अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई के बाद पत्रकारों से बात करते हुए एक चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह अगले 20 दिनों में ग्रीनलैंड को लेकर अपनी योजना स्पष्ट करेंगे।
सैन्य कार्रवाई के संकेत: ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने के लिए बल प्रयोग की संभावना से इनकार नहीं किया है।
उत्तेजक सोशल मीडिया पोस्ट: विवाद तब और भड़क गया जब व्हाइट हाउस अधिकारी स्टीफन मिलर की पत्नी कैटी मिलर ने ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे के रंगों में रंगा हुआ पोस्ट किया और कैप्शन लिखा— "जल्द ही" (Soon)।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने टीवी इंटरव्यू में स्पष्ट शब्दों में अमेरिका को आईना दिखाया है।
संप्रभुता का सम्मान: उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और यह डेनमार्क साम्राज्य का एक स्वायत्त हिस्सा है।
नाटो आर्टिकल 5 का उल्लंघन: नाटो के नियमों के अनुसार, किसी सदस्य देश पर हमला पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है। फ्रेडरिकसन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका अपने ही सहयोगी (डेनमार्क/ग्रीनलैंड) पर हमला करता है, तो नाटो की पूरी साख और व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी।
अमेरिका आखिर ग्रीनलैंड को हर हाल में क्यों पाना चाहता है? इसके पीछे चार मुख्य कारण हैं:
| क्षेत्र | महत्व का कारण |
| सैन्य रणनीति | आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की मिसाइलों पर नजर रखने के लिए सर्वोत्तम स्थान। |
| खनिज संसाधन | रेयर अर्थ एलिमेंट्स, तेल और गैस के विशाल भंडार, जो चीन पर निर्भरता कम कर सकते हैं। |
| शिपिंग रूट्स | बर्फ पिघलने के कारण नए समुद्री व्यापारिक रास्तों पर नियंत्रण की संभावना। |
| थुले एयर बेस | अमेरिका का सबसे उत्तरी बेस, जो मिसाइल चेतावनी प्रणाली के लिए "फ्रंट लाइन" है। |
फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और ब्रिटेन जैसे बड़े देशों के नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर डेनमार्क का समर्थन किया है।
आर्कटिक की सुरक्षा: यूरोपीय नेताओं के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा यूरोप की स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
रूस-चीन का फैक्टर: रूस और चीन आर्कटिक में अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। यूरोप चाहता है कि अमेरिका वहां एक 'साझेदार' (Partner) की तरह रहे, न कि 'कब्जा करने वाली ताकत' (Occupier) की तरह।
ट्रम्प ने वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए 1823 की 'मोनरो डॉक्ट्रिन' का हवाला दिया।
क्या है यह नीति: इसके तहत अमेरिका ने 200 साल पहले घोषणा की थी कि पश्चिमी गोलार्ध (उत्तर और दक्षिण अमेरिका) में किसी भी यूरोपीय दखल को अमेरिका के खिलाफ हमला माना जाएगा।
ट्रम्प का विस्तार: ट्रम्प अब इस नीति को आधुनिक संदर्भ में 'अपडेट' कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि अमेरिका अपने पड़ोस और रणनीतिक क्षेत्रों (जैसे ग्रीनलैंड) में किसी भी बाहरी या आंतरिक विरोध को सैन्य बल से दबाने का अधिकार रखता है।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने ट्रम्प के बयानों को 'अनादर' करार दिया है। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को वेनेजुएला के साथ जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करना पूरी तरह गलत है। ग्रीनलैंड एक स्वायत्त लोकतांत्रिक देश है और इसकी जनता अपनी किस्मत का फैसला खुद करेगी।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
