दिल्ली में हुए कार बम विस्फोट के बाद से हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) लगातार सुर्खियों में है और गहन जांच के दायरे में आ गई है। यूनिवर्सिटी से कथित आतंकी मॉड्यूल के सदस्यों के लिंक सामने आने के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिसने परिसर में भय और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
यूनिवर्सिटी के विवादों में घिरने के बाद अब यहां पढ़ने वाले छात्र और उनके अभिभावक गंभीर चिंता व्यक्त कर रहे हैं। वे यूनिवर्सिटी से नाम बदलने और फीस वापस करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि आतंकी लिंक के कारण उनके बच्चों के भविष्य और डिग्री की साख खतरे में पड़ गई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC), भूपिंदर कौर आनंद, एमबीबीएस कर रहे छात्रों को समझाने के लिए खुद क्लास में पहुंचीं। हालांकि, यह बातचीत छात्रों और वीसी के बीच तीखी बहस में बदल गई। इस नोकझोंक का लगभग 40 मिनट का एक ऑडियो रिकॉर्डिंग छात्रों द्वारा वायरल किया गया है।
कुछ छात्रों ने दावा किया कि वीसी ने उन्हें धमकाने के अंदाज में वीडियो रिकॉर्ड करने से रोक दिया था। यह घटना यूनिवर्सिटी परिसर में मौजूदा तनाव और प्रशासन तथा छात्रों के बीच अविश्वास के माहौल को दर्शाती है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की चर्चा का मुख्य कारण यहां के कुछ फैकल्टी सदस्यों का कथित रूप से आतंकी गतिविधियों से जुड़ा होना है:
डॉ. शाहीन सईद: यूनिवर्सिटी की फार्माकोलॉजिस्ट।
डॉ. मुजम्मिल शकील: सर्जन।
डॉ. उमर नबी: मेडिसिन डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर, जो दिल्ली में सुसाइड बॉम्बर बने थे।
इन हाई-प्रोफाइल फैकल्टी सदस्यों के आतंकी मॉड्यूल से कथित जुड़ाव के कारण यूनिवर्सिटी अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) समेत अन्य जांच एजेंसियों के रडार पर है। इन एजेंसियों का यूनिवर्सिटी में लगातार आना-जाना लगा हुआ है।
यूनिवर्सिटी से आतंकियों के लिंक सामने आने के बाद, स्टूडेंट्स और पेरेंट्स में गहरा भय व्याप्त हो गया है। कई अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य की चिंता में उन्हें यूनिवर्सिटी से लेकर जा रहे हैं, जिससे परिसर में एक तरह का पलायन देखने को मिल रहा है।
शनिवार को 25 से अधिक पेरेंट्स ने यूनिवर्सिटी पहुंचकर अपने बच्चों के करियर पर मंडरा रहे खतरे को लेकर चिंता जताई।
बढ़ते विरोध और चिंताओं के बीच, वीसी भूपिंदर कौर आनंद खुद छात्रों और अभिभावकों को समझा रही हैं।
वीसी ने छात्रों को आश्वस्त किया कि "अभी माहौल अलग है" और जब तक कोई आधिकारिक आदेश नहीं आता, तब तक चिंता की कोई बात नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि जांच एजेंसियां लगी हुई हैं और जो भी निर्णय लिया जाएगा, वह "फेयर ही होगा"।
हालांकि, छात्रों को मीडिया से दूरी बनाए रखने के लिए सख्त हिदायत दी गई है, जिससे यह संदेश जाता है कि प्रबंधन स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
छात्रों ने यूनिवर्सिटी के बारे में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए एक बयान को लेकर भी सवाल उठाया। छात्रों ने पूरे बयान को क्लास में प्ले करके सुना और वीसी से यह मांग की कि यूनिवर्सिटी को खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करके स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग में वीसी और छात्रों के बीच हुई बातचीत यूनिवर्सिटी के भीतर के तनावपूर्ण माहौल को स्पष्ट रूप से दर्शाती है:
वीसी ने क्लास में प्रवेश करते ही छात्रों के हाथ में फोन देखकर नाराजगी व्यक्त की:
