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चीन की चालबाजी का बड़ा खुलासा: अमेरिकी रिपोर्ट ने बताया—राफेल की बिक्री रोकने के लिए चलाया गया फर्जी कैंपेन

रवि चौहान नवम्बर 19, 2025 0
फाइटर जेट
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चीन की चालबाजी का बड़ा खुलासा: अमेरिकी रिपोर्ट ने बताया—राफेल की बिक्री रोकने के लिए चलाया गया फर्जी कैंपेन, AI से बनी नकली तस्वीरों के जरिए फैलाया गया भ्रम

 

दुनिया की जियोपॉलिटिक्स आज पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुकी है। देशों के बीच प्रतिस्पर्धा अब केवल युद्धक्षेत्र, कूटनीति या व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह सोशल मीडिया, फर्जी डिजिटल कैंपेन और सूचना युद्ध तक फैल चुकी है। इसी बदलते दौर का एक चौंकाने वाला खुलासा अमेरिका की प्रतिष्ठित संस्था यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन (USCC) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि चीन अब केवल हथियारों, तकनीक और अर्थव्यवस्था में ही नहीं, बल्कि वैश्विक कथा निर्माण (Global Narrative Building) में भी आक्रामक भूमिका निभा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़प का फायदा उठाते हुए फ्रांसीसी लड़ाकू विमान राफेल को बदनाम करने के लिए एक संगठित फर्जी सोशल मीडिया कैंपेन चलाया। इसका उद्देश्य था—राफेल की वैश्विक साख गिराना, उसकी अंतरराष्ट्रीय बिक्री को प्रभावित करना और दुनिया के सामने अपने J-35 जैसे चीनी लड़ाकू विमानों को बेहतर विकल्प के रूप में प्रस्तुत करना।

यह खुलासा न केवल भारत के लिए बल्कि फ्रांस, अमेरिका और पूरे वैश्विक रक्षा बाजार के लिए चौंकाने वाला है।

 


भारत-पाकिस्तान संघर्ष के तुरंत बाद चीन का डिजिटल हमला

 

USCC रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान के बीच मई महीने में हुए संघर्ष के तुरंत बाद चीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी अकाउंट बनाकर एक पूरी कहानी गढ़नी शुरू कर दी।

इन फर्जी अकाउंट्स ने दावा किया कि—

  • भारतीय वायुसेना के राफेल लड़ाकू विमान को चीन के हथियारों ने गिराया है।

  • AI से बनाई गई नकली तस्वीरें पोस्ट की गईं।

  • इन तस्वीरों को विमान के मलबे के रूप में दिखाया गया।

  • लोगों को विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि राफेल युद्ध में असफल साबित हुआ है।

यह पूरा कैंपेन बेहद सूक्ष्म तरीके से डिजाइन किया गया था ताकि यह लगे कि असली घटनाएं हैं, न कि कोई डिजिटल मैनिपुलेशन।

 


राफेल बनाम J-35—क्यों चीन इतना परेशान?

 

चीन का इस कैंपेन के पीछे सबसे बड़ा मकसद था—
फ्रांस के राफेल फाइटर जेट की बिक्री रोकना।

इसके दो मुख्य कारण बताए गए—

  1. दुनिया के कई देश राफेल खरीदने की योजना बना रहे थे।

  2. चीन चाहता था कि बाज़ार में उसके J-35 और J-20 जैसे विमानों की मांग बढ़े।

इसलिए चीन ने यह नैरेटिव बनाया कि—

  • राफेल पुरानी तकनीक का विमान है।

  • वह चीन के आधुनिक हथियारों के सामने टिक नहीं सकता।

  • भारत जैसे बड़े देश के हाथों में होने के बावजूद राफेल ‘असफल’ हुआ है।

AI से बनी तस्वीरें, एडिट किए गए वीडियो और फर्जी दावे इस कैंपेन का मुख्य हथियार थे।

 


USCC ने उजागर किए चीन से जुड़े 5 बड़े खतरे

 

इस रिपोर्ट में केवल राफेल कैंपेन की बात नहीं है। इसमें कई ऐसे खतरे बताए गए हैं, जिनसे अमेरिका, भारत और दुनिया का बाकी बड़ा हिस्सा वाकिफ रहना चाहिए।

 