खामेनेई का 'खूनी प्लान': ईरान में नरसंहार के लिए बुलाए 5,000 इराकी लड़ाके; जब सेना ने अपनों पर गोली चलाने से किया इनकार, तब विदेशी मिलिशिया ने मचाई तबाही तेहरान/न्यूयॉर्क | 17 जनवरी 2026 ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जारी ऐतिहासिक विद्रोह को कुचलने के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। CNN और न्यूयॉर्क पोस्ट की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए इराक से 5,000 से अधिक कट्टरपंथी शिया लड़ाकों को तैनात किया है। यह खुलासा तब हुआ है जब ईरान की अपनी सेना और सुरक्षा बलों ने अपने ही नागरिकों पर सीधी गोलीबारी करने से मना कर दिया था। विदेशी लड़ाकों के इस 'नरसंहार' के बाद ईरान की सड़कों पर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। 1. खामेनेई की रणनीति: सेना के इनकार के बाद विदेशी 'भाड़े के सैनिक' रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनों के दूसरे हफ्ते में ईरानी सेना के भीतर असंतोष फैलने लगा था। कई सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। सहानुभूति का डर: खामेनेई को डर था कि स्थानीय पुलिस और सेना के जवान अपने ही भाई-बहनों और रिश्तेदारों के प्रति नरम पड़ सकते हैं। विदेशी लड़ाकों का चुनाव: इसीलिए जान-बूझकर ऐसे लड़ाकों को बुलाया गया जिनकी ईरान के लोगों के साथ कोई भाषाई या भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। ये लड़ाके अरबी भाषी हैं, जबकि ईरान की मुख्य भाषा फारसी है। इससे प्रदर्शनकारियों और लड़ाकों के बीच सहानुभूति पनपने की कोई गुंजाइश नहीं रही। 2. 'तीर्थयात्री' बनकर आईं मौत की बसें इन लड़ाकों को ईरान लाने के लिए एक बेहद गुप्त और शातिर तरीका अपनाया गया। धार्मिक कवर: 11 जनवरी को इराक-ईरान बॉर्डर पर 60 से ज्यादा बसों का काफिला देखा गया। इराकी गृह मंत्रालय के अधिकारी अली डी. के अनुसार, इन्हें 'तीर्थयात्री' बताया गया। पहचान: इन बसों में न तो महिलाएं थीं, न बच्चे और न ही बुजुर्ग। सभी लड़ाके जवान थे और उन्होंने एक जैसी काली टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्हें इराक के मायसान, वासित और दियाला प्रांतों के रास्ते ईरान में दाखिल कराया गया। संगठन: ये लड़ाके पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के तहत आने वाले कताइब हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा और बद्र संगठन जैसे कट्टरपंथी समूहों से जुड़े हैं, जिन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ही पैसा और हथियार देती है। 📊 ईरान नरसंहार: डेटा और जमीनी हकीकत श्रेणी विवरण और साक्ष्य कुल विदेशी लड़ाके 5,000+ (शुरुआती अनुमान 800 था)। मौतों का आंकड़ा अब तक लगभग 3,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। प्रमुख हथियार सड़कों पर तैनात लड़ाकों के पास भारी मशीनगन और ड्रोन हैं। वर्तमान स्थिति तेहरान और प्रमुख शहरों में 'कब्रिस्तान जैसी शांति'। सेंसरशिप 180 घंटे से अधिक का इंटरनेट ब्लैकआउट जारी। 3. सड़कों पर मशीनगन और ड्रोन का पहरा तेहरान के निवासियों ने जो दास्तां सुनाई है, वह किसी डरावनी फिल्म जैसी है। मशीनगन का खौफ: एक प्रत्यक्षदर्शी ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, "विदेशी लड़ाके अरबी में चिल्ला रहे थे और जो भी घर से बाहर दिख रहा था, उस पर सीधे फायर कर रहे थे। उन्होंने सरकारी इमारतों और चौराहों पर कब्जा कर लिया है।" ड्रोन निगरानी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 और 17 जनवरी को तेहरान के आसमान में लगातार निगरानी ड्रोन उड़ते देखे गए। इसी डर के कारण फिलहाल सड़कों पर प्रदर्शनकारी नजर नहीं आ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की चिंता: ओस्लो स्थित 'ईरान मानवाधिकार' (IHR) के महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने चेतावनी दी है कि यह 'शांति' केवल डर के कारण है, और विदेशी लड़ाकों की तैनाती अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। 4. इराक के ये लड़ाके ईरान के प्रति वफादार क्यों? ये मिलिशिया ग्रुप भले ही इराक के हैं, लेकिन इनका 'रिमोट कंट्रोल' तेहरान में है। ट्रेनिंग और फंडिंग: IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) इन समूहों को सालाना करोड़ों डॉलर की मदद और हथियारों की सप्लाई करती है। वफादारी: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन लड़ाकों की पहली निष्ठा इराक की सरकार के प्रति नहीं, बल्कि अयातुल्ला खामेनेई के प्रति है। यही कारण है कि वे खामेनेई की सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।
