इंदौर-मुंबई हाईवे पर भीषण हादसा: अनियंत्रित ट्रक ने 7 वाहनों को रौंदा; कारों पर चढ़े टैंकर, एयरबैग्स ने बचाई 8 लोगों की जान इंदौर के महू स्थित मानपुर भेरू घाट पर शनिवार सुबह एक रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा हुआ। मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पर एक तेज रफ्तार ट्रक के ब्रेक फेल होने के कारण 7 वाहन आपस में टकरा गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रक और गैस टैंकर कारों के ऊपर चढ़ गए, जिससे हाईवे पर घंटों लंबा जाम लग गया। 1. ढलान पर 'मौत' बनकर दौड़ा ट्रक प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, मानपुर भेरू घाट का यह हिस्सा करीब 2 किलोमीटर लंबी ढलान वाला है। ब्रेक फेल का कहर: इंदौर से हैदराबाद जा रहे एक ट्रक के अचानक ब्रेक फेल हो गए। ढलान होने के कारण ट्रक की रफ्तार बेकाबू हो गई। चेन रिएक्शन: अनियंत्रित ट्रक सबसे पहले आगे चल रहे आयशर वाहन में घुसा। इसके बाद आयशर ने आगे खड़ी कार को टक्कर मारी और देखते ही देखते पिकअप, ट्रेलर और गैस टैंकर सहित 7 वाहन एक-दूसरे में समा गए। ट्रक ड्राइवर का दावा: ड्राइवर मोहम्मद आरिफ ने बताया कि उसने भीड़भाड़ वाली सर्विस लेन से बचने के लिए ट्रक को दूसरी तरफ मोड़ा ताकि जानमाल का नुकसान कम हो। 2. चमत्कार: एयरबैग्स और किस्मत ने बचाई जिंदगियां हादसे की तस्वीरें जितनी डरावनी हैं, राहत की बात उतनी ही सुखद है कि इस भीषण भिड़ंत में किसी की जान नहीं गई। कार में थे 4 बच्चे: उज्जैन से त्र्यंबकेश्वर जा रहे जयदीप की कार में 8 लोग सवार थे, जिनमें 4 बच्चे शामिल थे। जयदीप ने बताया कि पीछे से जोरदार टक्कर लगते ही उनकी कार के एयरबैग्स खुल गए, जिससे सभी सुरक्षित बच गए। पिकअप पलटी: राजस्थान के रघुवीर ने बताया कि जाम में खड़ी उनकी कार पर टक्कर के बाद एक पिकअप आकर पलट गई, लेकिन वे भी बाल-बाल बच गए। 📊 हादसे का विवरण: एक नजर में श्रेणी विवरण स्थान मानपुर भेरू घाट, महू (इंदौर), मुंबई-आगरा हाईवे समय शनिवार सुबह, 10 जनवरी 2026 वाहनों की संख्या 7 (ट्रक, टैंकर, ट्रेलर, आयशर, पिकअप और कारें) कारण ट्रक के ब्रेक फेल होना और घाट की ढलान जनहानि शून्य (कोई घायल या मृत नहीं) 3. हाईवे पर लगा घंटों लंबा जाम टक्कर के बाद वाहनों का मलबा और गैस टैंकर के सड़क पर फंसे होने के कारण मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे पूरी तरह बंद हो गया। प्रशासनिक कार्रवाई: मानपुर थाना प्रभारी लोकेंद्र हीहोर ने बताया कि क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का काम जारी है। पाइप लोड ट्रॉले का केबिन पूरी तरह पिचक गया है, जिसे निकालने में मशक्कत करनी पड़ रही है। यातायात: पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से रूट डायवर्ट किया है ताकि यात्रियों को ढलान पर फंसे होने से बचाया जा सके।
इंदौर जल संकट: "स्वच्छ शहर की छवि को गहरा घाव"; हाईकोर्ट ने कहा- दोषियों पर तय होगी क्रिमिनल लायबिलिटी, पीड़ितों को मिलेगा और मुआवजा 1. हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी: "इंदौर अब चर्चा का गलत विषय" जस्टिस की खंडपीठ ने मंगलवार को 5 जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। कोर्ट के तेवर बेहद सख्त थे: छवि का नुकसान: कोर्ट ने कहा कि जो इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर (Cleanest City) होने का गौरव रखता है, वह आज दूषित पानी से मौतों के कारण पूरे भारत में शर्मिंदा हो रहा है। मौलिक अधिकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पेयजल जनता का मौलिक अधिकार है। इससे समझौता 'अपराध' की श्रेणी में आता है। क्रिमिनल लायबिलिटी: हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि लापरवाही सिद्ध हुई तो नगर निगम और प्रशासन के अधिकारियों पर न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि सिविल और क्रिमिनल केस भी दर्ज किए जाएंगे। मुआवजे पर पुनर्विचार: सरकार द्वारा घोषित मुआवजे को कोर्ट ने कम माना है और इसके बढ़ाने के संकेत दिए हैं। 2. प्रशासन की लापरवाही के 3 बड़े खुलासे सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट के सामने चौंकाने वाले तथ्य रखे: पुराने आदेश की अवमानना: 31 दिसंबर 2025 को भी कोर्ट ने निर्देश दिए थे, लेकिन उन पर अमल नहीं हुआ। फंड की कमी का बहाना: 2022 में महापौर ने नई पाइपलाइन का प्रस्ताव पास किया था, लेकिन बजट न मिलने के कारण काम लटका रहा। प्रदूषण बोर्ड की पुरानी रिपोर्ट: 2017-18 में इंदौर के 60 में से 59 पानी के सैंपल फेल हुए थे, फिर भी प्रशासन सोता रहा। 📊 भागीरथपुरा स्वास्थ्य बुलेटिन: वर्तमान स्थिति विवरण आंकड़े / स्थिति कुल मौतें 17 (अब तक) नए मामले (मंगलवार) 38 नए मरीज कुल अस्पताल में भर्ती 110 मरीज डिस्चार्ज हुए मरीज 311 लोग गंभीर मरीज (ICU) 15 मरीज 3. सियासी रण: भागीरथपुरा बना 'छावनी', पटवारी-सिंघार की पुलिस से भिड़ंत दोपहर करीब एक बजे भागीरथपुरा में भारी हंगामा हुआ। बैरिकेडिंग और वज्र वाहन: पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया था ताकि कांग्रेस नेताओं को रोका जा सके। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार का दौरा: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष ने भारी विरोध के बीच बैरिकेड्स लांघकर पीड़ितों के घर का रुख किया। उनकी पुलिस अधिकारियों से काफी बहस भी हुई। इस्तीफे की मांग: जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की। आर्थिक सहायता: पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने भी अपनी ही सरकार से मृतकों के लिए 5 लाख रुपए मुआवजे की मांग कर डाली है। 4. हाईकोर्ट का '7 सूत्रीय' एक्शन प्लान कोर्ट ने इस पूरे मामले को सुलझाने और जवाबदेही तय करने के लिए 7 श्रेणियां बनाई हैं: आपात निर्देश: प्रभावितों को तुरंत इलाज और टैंकर से पानी। सुधारात्मक उपाय: पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत। जिम्मेदारी: किसकी गलती से गंदा पानी नर्मदा लाइन में मिला? अनुशासनात्मक कार्रवाई: लापरवाह अधिकारियों को निलंबित करना। मुआवजा: उचित आर्थिक सहायता तय करना। स्थानीय निकाय निर्देश: नगर निगम के लिए नए प्रोटोकॉल। पारदर्शिता: जनता को पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट रोज बताना।
इंदौर भागीरथपुरा जल संकट: अब तक 17 की मौत; AIIMS और ICMR की टीमें जांच में जुटीं, हाईकोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट 1. ताजा अपडेट: 17वीं मौत और किडनी फेल्योर का मामला धार के रहने वाले रिटायर्ड पुलिसकर्मी ओमप्रकाश शर्मा (69) की रविवार को मौत हो गई। वे अपने बेटे से मिलने इंदौर आए थे। कारण: डॉक्टरों के अनुसार, दूषित पानी पीने के कारण उन्हें गंभीर डायरिया हुआ, जिससे उनकी किडनी खराब हो गई। वेंटिलेटर पर रहने के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल की स्थिति: वर्तमान में 142 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जारी है। बॉम्बे हॉस्पिटल के आईसीयू में अभी भी 7 मरीज जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। 2. प्रशासन की कार्रवाई और डिजिटल सर्वे कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्मार्ट सिटी कार्यालय में समीक्षा बैठक की। डिजिटल सर्वे: सोमवार से घर-घर डिजिटल सर्वे शुरू किया गया है। ऐप के जरिए डेटा लिया जा रहा है कि किस घर में कौन सा पानी (नर्मदा, बोरिंग या टैंकर) इस्तेमाल हो रहा है और परिवार में कितने लोग बीमार हैं। वैज्ञानिक जांच: कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष और डॉ. गौतम चौधरी वैज्ञानिक तरीके से पानी के रैंडम सैंपल ले रहे हैं ताकि संक्रमण के सटीक स्रोत का पता लगाया जा सके। मरम्मत: नर्मदा पाइपलाइन और बोरिंग लीकेज को सुधारने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। वर्तमान में पेयजल की आपूर्ति टैंकरों द्वारा की जा रही है। 📊 चिकित्सा शब्दावली का अंतर: आउटब्रेक, एपिडेमिक और पैंडेमिक आम जनता के बीच भ्रम को दूर करने के लिए विशेषज्ञों ने इन तीन स्थितियों के बीच का अंतर स्पष्ट किया है: स्थिति क्षेत्र का दायरा उदाहरण आउटब्रेक (Outbreak) बहुत छोटा और स्थानीय क्षेत्र (जैसे एक मोहल्ला)। भागीरथपुरा की वर्तमान स्थिति। एपिडेमिक (Epidemic) एक बड़ा क्षेत्र या पूरा शहर/राज्य। किसी राज्य में अचानक फैला डेंगू या मलेरिया। पैंडेमिक (Pandemic) कई देश, महाद्वीप या पूरी दुनिया। कोविड-19। 3. हाईकोर्ट में सुनवाई और सरकार का पक्ष इंदौर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मंगलवार को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में विस्तृत रिपोर्ट पेश करेगा। विवाद: जहाँ एक ओर मीडिया रिपोर्ट्स में सरकार द्वारा 'महामारी' स्वीकारने की बात कही जा रही है, वहीं सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी का कहना है कि यह 'महामारी' नहीं बल्कि 'आउटब्रेक' है। इसी आधार पर स्वास्थ्यकर्मियों की रद्द की गई छुट्टियाँ फिर से बहाल कर दी गई हैं। 🛡️ बचाव के उपाय: दूषित पानी से कैसे बचें? जब तक पाइपलाइन पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाती, विशेषज्ञ निम्नलिखित सुझाव दे रहे हैं: पानी उबालें: पानी को कम से कम 20 मिनट तक उबालकर ही पिएं। क्लोरीन का उपयोग: पानी को शुद्ध करने के लिए सरकारी क्लोरीन की गोलियों का इस्तेमाल करें। बाहरी भोजन से बचें: कटे हुए फल और बाहर की बर्फ/जूस से परहेज करें। लक्षणों को पहचानें: उल्टी-दस्त होने पर तुरंत ओआरएस (ORS) लें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुँचें।