1. चीन तेजी से एडवांस टेक्नोलॉजी पर कब्जा कर रहा है

 

रिपोर्ट में कहा गया कि चीन AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और 6G जैसी टेक्नोलॉजीज में बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
➡️ यह टेक्नोलॉजीज भविष्य के युद्ध और अर्थव्यवस्थाओं को तय करेंगी।

 

2. सप्लाई चेन पर चीन की पकड़ खतरनाक

 

चीन द्वारा महत्वपूर्ण कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग पर नियंत्रण अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है।
➡️ भविष्य में चीन इन्हें ‘हथियार’ की तरह इस्तेमाल कर सकता है।

 

3. चीन-रूस-ईरान-उत्तर कोरिया की पार्टनरशिप बढ़ रही है

 

ये सभी देश अमेरिका की नीतियों के खिलाफ हैं।
➡️ यह गठजोड़ वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।

 

4. चीन छोटी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जाल में फंसा रहा है

 

बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव, सैन्य समझौते और आर्थिक निवेश—ये सभी चीन की वैश्विक पहुंच को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा हैं।

 

5. चीन की बैटरी और ऊर्जा स्टोरेज यूनिट्स से साइबर खतरा

 

रिपोर्ट में कहा गया कि चीन के ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम, खासकर वे जिनमें रिमोट मॉनिटरिंग की सुविधा है, साइबर जासूसी का बड़ा साधन बन सकते हैं।

 


USCC क्या है? इसकी रिपोर्ट इतनी महत्वपूर्ण क्यों?

 

USCC—अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित एक बायपार्टिजन कमीशन है।

  • इसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के सदस्य होते हैं।

  • इसका उद्देश्य है चीन की आर्थिक, सैन्य और तकनीकी हरकतों का विश्लेषण करना

  • इसकी रिपोर्ट सीधे अमेरिकी कांग्रेस और पेंटागन के फैसलों को प्रभावित करती है।

मतलब यह रिपोर्ट किसी मीडिया हाउस की स्टोरी नहीं, बल्कि एक अधिकृत, उच्च-स्तरीय अमेरिकी जांच है।

 


पाकिस्तान भी इस नैरेटिव का हिस्सा था—3 राफेल गिराने का दावा

 

भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने दावा किया था कि—

  • उसने भारतीय वायुसेना के 5 लड़ाकू विमान गिराए

  • जिनमें 3 राफेल शामिल थे

फ्रांस के अधिकारियों के अनुसार—
इन दावों ने सच में राफेल की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचाया।

फ्रांस के एयरफोर्स जनरल जेरोम बेलांगर ने बाद में कहा—

  • उन्हें केवल 3 भारतीय विमानों के नुकसान के सबूत मिले

    • एक राफेल

    • एक सुखोई

    • एक मिराज 2000

मिराज 2000 आखिरी जेनरेशन का फ्रांसीसी जेट है।
मीडिया के मुताबिक यह पहली बार था कि राफेल किसी युद्ध में क्षतिग्रस्त हुआ

 


भारतीय CDS की प्रतिक्रिया—“गिनती नहीं, सीख मायने रखती है”

 

CDS जनरल अनिल चौहान ने सिंगापुर में हुए शांगरी-ला डायलॉग में स्पष्ट कहा—

  • भारत ने अपनी गलतियों से तुरंत सीखा

  • और 48 घंटों के भीतर दुश्मन को लंबे रेंज के प्रहार से जवाब दिया

उन्होंने पाकिस्तान के 6 जेट गिराने के दावे को “झूठा और मनगढ़ंत” बताया।

चौहान का बयान स्पष्ट करता है कि भारत ने संघर्ष के बाद अपनी सैन्य रणनीति को तेजी से अपग्रेड किया और चीन-पाकिस्तान के नैरेटिव ने भारत की प्रतिक्रिया को प्रभावित नहीं किया।

 


राफेल: भारत की वायुसेना की रीढ़ क्यों माना जाता है?

