मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौहरगंज क्षेत्र में 21 नवंबर की रात को हुई 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी केवल एक जघन्य अपराध की नहीं, बल्कि उस टूटे हुए भरोसे की है जिसका फायदा उठाकर एक शैतान ने एक मासूम की जिंदगी और एक परिवार के विश्वास को तार-तार कर दिया। पीड़िता इस समय भोपाल के एम्स (AIIMS) अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच एक मुश्किल जंग लड़ रही है, जबकि आरोपी सलमान खान (23) पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिससे गौहरगंज में जन-आक्रोश उबल पड़ा है और लोग आरोपी के एनकाउंटर की मांग कर रहे हैं।
यह पूरा मामला पुलिस और स्वास्थ्य प्रशासन की गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था को भी उजागर करता है, जिसके कारण बच्ची को तीन घंटे देर से इलाज मिला। डॉक्टरों का कहना है कि यह देरी ही कई जटिल सर्जरी का कारण बनी।
यह विस्तृत आलेख 21 नवंबर की उस खौफनाक शाम के घटनाक्रम, बच्ची के पिता का दर्दनाक अनुभव, आरोपी सलमान खान की 'टॉफी वाले अंकल' की झूठी छवि, माँ का हृदय विदारक बयान, स्वास्थ्य अव्यवस्था की कहानी और गौहरगंज में बढ़ते जन-आक्रोश का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
पीड़िता के पिता के लिए 21 नवंबर की रात वह काला अध्याय बन गई, जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। उनकी 6 साल की बेटी, जो दूसरी कक्षा में पढ़ती है, उनके सीने से लिपटकर ही बेहोश हो गई थी।
आरोपी की उपस्थिति: बच्ची के पिता बताते हैं कि शाम के करीब साढ़े 5 बजे आरोपी सलमान खान उनके घर के पास आया था। सलमान उनकी कॉलोनी में अक्सर आता-जाता था और बच्चों को चॉकलेट देता था।
सामान्य बातचीत: 21 नवंबर को भी वह आया और पिता से पूछा—'कैसे हो?' पिता ने कहा—'ठीक हूं।' कुछ मिनट बाद सलमान चला गया और पिता खाने के लिए अंदर चले गए।
अविश्वास का पर्दा: पिता ने स्वीकार किया कि उन्हें जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह शख्स, जिस पर कॉलोनी के लोग भरोसा करते थे, एक घंटे बाद ही एक शैतान बनकर उनकी बेटी की जिंदगी उजाड़ने वाला था।
खेलने गई: करीब एक घंटे बाद, शाम 6:30 बजे, उनकी 6 साल की बेटी खेलने के लिए बाहर निकली। उसने माँ से कहा कि वह पड़ोस वाली आंटी को टमाटर देकर आएगी और फिर खेलने जाएगी।
तलाश शुरू: शाम के 7:30 बजे तक जब बेटी नहीं लौटी, तो माता-पिता चिंतित हुए और आस-पड़ोस में उसे ढूंढना शुरू किया।
पिता का इंतजार: रात करीब 8 बजे पिता बेटी को ढूंढते हुए घर के बाहर सड़क पर खड़े थे।
लहू-लुहान मासूम: तभी पिता की नजर उस मंजर पर पड़ी जिसने उन्हें स्तब्ध कर दिया। उनकी बेटी सामने वाली सड़क से लड़खड़ाती हुई आ रही थी। उसने सिर्फ ऊपर कुर्ती पहन रखी थी और वह पूरी तरह खून से लथपथ थी।
अंतिम सहारा: बच्ची उन्हें देखते ही जोर से 'पापा' चिल्लाई और दौड़कर उनके सीने से ऐसे लिपटी जैसे जान बचाने के लिए आखिरी सहारा मिल गया हो।
दर्दनाक बयान: बेहोश होने से पहले मासूम ने अपनी टूटी हुई आवाज में केवल इतना ही कह पाई, "जो अंकल शाम को आए थे, वही मुझे जंगल में ले गए, थोड़ा आगे, और मेरा मुंह दबा दिया।" इतना कहते ही वह पिता के हाथों में बेहोश होकर गिर पड़ी। पिता के लिए यह मंजर जिंदगीभर न भूल पाने वाला सदमा बन गया।
आरोपी सलमान खान एक ऐसा दरिंदा निकला जिसने लोगों के विश्वास का फायदा उठाकर अपराध को अंजाम दिया।
पिछला काम: पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपी सलमान खान पहले राजा भैया के क्रेशर पर काम करता था।
नौकरी छूटी: उसके खराब आचरण और बुरी आदतों के कारण राजा भैया ने उसे नौकरी से निकाल दिया था।
आवारा घूमना: नौकरी छूटने के बाद वह आवारा घूमने लगा और पिछले एक-दो महीनों से पीड़िता की कॉलोनी के आसपास ही रह रहा था।
रणनीति: सलमान खान जानबूझकर कॉलोनी के लोगों से घुलता-मिलता था, खासकर बच्चों से, ताकि कोई उस पर शक न करे।
