रुख कर सकता है, जिससे अमेरिकी सिलिकॉन वैली के दबदबे को नुकसान पहुंच सकता है।

रवि चौहान दिसम्बर 13, 2025 0
₹9 करोड़ में मिलेगी अमेरिकी नागरिकता
Trump Gold Card Launched: 1 मिलियन डॉलर में US में स्थायी निवास, आज से आवेदन शुरू | EB-1/EB-2 वीजा होंगे बंद?

🇺🇸 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' लॉन्च: 1 मिलियन डॉलर में अमेरिका में स्थायी निवास, धनी विदेशियों के लिए वीजा प्रक्रिया शुरू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर अपने बहुप्रतीक्षित और विवादास्पद 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड' वीजा प्रोग्राम के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। यह प्रोग्राम खास तौर पर धनी विदेशियों, निवेशकों और उच्च-शिक्षित पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है, और यह ट्रम्प के 'अमेरिका फर्स्ट एजेंडे' का हिस्सा है। 1. 💰 गोल्ड कार्ड की लागत और उद्देश्य इस प्रोग्राम का मुख्य आकर्षण इसकी कीमत और अमेरिका के लिए इसका राजनीतिक एवं आर्थिक महत्व है। कार्ड का प्रकार आवेदक लागत उद्देश्य ट्रम्प गोल्ड कार्ड व्यक्तिगत आवेदक 1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹8.8 करोड़) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (स्थायी निवास) का अधिकार देना। कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड कंपनियां प्रति कर्मचारी 2 मिलियन डॉलर टॉप टैलेंट को अमेरिकी कंपनियों में लाना, विशेष रूप से भारत और चीन जैसे देशों से पढ़े छात्रों को अमेरिका में रोकना। कीमत में कटौती: ट्रम्प ने फरवरी में जब पहली बार इसकी घोषणा की थी, तब व्यक्तिगत कार्ड की कीमत $5 मिलियन थी, जिसे सितंबर में घटाकर $1 मिलियन कर दिया गया। ट्रम्प का दावा: राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस शुल्क से प्राप्त रकम का इस्तेमाल टैक्स को घटाने और सरकारी कर्ज चुकाने में किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब अमेरिका सिर्फ टैलेंटेड लोगों को ही वीजा देगा, न कि ऐसे लोगों को जो अमेरिकियों की नौकरियां छीन सकते हैं। 2. 📜 स्थायी निवास (अनलिमिटेड रेसीडेंसी) और सुविधाएं गोल्ड कार्ड धारकों को ग्रीन कार्ड के समान ही सुविधाएं मिलेंगी, जिससे यह पारंपरिक वीजा से अलग हो जाता है। सुविधाएं: गोल्ड कार्ड धारकों को पासपोर्ट और वोट देने के अधिकार को छोड़कर बाकी सारी सुविधाएं एक अमेरिकी नागरिक के जैसी मिलती हैं। स्थायी निवास: यह प्रक्रिया उसी तरह होगी, जैसे ग्रीन कार्ड के जरिए स्थायी निवास मिलता है। आवेदक को लॉफुल परमानेंट रेजिडेंट स्टेटस (ग्रीन कार्ड) मिलता है। EB-1 और EB-2 की जगह: कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक के मुताबिक, यह गोल्ड कार्ड मौजूदा EB-1 और EB-2 वीजा श्रेणियों की जगह लेगा, जिससे ये ग्रीन कार्ड श्रेणियां बंद हो सकती हैं। EB-1: उत्कृष्ट योग्यता वाले पेशेवरों के लिए स्थायी निवास वीजा। EB-2: उच्च शिक्षा (मास्टर्स या उससे ऊपर) योग्यता वाले पेशेवरों के लिए स्थायी निवास वीजा। 3. 💳 ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड (जल्द आ रहा है) ट्रम्प ने 'गोल्ड कार्ड' के अलावा 'ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड' की भी घोषणा की है, जिसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है। फीस: लगभग $5 मिलियन (लगभग ₹42 करोड़)। लाभ: यह व्यक्ति को बिना किसी ट्रैवल वीजा के हर साल 270 दिन तक अमेरिका में रहने की अनुमति देता है। टैक्स लाभ: प्लेटिनम कार्ड वाले व्यक्ति को विदेश से कमाई हुई इनकम पर अमेरिका में कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। 