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अल–फलाह यूनिवर्सिटी से निकला आतंकी नेटवर्क: मिर्जा शादाब बेग समेत कई गिरफ्तारियां, 5 बड़े ब्लास्ट से लिंक के सबूत

रवि चौहान नवम्बर 20, 2025 0
आतंकी मिर्जा शादाब
आतंकी मिर्जा शादाब

अल–फलाह यूनिवर्सिटी से निकला ‘आतंकी नेटवर्क’: मिर्जा शादाब बेग और लाल क़िला ब्लास्ट का कनेक्शन

 

देश में पांच बड़े धमाकों को अंजाम देने वाला कुख्यात आतंकी मिर्जा शादाब बेग एक समय फरीदाबाद स्थित अल–फलाह यूनिवर्सिटी का छात्र था—यह खुलासा हाल ही में सामने आई एक गोपनीय जांच रिपोर्ट से हुआ है। 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला के पास हुए धमाके के बाद जब सुरक्षा एजेंसियों ने यूनिवर्सिटी की गतिविधियों की पड़ताल की, तो कई चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आईं।

सबसे हैरान करने वाली बात यह कि लाल किले के पास ब्लास्ट करने वाला आतंकी डॉ. उमर नबी भी इसी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर था। पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि मिर्जा शादाब बेग ने यहां से वर्ष 2007 में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी—और इसी दौरान वह आतंक के नेटवर्क से गहराई से जुड़ गया था।

ब्लास्ट के बाद दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ दो FIR दर्ज कीं, ईडी ने जांच शुरू की, और NAAC ने शोकॉज नोटिस जारी किया। 70 से अधिक लोगों से पूछताछ जारी है और कई गिरफ्तारी हो चुकी हैं। यह मामला अब एक बड़े राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे के रूप में देखा जा रहा है।

 


कौन है मिर्जा शादाब बेग?

 

मिर्जा शादाब बेग, यूपी के आज़मगढ़ का रहने वाला, इंडियन मुजाहिदीन का सबसे सक्रिय सदस्य माना जाता है। पिछले 18 सालों से फरार यह आतंकी देश में कई बड़े सिलसिलेवार बम विस्फोटों में शामिल रहा है। दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद, सूरत और गोरखपुर—लगभग हर बड़े हमले में उसका रोल सामने आया, लेकिन वह हमेशा पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।

सूत्रों के अनुसार, 2019 में उसकी अंतिम लोकेशन अफगानिस्तान में ट्रेस हुई थी, जहाँ वह ट्रेनिंग और भर्ती नेटवर्क संभाल रहा था।

 


बेग किन–किन आतंकी घटनाओं में शामिल रहा?

 

1. जयपुर ब्लास्ट – मई 2008

जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट में शादाब बेग की भूमिका सबसे अहम मानी गई।

  • वह कर्नाटक के उडुपी गया था जहाँ उसने बड़ी मात्रा में डेटोनेटर और बॉल बेयरिंग जुटाए।

  • इन्हें रियाज और यासीन भटकल को सौंपा गया, जिन्होंने IED तैयार किए।

  • इंजीनियरिंग बैकग्राउंड होने के कारण बेग बम तैयार करने में माहिर था।

इस घटना में निर्दोष नागरिकों की बड़ी संख्या में मौतें हुई थीं, और यह देश के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक रहा।

 


2. अहमदाबाद और सूरत ब्लास्ट – जुलाई 2008

 

जयपुर ब्लास्ट के बाद बेग गुजरात पहुंचा और 15 दिन तक शहर की रेकी की।

  • उसने तीन टीमें बनाईं—कयामुद्दीन कपाड़िया, मुजीब शेख और अब्दुल रज़ीक इनमें से प्रमुख थे।

  • अब्दुल रज़ीक की टीम में आतिफ अमीन और मिर्जा शादाब बेग भी शामिल थे।

  • बम तैयार करना, स्विचिंग मैकेनिज़्म बनाना और लॉजिस्टिक अरेंज करना—सब बेग की ही जिम्मेदारी थी।

अहमदाबाद के अस्पतालों, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया गया। इस हमले ने पूरे देश को दहला दिया।