💧 इंदौर जल त्रासदी: प्रशासनिक गाज, राहुल-खरगे का प्रहार और उमा भारती की 'परीक्षा' 1. प्रशासनिक हड़कंप: कमिश्नर को नोटिस, एडिशनल कमिश्नर बर्खास्त इंदौर नगर निगम की घोर लापरवाही के कारण हुई मौतों पर अब मुख्यमंत्री सचिवालय सख्त नजर आ रहा है। कारण बताओ नोटिस: निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को गंभीर लापरवाही के लिए 'शो-कॉज' नोटिस जारी किया गया है। बड़ी कार्रवाई: एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया को तत्काल प्रभाव से इंदौर से हटा दिया गया है। साथ ही, जल वितरण विभाग के प्रभारी सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से उनका प्रभार छीन लिया गया है। NHRC का हस्तक्षेप: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को अल्टीमेटम देते हुए 2 सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। 2. मौतों के आंकड़ों पर 'सफेद झूठ' का आरोप मध्य प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की है, उसने विवाद को और हवा दे दी है। सरकार का दावा: रिपोर्ट में केवल 4 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है। जमीनी हकीकत: स्थानीय निवासियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अस्पतालों के आंकड़ों के अनुसार अब तक 15 लोगों (5 महीने के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक) की जान जा चुकी है। हाईकोर्ट की सुनवाई: अगली सुनवाई 6 जनवरी को होनी है। इस बीच, मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की मांग वाली अर्जी पर कोर्ट ने फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की है। 3. राहुल गांधी का हमला: "मध्य प्रदेश कुप्रशासन का एपिसेंटर" नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस घटना को 'अधिकारों की हत्या' करार दिया है। राहुल के तीखे सवाल: उन्होंने पूछा कि जब लोग बार-बार गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, तो सप्लाई बंद क्यों नहीं की गई? सीवर का पानी पीने के पाइप में कैसे मिला? अहंकार बनाम संवेदना: राहुल ने कहा कि भाजपा के नेता सांत्वना देने के बजाय अहंकारी बयान दे रहे हैं। उन्होंने इसे 'डबल इंजन' सरकार की विफलता बताया। 4. मल्लिकार्जुन खरगे और उमा भारती के कड़े रुख खरगे का प्रहार: कांग्रेस अध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि मोदी जी 'स्वच्छ भारत' का ढिंढोरा पीटते हैं, लेकिन इंदौर की मौतों पर मौन हैं। उन्होंने इसे "लंबे-चौड़े भाषणों और झूठ-प्रपंच" की सरकार बताया। उमा भारती की चेतावनी: पूर्व सीएम उमा भारती ने अपनी ही सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि ₹2 लाख का चेक किसी की जिंदगी की कीमत नहीं हो सकता। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री मोहन यादव के लिए "परीक्षा की घड़ी" बताया और दोषियों को अधिकतम दंड देने की मांग की।
इंदौर जल त्रासदी: सरकारी रिपोर्ट में 'जानलेवा बैक्टीरिया' की पुष्टि; 14 मौतें और 1400 बीमार 1. मेडिकल रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: पाइपलाइन लीकेज बनी 'काल' इंदौर के सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने पुष्टि की है कि महात्मा गांधी मेमोरियल (MGM) मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट आ गई है। पुष्टि: रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि भागीरथपुरा में हुई मौतें और बीमारियां दूषित पानी पीने की वजह से ही हुई हैं। कारण: पाइपलाइन में गंभीर लीकेज के कारण सीवेज या अन्य दूषित पदार्थ पीने के पानी में मिल गए। सांसद शंकर लालवानी के अनुसार, पानी के नमूनों में जानलेवा बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो मानव शरीर के लिए घातक साबित हुए। 2. तबाही का आंकड़ा: स्वच्छता की राजधानी में मातम इंदौर, जो लगातार स्वच्छता में नंबर-1 आता है, वहां की यह स्थिति भयावह है: मृतक: अब तक दूषित पानी के संक्रमण से 14 लोगों की जान जाने की जानकारी सामने आई है। संक्रमित: लगभग 1400 लोग गंभीर इन्फेक्शन के शिकार हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। 3. मंत्री विजयवर्गीय का घेराव: "हमें आपका चेक नहीं चाहिए" जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय स्कूटर से भागीरथपुरा पहुंचे, तो उन्हें भारी जन-आक्रोश का सामना करना पड़ा। महिलाओं की नाराजगी: मंत्री जी 7 मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये के चेक देने पहुंचे थे, लेकिन महिलाओं ने यह कहते हुए चेक लेने से इनकार कर दिया कि "हमें पैसे नहीं, अपनों की जान और साफ पानी चाहिए।" 2 साल की अनदेखी: स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि पिछले 2 साल से गंदा पानी आ रहा था, पार्षद को बार-बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 4. सियासी पारा गर्म: जीतू पटवारी का हमला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री जी ने 'अहंकार' में बहनों की बात तक नहीं सुनी और गाड़ी आगे बढ़ा ली।
⚖️ सत्ता की हनक और न्याय की गुहार: शिवपुरी में बीजेपी नेता के बेटे पर रेप का आरोप, पीड़िता ने किया सुसाइड का प्रयास 1. 🚩 घटना का परिचय: रसूख बनाम एक युवती की जान मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में सत्ता और रसूख के दुरुपयोग का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। शिवपुरी नगर परिषद की अध्यक्ष और बीजेपी नेता गायत्री शर्मा के बेटे रजत शर्मा पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली एक युवती ने न्याय न मिलने और लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश की। युवती ने नींद की गोलियां और चूहे मारने की दवा का सेवन कर लिया, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 2. 📝 छह पन्नों का सुसाइड नोट: "मेरी मौत के जिम्मेदार गायत्री शर्मा और उनका परिवार" आत्महत्या के प्रयास से पहले पीड़िता ने छह पन्नों का एक विस्तृत और मर्मस्पर्शी सुसाइड नोट लिखा। इस नोट में उसने पिछले सात महीनों से झेली जा रही मानसिक प्रताड़ना का कच्चा चिट्ठा खोला है: धोखा और वादाखिलाफी: युवती का आरोप है कि रजत शर्मा ने शादी का वादा कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। परिवार की भूमिका: नोट में लिखा है कि नगर परिषद अध्यक्ष गायत्री शर्मा और उनके पति संजय शर्मा को इस रिश्ते की पूरी जानकारी थी। शुरुआत में उन्होंने रजामंदी दी, लेकिन बाद में मुकर गए। अपमान की पराकाष्ठा: पीड़िता ने लिखा कि जब वह शादी की बात करने गायत्री शर्मा के पास गई, तो उसे त्याग और समर्पण का उपदेश दिया गया और मां-बेटे ने मिलकर उसे गालियां दीं। 3. ⏳ 14 अप्रैल की वो काली तारीख: पुलिस पर दबाव का आरोप सुसाइड नोट में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं: थाने में पांच घंटे का इंतजार: 14 अप्रैल 2025 को जब रजत की सगाई कहीं और तय हो रही थी, पीड़िता कोतवाली थाने में न्याय के लिए पांच घंटे बैठी रही, लेकिन उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। राजनीतिक दबाव: आरोप है कि सत्ताधारी दल से जुड़े होने के कारण पुलिस ने शिकायत लेने में देरी की, जिसका फायदा उठाकर आरोपी की सगाई संपन्न करा दी गई। 4. 💰 50 लाख का ऑफर और धमकियों का सिलसिला युवती ने आरोप लगाया कि मामला दर्ज होने के बाद उसे चुप कराने के लिए हर संभव हथकंडा अपनाया गया: रिश्वत की पेशकश: पीड़िता को 50 लाख रुपये लेकर मामला खत्म करने का लालच दिया गया। रिटायर्ड अफसरों का खौफ: सुसाइड नोट में दावा किया गया है कि राजनेताओं के साथ-साथ रिटायर्ड अधिकारियों और कुछ पुलिसकर्मियों के जरिए उसे और उसके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही थीं। मानसिक तनाव: सात महीनों तक चले इस अपमान और धमकियों के दौर ने युवती को मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा। 5. 👮 पुलिस की सफाई और कानूनी स्थिति शिवपुरी एसपी अमन सिंह राठौर के अनुसार: 14 अप्रैल को शिकायत मिली थी, जिसके बाद 30 अप्रैल 2025 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 (बलात्कार) के तहत FIR दर्ज की गई। पुलिस का दावा है कि चार्जशीट कोर्ट में पेश की जा चुकी है। सुसाइड नोट को जब्त कर लिया गया है और पीड़िता के बयान दर्ज होने के बाद आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 6. 🏛️ पीएम मोदी और सीएम से आखिरी उम्मीद अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश से पहले युवती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को टैग करते हुए न्याय की गुहार लगाई है। यह मामला अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश की न्याय व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह बन गया है।