छवि निर्माण: उसने खुद को बच्चों के बीच "टॉफी वाले अंकल" की छवि में स्थापित कर लिया था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर जंगल की ओर ले जाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।
पीड़िता की माँ के लिए अपनी लाड़ली बेटी की ऐसी हालत देखना असहनीय था। उनके बयान में सलमान की क्रूरता स्पष्ट झलकती है।
परिवार: माँ ने रुंधे गले से बताया कि उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं, और पीड़िता उनकी सबसे छोटी और लाड़ली बेटी है, जो दूसरी कक्षा में पढ़ती है।
परिचित आरोपी: उनके बच्चे आरोपी सलमान को पहले से जानते थे, क्योंकि वह अक्सर घर के पास आता-जाता था और टॉफियां लाता था।
माँ ने उस रात के खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि बच्ची के साथ बहुत मारपीट भी की गई थी:
सूजे हुए गाल: "उसके दोनों गाल इतने लाल और सूज गए थे, मानो किसी ने उसे बार-बार और बहुत जोर से थप्पड़ मारे हों।"
अन्य चोटें: उसके दोनों घुटनों और हाथों पर गहरे चोट और छिलने के निशान थे। उसकी कमर भी बुरी तरह छिल गई थी।
भयानक चोट: माँ ने बताया कि सबसे भयानक चोटें उसके निजी अंगों पर थीं, जो इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टरों को तुरंत कई सर्जरी करनी पड़ीं।
माँ ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्ची को होश आ गया है और वह टूटी-फूटी बातें कर पा रही है। हालांकि, उसे अभी भी कई दिन तक अस्पताल में रखा जाएगा।
इस जघन्य मामले में सबसे बड़ी लापरवाही स्वास्थ्य प्रशासन की अव्यवस्था में सामने आई, जिसके कारण बच्ची को महत्वपूर्ण तीन घंटे देर से इलाज मिला।
पहली देरी: पीड़िता को सबसे पहले गौहरगंज के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे तुरंत औबेदुल्लागंज रेफर कर दिया।
भीड़ और अव्यवस्था: जब पीड़ित को अस्पताल ले जाया गया, तब वहां 600-700 लोगों की भीड़ जमा थी। सबसे बड़ी अव्यवस्था गौहरगंज अस्पताल में सामने आई।
बीएमओ की लापरवाही: बीएमओ अमृता जीवने ड्यूटी पर नहीं थी। सूत्रों ने बताया कि बीएमओ ने एसडीएम से कहा कि उनके पास डायल 108 एम्बुलेंस में पेट्रोल तक भरवाने के लिए पैसे नहीं हैं और एम्बुलेंस भी बेकार पड़ी है।
एम्बुलेंस की व्यवस्था: सरकारी एम्बुलेंस की अनुपलब्धता के कारण अंततः सागर फैक्ट्री से एम्बुलेंस अरेंज करवाई गई।
तीन घंटे का नुकसान: इसी अव्यवस्था और एम्बुलेंस अरेंज करने की जद्दोजहद के कारण, बच्ची को औबेदुल्लागंज से भोपाल के एम्स निकलने में ही तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया।
डॉक्टरों का बयान: डॉक्टरों का कहना है कि तीन घंटे की इस देरी के कारण बच्ची का अत्यधिक खून बह चुका था, जिसकी वजह से उसके अंगों में गंभीर क्षति हुई और इतनी जटिल सर्जरी की नौबत आई।
भोपाल एम्स में डॉक्टरों की एक टीम बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए अथक प्रयास कर रही है, लेकिन उसका आगे का सफर लंबा और दर्दनाक है।
क्षति: डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे।
नई व्यवस्था: शनिवार को डॉक्टरों ने सर्जरी की। उन्हें मजबूरी में प्राइवेट पार्ट तक जाने वाली नसों को बायपास करके नई व्यवस्था तैयार करनी पड़ी, ताकि मोशन पास हो सके और क्षतिग्रस्त अंगों की हीलिंग शुरू हो सके।
आईसीयू में: बच्ची फिलहाल आईसीयू में है और बातचीत कर पा रही है, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से गहरे सदमे में है।
इन्फेक्शन का डर: डॉक्टर उसे अभी तक डिस्चार्ज नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इन्फेक्शन फैलने का डर है।
भविष्य की सर्जरी: हीलिंग पूरी होने के बाद उसकी दो और सर्जरी होनी बाकी हैं।
लंबी रिकवरी: पूरी रिकवरी में कम से कम छह महीने लगेंगे। डॉक्टर इस बात को लेकर आशंकित हैं कि वह पूरी तरह सामान्य हो पाएगी या नहीं।
एक तरफ एम्स में मासूम जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है, वहीं दूसरी ओर गौहरगंज में जन-आक्रोश उबल पड़ा है।
हुजूम: पिछले 5 दिनों से गौहरगंज थाने के सामने सैकड़ों लोगों का हुजूम जमा है।
