मेरठ के बहुचर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' की मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने 24 नवंबर को एक बेटी को जन्म दिया, और आज 26 नवंबर को उसे मेरठ मेडिकल अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बच्ची के साथ मुस्कान को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जेल लाया गया है। मुस्कान और उसकी नवजात बेटी, जिसका नाम उसने राधा रखा है, अब जेल के भीतर ही अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगी। यह बच्ची ठीक उसी दिन पैदा हुई, जिस दिन मुस्कान ने जिस पति, मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या की थी, उसका जन्मदिन होता है।
इस नाटकीय मोड़ ने न केवल सौरभ के परिवार के घावों को कुरेद दिया है, बल्कि कानूनी और नैतिक सवालों का एक नया बवंडर खड़ा कर दिया है। सौरभ के परिवार को संदेह है कि यह बच्चा मृत पति सौरभ का नहीं, बल्कि हत्या में सह-आरोपी और मुस्कान के बॉयफ्रेंड साहिल का है। सौरभ के बड़े भाई राहुल राजपूत ने इसे मुस्कान का 'माइंड गेम' बताया है और DNA टेस्ट की अनिवार्य मांग की है। इससे भी बढ़कर, उन्होंने बच्ची की सुरक्षा पर गंभीर संदेह जताते हुए आशंका जताई है कि मुस्कान जेल के भीतर भी उस बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।
यह विस्तृत आलेख मुस्कान की डिलीवरी के बाद के घटनाक्रम, सौरभ के परिवार के आक्रोश, जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं, और इस हाई-प्रोफाइल मामले के पीछे की जटिल प्रेम कहानी और निर्मम हत्या के पूरे घटनाक्रम का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
मुस्कान रस्तोगी ने 24 नवंबर की शाम मेरठ मेडिकल अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी से बेटी को जन्म दिया था। आज, 26 नवंबर को, 10 डॉक्टरों की टीम द्वारा उसे डिस्चार्ज करने की अनुमति मिलने के बाद, मुस्कान को बच्ची के साथ मेरठ जिला जेल लाया गया है।
हेल्थ चेकअप: जेल में पहुँचते ही सबसे पहले जेल के डॉक्टरों ने मुस्कान और बच्ची का हेल्थ चेकअप किया और उनकी सारी मेडिकल डिटेल्स की जाँच की गई, जिसके बाद उन्हें जेल में दाखिल किया गया।
मुस्कान का हाल: अस्पताल सूत्रों के अनुसार, डिस्चार्ज होने तक मुस्कान बेटी को गोद में लेकर खिलाती रही। हालांकि, उसकी निगाहें किसी अपने को ढूंढ रही थीं, लेकिन उसके परिवार या ससुराल पक्ष से कोई भी उससे मिलने नहीं पहुंचा।
राधा नामकरण: मुस्कान ने अपनी बेटी का नाम राधा रखा है।
जिस दिन राधा का जन्म हुआ, अगर सौरभ की हत्या नहीं हुई होती तो वह आज 31 साल का होता। लेकिन सौरभ के घर, ब्रह्मपुरी में, सन्नाटा पसरा हुआ है।
परिवार का दर्द: घर के अंदर सौरभ के बड़े भाई राहुल उर्फ बबलू और उनकी माँ रेनू राजपूत मौजूद थीं। कोई रिश्तेदार घर नहीं पहुंचा था, न ही आसपास के लोगों का कोई जमावड़ा था।
पहली बेटी पीहू: मुस्कान की पहली बेटी पीहू इस समय अपने नाना-नानी के घर पर है, जिससे उसका परिवार कोई संपर्क नहीं कर पाया है।
सौरभ के बड़े भाई राहुल राजपूत ने बच्ची के जन्म की खबर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे मुस्कान की एक गहरी साजिश बताया है।
संदेह: राहुल ने स्पष्ट कहा, "बेटा हो या बेटी…हमें कोई मतलब नहीं। हम तो ये चाहते थे कि सौरभ का बेबी है, तो वो हमें दिया जाए। इसीलिए बच्चे की DNA जांच कराना जरूरी हो जाता है।"
शर्त: उन्होंने दोहराया कि "अगर बच्चा सौरभ का है, तो हम उसे अपनाएंगे। अगर बेटा होता तो मुस्कान कहती कि सौरभ ही वापस आ गया और वो हम ले लेते। सौरभ के बर्थडे के दिन ही उसने बच्चा कराया।"
कठोर रुख: "अगर बच्चा सौरभ का है, तो हम नहीं चाहते वो उसके पास जरा भी रहे।"