4. ❓ आवेदन और नियम (10 सवाल-जवाब) यह कार्यक्रम खास तौर पर धनी विदेशियों के लिए है। आवेदन प्रक्रिया जटिल और महंगी है: प्रश्न मुख्य बिंदु किसे मिलेगा? अमीरों, इन्वेस्टर्स, बिजनेसमैन या टैलेंटेड प्रोफेशनल के लिए। कॉर्पोरेट कार्ड कंपनी प्रति कर्मचारी $15,000 नॉन-रिफंडेबल DHS शुल्क और वेटिंग सफल होने पर $2 मिलियन देती है। परिवार के सदस्य पति/पत्नी और 21 साल से कम उम्र के अविवाहित बच्चे शामिल किए जा सकते हैं। प्रत्येक सदस्य के लिए अलग से $15,000 DHS शुल्क और $1 मिलियन देना होता है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन आवेदन और $15,000 का शुरुआती शुल्क (https://trumpcard.gov/) के माध्यम से जमा करना होता है, जिसके बाद DHS वेटिंग शुरू करता है। प्लेटिनम कार्ड के लाभ सालाना 270 दिन रहने की अनुमति; विदेश से कमाई इनकम पर कोई टैक्स नहीं। पात्रता अमेरिकी नागरिक या पहले से ग्रीन कार्ड वाले इस कार्ड के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। यह वीजा प्रोग्राम, अपनी उच्च लागत के कारण, वैश्विक प्रतिभा और पूंजी को आकर्षित करने के लिए ट्रम्प प्रशासन की एक बोल्ड (और आलोचकों द्वारा अभिजात वर्ग-केंद्रित) रणनीति को दर्शाता है। क्या आप जानना चाहेंगे कि गोल्ड कार्ड वीजा प्रोग्राम का विरोध करने वाले आलोचक इस पर क्या प्रमुख आपत्तियां उठा रहे हैं?

रवि चौहान दिसम्बर 11, 2025 0
ट्रम्प बोले- भारत के कारण अमेरिकी किसानों को घाटा
Trump Trade War: ट्रम्प ने भारत से आने वाले चावल और कनाडा की खाद पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की धमकी दी | किसानों के लिए $12 बिलियन का राहत पैकेज

ट्रम्प का 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडा: भारत से चावल और कनाडा से खाद पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान एक बार फिर अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' व्यापार नीति को आगे बढ़ाया। उन्होंने घोषणा की कि उनका प्रशासन भारत से आने वाले सस्ते चावल और कनाडा से आने वाली खाद (फर्टिलाइजर) पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है। ट्रम्प ने दावा किया कि इन देशों से आने वाले सस्ते आयात से अमेरिकी किसान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। 1. 🍚 भारत पर 'डंपिंग' के आरोप और चावल टैरिफ की धमकी ट्रम्प ने भारत, वियतनाम और थाईलैंड जैसे देशों को निशाना बनाया, उन पर अमेरिकी बाजार में चावल की 'डंपिंग' करने का आरोप लगाया। डंपिंग की परिभाषा: ट्रम्प के अनुसार, डंपिंग का अर्थ है कि कोई देश अपनी चीजें दूसरे देश में बहुत ही कम दाम पर बेचता है, जिससे उस देश के स्थानीय किसानों और कंपनियों के लिए उस कीमत पर सामान बनाना असंभव हो जाता है। आरोप: ट्रम्प ने कहा कि ये देश अमेरिका में बहुत सस्ता चावल बेच रहे हैं, जिससे यहां के किसानों की कमाई कम हो रही है। उन्होंने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से यह भी पूछा कि क्या भारत को चावल के मामले में कोई व्यापार छूट मिली हुई है। वर्तमान स्थिति: मंत्री ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर अभी बातचीत चल रही है। प्रभाव: अमेरिका पर