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गाज़ा: दो साल की बर्बादी — मलबे, बेघर और तिनके पर जीती ज़िन्दगियाँ‚ अब तक 20 हजार बच्चों की मौत

रवि चौहान अक्टूबर 7, 2025 0
गाजा बर्बादी के दो साल पूरे
गाजा बर्बादी के दो साल पूरे
रवि चौहान — हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले से शुरू हुए संघर्ष को आज दो साल पूरे हो गए हैं। लगातार चल रही हवाई बमबारी और जमीनी सैन्य कार्रवाई ने गाज़ा पट्टी को तहस-नहस कर दिया है — इमारतें ध्वस्त, स्कूल और अस्पताल बंद, खेत उजड़ चुके हैं और लाखों लोग ठहरने, खाने और इलाज के बिना टेंटों में रहने को मजबूर हैं।

 

 
जिंदा लोगों का कैंप बन चुका शहर
दो साल की तबाही के बाद गाज़ा अब खंडहरों का नहीं, जिंदा बचे लोगों के कैंप का प्रतीक बन चुका है।
गाज़ा के 23 लाख लोगों में से 90% अब बेघर हैं।
उत्तर और दक्षिण गाज़ा से भगाए गए लाखों लोग टेंटों में रह रहे हैं — जहाँ न पानी है, न बिजली, न दवा।

 

पूरी गाज़ा पट्टी का लगभग 80% इलाका अब मिलिट्री ज़ोन घोषित है, जहाँ आम नागरिकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि आधे से ज्यादा लोग भुखमरी की कगार पर हैं।

 

अब तक 66,158 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 18,430 बच्चे शामिल हैं — यानी कुल मौतों का लगभग 31%
गाज़ा में 39,384 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने अपने माता या पिता में से किसी एक को खो दिया है, जबकि 17,000 बच्चे ऐसे हैं जिनके दोनों माता-पिता अब नहीं रहे।

 

राहत एजेंसियाँ कहती हैं —
“यह अब कोई शहर नहीं, बल्कि बचे हुए लोगों का शिविर बन चुका है,
जहाँ इंसान सिर्फ ज़िंदा रहने की कोशिश कर रहा है।”
तबाही के कुछ प्रमुख आंकड़े (दिए गए स्रोतों के अनुसार)
  • लगभग 80% इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह।
  • 90% स्कूल खंडहर बन चुके हैं — पहले गाज़ा में 850 स्कूल थे।
  • 94% अस्पतालों को नुकसान पहुँचा; कई पूरी तरह बंद। कुल बेड उपलब्धता अब केवल 33% है।
  • 98.5% खेत उजड़ गए; केवल 232 हेक्टेयर ही खेती के लायक बचे।
  • मलबे का अनुमान: लगभग 54 मिलियन टन — साफ़ करने में अनुमानतः 10 साल लग सकते हैं।
  • आर्थिक नुकसान का आँकलन: करोड़ों/खरबों में (उल्लेखित राशि: ~4.5 लाख करोड़ रुपए)।
  • कुल मृतकों की संख्या: ~66,158 फिलिस्तीनी — जिनमें 18,430 बच्चे शामिल हैं।
  • अकेले बच्चे प्रभावित: ~39,384 ऐसे बच्चे जिनके माता या पिता की मौत हुई; ~17,000 बच्चे जो दोनों माता-पिता खो चुके हैं।
(ऊपर के सभी आँकड़े आपके बताए हुए स्रोतों पर आधारित हैं और लेख में वही संख्याएँ बरकरार रखी गई हैं।)
जीवनयापन — बुनियादी सुविधाओं का अभाव
लाखों लोग अब टेंटों में रहते हैं जहाँ पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाएँ लगभग अनुपलब्ध हैं। गाज़ा का करीब 80% इलाका अब सैन्य क्षेत्र घोषित है — जिससे आम नागरिकों की आवाजाही अत्यंत सीमित हो चुकी है। यूएन एजेंसियों के अनुसार आधे से अधिक लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं।

 