राहुल ने 24 नवंबर को डिलीवरी होने को 'माइंड गेम' बताया है:
साजिश: राहुल ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने डिलीवरी की डेट 28 नवंबर दी थी, लेकिन मुस्कान ने जानबूझकर 24 नवंबर को डिलीवरी कराई।
उद्देश्य: "जिससे अगर बेटा हो जाए, तो लोगों को लगे कि सौरभ वापस आ गया है। पब्लिक की सहानुभूति मिलेगी।"
विफलता: राहुल ने कहा कि "भगवान नहीं चाहता कि मुस्कान सफल हो," इसलिए उसे बेटी हुई।
राहुल ने बच्ची के जेल में सुरक्षित रहने पर भी गंभीर संदेह जताया है:
हत्या की आशंका: "मुस्कान बहुत तेज दिमाग की है। वो किसी भी तरह से उस बच्ची को मार सकती है। उसे कोई भी एक्सीडेंट बता देगी। कोई समझ नहीं पाएगा कि ये बच्चा कैसे मरा? मुस्कान उसकी हत्या कर देगी।"
दबाव: सौरभ का परिवार शुरू से ही इस बच्चे के डीएनए टेस्ट की मांग कर रहा है।
सौरभ की माँ रेनू राजपूत ने भी डीएनए टेस्ट की मांग का समर्थन करते हुए मुस्कान की साजिशों पर बात की।
अविश्वास: माँ रेनू ने साफ कहा, "ये बच्ची हमारे बेटे सौरभ की तो हो ही नहीं सकती। फिर भी हमारी एडमिनिस्ट्रेशन से मांग है कि इस बच्ची का DNA टेस्ट कराया जाए।"
मुंह भी नहीं देखेंगे: "अगर वो सौरभ की निकली, तो हम उसे रखेंगे। अगर ऐसा नहीं है, तो उसका मुंह भी नहीं देखेंगे।"
साजिश का पर्दाफाश: उन्होंने भी 28 नवंबर की जगह 4 दिन पहले डिलीवरी कराने को मुस्कान की बड़ी साजिश बताया, जिसका उद्देश्य उन पर दबाव बनाना था, लेकिन "अब वो हम लोगों पर दबाव नहीं बना पाएगी।"
राहुल ने मुस्कान की पहली बेटी पीहू की चिंता व्यक्त की, जो अपने नाना-नानी के घर है:
कस्टडी की मांग: "हमने तो ये भी मांग की है कि पीहू को हमें सौंप दिया जाए। लेकिन, उसके नाना, नानी हमें पीहू को दे ही नहीं रहे।"
भविष्य की चिंता: राहुल ने आरोप लगाया कि मुस्कान के माता-पिता पीहू की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। "मेरा भाई सौरभ तो पीहू को लंदन में भेजकर पढ़ाना चाहता था। लेकिन, मुस्कान के माता-पिता तो उसे सरकारी स्कूल में भी नहीं पढ़ा पा रहे।"
वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने मुस्कान और बच्ची की सुरक्षा व जेल मैनुअल के प्रावधानों पर जानकारी दी।
6 साल का प्रवास: जेल अधीक्षक ने बताया कि मुस्कान को यह बता दिया गया है कि 6 साल तक यह बच्ची जेल में माँ के पास रह सकती है।
व्यवस्थाएं: चूंकि मुस्कान के परिजन या ससुराल पक्ष से कोई संपर्क नहीं हुआ, इसलिए बच्ची की दवाएं, कपड़े और जरूरी सामान की व्यवस्था जेल प्रशासन की ओर से ही की जा रही है।
बच्चों की सुविधा: यूपी जेल मैनुअल के तहत जेल में बच्चों के खेलने के लिए क्रेच है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग से फ्री टीकाकरण, पूरा इलाज और दवाएं मिलती हैं। उनका आंगनबाड़ी में रजिस्ट्रेशन होता है और उन्हें शिक्षामित्रों/टीचर के जरिए जेल में ही पढ़ाया जाता है।
सुरक्षा: हॉस्पिटल से जेल आने के बाद भी मुस्कान को अलग रखा जाएगा।
मुस्कान के बॉयफ्रेंड और हत्याकांड के सह-आरोपी साहिल ने बच्ची के बारे में जानने की कोशिश की थी:
पूछताछ: जेल अधीक्षक ने पुष्टि की कि साहिल ने बैरक के वॉर्डन से मुस्कान का हालचाल और बच्ची के बारे में जानने का प्रयास किया था।
वर्तमान स्थिति: साहिल जेल में बागवानी का काम कर रहा है और उसका व्यवहार सामान्य है।
मुस्कान की डिलीवरी और बच्ची के भविष्य को लेकर ज्योतिषीय राय भी सामने आई है।
मेरठ के ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल ने राधा की कुंडली (धनु राशि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र) पर विश्लेषण किया:
मुस्कान के लिए शुभ: ज्योतिषी ने कहा कि बच्ची की कुंडली माँ मुस्कान के लिए बहुत सूटेबल और शुभ है, क्योंकि बच्ची की राशि का चंद्रमा माँ के लिए अच्छा है।
