रवि चौहान — हमास के 7 अक्टूबर 2023 के हमले से शुरू हुए संघर्ष को आज दो साल पूरे हो गए हैं। लगातार चल रही हवाई बमबारी और जमीनी सैन्य कार्रवाई ने गाज़ा पट्टी को तहस-नहस कर दिया है — इमारतें ध्वस्त, स्कूल और अस्पताल बंद, खेत उजड़ चुके हैं और लाखों लोग ठहरने, खाने और इलाज के बिना टेंटों में रहने को मजबूर हैं। जिंदा लोगों का कैंप बन चुका शहर दो साल की तबाही के बाद गाज़ा अब खंडहरों का नहीं, जिंदा बचे लोगों के कैंप का प्रतीक बन चुका है। गाज़ा के 23 लाख लोगों में से 90% अब बेघर हैं। उत्तर और दक्षिण गाज़ा से भगाए गए लाखों लोग टेंटों में रह रहे हैं — जहाँ न पानी है, न बिजली, न दवा। पूरी गाज़ा पट्टी का लगभग 80% इलाका अब मिलिट्री ज़ोन घोषित है, जहाँ आम नागरिकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों का कहना है कि आधे से ज्यादा लोग भुखमरी की कगार पर हैं। अब तक 66,158 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें 18,430 बच्चे शामिल हैं — यानी कुल मौतों का लगभग 31%। गाज़ा में 39,384 बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने अपने माता या पिता में से किसी एक को खो दिया है, जबकि 17,000 बच्चे ऐसे हैं जिनके दोनों माता-पिता अब नहीं रहे। राहत एजेंसियाँ कहती हैं — “यह अब कोई शहर नहीं, बल्कि बचे हुए लोगों का शिविर बन चुका है, जहाँ इंसान सिर्फ ज़िंदा रहने की कोशिश कर रहा है।” तबाही के कुछ प्रमुख आंकड़े (दिए गए स्रोतों के अनुसार) लगभग 80% इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह। 90% स्कूल खंडहर बन चुके हैं — पहले गाज़ा में 850 स्कूल थे। 94% अस्पतालों को नुकसान पहुँचा; कई पूरी तरह बंद। कुल बेड उपलब्धता अब केवल 33% है। 98.5% खेत उजड़ गए; केवल 232 हेक्टेयर ही खेती के लायक बचे। मलबे का अनुमान: लगभग 54 मिलियन टन — साफ़ करने में अनुमानतः 10 साल लग सकते हैं। आर्थिक नुकसान का आँकलन: करोड़ों/खरबों में (उल्लेखित राशि: ~4.5 लाख करोड़ रुपए)। कुल मृतकों की संख्या: ~66,158 फिलिस्तीनी — जिनमें 18,430 बच्चे शामिल हैं। अकेले बच्चे प्रभावित: ~39,384 ऐसे बच्चे जिनके माता या पिता की मौत हुई; ~17,000 बच्चे जो दोनों माता-पिता खो चुके हैं। (ऊपर के सभी आँकड़े आपके बताए हुए स्रोतों पर आधारित हैं और लेख में वही संख्याएँ बरकरार रखी गई हैं।) जीवनयापन — बुनियादी सुविधाओं का अभाव लाखों लोग अब टेंटों में रहते हैं जहाँ पानी, बिजली और स्वास्थ्य सेवाएँ लगभग अनुपलब्ध हैं। गाज़ा का करीब 80% इलाका अब सैन्य क्षेत्र घोषित है — जिससे आम नागरिकों की आवाजाही अत्यंत सीमित हो चुकी है। यूएन एजेंसियों के अनुसार आधे से अधिक लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य — लंबा आघात शिक्षा तंत्र लगभग थम चुका है: विश्वविद्यालयों की 51 इमारतों में से एक भी चालू नहीं है और लाखों बच्चों की पढ़ाई बाधित है। स्वास्थ्य क्षेत्र भी तबाह — अस्पतालों के भारी नुकसान और डॉक्टरों, दवाओं की कमी से इलाज सीमित है। WHO प्रतिनिधियों के दौरे के बाद कहा गया कि स्कूलों की जगह अब टेंट हैं और अस्पतालों की जगह खामोशी। मिट्टी और कृषि पर दीर्घकालिक प्रभाव युद्ध के कारण मिट्टी में विस्फोटक व रासायनिक अवशेषों का स्तर बढ़ गया है — कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जमीन को पहले जैसा उपजाऊ बनाने में 25 साल तक लग सकते हैं। सिंचाई नेटवर्क और कुएँ भी बड़े पैमाने पर टूट चुके हैं; किसान अपनी फसलें और हरितभवन खो चुके हैं। राजनीतिक पहल और वार्ता मिस्र में साझा प्रयासों से शांति वार्ता शुरू हुई है। कुछ प्रस्तावों में बंधकों के बदले कैदियों की रिहाई और सीमित इजरायली वापसी शामिल बताई जा रही है। राजनीतिक स्तर पर मतभेद भी हैं — कुछ दल ऐसे समझौतों के विरुद्ध हैं, जबकि दूसरी तरफ वार्ता को