पुलिस पर सवाल: प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे होता। आरोपी की फरारी ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ही मांग: प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। उनकी बस एक ही मांग है: 'सलमान को फांसी दो' या 'उसका एनकाउंटर करो', ताकि उसने बच्ची के साथ जो बेरहमी की, उसे भी सरेआम सजा दी जाए।
यह जघन्य अपराध न केवल एक परिवार पर टूटी विपत्ति है, बल्कि यह कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और समाज के टूटे हुए भरोसे का प्रतीक है। जब तक आरोपी पकड़ा नहीं जाता और उसे सरेआम कठोर सजा नहीं मिलती, गौहरगंज में यह जन-आक्रोश शांत होने वाला नहीं है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
पूर्व अधिकारियों के लिए 20 साल का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड'? जनरल नरवणे की अनपब्लिश किताब से शुरू हुआ नया राष्ट्रीय विवाद नई दिल्ली | 14 फरवरी 2026 भारत सरकार सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवा से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने के नियमों में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, अब रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान वे अपनी सर्विस से जुड़ी किसी भी संवेदनशील जानकारी या घटनाओं पर आधारित पुस्तक प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। यह मुद्दा पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” (Four Stars of Destiny) को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच गरमाया है। 1. कैबिनेट में उठी कूलिंग-ऑफ पीरियड की मांग हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आधिकारिक एजेंडे से हटकर इस विषय पर चर्चा हुई। मंत्रियों की राय: कई वरिष्ठ मंत्रियों ने सुझाव दिया कि सैन्य और खुफिया सेवाओं जैसे अति-संवेदनशील पदों से रिटायर होने वाले अधिकारियों के लिए किताब लिखने से पहले एक लंबी समय-सीमा तय होनी चाहिए। उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करने वाली गोपनीय जानकारियों को 'समय से पहले' सार्वजनिक होने से रोकना है। संभावित आदेश: हालांकि अभी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही इस पर नए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। 2. जनरल नरवणे की किताब: विवाद की जड़ क्या है? जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" जनवरी 2024 में रिलीज होनी थी, लेकिन यह रक्षा मंत्रालय के पास अटकी हुई है। विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: लद्दाख सीमा विवाद (2020): किताब में कथित तौर पर दावा किया गया है कि 31 अगस्त 2020 को कैलाश रेंज में चीनी उकसावे का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से तत्काल कोई राजनीतिक निर्देश नहीं मिला था। सेना को अपने स्तर पर निर्णय लेने पड़े थे। अग्निपथ योजना: किताब के कुछ अंशों में 'अग्निपथ योजना' (अग्निवीर) के शुरुआती प्रस्ताव और कार्यान्वयन को लेकर भी खुलासे होने की बात कही गई है, जिसे सरकार असहज मान रही है। गैर-कानूनी सर्कुलेशन: राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब का जिक्र करने के बाद इसका PDF और मैन्युस्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर लीक हो गई। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है और कॉपीराइट उल्लंघन की जांच कर रही है। 3. वर्तमान नियम और कानून की स्थिति अभी रिटायर अधिकारियों के लिए निम्नलिखित कानूनी प्रावधान लागू होते हैं: नियम/कानून विवरण CCS Rules 1972 (2021 संशोधन) संवेदनशील या सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रकाशित करने से पहले संबंधित विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (OSA) राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय डेटा को सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है। डिफेंस मिनिस्ट्री क्लियरेंस सैन्य अधिकारियों के लिए अपनी सर्विस लाइफ पर किताब लिखने के लिए सेना और मंत्रालय से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लेना होता है। 