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अमेरिकी दावा: पाकिस्तान को बढ़त, चीन ने युद्ध में हथियार टेस्ट किए

रवि चौहान नवम्बर 20, 2025 0
ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर

अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: मई 2025 में भारत–पाकिस्तान के चार दिन के संघर्ष में पाकिस्तान को मिली बढ़त; चीन पर लगा लाइव-वॉर में हथियार टेस्ट करने का आरोप

 

अमेरिका की एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए चार दिन के सीमित सैन्य संघर्ष—जिसे पाकिस्तान ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ कहा—को लेकर बड़े दावे किए हैं। यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) की इस 800 पन्नों की रिपोर्ट में न केवल इस लड़ाई के घटनाक्रम पर सवाल उठाए गए हैं, बल्कि यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने इसमें काफी सैन्य सफलता हासिल की, जबकि भारत के कई आधुनिक लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने इस संघर्ष का इस्तेमाल अपने आधुनिक हथियारों को असली युद्ध के मैदान में टेस्ट करने के अवसर के रूप में किया। इसी कारण भारत के कई रणनीतिक विशेषज्ञ इस रिपोर्ट को लेकर चिंता जता रहे हैं।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या भारत सरकार इस पर औपचारिक विरोध दर्ज कराएगी? उनके मुताबिक, इस तरह की रिपोर्ट भारत की कूटनीति के लिए एक और बड़ा झटका है और सरकार को तुरंत प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

 


रिपोर्ट में क्या दावा किया गया है

 

## 1. पाकिस्तान ने गिराए 6 भारतीय लड़ाकू विमान?

USCC की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने इस लड़ाई में भारत के कम से कम छह लड़ाकू विमान गिराए, जिनमें राफेल जैसे अत्याधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं।

हालांकि रिपोर्ट खुद यह भी लिखती है कि सबूतों और उपग्रह चित्रों के आधार पर केवल तीन भारतीय विमानों के गिराए जाने की पुष्टि होती है।

लेकिन पाकिस्तान के इस दावे ने राफेल की “अजेय छवि” को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस आधार पर कई अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक और मिलिट्री ऑब्ज़र्वर्स ने सवाल उठाए कि क्या पाकिस्तान के चीनी हथियार भारत के पश्चिमी हथियारों पर बढ़त रखते हैं।

 


2. पहलगाम अटैक को ‘आतंकी हमला’ नहीं माना गया

 

USCC की रिपोर्ट में एक और विवादास्पद दावा किया गया है—
कि मई 2025 में पहलगाम में हुआ हमला, जिसे भारत आतंकी हमला मानता है, वास्तव में “विद्रोही हमला” था।

यह शब्दावली भारत की आधिकारिक स्थिति के बिल्कुल विपरीत है। भारत दशकों से पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से लड़ रहा है। ऐसे में अमेरिकी संस्थान द्वारा एक बड़े हमले को ‘विद्रोह’ की श्रेणी में रखना भारतीय कूटनीति के लिए सवाल खड़े करता है।

 


चीन का रोल—रिपोर्ट में बड़े आरोप

 

USCC की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि इसमें चीन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

1. पाकिस्तान को आधुनिक चीनी हथियारों की सप्लाई

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान ने इस संघर्ष में चीन से मिले कई अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया—

  • HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम

  • PL-15 एडवांस्ड एयर-टू-एयर मिसाइलें

  • J-10C लड़ाकू विमान

इन हथियारों की रेंज, लॉक-ऑन क्षमता और ट्रैकिंग सिस्टम को लेकर पाकिस्तान ने संघर्ष के बाद खुले मंच पर तारीफ की थी।

रिपोर्ट का यह भी दावा है कि चीन ने लड़ाई के दौरान पाकिस्तान को इंटेलिजेंस सपोर्ट प्रदान किया।
भारत ने भी यह आरोप लगाया था, हालांकि पाकिस्तान ने इसे पूरी तरह नकार दिया और चीन ने इस पर कोई प्रत्यक्ष टिप्पणी नहीं की।

 


2. हथियारों का लाइव वॉर टेस्ट

 

रिपोर्ट के अनुसार इस युद्ध को चीन ने एक अवसर की तरह इस्तेमाल किया।
युद्ध खत्म होने के बाद दुनियाभर में चीनी दूतावासों ने एक अभियान चलाया और बताया कि कैसे उनके हथियार पाकिस्तान की मदद से भारतीय विमानों को गिराने में सक्षम रहे।

इसका असर यह हुआ कि युद्ध के सिर्फ पांच महीने बाद चीन ने इंडोनेशिया को 42 J-10C फाइटर जेट की डील 75 हजार करोड़ रुपए में फाइनल कर दी।

USCC के अनुसार यह इशारा है कि चीन ने युद्ध का सीधा-सीधा व्यावसायिक फायदा उठाया।

 


USCC क्या है और इसका काम क्या होता है?