सरल डिलीवरी: उन्होंने कहा कि स्त्रीकारक ग्रहों का प्रभाव और चंद्रमा की अच्छी स्थिति के कारण ही मुस्कान की डिलीवरी बहुत आसानी से नॉर्मल हुई, जो जेल में गर्भावस्था बिताने के बाद अमूमन संभव नहीं होता।
राधा नाम: नक्षत्र के हिसाब से नाम अक्षर 'ढा' निकलता है। मुस्कान द्वारा रखा गया नाम राधा (स्वामी शुक्र) बुध, शुक्र पंचम भाग में स्थित होने के कारण बेहद उपयुक्त है।
26 नवंबर को, जिस दिन मुस्कान डिस्चार्ज होकर जेल आई, सौरभ मर्डर केस में जिला जज के यहां 14वें गवाह की गवाही होनी है। यह गवाही केस के विवेचक (IO) की होगी। इस केस में साहिल और मुस्कान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब ट्रायल चल रहा है।
मुस्कान की यह जघन्य अपराध गाथा 2016 में शुरू हुई थी, जब सौरभ पहली बार उससे मिला।
शादी और विरोध (2016): मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ कुमार राजपूत ने 2016 में परिवार के विरोध के बावजूद मुस्कान से लव मैरिज की थी। इसी कारण परिवार ने उन्हें प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। सौरभ, मुस्कान और उनकी पहली बेटी पीहू (जो पढ़ाई में 2 क्लास पीछे है) के साथ इंद्रानगर में किराए पर रहते थे।
साहिल से मुलाकात (2019): सौरभ के विदेश में रहने का फायदा उठाकर, 2019 में मुस्कान की मुलाकात साहिल शुक्ला से हुई। साहिल ने मुस्कान पर सौरभ को तलाक देकर शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
निर्मम हत्या (3 मार्च 2025): 24 फरवरी को सौरभ के वापस आने के बाद साहिल परेशान रहने लगा। 4 मार्च को सौरभ को रास्ते से हटाने का प्लान बना। 3 मार्च की रात मुस्कान ने डिनर में नशे की दवा मिलाई। सौरभ के सोने के बाद, मुस्कान ने साहिल को बुलाया और सौरभ के सीने में चाकू घोंप दिया।
शव ठिकाने लगाना: मौत के बाद लाश को बाथरूम में घसीटकर मुस्कान और साहिल ने मिलकर 4 टुकड़े किए। टुकड़ों को एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम में भरा और उसमें पानी डालकर सीमेंट और बालू का घोल भर दिया। रातभर दोनों उसी लॉबी में लाश के साथ रहे।
फरार: 5 मार्च को मुस्कान पीहू को अपनी माँ के घर छोड़कर, साहिल के साथ शिमला-मनाली घूमने चली गई। मुस्कान वहां से सौरभ के मोबाइल से वॉट्सऐप चलाती रही ताकि सबको लगे कि वे घूम रहे हैं। साहिल के मुताबिक, उन्होंने शिमला के एक मंदिर में शादी भी की।
गिरफ्तारी: 17 मार्च को सौरभ के भाई राहुल ने घर आकर बदबू और मुस्कान को साहिल के साथ देखने के बाद पुलिस को बुलाया, जिसके बाद इस कत्ल का खुलासा हुआ।
मुस्कान की बेटी राधा अब इस जघन्य अपराध की परछाई में जेल की दीवारों के बीच रहेगी, जब तक कि DNA टेस्ट से उसके पितृत्व का रहस्य नहीं सुलझ जाता।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य की पदवी पर आर-पार; प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'क्या अब प्रशासन तय करेगा कि मैं शंकराचार्य हूं या नहीं?' प्रयागराज | 20 जनवरी 2026 संगम नगरी प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद ने अब बेहद उग्र रूप ले लिया है। मेला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शंकराचार्य के शिविर पर नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर यह साबित करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिख रहे हैं। वहीं, सड़क पर धरना दे रहे अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और संतों का अपमान करार दिया है। 