नई दिल्ली/तेहरान/तेल अवीव | 18 मार्च 2026
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ कूटनीति और विनाशक हमले साथ-साथ चल रहे हैं। एक तरफ जहाँ इजराइल ने ईरान के इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खातिब को मारने का दावा कर तेहरान के सुरक्षा तंत्र की चूलें हिला दी हैं, वहीं भारत ने युद्ध की विभीषिका के बीच मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ईरान को मेडिकल सहायता की पहली खेप भेजी है।
समुद्र के रास्ते भी भारत के लिए अच्छी खबर है। होर्मुज स्ट्रैट के तनावपूर्ण पानी को पार कर भारतीय तेल टैंकर 'जग लाडकी' गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पहुँच चुका है, जिससे देश की ऊर्जा जरूरतों को बड़ी राहत मिली है।
यहाँ 18वें दिन के युद्ध और भारत पर इसके प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
जंग के बीच भारत ने साबित किया है कि वह 'विश्व बंधु' की अपनी भूमिका पर अडिग है।
रेड क्रिसेंट को मदद: भारत ने ईरान की 'रेड क्रिसेंट सोसाइटी' को जीवन रक्षक दवाओं और जरूरी मेडिकल उपकरणों की पहली खेप सफलतापूर्वक सौंप दी है।
ईरान का आभार: तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने इस मदद का वीडियो साझा किया, जिसके बाद ईरान ने इसे "भारतीय लोगों का निस्वार्थ सहयोग" बताते हुए आभार व्यक्त किया।
कूटनीतिक महत्व: यह मदद ऐसे समय में भेजी गई है जब ईरान अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और युद्ध के कारण दवाओं की भारी किल्लत झेल रहा है।
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने दावा किया है कि एक सटीक एयरस्ट्राइक में ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब को मार गिराया गया है।
कौन थे इस्माइल खातिब? वे ईरान के आंतरिक सुरक्षा नेटवर्क के सर्वेसर्वा थे। उन्हें अयातुल्ला खामेनेई का करीबी और 'हार्डलाइनर' माना जाता था।
ईरान का पावर स्ट्रक्चर: यदि इस खबर की पुष्टि होती है, तो यह ईरान के खुफिया तंत्र के लिए लारीजानी की मौत के बाद दूसरा सबसे बड़ा झटका होगा। इससे ईरान के भीतर जासूसी रोकने और रणनीतिक फैसलों में बड़ी बाधा आएगी।
भारतीय झंडे वाला विशाल तेल टैंकर 'जग लाडकी' सफलतापूर्वक मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) पहुँच गया है।
कच्चे तेल का भंडार: इस टैंकर में 80,886 मीट्रिक टन (करीब 6 लाख बैरल) कच्चा तेल लदा है।
कहाँ से आया? यह जहाज UAE के फुजैराह पोर्ट से चला था और युद्ध के सबसे खतरनाक क्षेत्र होर्मुज स्ट्रैट को पार कर भारत पहुँचा है।
खपत का गणित: भारत रोजाना करीब 5.6 मिलियन बैरल तेल की खपत करता है। 'जग लाडकी' जैसी सुरक्षित लैंडिंग भारत के पेट्रोलियम रिजर्व को स्थिर रखने के लिए बेहद जरूरी है।
इजराइल ने अब अपनी रणनीति बदलते हुए ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी ऊर्जा ढांचे पर हमला शुरू कर दिया है।
साउथ पार्स गैस फील्ड: इजराइली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ईरान के बुशेहर प्रांत में स्थित दुनिया के सबसे बड़े गैस क्षेत्र 'साउथ पार्स' से जुड़ी सुविधाओं पर एयरस्ट्राइक की।
कतर की निंदा: कतर ने इस हमले की कड़ी निंदा की है, क्योंकि यह गैस फील्ड कतर के 'नॉर्थ फील्ड' का ही विस्तार है। कतर के मुताबिक, ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाना "वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सुसाइड मिशन" जैसा है।
ईरान की जवाबी चेतावनी: ईरान की IRGC ने सऊदी अरब, UAE और कतर को चेतावनी दी है कि वे अपने तेल ठिकानों से दूर रहें, क्योंकि अब ईरान भी दुश्मन के उन ठिकानों को निशाना बनाएगा जिन्हें अब तक 'सुरक्षित' माना जाता था।