शिक्षा और स्वास्थ्य — लंबा आघात

 

शिक्षा तंत्र लगभग थम चुका है: विश्वविद्यालयों की 51 इमारतों में से एक भी चालू नहीं है और लाखों बच्चों की पढ़ाई बाधित है। स्वास्थ्य क्षेत्र भी तबाह — अस्पतालों के भारी नुकसान और डॉक्टरों, दवाओं की कमी से इलाज सीमित है। WHO प्रतिनिधियों के दौरे के बाद कहा गया कि स्कूलों की जगह अब टेंट हैं और अस्पतालों की जगह खामोशी।
मिट्टी और कृषि पर दीर्घकालिक प्रभाव
युद्ध के कारण मिट्टी में विस्फोटक व रासायनिक अवशेषों का स्तर बढ़ गया है — कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीन को पहले जैसा उपजाऊ बनाने में 25 साल तक लग सकते हैं। सिंचाई नेटवर्क और कुएँ भी बड़े पैमाने पर टूट चुके हैं; किसान अपनी फसलें और हरितभवन खो चुके हैं।

 

राजनीतिक पहल और वार्ता

 

मिस्र में साझा प्रयासों से शांति वार्ता शुरू हुई है। कुछ प्रस्तावों में बंधकों के बदले कैदियों की रिहाई और सीमित इजरायली वापसी शामिल बताई जा रही है। राजनीतिक स्तर पर मतभेद भी हैं — कुछ दल ऐसे समझौतों के विरुद्ध हैं, जबकि दूसरी तरफ वार्ता को आगे बढ़ाने के लिये समर्थन देने की पेशकशें भी हुई हैं। हमास ने स्पष्ट किया है कि तब तक हथियार नहीं छोड़ेगा जब तक गाज़ा पर कब्जा पूरी तरह समाप्त न हो और वह भविष्य के निर्णयों में शामिल रहना चाहता है।

 

सर्वसम्बंधी परिणाम

 

गाज़ा आज व्यापक मानवतावादी संकट का केंद्र है — शहरों का विनाश, शिक्षा और स्वास्थ्य का कोलाज, व्यापक बेघरपन और दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति। राहत एजेंसियाँ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कहते हैं कि यहां अब "शहर" नहीं, बल्कि जीवित बचे लोगों का विशाल शिविर बचा है — जल्द कार्रवाई और व्यापक पुनर्निर्माण योजना की सख्त ज़रूरत है।

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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

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मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

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दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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इजराइल ने CNN पत्रकारों से बदसलूकी पर बटालियन सस्पेंड की:
इजराइली सेना का बड़ा फैसला: CNN पत्रकारों से मारपीट के बाद नेत्जाह बटालियन सस्पेंड; वेस्ट बैंक में ऑपरेशन पर रोक।