🚨 गौहरगंज दरिंदगी: आरोपी सलमान खान शॉर्ट एनकाउंटर में घायल, भागने की कोशिश पर लगी गोली; जन-आक्रोश के बीच गिरफ्तारी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और दरिंदगी के आरोपी सलमान खान को आखिरकार गुरुवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन यह गिरफ्तारी एक शॉर्ट एनकाउंटर के साथ हुई। पुलिस जब आरोपी को भोपाल से गौहरगंज ले जा रही थी, तभी उसने भागने की कोशिश की और कथित तौर पर पुलिसकर्मी की पिस्तौल छीनने का प्रयास किया। आत्मरक्षा और जवाबी कार्रवाई में पुलिस को उसे पैर में गोली मारनी पड़ी। आरोपी सलमान का इलाज इस समय भोपाल के हमीदिया अस्पताल में चल रहा है, जहाँ उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। यह घटनाक्रम रायसेन के गौहरगंज क्षेत्र में पिछले छह दिनों से चल रहे जबरदस्त जन-आक्रोश और प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुआ। स्थानीय लोग लगातार आरोपी के एनकाउंटर की मांग कर रहे थे, जिसके चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव को कड़ा रुख अपनाना पड़ा और रायसेन के पुलिस अधीक्षक (SP) को हटाना पड़ा था। यह विस्तृत आलेख आरोपी की गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम, शॉर्ट एनकाउंटर की कहानी, पुलिस और फोरेंसिक साक्ष्य, जन-आक्रोश का चरम, लंदन के बिजनेसमैन द्वारा बच्ची की मदद की पहल, और बच्ची की माँ का हृदय विदारक बयान सहित पूरे मामले का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 🛑 6 दिन की फरारी के बाद आरोपी सलमान खान गिरफ्तार 21 नवंबर को 6 साल की बच्ची से दरिंदगी के बाद आरोपी सलमान खान मौके से फरार हो गया था, जिसके चलते पुलिस पर भारी दबाव था। 1.1. आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी इनाम की घोषणा: आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने ₹30 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया था। फरारी की रणनीति: पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जंगलों के रास्ते पैदल ही भोपाल में दाखिल हुआ था और गांधीनगर इलाके में छिपा हुआ था। गिरफ्तारी का श्रेय: गुरुवार रात पुलिस ने घटना के 6 दिन बाद आरोपी सलमान को भोपाल के गांधी नगर इलाके में एक चाय की दुकान से हिरासत में लिया। नागरिकों की मदद: आरोपी को पकड़वाने में नई बस्ती में रहने वाले अब्दुल, रिजवान और आसिफ नाम के युवकों की अहम भूमिका थी। अब्दुल को सोशल मीडिया पर फोटो देखने के बाद शक हुआ। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। इन युवकों ने बाद में इनाम की राशि लेने से इनकार करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि वह पैसा पीड़ित लड़की को दिया जाए। 1.2. सीएम का कड़ा रुख आरोपी की गिरफ्तारी न होने और प्रदर्शनों के कारण सरकार पर भारी दबाव था। उच्च स्तरीय बैठक: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 26 नवंबर को उच्च अधिकारियों की बैठक ली थी। एसपी पर कार्रवाई: सीएम ने आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने और चक्काजाम पर पुलिस की ढीली कार्रवाई से नाखुशी जताते हुए रायसेन एसपी पंकज पांडेय को तत्काल प्रभाव से हटाकर पुलिस हेडक्वार्टर अटैच करने का निर्देश दिया था। उनकी जगह आशुतोष गुप्ता को रायसेन का नया एसपी बनाया गया था। 2. 🔫 शॉर्ट एनकाउंटर: जंगल में भागने का प्रयास आरोपी सलमान को भोपाल से गौहरगंज पुलिस के हवाले किया गया और उसे गौहरगंज ले जाते समय ही यह शॉर्ट एनकाउंटर हुआ। 2.1. घटनाक्रम का विवरण स्थान और समय: अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश कुमार खरपुसे के मुताबिक, आरोपी को लेकर पुलिस की गाड़ी औबेदुल्लागंज क्षेत्र के जंगल में थी, जब यह घटना रात करीब 3-4 बजे के बीच हुई। गाड़ी पंक्चर: खरपुसे ने बताया कि रास्ते में एक कील के कारण पुलिस की गाड़ी पंक्चर हो गई। बैकअप गाड़ी का इंतजार किया जा रहा था। पिस्तौल छीनने की कोशिश: इसी दौरान आरोपी सलमान ने सुल्तानगंज के थाना प्रभारी श्याम राज की पिस्टल को निकाल लिया और उनके ऊपर पिस्टल चलाने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई: थाना प्रभारी ने अपने बचाव में आरोपी का हाथ पकड़कर पिस्टल ऊपर कर दी, इस दौरान दो फायर हुए। इसके बाद दूसरी टीम ने क्रॉस फायरिंग की। गोली लगी: सलमान भागने का प्रयास कर रहा था। पुलिस ने उसे पैर में गोली मारकर काबू किया। इस संघर्ष में थाना प्रभारी को भी चोट आई और उनका बैच गिर गया। 2.2. फोरेंसिक जांच मौका मुआयना: घटना के बाद भोपाल फॉरेंसिक साइंस लैब के इंचार्ज डॉक्टर एके बड़ोने ने अपनी टीम के साथ मौके का मुआयना किया। साक्ष्य: उन्होंने बताया कि पुलिस के साथ जो संघर्ष हुआ है, उसके साक्ष्य मिले हैं। इसका परीक्षण कर रिपोर्ट दी जाएगी। घटनास्थल को सील कर दिया गया है और गोली के खोखे भी मिले हैं। 2.3. अस्पताल में भर्ती घायल आरोपी सलमान को तुरंत भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत खतरे से बाहर है और उसका इलाज चल रहा है। 3. 🔥 जन-आक्रोश का चरम और नेताओं की प्रतिक्रिया आरोपी की गिरफ्तारी और शॉर्ट एनकाउंटर पर स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है, बल्कि और भड़क गया है। 3.1. प्रदर्शन और मांगें हमीदिया अस्पताल के बाहर प्रदर्शन: शुक्रवार सुबह हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच के पदाधिकारी हमीदिया अस्पताल पहुंचे और जोरदार नारेबाजी की। गोली मारने की मांग: संगठन के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने आरोपी को गोली मार देने की मांग की। पुलिस बल तैनात: एहतियात के तौर पर हमीदिया हॉस्पिटल की इमरजेंसी वार्ड के बाहर भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की गई है। 3.2. राजनीतिक प्रतिक्रिया विधायक रामेश्वर शर्मा ने शॉर्ट एनकाउंटर पर कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि अपराधी को ढूंढ लिया जाएगा। उन्होंने न्यायालय से मांग की कि दरिंदे सलमान को फांसी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 'इस तरह के अपराधियों को सार्वजनिक कुचलने की जरूरत है', जिससे ऐसा अपराध करने से पहले कोई 100 बार सोचे। 3.3. पुलिस की एडवाइजरी पुलिस ने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सोशल मीडिया पर किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने वाली, भड़काऊ या हिंसा को उकसाने वाली सामग्री पोस्ट या साझा नहीं करने की चेतावनी दी गई है। 4. 💰 लंदन के बिजनेसमैन की दरियादिली इस जघन्य घटना ने सुदूर लंदन में रहने वाले एक भारतीय बिजनेसमैन के दिल को भी झकझोर दिया, जिन्होंने बच्ची की मदद का बीड़ा उठाया। 4.1. रविराज सिंह (रॉबी) की पहल परिचय: लंदन में बिजनेस करने वाले और मूलतः सुल्तानपुर निवासी रविराज सिंह (रॉबी) हाल ही में एक शॉर्ट ट्रिप पर देश लौटे थे। जाम और जानकारी: मंडीदीप में 7 से 8 घंटे के जाम में फंसने के दौरान जब उन्होंने प्रदर्शनकारियों से जाम लगाने का कारण पूछा, तो घटना की जानकारी ने उन्हें हिलाकर रख दिया। इनाम और शिक्षा का जिम्मा: उन्होंने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक लाख रुपए देने की घोषणा की थी और कहा कि वह बच्ची की शिक्षा का पूरा जिम्मा उठाएंगे। 4.2. अपनी बात पर कायम रविराज सिंह ने पुष्टि की है कि वह अपनी बात पर कायम हैं। वह दिसंबर तक देश में हैं और जल्द ही बच्ची के परिजनों से मिलकर शिक्षा का पूरा जिम्मा उठाएंगे। नागरिकों (अब्दुल, रिजवान, आसिफ) ने जो इनाम राशि ठुकराई है, उसके भी पीड़ित बच्ची को दिए जाने की मांग की गई है। 5. 💔 माँ का दर्द और बच्ची की स्थिति जहां एक ओर आरोपी गिरफ्तार हो गया है, वहीं दूसरी ओर बच्ची एम्स में जिंदगी की जंग लड़ रही है। 5.1. माँ का हृदय विदारक बयान बच्ची की माँ ने बताया कि आरोपी सलमान उनके बच्चों को पहले से जानता था और टॉफियां लाता था। उस रात का मंजर याद करते हुए माँ ने बताया: मारपीट: बच्ची के साथ बहुत मारपीट की गई थी। उसके दोनों गाल थप्पड़ों से लाल और सूज गए थे। गंभीर चोटें: उसके घुटनों, हाथों और कमर पर गहरे चोट के निशान थे। सबसे भयानक चोटें उसके निजी अंगों पर थीं। इलाज की चुनौती: माँ ने बताया कि बच्ची को एम्स लाए जाने तक वह बेहोश थी। अब होश में आने के बावजूद उसकी एक और सर्जरी होनी बाकी है। 5.2. बच्ची की वर्तमान स्थिति बायपास सर्जरी: शनिवार को डॉक्टरों ने बच्ची की सर्जरी की और उसके प्राइवेट पार्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण नसों को बायपास करके नई व्यवस्था तैयार करनी पड़ी, ताकि हीलिंग शुरू हो सके। आईसीयू में: बच्ची फिलहाल आईसीयू में है और बातचीत कर पा रही है। लंबी रिकवरी: डॉक्टरों का कहना है कि इन्फेक्शन के डर के कारण उसे अभी डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा है। पूरी रिकवरी में कम से कम छह महीने लगेंगे, और डॉक्टर उसके पूरी तरह सामान्य होने को लेकर आशंकित हैं। यह मामला कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा की कमियों और समाज में बढ़ते जन-आक्रोश को एक साथ दर्शाता है। आरोपी की गिरफ्तारी भले ही एक कदम हो, लेकिन अब सभी की निगाहें कोर्ट ट्रायल पर टिकी हैं ताकि मासूम को न्याय मिल सके।
💔 'पापा, जो अंकल घर आए थे...' : 6 साल की बच्ची से दरिंदगी, तीन घंटे देरी से इलाज और गौहरगंज में एनकाउंटर की मांग – सलमान खान फरार मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौहरगंज क्षेत्र में 21 नवंबर की रात को हुई 6 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी केवल एक जघन्य अपराध की नहीं, बल्कि उस टूटे हुए भरोसे की है जिसका फायदा उठाकर एक शैतान ने एक मासूम की जिंदगी और एक परिवार के विश्वास को तार-तार कर दिया। पीड़िता इस समय भोपाल के एम्स (AIIMS) अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच एक मुश्किल जंग लड़ रही है, जबकि आरोपी सलमान खान (23) पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिससे गौहरगंज में जन-आक्रोश उबल पड़ा है और लोग आरोपी के एनकाउंटर की मांग कर रहे हैं। यह पूरा मामला पुलिस और स्वास्थ्य प्रशासन की गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था को भी उजागर करता है, जिसके कारण बच्ची को तीन घंटे देर से इलाज मिला। डॉक्टरों का कहना है कि यह देरी ही कई जटिल सर्जरी का कारण बनी। यह विस्तृत आलेख 21 नवंबर की उस खौफनाक शाम के घटनाक्रम, बच्ची के पिता का दर्दनाक अनुभव, आरोपी सलमान खान की 'टॉफी वाले अंकल' की झूठी छवि, माँ का हृदय विदारक बयान, स्वास्थ्य अव्यवस्था की कहानी और गौहरगंज में बढ़ते जन-आक्रोश का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 🩸 पिता के हाथों में बेहोश हुई मासूम: उस रात का दर्दनाक मंजर पीड़िता के पिता के लिए 21 नवंबर की रात वह काला अध्याय बन गई, जिसे वे जीवन भर नहीं भूल पाएंगे। उनकी 6 साल की बेटी, जो दूसरी कक्षा में पढ़ती है, उनके सीने से लिपटकर ही बेहोश हो गई थी। 