1. रात 12 बजे नोटिस और सुबह की गहमागहमी प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब कानूनी नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मिडनाइट ड्रामा: सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। हालांकि, शिष्यों ने यह कहकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। नोटिस चस्पा: मंगलवार सुबह प्रशासन ने दोबारा शिविर का रुख किया और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। मुख्य आधार: नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के पद पर अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने पर रोक लगाई गई थी। 2. अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: 'प्रशासन की बंदूक, सुप्रीम कोर्ट का कंधा' नोटिस के जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सरकार के विरोधाभास: उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान खुद सरकार ने एक आधिकारिक पत्रिका छापी थी, जिसमें उन्हें 'शंकराचार्य' के रूप में संबोधित किया गया था। अब प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। पद की गरिमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई जिलाधिकारी या देश का राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही करेंगे। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं, अब प्रशासन को और क्या प्रमाण चाहिए?" 📊 विवाद के मुख्य बिंदु: पद, परंपरा और कानून श्रेणी प्रशासन का तर्क (नोटिस) शंकराचार्य का तर्क (जवाब) कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केस लंबित रहने तक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। कोर्ट ने पद पर बैठने से रोका है, लेकिन मान्यता संतों से मिलती है। शिविर का बोर्ड बोर्ड पर "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" लिखना कोर्ट की अवहेलना है। सरकार ने खुद अपनी पत्रिका में मुझे शंकराचार्य छापा है। मान्यता पदवी विवादित है (अविमुक्तेश्वरानंद बनाम वासुदेवानंद)। अन्य पीठों के शंकराचार्य मुझे स्वीकार करते हैं, यही सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्तमान स्थिति 24 घंटे में प्रमाण देने का अल्टीमेटम। जब तक माफी नहीं, तब तक आश्रम में प्रवेश नहीं; फुटपाथ पर रहेंगे। 3. मौनी अमावस्या का वो विवाद जिसने आग सुलगाई इस पूरे विवाद की जड़ 18 फरवरी (मौनी अमावस्या) को हुई घटना है। पालकी रोकने पर बवाल: शंकराचार्य पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। झड़प और हिरासत: शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पालकी को खींचकर संगम से 1 किमी दूर कर दिया था। प्रायश्चित धरना: इसी अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने शिविर त्याग दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर मेले में आएंगे, लेकिन प्रशासन के व्यवहार के विरोध में फुटपाथ पर ही रहेंगे। 4. ज्योतिषपीठ का पुराना विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है। प्रशासन इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक पदवी को चुनौती दे रहा है, जबकि शंकराचार्य इसे अपनी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।
मेरठ का 'ज्वालागढ़ कांड': रोनू कश्यप की 'क्रूर' हत्या पर गरमाई यूपी की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा; 18 को महापंचायत मेरठ का सरधना क्षेत्र इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उससे सटे ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक रोनू उर्फ सोनू कश्यप (28) की वीभत्स हत्या ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ पुलिस इसे आपसी विवाद और नाबालिग का कृत्य बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ज़िंदा जलाने' की अमानवीय घटना करार देकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहा है। 