वेस्ट बैंक में CNN टीम से बदसलूकी: इजराइली सेना ने पूरी बटालियन को किया सस्पेंड; नेत्जाह येहूदा यूनिट की ऑपरेशनल गतिविधियों पर लगी रोक यरुशलम/वेस्ट बैंक | 30 मार्च 2026 इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में CNN के पत्रकारों के साथ हुई बदसलूकी और मारपीट के मामले में एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। सेना ने इस घटना में शामिल पूरी बटालियन को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह बटालियन विवादित नेत्जाह येहूदा (Netzah Yehuda) यूनिट का हिस्सा है। सेना के प्रवक्ता के अनुसार, इस बटालियन को वेस्ट बैंक से हटाकर ट्रेनिंग बेस पर भेज दिया गया है और जांच पूरी होने तक इसकी सभी ऑपरेशनल गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। 1. क्या थी घटना? 26 मार्च का वो मंजर यह घटना पिछले हफ्ते 26 मार्च को उस समय हुई जब CNN के वरिष्ठ पत्रकार जेरेमी डायमंड अपनी टीम के साथ तयासिर गांव में रिपोर्टिंग कर रहे थे। रिपोर्टिंग का विषय: टीम वहां इजराइली सेटलर्स (बसावट करने वालों) द्वारा किए गए हालिया हमलों के बाद के हालात को कैमरे में कैद कर रही थी। अचानक हमला: चश्मदीदों से बात करने के दौरान इजराइली सैनिकों की एक टुकड़ी वहां पहुंची। बातचीत जल्द ही विवाद में बदल गई और सैनिकों ने पत्रकारों को हिरासत में ले लिया। हिंसा: आरोप है कि एक सैनिक ने फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस का गला जकड़ लिया और उन्हें जमीन पर पटक दिया, जिससे उनका महंगा कैमरा टूट गया। सैनिकों ने पत्रकारों पर बंदूकें भी तानीं, जबकि उन्होंने अपनी पहचान (Press ID) उजागर कर दी थी। 2. अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: प्रेस की आजादी पर हमला अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (FPA) ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है: निंदा प्रस्ताव: संगठन ने इसे प्रेस की आजादी पर सीधा और हिंसक हमला करार दिया। दुश्मनी का माहौल: FPA ने कहा कि पत्रकारों को डराना और उन पर हथियार तानना यह दर्शाता है कि ग्राउंड पर मीडिया के प्रति दुश्मनी बढ़ रही है। जांच की मांग: संगठन ने इजराइल सरकार से मांग की है कि केवल सस्पेंशन काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदार सैनिकों पर आपराधिक मुकदमा चलना चाहिए। 3. नेत्जाह येहूदा यूनिट: धार्मिक पहचान और विवादों का नाता नेत्जाह येहूदा यूनिट इजराइली सेना की कफिर ब्रिगेड का हिस्सा है। इसका इतिहास और संरचना इसे अन्य यूनिट्स से अलग बनाती है: गठन (1999): इसे विशेष रूप से हरेदी (अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स) समुदाय के लिए बनाया गया था, जिन्हें पहले सैन्य सेवा से छूट मिली हुई थी। धार्मिक नियम: इस यूनिट में महिलाएं शामिल नहीं होतीं। यहां केवल कोषेर (Kosher) खाना दिया जाता है और सैनिकों को धार्मिक प्रार्थनाओं के लिए समय दिया जाता है। विवादित इतिहास: यह यूनिट लंबे समय से मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोपों में घिरी रही है। 2022: 79 वर्षीय फिलिस्तीनी-अमेरिकी उमर असअद की सैनिकों द्वारा बांधे जाने के बाद मौत हो गई थी। मार्च 2026: यरुशलम में एक CNN प्रोड्यूसर का हाथ फ्रैक्चर करने का आरोप भी इसी यूनिट से जुड़ी गतिविधियों पर लगा है। 📊 नेत्जाह येहूदा यूनिट: एक नजर में विशेषता विवरण स्थापना 1999 (हरेदी समुदाय के लिए) मुख्य कार्य वेस्ट बैंक में गश्त और सुरक्षा विवाद मानवाधिकार उल्लंघन, अत्यधिक बल प्रयोग ताजा कार्रवाई पूरी बटालियन सस्पेंड, ऑपरेशनल रोक अमेरिकी रुख प्रतिबंध लगाने पर विचार (Leahy Law के तहत) 4. अमेरिका की नजर और संभावित प्रतिबंध नेत्जाह येहूदा यूनिट की गतिविधियों पर केवल इजराइल के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। अमेरिकी जांच: 2022 के अंत से अमेरिका इस यूनिट की जांच कर रहा है। लेही कानून (Leahy Law): ऐसी खबरें हैं कि जो बाइडन और अब ट्रम्प प्रशासन भी इस यूनिट पर मानवाधिकारों के हनन के कारण प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है, तो यह इजराइली सेना की पहली ऐसी यूनिट होगी जिसे अमेरिकी सैन्य सहायता प्राप्त करने से रोक दिया जाएगा। 5. सेना का अगला कदम: 'एथिकल री-ट्रेनिंग' इजराइली सेना ने स्पष्ट किया है कि बटालियन को केवल हटाया नहीं गया है, बल्कि उन्हें प्रोफेशनल और एथिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। जांच प्रक्रिया: सैन्य पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या सैनिकों ने नियमों (Rules of Engagement) का उल्लंघन किया। कमांड लेवल पर बदलाव: बटालियन के कमांडरों से भी पूछताछ की जा रही है कि उन्होंने पत्रकारों के साथ हो रही बदसलूकी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए।