1.1. भरोसेमंद शैतान से मुलाकात आरोपी की उपस्थिति: बच्ची के पिता बताते हैं कि शाम के करीब साढ़े 5 बजे आरोपी सलमान खान उनके घर के पास आया था। सलमान उनकी कॉलोनी में अक्सर आता-जाता था और बच्चों को चॉकलेट देता था। सामान्य बातचीत: 21 नवंबर को भी वह आया और पिता से पूछा—'कैसे हो?' पिता ने कहा—'ठीक हूं।' कुछ मिनट बाद सलमान चला गया और पिता खाने के लिए अंदर चले गए। अविश्वास का पर्दा: पिता ने स्वीकार किया कि उन्हें जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह शख्स, जिस पर कॉलोनी के लोग भरोसा करते थे, एक घंटे बाद ही एक शैतान बनकर उनकी बेटी की जिंदगी उजाड़ने वाला था। 1.2. बेटी का गुम होना खेलने गई: करीब एक घंटे बाद, शाम 6:30 बजे, उनकी 6 साल की बेटी खेलने के लिए बाहर निकली। उसने माँ से कहा कि वह पड़ोस वाली आंटी को टमाटर देकर आएगी और फिर खेलने जाएगी। तलाश शुरू: शाम के 7:30 बजे तक जब बेटी नहीं लौटी, तो माता-पिता चिंतित हुए और आस-पड़ोस में उसे ढूंढना शुरू किया। 1.3. वह असहनीय दृश्य पिता का इंतजार: रात करीब 8 बजे पिता बेटी को ढूंढते हुए घर के बाहर सड़क पर खड़े थे। लहू-लुहान मासूम: तभी पिता की नजर उस मंजर पर पड़ी जिसने उन्हें स्तब्ध कर दिया। उनकी बेटी सामने वाली सड़क से लड़खड़ाती हुई आ रही थी। उसने सिर्फ ऊपर कुर्ती पहन रखी थी और वह पूरी तरह खून से लथपथ थी। अंतिम सहारा: बच्ची उन्हें देखते ही जोर से 'पापा' चिल्लाई और दौड़कर उनके सीने से ऐसे लिपटी जैसे जान बचाने के लिए आखिरी सहारा मिल गया हो। दर्दनाक बयान: बेहोश होने से पहले मासूम ने अपनी टूटी हुई आवाज में केवल इतना ही कह पाई, "जो अंकल शाम को आए थे, वही मुझे जंगल में ले गए, थोड़ा आगे, और मेरा मुंह दबा दिया।" इतना कहते ही वह पिता के हाथों में बेहोश होकर गिर पड़ी। पिता के लिए यह मंजर जिंदगीभर न भूल पाने वाला सदमा बन गया। 2. 👹 भरोसे के नकाब में दरिंदा: सलमान खान की कहानी आरोपी सलमान खान एक ऐसा दरिंदा निकला जिसने लोगों के विश्वास का फायदा उठाकर अपराध को अंजाम दिया। 2.1. खराब आचरण और बेरोजगारी पिछला काम: पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपी सलमान खान पहले राजा भैया के क्रेशर पर काम करता था। नौकरी छूटी: उसके खराब आचरण और बुरी आदतों के कारण राजा भैया ने उसे नौकरी से निकाल दिया था। आवारा घूमना: नौकरी छूटने के बाद वह आवारा घूमने लगा और पिछले एक-दो महीनों से पीड़िता की कॉलोनी के आसपास ही रह रहा था। 2.2. 'टॉफी वाला अंकल' का नकाब रणनीति: सलमान खान जानबूझकर कॉलोनी के लोगों से घुलता-मिलता था, खासकर बच्चों से, ताकि कोई उस पर शक न करे। छवि निर्माण: उसने खुद को बच्चों के बीच "टॉफी वाले अंकल" की छवि में स्थापित कर लिया था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर जंगल की ओर ले जाकर इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। 3. 😢 माँ का दर्द: मारपीट और जटिल चोटें पीड़िता की माँ के लिए अपनी लाड़ली बेटी की ऐसी हालत देखना असहनीय था। उनके बयान में सलमान की क्रूरता स्पष्ट झलकती है। 3.1. लाड़ली बेटी परिवार: माँ ने रुंधे गले से बताया कि उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं, और पीड़िता उनकी सबसे छोटी और लाड़ली बेटी है, जो दूसरी कक्षा में पढ़ती है। परिचित आरोपी: उनके बच्चे आरोपी सलमान को पहले से जानते थे, क्योंकि वह अक्सर घर के पास आता-जाता था और टॉफियां लाता था। 3.2. क्रूरता के निशान माँ ने उस रात के खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि बच्ची के साथ बहुत मारपीट भी की गई थी: सूजे हुए गाल: "उसके दोनों गाल इतने लाल और सूज गए थे, मानो किसी ने उसे बार-बार और बहुत जोर से थप्पड़ मारे हों।" अन्य चोटें: उसके दोनों घुटनों और हाथों पर गहरे चोट और छिलने के निशान थे। उसकी कमर भी बुरी तरह छिल गई थी। भयानक चोट: माँ ने बताया कि सबसे भयानक चोटें उसके निजी अंगों पर थीं, जो इतनी गंभीर थीं कि डॉक्टरों को तुरंत कई सर्जरी करनी पड़ीं। 3.3. वर्तमान स्थिति माँ ने बताया कि सर्जरी के बाद बच्ची को होश आ गया है और वह टूटी-फूटी बातें कर पा रही है। हालांकि, उसे अभी भी कई दिन तक अस्पताल में रखा जाएगा। 4. 🏥 स्वास्थ्य अव्यवस्था और तीन घंटे की देरी इस जघन्य मामले में सबसे बड़ी लापरवाही स्वास्थ्य प्रशासन की अव्यवस्था में सामने आई, जिसके कारण बच्ची को महत्वपूर्ण तीन घंटे देर से इलाज मिला। 4.1. गौहरगंज में रेफर-रेफर का खेल पहली देरी: पीड़िता को सबसे पहले गौहरगंज के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां से डॉक्टरों ने उसे तुरंत औबेदुल्लागंज रेफर कर दिया। भीड़ और अव्यवस्था: जब पीड़ित को अस्पताल ले जाया गया, तब वहां 600-700 लोगों की भीड़ जमा थी। सबसे बड़ी अव्यवस्था गौहरगंज अस्पताल में सामने आई। बीएमओ की लापरवाही: बीएमओ अमृता जीवने ड्यूटी पर नहीं थी। सूत्रों ने बताया कि बीएमओ ने एसडीएम से कहा कि उनके पास डायल 108 एम्बुलेंस में पेट्रोल तक भरवाने के लिए पैसे नहीं हैं और एम्बुलेंस भी बेकार पड़ी है। 4.2. सागर फैक्ट्री की मदद एम्बुलेंस की व्यवस्था: सरकारी एम्बुलेंस की अनुपलब्धता के कारण अंततः सागर फैक्ट्री से एम्बुलेंस अरेंज करवाई गई। तीन घंटे का नुकसान: इसी अव्यवस्था और एम्बुलेंस अरेंज करने की जद्दोजहद के कारण, बच्ची को औबेदुल्लागंज से भोपाल के एम्स निकलने में ही तीन घंटे से ज्यादा का समय लग गया। डॉक्टरों का बयान: डॉक्टरों का कहना है कि तीन घंटे की इस देरी के कारण बच्ची का अत्यधिक खून बह चुका था, जिसकी वजह से उसके अंगों में गंभीर क्षति हुई और इतनी जटिल सर्जरी की नौबत आई। 5. 💉 एम्स में सर्जरी और लंबा सफर भोपाल एम्स में डॉक्टरों की एक टीम बच्ची की जिंदगी बचाने के लिए अथक प्रयास कर रही है, लेकिन उसका आगे का सफर लंबा और दर्दनाक है। 5.1. जटिल सर्जरी और बायपास व्यवस्था क्षति: डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त थे। नई व्यवस्था: शनिवार को डॉक्टरों ने सर्जरी की। उन्हें मजबूरी में प्राइवेट पार्ट तक जाने वाली नसों को बायपास करके नई व्यवस्था तैयार करनी पड़ी, ताकि मोशन पास हो सके और क्षतिग्रस्त अंगों की हीलिंग शुरू हो सके। आईसीयू में: बच्ची फिलहाल आईसीयू में है और बातचीत कर पा रही है, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से गहरे सदमे में है। 5.2. रिकवरी में जोखिम इन्फेक्शन का डर: डॉक्टर उसे अभी तक डिस्चार्ज नहीं कर रहे हैं, क्योंकि इन्फेक्शन फैलने का डर है। भविष्य की सर्जरी: हीलिंग पूरी होने के बाद उसकी दो और सर्जरी होनी बाकी हैं। लंबी रिकवरी: पूरी रिकवरी में कम से कम छह महीने लगेंगे। डॉक्टर इस बात को लेकर आशंकित हैं कि वह पूरी तरह सामान्य हो पाएगी या नहीं। 6. 😡 गौहरगंज में जन-आक्रोश: एनकाउंटर की मांग एक तरफ एम्स में मासूम जिंदगी के लिए जंग लड़ रही है, वहीं दूसरी ओर गौहरगंज में जन-आक्रोश उबल पड़ा है। 6.1. प्रदर्शन और मांगें हुजूम: पिछले 5 दिनों से गौहरगंज थाने के सामने सैकड़ों लोगों का हुजूम जमा है। पुलिस पर सवाल: प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो आरोपी अब तक सलाखों के पीछे होता। आरोपी की फरारी ने पुलिस प्रशासन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ही मांग: प्रदर्शनकारी किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। उनकी बस एक ही मांग है: 'सलमान को फांसी दो' या 'उसका एनकाउंटर करो', ताकि उसने बच्ची के साथ जो बेरहमी की, उसे भी सरेआम सजा दी जाए। यह जघन्य अपराध न केवल एक परिवार पर टूटी विपत्ति है, बल्कि यह कानून व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और समाज के टूटे हुए भरोसे का प्रतीक है। जब तक आरोपी पकड़ा नहीं जाता और उसे सरेआम कठोर सजा नहीं मिलती, गौहरगंज में यह जन-आक्रोश शांत होने वाला नहीं है।
मध्य प्रदेश VIT यूनिवर्सिटी में 'जॉन्डिस' संकट: छात्रों का उग्र प्रदर्शन, आगजनी, 4000 स्टूडेंट्स का विद्रोह और प्रशासन पर 'शिक्षा माफिया' का आरोप मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित वीआईटी (VIT) यूनिवर्सिटी इस समय छात्रों के उग्र विरोध प्रदर्शन और गंभीर आरोपों के कारण युद्धक्षेत्र में बदल गई है। विश्वविद्यालय में भोजन और पानी की खराब गुणवत्ता के कारण सैकड़ों छात्रों के पीलिया (Jaundice) से बीमार होने के आरोपों ने इतना बड़ा आक्रोश पैदा कर दिया कि मंगलवार रात और बुधवार सुबह छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में आगजनी, तोड़फोड़ और जमकर प्रदर्शन किया। हालात इतने बेकाबू हो गए कि कैंपस में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करनी पड़ी और पाँच थानों की पुलिस बल को बुलाना पड़ा। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने 30 नवंबर तक अवकाश घोषित कर दिया है, जिसके बाद छात्र अपना सामान लेकर घर लौटने को मजबूर हैं। यह विस्तृत आलेख VIT यूनिवर्सिटी में हुए इस गंभीर घटनाक्रम, छात्रों के आरोपों (जिसमें मौत का दावा भी शामिल है), प्रशासन के खंडन, राजनीतिक प्रतिक्रियाओं और इस पूरे मामले के पीछे छिपे 'सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार' के आरोपों का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 🚨 वीआईटी कैंपस में उग्र विद्रोह और आगजनी वीआईटी यूनिवर्सिटी में छात्रों का गुस्सा मंगलवार रात को भड़का, जब कथित तौर पर उनकी शिकायतों को अनसुना कर दिया गया और उन्हें सुरक्षाकर्मियों द्वारा चुप रहने के लिए मजबूर किया गया। 