ईरान संकट: मौत के साये से वतन लौटे भारतीय; दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनों से लिपटकर रोए छात्र; 'रियाल' के पतन और 3000 मौतों के बीच डरावनी दास्तां नई दिल्ली | 17 जनवरी 2026 ईरान में जारी भीषण गृहयुद्ध और सरकार विरोधी हिंसा के बीच फंसे भारतीय नागरिकों की वतन वापसी शुरू हो गई है। शुक्रवार देर रात दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर एक भावुक नजारा देखने को मिला, जब 'मौत के मुहाने' से निकलकर दर्जनों छात्र और पेशेवर भारतीय धरती पर पहुंचे। ईरान द्वारा अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) खोलने के बाद, भारत सरकार की एडवाइजरी का पालन करते हुए ये नागरिक निजी और विशेष विमानों से वापस लौटे हैं। 1. दिल्ली एयरपोर्ट पर भावुक मंजर: "गाड़ियों के सामने आ जाते थे प्रदर्शनकारी" एयरपोर्ट के अराइवल टर्मिनल पर जैसे ही छात्र बाहर आए, वहां पहले से मौजूद उनके परिवार वाले उन्हें गले लगाकर फूट-फूटकर रोने लगे। छात्रों की जुबानी: मेडिकल स्टूडेंट अर्श दहरा ने बताया कि हालात अब बेकाबू हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में था, लेकिन डर इतना था कि हम जल्द से जल्द वहां से निकलना चाहते थे।" एक महीने का नरक: जम्मू-कश्मीर के एक युवक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि पिछले एक महीने से वे घरों में कैद थे। अगर गलती से बाहर निकलते, तो प्रदर्शनकारी गाड़ियों के सामने आ जाते थे। पूरे शहर में गोलियों की आवाजें सुनाई देती हैं। 2. 31 प्रांतों में आग और 3000 से ज्यादा मौतें ईरान में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक पूर्ण विद्रोह का रूप ले चुका है। मौत का आंकड़ा: स्थानीय और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की 'लाइव फायरिंग' में अब तक 3,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। कारण: मुख्य वजह है ईरानी मुद्रा 'रियाल' का ऐतिहासिक पतन ($1 = ~14.5 लाख रियाल) और 70% से ज्यादा महंगाई। लोग ब्रेड और चाय जैसी बुनियादी चीजों के लिए मोहताज हैं। डिजिटल ब्लैकआउट: ईरान में इंटरनेट पूरी तरह बंद है, जिससे वहां फंसे भारतीयों को अपने परिवार से बात करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 📊 ईरान में भारतीय: वर्तमान स्थिति और हेल्पलाइन श्रेणी विवरण और डेटा ईरान में कुल भारतीय लगभग 9,000 (अधिकांश छात्र और व्यापारी)। एडवाइजरी विदेश मंत्रालय ने 'उपलब्ध साधनों' से तुरंत देश छोड़ने को कहा है। मुख्य हेल्पलाइन नंबर +989128109115, +989128109109, +989128109102 आधिकारिक ईमेल cons.tehran@mea.gov.in ट्रम्प का रुख अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों की हत्या न रुकने पर 'सैन्य कार्रवाई' की धमकी दी है। 3. विदेश मंत्रालय (MEA) की रणनीति प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार अपने हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें: सरकार ने ईरान में रह रहे शेष भारतीयों को निर्देश दिया है कि वे अपने पासपोर्ट और वीजा हमेशा तैयार रखें ताकि इमरजेंसी इवैक्यूएशन (निकासी) के समय देरी न हो। एयरस्पेस का मुद्दा: 14 जनवरी को ईरान ने हवाई क्षेत्र बंद किया था, जिससे भारतीय विमान फंस गए थे। 15 जनवरी को इसे फिर से खोला गया, जिसके बाद एयर इंडिया और अन्य निजी एयरलाइंस ने भारतीयों को लाना शुरू किया। 4. विद्रोह की आग के पीछे के 5 बड़े कारण आर्थिक तबाही: रियाल की कीमत शून्य की ओर बढ़ रही है, जिससे मिडिल क्लास पूरी तरह खत्म हो गया है। व्यापारियों की हड़ताल: तेहरान के ऐतिहासिक बाजार 'बाजार-ए-बुजुर्ग' के बंद होने से पूरी सप्लाई चेन टूट गई है। शासन के खिलाफ गुस्सा: लोग अब अयातुल्ला खामेनेई के पोस्टर जला रहे हैं और पुरानी राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं। इंटरनेट बैन: 180 घंटे से ज्यादा के डिजिटल ब्लैकआउट ने जनता के गुस्से को सड़कों पर और बढ़ा दिया है। वैश्विक दबाव: ट्रम्प प्रशासन के कड़े रुख ने प्रदर्शनकारियों को यह उम्मीद दी है कि उन्हें बाहरी मदद मिल सकती है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी पर ED का बड़ा एक्शन: 140 करोड़ की संपत्ति अटैच; दिल्ली ब्लास्ट और 'व्हाइट-कॉलर' आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हैं तार प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली ब्लास्ट और आतंकी फंडिंग की जांच के तहत, एजेंसी ने यूनिवर्सिटी की लगभग 140 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क (Attach) कर दी हैं। इसके साथ ही अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके ट्रस्ट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट भी दाखिल की गई है। 1. ED की कार्रवाई: क्या-क्या हुआ अटैच? ED ने यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को 'अपराध की आय' (Proceeds of Crime) मानते हुए PMLA एक्ट के तहत ज़ब्त किया है। अचल संपत्ति: फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में फैली 54 एकड़ जमीन। इमारतें: यूनिवर्सिटी का मुख्य कैंपस, स्कूल बिल्डिंग, विभिन्न विभागों की इमारतें और छात्रों के हॉस्टल। चेयरमैन की गिरफ्तारी: ग्रुप के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को 18 नवंबर को 12 घंटे की छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया था। 2. दिल्ली ब्लास्ट और 'डॉक्टर' आतंकी का कनेक्शन अल-फलाह यूनिवर्सिटी का नाम तब सुर्खियों में आया जब इसके एक डॉक्टर ने आतंकी हमले को अंजाम दिया। लाल किला ब्लास्ट: 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक चलती कार में धमाका हुआ था, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले का मुख्य आरोपी यूनिवर्सिटी का डॉ. उमर उन नबी था। व्हाइट-कॉलर टेरर: जांच में पता चला कि यूनिवर्सिटी 'व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल' का केंद्र बनी हुई थी। NIA और पुलिस ने यहाँ से डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन सईद समेत 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। विस्फोटकों का जखीरा: आरोपियों के पास से 2,900 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे घातक विस्फोटक बरामद हुए थे। 📊 अल-फलाह यूनिवर्सिटी: जांच में हुए बड़े खुलासे श्रेणी विवरण और अनियमितताएं वित्तीय धोखाधड़ी झूठी मान्यता के दावे कर छात्रों से 415.10 करोड़ रुपये वसूले गए। शेल कंपनियां एक ही पते पर 9 फर्जी (शेल) कंपनियां रजिस्टर्ड पाई गईं। डेटा विसंगति कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज मिला और EPFO का कोई रिकॉर्ड नहीं था। आतंकी जुड़ाव प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के मॉड्यूल को पनाह देने का आरोप। 3. 'व्हाइट-कॉलर' मॉड्यूल का श्रीनगर से फरीदाबाद कनेक्शन अक्टूबर 2025 में श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर लगे थे, जिसमें सुरक्षा बलों पर हमले की धमकी दी गई थी। श्रीनगर पुलिस और SSP जीवी सुंदीप चक्रवर्ती की जांच जब आगे बढ़ी, तो तार फरीदाबाद की इस यूनिवर्सिटी से जुड़े। यह भारत में अपनी तरह का पहला मामला है जहाँ पढ़े-लिखे पेशेवर (डॉक्टर) सीधे तौर पर बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा पाए गए। 4. हरियाणा सरकार का सख्त कदम: प्रशासन भंग करने की तैयारी हरियाणा की सैनी सरकार इस यूनिवर्सिटी पर पूरी तरह से सरकारी नियंत्रण लेने की तैयारी में है। नया विधेयक: 22 दिसंबर 2025 को विधानसभा में 'हरियाणा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक' पास किया गया है। अधिकार: यदि किसी यूनिवर्सिटी से राष्ट्रीय सुरक्षा या अखंडता को खतरा होता है, तो सरकार उसका प्रशासन भंग कर वहां अपना अधिकारी (Administrator) नियुक्त कर सकती है। छात्रों का भविष्य: ED ने कोर्ट से कहा है कि कानूनी कार्रवाई के बीच छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार जल्द ही प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।