रवि चौहान मार्च 30, 2026 0
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ईरान के नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमला
ईरान-इजराइल युद्ध डे-22: नतांज परमाणु केंद्र पर हवाई हमला; हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया बेस पर मिसाइलें, क्या अब शुरू होगा 'न्यूक्लियर वॉर'?

ईरान-इजराइल-अमेरिका जंग: 22वां दिन | नतांज न्यूक्लियर सेंटर पर भीषण हमला, हिंद महासागर में अमेरिकी बेस पर मिसाइलें और डिएगो गार्सिया की तकरार तेहरान/वॉशिंगटन/यरुशलम | 21 मार्च 2026 आज 21 मार्च 2026 है और मध्य पूर्व (Middle East) में छिड़ी महाजंग अपने 22वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। आज की सुबह दुनिया के लिए सबसे चौंकाने वाली खबर लेकर आई, जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान के सबसे संवेदनशील और सबसे बड़े परमाणु ठिकाने 'नतांज न्यूक्लियर सेंटर' को निशाना बनाया। इसके साथ ही जंग का दायरा अब खाड़ी देशों से निकलकर हिंद महासागर तक फैल गया है। यहाँ आज के घटनाक्रम, सैन्य कार्रवाई और वैश्विक कूटनीति की सबसे विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. नतांज न्यूक्लियर प्लांट पर हमला: क्या परमाणु खतरा बढ़ा? ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'तसनीम' के अनुसार, शनिवार सुबह अमेरिकी और इजराइली लड़ाकू विमानों ने नतांज परमाणु केंद्र पर कई मिसाइलें दागीं। हमले का मकसद: नतांज ईरान का वह केंद्र है जहाँ यूरेनियम इनरिचमेंट (संवर्धन) किया जाता है। इजराइल का मानना है कि यहाँ ईरान गुप्त रूप से परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा था। जमीनी स्थिति: इस प्लांट का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे (Underground) बना है ताकि बंकर-बस्टर मिसाइलों से बचा जा सके। राहत की खबर: ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमले के बावजूद अभी तक कोई रेडियोएक्टिव (परमाणु विकिरण) रिसाव नहीं हुआ है। आसपास की नागरिक आबादी पूरी तरह सुरक्षित है। 2. हिंद महासागर में कोहराम: डिएगो गार्सिया पर ईरानी मिसाइलें जंग अब केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रही। ईरान ने पहली बार इतनी लंबी दूरी की मार करते हुए हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के साझा सैन्य बेस 'डिएगो गार्सिया' को निशाना बनाया है। हमला: शुक्रवार सुबह ईरान ने 2 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के अनुसार, दोनों मिसाइलें बेस को हिट करने में नाकाम रहीं और समुद्र में जा गिरीं। ब्रिटेन की निंदा: ब्रिटेन ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। ब्रिटेन सीधे तौर पर जंग में शामिल नहीं है, लेकिन उसने अमेरिका को अपने इस रणनीतिक द्वीप (Diego Garcia) का उपयोग करने की अनुमति दी है। महत्व: तेहरान से यह बेस करीब 3,800 से 5,000 किलोमीटर दूर है। यहाँ से अमेरिका अपने बी-52 बॉम्बर और टैंकर विमान संचालित करता है। 3. लाइव ब्लॉग अपडेट्स: पल-पल की खबरें (21 मार्च 2026) समय स्थान घटना 05:10 PM डिएगो गार्सिया ब्रिटेन ने ईरानी हमले को क्षेत्रीय शांति के लिए बड़ा खतरा बताया। 05:05 PM इजराइल IRGC का दावा- इजराइल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला, उड़ानें प्रभावित। 04:32 PM रामसर, ईरान एक घर पर अमेरिकी-इजराइली हवाई हमला; माता-पिता और एक मासूम बच्चे की मौत। 