1.1. हिंसा का सिलसिला शुरुआत: छात्रों का आरोप है कि उन्होंने जब विरोध में आवाज़ उठाई तो हॉस्टल के वार्डन और गार्ड्स ने उनके साथ मारपीट कर दी। इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें गार्ड्स छात्रों को खींचते, थप्पड़ मारते और बाल पकड़कर झूमते दिख रहे हैं। मंगलवार रात का विस्फोट: मारपीट की घटना के बाद गुस्साए 4000 छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस में जमकर तोड़फोड़ की। उन्होंने कैंपस में खड़ी बस, कई कारें और एक एम्बुलेंस में आग लगा दी। हॉस्टल की खिड़कियों के शीशे, आरओ प्लांट और परिसर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचाया गया। बुधवार सुबह की आगजनी: हालात बिगड़ते देख, बुधवार सुबह कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग में फिर आग लगा दी। करीब डेढ़ किलोमीटर दूर से बिल्डिंग से धुआं उठता नजर आया। तोड़फोड़: कैंपस में खड़ी कारें पलट दी गईं और बिल्डिंग के अंदर भी तोड़फोड़ हुई। सोशल मीडिया पर छात्रों ने "जॉन्डिस कह रहा है कि वो अब खुश है" जैसे कैप्शन के साथ आगजनी की तस्वीरें शेयर कीं। 1.2. सुरक्षा और व्यवस्था हिंसा बढ़ने के कारण स्थिति को नियंत्रित करने के लिए: पुलिस बल: रात में ही अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, एसडीओपी आष्टा और आष्टा, जावर, पार्वती, कोतवाली और मंडी थानों से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पैरामिलिट्री फोर्स: बुधवार सुबह यूनिवर्सिटी कैंपस में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है, और बाहर से किसी को अंदर नहीं आने दिया जा रहा है। स्थिति: एसडीओपी आकाश अमलकर ने बताया कि वर्तमान में यूनिवर्सिटी परिसर की स्थिति पूरी तरह सामान्य और नियंत्रण में है। 2. 🤢 छात्रों के गंभीर आरोप: जॉन्डिस और मौत की आशंका प्रदर्शन का मूल कारण यूनिवर्सिटी के अंदर भोजन, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता को लेकर छात्रों की गंभीर शिकायतें हैं। 2.1. पीलिया फैलने का दावा शिकायत: छात्रों का मुख्य आरोप है कि यूनवर्सिटी में भोजन और पानी की खराब गुणवत्ता के कारण उनके कई साथियों को पीलिया (जॉन्डिस) हो गया है। अस्पताल में भर्ती: छात्रों का दावा है कि 100 से अधिक छात्र आष्टा, सीहोर और भोपाल के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। मौत का दावा: छात्रों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ साथियों की मौत होने का भी दावा किया, हालांकि प्रशासन ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है। 2.2. सुनवाई न होने का गुस्सा छात्रों का गुस्सा इस बात पर भी था कि जब उन्होंने अव्यवस्थाओं के खिलाफ विरोध किया, तो गार्ड्स और वार्डन ने उनसे मारपीट की और उन्हें चुप रहने के लिए दबाव बनाया। यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने उनकी शिकायतों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, जिससे उनका गुस्सा भड़क गया। 3. 🛡️ यूनिवर्सिटी प्रबंधन का खंडन और प्रशासन की जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रबंधन और उच्च शिक्षा विभाग, दोनों ने प्रतिक्रिया दी है। 3.1. रजिस्ट्रार का वीडियो संदेश वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार केके नायर ने एक वीडियो जारी कर छात्रों के दावों का खंडन किया: मौतों की अफवाह: उन्होंने कहा कि पीलिया से मौतों की अफवाहें पूरी तरह निराधार और गलत हैं, और किसी भी छात्र की मौत नहीं हुई है। सुरक्षा का दावा: नायर ने दावा किया कि पीलिया के कुछ मामले ज़रूर रिपोर्ट हुए थे, लेकिन सभी छात्रों को समय पर उचित चिकित्सकीय देखभाल दी गई थी, और स्थिति चिंताजनक नहीं थी। पानी/भोजन की गुणवत्ता: उन्होंने कहा कि पानी और खाद्य सामग्री की कई बार जांच कराई गई है और हर बार वे पूरी तरह सुरक्षित पाई गई हैं। प्रेरित आरोप: उन्होंने सभी आरोपों को "प्रेरित और शरारती" करार दिया, जिनका उद्देश्य केवल भ्रम फैलाना है। 3.2. प्रशासन की जांच उच्च शिक्षा विभाग की टीम: एसीएस उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने भास्कर को बताया कि वीआईटी कॉलेज के घटनाक्रम की जांच करने के लिए भोपाल से उच्च शिक्षा विभाग की एक टीम सीहोर जाएगी। स्थानीय प्रशासन की भूमिका: एसपी दीपक शुक्ला ने बताया कि एसडीएम और एसडीओपी छात्रों से उनकी समस्याओं का आवेदन और बीमार बच्चों की जानकारी लेंगे। बैठक: प्रशासन ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि आज छात्रों और यूनिवर्सिटी प्रबंधन के साथ संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। 4. 📢 राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएँ इस गंभीर घटना पर राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने यूनिवर्सिटी प्रबंधन की आलोचना की है। 4.1. कांग्रेस का 'शिक्षा माफिया' आरोप कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने वीडियो जारी कर इस घटना को "व्यवस्थागत भ्रष्टाचार" का परिणाम बताया: घोर नाकामी: उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर विद्यार्थियों का बीमार होना प्रशासन की घोर नाकामी है। भ्रष्टाचार उजागर: उनका आरोप है कि जहाँ विद्यार्थी सालों की मोटी फीस भरते हैं, वहाँ स्वच्छ भोजन और बेसिक हेल्थ सुविधाएं तक सुनिश्चित नहीं हैं। यह घटना व्यवस्थागत भ्रष्टाचार को उजागर कर रही है। शिक्षा माफिया: उन्होंने आरोप लगाया कि इस भ्रष्टाचार के पीछे "एक बड़ा शिक्षा माफिया तंत्र के कई नुमाइंदे से लेकर मंत्री तक शामिल हैं!" 4.2. छात्र संगठनों का विरोध एबीवीपी (ABVP): एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी के गेट के सामने प्रबंधन का पुतला जलाया। एनएसयूआई (NSUI): एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने निजी विवि विनियामक आयोग के चेयरमैन से मिलकर मामले की जांच कराने की मांग की। 5. 🏠 छात्रों का यूनिवर्सिटी छोड़कर जाना स्थिति सामान्य होने के बावजूद, यूनिवर्सिटी में 30 नवंबर तक अवकाश घोषित किए जाने के बाद छात्र भारी संख्या में कैंपस छोड़कर जा रहे हैं। घर वापसी: बुधवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र अपना लगेज लेकर यूनिवर्सिटी से अपने घर लौट रहे हैं। जाम और पैदल यात्रा: छात्रों के घर लौटने की स्थिति में यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर लंबा जाम लग गया। कई छात्रों को साधन नहीं मिलने पर पैदल ही बस स्टॉप के लिए निकलना पड़ा। यह घटना भारत के निजी शिक्षण संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं और छात्र सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। उच्च शिक्षा विभाग की जांच और पुलिस कार्रवाई से ही पता चलेगा कि पीलिया फैलने के आरोप में कितनी सच्चाई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
सीनियर IAS अधिकारी संतोष वर्मा का 'ब्राह्मण की बेटी' पर विवादित बयान: देशव्यापी आक्रोश, माफी की अपील और FIR की मांग मध्य प्रदेश के सीनियर आईएएस अधिकारी और अजाक्स (AJAKS) के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा एक बेहद विवादास्पद और भड़काऊ बयान देकर राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए हैं। रविवार को अजाक्स के एक कार्यक्रम में उन्होंने ब्राह्मण समुदाय की बेटियों को लेकर ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसने न केवल सामाजिक सौहार्द को तार-तार कर दिया, बल्कि राजनीति, प्रशासन और सामाजिक संगठनों में तीव्र आक्रोश पैदा कर दिया है। वर्मा ने सार्वजनिक मंच से बयान दिया कि "जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।" इस बयान ने उन्हें तत्काल एक राष्ट्रीय विवाद का केंद्र बना दिया, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी, निलंबन और सार्वजनिक बहिष्कार की मांगें उठने लगी हैं। यह विस्तृत आलेख आईएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान, उनके माफीनामे, विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाओं, कानूनी कार्रवाई की मांगों, और भारतीय समाज में आरक्षण व 'रोटी-बेटी' के संबंध पर इस टिप्पणी के गहरे निहितार्थों का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 📢 विवादित बयान और IAS अधिकारी का स्पष्टीकरण आईएएस संतोष वर्मा, जो अजाक्स (अनुसूचित जाति/जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ) के प्रांताध्यक्ष हैं, ने यह विवादित बयान संगठन के प्रांतीय अधिवेशन में दिया था। 1.1. आपत्तिजनक टिप्पणी की प्रकृति वर्मा के बयान की मूल पंक्ति थी, "जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।" इस टिप्पणी ने तुरंत दो बड़े विवादों को जन्म दिया: सामाजिक अपमान: 'ब्राह्मण की बेटी' को लेकर की गई टिप्पणी, जिसमें 'दान' और 'संबंध' जैसे शब्दों का उपयोग किया गया, उसे ब्राह्मण समाज और भारतीय समाज की महिलाओं के लिए घोर अपमानजनक माना गया। आरक्षण का आधार: वर्मा ने आरक्षण की निरंतरता को अंतर-जातीय विवाह और सामाजिक समरसता की व्यक्तिगत कसौटी से जोड़ दिया, जो आरक्षण के संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत है। 1.2. संतोष वर्मा का माफीनामा और बचाव विवाद बढ़ने के बाद सीनियर आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने बयान पर माफी मांगी, लेकिन साथ ही अपने बचाव में तर्क भी दिए: तोड़-मरोड़कर पेश करना: वर्मा ने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। 2 सेकंड की क्लिप: उन्होंने तर्क दिया कि उनका पूरा भाषण 27 मिनट का था, लेकिन केवल 2 सेकंड की क्लिप को चलाकर इसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से प्रचारित किया गया है। 