वीसी: "ये फोन बंद करो, कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला इससे। आप डॉक्टर्स हैं, क्या कर रहे हैं? आपको एड्रेस करने आई हूं। मैं कभी इमेजिन नहीं कर सकती कि आप लोग फोन उठा के वीडियो बना रहे हो। इतनी हिम्मत है आप में? आपका दिमाग तो बहुत तेज चल रहा है।"
वीसी का यह आक्रामक रुख छात्रों को वीडियो रिकॉर्डिंग से रोकने की कोशिश के रूप में देखा गया।
वीसी ने कॉलेज की पिछली प्रतिष्ठा का हवाला देते हुए वर्तमान स्थिति को संबोधित किया:
वीसी: "ये बहुत ही रेअर इस्टेब्लिस्ड कॉलेज है... हमारी यूनिवर्सिटी में सिक्योरिटी भी थी, लेकिन ये चीजें हमारे पकड़ में नहीं आई कि ये सब हो रहा है। अभी कॉलेज को लेकर जांच की जा रही है। मैं नहीं जानती क्या होने वाला है, लेकिन यूनिवर्सिटी में इतनी ज्यादा स्ट्रेंथ है कि कोई और इसकी जिम्मेदारी लेने में असमर्थ होगा। ये घटना इतनी बड़ी है कि मेरी कहानियां नहीं काम आएंगी। इसमें हायर अथॉरिटी से अलग ही फेयर डिसीजन लिया जाएगा।"
छात्रों ने अपनी सुरक्षा और हॉस्टल में चेकिंग को लेकर तीखे सवाल पूछे:
स्टूडेंट्स: "मैम हमारी सिक्योरिटी का क्या होगा... बॉयज हॉस्टल की चेकिंग हो गई, गर्ल्स की क्यों नहीं हुई?"
वीसी: "क्या गर्ल्स हॉस्टल में चेकिंग नहीं हुई?"
छात्रों ने NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) से यूनिवर्सिटी को मिले एक शोकॉज नोटिस के संबंध में भी सवाल किया:
स्टूडेंट्स: "मैम लास्ट थर्सडे को NAAC से एक शोकॉज नोटिस आया था और उसमें 7 पॉइंट्स दिए थे कॉलेज को और एक सप्ताह का समय दिया था। क्या आपने उसका आंसर दिया था?"
वीसी: "हम ऐसे नोटिस को भूल जाते हैं... NAAC जो है, वो कुछ समय पहले एक्सपायर हो गया था... हम ट्राई कर रहे हैं। NAAC का मेडिकल पर तो कोई असर नहीं पड़ेगा, यूनिवर्सिटी पर असर पड़ेगा।"
वीसी ने नोटिस के जवाब को स्पष्ट रूप से टाल दिया और विस्तृत जानकारी से बचने की कोशिश की। जब छात्रों ने नोटिस का तीसरा पॉइंट पढ़कर सुनाया, तो वीसी ने उनकी बात को अनदेखा कर दिया और यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर चर्चा शुरू कर दी।
छात्रों ने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी एसोसिएशन (AIU) की सदस्यता समाप्त होने पर भी सवाल उठाया।
वीसी: "हमारे पास AIU की मेंबरशिप नहीं है। यूनिवर्सिटी से टेररिज्म एक्टीविटी से जुड़े लोग पकड़े गए हैं, जिसका असर हमारी सपोर्ट पर पड़ेगा, लेकिन हम अभी ठीक स्थान पर हैं, सब ठीक चल रहा है और जांच में सब फेयर ही होगा।"
शुरुआत में वीसी ने पूछा कि क्या 'अल-फलाह' नाम से कोई समस्या थी, जिस पर छात्रों ने हाँ में जवाब दिया।
वीसी: "वैसे यहां ये सब नहीं होता तो भी क्या अल फलाह के नाम से प्रॉब्लम थी?" स्टूडेंट्स: "नहीं मैम हमें कोई प्रॉब्लम नहीं थी।"
लेकिन अब आतंकी लिंक सामने आने के बाद छात्रों की राय बदल गई है:
वीसी: "(एग्रेसिव होते हुए) क्या कभी किसी ने एड्रेस डाला हो और पाकिस्तान का एड्रेस आ गया हो?" स्टूडेंट्स: "नहीं मैम, एड्रेस में फरीदाबाद ही आता है।"
वीसी: "अल फलाह के नाम से कोई प्रॉब्लम नहीं है।" स्टूडेंट्स: "अब फर्क पड़ रहा है। अल फलाह के नाम से प्रॉब्लम है। अल फलाह का नाम बदलना चाहिए।"
यह बातचीत स्पष्ट करती है कि छात्र अब यूनिवर्सिटी के नाम से जुड़े नकारात्मक जुड़ाव को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं और इसे अपने भविष्य के लिए खतरा मान रहे हैं।
22 नवंबर को यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों का एक प्रतिनिधिमंडल यूनिवर्सिटी प्रबंधन से मिला। उन्होंने एक मांग पत्र सौंपा और प्रबंधन से कड़े सवाल पूछे।
अभिभावकों का सवाल: प्रबंधन ने ऐसे डॉक्टरों की नियुक्ति क्यों की, जिसने उनके छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा दिया?
