मुंबई | 13 अप्रैल 2026
भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोसले का सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 92 वर्ष की आयु में रविवार को अंतिम सांस लेने वाली आशा ताई को विदा करने के लिए पूरा बॉलीवुड और हजारों प्रशंसकों की भीड़ सड़कों पर उतर आई।
सुरों के इस महाकुंभ के अंतिम पड़ाव और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ दी गई है:
आशा भोसले का अंतिम संस्कार किसी उत्सव और शोक के संगम जैसा था:
राजकीय सम्मान: महाराष्ट्र पुलिस ने हवा में गोलियां दागकर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया था।
मुखग्नि: उनके बेटे आनंद भोसले ने उन्हें मुखग्नि दी। इस दौरान उनकी पोती जनाई भोसले और परिवार के अन्य सदस्य भावुक नजर आए।
संगीत के साथ विदाई: श्मशान घाट पर मौजूद गायक शान, सुदेश भोसले और अन्य संगीतकारों ने उनका कालजयी गीत "अभी ना जाओ छोड़कर..." गाकर अपनी प्रिय 'आशा ताई' को नम आंखों से विदा किया।
अंतिम संस्कार से पहले उनके निवास 'कासा ग्रांडे' में अंतिम दर्शन के लिए देश की बड़ी हस्तियां पहुँचीं:
सचिन तेंदुलकर: पूर्व क्रिकेटर अपनी पत्नी अंजलि के साथ पहुँचे और परिवार को गले लगाकर फफक पड़े।
हेलन और आशा पारेख: गुजरे जमाने की अभिनेत्रियों ने अपनी आवाज बनी आशा जी को श्रद्धांजलि दी। हेलन पर फिल्माए गए 'पिया तू अब तो आजा' जैसे कई गानों को आशा जी ने ही अमर बनाया था।
रणवीर सिंह और तब्बू: युवा पीढ़ी के कलाकार भी इस महान गायिका के अंतिम दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े दिखे।
एक तरफ दुनिया आशा जी के निधन पर शोक मना रही है, वहीं पाकिस्तान से एक चौंकाने वाली खबर आई:
जियो न्यूज को नोटिस: पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (Pemra) ने जियो न्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि चैनल ने आशा भोसले के निधन की कवरेज और उनके गाने दिखाकर नियमों का उल्लंघन किया।
विरोध: जियो न्यूज के एमडी अजहर अब्बास ने X पर नाराजगी जताते हुए लिखा कि आशा भोसले जैसी ग्लोबल आइकॉन के काम को सेलिब्रेट करना मीडिया का रिवाज है, लेकिन पाकिस्तान सरकार इसे रोकने की कोशिश कर रही है।
| श्रेणी | विवरण |
| कुल करियर | 82 वर्ष (10 साल की उम्र से शुरू) |
| कुल गाने | 12,000 से अधिक (20 भाषाओं में) |
| विश्व रिकॉर्ड | 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज। |
| प्रमुख सम्मान | पद्म विभूषण, दादा साहब फाल्के अवॉर्ड, 9 फिल्मफेयर। |
| प्रमुख जोड़ियाँ | मो. रफी (900+ गाने), किशोर कुमार (600+ गाने)। |
आशा भोसले की आवाज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का हिस्सा थी:
प्रयोगधर्मिता: आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के साथ उन्होंने 500 से ज्यादा गाने गाए, जहाँ उनकी आवाज को कैबरे, जैज और रॉक के लिए तराशा गया।
त्याग: 1979 में उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से अपना नाम वापस ले लिया था ताकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके।
संगीत के स्तंभ: उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ सबसे ज्यादा 900 डुएट गाए। ओपी नैयर की तो वे मुख्य आवाज थीं, जिनके साथ उन्होंने 300 से ज्यादा हिट गाने दिए।
आशा जी की जीवंतता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 92 साल की उम्र में भी वे सक्रिय थीं। उनका आखिरी गाना 2026 में ही रिलीज हुआ, जो उनके 8 दशक लंबे करियर की निरंतरता का प्रमाण है। 'उत्सव' फिल्म का गाना "मन क्यों बहका रे बहका" आज भी बहनों (लता और आशा) की सबसे मधुर यादों में से एक माना जाता है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