1.3. 'रोटी-बेटी' के संबंध पर उनका मत वर्मा से जब यह पूछा गया कि क्या आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को आरक्षण छोड़ देना चाहिए, तो उन्होंने अपने पुराने तर्क को विस्तार दिया: सामाजिक पिछड़ापन: उन्होंने कहा, "ऐसा लगता है कि सामाजिक पिछड़ापन दूर हो गया है तो रोटी-बेटी का संबंध जोड़ना चाहिए। रोटी-बेटी का व्यवहार हो गया तो फिर कोई बात ही नहीं रहेगी।" यह स्पष्टीकरण दर्शाता है कि वर्मा आरक्षण को केवल सामाजिक समानता प्राप्त करने का एक टूल मानते हैं, लेकिन उनके द्वारा उपयोग किए गए उदाहरण अत्यंत आपत्तिजनक और विभाजनकारी थे। 2. 😡 देशभर में आक्रोश: तीखी प्रतिक्रियाएं और कार्रवाई की मांग संतोष वर्मा के बयान पर सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तीव्र और सर्वसम्मत आक्रोश देखने को मिला। 2.1. सामाजिक संगठनों की कठोर प्रतिक्रिया सपाक्स (SAPAKS) का निंदनीय बयान: सपाक्स (सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग कल्याण समाज) के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. हीरालाल त्रिवेदी ने वर्मा के बयान को "घटिया, निकृष्ट और निंदनीय" बताते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "जो अपनी बेटी और दूसरे की बेटी में इतना फर्क करता हो, उसके लिए कोई शब्द नहीं है।" बहिष्कार और गिरफ्तारी की मांग: डॉ. त्रिवेदी ने मांग की कि अजाक्स, सपाक्स या अपाक्स, कोई भी वर्ग हो, ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए। उन्होंने सरकार से ऐसे अधिकारियों को सार्वजनिक पद से हटाने और पुलिस से एफआईआर दर्ज कर संतोष वर्मा को गिरफ्तार करने की मांग की। ब्राह्मण समाज की चेतावनी: अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा कि जहाँ देश में 'बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ' अभियान चलता हो, वहाँ एक अखिल भारतीय सेवा का अधिकारी ऐसी अनर्गल टिप्पणी करे, यह अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा को निलंबित करके गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक ब्राह्मण समाज शांत नहीं नहीं बैठेगा। हिन्दू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच: इन दोनों संगठनों ने भी इस बयान पर कड़ा एतराज जताया। 2.2. राष्ट्रीय सनातन सेना का आतंकवादी और ईनाम बयान राष्ट्रीय सनातन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती प्रसाद शुक्ल की प्रतिक्रिया सबसे तीखी थी: समाज को तोड़ने का आरोप: शुक्ल ने कहा कि ऐसे बयान समाज को तोड़ने का काम करते हैं और यह टीका-टिप्पणी घोर निंदनीय है। आतंकवादी की संज्ञा और ईनाम: उन्होंने खुले तौर पर आईएएस वर्मा को "आतंकवादी" कहा और घोषणा की कि "उसका जो भी मुंह काला करेगा, हम उसे 51 हजार रुपए का इनाम देंगे।" यह बयान सीधे तौर पर हिंसा को उकसाने वाला था और दिखाता है कि यह विवाद किस हद तक गहरा गया है। 2.3. प्रशासनिक संघों की प्रतिक्रिया मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ ने भी इस विवादित बयान के विरोध में कार्रवाई की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक के नेतृत्व में यह ज्ञापन उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को दिया गया। हालांकि पहले मंत्रालय में प्रदर्शन की चर्चा थी, लेकिन अंततः कोई सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं किया गया। 3. 🏛️ राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: भाजपा नेताओं की निंदा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने इस बयान की कठोर शब्दों में निंदा की, क्योंकि यह टिप्पणी पार्टी के 'बेटी बचाओ' और 'हिंदू एकता' के एजेंडे पर सीधा हमला थी। विधायक रामेश्वर शर्मा: उन्होंने कहा कि "कुछ जातिवादी लोग हिंदू एकता को भंग करना चाहते हैं।" उन्होंने संतोष वर्मा की मानसिकता को "अपराधी मानसिकता" बताया और दृढ़ता से कहा कि "सनातन एकता रहेगी। हिंदू एक था, एक है और रहेगा।" बीजेपी प्रदेश मंत्री लोकेंद्र पाराशर: उन्होंने सोशल मीडिया (एक्स) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि "बेटी किसी की भी हो, सबकी बेटी एक जैसी ही पूज्य है।" उन्होंने वर्मा के विचारों को "निकृष्ट" और "घिनौना" बताते हुए कहा कि ऐसे अधिकारी को भारतीय प्रशासनिक सेवा के लायक नहीं है। कार्रवाई की मांग: पाराशर ने मांग की कि वर्मा को समाज से दंड मिलना चाहिए और कानून से भी सजा मिलनी चाहिए। ब्राह्मण समाज और लाड़ली लक्ष्मी योजना: अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने भाजपा सरकार की लाड़ली लक्ष्मी और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं का हवाला देते हुए पूछा कि प्रधानमंत्री जिस सरकार में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का अभियान चलाते हैं, उसी में यह टिप्पणी कैसे स्वीकार की जा सकती है। 4. ⚖️ कानूनी और प्रशासनिक निहितार्थ सीनियर आईएएस अधिकारी का यह बयान न केवल सामाजिक नैतिकता का उल्लंघन है, बल्कि यह भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के आचरण नियमों और कानूनी धाराओं के तहत भी गंभीर कदाचार माना जाता है। 4.1. कानूनी कार्रवाई की संभावना FIR की मांग: पुलिस से आईपीसी की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक दुराचार) के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। गिरफ्तारी का दबाव: डॉ. हीरालाल त्रिवेदी और पुष्पेंद्र मिश्र जैसे नेताओं ने सार्वजनिक रूप से वर्मा की गिरफ्तारी की मांग की है। 4.2. प्रशासनिक कार्रवाई निलंबन और बर्खास्तगी: अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह की विभाजनकारी टिप्पणी करना सेवा आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन है। सरकार पर अब संतोष वर्मा को तुरंत निलंबित करने का भारी दबाव है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उनकी बर्खास्तगी तक हो सकती है। 5. 🧐 आईएएस वर्मा का अप्रत्यक्ष संदर्भ वर्मा ने इंदौर के एक विवादास्पद मामले का उल्लेख किया, जो उनके अप्रत्यक्ष गुस्से को दर्शाता है: इंदौर के जज का मामला: संतोष वर्मा ने फर्जी हस्ताक्षर किए जाने और इंदौर के जज के जेल जाने के मामले पर पूछे गए सवाल पर कहा कि जिस जज ने एफआईआर दर्ज कराई थी, वे खुद भी सस्पेंड हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए वे इस पर और टिप्पणी नहीं करना चाहते। यह संदर्भ दिखाता है कि यह बयान केवल सामाजिक टिप्पणी नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक और न्यायिक अधिकारियों के साथ उनके व्यक्तिगत संघर्षों का अप्रत्यक्ष प्रतिशोध भी हो सकता है, जिसे उन्होंने सामाजिक टिप्पणी की आड़ में व्यक्त किया। आईएएस संतोष वर्मा का यह बयान सामाजिक विभाजन, प्रशासनिक आचरण और आरक्षण के संवैधानिक लक्ष्य पर एक गंभीर बहस छेड़ गया है। देश अब इंतजार कर रहा है कि मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन इस हाई-प्रोफाइल और घोर आपत्तिजनक टिप्पणी पर क्या कठोर कार्रवाई करते हैं।
भीमराव अंबेडकर पर विवादों के केंद्र में ग्वालियर के एडवोकेट अनिल मिश्रा: कौन हैं वे? क्या है उनका मक़सद? और क्यों उठा रहे हैं इतने बड़े सवाल?** ग्वालियर का नाम पिछले कुछ समय में अचानक सुर्खियों में आ गया है। वजह—एक वकील, जिन्होंने देश के संविधान निर्माता माने जाने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर पर सवाल उठाकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। एडवोकेट अनिल मिश्रा द्वारा दिए गए विवादित बयानों ने राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी हलकों में जबरदस्त उत्तेजना पैदा कर दी है। उनके आरोप सिर्फ साधारण नहीं हैं—वे सीधे-सीधे भारत के इतिहास, संविधान, जाति व्यवस्था, कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली को चुनौती देते दिखाई देते हैं। उनका कहना है— “अंबेडकर न तो महापुरुष थे और न ही संविधान निर्माता। वे दलित भी नहीं थे, क्योंकि उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था। यानी उनके बारे में कुछ कहने पर SC/ST एक्ट नहीं लगता।” एक वकील का यह दावा सहज नहीं। यही कारण है कि पूरा मामला एक सोशल मीडिया पोस्ट से निकलकर कानून, राजनीति, समाज और मीडिया के बड़े मंचों पर पहुंच गया है। इस विशेष रिपोर्ट में हम देखेंगे— आखिर अनिल मिश्रा कौन हैं? उनका तर्क क्या है? उनके आरोपों में कितना दम है? वे किस मकसद से यह सब कर रहे हैं? और क्या यह सिर्फ वायरल होने की कोशिश है या किसी बड़े विचार अभियान का हिस्सा? 1. विवाद की शुरुआत — एक व्हाट्सऐप वीडियो से उठी आग यह सब 5 अक्टूबर को तब शुरुआत हुआ जब ग्वालियर क्राइम ब्रांच की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप में एक वीडियो पकड़ा। इस वीडियो में— डॉ. अंबेडकर को अंग्रेज़ों का एजेंट बताया गया था। एक तस्वीर पोस्ट की गई थी, जिसमें छेड़छाड़ भी दिखाई दी। और वीडियो अनिल मिश्रा के मोबाइल नंबर से अपलोड माना गया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत सोशल मीडिया पोस्ट, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, और जिला प्रशासन के आदेशों के उल्लंघन के तहत FIR दर्ज कर ली। इसका सीधा मतलब था— मामला सिर्फ एक पोस्ट का नहीं था। यह उन विचारों का विस्फोट था जो एडवोकेट मिश्रा कई वर्षों से उठा रहे थे। **2. कौन हैं एडवोकेट अनिल मिश्रा? किताबों से भरा बैकग्राउंड या विवादों का नया चश्मा?