1. क्या है ज्वालागढ़ कांड? (क्राइम फाइल) 5 जनवरी 2026 (सोमवार) को मेरठ के सरधना में अक्खेपुर-रार्धना रोड पर एक अधजली लाश मिली। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के रोनू कश्यप के रूप में हुई। पुलिस की थ्योरी: पुलिस के अनुसार, रोनू और एक 16 वर्षीय टेंपो चालक के बीच टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पहले रोनू को शराब पिलाई, फिर ईंट से सिर वार कर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घसीटकर पत्तों और मोबिल ऑयल से जला दिया। परिजनों का आरोप: परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि रोनू को ज़िंदा जलाया गया है और इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई लोग शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि रोनू से 80,000 रुपये भी लूटे गए थे। 📊 पीड़ित परिवार की मार्मिक स्थिति सदस्य स्थिति रोनू कश्यप (मृतक) परिवार का इकलौता सहारा, मुंबई में हलवाई का काम करता था। बुजुर्ग माँ गंभीर रूप से बीमार, बेटे की शादी के सपने देख रही थीं। बड़ा भाई टीबी (TB) का मरीज, लंबे समय से इलाज चल रहा है। बड़ी बहन अविवाहित, दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। मकसद रोनू अपनी शादी के लिए लड़की देखने मुजफ्फरनगर से गांव आया था। 2. सियासी 'ज्वाला': अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर के कड़े तेवर इस घटना ने ठाकुर बनाम कश्यप (पिछड़ा वर्ग) का रंग ले लिया है, जिससे विपक्ष को 'PDA' और 'दलित-पिछड़ा' राजनीति को धार देने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव (सपा): उन्होंने इसे 'दबंगों का कुकृत्य' बताते हुए ट्वीट किया— "हम पूरे PDA समाज की तरफ से आवाज़ उठाते हैं। न्याय हो!" मायावती (BSP): बसपा सुप्रीमो ने इसे अति क्रूर और शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने शासन-प्रशासन से अपराधियों के मन में 'कानून का डर' पैदा करने की मांग की। चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नगीना सांसद ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी व मुआवजा मिले। चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया है। नरेंद्र कश्यप (राज्यमंत्री): सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के लिए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप 14 जनवरी को मेरठ पहुँच रहे हैं। 3. स्थानीय विरोध और 18 जनवरी की महापंचायत अतुल प्रधान की सक्रियता: सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलकर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया है। कश्यप समाज का आक्रोश: 12 जनवरी को मुजफ्फरनगर डीएम कार्यालय पर भारी प्रदर्शन हुआ। अब कश्यप समाज ने 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दौराला में एक विशाल 'शोक सभा' और पंचायत बुलाई है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। 4. पुलिस की जांच और 'नाबालिग' का पेंच मेरठ पुलिस के लिए यह केस सिरदर्द बन गया है। साक्ष्य: पुलिस ने शराब के पाउच के बारकोड और ठेके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से आरोपी को ट्रैक किया। विवाद: पुलिस ने 24 घंटे में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए केवल एक नाबालिग पर ठीकरा फोड़ रही है।
