वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 21 मार्च 2026
ईरान-इजराइल जंग के 22वें दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'ऑयल शॉक' से बचाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक दांव खेला है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर लगे कड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अस्थायी छूट (Sextions Waiver) देने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल को छूने लगी थीं।
यहाँ इस ऐतिहासिक फैसले, इसके पीछे की रणनीति और भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ने वाले असर की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट द्वारा घोषित यह छूट एक विशेष श्रेणी के लिए है:
समय सीमा: यह छूट 20 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी।
शर्त: यह छूट केवल उन तेल टैंकरों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद (In-transit) हैं। नया तेल लोड करने की अनुमति फिलहाल नहीं दी गई है।
उद्देश्य: ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाकर बेकाबू होती कीमतों को नीचे लाना।
ट्रम्प प्रशासन ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि रूस के प्रति भी लचीला रुख अपनाया है:
नया जनरल लाइसेंस: उन रूसी टैंकरों को तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे।
वैधता: यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी।
अपवाद: अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया जैसे क्षेत्रों को इस व्यापारिक छूट से बाहर रखा गया है।
जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल $70 के आसपास था, जो अब $112-$114 पर बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह दुनिया की 'ऊर्जा गर्दन' यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है।
20% पेट्रोलियम का रास्ता: दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल इसी 167 किमी लंबे जलमार्ग से गुजरता है।
भारत का संकट: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। युद्ध के कारण टैंकरों ने इस रूट का इस्तेमाल बंद कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन ठप हो गई है।
प्रश्न 1: अमेरिका ने अचानक प्रतिबंधों में ढील क्यों दी?
उत्तर: युद्ध के तीन हफ्तों ने ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान को तबाह करने की कीमत अमेरिकी और वैश्विक जनता महंगाई के रूप में चुकाए।
प्रश्न 2: क्या यह ईरान के प्रति नरम रुख है?
उत्तर: नहीं। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह "ईरान के खिलाफ ईरानी बैरल" का इस्तेमाल करने की रणनीति है। अमेरिका चाहता है कि यह तेल चीन को ब्लैक मार्केट में सस्ते दाम पर मिलने के बजाय वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगियों को मिले ताकि बाजार संतुलित रहे।
प्रश्न 3: 14 करोड़ बैरल तेल क्या दुनिया के लिए काफी है?
उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की केवल डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यह एक 'बैंड-एड' (अस्थायी मरहम) जैसा है। इसके खत्म होने के बाद अमेरिका को या तो होर्मुज खुलवाना होगा या प्रतिबंध पूरी तरह हटाने पड़ेंगे।
डोनाल्ड ट्रम्प का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' केवल मिसाइलें दागने तक सीमित नहीं है।
सैन्य चोट: अमेरिका ने 100 घंटों में ईरान के 2,000 ठिकाने और 17 जहाज तबाह किए हैं।
आर्थिक ढाल: ट्रम्प चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था न चरमराए। इसीलिए तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अनिवार्य हिस्सा है।
| वर्ष | घटना | प्रभाव |
| 1979 | अमेरिकी दूतावास संकट | पहली बार कड़े प्रतिबंध लगाए गए। |
| 2015 | परमाणु समझौता (JCPOA) | ओबामा प्रशासन ने तेल निर्यात से पाबंदियां हटाईं। |
| 2018 | ट्रम्प का बाहर निकलना | ईरान की तेल कमाई 'जीरो' करने के लिए कड़े बैन लगाए। |
| 2026 | ईरान-इजराइल युद्ध | ऊर्जा संकट टालने के लिए 30 दिन का 'सेंक्शंस वेवर'। |
भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है।
कीमतों में स्थिरता: ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल आने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित ₹10-15 की बढ़ोत्तरी रुक सकती है।
सप्लाई सुरक्षा: भारतीय रिफाइनरियां अब उन टैंकरों को क्लीयरेंस दे सकेंगी जो समुद्र में फंसे हुए थे।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