चुनावी मौसम में ED का 'एक्शन' मोड: बंगाल से तमिलनाडु तक पुराने केसों की खुली फाइलें; विपक्षी दलों ने टाइमिंग पर उठाए सवाल भारत में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसियों, विशेषकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता ने एक बार फिर देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पश्चिम बंगाल में I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी हो या तमिलनाडु में पुरानी फाइलों का खुलना, विपक्षी दलों का आरोप है कि ED की कार्रवाई का सीधा संबंध 'चुनावी टाइमिंग' से है। 1. पश्चिम बंगाल: 5 साल पुराने केस में चुनाव से ठीक पहले छापा मई 2026 से पहले पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं। ठीक इससे पहले 8 जनवरी को ED ने कोलकाता में I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के दफ्तर और इसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी की। केस की पृष्ठभूमि: यह मामला 2,742 करोड़ रुपये की कोयला तस्करी से जुड़ा है। CBI ने नवंबर 2020 में FIR की थी और ED ने उसी समय जांच शुरू की थी। विवाद की वजह: मामला 5 साल पुराना है, लेकिन बड़ी कार्रवाई चुनाव से ठीक 2-3 महीने पहले हुई। आरोप: ममता बनर्जी ने इसे चुनावी लाभ के लिए 'एजेंसी का दुरुपयोग' बताया है, जबकि ED का दावा है कि ₹20 करोड़ हवाला के जरिए I-PAC तक पहुँचे हैं। 📊 ED की कार्रवाई का 'चुनावी पैटर्न': 4 राज्यों का विश्लेषण राज्य केस का समय कार्रवाई की टाइमिंग राजनीतिक परिणाम दिल्ली 2022 (शराब नीति) फरवरी 2025 चुनाव से पहले 2024 में CM अरेस्ट। भाजपा सत्ता में आई। झारखंड 2023 (जमीन घोटाला) नवंबर 2024 चुनाव से 10 महीने पहले सोरेन अरेस्ट। हेमंत सोरेन फिर से CM बने। महाराष्ट्र 2021 (मनी लॉन्ड्रिंग) नवंबर 2024 चुनाव से मात्र 6 दिन पहले छापेमारी। भाजपा गठबंधन की जीत। पश्चिम बंगाल 2020 (कोयला तस्करी) मार्च-अप्रैल 2026 चुनाव से 2 महीने पहले कार्रवाई। नतीजे प्रतीक्षित 2. आगामी चुनावों वाले राज्यों में ED की सक्रियता साल 2026 में बंगाल के अलावा चार अन्य राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव हैं, जहाँ ED ने अपनी फाइलें तेज कर दी हैं: तमिलनाडु: सत्ताधारी DMK के लिए शराब घोटाले, रियल एस्टेट और शेल कंपनियों से जुड़े पुराने मामले सिरदर्द बन रहे हैं। केरल: सोना तस्करी (Gold Smuggling) और सहकारी बैंक घोटालों में सत्ताधारी LDF सरकार घिरी हुई है। असम: यहाँ भाजपा की सरकार है, लेकिन विपक्षी कांग्रेस और AIUDF नेताओं पर कार्रवाई ने उनके चुनावी फंड और नेटवर्क को प्रभावित किया है। पुडुचेरी: कारोबारियों और राजनेताओं के पुराने गठजोड़ पर एजेंसी की पैनी नजर है। 3. 'एजेंसी' बनाम 'विपक्ष': आरोप और सफाई विपक्षी दलों (जैसे TMC, AAP, JMM, और शिवसेना-UBT) का एक साझा आरोप है कि ED का उपयोग 'चुनावी फंडिंग' रोकने और विपक्षी नेताओं की छवि खराब करने के लिए किया जाता है। विपक्ष का तर्क: कार्रवाई केवल चुनाव से पहले क्यों तेज होती है? चार्जशीट दाखिल करने में सालों क्यों लग जाते हैं? ED की सफाई: एजेंसी का कहना है कि जांच एक निरंतर प्रक्रिया है। सबूतों के आधार पर और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही गिरफ्तारियां या छापेमारी की जाती है, जिसका राजनीति या चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।
आर्मी चीफ की चेतावनी: ऑपरेशन सिंदूर जारी; बॉर्डर पार 8 आतंकी कैंप सक्रिय, दुस्साहस किया तो पाकिस्तान को मिलेगा 'करारा जवाब' भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान और चीन को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' अभी समाप्त नहीं हुआ है और भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी ताकत के साथ तैयार है। यहाँ आर्मी चीफ के संबोधन और सीमा की वर्तमान स्थिति का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. ऑपरेशन सिंदूर: रणनीतिक जीत और पाक को बड़ा झटका जनरल द्विवेदी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतरीन तालमेल का उदाहरण बताया। बड़ा नुकसान: इस ऑपरेशन के दौरान 100 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और आतंकी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा। 88 घंटे का अभियान: 7 मई को शुरू हुई 22 मिनट की शुरुआती स्ट्राइक और उसके बाद 88 घंटे चले समन्वित हमले ने पाकिस्तान की 'परमाणु धमकी' (Nuclear Blackmail) की रणनीति को पूरी तरह कमजोर कर दिया। लक्ष्य: सेना ने 9 में से 7 चिन्हित आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया। 2. सीमा पर 'ड्रोन' और आतंकी कैंपों की हलचल बॉर्डर पर हाल ही में देखे गए ड्रोनों को लेकर आर्मी चीफ ने स्थिति साफ की। रक्षात्मक ड्रोन: 10 से 12 जनवरी के बीच सीमा पर जो छोटे ड्रोन देखे गए, वे पाकिस्तान द्वारा यह जांचने के लिए भेजे गए थे कि भारतीय सेना कहीं ढिलाई तो नहीं बरत रही। 8 सक्रिय कैंप: आर्मी चीफ ने खुलासा किया कि LoC और इंटरनेशनल बॉर्डर के पास 8 आतंकी कैंप अभी भी सक्रिय हैं, जहाँ ट्रेनिंग चल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि एक भी गलती होने पर सेना तुरंत एक्शन लेगी। 📊 भारतीय सेना की उपलब्धियां और रणनीतिक रुख (2025-26) श्रेणी विवरण और आंकड़े आतंकी सफाया 2025 में 31 आतंकी ढेर (ज्यादातर पाकिस्तानी)। ऑपरेशन महादेव पहलगाम हमले के आतंकियों का खात्मा। पर्यटन में सुधार अमरनाथ यात्रा में 4 लाख+ श्रद्धालु (5 साल का रिकॉर्ड)। रणनीतिक रुख पाकिस्तान-चीन का 1963 समझौता 'अवैध' घोषित। 3. चीन-पाक गठजोड़ पर सख्त प्रहार जनरल द्विवेदी ने 1963 के पाक-चीन समझौते को पूरी तरह अवैध करार दिया। शक्सगाम घाटी: पाकिस्तान द्वारा शक्सगाम घाटी का क्षेत्र चीन को सौंपना भारत स्वीकार नहीं करता। CPEC का विरोध: सेना प्रमुख ने कहा कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है और हम इसे दोनों देशों की अवैध कार्रवाई मानते हैं। 4. कश्मीर में बदलाव की बयार सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर की बदलती तस्वीर पर खुशी जताई। आतंक से पर्यटन की ओर: अब घाटी में विकास के काम तेज हुए हैं और पर्यटन लौट रहा है। शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रा इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।
ममता बनाम शाह: बंगाल में संवैधानिक 'महा-संग्राम'; 'पेन ड्राइव' से 'पॉलिटिकल डेटा' तक छिड़ी कानूनी जंग पश्चिम बंगाल में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक पूर्ण संवैधानिक संकट और सड़कों पर महा-संग्राम का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है, वहीं दिल्ली में टीएमसी सांसदों और कोलकाता की सड़कों पर हजारों कार्यकर्ताओं ने 'एजेंसी राज' के खिलाफ हुंकार भरी है। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम, राजनीतिक आरोपों और कानूनी पेचों का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. "मेरे पास पेन ड्राइव है": ममता बनर्जी का अमित शाह पर बड़ा हमला कोलकाता में एक विशाल विरोध मार्च का नेतृत्व करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अभूतपूर्व दावे किए। कोयला घोटाले का पलटवार: ममता ने आरोप लगाया कि कोयला घोटाले की असली रकम बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और खुद गृह मंत्री अमित शाह तक पहुँचती है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इसके पुख्ता सबूत 'पेन ड्राइव' में मौजूद हैं। सुवेंदु अधिकारी पर आरोप: उन्होंने कहा कि बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी इस पैसे के लेन-देन में शामिल हैं। डेटा चोरी का डर: ममता का सबसे गंभीर आरोप यह है कि ED ने कोयला घोटाले के बहाने I-PAC से टीएमसी का चुनावी डेटा, रणनीति और उम्मीदवारों की लिस्ट चुराने की कोशिश की है। 2. दिल्ली से कोलकाता तक विरोध की आग तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए 'दिल्ली चलो' का नारा दिया। दिल्ली में धक्का-मुक्की: गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे टीएमसी सांसदों (डेरेक ओ ब्रायन, महुआ मोइत्रा) को दिल्ली पुलिस ने घसीटकर हिरासत में लिया। महुआ मोइत्रा ने इसे लोकतंत्र का अपमान बताया। कोलकाता मार्च: कोलकाता में ममता बनर्जी के साथ जनसैलाब उमड़ा। उन्होंने कहा कि "अगर कोई मुझे छेड़ता है, तो मैं छोड़ती नहीं हूँ।" संवैधानिक संस्थानों पर सवाल: सीएम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में शाह के पुराने सहयोगियों को बिठाया गया है ताकि बंगाल में 'जनादेश' को प्रभावित किया जा सके। 