| घटना / विवरण | डेटा / स्थिति | प्रभाव |
| भारतीयों की वापसी | 2.6 लाख (28 फरवरी से अब तक) | विदेश मंत्रालय द्वारा बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन। |
| तेल की कीमतें | $100 प्रति बैरल के पार | वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल महंगा। |
| इराक-तुर्किये समझौता | पाइपलाइन फिर से शुरू | तेल सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते की खोज। |
| बहरीन का दावा | 130 मिसाइलें मार गिराईं | खाड़ी क्षेत्र में भारी हवाई युद्ध। |
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक इंटरव्यू में साफ कहा कि मिडिल ईस्ट की जंग यूक्रेन के लिए काल साबित हो रही है।
मिसाइलों की कमी: जेलेंस्की के मुताबिक, अमेरिका के पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम अब यूक्रेन के बजाय इजराइल की ओर मोड़े जा रहे हैं।
पुतिन का फायदा: जेलेंस्की का मानना है कि इस जंग से रूस के राष्ट्रपति पुतिन सबसे ज्यादा खुश हैं, क्योंकि इससे पश्चिमी देशों का ध्यान और संसाधन यूक्रेन से हटकर मिडिल ईस्ट पर केंद्रित हो गए हैं।
ईरान की महिला फुटबॉल टीम, जिसने ऑस्ट्रेलिया में मैच के दौरान अपना राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया था, अब वतन लौट आई है।
गद्दार से 'बेटी' तक का सफर: पहले उन्हें ईरानी मीडिया में गद्दार कहा गया, लेकिन अब ईरान के संसद अध्यक्ष कालीबाफ ने उन्हें "देश की प्यारी बेटियां" कहते हुए भव्य स्वागत का वादा किया है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
पाकिस्तान में ऊर्जा आपातकाल: सिर्फ 11 दिन का तेल बचा; रूस की 'सस्ते तेल' की पेशकश, लेकिन इस्लामाबाद खामोश | स्पेशल रिपोर्ट इस्लामाबाद/कराची | 18 मार्च 2026 मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल युद्ध की तपिश अब पाकिस्तान की दहलीज तक पहुँच गई है। देश एक भीषण ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़ा है। जहाँ एक ओर पाकिस्तान के पास मात्र 11 दिनों का कच्चा तेल शेष बचा है, वहीं दूसरी ओर रूस ने उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार से करीब 30 डॉलर सस्ता तेल देने की पेशकश की है। हैरानी की बात यह है कि रूस की इस 'लाइफलाइन' पर पाकिस्तान सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यहाँ पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था और तेल-गैस संकट की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. रूस की पेशकश: "हम तैयार हैं, पाकिस्तान पहल करे" पाकिस्तान में रूसी राजदूत अल्बर्ट खोरेव ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि रूस पाकिस्तान को रियायती दरों पर तेल देने के लिए पूरी तरह तैयार है। कीमतों का अंतर: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत $95 से $105 प्रति बैरल के बीच झूल रही है, जबकि रूस पाकिस्तान को यही तेल $70 से $76 में देने को तैयार है। पेच कहाँ फंसा है? राजदूत खोरेव के मुताबिक, रूस की ओर से दरवाजा खुला है, लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक इसके लिए कोई 'ऑफिशियल रिक्वेस्ट' नहीं भेजी है। 2. पाकिस्तान का 'ऑयल शॉक': 11 दिन और 3 करोड़ की सब्सिडी पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव ने संसदीय समिति के सामने देश की डरावनी तस्वीर पेश की है: स्टॉक खत्म: देश के पास फिलहाल केवल 11 दिनों का कच्चा तेल बचा है। महंगाई का बोझ: पेट्रोल 321 PKR और डीजल 335 PKR प्रति लीटर की रिकॉर्ड कीमत पर बिक रहा है। गरीबों को राहत: सरकार ने 23 अरब पाकिस्तानी रुपये की सब्सिडी का ऐलान किया है, जो मोटरसाइकिल और रिक्शा चलाने वाले 3 करोड़ लोगों को दी जाएगी। 