4. राहुल गांधी और 'किताब राजनीति' नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 4 फरवरी को संसद में किताब की एक प्रति (Copy) दिखाकर सरकार को घेरा था। उनका तर्क है कि जब किताब के प्री-ऑर्डर लिंक उपलब्ध थे और कुछ अंश न्यूज़ एजेंसियों ने छापे थे, तो इसे 'अनपब्लिश' मानकर चर्चा से रोकना गलत है। वहीं, सरकार का कहना है कि बिना क्लियरेंस के किसी संवेदनशील किताब के अंशों का राजनीतिक उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है। 5. क्या होगा 20 साल के नियम का असर? अगर 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होता है, तो: मेमॉयर (संस्मरण) पर रोक: कोई भी पूर्व सचिव, सेना प्रमुख या खुफिया एजेंसी का प्रमुख अपनी सेवा के अनुभव 20 साल तक नहीं लिख पाएगा। ऐतिहासिक रिकॉर्ड की कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समकालीन इतिहास के सैन्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण लुप्त हो सकते हैं। गोपनीयता की सुरक्षा: सरकार का मानना है कि 20 साल बाद कई संवेदनशील अभियान 'डिक्लासिफाइड' हो जाते हैं, तब उनका खुलासा करना देश के लिए कम जोखिम भरा होता है।
संसद में महासंग्राम: राहुल गांधी की सदस्यता पर 'लाइफटाइम बैन' की मांग; निशिकांत दुबे का 'सब्सटेंसिव मोशन' और 'चैंबर हंगामे' के वीडियो पर छिड़ी जंग नई दिल्ली | 12 फरवरी 2026 संसद के बजट सत्र का 12वां दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे तीखे टकरावों में से एक के रूप में दर्ज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। जहाँ एक ओर उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए 'सब्सटेंसिव मोशन' पेश किया गया है, वहीं दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक 'लीक' वीडियो के जरिए विपक्ष पर स्पीकर के अपमान का गंभीर आरोप लगाया है। यहाँ आज के घटनाक्रम और संसद के भीतर-बाहर चल रहे घमासान का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. निशिकांत दुबे का बड़ा दांव: राहुल गांधी पर 'लाइफटाइम बैन' की मांग भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक 'सब्सटेंसिव मोशन' (Substantive Motion) पेश किया। आरोप: दुबे का दावा है कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी विदेशी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं और संसद में लगातार झूठ बोल रहे हैं। मांग: उन्होंने मांग की है कि न केवल राहुल की संसद सदस्यता रद्द की जाए, बल्कि उन पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध (Lifetime Ban) लगाया जाए। क्या होता है सब्सटेंसिव मोशन? यह एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर प्रस्ताव होता है, जो किसी गंभीर मामले (जैसे राष्ट्रपति, जज या सांसद के आचरण) पर सदन की राय या फैसला लेने के लिए लाया जाता है। 2. किरेन रिजिजू का वीडियो बम: "स्पीकर के चैंबर में दी गईं गालियां" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर 4 फरवरी का एक वीडियो साझा किया, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। दावा: रिजिजू का कहना है कि 20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में जबरन घुसे, उन्हें गालियां दीं और प्रधानमंत्री को धमकियां दीं। प्रियंका गांधी पर निशाना: रिजिजू ने आरोप लगाया कि यह सब प्रियंका गांधी की मौजूदगी में हुआ और उन्होंने सांसदों को उकसाया। प्रियंका की सफाई: प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "गाली देने वाली बात सरासर झूठ है। मैं वहां चुपचाप बैठी थी और अंत में केवल शांति से अपनी बात रखी थी।" 