आगे बढ़ाने के लिये समर्थन देने की पेशकशें भी हुई हैं। हमास ने स्पष्ट किया है कि तब तक हथियार नहीं छोड़ेगा जब तक गाज़ा पर कब्जा पूरी तरह समाप्त न हो और वह भविष्य के निर्णयों में शामिल रहना चाहता है। सर्वसम्बंधी परिणाम गाज़ा आज व्यापक मानवतावादी संकट का केंद्र है — शहरों का विनाश, शिक्षा और स्वास्थ्य का कोलाज, व्यापक बेघरपन और दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति। राहत एजेंसियाँ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कहते हैं कि यहां अब "शहर" नहीं, बल्कि जीवित बचे लोगों का विशाल शिविर बचा है — जल्द कार्रवाई और व्यापक पुनर्निर्माण योजना की सख्त ज़रूरत है।
इस्राइल और हमास के बीच लगभग 23 महीनों से जारी खूनी संघर्ष अब एक अहम मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। गाजा में लगातार बिगड़ती मानवीय स्थिति के बीच अब इस जंग को खत्म करने की दिशा में एक नई पहल शुरू हो गई है। इस्राइली सेना ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा युद्ध समाप्ति योजना के पहले चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस चरण में प्राथमिकता उन सभी बंधकों की रिहाई पर होगी, जो अब तक हमास के कब्जे में हैं। इस्राइली नेतृत्व ने सेना को रक्षात्मक मोड में रहने और सक्रिय हमलों को रोकने के निर्देश दिए हैं, हालांकि सैनिकों की तैनाती फिलहाल जारी रहेगी। ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि गाजा पर बमबारी अब रोक दी जानी चाहिए, क्योंकि हमास ने उनकी शांति योजना के कुछ हिस्सों को मंजूर कर लिया है। उन्होंने कहा कि "मुझे लगता है, वे अब स्थायी शांति के लिए तैयार हैं।" ट्रंप ने वादा किया कि वे इस महीने के अंत तक संघर्ष खत्म करने और बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेंगे। इस प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन मिल चुका है और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इसे मंजूरी दे दी है। नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि इस्राइल अब युद्ध खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो अक्तूबर 2023 में हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते इस्राइल ने इस योजना को स्वीकार किया है। इस बीच मिस्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बंधकों और इस्राइल की जेलों में बंद सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों की रिहाई पर वार्ता चल रही है। साथ ही अरब देशों के मध्यस्थ गाजा के भविष्य को लेकर फलस्तीनी गुटों के बीच एकजुटता लाने की कोशिश कर रहे हैं। इधर, हमास के साथ-साथ गाजा की दूसरी सबसे बड़ी ताकत फलस्तीन इस्लामिक जिहाद ने भी ट्रंप की इस योजना पर सहमति जताई है, जबकि कुछ दिन पहले वह इसके खिलाफ थी। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक करीब 67,000 फलस्तीनी इस संघर्ष में मारे जा चुके हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे लगभग आधे हैं। ट्रंप की योजना के मुताबिक, तीन दिनों के भीतर हमास को 48 बचे हुए बंधकों को रिहा करना होगा, जिनमें लगभग 20 के जिंदा होने की उम्मीद है। बदले में इस्राइल अपनी सैन्य कार्रवाई रोक देगा, कुछ इलाकों से पीछे हटेगा, और सैकड़ों कैदियों को रिहा करेगा। साथ ही मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण कार्यों की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, हमास ने हथियार डालने को लेकर अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हमास की यह “आंशिक सहमति” उसकी पुरानी शर्तों को नए रूप में पेश करने जैसा है, और जमीनी हालात में अभी बड़ा बदलाव दिखना बाकी है।