3. होर्मुज और रेड सी का संकट: सप्लाई चेन टूटी पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का 70% हिस्सा मिडिल ईस्ट से आयात करता है, जो अब युद्ध के कारण बुरी तरह प्रभावित है। बढ़ा हुआ समय: पहले जो तेल 4-5 दिन में पहुँच जाता था, अब रेड सी (लाल सागर) के रास्ते आने में 12 दिन लग रहे हैं। ईरान से बातचीत: पाकिस्तान सरकार ईरान से गुहार लगा रही है कि उसके 4 जहाजों को होर्मुज स्ट्रैट से गुजरने की इजाजत दी जाए। गैस की किल्लत: कतर से आने वाली LNG सप्लाई लगभग ठप है। मार्च में 8 में से सिर्फ 2 कार्गो पहुँचे हैं, जिससे 14 अप्रैल के बाद देश में भारी गैस संकट की चेतावनी दी गई है। 4. रूसी तेल और पाकिस्तान का 'कड़वा' इतिहास पाकिस्तान रूस से तेल लेने में हिचकिचा क्यों रहा है? इसके पीछे 2023 के कड़वे अनुभव हैं: रिफाइनिंग की समस्या: पाकिस्तान की रिफाइनरियां रूसी तेल (Urals) को प्रोसेस करने के लिए अनुकूल नहीं हैं। इससे पेट्रोल कम निकलता है और 'फर्नेस ऑयल' ज्यादा, जो मुनाफे का सौदा नहीं है। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स: रूस से दूरी अधिक होने के कारण शिपिंग खर्च बढ़ जाता है। इसके अलावा, पाकिस्तान के पोर्ट बड़े जहाजों को हैंडल नहीं कर सकते, जिससे तेल को छोटे जहाजों में बदलना पड़ता है (Ship-to-Ship transfer), जिससे लागत और बढ़ जाती है। मुद्रा संकट: पिछली बार भुगतान चीनी युआन में करना पड़ा था, और पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार की पहले से ही भारी कमी है। 5. अमेरिका की 30 दिन की 'छूट': एक मौका? 13 मार्च को अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए दुनिया भर के देशों को 30 दिन तक रूसी तेल खरीदने की अस्थायी छूट दी है। ट्रम्प का दबाव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि बाजार में तेल की सप्लाई बढ़े ताकि कीमतें $100 के नीचे आ सकें। सीमित अवसर: यह छूट केवल उस तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड है। पाकिस्तान के पास अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह एक छोटा सा 'विंडो' है। 📊 पाकिस्तान ऊर्जा संकट: मुख्य आंकड़े श्रेणी स्थिति / आंकड़े कच्चे तेल की दैनिक जरूरत 5 से 6 लाख बैरल वर्तमान स्टॉक केवल 11 दिन का LPG/LNG संकट 14 अप्रैल से भारी कमी की आशंका तेल आयात का स्रोत 70% मिडिल ईस्ट से डीजल की कीमत ( PKR) 335 रुपये प्रति लीटर 6. UN की इमरजेंसी बैठक और होर्मुज का भविष्य UN की समुद्री संस्था IMO (International Maritime Organization) जल्द ही लंदन में एक इमरजेंसी बैठक बुलाने वाली है। जहाजों की सुरक्षा: जापान, सिंगापुर और UAE जैसे देश फंसे हुए नाविकों के लिए सुरक्षित गलियारा (Safe Passage) चाहते हैं। ईरान का रुख: ईरान ने स्पष्ट किया है कि समुद्र में असुरक्षा के लिए अमेरिका और इजराइल जिम्मेदार हैं। हालांकि, युद्ध के बावजूद अब तक करीब 90 जहाज होर्मुज से चुपचाप (बिना सिग्नल के) निकलने में सफल रहे हैं।