04:18 PM बगदाद, इराक इराकी खुफिया मुख्यालय के पास ड्रोन गिरा; एक उच्च अधिकारी की मौत। 03:12 PM बगदाद रिहायशी इलाके में दूसरा ड्रोन हमला; एक स्पोर्ट्स क्लब में गिरा निगरानी ड्रोन। 01:38 PM तेहरान IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी का अंतिम संस्कार, हजारों की भीड़ उमड़ी। 4. कूटनीतिक हलचल: पीएम मोदी और पुतिन का रुख एक ओर जहाँ मिसाइलें बरस रही हैं, वहीं दूसरी ओर नवरोज और ईद के मौके पर बड़े नेताओं के बीच बातचीत भी हुई: पीएम मोदी का संदेश: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजश्कियान से फोन पर बात की। उन्होंने ईद और नवरोज की बधाई दी, लेकिन साथ ही समुद्री रास्तों (Shipping Routes) की सुरक्षा पर चिंता जताई। मोदी ने स्पष्ट कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए जहाजों के रास्ते सुरक्षित रहना अनिवार्य है। पुतिन की 'सच्ची दोस्ती': रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान को अपना 'वफादार दोस्त' बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई से तेल संकट बढ़ेगा। रूस ने ईरानी सर्वोच्च नेता खामेनेई को निशाना बनाने की कोशिशों की भी निंदा की। 5. ईरान की रणनीति: "होर्मुज बंद नहीं, लेकिन..." ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक महत्वपूर्ण इंटरव्यू में दो टूक बातें कहीं: रास्ते की शर्त: उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है, लेकिन केवल उन देशों के लिए जो ईरान के संपर्क में रहेंगे। हमलावर देशों के लिए यह रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा। जंग का अंत: अराघची ने कहा कि ईरान को सिर्फ 'सीजफायर' (युद्धविराम) नहीं चाहिए, बल्कि जंग पूरी तरह खत्म होने की लिखित गारंटी चाहिए। 6. साइबर वॉर: इजराइली जनरल का ईमेल हैक? ईरानी हैकर ग्रुप 'हंदाला' ने दावा किया है कि उन्होंने इजराइली ब्रिगेडियर जनरल एरन ओरताल का ईमेल हैक कर लिया है। दावा: हैकर्स के पास 1 लाख से ज्यादा सीक्रेट ईमेल होने की बात कही गई है, जिनमें इजराइली सेना की भविष्य की योजनाओं का विवरण है। हालांकि, इजराइल ने अभी तक इस दावे की पुष्टि नहीं की है। 7. ट्रम्प का 'विक्ट्री कार्ड' और नाटो पर गुस्सा डोनाल्ड ट्रम्प ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर अपने लक्ष्यों को स्पष्ट किया: ईरान की मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना। ईरान के रक्षा उत्पादन ढांचे को नष्ट करना। नौसेना और वायुसेना को पंगु बनाना। यह सुनिश्चित करना कि ईरान कभी परमाणु बम न बना सके। नाटो की आलोचना: ट्रम्प ने नाटो देशों को 'कमजोर' बताते हुए कहा कि वे तेल की महंगाई पर रोते तो हैं, लेकिन होर्मुज खुलवाने में अमेरिका की मदद नहीं करते। 8. आर्थिक राहत: भारत के लिए ईरानी तेल का रास्ता खुला अमेरिकी ट्रेजरी ने 30 दिनों की अस्थायी छूट दी है। नियम: जो ईरानी तेल 20 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुका है, उसे भारत और अन्य एशियाई देश खरीद सकते हैं। उपलब्धता: फिलहाल समुद्र में करीब 18 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है। भारतीय रिफाइनरियां अब इस 'डिस्काउंटेड' तेल को उतारने की तैयारी कर रही हैं, जिससे घरेलू स्तर पर तेल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है।

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रवि चौहान अप्रैल 3, 2026 0