📊 विवाद के मुख्य केंद्र: आंकड़े और आरोप मुद्दा टीएमसी (TMC) का पक्ष भाजपा/ED का पक्ष ED रेड का कारण राजनीतिक प्रतिशोध और डेटा चोरी। 2020 का कोयला तस्करी और हवाला मामला। हस्तक्षेप मुख्यमंत्री का अपने कार्यकर्ताओं की रक्षा करना। सीएम ने जांच में बाधा डाली और फाइलें जब्त कीं। I-PAC की भूमिका एक प्रोफेशनल चुनावी रणनीतिकार फर्म। हवाला धन प्राप्त करने वाली एक संदिग्ध इकाई। कानूनी स्थिति ED पर 2 FIR दर्ज कराई गईं। हाईकोर्ट में सीएम के खिलाफ याचिका दायर। 3. कलकत्ता हाईकोर्ट: हंगामे की भेंट चढ़ी सुनवाई ED ने ममता बनर्जी द्वारा जांच में बाधा डालने और फाइलें ले जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट में अराजकता: कोर्ट परिसर में वकीलों और कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ और हंगामे के कारण जस्टिस सुवरा घोष की बेंच ने सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए टाल दी है। प्रतिवादी: ED ने अपनी याचिका में ममता बनर्जी के अलावा डीजीपी और पुलिस कमिश्नर को भी पक्षकार बनाया है। 4. बीजेपी और विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया रविशंकर प्रसाद (BJP): "आजाद भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक सीएम खुद जाकर रेड रुकवाए। यह दिखाता है कि ममता को राज खुलने का डर है।" मोहन यादव (CM, MP): उन्होंने ममता की हरकत को 'हल्की हरकत' करार दिया और कहा कि संवैधानिक शपथ का उल्लंघन हुआ है। अधीर रंजन चौधरी (Congress): उन्होंने टीएमसी पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि पार्टी मजदूरों पर हमले पर चुप रहती है। 5. I-PAC: वह संस्था जिसके लिए 'आर-पार' की जंग छिड़ी I-PAC (Indian Political Action Committee) कोई साधारण कंपनी नहीं रह गई है। प्रतीक जैन इसके वर्तमान सर्वेसर्वा हैं। महत्व: ममता के लिए रणनीति बनाना, डेटा एनालिसिस और वोटर आउटरीच का पूरा जिम्मा इसी संस्था पर है। यही कारण है कि ममता बनर्जी ने इसे अपनी पार्टी का 'अंग' मानकर खुद रेड स्थल पर मोर्चा संभाला।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों पर 'महा-सुनवाई': "कुत्ते डर भांप लेते हैं"; जजों के पर्सनल अनुभव और चूहों की आबादी वाला अजीब तर्क 1. जस्टिस नाथ का व्यक्तिगत अनुभव: "अपना सिर मत हिलाइए" सुनवाई के दौरान एक बड़ा पल तब आया जब जस्टिस नाथ ने कुत्तों के व्यवहार (Animal Behavior) पर टिप्पणी की। जज का तर्क: जस्टिस नाथ ने कहा कि "कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं। जब उन्हें लगता है कि सामने वाला डर रहा है, तो वे अक्सर हमला कर देते हैं।" टकराव: जब कुत्तों के समर्थकों (Animal Lovers) की तरफ से पेश वकील ने इस बात पर असहमति जताते हुए अपना सिर हिलाया, तो जस्टिस नाथ ने कड़े शब्दों में कहा, "अपना सिर मत हिलाइए, मैं यह बात अपने व्यक्तिगत अनुभव से कह रहा हूँ।" 2. इंफ्रास्ट्रक्चर का संकट: देश में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर! याचिकाकर्ता के वकील ने देश में कुत्तों के प्रबंधन को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया: शेल्टर होम की कमी: पूरे भारत में सिर्फ 5 सरकारी शेल्टर होम बताए गए, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता मात्र 100 कुत्तों की है। लापरवाही: राज्यों ने जो डेटा दिया है, उसमें यह स्पष्ट नहीं है कि नगर पालिकाएं कितने शेल्टर चला रही हैं। वकील ने तर्क दिया कि जब तक पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होगा, कुत्तों को सड़कों से हटाकर रखा कहाँ जाएगा? 📊 सुनवाई की 6 सबसे बड़ी बातें और कानूनी दलीलें मुख्य बिंदु दलील और कोर्ट का रुख मालिक कौन? पालतू कुत्ते का मालिक होता है, लेकिन आवारा कुत्ते का कोई नहीं। क्या यह राज्य की जिम्मेदारी नहीं है? सुरक्षित रास्ता ABC (Animal Birth Control) नियम ऐसे होने चाहिए कि नागरिक के घर तक का रास्ता सुरक्षित रहे। रिहायशी इलाके आदेश सिर्फ स्कूलों या अस्पतालों तक सीमित न हो, बल्कि रिहायशी कॉलोनियों पर भी लागू हो। डॉग लवर्स पर शर्त NGO को याचिका लगाने के लिए फीस देनी होती है। कोर्ट ने कहा- "शर्त न होती तो यहाँ पंडाल लगाना पड़ता।" अधूरे आंकड़े कुत्तों की आखिरी गणना 2009 में हुई थी। बिना सही संख्या जाने प्रबंधन नामुमकिन है। इकोलॉजिकल बैलेंस क्या कुत्तों को हटाने से चूहों और बंदरों का आतंक बढ़ जाएगा? 3. 'कुत्ते बनाम चूहे' का विवाद: "तो क्या बिल्लियां ले आएं?" एनिमल वेलफेयर की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने एक ऐसा तर्क दिया जिस पर कोर्ट ने चुटकी ली। तर्क: वकील ने कहा कि "अगर कुत्तों को सड़कों से हटा दिया गया, तो चूहों की आबादी अनियंत्रित रूप से बढ़ जाएगी, जो बीमारियां फैलाएंगे। कुत्ते पारिस्थितिक संतुलन (Ecological Balance) बनाए रखते हैं।" कोर्ट का कटाक्ष: इस पर जस्टिस मेहता ने मजाकिया लहजे में कहा, "यह कैसा संबंध है? तो क्या हमें और बिल्लियां ले आनी चाहिए?" कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हर कुत्ते को हटाने का आदेश नहीं दिया, बल्कि केवल नियमों के अनुसार उनके प्रबंधन की बात की है। 4. पिछले 7 महीनों का लेखा-जोखा इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले 7 महीनों में 6 बार सुनवाई हो चुकी है। नवंबर 2025 का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही आदेश दिया था कि स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड्स जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए। अधिकारों का संतुलन: कोर्ट अब एक ऐसे फॉर्मूले पर काम कर रहा है जहां पशु अधिकार (Animal Rights) और नागरिकों की सुरक्षा (Right to Safe Environment) के बीच संतुलन बनाया जा सके।
दिल्ली हिंसा विश्लेषण: रामलीला मैदान में अतिक्रमण विरोधी अभियान पर पथराव; मस्जिद की अफवाह से भड़की भीड़, 5 पुलिसकर्मी घायल 1. घटनाक्रम: शांतिपूर्ण अभियान से हिंसक झड़प तक मंगलवार की शाम दिल्ली नगर निगम (MCD) के 17 बुलडोजर तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान इलाके में पहुंचे। लक्ष्य था—हाईकोर्ट के आदेश पर अवैध ढांचों को हटाना। हिंसा का ट्रिगर: जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, सोशल मीडिया (विशेषकर फेसबुक और व्हाट्सएप) पर खालिद मलिक नामक व्यक्ति द्वारा एक भ्रामक पोस्ट डाली गई। इसमें दावा किया गया कि 'मस्जिद को गिराया जा रहा है'। भीड़ का हमला: इस वीडियो के वायरल होते ही चंद मिनटों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। भीड़ ने पुलिस और एमसीडी कर्मियों को निशाना बनाकर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकना शुरू कर दिया। पुलिस की कार्रवाई: अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस संघर्ष में 5 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। 2. प्रशासनिक स्पष्टीकरण: क्या तोड़ा गया और क्या नहीं? एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर विवेक कुमार ने स्पष्ट किया है कि मस्जिद को खरोंच तक नहीं आई है। क्या तोड़ा गया: कोर्ट के आदेशानुसार एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर, एक बैंक्वेट हॉल (बारात घर) और कुछ अवैध दुकानों को ध्वस्त किया गया। कानूनी आधार: यह कार्रवाई 12 नवंबर 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए उस निर्देश का हिस्सा थी, जिसमें 38,940 वर्ग फुट सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने को कहा गया था। 