अमेरिका का 'सेक्शन 301' प्रहार: वैश्विक व्यापार युद्ध और भारत पर इसके प्रभाव का संपूर्ण विश्लेषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। 'सेक्शन 301' के तहत शुरू की गई यह जांच केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह "अमेरिका फर्स्ट" नीति का एक आक्रामक विस्तार है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को इसके हर सूक्ष्म पहलू से समझते हैं। 1. पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प की रणनीति फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित कर दिया था। कोर्ट का तर्क था कि राष्ट्रपति के पास बिना ठोस आधार या विधायी स्पष्टता के इस तरह के एकतरफा टैक्स लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। इस झटके के बाद, ट्रम्प प्रशासन ने पीछे हटने के बजाय 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' के 'सेक्शन 301' का सहारा लिया है। यह एक ऐसा हथियार है जिसे कानूनी रूप से चुनौती देना कठिन है क्योंकि यह "अनुचित व्यापार व्यवहार" (Unfair Trade Practices) की जांच पर आधारित होता है। 2. 'सेक्शन 301' क्या है और यह क्यों खतरनाक है? यह कानून अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को किसी भी विदेशी देश की उन नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है जो: अमेरिकी वाणिज्य को बाधित करती हैं। अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं। अमेरिकी कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बनाती हैं। ताकत: इसके तहत अमेरिका बिना WTO (विश्व व्यापार संगठन) की अनुमति के सीधे जवाबी टैरिफ लगा सकता है। यह एक तरह की "आर्थिक दादागिरी" या "प्रोटेक्शनिज्म" (संरक्षणवाद) का उपकरण माना जाता है। 3. जांच के दायरे में आए 16 देश: एक तुलनात्मक अध्ययन ट्रम्प प्रशासन ने इस बार केवल चीन को निशाना नहीं बनाया है, बल्कि अपने मित्रों और सहयोगियों को भी रडार पर रखा है। श्रेणी देश मुख्य कारण महाशक्ति चीन भारी व्यापार अधिशेष और सब्सिडी रणनीतिक साझेदार भारत, जापान, दक्षिण कोरिया डिजिटल टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग नीतियां पड़ोसी मैक्सिको ऑटोमोबाइल डंपिंग और यूएसएमसीए उल्लंघन यूरोपीय गुट यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे कृषि सब्सिडी और स्टील विवाद दक्षिण-पूर्व एशिया वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, आदि डंपिंग और मुद्रा हेरफेर का संदेह 4. एक्सेस कैपेसिटी (अतिरिक्त क्षमता) का संकट: जूते वाली फैक्ट्री का गणित अमेरिका का सबसे बड़ा आरोप 'एक्सेस कैपेसिटी' पर है। इसे "स्टेट-स्पॉन्सर्ड डंपिंग" भी कहा जाता है। समस्या: चीन और भारत जैसे देश अपनी घरेलू जरूरतों से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता विकसित कर लेते हैं। प्रभाव: जब घरेलू मांग कम होती है, तो वे कंपनियां बंद न हों, इसके लिए सरकारें उन्हें सब्सिडी देती हैं। फिर यह माल वैश्विक बाजार (विशेषकर अमेरिका) में इतनी कम कीमत पर बेचा जाता है कि अमेरिकी स्थानीय कंपनियां दिवालिया होने लगती हैं। उदाहरण: स्टील, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 5. भारत की स्थिति: राहत या चिंता? भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है लेकिन चिंताजनक अधिक है। सकारात्मक: 2024 की तुलना में 2025 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा कम होकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया है। यह दर्शाता है कि भारत से आयात संतुलित हो रहा है। नकारात्मक: कमी के बावजूद, भारत 'टॉप 16' की सूची में है। अमेरिका को भारत की 'मेक इन इंडिया' सब्सिडी और कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में लगने वाले आयात शुल्क से आपत्ति है। यदि सेक्शन 301 के तहत भारत को "दोषी" माना गया, तो हमारे आईटी सेक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। 