सबसे बड़ी चिंता: अगर यूनिवर्सिटी की मान्यता रद्द कर दी गई, तो उनके बच्चों का क्या होगा? उन्होंने बच्चों को डॉक्टर बनाने के लिए मोटी रकम खर्च की है।
अभिभावकों की यह चिंता स्वाभाविक है, क्योंकि एमबीबीएस जैसी डिग्री के लिए लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं और अगर डिग्री देने वाली संस्था की साख खत्म हो जाती है, तो उनके बच्चों का करियर चौपट हो सकता है।
यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने अभिभावकों और छात्रों को आश्वस्त करने की कोशिश की है:
प्रबंधन का दावा: यूनिवर्सिटी की मान्यता को कोई खतरा नहीं है।
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली ब्लास्ट के बाद हरियाणा सरकार के कुछ लोगों ने यूनिवर्सिटी का दौरा किया था और कुछ कागजात लिए थे, लेकिन अभी तक उन्होंने कोई रिपोर्ट नहीं दी है।
प्रबंधन का तर्क है कि अगर मान्यता को लेकर कोई बुरी खबर होती, तो वह अब तक आ जाती।
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया है।
नोटिस का कारण: दिल्ली ब्लास्ट में आतंकवादियों का सीधा संबंध सामने आने के बाद आयोग ने यूनिवर्सिटी से पूछा है कि क्यों न यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा रद्द कर दिया जाए।
सुनवाई की तारीख: इस मामले पर 4 दिसंबर को सुनवाई होगी, जिसमें यूनिवर्सिटी को अपना पक्ष रखना होगा।
यदि यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा रद्द होता है, तो इसके संचालन, प्रवेश प्रक्रिया और फंडिंग पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे यूनिवर्सिटी की वित्तीय और प्रशासनिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
शनिवार को यूनिवर्सिटी से 25 से ज़्यादा डॉक्टर छुट्टी लेकर अपने घर चले गए। उन्होंने कहा कि वे सब सोमवार को वापस आ जाएंगे, लेकिन इस घटना ने भी परिसर में तनाव और अटकलों को बढ़ा दिया है। यह भी बताया गया है कि यूनिवर्सिटी में कश्मीरी डॉक्टरों की संख्या अच्छी खासी है, और इन डॉक्टर्स का एक साथ छुट्टी पर जाना मौजूदा जांच के माहौल में कई सवाल खड़े करता है।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी अब दोहरी लड़ाई लड़ रही है: एक ओर जांच एजेंसियों के साथ अपनी साख बचाने की, और दूसरी ओर अपने छात्रों और अभिभावकों के बढ़ते अविश्वास और विरोध का सामना करने की।
विश्वविद्यालय के लिए यह महत्वपूर्ण होगा कि वह 4 दिसंबर को NCMEI की सुनवाई में अपना पक्ष मजबूती से रखे और जांच में पूरा सहयोग दे, ताकि छात्रों के भविष्य को बचाया जा सके। हालांकि, जिस तरह से नाम बदलने, फीस वापसी और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उससे यह स्पष्ट है कि यूनिवर्सिटी को अपनी छवि सुधारने और छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए कड़े और पारदर्शी कदम उठाने होंगे।
फिलहाल, हजारों छात्रों का भविष्य, जिन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा था, इस विवादित यूनिवर्सिटी के भविष्य पर निर्भर करता है, जिस पर देश की सुरक्षा एजेंसियां कड़ी नजर रखे हुए हैं।
क्या आप चाहेंगे कि मैं आपको इस विषय से जुड़ी NIA की जांच या NCMEI के नोटिस के बारे में कोई विशिष्ट जानकारी ढूंढ कर दूं?