सुरों की मलिका आशा भोसले पंचतत्व में विलीन: राजकीय सम्मान के साथ शिवाजी पार्क में अंतिम संस्कार; पाकिस्तान में कवरेज पर 'सेंसरशिप' का विवाद मुंबई | 13 अप्रैल 2026 भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोसले का सोमवार को मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। 92 वर्ष की आयु में रविवार को अंतिम सांस लेने वाली आशा ताई को विदा करने के लिए पूरा बॉलीवुड और हजारों प्रशंसकों की भीड़ सड़कों पर उतर आई। सुरों के इस महाकुंभ के अंतिम पड़ाव और उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ दी गई है: 1. अंतिम विदाई: 'अभी ना जाओ छोड़कर' की गूँज आशा भोसले का अंतिम संस्कार किसी उत्सव और शोक के संगम जैसा था: राजकीय सम्मान: महाराष्ट्र पुलिस ने हवा में गोलियां दागकर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा गया था। मुखग्नि: उनके बेटे आनंद भोसले ने उन्हें मुखग्नि दी। इस दौरान उनकी पोती जनाई भोसले और परिवार के अन्य सदस्य भावुक नजर आए। संगीत के साथ विदाई: श्मशान घाट पर मौजूद गायक शान, सुदेश भोसले और अन्य संगीतकारों ने उनका कालजयी गीत "अभी ना जाओ छोड़कर..." गाकर अपनी प्रिय 'आशा ताई' को नम आंखों से विदा किया। 2. कासा ग्रांडे में दिग्गजों का जमावड़ा अंतिम संस्कार से पहले उनके निवास 'कासा ग्रांडे' में अंतिम दर्शन के लिए देश की बड़ी हस्तियां पहुँचीं: सचिन तेंदुलकर: पूर्व क्रिकेटर अपनी पत्नी अंजलि के साथ पहुँचे और परिवार को गले लगाकर फफक पड़े। हेलन और आशा पारेख: गुजरे जमाने की अभिनेत्रियों ने अपनी आवाज बनी आशा जी को श्रद्धांजलि दी। हेलन पर फिल्माए गए 'पिया तू अब तो आजा' जैसे कई गानों को आशा जी ने ही अमर बनाया था। रणवीर सिंह और तब्बू: युवा पीढ़ी के कलाकार भी इस महान गायिका के अंतिम दर्शन के लिए घंटों कतार में खड़े दिखे। 3. पाकिस्तान में विवाद: आशा जी के गानों पर Pemra का नोटिस एक तरफ दुनिया आशा जी के निधन पर शोक मना रही है, वहीं पाकिस्तान से एक चौंकाने वाली खबर आई: जियो न्यूज को नोटिस: पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (Pemra) ने जियो न्यूज को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आरोप है कि चैनल ने आशा भोसले के निधन की कवरेज और उनके गाने दिखाकर नियमों का उल्लंघन किया। विरोध: जियो न्यूज के एमडी अजहर अब्बास ने X पर नाराजगी जताते हुए लिखा कि आशा भोसले जैसी ग्लोबल आइकॉन के काम को सेलिब्रेट करना मीडिया का रिवाज है, लेकिन पाकिस्तान सरकार इसे रोकने की कोशिश कर रही है। 📊 आशा भोसले: एक महान सफर के आंकड़े श्रेणी विवरण कुल करियर 82 वर्ष (10 साल की उम्र से शुरू) कुल गाने 12,000 से अधिक (20 भाषाओं में) विश्व रिकॉर्ड 'गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज। प्रमुख सम्मान पद्म विभूषण, दादा साहब फाल्के अवॉर्ड, 9 फिल्मफेयर। प्रमुख जोड़ियाँ मो. रफी (900+ गाने), किशोर कुमार (600+ गाने)। 4. 82 साल का जादुई करियर: संघर्ष से शिखर तक आशा भोसले की आवाज केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का हिस्सा थी: प्रयोगधर्मिता: आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के साथ उन्होंने 500 से ज्यादा गाने गाए, जहाँ उनकी आवाज को कैबरे, जैज और रॉक के लिए तराशा गया। त्याग: 1979 में उन्होंने फिल्मफेयर अवॉर्ड्स से अपना नाम वापस ले लिया था ताकि नई प्रतिभाओं को मौका मिल सके। संगीत के स्तंभ: उन्होंने मोहम्मद रफी के साथ सबसे ज्यादा 900 डुएट गाए। ओपी नैयर की तो वे मुख्य आवाज थीं, जिनके साथ उन्होंने 300 से ज्यादा हिट गाने दिए। 5. आखिरी गाना: 2026 तक सक्रिय रहीं आशा जी की जीवंतता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 92 साल की उम्र में भी वे सक्रिय थीं। उनका आखिरी गाना 2026 में ही रिलीज हुआ, जो उनके 8 दशक लंबे करियर की निरंतरता का प्रमाण है। 'उत्सव' फिल्म का गाना "मन क्यों बहका रे बहका" आज भी बहनों (लता और आशा) की सबसे मधुर यादों में से एक माना जाता है।