6. चीन: व्यापार युद्ध का केंद्र बिंदु चीन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2025 में चीन का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया है। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पूरी दुनिया में अपना माल डंप कर रहा है। 'सेक्शन 301' के जरिए चीन पर 60% से 100% तक टैरिफ लगाने की जमीन तैयार की जा रही है। 7. मानवाधिकार और व्यापार: 'फोर्स्ड लेबर' जांच USTR जेमिसन ग्रीर ने एक और मोर्चा खोला है—फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम)। यह जांच नैतिक आधार पर व्यापार को रोकने का प्रयास है। शिनजियांग (चीन) के बाद अब अमेरिका वियतनाम, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों के टेक्सटाइल उद्योगों की जांच कर सकता है। यदि किसी उत्पाद की सप्लाई चेन में बंधुआ मजदूरी का अंश मिला, तो उस पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है। 8. टाइमलाइन: गर्मियों में आएगा 'आर्थिक तूफान' 15 अप्रैल 2026: जनता और व्यापारिक समूहों से फीडबैक लेने की अंतिम तिथि। 5 मई 2026: सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing), जहाँ देश अपना पक्ष रखेंगे। जुलाई 2026: अस्थाई टैरिफ की समय सीमा समाप्त होगी और सेक्शन 301 के नए टैरिफ लागू हो सकते हैं। 9. निष्कर्ष और भविष्य की राह डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदलने वाला है। अमेरिका अब केवल व्यापार नहीं करना चाहता, वह अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता है। एक्सपोर्टर्स के लिए सुझाव: बाजार विविधीकरण (Diversification): केवल अमेरिका पर निर्भर न रहें, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी बाजारों की ओर देखें। अनुपालन (Compliance): अपनी फैक्ट्री में लेबर स्टैंडर्ड और सब्सिडी के कागजातों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखें। लागत प्रबंधन: जुलाई के बाद टैरिफ बढ़ने से आपकी कीमतें बढ़ेंगी, इसलिए अभी से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर विचार करें।
मिडल ईस्ट महाजंग: 12 देश युद्ध की आग में, लेकिन यमन के 'हूती' अब तक चुप क्यों? क्या यह किसी बड़े तूफान से पहले की शांति है? सना/दुबई | 9 मार्च 2026 इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हमलों के बाद पूरा पश्चिम एशिया (Middle East) बारूद के ढेर पर बैठा है। इस महाजंग में अब तक ईरान, इजराइल, सऊदी अरब, लेबनान और यूएई समेत 12 देश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल हो चुके हैं। लेकिन एक नाम जो पिछले दो वर्षों से रेड सी (Red Sea) और इजराइल के लिए सिरदर्द बना हुआ था, वह इस बार रहस्यमयी तरीके से शांत है— यमन के हूती विद्रोही। जंग के 9 दिन बीत जाने के बाद भी हूतियों की ओर से केवल बयानबाजी हुई है, कोई बड़ा सैन्य एक्शन नहीं। क्या यह हूतियों की कमजोरी है या किसी बड़ी रणनीतिक साजिश का हिस्सा? आइए समझते हैं इस युद्ध के समीकरण और यमन की चुप्पी के पीछे की विस्तृत रिपोर्ट: 1. हूतियों की चुप्पी: डर या सोची-समझी रणनीति? एक्सपर्ट्स का मानना है कि हूतियों का इस जंग से फिलहाल दूर रहना उनकी 'अस्तित्व बचाने' की रणनीति (Survival Strategy) का हिस्सा है। पिछला जख्म: 28 अगस्त 2025 को इजराइल ने यमन के सना में एक भीषण एयरस्ट्राइक की थी। इस हमले में हूती सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहावी और आर्मी चीफ मोहम्मद अल-घुमारी समेत 12 टॉप लीडर्स मारे गए थे। सीधी कार्रवाई का डर: मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार लुका नेवोला के अनुसार, हूतियों की प्राथमिकता अब अमेरिका और इजराइल की सीधी जवाबी कार्रवाई से बचना है। उन्हें डर है कि अगर उन्होंने कोई बड़ी मिसाइल दागी, तो उनकी बची-कुची टॉप लीडरशिप और सना के नियंत्रण वाले इलाकों को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। इजराइली खुफिया तंत्र का खौफ: हूतियों को आभास है कि इजराइल का खुफिया तंत्र उनके सुरक्षित ठिकानों तक पहुँच चुका है। 