** अनिल मिश्रा पेशे से वकील हैं। उनका सामाजिक या राजनीतिक बैकग्राउंड बड़ा नहीं है—वे खुद बताते हैं— “मैं डॉक्टर के बेटे हूं। वकालत करता हूं। बार एसोसिएशन का अध्यक्ष भी रह चुका हूं।” लेकिन दिलचस्प बात यह है कि वे पूर्व CJI अरुण मिश्रा के शिष्य रहे हैं। इस बात को लेकर सोशल मीडिया में उन्हें एक ‘बैकिंग’ या ‘शक्ति’ वाले व्यक्ति के रूप में भी वर्णित किया जा रहा है। हालांकि खुद मिश्रा इसका खंडन करते हैं— “मेरे गुरु अरुण मिश्रा हैं, रिश्तेदार नहीं। और न ही मेरा कोई राजनीतिक बैकग्राउंड है।” यह बयान एक महत्वपूर्ण संकेत देता है— वे खुद को स्वतंत्र आवाज़ के रूप में दिखाना चाहते हैं। **3. क्यों उठाया संविधान निर्माता पर सवाल? क्या है बी.एन. राव वाला तर्क?** अनिल मिश्रा का केंद्रीय दावा यह है कि— “संविधान के वास्तविक निर्माता सर बी. एन. राव हैं, न कि डॉ. अंबेडकर।” उनके तर्क: (A) बी.एन. राव ने 60 देशों का दौरा किया राव ने विभिन्न देशों के संविधान की तुलना की, ड्राफ्ट तैयार किया, और यह काम तब शुरू हो गया था जब संविधान सभा बनी भी नहीं थी। (B) राव के ड्राफ्ट की कॉपी भी उपलब्ध है मिश्रा अपनी बात को साबित करने के लिए दस्तावेजों का हवाला देते हैं। (C) अंबेडकर बाद में संविधान से जुड़े उनका कहना है— “जो व्यक्ति पहले 60 देशों का दौरा करे, स्टडी करे, ड्राफ्ट बनाए—वही निर्माता है।” (D) AI से प्रश्न पूछने का दावा मिश्रा ने कहा कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल से भी पूछा— “क्या अंबेडकर ने कोई एक आर्टिकल लिखा?” "AI ने कहा—नहीं" (यह तर्क तकनीकी रूप से विवादित है, लेकिन मिश्रा इसका उल्लेख करते हैं।) (E) 1963 की किताब का हवाला ‘India Constitution in the Making’—जिसे वे सबसे प्रामाणिक संदर्भ बताते हैं। (F) अंबेडकर ने खुद कहा कि वे संविधान के कई हिस्सों से सहमत नहीं थे उनका कहना है कि— “जो व्यक्ति खुद संविधान के ड्राफ्ट से सहमत नहीं था, वह निर्माता कैसे हो सकता है?” **4. यह सवाल अब क्यों? क्या यह सिर्फ वायरल होने की कोशिश है?** मिश्रा साफ कहते हैं— “यह मेरी मुहिम कई सालों से चल रही है। मीडिया में आने से यह वायरल हुआ है। पहले भी बोलता था, आगे भी बोलूंगा।” इसका मतलब: यह विवाद अचानक नहीं, बल्कि एक लंबी वैचारिक यात्रा का हिस्सा है। 5. SC/ST एक्ट पर बड़ा हमला — सबसे विवादित बयान मिश्रा का दूसरा विवादित दावा है— “SC/ST एक्ट एक अंधा कानून है।” उनका तर्क: (A) 90% केस में आरोपी बरी होते हैं वे इसे कानून के दुरुपयोग का प्रमाण बताते हैं। (B) FIR दर्ज होते ही ‘कथित पीड़िता’ को पैसा मिलता है उनका आरोप है कि— आर्थिक लाभ के लिए भी मामला दर्ज किया जाता है चार्जशीट के समय भी पैसा मिलता है और अंतिम निर्णय में भी (C) बरी आरोपी के नुकसान की भरपाई नहीं होती (D) ‘रिकवरी सिस्टम’ क्यों नहीं है? वे कहते हैं कि अगर कोई झूठा केस हुआ है तो सरकारी धन पीड़ित से वापस क्यों नहीं लिया जाता? (E) एक डेटा रिपोर्ट भी तैयार की है जिसे वे जल्द जारी करने का दावा करते हैं। 6. बड़ा दावा — “मेरे ऊपर SC/ST एक्ट लग ही नहीं सकता” यह बयान ने पूरे विवाद को आग की तरह फैला दिया। उनका तर्क: “अंबेडकर दलित नहीं थे। उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था। इसलिए उन पर टिप्पणी SC/ST एक्ट के दायरे में नहीं आती।” यह तर्क कानूनन और सामाजिक स्तर पर भारी विवाद पैदा कर गया। 7. डर नहीं लगता? — “जेल जाऊंगा, वापस आ जाऊंगा” मिश्रा कहते हैं— “मुझे कुछ नहीं चाहिए—ना सरकारी नौकरी ना कोई लाभ। केस होगा तो जेल जाऊंगा, आ जाऊंगा।” वे कहते हैं कि— रोज हजारों गालियां मिल रही हैं हत्या की धमकियां आती हैं रात फोन बंद कर सोना पड़ता है लेकिन वे अपने बयान पर अडिग हैं। यह व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पहलू है— विवाद से डरने की बजाय वह इसे अपनी पहचान का हिस्सा बना चुके हैं। 8. अंबेडकर की मूर्ति लगाने का विरोध — पहली चिंगारी हाईकोर्ट परिसर में डॉ. अंबेडकर की मूर्ति स्थापित करने के मुद्दे पर अनिल मिश्रा का पुराना विरोध है। उनका कहना है— “ऐसे काम के लिए अदालत का स्पेसिफिक आदेश चाहिए। बिना ऑर्डर कुछ लोग मूर्ति लेकर आ गए थे। इसलिए मैंने PMO तक शिकायत की।” यह बताता है कि विवाद सिर्फ विचारों का नहीं, प्रतीकों का भी है। **9. विपक्षियों का आरोप — “राजनीतिक गेम”? मिश्रा का जवाब — “मुझे राजनीति से कोई लेना देना नहीं”** सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठाते हैं कि— क्या वे किसी राजनीतिक विचारधारा द्वारा प्रेरित हैं? क्या वे किसी बड़े राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा हैं? लेकिन मिश्रा कहते हैं— “अगर मेरे पीछे राजनीतिक बैकिंग होती तो मैं क्यों अकेला लड़ा? मेरे खिलाफ कोई ठोस केस बनता ही नहीं।” 10. ‘राइट टू स्पीच’ का कवच उनका कहना है कि वे अपने सारे बयान राइट टू फ्री स्पीच के तहत दे रहे हैं। वे कहते हैं— “मैं प्रधानमंत्री की नीतियों की आलोचना भी कर सकता हूं। यह मेरा अधिकार है। इसलिए FIR होगी ही नहीं।” यह दावा कानूनी बहस की ओर इशारा करता है— क्या फ्री स्पीच की सीमा सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने तक जा सकती है? 11. तनाव बढ़ता जा रहा है — सोशल मीडिया से अदालत तक मामला अब— सोशल मीडिया जन चर्चा राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ कानूनी कार्रवाई और समाजिक ध्रुवीकरण सबमें फैल चुका है। ग्वालियर प्रशासन ने भी साफ कर दिया है कि— सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली कोई भी पोस्ट प्रतिबंधित है। 12. सवाल जो अभी भी अधूरे हैं… इस पूरी कहानी में कुछ बड़े सवाल हैं— (1) क्या यह सिर्फ एक वैचारिक लड़ाई है? या किसी बड़े सोचे-समझे अभियान का हिस्सा? (2) क्या मिश्रा के तर्कों पर विस्तृत अकादमिक बहस हो सकती है? या वे सिर्फ उत्तेजक बयान हैं? (3) क्या ऐसी बहस देश की सामाजिक संरचना को प्रभावित कर सकती है? (4) क्या SC/ST एक्ट पर उनकी आलोचना सही है या यह दुरुपयोग का मुद्दा है? (5) क्या फ्री स्पीच की आड़ में संवेदनशील विषयों को छेड़ना न्यायोचित है? **निष्कर्ष: एक व्यक्ति, एक बयान — और देश भर में भड़कती बहस** अनिल मिश्रा का विवाद हमें यह भी दिखाता है कि— इतिहास संविधान जाति धर्म और कानून जैसे विषय सिर्फ किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं हैं। ये आज भी समाज की नसों में धड़कते हैं। उनके बयान चाहे जितने विवादित हों, लेकिन उन्होंने एक बहस ज़रूर शुरू कर दी है— क्या हम अपने इतिहास को नए दृष्टिकोण से देख सकते हैं? या यह सब सिर्फ उकसाने वाली राजनीतिक रणनीति है? इसका जवाब समाज, अदालतें और समय ही देंगे।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मध्यप्रदेश के Seoni जिले में तीन करोड़ रुपये के हवाला कांड में बड़ी कार्रवाई हुई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने 11 में से 10 आरोपी पुलिसकर्मियों को हिरासत में ले लिया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में निलंबित एसडीओपी Pooja Pandey सहित कई पुलिस अधिकारियों पर डकैती, अपहरण और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। 📌 क्या है पूरा मामला बता दें कि, बुधवार रात सोहन परमार नाम का एक व्यापारी Katni से एक सर्राफा व्यापारी के ₹2,00,96,500 लेकर कार से Jalna (महाराष्ट्र) जा रहा था। बताया जा रहा है कि ये पैसे हलावा करोबार के थे। रात में एसडीओपी Pooja Pandey और बंडोल थाना प्रभारी Arpit Bhairam ने लखनवाड़ा थाना क्षेत्र के शीलादेवी गांव के पास जांच के नाम पर गाड़ी रोक ली। पुलिसकर्मियों ने रुपयों से भरा बैग जब्त कर लिया और परमार को थाने ले जाकर रातभर बिठा लिया। आरोप है कि थाने में Pooja Pandey और उनकी टीम ने कारोबारी को छोड़ने की एवज में डेढ करोड़ की डिमांड की। पैसा हवाला का था इसलिए कार्यवाही से बचने के लिए कारोबारी तुरन्त तैयार हो गया। इसके बाद गुरुवार सुबह बिना किसी कार्रवाई के उसे छोड़ दिया गया। लेकिन पुलिस ने व्यापारी को केवल एक करोड़ 26 लाख 500 रूपए ही वापस किये। यानि 25 लाख रूपए पुलिस ने एक्ट्रा रख लिए जो डील के खिलाफ थे। बताया जा रहा है कि इस बात पर ही मामला बिगड़ गया। व्यापारी ने हंगामा किया तो पुलिस ने 1.45 करोड़ रुपये जब्ती कार्यवाही दिखा दी। इसके बाद पूरा मामला आला अधिकारियों तक जा पहुंचा। 📌 मामला दबाने की कोशिश इस पूरी घटना की जानकारी पुलिसकर्मियों ने सुबह तक वरिष्ठ अधिकारियों — एसपी Sunil Kumar Mehta और आईजी Pramod Verma — को नहीं दी। शाम तक कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। मामला तब उजागर हुआ जब मीडिया को इसकी भनक लगी। जब पत्रकारों ने एसडीओपी से सवाल किए तो उन्होंने पहले कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया। बाद में एएसपी Deepak Mishra को खबर लगी और वे एसडीओपी ऑफिस पहुंचे, जहां से जांच शुरू की गई। 📌 वरिष्ठ अधिकारियों की सख्ती एएसपी दीपक मिश्रा ने तुरंत एसपी और आईजी को इसकी जानकारी दी। इसके बाद आईजी प्रमोद वर्मा ने देर रात 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित करने के आदेश दिए। अब तक गिरफ्तार आरोपियों में: एसडीओपी पूजा पांडे एसआई Arpit Bhairam प्रधान आरक्षक माखन इनवाती आरक्षक योगेंद्र चौरसिया आरक्षक नीरज राजपूत आरक्षक जगदीश यादव गनमैन केदार बघेल चालक रितेश वर्मा प्रधान आरक्षक रविंद्र उइके आरक्षक सुभाष सदाफल वहीं, प्रधान आरक्षक राजेश जंघेला अभी भी फरार बताया जा रहा है। 📌 जांच की कमान जबलपुर रेंज के आईजी प्रमोद कुमार वर्मा ने शुरुआती जांच के लिए एएसपी Ayush Gupta को जिम्मेदारी दी है। जबलपुर क्राइम ब्रांच हवाला की रकम के स्रोत और बरामदगी की जांच कर रही है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि तीन करोड़ रुपये किसके थे और नागपुर क्यों भेजे जा रहे थे। 📌 एसआईटी की कार्रवाई एसआईटी टीम में एएसपी जितेंद्र सिंह, तीन अन्य कर्मचारी और लखनवाड़ा थाना प्रभारी Chandrakishor Sirame शामिल हैं। टीम अब रकम के स्रोत, हवाला नेटवर्क और आरोपी पुलिसकर्मियों की भूमिका की गहन जांच कर रही है।