 


3. गोरखपुर ब्लास्ट – 2007

 

गोरखपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों में भी बेग का नाम सामने आया।

  • इन धमाकों में छह लोग घायल हुए थे।

  • इंडियन मुजाहिदीन से जुड़ाव सामने आते ही उसकी संपत्तियाँ कुर्क कर दी गईं।

2007–08 में IM का नेटवर्क उजागर होने के बाद पुलिस ने कई आतंकी पकड़े, लेकिन मिर्जा शादाब बेग लगातार फरार रहा।

 


दिल्ली धमाका और अफगानिस्तान कनेक्शन

 

10 अक्टूबर 2025 को दिल्ली में हुए धमाके के बाद जब जांच शुरू हुई, तो एक बड़ा एंगल सामने आया—अफगानिस्तान कनेक्शन

जांच में पता चला कि:

  • गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल शकील आतंकियों के संपर्क में था

  • वह ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान गया था

  • और वह भी अल–फलाह यूनिवर्सिटी का ही पासआउट था

एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक,
“लाल किला धमाकों में मिर्जा शादाब बेग का कनेक्शन पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। पुराने ब्लास्ट और नए ब्लास्ट के पैटर्न में समानताएं दिख रही हैं।”

 


अल–फलाह यूनिवर्सिटी: कैसे बना आतंकियों का हब?

 

अल–फलाह यूनिवर्सिटी की शुरुआत एक इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में हुई थी—अल-फलाह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जिसे 2014 में यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला।

70 एकड़ में फैले इस संस्थान में होस्टल, लैब, मेडिकल कॉलेज और हाल ही में शुरू हुआ बड़ा अस्पताल परिसर भी है।

  • 2019 में MBBS प्रोग्राम शुरू हुआ

  • 2022 के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई बंद कर दी गई

  • यहां कश्मीर, मेवात और अन्य माइनोरिटी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र आते रहे

यूनिवर्सिटी हमेशा विवादों में रही, पर हालिया ब्लास्ट ने इसे सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर ला दिया।

 


ED की कार्रवाई: फर्जी मान्यता का बड़ा आरोप

 

ईडी ने यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत गिरफ्तार किया है।
जांच में सामने आए मुख्य आरोप:

1. NAAC मान्यता का फर्जी दावा

यूनिवर्सिटी ने दावा किया कि उसके पास NAAC की मान्यता है, जबकि ऐसा नहीं था।

2. UGC की धारा 12(B) का गलत इस्तेमाल

संस्थान ने कहा कि वह UGC की 12(B) श्रेणी में आता है और सरकारी ग्रांट ले सकता है।
UGC ने स्पष्ट बताया कि यूनिवर्सिटी केवल धारा 2(f) में रजिस्टर्ड है—12(B) के लिए कभी आवेदन ही नहीं किया।

इन धोखाधड़ियों से छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर लाखों–करोड़ों रुपये की फीस वसूली गई।

अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट 1995 में बना था और सिद्दीकी इसके मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। पूरे संचालन का कंट्रोल उन्हीं के पास था।

 


कौन–कौन गिरफ्तार हुआ?

 

अभी तक यूनिवर्सिटी से जुड़े कई लोग गिरफ्तार हो चुके हैं:

  • डॉ. मुजम्मिल शकील

  • डॉ. शाहीन सईद

  • मौलवी इस्तियाक – यूनिवर्सिटी परिसर की मस्जिद का इमाम

  • डॉ. जावेद अहमद सिद्दीकी – चेयरमैन

  • लैब असिस्टेंट बाशीद

  • इलेक्ट्रिशियन शोएब

इसके अलावा:

  • डॉ. निसार उल हसन की पत्नी (डॉक्टर) और उनकी MBBS कर रही बेटी को यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर ही हाउस अरेस्ट किया गया है

  • 70 से अधिक छात्रों और स्टाफ से पूछताछ जारी है

     


कैसे खुला पूरा मॉड्यूल?