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
लोकसभा में ऐतिहासिक टकराव: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश; विपक्ष का 'पक्षपात' का आरोप बनाम सरकार का 'भागने' का पलटवार नई दिल्ली | 10 मार्च 2026 भारतीय संसदीय इतिहास में आज एक दुर्लभ और गहमागहमी भरा दिन रहा। लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव (No Confidence Motion) पेश किया। सदन में 50 से अधिक सांसदों के समर्थन के बाद पीठासीन अधिकारी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है, जिस पर अब 10 घंटे की मैराथन चर्चा होगी। विपक्ष ने स्पीकर पर सदन की कार्यवाही के दौरान सत्तापक्ष का साथ देने और विपक्षी आवाजों को दबाने का गंभीर आरोप लगाया है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए विपक्ष के व्यवहार पर ही सवाल खड़े किए हैं। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और सदन में हुई तीखी बहस की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. अविश्वास प्रस्ताव: गौरव गोगोई के 3 बड़े प्रहार प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने स्पीकर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीन प्रमुख बिंदु रखे: भेदभाव का आरोप: गोगोई ने कहा, "बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को 20 बार टोका गया। जब उन्होंने एक लेख का हवाला दिया तो उन्हें रोक दिया गया, जबकि सत्तापक्ष के सांसद सदन में प्रतिबंधित किताबें दिखा रहे थे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।" माइक बंद करने की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि 9 फरवरी को शशि थरूर का माइक बंद कर दिया गया। जब माइक ही ऑफ हो, तो कोई सदस्य अपनी बात कैसे रख सकता है? यह लोकतंत्र का गला घोंटने जैसा है। महिला सांसदों का अपमान: गोगोई ने ओम बिरला के उस पुराने बयान का जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि महिला सांसदों ने पीएम की चेयर घेर ली थी और उनके साथ "कुछ भी हो सकता था।" गोगोई ने इसे बेहद शर्मनाक और महिला सांसदों की गरिमा के खिलाफ बताया। 2. किरेन रिजिजू का पलटवार: "राहुल गांधी सदन से भाग जाते हैं" संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का बचाव करते हुए विपक्ष और राहुल गांधी पर तीखे व्यक्तिगत हमले किए: उपस्थिति पर सवाल: रिजिजू ने कहा कि जब सदन का महत्वपूर्ण सत्र चल रहा होता है, तब नेता प्रतिपक्ष विदेश चले जाते हैं। वे अपनी बात कहकर सदन से भाग जाते हैं और दूसरों को नहीं सुनते। मर्यादा का उल्लंघन: उन्होंने राहुल गांधी के पुराने व्यवहार (पीएम को गले लगाना और आंख मारना) का जिक्र करते हुए कहा कि जब नेता ऐसा होगा, तो बाकी सांसदों से क्या उम्मीद की जाए? उन्होंने के.सी. वेणुगोपाल द्वारा चेयर को 'यार' कहने पर भी आपत्ति जताई। प्रियंका गांधी का जिक्र: रिजिजू ने चुटकी लेते हुए कहा कि अगर प्रियंका गांधी को नेता प्रतिपक्ष बनाया जाता, तो शायद सदन में कुछ अच्छा व्यवहार देखने को मिलता। 3. प्रियंका गांधी का तीखा जवाब: "सच्चाई पचती नहीं है" सदन में पहली बार आक्रामक अंदाज में दिख रही प्रियंका गांधी ने अपने भाई और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बचाव किया: निडर नेतृत्व: प्रियंका ने कहा, "इस देश में एक ही व्यक्ति है जो पिछले 12 सालों में इनके (बीजेपी) सामने झुका नहीं है। वह नेता प्रतिपक्ष है।" सच का सामना: उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सदन में खड़ होकर सत्तापक्ष के सामने जो सच बोलते हैं, वह इनसे पचता नहीं है, इसलिए वे उन पर निजी हमले करते हैं। 📊 सदन का समीकरण: अविश्वास प्रस्ताव मुख्य बिंदु विवरण प्रस्तावक विपक्ष (गौरव गोगोई द्वारा शुरुआत) समर्थन 50 से अधिक सांसद (अनिवार्य संख्या) मुख्य आरोप पक्षपात, माइक बंद करना, विपक्ष को बोलने न देना। चर्चा का समय 10 घंटे आवंटित सरकार का तर्क विपक्ष चर्चा से भागता है और स्पीकर का अपमान करता है। Export to Sheets 4. बहस के मुख्य मुद्दे: माइक, रूलिंग बुक और गरिमा सदन में बहस के दौरान कई ऐसे मुद्दे उठे जो पिछले कुछ समय से विवाद का केंद्र रहे हैं: माइक ऑफ विवाद: विपक्ष का दावा है कि जब भी संवेदनशील मुद्दे (जैसे अडानी या बेरोजगारी) उठाए जाते हैं, तो रणनीतिक रूप से माइक बंद कर दिया जाता है। पक्षपात: विपक्ष का कहना है कि स्पीकर सत्तापक्ष के मंत्रियों को बिना रोक-टोक बोलने देते हैं, लेकिन विपक्ष के सदस्यों को हर वाक्य पर 'रूल बुक' (नियमों की किताब) दिखाई जाती है। संसदीय भाषा: सत्तापक्ष ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद चेयर के प्रति सम्मान नहीं रखते और असंसदीय भाषा का उपयोग करते हैं।