📊 विवादित जमीन और कानूनी स्थिति: एक नजर में पक्ष दलील / स्थिति MCD 0.195 एकड़ जमीन पर कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। यह पूरी तरह अतिक्रमण है। मस्जिद समिति यह जमीन वक्फ संपत्ति है और वे इसका लीज किराया देते हैं। हाईकोर्ट (6 जन) मामले को सुनवाई योग्य माना और सभी पक्षों को नोटिस जारी कर 22 अप्रैल तक जवाब मांगा। मुख्य विवाद बारात घर और दुकानों पर आपत्ति नहीं, लेकिन कब्रिस्तान की जमीन को लेकर चिंता है। 3. गिरफ्तारियां और कानूनी कार्रवाई पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज और खालिद मलिक के सोशल मीडिया हैंडल की जांच के आधार पर कार्रवाई की है: गिरफ्तार उपद्रवी: मोहम्मद आरिब, मोहम्मद कैफ, मोहम्मद काशिफ और मोहम्मद हामिद। नाबालिग की संलिप्तता: एक किशोर को भी हिरासत में लिया गया है, जो पत्थरबाजी में शामिल था। खालिद मलिक: पुलिस भड़काऊ पोस्ट डालने वाले मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है, जिसने 'मस्जिद' का नाम लेकर भीड़ को उकसाया। 4. हाईकोर्ट का रुख: अगली सुनवाई 22 अप्रैल दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन हिंसा हुई (6 जनवरी), उसी दिन दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने इस मामले में नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार, शहरी विकास मंत्रालय, डीडीए और वक्फ बोर्ड से इस जमीन की मिल्कियत पर स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 22 अप्रैल 2026 तय की है, लेकिन तब तक अतिक्रमण हटाने पर कोई औपचारिक स्टे (STAY) नहीं दिया गया था।
वेनेजुएला की बर्बादी से भारत के फायदे तक: तेल का खेल और 'हाइपरइन्फ्लेशन' की खौफनाक दास्तान 1. स्वर्णिम युग: जब वेनेजुएला दुनिया का 'दुबई' था 1950 से 1970 के दशक तक वेनेजुएला की गिनती दुनिया के सबसे अमीर देशों में होती थी। चौथा सबसे अमीर देश: 1952 में वेनेजुएला की प्रति व्यक्ति आय कई यूरोपीय देशों से अधिक थी। OPEC की नींव: वेनेजुएला ने ही दुनिया को सिखाया कि तेल को हथियार कैसे बनाया जाए। 1960 में ओपेक (OPEC) के गठन में इसकी केंद्रीय भूमिका थी। विलासिता का दौर: कराकस के लोग वीकेंड शॉपिंग के लिए मियामी जाते थे और वेनेजुएला दुनिया में स्कॉच व्हिस्की का सबसे बड़ा आयातक था। 2. डच डिजीज और विनाश का ब्लूप्रिंट अर्थशास्त्र में 'डच डिजीज' (Dutch Disease) उस स्थिति को कहते हैं जब कोई देश केवल एक संसाधन (यहाँ तेल) पर इतना निर्भर हो जाए कि उसकी खेती और मैन्युफैक्चरिंग उद्योग खत्म हो जाएं। मुफ्तखोरी की राजनीति: 1999 के बाद ह्यूगो शावेज और बाद में मादुरो ने लोकलुभावन योजनाओं (Populist schemes) में तेल का सारा पैसा खर्च कर दिया। तकनीकी पतन: सरकारी कंपनी PDVSA से अनुभवी इंजीनियरों को निकालकर पार्टी कार्यकर्ताओं को भर दिया गया, जिससे तेल निकालने की क्षमता 35 लाख बैरल से गिरकर 8 लाख बैरल पर आ गई। 📊 वेनेजुएला का आर्थिक पतन: आंकड़ों की जुबानी वर्ष GDP (अरब डॉलर में) स्थिति 2012 $372.59 शिखर पर (Highest Level) 2020 $43.79 पतन की पराकाष्ठा 2026 $101 (अनुमानित) मामूली सुधार, लेकिन अस्थिर 3. 'हाइपरइन्फ्लेशन': जब नोटों की गड्डियों से खरीदा जाने लगा सामान वेनेजुएला की महंगाई का आलम ऐसा था कि वहां नोटों की गिनती नहीं, बल्कि तौल की जाती थी। महंगाई दर: 1,30,000% के पार। एक दर्जन अंडों की कीमत करोड़ों बोलिवर (स्थानीय मुद्रा) तक पहुँच गई। मानवीय संकट: लोग कुपोषण के शिकार हुए और 60 लाख से ज्यादा लोग देश छोड़कर पड़ोसी देशों में शरणार्थी बन गए। 4. भारत के लिए अवसर: सस्ता तेल और राहत की उम्मीद वेनेजुएला में हुए इस सत्ता परिवर्तन का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आपकी जेब पर पड़ सकता है। A. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में गिरावट संभव भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत वेनेजुएला से तेल नहीं ले पा रहा था। रूस जैसा डिस्काउंट: यदि अमेरिका समर्थित सरकार आती है और प्रतिबंध हटते हैं, तो भारत को वेनेजुएला से भारी छूट पर कच्चा तेल मिल सकता है। आपूर्ति में वृद्धि: ग्लोबल मार्केट में वेनेजुएला के तेल की वापसी से वैश्विक तेल कीमतें गिरेंगी, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता हो सकता है। B. रिलायंस और ONGC की चांदी रिलायंस इंडस्ट्रीज: जामनगर रिफ़ाइनरी दुनिया की उन चुनिंदा रिफ़ाइनरियों में से है जो वेनेजुएला के 'भारी' (Heavy) क्रूड को प्रोसेस कर सकती है। रिलायंस के लिए यह कच्चे माल का सबसे सस्ता स्रोत बनेगा। ONGC विदेश: वेनेजुएला के तेल कुओं में ONGC का करोड़ों डॉलर का निवेश फंसा हुआ है। नई सरकार आने से यह निवेश फिर से सक्रिय हो जाएगा और भारत को डिविडेंड मिलना शुरू होगा।
🚩 "शाहरुख खान हीरो नहीं, गद्दार हैं": बांग्लादेशी क्रिकेटर की IPL एंट्री पर भड़के रामभद्राचार्य और देवकीनंदन ठाकुर 1. जगद्गुरु रामभद्राचार्य का कड़ा प्रहार: "चरित्रहीनता का परिचय" पद्म विभूषण से सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने शाहरुख खान की आलोचना करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की है। चरित्र पर सवाल: उन्होंने कहा, "शाहरुख खान कोई हीरो नहीं हैं। उनका कोई चरित्र नहीं है। वे गद्दारों जैसा आचरण कर रहे हैं।" * विरोध का कारण: जगद्गुरु का तर्क है कि जिस समय पड़ोसी देश में हिंदुओं का खून बह रहा है, उस समय वहां के खिलाड़ी को करोड़ों में खरीदना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। 2. देवकीनंदन ठाकुर की भावुक अपील: "9.2 करोड़ पीड़ितों को दें" प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर ने शाहरुख खान को 'पत्थर दिल' करार दिया है। क्रूरता का आरोप: उन्होंने पूछा कि कोई इतना पत्थर दिल कैसे हो सकता है कि उन लोगों के देश से क्रिकेटर लाए जहां हमारी बहनों-बेटियों का सम्मान सुरक्षित नहीं है। प्रायश्चित का सुझाव: देवकीनंदन ठाकुर ने मांग की है कि KKR मुस्तफिजुर रहमान को टीम से तुरंत बाहर करे और उन्हें दी जाने वाली 9.2 करोड़ रुपए की राशि बांग्लादेश में पीड़ित हिंदू परिवारों को दान की जाए। 3. संगीत सोम का 'गद्दारी' वाला वार भाजपा नेता संगीत सोम ने इस विवाद को राष्ट्रवाद से जोड़ दिया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश का कनेक्शन: सोम ने आरोप लगाया कि शाहरुख खान जैसे लोग कभी पाकिस्तान का तो कभी बांग्लादेश का समर्थन करते हैं। चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट कहा, "जब पाकिस्तान के खिलाड़ी भारत में नहीं खेल सकते, तो बांग्लादेशी कैसे खेलेंगे? हम उन्हें खेलने नहीं देंगे।" 📊 मुस्तफिजुर रहमान: 9.2 करोड़ की 'विवादित' डील विवरण जानकारी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान (बाएं हाथ के तेज गेंदबाज) फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) कीमत 9.20 करोड़ रुपए (मिनी ऑक्शन, अबुधाबी) विवाद का कारण बांग्लादेश में 12 दिन में 3 हिंदुओं की हत्या और व्यापक हिंसा
🗳️ कर्नाटक का 'जनादेश': 91% नागरिकों को EVM और चुनावी निष्पक्षता पर अटूट भरोसा; सरकारी रिपोर्ट ने पलटी सियासत 1. सर्वे की पृष्ठभूमि: कांग्रेस सरकार की एजेंसी का बड़ा खुलासा कर्नाटक मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन अथॉरिटी (KMEA) ने अगस्त 2025 में एक विस्तृत अध्ययन पूरा किया, जिसकी रिपोर्ट हाल ही में सार्वजनिक हुई है। इस स्टडी का शीर्षक है— 'लोकसभा चुनाव 2024: नागरिकों के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार (KAP) का एंडलाइन सर्वे'। यह सर्वे चुनाव आयोग के SVEEP (सिस्टेमैटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन) कार्यक्रम के प्रभाव को मापने के लिए किया गया था। चूँकि कर्नाटक में सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार है, इसलिए इस रिपोर्ट के निष्कर्षों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह राहुल गांधी के उन आरोपों को कमजोर करता है जिसमें वे अक्सर ईवीएम पर संदेह जताते हैं। 2. डेटा का गहराई से विश्लेषण: कहाँ कितना भरोसा? सर्वे ने कर्नाटक के 34 चुनावी जिलों के 102 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया। इसमें 5,100 मतदाताओं की राय ली गई, जिसमें पुरुष और महिलाओं की भागीदारी लगभग बराबर (50-50%) थी। A. चुनाव की निष्पक्षता पर राय: राज्य के 91.31% लोगों का स्पष्ट मानना है कि भारत में चुनाव पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराए जाते हैं। कलबुर्गी डिवीजन: यहाँ सबसे अधिक भरोसा देखा गया। 