ट्रम्प प्रशासन का बड़ा फैसला: ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट; $110 के पार पहुँचे क्रूड को काबू करने की कोशिश, भारत को मिलेगी राहत? वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 21 मार्च 2026 ईरान-इजराइल जंग के 22वें दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'ऑयल शॉक' से बचाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक दांव खेला है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर लगे कड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अस्थायी छूट (Sextions Waiver) देने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल को छूने लगी थीं। यहाँ इस ऐतिहासिक फैसले, इसके पीछे की रणनीति और भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ने वाले असर की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. क्या है अमेरिकी ट्रेजरी का 'सेंक्शंस वेवर'? अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट द्वारा घोषित यह छूट एक विशेष श्रेणी के लिए है: समय सीमा: यह छूट 20 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। शर्त: यह छूट केवल उन तेल टैंकरों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद (In-transit) हैं। नया तेल लोड करने की अनुमति फिलहाल नहीं दी गई है। उद्देश्य: ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाकर बेकाबू होती कीमतों को नीचे लाना। 2. रूसी तेल पर भी दूसरी बार हटी पाबंदी ट्रम्प प्रशासन ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि रूस के प्रति भी लचीला रुख अपनाया है: नया जनरल लाइसेंस: उन रूसी टैंकरों को तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। वैधता: यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। अपवाद: अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया जैसे क्षेत्रों को इस व्यापारिक छूट से बाहर रखा गया है। 3. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी और महंगाई का गणित जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल $70 के आसपास था, जो अब $112-$114 पर बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह दुनिया की 'ऊर्जा गर्दन' यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। 20% पेट्रोलियम का रास्ता: दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल इसी 167 किमी लंबे जलमार्ग से गुजरता है। भारत का संकट: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। युद्ध के कारण टैंकरों ने इस रूट का इस्तेमाल बंद कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन ठप हो गई है। 🔍 सवाल-जवाब: फैसले की गहराई और भविष्य के संकेत प्रश्न 1: अमेरिका ने अचानक प्रतिबंधों में ढील क्यों दी? उत्तर: युद्ध के तीन हफ्तों ने ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान को तबाह करने की कीमत अमेरिकी और वैश्विक जनता महंगाई के रूप में चुकाए। प्रश्न 2: क्या यह ईरान के प्रति नरम रुख है? उत्तर: नहीं। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह "ईरान के खिलाफ ईरानी बैरल" का इस्तेमाल करने की रणनीति है। अमेरिका चाहता है कि यह तेल चीन को ब्लैक मार्केट में सस्ते दाम पर मिलने के बजाय वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगियों को मिले ताकि बाजार संतुलित रहे। प्रश्न 3: 14 करोड़ बैरल तेल क्या दुनिया के लिए काफी है? उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की केवल डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यह एक 'बैंड-एड' (अस्थायी मरहम) जैसा है। इसके खत्म होने के बाद अमेरिका को या तो होर्मुज खुलवाना होगा या प्रतिबंध पूरी तरह हटाने पड़ेंगे। 4. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और तेल का खेल डोनाल्ड ट्रम्प का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' केवल मिसाइलें दागने तक सीमित नहीं है। सैन्य चोट: अमेरिका ने 100 घंटों में ईरान के 2,000 ठिकाने और 17 जहाज तबाह किए हैं। आर्थिक ढाल: ट्रम्प चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था न चरमराए। इसीलिए तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अनिवार्य हिस्सा है। 📊 ईरान पर प्रतिबंधों का इतिहास: 1979 से 2026 तक वर्ष घटना प्रभाव 1979 अमेरिकी दूतावास संकट पहली बार कड़े प्रतिबंध लगाए गए। 2015 परमाणु समझौता (JCPOA) ओबामा प्रशासन ने तेल निर्यात से पाबंदियां हटाईं। 2018 ट्रम्प का बाहर निकलना ईरान की तेल कमाई 'जीरो' करने के लिए कड़े बैन लगाए। 2026 ईरान-इजराइल युद्ध ऊर्जा संकट टालने के लिए 30 दिन का 'सेंक्शंस वेवर'। 🇮🇳 भारत पर असर: राहत की उम्मीद भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। कीमतों में स्थिरता: ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल आने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित ₹10-15 की बढ़ोत्तरी रुक सकती है। सप्लाई सुरक्षा: भारतीय रिफाइनरियां अब उन टैंकरों को क्लीयरेंस दे सकेंगी जो समुद्र में फंसे हुए थे।