गाजा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना पेश किए जाने के बीच, इजरायल ने एक फिर अपना क्रूर चेहरा दुनिया को दिखाया। बेलगाम इजराइल ने बुधवार को गाजा में एक बड़ा हमला किया। इस हमले में कम से कम 16 फिलिस्तीनियों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। स्थानीय अस्पतालों के अनुसार, हमले में वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने शरणार्थियों के लिए बने स्कूलों में सुरक्षा की तलाश की थी। अल-फलाह स्कूल पर एक ही दिन में दो बार बमबारी हुई। शुरुआती हमले के बाद मदद के लिए पहुंचे लोग भी हमले में मारे गए। गाजा शहर के पश्चिमी हिस्से में पेयजल टैंक के पास भी हमले हुए, जिसमें पांच लोग मारे गए। शिफा अस्पताल ने बताया कि पश्चिमी गाजा में स्थित एक अपार्टमेंट और नुसरत शरणार्थी शिविर पर हुए हमलों में कई लोग घायल या मारे गए। बुरेज शरणार्थी शिविर पर भी हमले हुए, जिसमें एक और व्यक्ति की मौत हुई। इजरायली सेना ने इन हमलों पर तुरंत कोई बयान नहीं दिया। इस बीच, ट्रंप की शांति योजना पर अब तक हमास की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
गाजा में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं के बीच इज़राइल का रक्षा उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। हाल के महीनों में इज़राइल के करीबी देशों ने उसके साथ कई रक्षा समझौते रद्द कर दिए हैं, जिससे उद्योग पर भारी दबाव बढ़ गया है। स्पेन ने हाल ही में राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम के साथ एक हथियार सौदा रद्द कर दिया। इस सौदे का मूल्य 21.8 करोड़ डॉलर था और इसमें दर्जनों लाइटनिंग 5 टारगेटिंग पॉड्स शामिल थे, जो हवाई बमों को 100 किलोमीटर तक निर्देशित करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही, इस रद्द सौदे के बाद इज़राइली कंपनियों के साथ निलंबित किए गए अनुबंधों का कुल मूल्य लगभग 65.4 करोड़ डॉलर पहुँच गया। स्पेन ने इज़राइल के साथ पल्स रॉकेट सिस्टम के लिए एल्बिट सिस्टम और दो स्पेनिश फर्मों के साथ किए जाने वाले 76.3 करोड़ डॉलर के सौदे को भी रद्द कर दिया। इसमें एल्बिट सिस्टम का हिस्सा लगभग 15 करोड़ डॉलर था। इसके अलावा, इस साल की शुरुआत में स्पेन ने एल्बिट की सहायक कंपनी के साथ किए जाने वाले कई करोड़ डॉलर मूल्य के गोला-बारूद के ऑर्डर को रद्द कर दिया था। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने गाजा युद्ध को लेकर इज़राइल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। हाल के हफ्तों में स्पेन ने हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है और इज़राइल से जुड़े आपूर्ति जहाजों को अपने बंदरगाहों पर प्रवेश से रोका गया है। इसके साथ ही कच्चे माल के निर्यात पर भी रोक लगाई गई है, जिससे इज़राइली कंपनियों को नए विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। इज़राइली रक्षा उद्योग के अधिकारियों को डर है कि अन्य देश भी ऐसे ही सौदों को रद्द कर सकते हैं, ताकि गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए इज़राइल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डाला जा सके। इस नीति का असर इज़राइल के लंबी अवधि के रक्षा निर्यात और परियोजनाओं पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
गाजा पट्टी (Gaza Strip) में इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष (Israel-Palestine Conflict) ने एक बार फिर भयावह रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटों के भीतर इज़राइली सेना के हमलों में कम से कम 50 फिलिस्तीनियों की मौत (Palestinian Deaths) हो गई है। इनमें वे पांच लोग भी शामिल हैं, जो मदद की गुहार लगा रहे थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट, जिसे अलजजीरा ने प्रकाशित किया, के अनुसार इन हमलों में 184 लोग घायल हुए हैं। हिंसा की यह नई लहर उस समय शुरू हुई जब अमेरिका ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसी बीच, गाजा सिटी के कई इलाकों में टैंक दाखिल हुए और भारी हवाई तथा तोपों की गोलाबारी की गई। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। इसी बीच, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) जल्द ही व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलने वाले हैं। दोनों नेताओं की मुलाकात का एजेंडा युद्ध रोकने और शांति बहाली की कोशिशों पर चर्चा करना बताया जा रहा है। लेकिन गाजा में ज़मीनी हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं। पश्चिमी तट पर ईसाई समुदाय पर दबाव गाजा के अलावा, कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank) और ईस्ट जेरूसलम (East Jerusalem) में भी इज़राइली नीतियों पर विवाद गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईसाई समुदाय पर नए टैक्स लगाने और चर्चों की संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिशें हो रही हैं। ग्रीक ऑर्थोडॉक्स पैट्रिआर्केट के बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए गए हैं, जबकि अर्मेनियाई पैट्रिआर्केट को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं। इससे ईसाई संगठनों में गुस्सा और रोष फैल गया है। “संपत्ति हड़पने की सुनियोजित शुरुआत” रामल्लाह की राजनीतिक विश्लेषक शिरीन साल्टी का कहना है कि यह टैक्स विवाद दरअसल पवित्र भूमि से ईसाइयों को धीरे-धीरे बेदखल करने की नीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “ये अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित प्लान है।” उनके अनुसार, सरकार की कमेटी तो बनाई गई है, लेकिन इज़राइली अधिकारी बातचीत से बचते रहे हैं। साल्टी का मानना है कि टैक्स विवाद सिर्फ शुरुआत है, आगे इसका असर ईसाई संपत्तियों पर कब्ज़े के रूप में भी दिख सकता है। नेतन्याहू का दावा और हकीकत साल्टी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र में दिए उस बयान पर सवाल उठाए जिसमें उन्होंने कहा था कि “इज़राइल ईसाई अल्पसंख्यकों की रक्षा करता है।” उन्होंने इसे पूरी तरह भ्रामक बताते हुए कहा कि इज़राइली नीतियां ही ईसाई पलायन का सबसे बड़ा कारण हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वेस्ट बैंक में सेटलमेंट्स का विस्तार और बढ़ती हिंसा से मुस्लिमों के साथ-साथ ईसाई समुदाय भी प्रभावित हो रहा है। हाल ही में सेटलर्स द्वारा ईसाई निवासियों पर हमले दर्ज किए गए हैं।
मासूम बच्चों‚ महिलाओ और बेगुनाह लोगों की कब्र पर गाजा पट्टी काे हड़पने की तैयारी कर अमेरिका ने अब गाजा पट्टी को लेकर एक नई योजना का समर्थन किया है, जिसमें पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को कुछ समय के लिए गाजा का प्रशासन संभालने की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस योजना के तहत Gaza International Transitional Authority (GITA) नामक एक नई अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाई जाएगी। दावा किया जा रहा है कि GITA गाजा की सबसे बड़ी राजनीतिक और कानूनी ताकत होगी और इसका मकसद गाजा में शांति और स्थिरता लाना है। योजना के अनुसार, शुरुआत में यह संस्था मिस्र के एल-अरीश शहर में काम करेगी, जो गाजा की सीमा के पास है। इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र (UN) की मदद से एक बहुराष्ट्रीय सेना (अधिकतर अरब देशों की) के साथ गाजा में प्रवेश कर के वहां प्रशासन संभालेगी। टोनी ब्लेयर की भूमिका अगर यह योजना लागू होती है, तो टोनी ब्लेयर GITA के प्रधान होंगे। वे 7 सदस्यीय बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे और उनके साथ 25 लोगों की टीम प्रशासनिक काम संभालेगी। टोनी ब्लेयर पहले भी मध्य