84.67% सहमत और 10.19% पूरी तरह सहमत थे। राहुल गांधी ने इसी क्षेत्र में 'वोट चोरी' का आरोप लगाया था, लेकिन यहाँ की जनता का भरोसा सबसे मजबूत निकला। बेंगलुरु डिवीजन: यहाँ अन्य क्षेत्रों की तुलना में थोड़ा संदेह दिखा। 9.67% लोगों ने असहमति जताई और 3.56% ने पूरी असहमति। B. EVM की सटीकता: ईवीएम पर भरोसे को लेकर आंकड़े चौंकाने वाले हैं: 83.61% उत्तरदाताओं ने माना कि EVM सटीक नतीजे देती है (इसमें 69.39% सहमत और 14.22% पूरी तरह सहमत हैं)। न्यूट्रल राय: करीब 6.76% लोग ऐसे थे जिन्होंने न तो सहमति जताई और न ही असहमति। क्षेत्रीय अंतर: कलबुर्गी में EVM पर भरोसा 94.48% (सहमति + पूर्ण सहमति) के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि बेंगलुरु में पूर्ण सहमति का स्तर सबसे कम (9.28%) था। 3. चुनावी भ्रष्टाचार और प्रलोभन: एक कड़वी हकीकत भले ही लोग EVM पर भरोसा करते हों, लेकिन रिपोर्ट ने चुनावों में धनबल के बढ़ते प्रभाव पर गंभीर चिंता जताई है: पैसे का प्रभाव: 49.55% लोगों का मानना है कि चुनावों में पैसे का गलत इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। प्रलोभन का अनुभव: 16.33% मतदाताओं (करीब 833 लोगों) ने स्वीकार किया कि उन्हें वोट के बदले लालच देने की कोशिश की गई। लालच के प्रकार: सरकारी योजनाओं का लाभ: 42.26% मामलों में वोट के बदले सरकारी लाभ का वादा किया गया। नौकरी का वादा: 34.09% मामलों में रोजगार दिलाने का प्रलोभन दिया गया। 4. सामाजिक दृष्टिकोण: मतदान में महिलाओं की स्वायत्तता रिपोर्ट में महिलाओं की मतदान प्रक्रिया में भागीदारी पर भी सवाल किए गए: पुरुषों की सलाह: 37.71% लोगों का मानना है कि महिलाओं को वोट देने से पहले परिवार के पुरुषों या बुजुर्गों से सलाह लेनी चाहिए। विरोध: हालांकि, इसके विरोध में बड़ा वर्ग खड़ा दिखा। 51.64% (37.86% असहमत और 13.78% पूरी तरह असहमत) लोगों का मानना है कि महिलाओं को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेना चाहिए। 5. राजनीतिक प्रतिक्रिया: भाजपा का राहुल गांधी पर वार जैसे ही यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, भाजपा ने इसे राहुल गांधी के खिलाफ एक कूटनीतिक हथियार बना लिया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने इसे "कांग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा" करार दिया। भाजपा का तर्क है कि जब कांग्रेस की अपनी सरकार की एजेंसी कह रही है कि 91% लोग चुनाव प्रक्रिया और EVM पर भरोसा करते हैं, तो राहुल गांधी विदेशी धरती या रैलियों में लोकतंत्र पर सवाल उठाकर देश का अपमान कर रहे हैं।
उन्नाव केस: कुलदीप सेंगर की आजादी पर सुप्रीम कोर्ट का 'ब्रेक'; CJI ने पूछा- विधायक पब्लिक सर्वेंट क्यों नहीं? 1. 🛑 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जमानत पर रोक दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को कुलदीप सेंगर की सजा को सस्पेंड करते हुए उसे जमानत दी थी। लेकिन सोमवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने इस आदेश पर रोक लगा दी। CJI की टिप्पणी: चीफ जस्टिस ने कहा, "हाई कोर्ट के जज बेहतरीन हैं, लेकिन गलती किसी से भी हो सकती है। चूंकि आरोपी पहले से दूसरे मामले में दोषी है, इसलिए उसे बिना सुने रिहा रहने देना सही नहीं होगा।" अगली सुनवाई: कोर्ट ने सेंगर को नोटिस जारी किया है और 4 हफ्ते बाद इस पर विस्तार से सुनवाई होगी। 2. 🏛️ कोर्ट रूम ड्रामा: लोक सेवक (Public Servant) की परिभाषा पर छिड़ी बहस सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठा कि क्या एक विधायक को POCSO कानून के तहत 'पब्लिक सर्वेंट' माना जाना चाहिए? अदालत की हैरानी: CJI ने सवाल उठाया कि जब एक पुलिस कांस्टेबल को लोक सेवक माना जाता है, तो जनता द्वारा चुने गए विधायक या सांसद को इस दायरे से बाहर क्यों रखा जाए? आडवाणी केस (1997) का जिक्र: CBI ने 1997 के ऐतिहासिक 'आडवाणी बनाम CBI' मामले का हवाला दिया। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुने हुए प्रतिनिधि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 'सरकारी कर्मचारी' की श्रेणी में आते हैं। CBI की दलील है कि अगर भ्रष्टाचार के लिए विधायक लोक सेवक हैं, तो यौन अपराधों के लिए भी वही नियम लागू होना चाहिए। 3. 😭 पीड़िता के आंसू और जीत की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही पीड़िता कोर्ट परिसर में फूट-फूटकर रोने लगी। यह आंसू 8 साल के उस लंबे संघर्ष के थे जिसमें उसने अपने पिता, मौसी और चाची को खो दिया। पीड़िता का बयान: "मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं। मुझे यकीन है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा। मैं उसे फांसी की सजा दिलाने तक यह लड़ाई जारी रखूंगी।" 4. 📜 फ्लैशबैक: उन्नाव से दिल्ली तक लहूलुहान संघर्ष 2017-18: 4 जून 2017 को सेंगर ने नाबालिग से रेप किया। सुनवाई न होने पर पीड़िता ने 2018 में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद उसके पिता की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। 2019 का एक्सीडेंट: रायबरेली में पीड़िता की कार को ट्रक ने टक्कर मारी, जिसमें उसके परिवार की दो महिलाओं की मौत हो गई। इसे सेंगर की साजिश बताया गया। सजा: तत्कालीन CJI रंजन गोगोई के हस्तक्षेप के बाद केस दिल्ली शिफ्ट हुआ और दिसंबर 2019 में सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
भगोड़े ललित मोदी के बदले सुर: माल्या के साथ वीडियो पर मांगी माफी; बॉम्बे हाई कोर्ट की सख्ती के बाद आया बयान 1. 📲 क्या था वो वीडियो, जिस पर मचा बवाल? 22 दिसंबर 2025 को आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने विजय माल्या के जन्मदिन के मौके पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो ने इंटरनेट पर आग लगा दी क्योंकि: तंज और रसूख: वीडियो में ललित मोदी खुद को और माल्या को "भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े" कहते हुए मजाक उड़ा रहे थे। चुनौतीपूर्ण लहजा: उन्होंने कैप्शन में लिखा था, "चलो इंटरनेट हिला देता हूं, खासकर मीडिया वालों के लिए... जलन के साथ देखते रहिए।" उपस्थिति: वीडियो में माल्या अपनी पार्टनर पिंकी लालवानी के साथ लंदन की विलासिता का आनंद लेते नजर आ रहे थे। 2. 🙏 9 दिन बाद 'माफीनामा' क्यों? वीडियो वायरल होने के 9 दिन बाद सोमवार को ललित मोदी ने अपने X अकाउंट पर एक माफीनामा जारी किया। उन्होंने लिखा: "मेरे बयान से यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हों, खासकर भारत सरकार की, तो मैं इसके लिए माफी चाहता हूं। बयान का आशय वैसा नहीं था, जैसा उसे समझा गया। किसी भी गलतफहमी के लिए फिर से माफी मांगता हूं।" जानकारों का मानना है कि यह माफीनामा बॉम्बे हाई कोर्ट में विजय माल्या के खिलाफ चल रही सख्त सुनवाई और प्रत्यर्पण की बढ़ती प्रक्रिया के दबाव का नतीजा हो सकता है। 3. 🏛️ बॉम्बे हाई कोर्ट की दो टूक: "भारत कब लौटोगे?" 23 दिसंबर को विजय माल्या की उस याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें उसने खुद को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित करने के आदेश को चुनौती दी थी। अदालत का रुख: चीफ जस्टिस की बेंच ने साफ कहा कि माल्या भारतीय अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर बैठकर कानून को चुनौती नहीं दे सकते। ED की दलील: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि माल्या के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बैंकों का पैसा वसूल होने का मतलब यह नहीं कि आपराधिक जिम्मेदारी खत्म हो गई। अब अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी। 4. 📜 फ्लैशबैक: क्यों और कैसे भागे ये 'महारथी'? दोनों ही आरोपी एक दशक से अधिक समय से लंदन में शरण लिए हुए हैं: ललित मोदी (2010 से फरार): IPL के फाउंडर ललित मोदी पर 2010 में मनी लॉन्ड्रिंग और आईपीएल नीलामी में 125 करोड़ के कमीशनखोरी के आरोप लगे। अंडरवर्ल्ड की धमकी का बहाना बनाकर वे लंदन चले गए। उन पर 'ब्लू कॉर्नर' नोटिस जारी है। विजय माल्या (2016 से फरार): किंगफिशर एयरलाइंस के नाम पर बैंकों का हजारों करोड़ रुपये डकारने वाले माल्या 2016 में देश छोड़कर भाग गए। 2019 में उन्हें आधिकारिक तौर पर 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया गया।