आंध्र प्रदेश: काकीनाडा की पटाखा यूनिट में भीषण धमाका; 20 मजदूरों की मौत, धान के खेतों में बिखरे मिले शवों के चिथड़े काकीनाडा | 28 फरवरी 2026 आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शनिवार दोपहर वेटलापलेम गांव में स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई (Firecracker Unit) में जोरदार विस्फोट होने से 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी फैक्ट्री ताश के पत्तों की तरह ढह गई और वहां काम कर रहे मजदूरों के शवों के टुकड़े कई मीटर दूर खेतों में जाकर गिरे। यहाँ इस भीषण त्रासदी, राहत कार्य और सरकार की प्रतिक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. दोपहर 2 बजे का वो भयावह मंजर प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हादसा शनिवार दोपहर करीब 2:00 बजे हुआ: भीषण आवाज: धमाका इतना तेज था कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आसपास के घरों की खिड़कियां चटक गईं और लोग भूकंप की आशंका से घरों से बाहर निकल आए। मलबे का ढेर: विस्फोट के कुछ ही सेकंड के भीतर पूरी यूनिट जलकर राख हो गई। मौके पर केवल काला धुआं और मलबे का ढेर नजर आ रहा था। खेतों में बिखरी लाशें: पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ब्लास्ट के दबाव के कारण मजदूरों के शव उड़कर पास के धान के खेतों में जा गिरे। स्थानीय ग्रामीण खाद की बोरियों से बनी चादरों (बाराकालू) में क्षत-विक्षत शवों को समेटते देखे गए, जो बेहद डरावना मंजर था। 2. राहत एवं बचाव कार्य: ड्रोन से की जा रही तलाश प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है: ड्रोन का उपयोग: खेतों में फसल घनी होने के कारण शवों के हिस्सों और लापता लोगों का पता लगाने के लिए पुलिस ने ड्रोन कैमरों की मदद ली है। गंभीर रूप से झुलसे घायल: काकीनाडा गवर्नमेंट हॉस्पिटल के अधीक्षक के अनुसार, अस्पताल लाए गए 6 घायल 90% से 100% तक झुलस चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 📊 हादसे का विवरण: एक नजर में विवरण तथ्य स्थान वेटलापलेम गांव, काकीनाडा जिला (आंध्र प्रदेश) समय शनिवार दोपहर, लगभग 2:00 बजे मृतकों की संख्या 20 (पुष्टि हो चुकी है) घायलों की स्थिति 6 गंभीर (90-100% बर्न इंजरी) धमाके की तीव्रता 5 किमी के दायरे में सुनाई दी मुख्य कारण पटाखा निर्माण के दौरान बारूद में विस्फोट (जांच जारी) 3. मुख्यमंत्री और सरकार की प्रतिक्रिया हादसे की खबर मिलते ही राज्य सरकार सक्रिय हो गई है: चंद्रबाबू नायडू का शोक: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने स्थानीय मंत्रियों और जिला कलेक्टर को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करने और पीड़ितों के परिवारों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री का बयान: राज्य की गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने कहा कि प्राथमिकता घायलों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराना है। उन्होंने फैक्ट्री के लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की जांच के आदेश भी दिए हैं। 4. जांच के घेरे में सुरक्षा मानक प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, धमाके के समय यूनिट के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में की जा रही है कि: क्या फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था? क्या क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री वहां जमा की गई थी? क्या निर्माण प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था?