मेरठ दलित महिला हत्याकांड और अपहरण: 30 घंटे के तनाव के बाद अंतिम संस्कार; 'बुलडोजर' और 'न्याय' की मांग के बीच सुलगता कपसाड़ गांव उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाड़ गांव इस समय एक भीषण सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की गिरफ्त में है। एक दलित महिला की बेरहमी से हत्या और उसकी युवा बेटी के अपहरण ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। 1. घटनाक्रम: खेत की पगडंडी से शुरू हुआ मातम गुरुवार की सुबह मेरठ के कपसाड़ गांव में एक सामान्य दिन की शुरुआत हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते यहाँ चीख-पुकार मच गई। दुस्साहस: एक दलित महिला अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थी। रास्ते में आरोपी कंपाउंडर पारस ने लड़की के साथ छेड़छाड़ की। हत्या और अपहरण: जब माँ ने अपनी बेटी की अस्मत बचाने के लिए विरोध किया, तो आरोपी ने आव देखा न ताव और फरसे (धारदार हथियार) से हमला कर माँ की नृशंस हत्या कर दी। इसके बाद वह लड़की को जबरन अगवा कर फरार हो गया। शादी की खुशियां मातम में: पीड़िता के पिता सत्येंद्र ने रोते हुए बताया कि बेटी की शादी तय हो चुकी थी। मई की तारीख को बदलकर अप्रैल का मुहूर्त निकलवाना था, लेकिन एक झटके में सब बर्बाद हो गया। 2. 30 घंटे का 'डेडलॉक' और प्रशासनिक कवायद घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया था। उनकी मांग थी कि जब तक बेटी सकुशल नहीं मिलती और आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, वे टस से मस नहीं होंगे। भारी सुरक्षा बल: गांव में तनाव को देखते हुए 10 थानों की फोर्स, आरएएफ (RAF) और पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई। पूरा गांव एक छावनी में तब्दील हो गया। प्रशासन का समझौता: 30 घंटे की लंबी जद्दोजहद और मान-मनौव्वल के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। प्रशासन ने तुरंत 10 लाख रुपये का चेक सौंपा। अंतिम संस्कार: भारी सुरक्षा के बीच मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन गांव में अब भी गुस्सा शांत नहीं हुआ है। 📊 पीड़ित परिवार की 4 प्रमुख मांगें और सरकारी आश्वासन मांग स्थिति / आश्वासन बेटी की सकुशल बरामदगी पुलिस की 5 टीमें और क्राइम ब्रांच लगातार दबिश दे रही हैं। 50 लाख की आर्थिक मदद 10 लाख दिए गए, बाकी के लिए शासन को फाइल भेजी गई। सरकारी नौकरी परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार नौकरी का आश्वासन। शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा की दृष्टि से शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर विचार। 3. राजनीति का अखाड़ा बना कपसाड़: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष इस घटना ने मेरठ की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। अतुल प्रधान बनाम पुलिस: सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान जब गांव पहुँचे, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की हुई। उन्हें गांव के बाहर रोका गया, जहाँ वे समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। ढाई घंटे बाद उन्हें मिलने की अनुमति मिली। अखिलेश यादव का हस्तक्षेप: सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पीड़ित पिता से फोन पर बात की और 3 लाख रुपये की निजी आर्थिक मदद की घोषणा की। संगीत सोम की एंट्री: बीजेपी के कद्दावर नेता संगीत सोम भी गांव पहुँचे और परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। आजाद समाज पार्टी और भाकियू: चंद्रशेखर आजाद की पार्टी और किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। 4. भाई की आशंका: "मेरी बहन के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए" पीड़िता के भाई नरसिंह का बयान दिल दहला देने वाला है। उसने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और आरोपी ने अभी तक कोई सुराग नहीं छोड़ा है। बुलडोजर की मांग: परिजनों की मांग है कि आरोपी पारस के घर पर बुलडोजर चलाया जाए ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो। अनहोनी का डर: भाई को डर है कि आरोपी उसकी बहन को नुकसान पहुँचा सकता है।