भोपाल: एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच के जस्टिस रहे रोहित आर्य हमेशा सुर्खियों में रहते हैं। अपने कार्यकाल के दौरान बेबाक अंदाज के लिए मशहूर रहे। कोर्ट रूम में दलीलों पर वह अक्सर खरी-खरी बात करते थे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और बीजेपी में शामिल हो गए। अब उनकी एक तस्वीर सामने आई है जिसमें वह आरएसएस की ड्रेस में दिखाई दे रहे हैं। क्या है मामला दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भोपाल स्थित तात्या टोपे स्टेडियम में पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में संघ से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज रोहित आर्य मौजूद थे। वह मंच पर विशेष अतिथि की भूमिका में थे और आरएसएस के गणवेश में नज़र आए। इस मौके पर उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित भी किया। 2024 में हुए थे रिटायर जस्टिस रोहित आर्य साल 2024 में हाईकोर्ट से रिटायर हुए थे। रिटायरमेंट के कुछ ही महीनों बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। इसके बाद वह सक्रिय राजनीति में दिखाई देने लगे। पार्टी ने उन्हें वन नेशन वन इलेक्शन अभियान का संयोजक भी बनाया था। अब आरएसएस के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनकर उन्होंने एकता का संदेश दिया। हाईकोर्ट में उनके कार्यकाल के दौरान उनके कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग कई बार वायरल होती रही। अधिकारियों को उन्होंने कई मौकों पर कड़ी फटकार लगाई थी। अब सक्रिय राजनीति में उनकी उपस्थिति ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।
छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से मासूम बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। रविवार को किडनी फेल होने से एक और मासूम बच्ची की मौत हो गई है। वह 26 दिनों से वेंटिलेटर पर थी, लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका। सरकारी सिस्टम की मिलीभगत और फार्मा कंपनियों के लालच ने अब तक 16 मासूम बच्चों को निगल लिया है‚ बावजूद इसके अभी तक किसी की कोई जवाबदेही तय नही की गई है। हर कोई एक दूसरे पर इस हत्याकांड का आरोप लगा रहा है। यह हत्याकांड इसलिए है क्योंकि एक सोची समझी साजिश के तहत जानलेवा कफ सिरफ मार्केट में उतारे गए। आपको बता दें कि जहरीले कफ सिरप का नाम Coldrif है जिसकी निर्माता कंपनी का नाम Sresan Pharmaceuticals (कभी “Srisan Pharmaceuticals” या “Shreesan Pharmaceuticals”) है। यह कंपनी तमिलनाडू में है। एमके स्टालिन इस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं। बताया जा रहा है कि तमिलनाडु में FDA ने Sresan Pharma के Kanchipuram यूनिट से लिए गए Coldrif सिरप के नमूनों में DEG की मात्रा मान्य सीमा से अधिक पाई गई है। इसके बाद तमिलनाडु सरकार ने उस सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। मौतों की शुरुआत — सितंबर 2025 के आख़िरी हफ्ते से 24 से 26 सितंबर 2025 के बीच छिंदवाड़ा ज़िले के परासिया और हर्रई क्षेत्र में पहले दो बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ी। परिवारों ने बताया कि बच्चों को सर्दी-खांसी और बुखार के लिए एक स्थानीय डॉक्टर (डॉ. प्रवीण सोनी) ने “Coldrif” कफ सिरप दिया था। 27 से 29 सितंबर तक 2 और बच्चों की मौत की खबर आई। डॉक्टर ने कई बच्चों को वही सिरप लिखना जारी रखा। प्रशासन ने अभी तक इसे सामान्य बीमारी माना और जांच शुरू नहीं की। लेकिन 30 सितंबर – 2 अक्टूबर 2025 तक कुल 7 बच्चों की मौत की पुष्टि हुई। परिजनों ने बताया कि बच्चों की पेशाब आना बंद हो गया था, और शरीर में सूजन आने लगी थी — यानी किडनी फेलियर के लक्षण थे। 📅 3 अक्टूबर को सक्रिय हुआ स्वास्थ विभाग मामला मीडिया में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हुआ। Coldrif सिरप की बिक्री तुरंत बंद की गई। डॉक्टर प्रवीण सोनी को हिरासत में लिया गया। तमिलनाडु की प्रयोगशाला में सिरप का नमूना जांच के लिए भेजा गया। 4 अक्टूबर को लैब रिपोर्ट में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की अत्यधिक मात्रा पाई गई। तब तक मौतों का आंकड़ा 10 तक पहुंच चुका था। केंद्र सरकार ने Sresan Pharmaceuticals कंपनी के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। मध्य प्रदेश सरकार ने Coldrif सिरप की बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। 5 अक्टूबर को दो और बच्चों की मौत की पुष्टि हुई यानी अब तक कुल 12 से 14 मौतें आधिकारिक रूप से मानी जा रही हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में संख्या 16 तक बताई गई है (अभी जांच जारी है)। आपको बता दें कि तीन साल पहले अफ्रीका में भी भारतीय कफ सिरफ पीने से सैकड़ों बच्चों की जान चल गई थी‚ अगर उस में भारतीय स्वाथय विभाग इमानदारी से जांच करता तो आज इन मासूमो की जान नही जाती। 🌍 अफ्रीका में भारतीय कफ सिरप से बच्चों की मौत — पूरा मामला 🗓️ घटना कब हुई यह मामला 2022 में सामने आया था। प्रभावित देश थे — गाम्बिया (Gambia) और बाद में उज़्बेकिस्तान (Uzbekistan)। 🇬🇲 गाम्बिया (Gambia) कफ सिरप कांड – अक्टूबर 2022 ⚰️ मौतों की संख्या गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत हुई थी (अधिकतर 5 साल से छोटे बच्चे थे)। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे “टॉक्सिक सिरप ट्रेजेडी” कहा था। 💊 कौन-सा कफ सिरप था WHO की जांच में चार सिरप पाए गए थे जो बच्चों को दिए गए थे — Promethazine Oral Solution Kofexmalin Baby Cough Syrup Makoff Baby Cough Syrup Magrip N Cold Syrup इन चारों में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG) नामक जहरीले तत्व पाए गए थे। 🏭 कौन-सी भारतीय कंपनी थी इन सिरपों का निर्माण Maiden Pharmaceuticals Limited, हरियाणा (भारत) स्थित कंपनी ने किया था। 🚫 क्या कार्रवाई हुई WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने 5 अक्टूबर 2022 को वैश्विक अलर्ट जारी किया। भारत सरकार के ड्रग कंट्रोलर जनरल (DCGI) ने कंपनी की जांच शुरू की। हरियाणा सरकार ने Maiden Pharmaceuticals की उत्पादन इकाई (Unit in Sonipat) को तुरंत बंद करने का आदेश दिया। WHO ने दुनियाभर के देशों को इन सिरपों का उपयोग या आयात न करने की चेतावनी दी। 🇺🇿 उज़्बेकिस्तान (Uzbekistan) मामला – दिसंबर 2022 ⚰️ मौतों की संख्या यहां भी 18 बच्चों की मौत हुई थी। 💊 कौन-सा सिरप था Doc-1 Max Syrup नाम का कफ सिरप पाया गया। 🏭 कौन-सी कंपनी थी यह सिरप Marion Biotech Pvt. Ltd. (नोएडा, भारत) ने बनाया था। 🚫 कार्रवाई WHO और उज़्बेकिस्तान स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे टॉक्सिक सिरप घोषित किया। भारत सरकार ने Marion Biotech का लाइसेंस रद्द कर दिया। WHO ने विश्वस्तर पर अलर्ट जारी किया कि इन सिरपों में भी डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG) की अधिक मात्रा पाई गई। ⚠️ साझा कारण दोनों मामलों में दोनों कंपनियों के सिरप में पाया गया था वही घातक रसायन — डाइएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल (EG)। ये तत्व औद्योगिक सॉल्वेंट होते हैं, जिन्हें गलती या लापरवाही से ग्लिसरीन की जगह उपयोग करने से सिरप जहरीला बन जाता है।
चिंताजना, छिंदवाड़ा (MP) — मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा से दिल काे झकझाैर कर रख देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल के शिक्षक और उनकी पत्नी ने नौकरी चली जाने के डर से अपना चौथा नवजात शिशु जंगल में छोड़ दिया। दोनो को इस बात का डर सता रहा था कि चौथे बच्चे की वजह से उनकी सरकारी नौकरी जा सकती है। लेकिन एक बाइक सवार की सतर्कता की वजह से मासूम की जान बच गई। बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत यदि किसी सरकारी कर्मचारी का तीसरा बच्चा 26 जनवरी 2001 के बाद पैदा होता है, तो वह अपनी नौकरी के लिए अयोग्य मान लिया जाता है। इन लोगों को भी इसी बात का डर सता रहा था। जानिए घटना का क्रम शिक्षक की पत्नी राजकुमारी डांडोलिया 23 सितंबर की रात को अपने घर पर एक पुत्र को जन्म दिया। फिर, देर रात या अगले दिन की सुबह, बच्चे को जंगल ले जाकर एक भारी पत्थर के नीचे रखा गया और अभिभावक वहाँ से चले गए। सुबह ग्रामीणों ने बच्चे की चीखें सुनीं। पत्थर हटाकर देखा तो नवजात जीवित मिला, हालांकि उसे पिसने और ठंड एवं कीड़ों के काटने की चोटें आई थीं। बच्चे को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई गई। आरोपी और उनका दावा आरोपी दंपत्ति: बाबुलू डांडोलिया (38 वर्ष) और राजकुमारी डांडोलिया। दोनों सरकारी प्राथमिक विद्यालय में क्लास 3 शिक्षक हैं। उनके तीन अन्य बच्चे हैं — उम्र लगभग 11 वर्ष, 7 वर्ष और 4 वर्ष। आरोप है कि वे पहले से ही तीसरे बच्चे को सरकारी रिकॉर्ड में छिपाते रहे, और चौथे के बारे में बताने से डर गए क्योंकि सरकारी नियमों के अनुसार दो बच्चों से अधिक होने पर सेवा पर असर हो सकता है। उन्होंने पूछताछ में बताया कि उन्होंने नौकरी छूटने के डर से यह कदम उठाया। कानूनी कार्रवाई पुलिस ने बच्चे की परित्याग की धाराओं में मामला दर्ज किया है। बाद में यह मामला गम्भीर अपराध की श्रेणी (हत्याचेष्टा / विधि-उल्लंघन) में भी बढ़ाया जा सकता है। जिला शिक्षा विभाग और राजकीय अधिकारी इस घटना की जांच कर रहे हैं। शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना संभव है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