 

इस पूरे आतंक मॉड्यूल का खुलासा 19 अक्टूबर को हुआ जब नौगाम में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर मिले।
जांच आगे बढ़ी तो कश्मीर में एक मस्जिद के इमाम इरफान अहमद की गिरफ्तारी हुई। उसकी पूछताछ से सुराग मिला कि फरीदाबाद की अल–फलाह यूनिवर्सिटी में एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

इसके बाद दिल्ली पुलिस, जम्मू–कश्मीर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर पूरे मॉड्यूल को उजागर किया।

 


पूर्व DCP का बड़ा बयान

 

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के पूर्व DCP एल.एन. राव कहते हैं:

“मिर्जा शादाब बेग इंडियन मुजाहिदीन का बेहद खतरनाक आतंकी है। 2007 में उसने अल-फलाह यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी और उसके बाद देश में हुए लगभग हर बड़े ब्लास्ट में उसका नाम आया। कई आतंकी पकड़े गए, लेकिन बेग हमेशा फरार रहा।”

उनके अनुसार,

“अफगानिस्तान लंबे समय से आतंकियों का ट्रेनिंग कैंप रहा है। लाल किला ब्लास्ट की जांच में भी यह एंगल सामने आ रहा है कि बेग और हालिया गिरफ्तार आतंकियों के बीच बड़ा लिंक है।”

 


निष्कर्ष

 

अल–फलाह यूनिवर्सिटी का नाम अब सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि एक संभावित आतंकी ब्रिडिंग ग्राउंड के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।
ब्लास्ट, फर्जी मान्यता, मनी लॉन्ड्रिंग, और आतंकियों से जुड़े प्रोफेसरों–स्टाफ की गिरफ्तारी—ये घटनाएं बताती हैं कि किस तरह एक यूनिवर्सिटी का ढांचा सालों तक छुपे हुए नेटवर्क को संरक्षण दे रहा था।

जांच अभी जारी है—और एजेंसियों के अनुसार आने वाले दिनों में कई और नाम सामने आ सकते हैं।

 

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स्पीकर बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव; गौरव गोगोई ने लगाए पक्षपात के आरोप, किरेन रिजिजू ने किया पलटवार।