 

रिपोर्ट में छेड़े गए विवाद के बीच राफेल की असली क्षमताओं को समझना जरूरी है।

  • दो इंजन वाला अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर

  • एक मिनट में 60,000 फीट तक पहुंचने की क्षमता

  • स्पीड: 2200–2500 km/h

  • रेंज: 3700 km

  • इसमें लगी मिसाइलें—

    • Meteor

    • Scalp

    • Hammer

इजराइली सिस्टम और फ्रांसीसी एवियोनिक्स इसे दुनिया के सबसे खतरनाक कॉम्बैट जेट्स में शामिल करते हैं।

2016 में भारत ने 59,000 करोड़ रुपये में 36 राफेल खरीदने का फैसला किया था।
यह अब तक IAF की सबसे महत्वपूर्ण डील्स में से एक है।

 

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दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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ट्रम्प ग्रीनलैंड का फ्यूचर स्विट्जरलैंड में तय करेंगे
Trump's New Map: कनाडा और ग्रीनलैंड को दिखाया अमेरिका का हिस्सा; दावोस में नाटो चीफ संग इमरजेंसी बैठक; ग्रीनलैंड में सैन्य विमान तैनात।

ट्रम्प का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान: ग्रीनलैंड पर नाटो चीफ से फोन पर बात, दावोस में होगी इमरजेंसी बैठक; सोशल मीडिया पर शेयर किया ग्रीनलैंड-कनाडा-वेनेजुएला वाला 'नया नक्शा' वाशिंगटन/नुउक | 20 जनवरी 2026 दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को नाटो (NATO) चीफ मार्क रूट से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद ग्रीनलैंड मुद्दे को सुलझाने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादित नक्शा पोस्ट किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा दुनिया भर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 1. ट्रम्प और नाटो चीफ की 'दावोस डील' ट्रम्प ने मार्क रूट के साथ हुई बातचीत को 'अति प्रभावशाली' बताया। शांति के लिए ताकत: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है। उन्होंने कहा, "दुनिया में शांति केवल ताकत के जरिए ही आ सकती है, और अमेरिका सबसे ताकतवर है।" रूट का संदेश: ट्रम्प ने मार्क रूट का एक निजी संदेश साझा किया जिसमें रूट ने ट्रम्प की सीरिया और गाजा नीतियों की प्रशंसा की और ग्रीनलैंड मामले में 'रास्ता निकालने' की प्रतिबद्धता जताई। दावोस बैठक: ग्रीनलैंड के भविष्य और डेनमार्क के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए दावोस में अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की बैठक होगी। 2. ग्रीनलैंड में सैन्य टकराव की आहट: अमेरिका और डेनमार्क ने भेजे विमान कूटनीति के साथ-साथ जमीन पर सैन्य हलचल भी तेज हो गई है: अमेरिकी विमान: अमेरिका ने NORAD (North American Aerospace Defense Command) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) भेजा है। कमांड ने इसे 'नियमित रक्षा गतिविधि' बताया है। डेनमार्क का जवाब: डेनमार्क ने भी चुप बैठने के बजाय सोमवार को कई विमानों के जरिए अतिरिक्त सैनिक और भारी सैन्य उपकरण ग्रीनलैंड पहुंचाए। यूरोपीय मोर्चेबंदी: जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले ही 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत वहां अपने सैनिक भेज चुके हैं, जिसे ट्रम्प प्रशासन एक चुनौती के रूप में देख रहा है। 📊 ग्रीनलैंड का सैन्य ढांचा: वर्तमान तैनाती पक्ष यूनिट / बेस सैनिक संख्या मुख्य कार्य अमेरिका पिटुफिक स्पेस बेस (थुले) ~150-200 मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी। डेनमार्क जॉइंट आर्कटिक कमांड ~150-200 संप्रभुता रक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू। स्पेशल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल 12-14 कुत्तों की स्लेज से आर्कटिक गश्त। NATO (EU) आर्कटिक एंड्योरेंस ~40-50 राजनीतिक एकजुटता का संदेश। 3. 'ग्रेटर अमेरिका' मैप: कनाडा और वेनेजुएला पर नजर? ट्रम्प द्वारा साझा किए गए नक्शे ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विस्तारवाद: नक्शे में न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में रंगा गया है। कनाडा का रुख: कनाडा ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के चरम विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिका के तेल समृद्ध देश वेनेजुएला को अमेरिकी नक्शे में दिखाना ट्रम्प की ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। 4. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए 'गोल्ड माइन' क्यों है? ट्रम्प की इस जिद के पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) का भंडार है। वर्तमान में चीन इनका 90% उत्पादन नियंत्रित करता है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चीन की निर्भरता खत्म कर देगा। नई शिपिंग रूट्स: ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, जिससे आर्कटिक में नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं। अमेरिका इन रास्तों पर अपना प्रभुत्व चाहता है। मिसाइल डिफेंस: यह रूस और अमेरिका के बीच सबसे छोटा हवाई मार्ग है, जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। रणनीतिक घेराबंदी: यहाँ से अमेरिका रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर सीधी नजर रख सकता है। 5. कानूनी पेच: क्या ग्रीनलैंड को खरीदा जा सकता है? नाटो के नियमों के मुताबिक, यह प्रक्रिया लगभग असंभव है: Article 5 का उल्लंघन: अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सदस्य हैं। एक सदस्य दूसरे की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। जनमत संग्रह (Referendum): 2009 के 'सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट' के अनुसार, ग्रीनलैंड के लोग केवल जनमत संग्रह के जरिए ही स्वतंत्र हो सकते हैं या किसी अन्य देश के साथ जुड़ने का फैसला ले सकते हैं। डेनिश संसद की मंजूरी भी अनिवार्य है। 6. आर्थिक युद्ध: यूरोप का 'ट्रेड बाजूका' यूरोपीय संघ (EU) ने ट्रम्प के 10% टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रेड बाजूका: EU अपने 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' का इस्तेमाल कर अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने और 750 बिलियन डॉलर के ऊर्जा समझौते को रद्द करने की धमकी दे रहा है। 1 फरवरी की डेडलाइन: ट्रम्प का टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक संबंध अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुँच सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे

ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया 10% टैरिफ; जवाब में NATO ने तैनात किए सैनिक; ट्रेड वॉर की शुरुआत।

दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला

ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या

गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी
ट्रम्प की चेतावनी के बाद झुका ईरान, रुकी 800 लोगों की फांसी; अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध।

ईरान पर UNSC की आपात बैठक: अमेरिका की 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी; ट्रम्प के खौफ से 800 की फांसी रुकी; 180 घंटे से देश में 'डिजिटल ब्लैकआउट' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गुरुवार (15 जनवरी 2026) को ईरान संकट पर हुई आपात बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नरसंहार रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके पास 'सभी विकल्प' खुले हैं। 1. माइक वाल्ट्ज का अल्टीमेटम: "ट्रम्प एक्शन वाले इंसान हैं" UNSC में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान के शासन को आईना दिखाते हुए कहा कि दुनिया अब और खामोश नहीं रहेगी। बहादुरी को सलाम: वाल्ट्ज ने उन ईरानी प्रदर्शनकारियों की सराहना की जो गोलियों के सामने खड़े होकर आजादी मांग रहे हैं। सीधी चेतावनी: उन्होंने कहा कि ट्रम्प केवल बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं। ईरान को समझ लेना चाहिए कि अगर क्रूरता नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस का दावा: प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पुष्टि की कि ट्रम्प के सीधे दबाव के कारण ही ईरान ने अंतिम समय में 800 कैदियों की फांसी टाल दी है। 2. ईरान का पलटवार: "टकराव नहीं, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे" ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को 'झूठा' और 'दुष्प्रचार' बताया। इल्जाम: ईरान का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं जो अशांति फैलाकर 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना चाहती हैं। जवाबी हमला: दर्जी ने कहा कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 📊 ईरान संकट: UNSC की बैठक के मुख्य बिंदु और डेटा श्रेणी विवरण और आंकड़े मौत का तांडव मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए। गिरफ्तारियां अब तक 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद। नए प्रतिबंध अमेरिका ने अली लारीजानी समेत 18 व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया। डिजिटल ब्लैकआउट 8 जनवरी से अब तक 180+ घंटे से इंटरनेट बंद (कनेक्टिविटी महज 1%)। वैश्विक रुख अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस (निंदा) बनाम रूस, चीन (हस्तक्षेप का विरोध)। 3. रूस और पश्चिमी देशों के बीच 'कोल्ड वॉर' सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर दुनिया दो धड़ों में बंट गई है: रूस की आपत्ति: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आक्रामकता को सही ठहराने के लिए UNSC का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट खून-खराबे में डूब जाएगा। यूरोपीय देशों का रुख: ब्रिटेन और फ्रांस ने ईरान की कार्रवाई को "क्रूर दमन" बताया और तेहरान पर नए कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया। 4. 180 घंटे का सन्नाटा: ईरान में 'डिजिटल दीवार' ईरान में इंटरनेट की स्थिति को 'डिजिटल ब्लैकआउट' घोषित किया गया है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 9 करोड़ की आबादी को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उद्देश्य: सरकार नहीं चाहती कि सुरक्षा बलों की बर्बरता के वीडियो दुनिया तक पहुँचें। प्रभाव: बैंकिंग सेवाएं, फोन लाइनें और सोशल मीडिया पूरी तरह ठप हैं। यह ईरान के इतिहास की सबसे लंबी सेंसरशिप है। 5. क्यों सुलग रहा है ईरान? (प्रमुख कारण) आर्थिक पतन: रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है ($1 = ~14.5 लाख रियाल)। महंगाई की मार: चाय और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों पर 70% तक महंगाई बढ़ गई है। सत्ता के खिलाफ गुस्सा: प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का इस्तीफा और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ट्रम्प पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत 75 देशों के लिए वीजा सर्विस रोकेंगे

अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा रोका; पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सूची में शामिल।

ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी वॉरशिप

ट्रम्प का ईरान पर 'साउदर्न स्पीयर' जैसा हमला? दक्षिण चीन सागर से रवाना हुआ अमेरिकी नौसेना का सबसे ताकतवर बेड़ा।

अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा

ईरानी विदेश मंत्री बोले- फांसी की कोई योजना नहीं; भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी।

थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत
Thailand Train Accident: थाईलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 की मौत, 67 घायल; छात्रों से भरी थी ट्रेन।

थाईलैंड ट्रेन हादसा: 65 फीट ऊंचाई से पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 लोगों की मौत, 67 घायल; ट्रेन में सवार थे 195 छात्र थाईलैंड के नाखोन राचासिमा प्रांत में बुधवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना हुई। एक निर्माणाधीन रेल ब्रिज पर काम कर रही विशालकाय क्रेन अचानक 65 फीट की ऊंचाई से तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन पर गिर गई। इस जघन्य हादसे में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और 67 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। 1. कैसे हुआ हादसा? (घटनाक्रम) समय और स्थान: यह दुर्घटना बुधवार को नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी की ओर जा रही थी। तेज रफ्तार: हादसे के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। अचानक प्रहार: रेल ब्रिज के निर्माण में लगी क्रेन अचानक ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिर गई। क्रेन का वजन और ऊंचाई इतनी अधिक थी कि ट्रेन का एक डिब्बा दो हिस्सों में कट गया। आग और विस्फोट: स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्रेन गिरने के बाद दो जोरदार धमाके हुए और डिब्बों में भीषण आग लग गई। 2. हताहतों का विवरण: डिब्बों में फंसे थे छात्र ट्रेन में कुल 195 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्कूल के छात्र थे। मौत: अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव दल ने मलबे से शव निकालने का काम जारी रखा है। घायल: 67 घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। ड्राइवर की स्थिति: क्रेन इतनी अचानक गिरी कि ड्राइवर को आपातकालीन ब्रेक लगाने का भी मौका नहीं मिला। 📸 हादसे की भयावहता: मुख्य बिंदु विवरण प्रभाव क्रेन की ऊंचाई 65 फीट से सीधी टक्कर। ट्रेन की गति 120 किमी/घंटा। नुकसान ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे, दो हिस्सों में कटे और आग लगी। रेस्क्यू ऑपरेशन कटर मशीनों से डिब्बे काटकर यात्रियों को निकाला गया। 3. जांच और लापरवाही के सवाल रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच की जा रही है: सुरक्षा नियमों का उल्लंघन: क्या ब्रिज निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? तकनीकी विफलता: क्या क्रेन में कोई यांत्रिक खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है?

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी

eT Terrorist Abu Musa Threatens Hindus: 'गर्दन काटने' की धमकी; पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड अबू मूसा PoK में सक्रिय।

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जे से कम कुछ मंजूर नहीं

क्या ग्रीनलैंड बनेगा अमेरिका का 51वां राज्य? NATO टूटने का खतरा; डेनमार्क की चेतावनी।

ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

क्या रद्द होंगे ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ? भारत और चीन की नजर; IEEPA कानून का सच।

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