असर: यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो भारत से अमेरिका जाने वाला चावल काफी महंगा हो जाएगा, जिससे अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ेगा। भारत पर असर: भले ही भारत अमेरिका को बहुत ज्यादा चावल निर्यात नहीं करता है, लेकिन जिन भारतीय किसानों और निर्यातकों का व्यापार सीधे अमेरिका से जुड़ा है, उन्हें नुकसान होगा और उन्हें नए निर्यात बाजारों की तलाश करनी पड़ सकती है। भारत की वैश्विक स्थिति: भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, जो वैश्विक चावल निर्यात का लगभग 40% संभालता है। 2. 🇨🇦 कनाडा से खाद (फर्टिलाइजर) पर टैरिफ की आशंका चावल के अलावा, ट्रम्प ने कनाडा से आने वाली खाद (फर्टिलाइजर) पर भी कड़े टैरिफ लगाने की धमकी दी है। कनाडा की भूमिका: कनाडा अमेरिका को पोटाश खाद का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। यह उत्पाद अब तक व्यापार समझौते की वजह से संरक्षण में था। ट्रम्प का तर्क: उन्होंने कहा, "अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका कनाडा से आने वाली खाद पर भी कड़े टैरिफ लगा सकता है। अगर यह बहुत सस्ती हो गई तो हम उस पर सख्त टैरिफ लगा देंगे।" किसानों पर संभावित असर: अमेरिका में किसान पहले से ही बढ़ती लागत से परेशान हैं। अगर खाद पर नया टैरिफ लगता है, तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि इससे खेती की लागत बढ़ जाएगी। क्रिटिकल मिनरल्स: अमेरिका ने हाल ही में पोटाश और फॉस्फेट को क्रिटिकल मिनरल्स की सूची में शामिल किया था, ताकि उनकी सप्लाई बनी रहे। 3. 💸 अमेरिकी किसानों के लिए $12 बिलियन का राहत पैकेज ट्रम्प की टैरिफ की धमकियां ऐसे समय में आई हैं जब उनका प्रशासन ट्रेड वॉर से प्रभावित अमेरिकी किसानों को राहत देने की कोशिश कर रहा है। राहत पैकेज: ट्रम्प ने किसानों की मदद के लिए $12 बिलियन का एक बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है। कारण: यह कदम फसलों के कम होते दाम और चीन सहित कई देशों के साथ चल रहे ट्रेड वॉर के कारण अमेरिकी किसानों को हो रहे भारी नुकसान की भरपाई के लिए उठाया गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित: सोयाबीन और ज्वार उगाने वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, क्योंकि चीन (जो इन फसलों का सबसे बड़ा खरीदार है) ने अमेरिकी सामान पर नई ड्यूटी लगाने के बदले में अमेरिकी सोयाबीन खरीदना लगभग बंद कर दिया है। वितरण: इस पैकेज के तहत ज्यादातर पैसा किसानों को सीधी मदद के रूप में दिया जाएगा ताकि वे अपनी फसलें बेच सकें और अगली फसल की तैयारी कर सकें। 4. 🇲🇽 मेक्सिको और अन्य व्यापारिक विवाद ट्रम्प ने मेक्सिको को भी धमकी दी, यह आरोप लगाते हुए कि वह लगभग 80 साल पुराने समझौते के मुताबिक अमेरिका को पर्याप्त पानी नहीं दे रहा है। टैरिफ की धमकी: ट्रम्प ने मेक्सिको पर 5% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की धमकी दी। अमेरिका फर्स्ट पॉलिसी: यह सब ट्रम्प की व्यापक 'अमेरिका फर्स्ट' व्यापार रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत उन्होंने पहले भी कई विदेशी उत्पादों पर टैरिफ लगाए हैं (जैसे रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर पहले ही 50% टैरिफ)। क्या आप जानना चाहेंगे कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत के मुख्य बिंदु क्या हैं, जिसका उल्लेख अमेरिकी वित्त मंत्री ने किया है?