राघव चड्ढा की 'लंच डिप्लोमेसी': डिलीवरी एजेंट के दर्द को दी आवाज़; ई-कॉमर्स कंपनियों की 10 मिनट डिलीवरी पर उठाए सवाल 1. 📲 वायरल वीडियो से लंच तक का सफर कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक डिलीवरी एजेंट का वीडियो काफी चर्चा में रहा था। उस वीडियो में एजेंट ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया था कि 15 घंटे की कड़ी मेहनत और 28 डिलीवरी पूरी करने के बाद उसके हाथ में केवल ₹ 763 आए। राघव की पहल: वीडियो देखते ही राघव चड्ढा ने अपनी टीम के जरिए उस युवा एजेंट से संपर्क किया और उसे अपने घर बुलाया। संवाद: लंच के दौरान राघव ने उसके काम की चुनौतियों, कम कमाई और सुरक्षा के अभाव पर लंबी चर्चा की। राघव ने कहा, "इन मेहनतकश युवाओं की छाती पर चढ़कर कंपनियां अरबों की वैल्यूएशन बना रही हैं, लेकिन इन वर्कर्स को बुनियादी सम्मान तक नहीं मिलता।" 2. 🏛️ संसद में गिग वर्कर्स की गूंज राघव चड्ढा ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस "साइलेंट वर्कफोर्स" के लिए मजबूती से अपनी बात रखी थी। उनके मुख्य बिंदु थे: दिहाड़ी मजदूरों से बदतर स्थिति: उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में डिलीवरी बॉय, राइडर और ड्राइवर की हालत पुराने समय के दिहाड़ी मजदूरों से भी खराब है। वे न तो कर्मचारी की श्रेणी में आते हैं और न ही उन्हें सामाजिक सुरक्षा (बीमा, पीएफ) मिलती है। 10 मिनट डिलीवरी कल्चर का विरोध: राघव ने मांग की कि 'क्विक कॉमर्स' (10 मिनट में सामान पहुँचाना) के इस जानलेवा कल्चर को खत्म किया जाना चाहिए। इस दबाव में डिलीवरी एजेंट ट्रैफिक नियमों को तोड़ते हैं और अपनी जान जोखिम में डालते हैं। 3. 📉 अरबों की कंपनियां बनाम खाली हाथ वर्कर्स राघव चड्ढा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां यूनिकॉर्न (Unicorn) बन चुकी हैं, उनकी वैल्यूएशन बिलियन डॉलर में है। लेकिन जो लोग धूप, बारिश और ठंड में सड़कों पर दौड़कर इन कंपनियों को बड़ा बना रहे हैं, उनके पास न तो फिक्स सैलरी है और न ही भविष्य की कोई गारंटी। 4. ✊ भविष्य की राह: सम्मान और सुरक्षा की मांग मुलाकात के बाद राघव ने वादा किया कि वे इस मुद्दे को और बड़े स्तर पर उठाएंगे। उन्होंने मांग की कि गिग वर्कर्स को भी अन्य कर्मचारियों की तरह न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य बीमा और कार्यस्थल पर सुरक्षा मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल डिलीवरी बॉय नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति पर शशि थरूर का बड़ा बयान: अवैध प्रवासियों पर एक्शन का समर्थन और शेख हसीना की शरण पर दी दलील 1. 🚫 अवैध घुसपैठ पर कड़ा रुख: "यह सिस्टम की नाकामी है" शशि थरूर ने अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर केंद्र सरकार के अधिकार और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए अपनी सीमाओं की रक्षा सर्वोपरि है। इमिग्रेशन कंट्रोल: थरूर के अनुसार, यदि विदेशी नागरिक अवैध तरीके से भारत में प्रवेश कर रहे हैं या वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी यहाँ डटे हुए हैं, तो यह सीधे तौर पर हमारे बॉर्डर सिक्योरिटी और इमिग्रेशन सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। सरकार का अधिकार: उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के दायरे में रहकर अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर निकालना (डिपोर्ट करना) सरकार का वैधानिक अधिकार है। उन्होंने बॉर्डर पर और अधिक सख्ती बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया। 2. 🇧🇩 शेख हसीना का बचाव: "दोस्ती और इंसानियत का तकाजा" बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद भारत में रह रही शेख हसीना के मुद्दे पर थरूर ने सरकार के रुख का समर्थन किया। इंसानी सोच और भरोसा: थरूर ने कहा कि शेख हसीना को जबरन वापस न भेजना एक सही और जिम्मेदारी भरा कदम था। भारत और हसीना के बीच दशकों पुराने भरोसेमंद संबंध रहे हैं, ऐसे में संकट के समय उन्हें सुरक्षा देना भारत की 'अतिथि देवो भव:' और मानवीय संस्कृति का हिस्सा है। कानूनी जटिलताएं: उन्होंने समझाया कि डिपोर्टेशन (निर्वासन) और एक्सट्रैडिशन (प्रत्यर्पण) केवल राजनीतिक फैसले नहीं होते, बल्कि इनमें जटिल अंतरराष्ट्रीय समझौते और कानूनी नियम शामिल होते हैं। जब तक कानूनी जांच और प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी मित्र देश के नेता को सुरक्षा देना कूटनीतिक रूप से अनिवार्य है। 3. 🚩 पार्टी लाइन से अलग राह: थरूर की 'स्वतंत्र' राजनीति पिछले कुछ समय से शशि थरूर के बयानों ने कांग्रेस नेतृत्व को कई बार असहज किया है। विदेश नीति की सराहना: थरूर लगातार मोदी सरकार की विदेश नीति के कुछ पहलुओं की तारीफ करते नजर आए हैं। उन्होंने विपक्षी राज्यों की कुछ नीतियों की आलोचना और केंद्र की सकारात्मक पहलों का समर्थन कर खुद को एक 'बौद्धिक और स्वतंत्र' राजनेता के रूप में स्थापित किया है। मीटिंग से दूरी: 30 नवंबर को सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस रणनीतिक समूह (Strategic Group) की महत्वपूर्ण बैठक में थरूर की अनुपस्थिति ने पार्टी के भीतर उनके भविष्य और असंतोष को लेकर अटकलें तेज कर दी थीं।
📈 भारत-अमेरिका ट्रेड डील: टैरिफ युद्ध खत्म करने के लिए भारत का 'मास्टर स्ट्रोक'; रूसी तेल पेनल्टी हटाने की आखिरी मांग 1. 📂 भारत का प्रस्ताव: 50% टैरिफ को 15% पर लाने की जिद भारत ने अमेरिका के साथ चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (BTA) में अपना पक्ष पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। वर्तमान में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर कुल 50% टैरिफ लगा रखा है। भारत की मांगें दो-टोक हैं: टैरिफ में कटौती: भारत चाहता है कि अमेरिका 50% के इस भारी-भरकम टैक्स को घटाकर 15% के स्तर पर लाए। भारत का तर्क है कि यूरोपीय संघ (EU) जैसे सहयोगियों को जो राहत मिली है, वही भारत को भी मिलनी चाहिए। रूस पेनल्टी का अंत: भारत पर लगाए गए 50% टैक्स में से 25% हिस्सा केवल इसलिए है क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा है। भारत ने मांग की है कि इस 'रूसी तेल पेनल्टी' को तत्काल और पूरी तरह खत्म किया जाए। 2. 🛢️ रूसी तेल का गणित: कम होता आयात और अमेरिका का दबाव अमेरिका का आरोप रहा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से यूक्रेन युद्ध के लिए पुतिन की मदद कर रहा है। हालांकि, आंकड़े अब बदल रहे हैं: आयात में गिरावट: नवंबर में भारत का रूसी तेल आयात 17.7 लाख बैरल प्रति दिन था, जो दिसंबर में गिरकर 12 लाख बैरल रह गया है। जनवरी में इसके 10 लाख बैरल से नीचे जाने की उम्मीद है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर: रूसी तेल कंपनियों 'रोसनेफ्ट' और 'लुकोइल' पर कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने अब रूसी तेल से दूरी बनाना शुरू कर दिया है। भारत इसी गिरावट को आधार बनाकर अमेरिका से पेनल्टी हटाने की मांग कर रहा है। 3. 💰 आर्थिक प्रभाव: अगर प्रस्ताव मंजूर हुआ तो क्या होगा? यदि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन भारत के इस '15% टैरिफ' वाले फॉर्मूले को मान लेता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ा उछाल देखने को मिलेगा: निर्यात में वृद्धि: अमेरिका में भारतीय कपड़े, स्टील, एल्युमीनियम और इंजीनियरिंग सामान सस्ते हो जाएंगे, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़े ऑर्डर मिलेंगे। डॉलर की आवक: निर्यात बढ़ने से देश में विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेन रिजर्व) बढ़ेगा और रुपया मजबूत होगा। सस्ता ईंधन: रूसी तेल पर पेनल्टी हटने से भारत बिना किसी डर के सस्ता कच्चा तेल खरीद पाएगा, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं। 4. ⚠️ जोखिम: अगर वार्ता विफल रही तो क्या? भारत ने स्पष्ट किया है कि यदि टैरिफ 15% से अधिक रहता है, तो भारतीय निर्यातक वैश्विक बाजार में पिछड़ जाएंगे। प्रतिस्पर्धा का नुकसान: इंडोनेशिया जैसे देशों का टैरिफ पहले ही 32% से घटाकर 19% कर दिया गया है। अगर भारत को राहत नहीं मिली, तो अमेरिकी बाजार में इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देश भारत की जगह ले लेंगे। तनाव में बढ़ोतरी: समझौता न होने की स्थिति में भारत भी अमेरिकी उत्पादों (जैसे सेब, बादाम, हार्ले डेविडसन) पर 'रेसिप्रोकल टैरिफ' बढ़ा सकता है, जिससे व्यापारिक रिश्ते और बिगड़ सकते हैं।