LPG संकट में बड़ी राहत: 5 दिन बाद कमर्शियल सिलेंडर पर रोक हटी; कचरे से बने ईंधन का होगा इस्तेमाल, कालाबाजारी पर देशव्यापी सर्जिकल स्ट्राइक नई दिल्ली | 15 मार्च 2026 मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण भारत में उपजे ऊर्जा आपातकाल के बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। पिछले 5 दिनों से कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की सप्लाई पर लगी रोक को शनिवार को तत्काल प्रभाव से हटा लिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल सिलेंडरों का वितरण फिर से शुरू हो गया है। हालांकि, यह राहत कड़ी शर्तों और निगरानी के साथ आई है। एक ओर जहां सप्लाई बहाल हुई है, वहीं दूसरी ओर घरेलू सिलेंडरों के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाते हुए देशभर में छापेमारी तेज कर दी है। यहाँ गैस संकट की वर्तमान स्थिति और सरकार के कदमों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. कमर्शियल सिलेंडर: रोक हटी, पर 'विकल्प' की तलाश जारी सरकार ने 9 मार्च को कमर्शियल सप्लाई इसलिए रोकी थी ताकि घरेलू उपभोक्ताओं (रसोई गैस) को प्राथमिकता दी जा सके। अब स्थिति को संतुलित करने के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं: RDF पेलेट्स का इस्तेमाल: पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने एक क्रांतिकारी घोषणा की। अब दिल्ली-NCR के होटलों, रेस्टोरेंट्स और उद्योगों को नेचुरल गैस की जगह 'कचरे से बनी गैस' (RDF पेलेट्स) के इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है। क्या है RDF? रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (Refuse-Derived Fuel) असल में प्लास्टिक, कागज और लकड़ी जैसे सूखे कचरे को प्रोसेस करके बनाई गई छोटी गोलियां (पेलेट्स) होती हैं। यह कोयले और गैस का सस्ता व प्रदूषण मुक्त विकल्प है। 2. कालाबाजारी पर 'हथौड़ा': राज्यों की एक्शन रिपोर्ट सप्लाई की कमी का फायदा उठाने वाले जमाखोरों के खिलाफ शनिवार को देशभर में बड़ी कार्रवाई हुई: उत्तर प्रदेश: यूपी में प्रशासन ने 1400 ठिकानों पर सरप्राइज चेकिंग की। इस दौरान 20 एफआईआर दर्ज की गईं और 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। कर्नाटक: यहां खाद्य विभाग ने एक ही दिन में 316 घरेलू सिलेंडर जब्त किए, जिनका इस्तेमाल अवैध रूप से कमर्शियल कामों के लिए हो रहा था। बेंगलुरु और दावणगेरे में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई। ऑयल कंपनियों की जांच: सरकारी तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने देशभर में अपने 1300 डिस्ट्रीब्यूटरों की औचक जांच की है ताकि वितरण में पारदर्शिता बनी रहे। 📊 राज्यों में LPG संकट का जमीनी हाल राज्य स्थिति मुख्य प्रभाव छत्तीसगढ़ गंभीर किल्लत होटलों में 10% सरचार्ज; लकड़ी के चूल्हों पर बन रहा खाना। उत्तर प्रदेश पैनिक और एक्शन फर्रुखाबाद में लाइन में लगे बुजुर्ग की मौत; भारी पुलिस बल तैनात। दिल्ली-NCR वैकल्पिक ईंधन होटलों को RDF पेलेट्स (कचरे का ईंधन) इस्तेमाल करने का आदेश। गुजरात राहत की उम्मीद 92,700 टन गैस लेकर दो जहाज मुंद्रा और कांडला पोर्ट पहुँच रहे हैं। 3. मानवीय त्रासदी: लाइन में लगा आम आदमी गैस की किल्लत अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहाँ 76 वर्षीय मोहम्मद मुख्तियार शुक्रवार सुबह 6:30 बजे से गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लगे थे। घंटों खड़े रहने के बाद अचानक उन्हें हार्टअटैक आया और मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना दर्शाती है कि गैस के लिए मची अफरातफरी किस हद तक बढ़ चुकी है। 4. रेस्टोरेंट्स का 'देसी जुगाड़' और सरचार्ज छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में गैस की कमी ने होटल उद्योग की कमर तोड़ दी है: लकड़ी के चूल्हे: रायपुर और जगदलपुर जैसे शहरों में बड़े होटलों के बाहर लकड़ी के चूल्हे दहक रहे हैं। मेन्यू में कटौती: कई ढाबों और रेस्टोरेंट्स ने उन व्यंजनों को मेन्यू से हटा दिया है जिन्हें बनाने में ज्यादा गैस लगती है। महंगाई: होटल संचालकों ने परिचालन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए बिल पर 10% अतिरिक्त सरचार्ज वसूलना शुरू कर दिया है। 5. राहत की किरण: समुद्र से आ रही है 'संजीवनी' शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने पुष्टि की है कि भारतीय जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रैट पार कर चुके हैं। 16-17 मार्च का इंतजार: ये जहाज करीब 1 लाख टन गैस लेकर आ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन जहाजों के लंगर डालते ही बाजारों में सिलेंडरों की किल्लत में 30% तक की कमी आएगी।