 

1990 के दशक के अंत में अमेरिका में यह चिंता बढ़ रही थी कि चीन तेज़ी से आर्थिक, तकनीकी और सैन्य शक्ति बनता जा रहा है।
इसी चिंता के चलते अमेरिकी संसद ने US-China Economic and Security Review Commission (USCC) का गठन किया।

इस कमेटी का काम है—

  • चीन की विदेश नीति

  • चीन की टेक्नोलॉजी

  • चीन की सैन्य क्षमताओं

  • और अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव

का अध्ययन करना और हर साल एक विस्तृत रिपोर्ट अमेरिकी संसद को सौंपना

यह कमेटी खुद कोई कदम नहीं उठा सकती, लेकिन इसकी रिपोर्टें अमेरिकी नीति निर्माण पर असर डालती हैं।

 


रिपोर्ट पर चीन का जवाब—ग्लोबल टाइम्स का हमला

 

चीनी सरकार के मुखपत्र कहे जाने वाले अखबार ग्लोबल टाइम्स ने USCC की रिपोर्ट पर कड़ा हमला किया है।

अखबार का कहना है—

  • यह रिपोर्ट राजनीतिक मकसद से भरी हुई है।

  • इसमें चीन की तरक्की को ऐसे दिखाया गया है जैसे वह दुनिया के लिए खतरा हो।

  • USCC के भीतर चीन को लेकर भारी गलतफहमियां और अहंकार है।

ग्लोबल टाइम्स ने अमेरिका पर ही कई आरोप लगाए—

1. अमेरिका सप्लाई चेन का इस्तेमाल ‘हथियार’ की तरह करता है

अखबार के अनुसार—

  • चिप टेक्नोलॉजी पर रोक

  • मिलिट्री इक्विपमेंट पर प्रतिबंध

  • चीनी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने

  • और अपने सहयोगी देशों पर दबाव बनाने

जैसे कदम लेकर अमेरिका चीन को रोकने की कोशिश कर रहा है।

इसके मुकाबले चीन की प्रतिक्रिया “रक्षात्मक” बताई गई है।

 


भारत में राजनीतिक बहस

 

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस रिपोर्ट को लेकर कहा कि—

“क्या प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय इस रिपोर्ट का विरोध करेंगे?
क्या भारत सरकार इस गलत और पक्षपाती रिपोर्ट का जवाब देगी?
हमारी कूटनीति को एक और झटका लगा है।”

उनका संकेत यह था कि अगर कोई अंतरराष्ट्रीय संस्था भारत के खिलाफ ऐसा दावा कर रही है, तो सरकार को इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सरकार की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी गई है।

 


भारत–पाकिस्तान संघर्ष की पृष्ठभूमि (संक्षेप में)

 

मई 2025 में चार दिन तक चले इस संघर्ष की शुरुआत सीमा पर बढ़ते तनाव और कश्मीर में सुरक्षा घटनाओं के बाद हुई।
भारत ने कई सामरिक ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद पाकिस्तान ने पलटवार किया।

युद्ध सीमित था, लेकिन इसके दौरान दोनों देशों ने आधुनिक हथियारों का जमकर इस्तेमाल किया।

भारत ने अपने राफेल, सुखोई-30 और मिराज-2000 उड़ाए।
पाकिस्तान ने J-10C, F-16 और कई चीनी प्रणालियों का इस्तेमाल किया।

हालांकि भारत ने पाकिस्तान के कई ठिकानों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें इस संघर्ष के आंकड़ों को लेकर अब विवाद में घिर चुकी हैं।

 


निष्कर्ष

 

USCC की रिपोर्ट ने भारत, पाकिस्तान और चीन—तीनों देशों में राजनीतिक और कूटनीतिक बहस छेड़ दी है।