लोकसभा में ऐतिहासिक टकराव: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश; विपक्ष का 'पक्षपात' का आरोप बनाम सरकार का 'भागने' का पलटवार नई दिल्ली | 10 मार्च 2026 भारतीय संसदीय इतिहास में आज एक दुर्लभ और गहमागहमी भरा दिन रहा। लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पेश किया। सदन में 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद पीठासीन अधिकारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिस पर अब 10 घंटे की मैराथन चर्चा होगी। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही के दौरान सत्तापक्ष का साथ देने और विपक्षी आवाजों को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष के व्यवहार पर ही सवाल खड़े किए हैं। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और सदन में हुई तीखी बहस की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. अविश्वास प्रस्ताव: गौरव गोगोई के 3 बड़े प्रहार प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीन प्रमुख बिंदु रखे: भेदभाव का आरोप: गोगोई ने कहा, "बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 20 बार टोका गया। जब उन्होंने एक लेख का हवाला दिया तो उन्हें रोक दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सांसद सदन में प्रतिबंधित किताबें दिखा रहे थे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।" माइक बंद करने की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि 9 फरवरी को शशि थरूर का माइक बंद कर दिया गया। जब माइक ही ऑफ हो, तो कोई सदस्य अपनी बात कैसे रख सकता है? यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। महिला सांसदों का अपमान: गोगोई ने ओम बिरला के उस पुराने बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि महिला सांसदों ने पीएम की चेयर घेर ली थी और उनके साथ "कुछ भी हो सकता था।" गोगोई ने इसे बेहद शर्मनाक और महिला सांसदों की गरिमा के खिलाफ बताया। 2. किरेन रिजिजू का पलटवार: "राहुल गांधी सदन से भाग जाते हैं" संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखे व्यक्तिगत हमले किए: उपस्थिति पर सवाल: रिजिजू ने कहा कि जब सदन का महत्वपूर्ण सत्र चल रहा होता है, तब नेता प्रतिपक्ष विदेश चले जाते हैं। वे अपनी बात कहकर सदन से भाग जाते हैं और दूसरों को नहीं सुनते। मर्यादा का उल्लंघन: उन्होंने राहुल गांधी के पुराने व्यवहार (पीएम को गले लगाना और आंख मारना) का जिक्र करते हुए कहा कि जब नेता ऐसा होगा, तो बाकी सांसदों से क्या उम्मीद की जाए? उन्होंने के.सी. वेणुगोपाल द्वारा चेयर को 'यार' कहने पर भी आपत्ति जताई। प्रियंका गांधी का जिक्र: रिजिजू ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर प्रियंका गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता, तो शायद सदन में कुछ अच्छा व्यवहार देखने को मिलता। 3. प्रियंका गांधी का तीखा जवाब: "सच्चाई पचती नहीं है" सदन में पहली बार आक्रामक अंदाज में दिख रही प्रियंका गांधी ने अपने भाई और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बचाव किया: निडर नेतृत्व: प्रियंका ने कहा, "इस देश में एक ही व्यक्ति है जो पिछले 12 सालों में इनके (बीजेपी) सामने झुका नहीं है। वह नेता प्रतिपक्ष है।" सच का सामना: उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन में खड़ होकर सत्तापक्ष के सामने जो सच बोलते हैं, वह इनसे पचता नहीं है, इसलिए वे उन पर निजी हमले करते हैं। 📊 सदन का समीकरण: अविश्वास प्रस्ताव मुख्य बिंदु विवरण प्रस्तावक विपक्ष (गौरव गोगोई द्वारा शुरुआत) समर्थन 50 से अधिक सांसद (अनिवार्य संख्या) मुख्य आरोप पक्षपात, माइक बंद करना, विपक्ष को बोलने न देना। चर्चा का समय 10 घंटे आवंटित सरकार का तर्क विपक्ष चर्चा से भागता है और स्पीकर का अपमान करता है। Export to Sheets 4. बहस के मुख्य मुद्दे: माइक, रूलिंग बुक और गरिमा सदन में बहस के दौरान कई ऐसे मुद्दे उठे जो पिछले कुछ समय से विवाद का केंद्र रहे हैं: माइक ऑफ विवाद: विपक्ष का दावा है कि जब भी संवेदनशील मुद्दे (जैसे अडानी या बेरोजगारी) उठाए जाते हैं, तो रणनीतिक रूप से माइक बंद कर दिया जाता है। पक्षपात: विपक्ष का कहना है कि स्पीकर सत्तापक्ष के मंत्रियों को बिना रोक-टोक बोलने देते हैं, लेकिन विपक्ष के सदस्यों को हर वाक्य पर 'रूल बुक' (नियमों की किताब) दिखाई जाती है। संसदीय भाषा: सत्तापक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद चेयर के प्रति सम्मान नहीं रखते और असंसदीय भाषा का उपयोग करते हैं।

रवि चौहान मार्च 10, 2026 0
दिल्ली शराब नीति केस-हाइकोर्ट का सभी 23 आरोपियों को नोटिस

Delhi Excise Policy Case: केजरीवाल और सिसोदिया को हाईकोर्ट का नोटिस; CBI की अपील पर ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों पर रोक।

ईरान जंग पर विपक्ष का दोनों सदनों में हंगामा

Budget Session 2026: लोकसभा में ईरान-इजराइल जंग पर हंगामा; 67,000 भारतीयों की वापसी पर बोले एस. जयशंकर।

कर्नाटक बच्चों के सोशल मीडिया यूज पर बैन लगाएगा

Social Media Ban in Karnataka: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध; कर्नाटक बना देश का पहला राज्य।

आंध्र प्रदेश- पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट, 20 लोगों की मौत
Andhra Pradesh Firecracker Blast: काकीनाडा की पटाखा फैक्ट्री में धमाका, 20 की मौत; धान के खेतों में बिखरे मिले शव।