ईरान की घेराबंदी: दक्षिण चीन सागर से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हुआ अमेरिकी 'सुपरकैरियर' USS अब्राहम लिंकन; क्या वेनेजुएला की तर्ज पर होगा हमला? ईरान में 19 दिनों से जारी ऐतिहासिक जन-विद्रोह के बीच अमेरिका ने तेहरान के खिलाफ अपनी अब तक की सबसे बड़ी सैन्य चाल चल दी है। अमेरिकी नौसेना का घातक परमाणु-शक्ति संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अपने पूरे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' के साथ दक्षिण चीन सागर को छोड़कर मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो चुका है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र (Airspace) बंद कर दिया था और क्षेत्र में तनाव चरम पर है। 1. USS अब्राहम लिंकन: समुद्र पर तैरता एक अभेद्य किला USS अब्राहम लिंकन केवल एक जहाज नहीं, बल्कि एक पूरी सैन्य शक्ति है। इसके मिडिल ईस्ट पहुँचने का मतलब है कि अमेरिका किसी भी समय बड़े स्तर पर 'ऑपरेशन' शुरू कर सकता है। न्यूक्लियर पावर: यह जहाज परमाणु ऊर्जा से चलता है, जिसका मतलब है कि इसे ईंधन के लिए बार-बार रुकने की जरूरत नहीं है। कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 (CSG-3): लिंकन अकेला नहीं आ रहा है। इसके साथ 3-6 गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स (जो मिसाइल डिफेंस में माहिर हैं), 1-2 न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बियां (जो टॉमहॉक मिसाइलों से लैस हैं) और लॉजिस्टिक सपोर्ट जहाज भी शामिल हैं। हवाई ताकत: इस पर 65 से 70 घातक विमान तैनात हैं, जिनमें F-35C लाइटनिंग II और F/A-18 सुपर हॉर्नेट शामिल हैं। 2. वेनेजुएला मॉडल: क्या इतिहास खुद को दोहराएगा? विशेषज्ञ इस तैनाती की तुलना हाल ही में हुए 'ऑपरेशन साउदर्न स्पीयर' (वेनेजुएला) से कर रहे हैं। पैटर्न: अगस्त 2025 में भी ट्रम्प ने इसी तरह USS गेराल्ड आर. फोर्ड को वेनेजुएला के तट पर तैनात किया था। परिणाम: जनवरी 2026 में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने अचानक छापेमारी कर राष्ट्रपति मादुरो को पकड़ लिया और सत्ता पलट दी। ईरान का डर: जिस तरह वेनेजुएला में 'घेराबंदी' के बाद सर्जिकल स्ट्राइक हुई, ईरान को डर है कि लिंकन की मौजूदगी तेहरान के लिए अंत की शुरुआत हो सकती है। 📊 सैन्य तुलना: अमेरिका बनाम ईरान शक्ति का पैमाना संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ईरान (Islamic Republic) सैन्य बजट/रैंक दुनिया में नंबर 1 दुनिया में 16वां विमान (Airpower) 13,000+ (F-35, B-2 शामिल) ~500 (ज्यादातर पुराने रूसी/चीनी) नौसैनिक बेड़ा 11 सुपरकैरियर, 60+ पनडुब्बियां छोटी पनडुब्बियां, गश्ती नावें मुख्य ताकत ग्लोबल स्ट्राइक, सैटेलाइट इंटेलिजेंस मिसाइल आर्सेनल (2000 किमी रेंज), ड्रोन रणनीतिक हथियार टॉमहॉक, न्यूक्लियर सबमरीन हॉर्मुज स्ट्रेट ब्लॉक करने की क्षमता 3. 'पोश्चर चेंज': कतर बेस से कर्मचारियों की निकासी अमेरिकी अधिकारियों ने कतर के अल उदैद एयर बेस (मिडिल ईस्ट का सबसे बड़ा बेस) से कुछ गैर-जरूरी कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया है। उद्देश्य: इसे आधिकारिक तौर पर 'पोश्चर चेंज' कहा जा रहा है, लेकिन इसका असली मकसद संभावित ईरानी मिसाइल हमले की स्थिति में अमेरिकी हताहतों की संख्या को कम करना है। विशेषज्ञों की राय: B-2 बॉम्बर या लंबी दूरी की मिसाइलों के बजाय पूरे 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' को बुलाने का मतलब है कि अमेरिका केवल एक "हिट एंड रन" हमला नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध की तैयारी कर रहा है। 4. ईरान में गृहयुद्ध और 'नो फ्लाई जोन' ईरान के भीतर 28 दिसंबर से जारी प्रदर्शन अब अयातुल्ला खामेनेई की सत्ता को हिला रहे हैं। आर्थिक पतन: रियाल की कीमत शून्य के बराबर पहुँच चुकी है ($1 = 14.5 लाख रियाल)। हवाई क्षेत्र पर पाबंदी: ईरान ने कुछ घंटों के लिए अपना एयरस्पेस बंद किया, जिससे एयर इंडिया और इंडिगो जैसी भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। अब भारतीय विमान ईरान को छोड़कर दूसरे रास्तों से जा रहे हैं। दमन: सुरक्षा बलों की गोलीबारी में अब तक 2,000 से 12,000 मौतों का दावा किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप का दबाव बढ़ गया है।