भारत के लिए यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि:

  • इसमें उसके लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन पर सवाल है

  • पहलगाम हमले को आतंकी हमला नहीं माना गया है

  • पाकिस्तान और चीन की साझेदारी को भारत के लिए रणनीतिक खतरे के रूप में पेश किया गया है

चीन इस रिपोर्ट को राजनीतिक प्रचार कहकर खारिज कर रहा है।
पाकिस्तान इस रिपोर्ट को अपनी सैन्य क्षमता के तौर पर दिखा रहा है।

अब सबकी निगाहें भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं।

क्या भारत औपचारिक विरोध दर्ज करेगा?
या इस रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ कर देगा—

इसी पर आने वाले दिनों की चर्चा निर्भर करेगी।

 

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ट्रम्प ग्रीनलैंड का फ्यूचर स्विट्जरलैंड में तय करेंगे
Trump's New Map: कनाडा और ग्रीनलैंड को दिखाया अमेरिका का हिस्सा; दावोस में नाटो चीफ संग इमरजेंसी बैठक; ग्रीनलैंड में सैन्य विमान तैनात।

ट्रम्प का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान: ग्रीनलैंड पर नाटो चीफ से फोन पर बात, दावोस में होगी इमरजेंसी बैठक; सोशल मीडिया पर शेयर किया ग्रीनलैंड-कनाडा-वेनेजुएला वाला 'नया नक्शा' वाशिंगटन/नुउक | 20 जनवरी 2026 दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को नाटो (NATO) चीफ मार्क रूट से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद ग्रीनलैंड मुद्दे को सुलझाने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादित नक्शा पोस्ट किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा दुनिया भर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 1. ट्रम्प और नाटो चीफ की 'दावोस डील' ट्रम्प ने मार्क रूट के साथ हुई बातचीत को 'अति प्रभावशाली' बताया। शांति के लिए ताकत: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है। उन्होंने कहा, "दुनिया में शांति केवल ताकत के जरिए ही आ सकती है, और अमेरिका सबसे ताकतवर है।" रूट का संदेश: ट्रम्प ने मार्क रूट का एक निजी संदेश साझा किया जिसमें रूट ने ट्रम्प की सीरिया और गाजा नीतियों की प्रशंसा की और ग्रीनलैंड मामले में 'रास्ता निकालने' की प्रतिबद्धता जताई। दावोस बैठक: ग्रीनलैंड के भविष्य और डेनमार्क के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए दावोस में अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की बैठक होगी। 2. ग्रीनलैंड में सैन्य टकराव की आहट: अमेरिका और डेनमार्क ने भेजे विमान कूटनीति के साथ-साथ जमीन पर सैन्य हलचल भी तेज हो गई है: अमेरिकी विमान: अमेरिका ने NORAD (North American Aerospace Defense Command) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) भेजा है। कमांड ने इसे 'नियमित रक्षा गतिविधि' बताया है। डेनमार्क का जवाब: डेनमार्क ने भी चुप बैठने के बजाय सोमवार को कई विमानों के जरिए अतिरिक्त सैनिक और भारी सैन्य उपकरण ग्रीनलैंड पहुंचाए। यूरोपीय मोर्चेबंदी: जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले ही 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत वहां अपने सैनिक भेज चुके हैं, जिसे ट्रम्प प्रशासन एक चुनौती के रूप में देख रहा है। 📊 ग्रीनलैंड का सैन्य ढांचा: वर्तमान तैनाती पक्ष यूनिट / बेस सैनिक संख्या मुख्य कार्य अमेरिका पिटुफिक स्पेस बेस (थुले) ~150-200 मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी। डेनमार्क जॉइंट आर्कटिक कमांड ~150-200 संप्रभुता रक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू। स्पेशल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल 12-14 कुत्तों की स्लेज से आर्कटिक गश्त। NATO (EU) आर्कटिक एंड्योरेंस ~40-50 राजनीतिक एकजुटता का संदेश। 3. 'ग्रेटर अमेरिका' मैप: कनाडा और वेनेजुएला पर नजर? ट्रम्प द्वारा साझा किए गए नक्शे ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विस्तारवाद: नक्शे में न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में रंगा गया है। कनाडा का रुख: कनाडा ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के चरम विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिका के तेल समृद्ध देश वेनेजुएला को अमेरिकी नक्शे में दिखाना ट्रम्प की ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। 4. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए 'गोल्ड माइन' क्यों है? ट्रम्प की इस जिद के पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) का भंडार है। वर्तमान में चीन इनका 90% उत्पादन नियंत्रित करता है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चीन की निर्भरता खत्म कर देगा। नई शिपिंग रूट्स: ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, जिससे आर्कटिक में नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं। अमेरिका इन रास्तों पर अपना प्रभुत्व चाहता है। मिसाइल डिफेंस: यह रूस और अमेरिका के बीच सबसे छोटा हवाई मार्ग है, जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। रणनीतिक घेराबंदी: यहाँ से अमेरिका रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर सीधी नजर रख सकता है। 5. कानूनी पेच: क्या ग्रीनलैंड को खरीदा जा सकता है? नाटो के नियमों के मुताबिक, यह प्रक्रिया लगभग असंभव है: Article 5 का उल्लंघन: अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सदस्य हैं। एक सदस्य दूसरे की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। जनमत संग्रह (Referendum): 2009 के 'सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट' के अनुसार, ग्रीनलैंड के लोग केवल जनमत संग्रह के जरिए ही स्वतंत्र हो सकते हैं या किसी अन्य देश के साथ जुड़ने का फैसला ले सकते हैं। डेनिश संसद की मंजूरी भी अनिवार्य है। 6. आर्थिक युद्ध: यूरोप का 'ट्रेड बाजूका' यूरोपीय संघ (EU) ने ट्रम्प के 10% टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रेड बाजूका: EU अपने 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' का इस्तेमाल कर अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने और 750 बिलियन डॉलर के ऊर्जा समझौते को रद्द करने की धमकी दे रहा है। 1 फरवरी की डेडलाइन: ट्रम्प का टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक संबंध अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुँच सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे

ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया 10% टैरिफ; जवाब में NATO ने तैनात किए सैनिक; ट्रेड वॉर की शुरुआत।

दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला

ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या

गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी
ट्रम्प की चेतावनी के बाद झुका ईरान, रुकी 800 लोगों की फांसी; अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध।

ईरान पर UNSC की आपात बैठक: अमेरिका की 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी; ट्रम्प के खौफ से 800 की फांसी रुकी; 180 घंटे से देश में 'डिजिटल ब्लैकआउट' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गुरुवार (15 जनवरी 2026) को ईरान संकट पर हुई आपात बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नरसंहार रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके पास 'सभी विकल्प' खुले हैं। 1. माइक वाल्ट्ज का अल्टीमेटम: "ट्रम्प एक्शन वाले इंसान हैं" UNSC में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान के शासन को आईना दिखाते हुए कहा कि दुनिया अब और खामोश नहीं रहेगी। बहादुरी को सलाम: वाल्ट्ज ने उन ईरानी प्रदर्शनकारियों की सराहना की जो गोलियों के सामने खड़े होकर आजादी मांग रहे हैं। सीधी चेतावनी: उन्होंने कहा कि ट्रम्प केवल बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं। ईरान को समझ लेना चाहिए कि अगर क्रूरता नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस का दावा: प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पुष्टि की कि ट्रम्प के सीधे दबाव के कारण ही ईरान ने अंतिम समय में 800 कैदियों की फांसी टाल दी है। 2. ईरान का पलटवार: "टकराव नहीं, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे" ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को 'झूठा' और 'दुष्प्रचार' बताया। इल्जाम: ईरान का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं जो अशांति फैलाकर 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना चाहती हैं। जवाबी हमला: दर्जी ने कहा कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 📊 ईरान संकट: UNSC की बैठक के मुख्य बिंदु और डेटा श्रेणी विवरण और आंकड़े मौत का तांडव मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए। गिरफ्तारियां अब तक 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद। नए प्रतिबंध अमेरिका ने अली लारीजानी समेत 18 व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया। डिजिटल ब्लैकआउट 8 जनवरी से अब तक 180+ घंटे से इंटरनेट बंद (कनेक्टिविटी महज 1%)। वैश्विक रुख अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस (निंदा) बनाम रूस, चीन (हस्तक्षेप का विरोध)। 3. रूस और पश्चिमी देशों के बीच 'कोल्ड वॉर' सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर दुनिया दो धड़ों में बंट गई है: रूस की आपत्ति: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आक्रामकता को सही ठहराने के लिए UNSC का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट खून-खराबे में डूब जाएगा। यूरोपीय देशों का रुख: ब्रिटेन और फ्रांस ने ईरान की कार्रवाई को "क्रूर दमन" बताया और तेहरान पर नए कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया। 4. 180 घंटे का सन्नाटा: ईरान में 'डिजिटल दीवार' ईरान में इंटरनेट की स्थिति को 'डिजिटल ब्लैकआउट' घोषित किया गया है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 9 करोड़ की आबादी को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उद्देश्य: सरकार नहीं चाहती कि सुरक्षा बलों की बर्बरता के वीडियो दुनिया तक पहुँचें। प्रभाव: बैंकिंग सेवाएं, फोन लाइनें और सोशल मीडिया पूरी तरह ठप हैं। यह ईरान के इतिहास की सबसे लंबी सेंसरशिप है। 5. क्यों सुलग रहा है ईरान? (प्रमुख कारण) आर्थिक पतन: रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है ($1 = ~14.5 लाख रियाल)। महंगाई की मार: चाय और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों पर 70% तक महंगाई बढ़ गई है। सत्ता के खिलाफ गुस्सा: प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का इस्तीफा और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ट्रम्प पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत 75 देशों के लिए वीजा सर्विस रोकेंगे

अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा रोका; पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सूची में शामिल।

ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी वॉरशिप

ट्रम्प का ईरान पर 'साउदर्न स्पीयर' जैसा हमला? दक्षिण चीन सागर से रवाना हुआ अमेरिकी नौसेना का सबसे ताकतवर बेड़ा।

अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा

ईरानी विदेश मंत्री बोले- फांसी की कोई योजना नहीं; भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी।

थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत
Thailand Train Accident: थाईलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 की मौत, 67 घायल; छात्रों से भरी थी ट्रेन।

थाईलैंड ट्रेन हादसा: 65 फीट ऊंचाई से पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 लोगों की मौत, 67 घायल; ट्रेन में सवार थे 195 छात्र थाईलैंड के नाखोन राचासिमा प्रांत में बुधवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना हुई। एक निर्माणाधीन रेल ब्रिज पर काम कर रही विशालकाय क्रेन अचानक 65 फीट की ऊंचाई से तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन पर गिर गई। इस जघन्य हादसे में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और 67 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। 1. कैसे हुआ हादसा? (घटनाक्रम) समय और स्थान: यह दुर्घटना बुधवार को नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी की ओर जा रही थी। तेज रफ्तार: हादसे के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। अचानक प्रहार: रेल ब्रिज के निर्माण में लगी क्रेन अचानक ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिर गई। क्रेन का वजन और ऊंचाई इतनी अधिक थी कि ट्रेन का एक डिब्बा दो हिस्सों में कट गया। आग और विस्फोट: स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्रेन गिरने के बाद दो जोरदार धमाके हुए और डिब्बों में भीषण आग लग गई। 2. हताहतों का विवरण: डिब्बों में फंसे थे छात्र ट्रेन में कुल 195 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्कूल के छात्र थे। मौत: अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव दल ने मलबे से शव निकालने का काम जारी रखा है। घायल: 67 घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। ड्राइवर की स्थिति: क्रेन इतनी अचानक गिरी कि ड्राइवर को आपातकालीन ब्रेक लगाने का भी मौका नहीं मिला। 📸 हादसे की भयावहता: मुख्य बिंदु विवरण प्रभाव क्रेन की ऊंचाई 65 फीट से सीधी टक्कर। ट्रेन की गति 120 किमी/घंटा। नुकसान ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे, दो हिस्सों में कटे और आग लगी। रेस्क्यू ऑपरेशन कटर मशीनों से डिब्बे काटकर यात्रियों को निकाला गया। 3. जांच और लापरवाही के सवाल रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच की जा रही है: सुरक्षा नियमों का उल्लंघन: क्या ब्रिज निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? तकनीकी विफलता: क्या क्रेन में कोई यांत्रिक खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है?

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
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रवि चौहान जनवरी 21, 2026 0