मिडिल ईस्ट में 'महाजंग' के बीच फंसीं उर्वशी रौतेला: कुवैत के बिगड़ते हालातों से घबराकर लौटीं भारत; बोलीं— "खौफ से आंखों में आ गए थे आंसू" मुंबई | 10 मार्च 2026 पश्चिम एशिया (Middle East) में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी भीषण जंग का असर अब फिल्मी सितारों पर भी दिखने लगा है। बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला, जो अपने एक प्रोफेशनल प्रोजेक्ट के लिए कुवैत गई हुई थीं, युद्ध के बिगड़ते हालातों के बीच सुरक्षित भारत लौट आई हैं। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वह वहां के माहौल को देखकर कितनी डर गई थीं। यहाँ उर्वशी के कुवैत से निकलने और वहां के वर्तमान हालातों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. कुवैत एयरपोर्ट पर अफरातफरी का मंजर ईरान द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमलों और सुरक्षा अलर्ट के बाद पूरे देश में घबराहट फैल गई थी। तनावपूर्ण माहौल: उर्वशी जब कुवैत एयरपोर्ट पहुँचीं, तो वहां भारी भीड़ और विदेशी नागरिकों की भगदड़ जैसे हालात थे। सुरक्षा जांच को कई गुना बढ़ा दिया गया था। इमोशनल ब्रेकडाउन: उर्वशी ने बताया कि एयरपोर्ट पर अन्य यात्रियों के चेहरे पर खौफ और बच्चों की चीख-पुकार देखकर वह खुद को रोक नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू निकल आए। फ्लाइट में घबराहट: उन्होंने इंस्टाग्राम स्टोरी पर लिखा— "जब तक मैं फ्लाइट में नहीं बैठी थी, सब ठीक था। लेकिन सीट पर बैठते ही मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मुझे असुरक्षित महसूस हो रहा था।" 2. उर्वशी रौतेला की सोशल मीडिया अपील भारत लौटने से पहले और लौटने के बाद उर्वशी ने अपने करोड़ों फैंस के साथ अपना डर साझा किया: दुआओं की मांग: युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे होने के दौरान उन्होंने फैंस से अपील की थी कि वे उनकी और वहां फंसे अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। वापसी पर राहत: मुंबई पहुँचते ही उर्वशी ने एक वीडियो साझा किया और बताया कि वह अब पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने मुश्किल समय में मदद करने के लिए एयरपोर्ट स्टाफ और स्थानीय अधिकारियों का आभार व्यक्त किया। 📊 मिडिल ईस्ट: भारतीय सितारों और नागरिकों की स्थिति क्षेत्र वर्तमान स्थिति प्रभाव कुवैत हाई अलर्ट पर विदेशी नागरिकों का पलायन जारी। उर्वशी रौतेला सुरक्षित वापसी प्रोफेशनल प्रोजेक्ट बीच में छोड़कर लौटीं। हवाई यातायात हजारों उड़ानें रद्द कुवैत और UAE के एयरस्पेस में भारी बाधा। भारतीय नागरिक 52,000+ की वापसी सरकार द्वारा रेस्क्यू मिशन और कमर्शियल फ्लाइट्स का समन्वय। Export to Sheets 3. क्यों डरी हुई हैं हस्तियां? उर्वशी रौतेला अकेली ऐसी शख्सियत नहीं हैं जो मिडिल ईस्ट में काम कर रही थीं। कई भारतीय फिल्म क्रू और बिजनेस प्रोफेशनल वहां मौजूद हैं। मिसाइल थ्रेट: ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन को निशाना बनाए जाने की खबरों ने वहां रह रहे प्रवासियों की चिंता बढ़ा दी है। सप्लाई चेन और पाबंदियां: कई देशों ने ईंधन बचाने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' और स्कूल बंद करने जैसे कदम उठाए हैं, जिससे दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