रवि चौहान दिसम्बर 9, 2025 0
व्हाइट हाउस के पास फायरिंग, 2 नेशनल गार्ड्स घायल
व्हाइट हाउस हमले पर ट्रम्प का बड़ा एक्शन: अफगान शरणार्थी रहमानुल्लाह लाकनवाल ने 2 गार्ड्स को मारी गोली, इमिग्रेशन प्रोसेस रोकी

व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर आतंकी हमला: अफगान शरणार्थी ने दागी गोली, ट्रम्प ने इमिग्रेशन प्रोसेस रोकी – 'यह मानवता के खिलाफ अपराध'    बुधवार को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स के दो जवानों पर हुए जानलेवा हमले ने देश की आंतरिक सुरक्षा और शरणार्थी नीति पर बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। यह हमला फैरागट वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास हुआ, जहां 29 वर्षीय अफगान शरणार्थी रहमानुल्लाह लाकनवाल ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में एक महिला गार्ड को सिर और सीने में गोली लगी, जबकि दूसरे गार्ड को भी गंभीर चोटें आईं। इस घटना के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे तुरंत आतंकी घटना करार दिया है और अफगान शरणार्थियों की इमिग्रेशन से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को तत्काल प्रभाव से रोकने का ऐलान किया है। ट्रम्प ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए दावा किया कि संदिग्ध को बाइडेन प्रशासन के दौरान अमेरिका लाया गया था और यह देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है। एफबीआई इस मामले की जांच एक आतंकवादी हमले के तौर पर कर रही है। यह विस्तृत आलेख नेशनल गार्ड्स पर हमले के पूरे घटनाक्रम, आरोपी की पहचान और पृष्ठभूमि, ट्रम्प प्रशासन द्वारा इमिग्रेशन प्रक्रिया को रोके जाने के कड़े फैसले, और वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड्स की तैनाती पर चल रहे राजनीतिक विवादों का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।   1. 🩸 व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी: हमला और जवाबी कार्रवाई   बुधवार दोपहर 2:15 बजे (अमेरिकी समयानुसार) के आसपास हुई यह घटना वॉशिंगटन डीसी के सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में से एक, फैरागट वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास हुई।   1.1. हमले का घटनाक्रम   हमलावर की पहचान: संदिग्ध की पहचान रहमानुल्लाह लाकनवाल (29) के तौर पर हुई है। हमले की जगह: फैरागट वेस्ट मेट्रो स्टेशन के पास, जो व्हाइट हाउस से कुछ ही दूरी पर स्थित है। पहला निशाना: न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, लाकनवाल कुछ देर तक इंतजार करता रहा और फिर अचानक उसने गोलीबारी शुरू कर दी। उसने पहले एक महिला गार्ड को सीने में गोली मारी और फिर सिर में। दूसरा निशाना: इसके बाद उसने दूसरे गार्ड पर फायर किया, जिसका नाम बाद में एंड्रयू वोल्फ बताया गया।   1.2. हमलावर को काबू करना   जवाबी फायरिंग: पास ही मौजूद तीसरे गार्ड ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और लाकनवाल पर चार गोलियां चलाईं। हिरासत: जवाबी कार्रवाई के बाद हमलावर को काबू कर लिया गया और उसे लगभग बिना कपड़ों के एम्बुलेंस में ले जाया गया। घायलों की स्थिति: घायल जवान एंड्रयू वोल्फ की सर्जरी हो रही है और उनकी हालत गंभीर है। महिला नेशनल गार्ड सदस्य को सीने और सिर में गोली लगी है, लेकिन उनकी पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच: अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट और एफबीआई इस मामले को आतंकवादी हमले के तौर पर जांच रहे हैं।   