पूर्व में शांति दूत के रूप में काम कर चुके हैं। हालांकि, कई फिलिस्तीनी नेता ब्लेयर से खुश नहीं हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उन्होंने फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश बनने से रोका और 2003 में इराक युद्ध के दौरान अमेरिका का समर्थन किया, जिससे पूरे क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। योजना से क्या बदलेगा? दावा किया जा रहा है कि गाजा के लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा‚ हालांकि अब वहां घर बचे नही है और लोगों गाजा पट्टी छोड़ने के लिए दिन रात इजारइल बम बरसा रहा है। यह भी दावा किया जा रहा है कि यह अमेरिका की पुरानी योजनाओं से अलग है, जिसमें लोगों को हटाने की बात थी। योजना का उद्देश्य है कि गाजा और वेस्ट बैंक को मिलाकर फिलिस्तीन का एकजुट प्रशासन बनाया जा सके, जो फिलिस्तीनी अथॉरिटी (PA) के अधीन हो। दूसरी योजना: UN न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन इस अमेरिकी योजना से पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा ने न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन को मंजूरी दी थी। इसमें गाजा के लिए सिर्फ 1 साल का तकनीकी प्रशासन बनाने की बात थी। बाद में चुनाव करवा कर सत्ता PA को लौटाने का प्रावधान था। लेकिन अमेरिका की नई योजना में कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है, जिससे फिलिस्तीनी और अरब देशों में शंका बनी हुई है। ट्रंप और अरब नेताओं की बैठक हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क में मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात की। इसमें कतर, सऊदी अरब, जॉर्डन, इंडोनेशिया और तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष शामिल थे। ट्रंप ने कहा कि बातचीत सफल रही और समझौते के करीब हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों दोनों योजनाओं (UN और अमेरिका) को मिलाकर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। अरब देशों की शर्तें अरब देशों ने स्पष्ट किया है कि वे केवल तभी संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना में शामिल होंगे, जब फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य बनाने का स्पष्ट रास्ता हो। उनका मानना है कि इस योजना से फिलिस्तीन को पूरी आज़ादी नहीं मिलेगी। GITA का ढांचा GITA में 7–10 सदस्यीय बोर्ड होगा। बोर्ड में कम से कम एक फिलिस्तीनी, एक UN अधिकारी, कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और मुस्लिम सदस्य होंगे। इसके नीचे 5 कमिश्नर होंगे, जो प्रशासन के अलग-अलग क्षेत्र संभालेंगे। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि गाजा में जंग के बाद हमास को कोई भूमिका नहीं दी जाएगी। वेस्ट बैंक का प्रशासन फिलिस्तीनी सरकार अभी संभालती है और गाजा युद्धविराम में सीधे शामिल नहीं है। अमेरिका और इजराइल की स्थिति व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि वे इजराइल को वेस्ट बैंक पर कब्जा करने नहीं देंगे। गाजा योजना फिलिस्तीनी क्षेत्र में शांति स्थापित करने और प्रशासनिक ढांचा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। 💡 निष्कर्ष: यह अमेरिकी योजना और GITA के माध्यम से गाजा में स्थिरता और शांति लाने की कोशिश की जा रही है। टोनी ब्लेयर की भूमिका, अरब देशों की शर्तें और फिलिस्तीनी नेताओं की प्रतिक्रिया इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील मुद्दा बनाती है।