आंध्र प्रदेश: काकीनाडा की पटाखा यूनिट में भीषण धमाका; 20 मजदूरों की मौत, धान के खेतों में बिखरे मिले शवों के चिथड़े काकीनाडा | 28 फरवरी 2026 आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शनिवार दोपहर वेटलापलेम गांव में स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई (Firecracker Unit) में जोरदार विस्फोट होने से 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी फैक्ट्री ताश के पत्तों की तरह ढह गई और वहां काम कर रहे मजदूरों के शवों के टुकड़े कई मीटर दूर खेतों में जाकर गिरे। यहाँ इस भीषण त्रासदी, राहत कार्य और सरकार की प्रतिक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. दोपहर 2 बजे का वो भयावह मंजर प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हादसा शनिवार दोपहर करीब 2:00 बजे हुआ: भीषण आवाज: धमाका इतना तेज था कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आसपास के घरों की खिड़कियां चटक गईं और लोग भूकंप की आशंका से घरों से बाहर निकल आए। मलबे का ढेर: विस्फोट के कुछ ही सेकंड के भीतर पूरी यूनिट जलकर राख हो गई। मौके पर केवल काला धुआं और मलबे का ढेर नजर आ रहा था। खेतों में बिखरी लाशें: पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ब्लास्ट के दबाव के कारण मजदूरों के शव उड़कर पास के धान के खेतों में जा गिरे। स्थानीय ग्रामीण खाद की बोरियों से बनी चादरों (बाराकालू) में क्षत-विक्षत शवों को समेटते देखे गए, जो बेहद डरावना मंजर था। 2. राहत एवं बचाव कार्य: ड्रोन से की जा रही तलाश प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है: ड्रोन का उपयोग: खेतों में फसल घनी होने के कारण शवों के हिस्सों और लापता लोगों का पता लगाने के लिए पुलिस ने ड्रोन कैमरों की मदद ली है। गंभीर रूप से झुलसे घायल: काकीनाडा गवर्नमेंट हॉस्पिटल के अधीक्षक के अनुसार, अस्पताल लाए गए 6 घायल 90% से 100% तक झुलस चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 📊 हादसे का विवरण: एक नजर में विवरण तथ्य स्थान वेटलापलेम गांव, काकीनाडा जिला (आंध्र प्रदेश) समय शनिवार दोपहर, लगभग 2:00 बजे मृतकों की संख्या 20 (पुष्टि हो चुकी है) घायलों की स्थिति 6 गंभीर (90-100% बर्न इंजरी) धमाके की तीव्रता 5 किमी के दायरे में सुनाई दी मुख्य कारण पटाखा निर्माण के दौरान बारूद में विस्फोट (जांच जारी) 3. मुख्यमंत्री और सरकार की प्रतिक्रिया हादसे की खबर मिलते ही राज्य सरकार सक्रिय हो गई है: चंद्रबाबू नायडू का शोक: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने स्थानीय मंत्रियों और जिला कलेक्टर को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करने और पीड़ितों के परिवारों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री का बयान: राज्य की गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने कहा कि प्राथमिकता घायलों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराना है। उन्होंने फैक्ट्री के लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की जांच के आदेश भी दिए हैं। 4. जांच के घेरे में सुरक्षा मानक प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, धमाके के समय यूनिट के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में की जा रही है कि: क्या फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था? क्या क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री वहां जमा की गई थी? क्या निर्माण प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था?

रवि चौहान फ़रवरी 28, 2026 0
दिल्ली शराब नीति केस; केजरीवाल बोले- मोदी-शाह ने साजिश रची

Delhi Liquor Policy Case Verdict: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया CBI केस में बरी; कोर्ट ने जांच एजेंसी को जमकर लताड़ा।

9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत

Nagaur School Tragedy: नागौर के प्राइवेट स्कूल में 9 साल की छात्रा की हार्ट अटैक से मौत; 4 महीने पहले भाई की भी ऐसे ही हुई थी जान।

राहुल बोले-मोदी ने अमेरिका से देश बेचने की डील की

Rahul Gandhi Bhopal Kisan Chaupal: "मोदी ने दबाव में देश बेचा"; राहुल गांधी का अडाणी और एपस्टीन फाइल्स पर बड़ा धमाका।

अमेरिकी टैरिफ डील, राहुल बोले- मोदी ने विश्वासघात किया
US-India Trade Deal Controversy: राहुल गांधी और खड़गे का मोदी सरकार पर हमला; बोले- "टैरिफ डील में किया भारत का आत्मसमर्पण"।