2. 🛡️ हमलावर की पृष्ठभूमि: अफगान सेना से अमेरिकी शरणार्थी   हमलावर रहमानुल्लाह लाकनवाल की पृष्ठभूमि और अमेरिका में उसके प्रवेश को लेकर अब गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।   2.1. अफगान सेना में सेवा   अफगान पृष्ठभूमि: एनबीसी न्यूज के मुताबिक, लाकनवाल अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत में पला-बढ़ा था। सैन्य अनुभव: लाकनवाल के एक रिश्तेदार ने बताया कि वह अमेरिका आने से पहले 10 साल तक अफगान सेना में काम कर चुका था। अमेरिकी सहयोग: उसने अपनी मिलिट्री सर्विस के दौरान अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज के साथ मिलकर ऑपरेशन भी किए थे। इस दौरान वह कंधार के एक बेस पर तैनात रहा, जहां उसने अमेरिकी सैनिकों की मदद की थी।   2.2. अमेरिका में प्रवेश और शरणार्थी दर्जा   प्रवेश: लाकनवाल अगस्त 2021 में 'ऑपरेशन एलाइज वेलकम' प्रोग्राम के तहत अफगानिस्तान से अमेरिका आया था। आवास: उसे वॉशिंगटन के बेलिंगहैम शहर में बसाया गया था, जहां वह अपनी पत्नी और पांच बच्चों के साथ रहता था। शरणार्थी दर्जा: उसने 2024 में शरणार्थी के दर्जे के लिए अप्लाई किया था और उसे अप्रैल 2025 में मंजूरी मिली थी। वर्तमान रोजगार: रिश्तेदार के मुताबिक, आखिरी बार जब उनकी लाकनवाल से बात हुई थी, तब वह अमेजन के लिए काम कर रहा था। पुलिस ने फिलहाल यही बताया है कि लाकनवाल ने अकेले ही यह हमला किया और उसके मकसद के बारे में अभी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।   3. 🛑 ट्रम्प का कड़ा एक्शन: इमिग्रेशन प्रोसेस पर रोक   हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तत्काल कड़े कदम उठाए हैं, जिससे अमेरिका की शरणार्थी नीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।   3.1. आतंकी घटना का ऐलान   ट्रम्प का बयान: राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस घटना को आतंकी घटना करार दिया और कहा कि इसमें शामिल लोगों को भारी कीमत चुकानी होगी। सुरक्षा वृद्धि: ट्रम्प ने पेंटागन को निर्देश दिया कि वॉशिंगटन DC में सुरक्षा बढ़ाने के लिए 500 एक्स्ट्रा नेशनल गार्ड्स भेजे जाएं। संदिग्ध पर टिप्पणी: ट्रम्प ने संदिग्ध लाकनवाल को 'जानवर' कहा है और ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह "पूरे राष्ट्र के खिलाफ अपराध है" और "यह मानवता के खिलाफ अपराध है।"   3.2. अफगान इमिग्रेशन पर रोक   आदेश: ट्रम्प ने अमेरिका में अफगान शरणार्थियों की तुरंत एंट्री रोकने का ऐलान किया है। USCIS की घोषणा: अमेरिकी सिटिजन और इमिग्रेशन सर्विस (USCIS) ने X पर घोषणा की कि अफगान नागरिकों की सभी इमिग्रेशन रिक्वेस्ट को अब अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। कारण: एजेंसी ने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी जांच और वेटिंग सिस्टम की दोबारा समीक्षा की जाएगी, क्योंकि अमेरिकी जनता की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।   3.3. बाइडेन प्रशासन की आलोचना   ट्रम्प ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन की शरणार्थी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है: वीडियो मैसेज: ट्रम्प ने एक वीडियो मैसेज में कहा कि संदिग्ध एक विदेशी है, जो अफगानिस्तान से हमारे देश में आया है जो एक तरह की नरक जैसी जगह है। जांच की मांग: उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान अमेरिका आए सभी अफगान नागरिकों की दोबारा जांच की जाएगी, क्योंकि बाइडेन प्रशासन ने इनकी ठीक से जांच नहीं की थी। सुरक्षा खतरा: ट्रम्प ने दावा किया कि बाइडेन के शासन में 2 करोड़ ऐसे विदेशी घुसे, जिनकी ठीक से जांच नहीं हुई, और यह अब देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है।   