गाजा सिटी, 25 सितंबर 2025: इजरायली सेना ने आज गाजा पट्टी के केंद्रीय और दक्षिणी क्षेत्रों में कई हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 17 फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में 10 बच्चे और 3 महिलाएं शामिल हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, जवादिया और दीर अल-बला जैसे इलाकों में कई घर और तंबू तबाह हो गए, जिससे परिवारों की मौत हो गई। AP News इस बीच, संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने वीडियो संबोधन में कहा कि फिलिस्तीन कभी भी अपनी भूमि नहीं छोड़ेगा और संघर्ष विराम की अपील की। उन्होंने इजरायल की कार्रवाई को 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया। Al Jazeera अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों ने इजरायल से तत्काल संघर्ष विराम की मांग की है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि गाजा में 'कुल युद्ध' से नागरिकों की मौत हो रही है, लेकिन यह हमास को समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने फिलिस्तीन राज्य की स्थापना का समर्थन किया है। AP News गाजा में अब तक 65,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। इजरायली हमले लगातार जारी हैं, जिससे मानवीय संकट गहरा गया है। Anadolu Ajansı अंतरराष्ट्रीय सहायता प्रयासों के तहत, इटली और स्पेन ने गाजा सहायता बेड़े की सुरक्षा के लिए नौसेना जहाज तैनात किए हैं। हालांकि, इन जहाजों पर ड्रोन हमलों की खबरें आई हैं, जिससे सहायता प्रयासों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। euronews गाजा में स्थिति गंभीर बनी हुई है, और वैश्विक समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। "सनकी हुआ नेतन्याहू? गाजा पर हमले तेज, दुनिया में बढ़ी बेचैनी" यरूशलम/गाजा, 25 सितंबर 2025: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर गाजा युद्ध को लेकर सनक और हठधर्मिता के आरोप लग रहे हैं। लगातार हवाई हमलों और सैन्य कार्रवाइयों ने न केवल गाजा को खंडहर बना दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी बेचैनी फैला दी है। नेतन्याहू ने ताज़ा बयान में कहा है कि "गाजा पर हमारी कार्रवाई तब तक रुकेगी नहीं जब तक हमास का सफाया नहीं हो जाता।" हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति सिर्फ और ज्यादा खून-खराबा और तबाही ला रही है। अंतरराष्ट्रीय आलोचना संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू को “युद्ध अपराधी” कहकर घेरा गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कई यूरोपीय नेताओं ने इजरायल से तत्काल संघर्ष विराम की मांग की। लेकिन नेतन्याहू ने इस अपील को खारिज करते हुए साफ कहा कि “यह हमारी सुरक्षा का सवाल है, और हम पीछे नहीं हटेंगे।” गाजा का हाल पिछले 24 घंटों में 17 लोगों की मौत, जिनमें 10 बच्चे शामिल। अब तक मरने वालों की संख्या 65,500 से ज्यादा। 2 लाख से अधिक लोग बेघर, अस्पतालों पर दबाव चरम पर। नेतन्याहू की छवि पर सवाल राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू घरेलू राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने और विपक्ष को कमजोर करने के लिए “कुल युद्ध” की राह पर हैं। कई अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने उन्हें “सनकी और जिद्दी नेता” करार दिया है, जो मानवीय संकट को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
गाजा पट्टी में जारी संघर्ष ने बच्चों की मासूमियत को छीन लिया है। युद्ध, भूख, कुपोषण और विस्थापन ने इन बच्चों की जिंदगी को नर्क बना दिया है। लेकिन सबसे दर्दनाक सच यह है कि दुनिया मौन है। जबकि लाखों मासूम बच्चे बमों की आवाज़, भूख और असुरक्षा से जूझ रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया शून्य या नगण्य है। गाजा में जारी संघर्ष ने बच्चों की मासूमियत को छीन लिया है। युद्ध, भूख, कुपोषण और विस्थापन ने इन बच्चों की जिंदगी को नर्क बना दिया है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, गाजा