अमेरिकी टैरिफ डील पर 'सियासी रार': विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा; राहुल गांधी बोले- "पीएम का विश्वासघात उजागर", खड़गे ने पूछा- "सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया?" नई दिल्ली | 21 फरवरी 2026 अमेरिकी टैरिफ और भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पुराने टैरिफ को अवैध घोषित किए जाने के बाद, भारतीय विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने बिना कानूनी स्थिति स्पष्ट हुए 'जल्दबाजी' में समझौता किया, जिससे भारत के हितों को नुकसान पहुँचा है। यहाँ विपक्ष के आरोपों, अमेरिकी कोर्ट के फैसले और ट्रम्प के नए 10% ग्लोबल टैरिफ का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. विपक्ष का प्रहार: "हताशा में किया गया आत्मसमर्पण" कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मोदी सरकार की 'ट्रेड डिप्लोमेसी' पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं: राहुल गांधी: शनिवार को राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी का "विश्वासघात" अब सबके सामने है। उन्होंने दावा किया कि भारत इस व्यापार समझौते में फिर से "आत्मसमर्पण" कर देगा, जिससे देश की आर्थिक स्वायत्तता खतरे में पड़ेगी। मल्लिकार्जुन खड़गे: कांग्रेस अध्यक्ष ने इस समझौते को एक 'ट्रैप डील' (Trap Deal) करार दिया। उन्होंने पूछा कि सरकार ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया? क्या सरकार पर किसी तरह का दबाव था? जयराम रमेश: उन्होंने कहा कि यदि सरकार महज 18 दिन और रुक जाती, तो भारतीय किसानों और राष्ट्रीय हितों की बेहतर रक्षा की जा सकती थी। 2. दिग्गज नेताओं की 4 बड़ी टिप्पणियां विपक्ष के प्रमुख चेहरों ने सरकार की रणनीति को 'असंतुलित' बताया है: नेता मुख्य आरोप / टिप्पणी मल्लिकार्जुन खड़गे क्या यह 'एप्सटीन फाइल्स' का दबाव था? सरकार 140 करोड़ भारतीयों के आत्मसम्मान की रक्षा करने में विफल रही। जयराम रमेश प्रधानमंत्री की हताशा के कारण यह समझौता भारत पर थोपा जा रहा है। 18 दिन का इंतजार भारी पड़ता। मनीष तिवारी यह फैसला लोकतंत्र के लिए जरूरी है। न्यायपालिका को कार्यपालिका की 'तानाशाही' वाली ज्यादती रोकनी ही चाहिए। प्रियंका चतुर्वेदी भारतीय निर्यात पर 10% टैरिफ और अमेरिकी आयात पर लगभग जीरो; यह डील पूरी तरह असंतुलित और एकतरफा है। 3. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का 'ऐतिहासिक' फैसला शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया था। कोर्ट का तर्क: संविधान के अनुसार, टैक्स या टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) को है। राष्ट्रपति 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का बहाना बनाकर संसद की शक्तियों को नहीं छीन सकते। भारत पर असर: इस फैसले के बाद भारत पर लगा 18% रेसिप्रोकल टैरिफ कानूनी तौर पर अवैध हो गया था। विपक्ष का तर्क यही है कि यदि भारत रुकता, तो उसे कोई भी टैरिफ देने की जरूरत नहीं पड़ती। 4. ट्रम्प का जवाबी दांव: 10% नया ग्लोबल टैरिफ कोर्ट के फैसले के मात्र 3 घंटे के भीतर डोनाल्ड ट्रम्प ने नया दांव खेल दिया: नया कानून (Section-122): ट्रम्प ने 'ट्रेड एक्ट 1974' की धारा 122 का उपयोग करते हुए दुनिया भर पर 10% टैरिफ लगा दिया। लागू होने की तारीख: यह नया टैरिफ 24 फरवरी 2026 की आधी रात से लागू होगा। भारत की स्थिति: बीबीसी के अनुसार, अब भारत पर टैरिफ 18% से घटकर 10% रह जाएगा। ट्रम्प ने पीएम मोदी को अपना "अच्छा दोस्त" बताते हुए कहा कि ट्रेड डील जारी रहेगी। 5. व्यापार समझौते का वर्तमान स्टेटस वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, विवादों के बावजूद प्रक्रिया जारी है: फरवरी अंत: अंतरिम व्यापार समझौता फाइनल हो जाएगा। मार्च: समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे। अप्रैल: डील पूरी तरह लागू हो जाएगी। भारत की रियायत: भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने पर सहमति जताई है।