4. ⚔️ नेशनल गार्ड्स की तैनाती का विवाद   यह हमला एक ऐसे समय में हुआ है जब वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती पहले से ही राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बनी हुई थी।   4.1. तैनाती का राजनीतिकरण   कारण: ट्रम्प प्रशासन ने बढ़ते अपराध के हवाले से अगस्त में एक आदेश जारी किया था, जिसमें डीसी पुलिस को फेडरलाइज करते हुए 8 राज्यों और कोलंबिया से नेशनल गार्ड बुलाए गए थे। विवाद: हालांकि यह आदेश एक महीने बाद खत्म हो गया था, लेकिन सैनिक तैनाती पर बने रहे, जो डेमोक्रेटिक पार्टी और स्थानीय प्रशासन के साथ विवाद का कारण बना।   4.2. अदालती आदेश   फैसला: पिछले हफ्ते एक संघीय जज ने वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड की तैनाती खत्म करने का आदेश दिया था। रोक: हालांकि अपील की गुंजाइश देखते हुए आदेश को 21 दिन के लिए रोक दिया गया था। इसी 21 दिन की अवधि के दौरान यह फायरिंग की घटना सामने आई, जिसने डीसी में सुरक्षा की बहस को और तेज कर दिया है।   5. 🎯 निष्कर्ष और भविष्य की चुनौतियाँ   व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर हुआ यह हमला अमेरिका के लिए कई मोर्चों पर संकट पैदा करता है: आतंकवादी खतरा: एफबीआई और न्याय विभाग द्वारा इसे आतंकी हमला माने जाने के कारण, अमेरिका में घरेलू स्तर पर आतंकवादी खतरा बढ़ गया है। शरणार्थी नीति: ट्रम्प का इमिग्रेशन प्रोसेस रोकने का फैसला हजारों अफगान नागरिकों के भविष्य को अधर में लटका देगा और मानवाधिकार संगठनों के साथ बड़ा विवाद खड़ा करेगा। राजनीतिक ध्रुवीकरण: ट्रम्प द्वारा बाइडेन प्रशासन की नीतियों पर सीधा दोष मढ़ने से यह घटना 2028 के चुनाव से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा और इमिग्रेशन के मुद्दे पर राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ाएगी। फिलहाल, जांच का केंद्र लाकनवाल के मकसद पर है। उसके सैन्य प्रशिक्षण और कट्टरपंथ के बीच के संभावित संबंध ही इस हमले के पीछे की पूरी सच्चाई उजागर कर पाएंगे।

रवि चौहान नवम्बर 27, 2025 0
ऑपरेशन सिंदूर
अमेरिकी दावा: पाकिस्तान को बढ़त, चीन ने युद्ध में हथियार टेस्ट किए

अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: मई 2025 में भारत–पाकिस्तान के चार दिन के संघर्ष में पाकिस्तान को मिली बढ़त; चीन पर लगा लाइव-वॉर में हथियार टेस्ट करने का आरोप   अमेरिका की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए चार दिन के सीमित सैन्य संघर्ष—जिसे पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहा—को लेकर बड़े दावे किए हैं। यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की इस 800 पन्नों की रिपोर्ट में न केवल इस लड़ाई के घटनाक्रम पर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने इसमें काफी सैन्य सफलता हासिल की, जबकि भारत के कई आधुनिक लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने इस संघर्ष का इस्तेमाल अपने आधुनिक हथियारों को असली युद्ध के मैदान में टेस्ट करने के अवसर के रूप में किया। इसी कारण भारत के कई रणनीतिक विशेषज्ञ इस रिपोर्ट को लेकर चिंता जता रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या भारत सरकार इस पर औपचारिक विरोध दर्ज कराएगी? उनके मुताबिक, इस तरह की रिपोर्ट भारत की कूटनीति के लिए एक और बड़ा झटका है और सरकार को तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए।   रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है   ## 1. पाकिस्तान ने गिराए 6 भारतीय लड़ाकू विमान? USCC की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने इस लड़ाई में भारत के कम से कम छह लड़ाकू विमान गिराए, जिनमें राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं। हालांकि रिपोर्ट खुद यह भी लिखती है कि सबूतों और उपग्रह चित्रों के आधार पर केवल तीन भारतीय विमानों के गिराए जाने की पुष्टि होती है। लेकिन पाकिस्तान के इस दावे ने राफेल की “अजेय छवि” को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस आधार पर कई अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक और मिलिट्री ऑब्ज़र्वर्स ने सवाल उठाए कि क्या पाकिस्तान के चीनी हथियार भारत के पश्चिमी हथियारों पर बढ़त रखते हैं।   2. पहलगाम अटैक को ‘आतंकी हमला’ नहीं माना गया   USCC की रिपोर्ट में एक और विवादास्पद दावा किया गया है— कि मई 2025 में पहलगाम में हुआ हमला, जिसे भारत आतंकी हमला मानता है, वास्तव में “विद्रोही हमला” था। यह शब्दावली भारत की आधिकारिक स्थिति के बिल्कुल विपरीत है। भारत दशकों से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से लड़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी संस्थान द्वारा एक बड़े हमले को ‘विद्रोह’ की श्रेणी में रखना भारतीय कूटनीति के लिए सवाल खड़े करता है।   चीन का रोल—रिपोर्ट में बड़े आरोप   USCC की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि इसमें चीन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 1. पाकिस्तान को आधुनिक चीनी हथियारों की सप्लाई रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस संघर्ष में चीन से मिले कई अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया— HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम PL-15 एडवांस्ड एयर-टू-एयर मिसाइलें J-10C लड़ाकू विमान इन हथियारों की रेंज, लॉक-ऑन क्षमता और ट्रैकिंग सिस्टम को लेकर पाकिस्तान ने संघर्ष के बाद खुले मंच पर तारीफ की थी। रिपोर्ट का यह भी दावा है कि चीन ने लड़ाई के दौरान पाकिस्तान को इंटेलिजेंस सपोर्ट प्रदान किया। भारत ने भी यह आरोप लगाया था, हालांकि पाकिस्तान ने इसे पूरी तरह नकार दिया और चीन ने इस पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की।   2. हथियारों का लाइव वॉर टेस्ट   रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध को चीन ने एक अवसर की तरह इस्तेमाल किया। युद्ध खत्म होने के बाद दुनियाभर में चीनी दूतावासों ने एक अभियान चलाया और बताया कि कैसे उनके हथियार पाकिस्तान की मदद से भारतीय विमानों को गिराने में सक्षम रहे। इसका असर यह हुआ कि युद्ध के सिर्फ पांच महीने बाद चीन ने इंडोनेशिया को 42 J-10C फाइटर जेट की डील 75 हजार करोड़ रुपए में फाइनल कर दी। USCC के अनुसार यह इशारा है कि चीन ने युद्ध का सीधा-सीधा व्यावसायिक फायदा उठाया।   USCC क्या है और इसका काम क्या होता है?   1990 के दशक के अंत में अमेरिका में यह चिंता बढ़ रही थी कि चीन तेज़ी से आर्थिक, तकनीकी और सैन्य शक्ति बनता जा रहा है। इसी चिंता के चलते अमेरिकी संसद ने US-China Economic and Security Review Commission (USCC) का गठन किया। इस कमेटी का काम है— चीन की विदेश नीति चीन की टेक्नोलॉजी चीन की सैन्य क्षमताओं और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना और हर साल एक विस्तृत रिपोर्ट अमेरिकी संसद को सौंपना। यह कमेटी खुद कोई कदम नहीं उठा सकती, लेकिन इसकी रिपोर्टें अमेरिकी नीति निर्माण पर असर डालती हैं।   