में बच्चों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। हर दिन के आँसुओं में खोए ये बच्चे केवल खिलौने और हंसी की दुनिया में जीने के हक़दार हैं, लेकिन उन्हें इस जंग की भीषण हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में भी बेड और दवाइयों की भारी कमी के कारण कई बच्चे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। गाजा में अब भी मासूम बच्चों की जिंदगी मौत और भूख के बीच संघर्ष कर रही है। रोज़मर्रा की बमबारी, घरों का विध्वंस और जीवन की मूलभूत सुविधाओं की कमी ने यहाँ के बच्चों को असहाय और भयभीत बना दिया है। हर दिन के आँसुओं में खोए ये बच्चे केवल खिलौने और हंसी की दुनिया में जीने के हक़दार हैं, लेकिन उन्हें इस जंग की भीषण हकीकत का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में भी बेड और दवाइयों की भारी कमी के कारण कई बच्चे गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। सड़कें खाली, स्कूल बंद, और हर कोने में त्रासदी की कहानी—यहाँ के बच्चे ना केवल शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी घायल हैं। भूख और असुरक्षा की मार ने उनकी मासूमियत पर गहरा असर डाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तत्काल अंतरराष्ट्रीय मदद और शांति की पहल नहीं हुई, तो गाजा के ये बच्चे लंबे समय तक जख्मी और असुरक्षित रहेंगे। मानवता की आवाज़ के रूप में हम सबकी जिम्मेदारी बनती है कि इन बच्चों की मदद करें और युद्ध को रोकने की कोशिश करें। गाजा में अब तक बच्चों की मौत और घायल होने की संख्या मृत्यु: यूनिसेफ मुताबिक गाजा में जंग शुरू से अब तक करीब 50 हजार से ज्यादा मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। यानि यहां हर दिन 28 मासूम जंग में अपनी जान गवां रहे हैं। अगस्त 2025 में ही गाजा में 440 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 147 बच्चे शामिल हैं। घायल: गाजा में अब तक करीब 30,000 से अधिक बच्चे घायल हुए हैं‚ इनमेंं से हजारों में ऐसे मासूम शामिल हैं जो पूरी तरह से अपंग हो चुके हैं‚ शायद ही वो अब जीवन में कुछ कर पाएंगे। अनाथ: लगभग 17,000 बच्चे अब अनाथ हो चुके हैं। भूख और कुपोषण का संकट गाजा में खाद्य आपूर्ति की भारी कमी है। जुलाई 2025 में ही 74 लोगों की कुपोषण से मौतें हुईं, जिनमें 24 बच्चे शामिल थे। विस्थापन और असुरक्षित जीवन गाजा में 320,000 से अधिक लोग विस्थापित हैं, जिनमें अधिकांश बच्चे और महिलाएँ शामिल हैं। अस्पतालों की स्थिति अत्यंत गंभीर है, कई अस्पतालों में बच्चों का इलाज गलियारों में किया जा रहा है। मदद की कमी और मानवीय संकट मानवीय सहायता की भारी कमी के कारण बच्चों की जानें खतरे में हैं। चिकित्सा और भोजन की आपूर्ति बाधित है। दुनिया मौन है, लेकिन हम आवाज़ उठा सकते हैं गाजा के बच्चों की स्थिति इतनी भयावह है कि उनकी चीख़ें सुनाई देनी चाहिए। हमारी आवाज़ उनकी आवाज़ बन सकती है। दान और सहायता: विश्वसनीय मानवीय संगठनों को मदद भेजें। जागरूकता फैलाएँ: सोशल मीडिया पर आर्टिकल साझा करें। राजनीतिक दबाव: नेताओं से युद्धविराम और मानवीय मदद की अपील करें। "दुनिया मौन है, लेकिन हम मौन नहीं रह सकते। गाजा के मासूम बच्चों की मदद करना हमारी जिम्मेदारी है।"