ट्रम्प का 'ग्रीनलैंड मिशन': 51वें राज्य की तैयारी और NATO टूटने की चेतावनी; जानें क्यों इस बर्फीले द्वीप पर छिड़ा है 'वर्ल्ड वॉर' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाते हुए ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की अपनी जिद दोहराई है। ट्रम्प ने इसे 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का मुद्दा बताते हुए साफ कर दिया है कि उन्हें "कब्जे से कम कुछ भी मंजूर नहीं" है। इस बयान ने न केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को नाराज कर दिया है, बल्कि NATO (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के भविष्य पर भी संकट के बादल मंडरा दिए हैं। 1. ट्रम्प की 'ट्रुथ सोशल' पोस्ट: "NATO को साथ देना होगा" बुधवार (14 जनवरी 2026) को ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा और 'गोल्डन डोम' (नया मिसाइल डिफेंस सिस्टम) के लिए ग्रीनलैंड की सख्त जरूरत है। रूस-चीन का डर: ट्रम्प का दावा है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन वहां कब्जा कर लेंगे। NATO को चेतावनी: ट्रम्प ने कहा कि NATO को इस मिशन में अमेरिका का साथ देना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की सैन्य ताकत के बिना NATO का कोई अस्तित्व नहीं है। 2. 'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट' (2026) 12 जनवरी 2026 को अमेरिकी सांसद रैंडी फाइन ने संसद में एक ऐतिहासिक बिल पेश किया, जिसका नाम है—'ग्रीनलैंड एनेक्सेशन एंड स्टेटहुड एक्ट'। लक्ष्य: ग्रीनलैंड को डेनमार्क से अलग कर अमेरिका का 51वां राज्य बनाना। शक्ति: यह बिल राष्ट्रपति को ग्रीनलैंड को अपने कब्जे में लेने के लिए "जरूरी कदम" उठाने का कानूनी अधिकार देता है। प्रस्ताव: रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प प्रशासन ग्रीनलैंड के नागरिकों को अमेरिका में शामिल होने के बदले $10,000 से $100,000 (करीब 84 लाख रुपये) तक देने की योजना पर विचार कर रहा है। 3. ग्रीनलैंड और डेनमार्क का पलटवार: "हम बिकाऊ नहीं हैं" ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन (34) ने ट्रम्प के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। नीलसन का बयान: "अगर हमें डेनमार्क और अमेरिका में से किसी एक को चुनना पड़ा, तो हम डेनमार्क को चुनेंगे। हम कोई सामान नहीं हैं जिसे खरीदा जा सके।" डेनमार्क की चेतावनी: पीएम मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कोई भी जबरदस्ती की कार्रवाई NATO के अंत की शुरुआत होगी। डेनमार्क ने अपनी सेना को 'शूट फर्स्ट' (पहले गोली चलाओ) के आदेश दिए हैं। 📊 ग्रीनलैंड का गणित: क्यों है यह इतना खास? विशेषता विवरण क्षेत्रफल 21.6 लाख वर्ग किमी (दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप) आबादी मात्र 57,000 लोग खनिज भंडार दुर्लभ पृथ्वी धातु (Rare Earth Elements), यूरेनियम, तांबा और तेल (लगभग 28 अरब बैरल)। रणनीतिक स्थान उत्तरी ध्रुव (Arctic) के पास, जहाँ से रूस और यूरोप पर नजर रखी जा सकती है। अमेरिकी बेस पिटुफिक स्पेस बेस (Thule): यहाँ अमेरिका का अर्ली वॉर्निंग रडार सिस्टम लगा है। 4. सैन्य कार्रवाई का 'प्लान' और आंतरिक विरोध मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे डेली मेल) के अनुसार, ट्रम्प ने JSOC (जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड) को ग्रीनलैंड पर कब्जे का प्लान बनाने को कहा है। सेना का रुख: अमेरिकी सैन्य अधिकारी इस विचार का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक मित्र देश (डेनमार्क) पर हमला करना अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। मिड-टर्म इलेक्शन: विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प इस मुद्दे का इस्तेमाल घरेलू राजनीति में ध्यान भटकाने के लिए कर रहे हैं ताकि आगामी चुनावों में वोट हासिल किए जा सकें। 5. क्या NATO टूट जाएगा? डेनमार्क 1949 से NATO का सदस्य है। NATO की धारा 5 के अनुसार, किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो तकनीकी रूप से अमेरिका एक NATO सहयोगी पर हमला करेगा। इससे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देश अमेरिका के खिलाफ खड़े हो सकते हैं, जिससे 76 साल पुराना यह रक्षा संगठन बिखर सकता है।