🥂 'भगोड़ों' का जश्न और कानून की सख्ती: माल्या-मोदी का वायरल वीडियो और बॉम्बे हाईकोर्ट का कड़ा रुख 1. 📱 "इंटरनेट हिला दूंगा": ललित मोदी का विवादित पोस्ट 22 दिसंबर को आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो साझा किया। यह वीडियो शराब कारोबारी विजय माल्या के जन्मदिन के जश्न का है। वीडियो में क्या है? वीडियो में ललित मोदी मुस्कुराते हुए खुद को और माल्या को "भारत के दो सबसे बड़े भगोड़े" कहकर संबोधित कर रहे हैं। माल्या अपनी पार्टनर पिंकी लालवानी के साथ इस तंज पर हंसते और जश्न मनाते दिख रहे हैं। मीडिया को चुनौती: ललित मोदी ने कैप्शन में लिखा, "चलो, फिर से इंटरनेट हिला देता हूं, खासकर मीडिया वालों के लिए। जलन के साथ देखते रहिए।" यह पोस्ट भारतीय कानून और जांच एजेंसियों के प्रति उनकी बेखौफ मानसिकता को दर्शाती है। 2. ⚖️ बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार: "भारत कब लौटेंगे माल्या?" वीडियो वायरल होने के अगले ही दिन, 23 दिसंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में विजय माल्या की उस याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें उन्होंने खुद को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' (FEO) घोषित किए जाने के आदेश को चुनौती दी है। अदालत का सवाल: चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने सीधा सवाल किया—"माल्या भारत कब लौटेंगे?" कानूनी स्थिति: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चूंकि माल्या वर्तमान में भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और देश से भागे हुए हैं, इसलिए उनकी याचिका पर तब तक सुनवाई नहीं हो सकती जब तक वे आत्मसमर्पण नहीं करते। ED की दलील: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडी की ओर से कहा कि कोई भी व्यक्ति विदेश में बैठकर भारतीय कानून को चुनौती नहीं दे सकता। माल्या का प्रत्यर्पण (Extradition) अब अंतिम चरण में है। 3. 🏏 ललित मोदी: IPL के 'पोस्टर बॉय' से 'भगोड़े' तक का सफर ललित मोदी का भारत से भागना और आईपीएल में भ्रष्टाचार के आरोपों की कहानी बेहद लंबी है: भ्रष्टाचार के आरोप: 2008 में आईपीएल शुरू करने वाले मोदी पर 2010 में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे। आरोप था कि उन्होंने वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप को 425 करोड़ का ठेका दिलाने के बदले 125 करोड़ रुपए का कमीशन लिया। पलायन: 2010 में बीसीसीआई द्वारा सस्पेंड किए जाने के बाद, अंडरवर्ल्ड की धमकियों का बहाना बनाकर ललित मोदी लंदन भाग गए। ईडी ने उनके खिलाफ 'ब्लू कॉर्नर' नोटिस जारी किया और उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया। 4. 🍺 विजय माल्या: 'किंग ऑफ गुड टाइम्स' की कंगाली विजय माल्या पर भारतीय बैंकों का लगभग 9,000 करोड़ रुपए से अधिक का बकाया है। देश छोड़ा: माल्या मार्च 2016 में भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए थे। भगोड़ा घोषित: 2019 में उन्हें 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' के तहत आधिकारिक रूप से भगोड़ा घोषित किया गया था। हालांकि उनके वकील का दावा है कि बैंकों की देनदारी वसूली जा चुकी है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में पेश हुए बिना खत्म नहीं होती।
🗳️ मतदाता सूची का 'महा-शुद्धिकरण': मध्य प्रदेश से 42 लाख, तमिलनाडु से 97 लाख नाम बाहर; चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन 1. 📍 मध्य प्रदेश: 42.74 लाख नाम कटे, 8.40 लाख 'अनमैप्ड' मध्य प्रदेश में पिछले डेढ़ महीने से चले घर-घर सत्यापन (SIR) अभियान के बाद जारी ड्राफ्ट लिस्ट चौंकाने वाली है: नाम हटाए जाने के आंकड़े: कुल 42,74,160 नाम हटाए गए हैं। इनमें 19.19 लाख पुरुष और 23.64 लाख महिलाएं शामिल हैं। अनमैप्ड वोटर: लगभग 8.40 लाख नाम ऐसे हैं जिनकी तकनीकी मैपिंग नहीं हो पाई है। आयोग इन्हें 'नोटिस' जारी करेगा और सत्यापन न होने पर इन्हें भी हटाया जा सकता है। कारण: ये वे मतदाता हैं जो या तो मृत हो चुके हैं, स्थाई रूप से जगह छोड़ चुके हैं (Shifted) या जिनके नाम दो जगह दर्ज थे (Duplicate)। 2. 🌴 केरल: चुनाव से पहले 25 लाख नामों पर 'कैंची' केरल में 2026 के विधानसभा चुनाव और 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों से पहले बड़ी सफाई हुई है: डिजिटलीकरण: राज्य में मतदाता सूची का 99% से अधिक डिजिटलीकरण पूरा हो गया है। संभावित कटौती: लगभग 25 लाख नाम हटाए जा सकते हैं। इनमें से 6.44 लाख मृतक और 8.19 लाख शिफ्टेड मतदाता बताए जा रहे हैं। विपक्षी दलों ने इस बड़ी संख्या पर चिंता जताई है और समय सीमा बढ़ाने की मांग की है। 3. 📉 राष्ट्रीय स्तर पर सफाई: 2.70 करोड़ से ज्यादा नाम हटे चुनाव आयोग अब तक 10 से ज्यादा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट लिस्ट जारी कर चुका है। तमिलनाडु: सबसे ज्यादा 97 लाख नाम हटाए गए। गुजरात: 73.7 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर। पश्चिम बंगाल: 58 लाख नाम हटाए गए, जहाँ अब 27 दिसंबर से 'अनमैप्ड' वोटर्स की सुनवाई शुरू होगी। राजस्थान: लगभग 42 लाख नामों की कटौती। छत्तीसगढ़ और अन्य: छत्तीसगढ़ और अंडमान-निकोबार की लिस्ट भी आज (मंगलवार) जारी कर दी गई है। 4. ⚖️ 'दावा और आपत्ति': सुधार का एक और मौका चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह केवल 'ड्राफ्ट लिस्ट' है, अंतिम सूची नहीं। समय सीमा: मतदाता 15 जनवरी 2026 तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। प्रक्रिया: यदि किसी का नाम गलती से कट गया है, तो वह Form 6 भरकर दोबारा जुड़वा सकता है। सुनवाई: चुनाव पंजीकरण अधिकारी (ERO) बिना सुनवाई के किसी का नाम स्थाई रूप से नहीं हटाएंगे। दस्तावेजों के मिलान न होने पर पहले नोटिस जारी किया जाएगा। 5. 🛠️ SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या है? यह चुनाव आयोग का एक विशेष अभियान है जिसका उद्देश्य शहरीकरण, पलायन और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण दूषित हुई वोटर लिस्ट को साफ करना है। इस बार आयोग ने 2002-03 के ऐतिहासिक डेटा से मिलान (Legacy Linkage) कर फर्जी मतदाताओं और घुसपैठियों की पहचान पर जोर दिया है।