ग़ाज़ा की धरती पर हर रोज़ खून और आंसुओं की नदियाँ बह रही हैं। बमबारी से उजड़े घरों में मासूम बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। भूख और प्यास से तड़पते लोगों के लिए दुनिया भर से मदद के हाथ उठ रहे हैं। कई संगठन इन बेबस ज़िंदगियों को बचाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसी मानवीय पीड़ा को ढाल बनाकर कुछ बेशर्म ठगों ने लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ किया और ग़रीब, भूख से बिलखते बच्चों के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए। उत्तर प्रदेश एटीएस ने महाराष्ट्र के तीन युवकों – भिवंडी निवासी मोहम्मद अयान, अबू सूफियान और थाणे निवासी जैद नोटियार को गिरफ्तार किया है। इन युवकों पर आरोप है कि इन्होंने ग़ाज़ा युद्ध पीड़ितों की मदद करने के नाम पर क्राउड फंडिंग के जरिए देशभर के करीब 20 राज्यों से लोगों से लगभग 2 करोड़ रुपये की उगाही की। मासूमों की तस्वीरों से खेला गया भावनाओं का खेल सोशल मीडिया और क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म्स पर ग़ाज़ा की तबाही की तस्वीरें डालकर लोगों की संवेदनाओं को भड़काया गया। संदेश यही दिया गया – “ग़ाज़ा के बच्चों के लिए खाना, दवा और कपड़े की तत्काल ज़रूरत है, आपकी छोटी सी मदद कई ज़िंदगियाँ बचा सकती है।” लेकिन इस मदद की अपील के पीछे एक खौफनाक खेल चल रहा था। दानदाताओं की जेब से ठगों के खाते तक देशभर से लोगों ने अपनी कमाई का हिस्सा ग़ाज़ा पीड़ितों के नाम पर दान किया। किसी ने बच्चों के दूध के लिए, किसी ने दवाओं के लिए और किसी ने कपड़ों के लिए पैसा भेजा। लेकिन ये रकम सीधे ठगों की जेब में चली गई। करीब 15 लाख रुपये तो प्लेटफॉर्म की फीस में चले गए, लेकिन बाकी रकम ठगों ने अपने बैंक खातों से निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी। एटीएस को शक है कि यह रकम कहीं न कहीं टेरर फंडिंग से भी जुड़ी हो सकती है। अदालत में पेश, जेल भेजे गए आरोपी शनिवार को एटीएस ने तीनों को गिरफ्तार किया और सोमवार को लखनऊ स्थित एटीएस अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं एटीएस ने अदालत से इन्हें रिमांड पर देने का अनुरोध भी किया है ताकि गहराई से पूछताछ हो सके। मास्टरमाइंड बना अयान, यूरोप से मिला कनेक्शन सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड अयान है। अबू सूफियान और जैद नोटियार भिवंडी के एक वेयरहाउस में काम करते थे और अयान के साथ मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम दे रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि यूरोप से एक व्यक्ति उनसे मिलने मुंबई तक आया था। इस मुलाकात से शक और गहरा गया है कि यह मामला सिर्फ ठगी तक सीमित नहीं, बल्कि कहीं न कहीं आतंक से भी जुड़ा हो सकता है। कई बैंक खाते और पे-पाल से संदिग्ध ट्रांजैक्शन तीनों युवकों ने क्राउड फंडिंग के लिए कई बैंक खाते खोले। अचानक लाखों की रकम आने पर बैंकों को शक हुआ और उन्होंने लेन-देन पर रोक भी लगा दी। इसके बावजूद आरोपी दूसरे बैंकों में खाते खोलते रहे। यही नहीं, उन्होंने पे-पाल एप के जरिये भी करोड़ों रुपये संदिग्ध लोगों को भेजे। हैरानी की बात यह है कि जिन खातों में पैसा भेजा गया, उनकी लोकेशन ग़ाज़ा नहीं मिली। मानवता पर डाका- ग़ाज़ा में जहां बच्चे भूख से मर रहे हैं, अस्पताल दवाओं की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं इन युवकों ने लोगों की उसी करुणा का इस्तेमाल अपनी जेबें भरने के लिए किया। मदद की अपील पर भरोसा करने वाले लोग आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। यह सिर्फ ठगी नहीं बल्कि मानवता पर डाका है। एटीएस की जांच जारी- फिलहाल एटीएस पता लगाने में जुटी है कि करीब 1.80 करोड़ रुपये आखिर किन लोगों को भेजे गए। यह जांच बेहद संवेदनशील हो गई है क्योंकि मामला सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टेरर फंडिंग से भी जुड़ सकता है। 👉 यह खबर हमें सिर्फ ठगी की कहानी नहीं बताती, बल्कि यह भी सिखाती है कि भावनाओं के नाम पर आंख मूंदकर दान करने से पहले हमें जांच-पड़ताल जरूर करनी चाहिए। ग़ाज़ा के लोग सचमुच मदद के मोहताज हैं, लेकिन उनकी मासूमियत पर डाका डालने वाले ऐसे ठग मानवता के सबसे बड़े गुनहगार हैं।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