2. ईरान का 'प्लान-B': हूतियों को रिजर्व फोर्स के रूप में बचाना? यमनी राजनीतिक विश्लेषक सदाम अल-हुरैबी का तर्क है कि हूतियों की चुप्पी के पीछे खुद तेहरान (ईरान) का हाथ हो सकता है: ताकत को बचाकर रखना: ईरान फिलहाल अपने सभी पत्तों को एक साथ नहीं खोलना चाहता। वह हूतियों को एक 'रिजर्व फोर्स' के रूप में देख रहा है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाएगा जब इजराइल या अमेरिका ईरान के भीतर और गहरे घाव देंगे। हथियारों की तस्करी का संकट: अगर ईरान का शासन कमजोर पड़ता है या गिर जाता है, तो यमन तक पहुँचने वाले ईरानी हथियारों की सप्लाई लाइन कट जाएगी। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूतियों के पास मौजूद ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलें रूस, चीन और ईरान की तकनीक से बनी हैं, जो तस्करी के जरिए वहां पहुँचती हैं। 📊 हूती विद्रोहियों का प्रोफाइल: ताकत और चुनौतियां श्रेणी विवरण प्रभाव मुख्य लीडर अब्दुल मलिक अल-हूती ईरान के कट्टर समर्थक और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' के सदस्य। सैन्य क्षमता बैलिस्टिक मिसाइल, सुसाइड ड्रोन रेड सी के व्यापारिक जहाजों और इजराइल के ईलात शहर तक मारक क्षमता। आर्थिक प्रभाव रेड सी (Red Sea) ब्लॉक करना सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर के समुद्री व्यापार को बाधित करने की क्षमता। बड़ा नुकसान अगस्त 2025 का हमला प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ की मौत से संगठन को गहरा धक्का। 3. क्या हूती फिर से रेड सी में कोहराम मचाएंगे? साल 2023 से 2025 के बीच हूतियों ने लाल सागर (Red Sea) में जहाजों पर हमले कर वैश्विक व्यापार को हिला दिया था। पिछला रिकॉर्ड: इस दौरान 9 नाविकों की मौत हुई और 4 जहाज डूब गए। संभावित टारगेट: नेवोला के अनुसार, अगर युद्ध लंबा चला, तो हूती केवल इजराइल ही नहीं, बल्कि अमेरिकी युद्धपोतों, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बेसों और इजराइल के सहयोगियों जैसे UAE और सोमालिलैंड को भी निशाना बना सकते हैं। अब्दुल मलिक की चेतावनी: हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती ने इस हफ्ते कहा है कि उनके सैनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी समय 'सैन्य कार्रवाई' शुरू की जा सकती है। 4. कौन हैं हूती? (इतिहास और शिया-सुन्नी विवाद) यमन का गृह युद्ध केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि सदियों पुराने शिया-सुन्नी विवाद का आधुनिक रूप है: 2014 की क्रांति: शिया विद्रोहियों (हूतियों) ने तत्कालीन सुन्नी सरकार (अब्दरब्बू मंसूर हादी) के खिलाफ मोर्चा खोला और देश के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया। ईरान बनाम सऊदी: इस जंग में हूतियों को शिया बहुल देश ईरान का समर्थन मिला, जबकि यमन की सरकार को सुन्नी बहुल देश सऊदी अरब का साथ मिला। मौजूदा स्थिति: यमन का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है, हूतियों के नियंत्रण में है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार निर्वासन में या दक्षिण के कुछ हिस्सों में सिमटी हुई है।