राहुल गांधी का बर्लिन संबोधन: 'संविधान पर संकट और चीन की मैन्युफैक्चरिंग' पर घेरी सरकार; बीजेपी बोली- 'लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' 1. ⚖️ संविधान और संस्थागत कब्जे का आरोप राहुल गांधी ने बर्लिन में वैश्विक मंच से आरोप लगाया कि बीजेपी भारत के संविधान की मूल भावना को खत्म करने की साजिश रच रही है। समानता का विचार: राहुल के मुताबिक, बीजेपी राज्यों, भाषाओं और धर्मों की समानता के विचार को कुचलना चाहती है। संस्थाओं पर कब्जा: उन्होंने दावा किया कि CBI, ED और चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्थाओं पर अब बीजेपी का पूर्ण नियंत्रण है, जिसका इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए एक राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। 2. 🗳️ चुनावी निष्पक्षता पर सवाल: हरियाणा और महाराष्ट्र का जिक्र राहुल गांधी ने जर्मनी में भारत की चुनाव प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए। हरियाणा चुनाव: उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हरियाणा चुनाव जीता था, लेकिन नतीजों में हेरफेर हुई। उन्होंने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि एक 'ब्राजीलियाई महिला' का नाम हरियाणा की वोटर लिस्ट में होने के सवाल पर आयोग ने चुप्पी साधे रखी। महाराष्ट्र चुनाव: राहुल ने महाराष्ट्र के चुनावों को भी निष्पक्ष नहीं माना और कहा कि भारत में अब लोकतांत्रिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पा रही हैं। 3. 🏭 रोजगार और चीन का बढ़ता प्रभाव राहुल गांधी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार के संकट पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। चीन की मैन्युफैक्चरिंग: राहुल ने कहा कि आज दुनिया के उत्पादन (Manufacturing) पर चीन का कब्जा है। भारत, अमेरिका और जर्मनी जैसे देश सिर्फ सर्विस सेक्टर के भरोसे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा नहीं कर सकते। अडानी-अंबानी और GST: उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने अडानी और अंबानी जैसे चुनिंदा बिजनेस ग्रुप्स पर ध्यान केंद्रित कर मैन्युफैक्चरिंग को रोक दिया है। नोटबंदी और GST जैसी नीतियों ने छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) की कमर तोड़ दी है। 4. ⚔️ विचारधाराओं का संघर्ष: RSS बनाम संविधान राहुल ने भारत के वर्तमान राजनीतिक हालात को 'दो दृष्टिकोणों का संघर्ष' बताया। सशक्त नेता बनाम संवाद: एक तरफ बीजेपी और RSS का नजरिया है जो एक सशक्त नेता के शासन में विश्वास करता है, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस का नजरिया है जो बातचीत, विविधता और 'राज्यों के संघ' (Union of States) के संवैधानिक मूल्य में विश्वास करता है। सच्चाई बनाम शक्ति: राहुल ने मोहन भागवत पर तंज कसते हुए कहा कि RSS के लिए सच्चाई का महत्व नहीं, बल्कि केवल 'शक्ति' ही सर्वोपरि है। 5. 🚩 बीजेपी का तीखा पलटवार: "भारत को बदनाम कर रहे राहुल" बीजेपी ने राहुल गांधी के इन बयानों को 'राष्ट्रविरोधी' करार दिया है। लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा: बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि राहुल गांधी विदेशी धरती पर जाकर भारत को बदनाम करते हैं और चीन की प्रशंसा करते हैं। वे अब 'लीडर ऑफ अपोजिशन' नहीं बल्कि 'लीडर ऑफ प्रोपेगेंडा' बन गए हैं। अराजकता का आरोप: बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने कहा कि राहुल गांधी भारत की असफलता की बात कर देश में अशांति और अराजकता फैलाना चाहते हैं।
भारत-बांग्लादेश तनाव: हिंदू युवक की हत्या पर VHP का देशव्यापी गर्जना; कूटनीतिक युद्ध और वीजा सेवाएं सस्पेंड 1. 🚨 दीपू चंद्र दास की हत्या: एक 'फेक नैरेटिव' का खूनी अंजाम बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में 18 दिसंबर की रात 27 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी और उसके शव को आग के हवाले कर दिया। झूठा आरोप: शुरुआती तौर पर दावा किया गया कि दीपू ने फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी। जांच का खुलासा: जांच में इस दावे का कोई सबूत नहीं मिला, जिससे यह साफ हो गया कि यह एक सुनियोजित 'मॉब लिंचिंग' थी। इस घटना ने भारत सहित दुनिया भर में हिंदुओं के प्रति बढ़ती हिंसा पर आक्रोश पैदा कर दिया है। 2. 🔥 VHP का देशव्यापी प्रदर्शन: दिल्ली से कोलकाता तक उबाल दीपू चंद्र दास को न्याय दिलाने और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया है। घेराव: दिल्ली में चाणक्यपुरी स्थित बांग्लादेश उच्चायोग के बाहर भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। रैलियां: मुंबई, कोलकाता, अहमदाबाद, भोपाल और जम्मू जैसे शहरों में विरोध मार्च निकाले गए। अहमदाबाद में पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, वहीं भोपाल में बजरंग दल ने 'यूनुस सरकार' का पुतला फूंका। 3. ⚖️ कूटनीतिक टकराव: 10 दिन में दूसरी बार तलब हुए प्रणय वर्मा बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को तलब किया। सुरक्षा पर चिंता: बांग्लादेश ने नई दिल्ली और सिलीगुड़ी में अपने राजनयिक मिशनों पर हुए प्रदर्शनों और तोड़फोड़ (22 दिसंबर) को 'अस्वीकार्य' बताया। वीजा सेवाएं निलंबित: सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश ने दिल्ली और सिलीगुड़ी में वीजा जारी करना अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिससे आम लोगों की आवाजाही पर बुरा असर पड़ा है। शेख हसीना फैक्टर: बांग्लादेश ने एक बार फिर भारत में रह रहीं पूर्व पीएम शेख हसीना के 'भड़काऊ बयानों' पर आपत्ति जताई है और भारत सरकार से उन्हें रोकने की मांग की है। 4. 📉 तनाव का टाइमलाइन: 14 दिसंबर से 23 दिसंबर तक 14 दिसंबर: शेख हसीना के बयानों पर भारतीय उच्चायुक्त को पहली बार तलब किया गया। 18 दिसंबर: दीपू चंद्र दास की नृशंस हत्या। 20 दिसंबर: भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों पर हमले पर गहरी चिंता जताई। 22 दिसंबर: सिलीगुड़ी वीजा सेंटर में तोड़फोड़ और बांग्लादेश द्वारा वीजा सेवाएं रोकना। 23 दिसंबर: VHP का बड़ा प्रदर्शन और भारतीय उच्चायुक्त को दोबारा तलब किया जाना।
सेना में भ्रष्टाचार पर CBI का स्ट्राइक: लेफ्टिनेंट कर्नल गिरफ्तार, घर से मिला 2.36 करोड़ कैश; पत्नी पर भी FIR 1. 🚨 गिरफ्तारी और मुख्य आरोपी शनिवार को CBI ने रक्षा मंत्रालय के उत्पादन विभाग (Department of Defence Production) में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को गिरफ्तार किया। उन पर बेंगलुरु की एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले 3 लाख रुपए की रिश्वत लेने का ठोस आरोप है। बिचौलिये की भूमिका: इस सौदेबाजी में विनोद कुमार नाम के एक बिचौलिये को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसने कंपनी की ओर से रिश्वत की रकम अधिकारी तक पहुंचाई थी। CBI रिमांड: अदालत ने दोनों आरोपियों को 23 दिसंबर तक CBI की हिरासत में भेज दिया है, ताकि इस नेक्सस की गहराई से जांच की जा सके। 2. 💰 नोटों का अंबार: छापेमारी में करोड़ों की बरामदगी CBI की छापेमारी के दौरान जो आंकड़े सामने आए, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। दिल्ली निवास: लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा के दिल्ली स्थित आवास से 2.23 करोड़ रुपए नकद बरामद किए गए। इसके अलावा रिश्वत के 3 लाख रुपए भी मिले। राजस्थान कनेक्शन: दीपक शर्मा की पत्नी, कर्नल काजल बाली, जो राजस्थान के श्रीगंगानगर में 'डिवीजन ऑर्डनेंस यूनिट' (DOU) की कमांडिंग ऑफिसर हैं, उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। उनके आवास से 10 लाख रुपए नकद जब्त किए गए हैं। कुल बरामदगी: अब तक की तलाशी में लगभग 2.36 करोड़ रुपए और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हो चुके हैं। 3. 🔍 भ्रष्टाचार का मोडस ऑपरेंडी (तरीका) CBI के अनुसार, यह खेल रक्षा उत्पादों के निर्माण और निर्यात से जुड़ा था। साजिश: लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा निजी कंपनियों के साथ मिलकर उन्हें रक्षा मंत्रालय के टेंडर या निर्यात प्रक्रियाओं में अवैध फायदा पहुंचाने की साजिश रचते थे। दुबई कनेक्शन: जांच में सामने आया है कि जिस कंपनी ने रिश्वत दी, वह मूल रूप से दुबई की है। भारत में इसका कामकाज राजीव यादव और रवजीत सिंह नाम के व्यक्ति देख रहे थे, जो लगातार शर्मा के संपर्क में थे। 4. 🛡️ रक्षा मंत्रालय का रुख: 'जीरो टॉलरेंस' इस गिरफ्तारी के बाद रक्षा मंत्रालय ने कड़ा संदेश जारी किया है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई भारत सरकार की 'भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए सेना में कोई जगह नहीं है और कानून अपना काम पूरी सख्ती से करेगा। 5. 📍 देशव्यापी छापेमारी CBI ने इस मामले में दिल्ली, श्रीगंगानगर (राजस्थान), बेंगलुरु और जम्मू सहित कई शहरों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। सेना के इन अधिकारियों के कार्यालयों और ठिकानों पर अभी भी जांच जारी है, जिससे और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