दिग्गज लेखक सलीम खान अस्पताल में भर्ती: ब्रेन हेमरेज के बाद DSA प्रोसीजर हुआ; सलमान समेत पूरा परिवार लीलावती पहुंचा मुंबई | 18 फरवरी 2026 हिंदी सिनेमा के महान पटकथा लेखक और सलमान खान के पिता सलीम खान (90) को ब्रेन हेमरेज के बाद मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने एक जरूरी सर्जिकल प्रोसीजर किया है। फिलहाल वे डॉक्टरों की सघन निगरानी में हैं, हालांकि उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। यहाँ सलीम खान के स्वास्थ्य अपडेट और उनके शानदार करियर का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है: 1. हेल्थ अपडेट: क्या है 'DSA' प्रोसीजर? लीलावती अस्पताल के प्रसिद्ध डॉक्टर जलील पार्कर ने सलीम खान की सेहत पर आधिकारिक जानकारी साझा की: डिजिटल सब्स्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी (DSA): डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यह कोई ओपन ब्रेन सर्जरी नहीं है। DSA एक उच्च गुणवत्ता वाला एक्स-रे होता है, जिसे 'सेरेब्रल एंजियोग्राफी' भी कहते हैं। इसके जरिए मस्तिष्क की नसों में मौजूद ब्लॉकेज या लीकेज को सटीकता से देखा जा सकता है। वर्तमान स्थिति: सलीम खान अभी वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि वे रिकवरी कर रहे हैं। यदि सुधार जारी रहा, तो उन्हें जल्द ही सपोर्ट से हटाया जा सकता है। मेडिकल टीम: उनके इलाज के लिए डॉ. विनय चव्हाण (न्यूरोलॉजिस्ट), डॉ. अजीत मेनन (कार्डियोलॉजिस्ट) और डॉ. नितिन डांगे जैसे विशेषज्ञों की टीम तैनात है। 2. अस्पताल में उमड़ा बॉलीवुड: सलमान ने रोकी शूटिंग सलीम खान की तबीयत की खबर मिलते ही पूरा खान परिवार और बॉलीवुड के करीबी दोस्त अस्पताल पहुंचे: खान परिवार: सलमान खान अपनी शूटिंग बीच में छोड़कर मंगलवार रात अस्पताल पहुंचे। उनके साथ मां सलमा खान, भाई अरबाज-सोहेल, बहनें अलवीरा और अर्पिता के अलावा परिवार की अगली पीढ़ी (अरहान, निर्वाण, अयान और अलीजेह) भी नजर आई। करीबी दोस्त: सलीम खान के पुराने साथी जावेद अख्तर बुधवार को भी अस्पताल पहुंचे। वहीं संजय दत्त भी गंभीर मुद्रा में अस्पताल से बाहर निकलते दिखे। बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान सिद्दीकी भी हाल जानने पहुंचे। 3. 'प्रिंस सलीम' से 'स्टार लेखक' तक का सफर सलीम खान का जन्म 24 नवंबर 1935 को हुआ था। उनके करियर की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है: एक्टिंग से शुरुआत: 1960 में फिल्म 'बारात' से उन्होंने अभिनय शुरू किया। वे उस समय 'प्रिंस सलीम' के नाम से जाने जाते थे। लगभग 25 फिल्मों के बाद उन्हें अहसास हुआ कि उनकी असली ताकत कलम में है। सलीम-जावेद की ऐतिहासिक जोड़ी: सलीम खान और जावेद अख्तर ने मिलकर हिंदी सिनेमा का चेहरा बदल दिया। इस जोड़ी ने 'जंजीर', 'दीवार', 'शोले', 'डॉन' और 'मिस्टर इंडिया' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। एंग्री यंग मैन का उदय: सलीम-जावेद ने ही अमिताभ बच्चन की 'एंग्री यंग मैन' वाली छवि गढ़ी, जिसने उन्हें सुपरस्टार बनाया। वे बॉलीवुड के पहले ऐसे लेखक थे, जिन्हें अभिनेताओं जैसा 'स्टार स्टेटस' और सम्मान मिला। 📊 सलीम खान: एक नजर में विवरण जानकारी उम्र 90 वर्ष (जन्म: 24 नवंबर 1935) प्रसिद्ध फिल्में शोले, जंजीर, दीवार, डॉन, सीता और गीता। परिवार पत्नी सलमा खान और हेलन; बच्चे: सलमान, अरबाज, सोहेल, अलवीरा, अर्पिता। उपलब्धि लेखकों को फिल्म इंडस्ट्री में 'स्टार स्टेटस' दिलाने का श्रेय। 4. निजी जीवन: दो शादियां और मिसाली परिवार सलीम खान का परिवार बॉलीवुड में अपनी एकजुटता के लिए जाना जाता है: पहली शादी: 1964 में सलमा खान (सुशीला चरक) से हुई, जिनसे सलमान, अरबाज, सोहेल और अलवीरा हुए। दूसरी शादी: 1981 में उन्होंने मशहूर डांसर और एक्ट्रेस हेलन से शादी की। बाद में उन्होंने अर्पिता को गोद लिया। खान परिवार की यह खूबी है कि दोनों पत्नियां और सभी बच्चे एक ही परिवार के तौर पर साथ रहते हैं, जिसका श्रेय सलीम खान के व्यक्तित्व को दिया जाता है।