रिपोर्ट पर चीन का जवाब—ग्लोबल टाइम्स का हमला   चीनी सरकार के मुखपत्र कहे जाने वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने USCC की रिपोर्ट पर कड़ा हमला किया है। अखबार का कहना है— यह रिपोर्ट राजनीतिक मकसद से भरी हुई है। इसमें चीन की तरक्की को ऐसे दिखाया गया है जैसे वह दुनिया के लिए खतरा हो। USCC के भीतर चीन को लेकर भारी गलतफहमियां और अहंकार है। ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका पर ही कई आरोप लगाए— 1. अमेरिका सप्लाई चेन का इस्तेमाल ‘हथियार’ की तरह करता है अखबार के अनुसार— चिप टेक्नोलॉजी पर रोक मिलिट्री इक्विपमेंट पर प्रतिबंध चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और अपने सहयोगी देशों पर दबाव बनाने जैसे कदम लेकर अमेरिका चीन को रोकने की कोशिश कर रहा है। इसके मुकाबले चीन की प्रतिक्रिया “रक्षात्मक” बताई गई है।   भारत में राजनीतिक बहस   कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को लेकर कहा कि— “क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस रिपोर्ट का विरोध करेंगे? क्या भारत सरकार इस गलत और पक्षपाती रिपोर्ट का जवाब देगी? हमारी कूटनीति को एक और झटका लगा है।” उनका संकेत यह था कि अगर कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था भारत के खिलाफ ऐसा दावा कर रही है, तो सरकार को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी गई है।   भारत–पाकिस्तान संघर्ष की पृष्ठभूमि (संक्षेप में)   मई 2025 में चार दिन तक चले इस संघर्ष की शुरुआत सीमा पर बढ़ते तनाव और कश्मीर में सुरक्षा घटनाओं के बाद हुई। भारत ने कई सामरिक ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद पाकिस्तान ने पलटवार किया। युद्ध सीमित था, लेकिन इसके दौरान दोनों देशों ने आधुनिक हथियारों का जमकर इस्तेमाल किया। भारत ने अपने राफेल, सुखोई-30 और मिराज-2000 उड़ाए। पाकिस्तान ने J-10C, F-16 और कई चीनी प्रणालियों का इस्तेमाल किया। हालांकि भारत ने पाकिस्तान के कई ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें इस संघर्ष के आंकड़ों को लेकर अब विवाद में घिर चुकी हैं।   निष्कर्ष   USCC की रिपोर्ट ने भारत, पाकिस्तान और चीन—तीनों देशों में राजनीतिक और कूटनीतिक बहस छेड़ दी है। भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि: इसमें उसके लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन पर सवाल है पहलगाम हमले को आतंकी हमला नहीं माना गया है पाकिस्तान और चीन की साझेदारी को भारत के लिए रणनीतिक खतरे के रूप में पेश किया गया है चीन इस रिपोर्ट को राजनीतिक प्रचार कहकर खारिज कर रहा है। पाकिस्तान इस रिपोर्ट को अपनी सैन्य क्षमता के तौर पर दिखा रहा है। अब सबकी निगाहें भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं। क्या भारत औपचारिक विरोध दर्ज करेगा? या इस रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ कर देगा— इसी पर आने वाले दिनों की चर्चा निर्भर करेगी।  

रवि चौहान नवम्बर 20, 2025 0
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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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