3. ट्रेड डील पर पीयूष गोयल का राहुल को जवाब राहुल गांधी द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को 'किसानों के साथ गद्दारी' बताने पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभाला: तथ्यों की सुरक्षा: गोयल ने स्पष्ट किया कि डील में 90-95% कृषि उत्पाद (डेयरी, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, मक्का, दालें आदि) पूरी तरह बाहर रखे गए हैं ताकि भारतीय किसानों को कोई नुकसान न हो। हमला: गोयल ने कहा, "राहुल गांधी झूठ का पुलिंदा हैं। वे देश को तेजी से आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकते और विकास के खिलाफ हैं।" 4. राहुल गांधी का मीडिया पर पलटवार: "आप भाजपा के लिए काम कर रहे हैं" संसद के बाहर जब मीडिया ने राहुल गांधी से 'प्रिविलेज मोशन' पर सवाल पूछा, तो वे भड़क गए: मीडिया की भूमिका पर सवाल: राहुल ने पत्रकारों से कहा, "क्या आज का कोड वर्ड 'प्रिविलेज मोशन' है? कल 'ऑथेंटिकेट' था। आप लोग पूरी तरह भाजपा के लिए काम कर रहे हैं, थोड़ा तो ऑब्जेक्टिव रहने की कोशिश कीजिए। यह देश के साथ अन्याय है।" अडानी-अंबानी का मुद्दा: राहुल अपनी इस बात पर कायम रहे कि अनिल अंबानी और अडानी के खिलाफ विदेशी फाइलों में सबूत हैं और सरकार उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचा रही है। 5. केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले का पक्ष केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस संगठन महासचिव ने कहा कि सरकार राहुल गांधी की आवाज दबाने के लिए चेयर (स्पीकर) पर दबाव डाल रही है। उन्होंने कहा, "पिछली बार सदस्यता छीनी तो जनता ने और ज्यादा वोट दिए, इस बार फांसी देना चाहते हैं तो दे दें, हम सच बोलते रहेंगे।" सुप्रिया सुले: उन्होंने नए श्रम कानूनों (Labour Code) का विरोध करते हुए कहा कि जब देश के श्रमिक सड़कों पर हड़ताल कर रहे हैं, तब सदन में उनके खिलाफ बिल लाना अन्यायपूर्ण है। 📊 संसद डायरी: 12 फरवरी के मुख्य अपडेट्स समय घटना विवरण 11:15 AM सदन स्थगित विपक्ष के भारी हंगामे और 'ट्रेड डील वापस लो' के नारों के बीच लोकसभा 12 बजे तक स्थगित। 12:10 PM पीएम मोदी की एंट्री प्रधानमंत्री मोदी राज्यसभा पहुंचे, भाजपा सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। 01:30 PM राहुल का बयान राहुल गांधी ने मीडिया को 'ऑब्जेक्टिव' रहने की सलाह दी। 02:15 PM मंडाविया का जवाब श्रम मंत्री ने कहा कि नए लेबर कोड का हड़ताल से ज्यादा समर्थन हो रहा है। 02:30 PM पीएम की तारीफ मोदी ने निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के जवाब की सराहना की। 6. राहुल गांधी की सदस्यता का कानूनी इतिहास यह पहली बार नहीं है जब राहुल की सदस्यता पर तलवार लटकी है: मार्च 2023: 'मोदी सरनेम' केस में 2 साल की सजा के बाद उनकी सदस्यता रद्द हुई थी। अगस्त 2023: सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद सदस्यता बहाल हुई। नया संकट: निशिकांत दुबे का 'सब्सटेंसिव मोशन' यदि स्वीकार होता है, तो यह राहुल गांधी के राजनीतिक करियर के लिए अब तक की सबसे बड़ी कानूनी और संवैधानिक चुनौती बन सकता है।
संसद में महासंग्राम: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का ऐतिहासिक कदम; 'नरवणे बुक' और बजट पर घमासान नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026 भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। बजट सत्र के 10वें दिन विपक्ष ने एक बड़ा संवैधानिक दांव खेलते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस पेश कर दिया। उधर, सदन के बाहर पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच 'जुबानी जंग' तेज हो गई है। यहाँ आज की संसदीय कार्यवाही और विवादों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है: 1. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: मुख्य वजह और प्रक्रिया विपक्ष ने लोकसभा सचिवालय को दोपहर 1:14 बजे आधिकारिक नोटिस सौंपा। इस कदम के पीछे की कूटनीति और नियम निम्नलिखित हैं: आरोप: प्रस्ताव में कहा गया है कि स्पीकर ओम बिरला खुलेआम 'एकतरफा' तरीके से सदन चला रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों (जैसे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव) पर बोलने नहीं दिया गया और विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए 8 सांसदों को मनमाने ढंग से सस्पेंड किया गया। नोटिस पर हस्ताक्षर: कुल 118 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कांग्रेस, सपा, डीएमके और वामपंथी दल शामिल हैं। TMC का रुख: दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने फिलहाल इस नोटिस पर साइन नहीं किए हैं। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे प्रस्ताव का समर्थन करते हैं लेकिन स्पीकर को जवाब देने के लिए 1-2 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं: सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने खुद इस नोटिस पर साइन नहीं किए हैं, जो एक सोची-समझी रणनीतिक दूरी हो सकती है। संवैधानिक प्रावधान: यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत दिया गया है। स्पीकर ने सेक्रेटरी जनरल को इस नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया है। 2. सदन की कार्यवाही: हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल मंगलवार को लोकसभा में कामकाज के नाम पर केवल शोर-शराबा ही देखने को मिला: 11:00 AM: सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में आ गए। महज 1 मिनट में कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। विशेष बात यह थी कि आज स्पीकर की कुर्सी पर ओम बिरला नहीं, बल्कि पीसी मोहन बैठे थे। 12:00 PM: दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष ने 'वी वॉन्ट जस्टिस' के नारे जारी रखे। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने हाथ जोड़कर विपक्ष से बजट पर चर्चा करने की विनती की, लेकिन शोर नहीं थमा और सदन 2 बजे तक स्थगित हो गया। 02:00 PM: तीसरी बार कार्यवाही शुरू होने पर केपी तेनेट्टी ने चेयर संभाली। हंगामे के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की। 3. 'नरवणे बुक' कॉन्ट्रोवर्सी: राहुल गांधी का बड़ा बयान सदन के बाहर राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर सरकार को घेरा: "या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन (पब्लिशर)। नरवणे ने खुद X पर पोस्ट किया था कि किताब उपलब्ध है। मैं पेंगुइन के बजाय एक पूर्व आर्मी चीफ की बात पर विश्वास करना चुनूंगा। सरकार इस किताब से डरी हुई है क्योंकि इसमें अग्निवीर, चीन विवाद और इंडो-US ट्रेड डील से जुड़ी असुविधाजनक बातें हैं।" उधर, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जब पब्लिशर कह रहा है कि किताब छपी ही नहीं, तो राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं। 📊 बजट चर्चा: शशि थरूर और अखिलेश यादव के प्रहार जब 2 बजे बजट पर चर्चा शुरू हुई, तो विपक्ष ने सरकार के आर्थिक दावों की धज्जियां उड़ाईं: नेता मुख्य आरोप / बिंदु शशि थरूर सरकार केवल 'हेडलाइन मैनेजमेंट' करती है। जल जीवन और SC विकास योजनाओं का पैसा खर्च ही नहीं हुआ। आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है। अखिलेश यादव यह बजट 'दिशाहीन' है। 11 साल से बजट आ रहा है लेकिन लोगों की आय नहीं बढ़ी। सरकार बताए कि '0' बड़ा है या '18' (टैक्स कटौती का संदर्भ)। अखिलेश यादव यूपी के लिए इस बजट में कुछ नहीं है। यूएस डील के बाद विदेशी माल आएगा, तो हमारे किसान क्या उगाएंगे? 4. सत्ता पक्ष का बचाव और जवाबी हमला किरेन रिजिजू का वीडियो: रिजिजू ने 4 फरवरी के हंगामे का वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद गुंडागर्दी कर रहे थे और पीएम की सीट तक पहुंच गए थे। गिरिराज सिंह का प्रहार: उन्होंने नेहरू पर कश्मीर को गिरवी रखने का आरोप लगाया और कहा कि राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। संख्या बल: रिजिजू ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के पास नंबर नहीं हैं, इसलिए वे अविश्वास प्रस्ताव के जरिए स्पीकर को हटा नहीं पाएंगे, वे केवल ड्रामा कर रहे हैं।