अमेरिकी टैरिफ डील पर 'सियासी रार': विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा; राहुल गांधी बोले- "पीएम का विश्वासघात उजागर", खड़गे ने पूछा- "सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया?" नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026 अमेरिकी टैरिफ और भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पुराने टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद, भारतीय विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने बिना कानूनी स्थिति स्पष्ट हुए 'जल्दबाजी' में समझौता किया, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुँचा है। यहाँ विपक्ष के आरोपों, अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रम्प के नए 10% ग्लोबल टैरिफ का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. विपक्ष का प्रहार: "हताशा में किया गया आत्मसमर्पण" कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की 'ट्रेड डिप्लोमेसी' पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं: राहुल गांधी: शनिवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी का "विश्वासघात" अब सबके सामने है। उन्होंने दावा किया कि भारत इस व्यापार समझौते में फिर से "आत्मसमर्पण" कर देगा, जिससे देश की आर्थिक स्वायत्तता खतरे में पड़ेगी। मल्लिकार्जुन खड़गे: कांग्रेस अध्यक्ष ने इस समझौते को एक 'ट्रैप डील' (Trap Deal) करार दिया। उन्होंने पूछा कि सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? क्या सरकार पर किसी तरह का दबाव था? जयराम रमेश: उन्होंने कहा कि यदि सरकार महज 18 दिन और रुक जाती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की बेहतर रक्षा की जा सकती थी। 2. दिग्गज नेताओं की 4 बड़ी टिप्पणियां विपक्ष के प्रमुख चेहरों ने सरकार की रणनीति को 'असंतुलित' बताया है: नेता मुख्य आरोप / टिप्पणी मल्लिकार्जुन खड़गे क्या यह 'एप्सटीन फाइल्स' का दबाव था? सरकार 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की रक्षा करने में विफल रही। जयराम रमेश प्रधानमंत्री की हताशा के कारण यह समझौता भारत पर थोपा जा रहा है। 18 दिन का इंतजार भारी पड़ता। मनीष तिवारी यह फैसला लोकतंत्र के लिए जरूरी है। न्यायपालिका को कार्यपालिका की 'तानाशाही' वाली ज्यादती रोकनी ही चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी भारतीय निर्यात पर 10% टैरिफ और अमेरिकी आयात पर लगभग जीरो; यह डील पूरी तरह असंतुलित और एकतरफा है। 3. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का 'ऐतिहासिक' फैसला शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट का तर्क: संविधान के अनुसार, टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) को है। राष्ट्रपति 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का बहाना बनाकर संसद की शक्तियों को नहीं छीन सकते। भारत पर असर: इस फैसले के बाद भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ कानूनी तौर पर अवैध हो गया था। विपक्ष का तर्क यही है कि यदि भारत रुकता, तो उसे कोई भी टैरिफ देने की जरूरत नहीं पड़ती। 4. ट्रम्प का जवाबी दांव: 10% नया ग्लोबल टैरिफ कोर्ट के फैसले के मात्र 3 घंटे के भीतर डोनाल्ड ट्रम्प ने नया दांव खेल दिया: नया कानून (Section-122): ट्रम्प ने 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 का उपयोग करते हुए दुनिया भर पर 10% टैरिफ लगा दिया। लागू होने की तारीख: यह नया टैरिफ 24 फरवरी 2026 की आधी रात से लागू होगा। भारत की स्थिति: बीबीसी के अनुसार, अब भारत पर टैरिफ 18% से घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने पीएम मोदी को अपना "अच्छा दोस्त" बताते हुए कहा कि ट्रेड डील जारी रहेगी। 5. व्यापार समझौते का वर्तमान स्टेटस वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, विवादों के बावजूद प्रक्रिया जारी है: फरवरी अंत: अंतरिम व्यापार समझौता फाइनल हो जाएगा। मार्च: समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। अप्रैल: डील पूरी तरह लागू हो जाएगी। भारत की रियायत: भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने पर सहमति जताई है।

रवि चौहान फ़रवरी 21, 2026 0
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रवि चौहान फ़रवरी 27, 2026 0