लोकसभा में ऐतिहासिक टकराव: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश; विपक्ष का 'पक्षपात' का आरोप बनाम सरकार का 'भागने' का पलटवार नई दिल्ली | 10 मार्च 2026 भारतीय संसदीय इतिहास में आज एक दुर्लभ और गहमागहमी भरा दिन रहा। लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पेश किया। सदन में 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद पीठासीन अधिकारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिस पर अब 10 घंटे की मैराथन चर्चा होगी। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही के दौरान सत्तापक्ष का साथ देने और विपक्षी आवाजों को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष के व्यवहार पर ही सवाल खड़े किए हैं। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और सदन में हुई तीखी बहस की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. अविश्वास प्रस्ताव: गौरव गोगोई के 3 बड़े प्रहार प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीन प्रमुख बिंदु रखे: भेदभाव का आरोप: गोगोई ने कहा, "बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 20 बार टोका गया। जब उन्होंने एक लेख का हवाला दिया तो उन्हें रोक दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सांसद सदन में प्रतिबंधित किताबें दिखा रहे थे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।" माइक बंद करने की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि 9 फरवरी को शशि थरूर का माइक बंद कर दिया गया। जब माइक ही ऑफ हो, तो कोई सदस्य अपनी बात कैसे रख सकता है? यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। महिला सांसदों का अपमान: गोगोई ने ओम बिरला के उस पुराने बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि महिला सांसदों ने पीएम की चेयर घेर ली थी और उनके साथ "कुछ भी हो सकता था।" गोगोई ने इसे बेहद शर्मनाक और महिला सांसदों की गरिमा के खिलाफ बताया। 2. किरेन रिजिजू का पलटवार: "राहुल गांधी सदन से भाग जाते हैं" संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखे व्यक्तिगत हमले किए: उपस्थिति पर सवाल: रिजिजू ने कहा कि जब सदन का महत्वपूर्ण सत्र चल रहा होता है, तब नेता प्रतिपक्ष विदेश चले जाते हैं। वे अपनी बात कहकर सदन से भाग जाते हैं और दूसरों को नहीं सुनते। मर्यादा का उल्लंघन: उन्होंने राहुल गांधी के पुराने व्यवहार (पीएम को गले लगाना और आंख मारना) का जिक्र करते हुए कहा कि जब नेता ऐसा होगा, तो बाकी सांसदों से क्या उम्मीद की जाए? उन्होंने के.सी. वेणुगोपाल द्वारा चेयर को 'यार' कहने पर भी आपत्ति जताई। प्रियंका गांधी का जिक्र: रिजिजू ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर प्रियंका गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता, तो शायद सदन में कुछ अच्छा व्यवहार देखने को मिलता। 3. प्रियंका गांधी का तीखा जवाब: "सच्चाई पचती नहीं है" सदन में पहली बार आक्रामक अंदाज में दिख रही प्रियंका गांधी ने अपने भाई और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बचाव किया: निडर नेतृत्व: प्रियंका ने कहा, "इस देश में एक ही व्यक्ति है जो पिछले 12 सालों में इनके (बीजेपी) सामने झुका नहीं है। वह नेता प्रतिपक्ष है।" सच का सामना: उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन में खड़ होकर सत्तापक्ष के सामने जो सच बोलते हैं, वह इनसे पचता नहीं है, इसलिए वे उन पर निजी हमले करते हैं। 📊 सदन का समीकरण: अविश्वास प्रस्ताव मुख्य बिंदु विवरण प्रस्तावक विपक्ष (गौरव गोगोई द्वारा शुरुआत) समर्थन 50 से अधिक सांसद (अनिवार्य संख्या) मुख्य आरोप पक्षपात, माइक बंद करना, विपक्ष को बोलने न देना। चर्चा का समय 10 घंटे आवंटित सरकार का तर्क विपक्ष चर्चा से भागता है और स्पीकर का अपमान करता है। Export to Sheets 4. बहस के मुख्य मुद्दे: माइक, रूलिंग बुक और गरिमा सदन में बहस के दौरान कई ऐसे मुद्दे उठे जो पिछले कुछ समय से विवाद का केंद्र रहे हैं: माइक ऑफ विवाद: विपक्ष का दावा है कि जब भी संवेदनशील मुद्दे (जैसे अडानी या बेरोजगारी) उठाए जाते हैं, तो रणनीतिक रूप से माइक बंद कर दिया जाता है। पक्षपात: विपक्ष का कहना है कि स्पीकर सत्तापक्ष के मंत्रियों को बिना रोक-टोक बोलने देते हैं, लेकिन विपक्ष के सदस्यों को हर वाक्य पर 'रूल बुक' (नियमों की किताब) दिखाई जाती है। संसदीय भाषा: सत्तापक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद चेयर के प्रति सम्मान नहीं रखते और असंसदीय भाषा का उपयोग करते हैं।