मेरठ | 11 फरवरी 2026
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रक्षापुरम इलाके में बुधवार सुबह एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई। एक रिटायर्ड दरोगा और उनकी पत्नी के शव उनके घर के अंदर एक ही पंखे से लटके हुए मिले। पुलिस और फॉरेंसिक विभाग इस मामले की जांच में जुटे हैं, लेकिन घर के हालात और परिजनों के बयान इस घटना को और भी रहस्यमयी बना रहे हैं।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और अब तक हुई जांच का विस्तृत विवरण दिया गया है:
गंगानगर थाना क्षेत्र से सटे रक्षापुरम सेक्टर-4 में यह दर्दनाक हादसा हुआ।
समय: बुधवार सुबह करीब 9:30 बजे।
पहचान: रिटायर्ड दरोगा लल्लू सिंह (68 वर्ष) और उनकी पत्नी संतोष।
कैसे पता चला: जब घर पर रोज की तरह काम करने वाली मेड पहुंची, तो उसने दरवाजा खुला देखा। अंदर जाने पर कमरे का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। दोनों के शव एक ही पंखे पर अलग-अलग फंदे से लटके हुए थे।
लल्लू सिंह का जीवन और उनका परिवार मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से गहराई से जुड़ा था:
नौकरी और रिटायरमेंट: लल्लू सिंह मूल रूप से हापुड़ के ग्राम ददारा श्यामपुर के निवासी थे। वह उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा थे और उनकी आखिरी पोस्टिंग मुजफ्फरनगर में थी, जहाँ से वे 2020 में रिटायर हुए थे।
मकान: रक्षापुरम का यह घर उन्होंने करीब 20 साल पहले अपनी सर्विस के दौरान ही बना लिया था, ताकि रिटायरमेंट के बाद सुकून से रह सकें।
बेटा: उनका एक बेटा संदीप है, जो पहले एयरपोर्ट पर कार्यरत था और 2022 में रिटायर होकर वापस आ गया। फिलहाल संदीप बैंकिंग की तैयारी कर रहा है और अपने परिवार के साथ मेरठ की ही गंगा धाम कॉलोनी में रहता है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में 'अकेलापन' मौत की एक संभावित वजह माना जा रहा है, लेकिन कई ऐसे तथ्य हैं जो सुसाइड पर सवाल खड़े कर रहे हैं:
अखबार का खुला मिलना: पुलिस को कमरे में मेज पर अखबार खुला हुआ मिला। ऐसा लग रहा था मानो कोई उसे अभी-अभी पढ़ रहा था। सामान्यतः सुसाइड करने वाला व्यक्ति मानसिक तनाव में होता है और ऐसी दिनचर्या (अखबार पढ़ना) संदिग्ध लगती है।
शवों की स्थिति: डॉक्टरों और फॉरेंसिक टीम के अनुसार, शव पूरी तरह अकड़ चुके थे, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत घटना की जानकारी मिलने से 7-8 घंटे पहले (यानी मंगलवार रात) हो चुकी थी।
व्यवहार: पड़ोसियों का कहना है कि लल्लू सिंह और संतोष बहुत अनुशासित थे। लल्लू सिंह सुबह 5 बजे उठकर पौधों में पानी देते थे और सफाई करते थे, जबकि संतोष दूध और घर का अन्य सामान लाने बाहर जाया करती थीं। मंगलवार शाम भी उन्हें दूध लाते देखा गया था।
| विवरण | जानकारी |
| मृतक | लल्लू सिंह (68) और संतोष |
| स्थान | सेक्टर-4, रक्षापुरम, मेरठ |
| रिटायरमेंट | 2020 (मुजफ्फरनगर से) |
| मौत का समय | मंगलवार रात (संभावित) |
| जांच अधिकारी | एसपी देहात अभिजीत कुमार, IPS बजरंग प्रसाद |
| सुसाइड नोट | बरामद नहीं हुआ |
लल्लू सिंह के भांजे सत्येंद्र चौधरी और अन्य रिश्तेदारों का मानना है कि यह आत्महत्या नहीं हो सकती:
खुशमिजाज स्वभाव: रिश्तेदारों के अनुसार, दोनों बहुत खुशमिजाज थे और एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे।
भविष्य की योजनाएं: हाल ही में उन्होंने अपने गांव हापुड़ में दो बीघा जमीन खरीदी थी और वहां खेती कर रहे थे। मंगलवार को ही वे गांव होकर लौटे थे। जो व्यक्ति भविष्य के लिए संपत्ति खरीद रहा हो और गांव में सक्रिय हो, वह अचानक सुसाइड क्यों करेगा?
सूचना मिलते ही एसपी देहात अभिजीत कुमार और IPS (अंडर ट्रेनी) बजरंग प्रसाद मौके पर पहुंचे।
निरीक्षण: अधिकारियों ने उस कमरे का बारीकी से निरीक्षण किया जहां पंखे से शव लटके मिले थे।
पूछताछ: बेटे संदीप और पड़ोसियों से पूछताछ की गई है।
पोस्टमार्टम: शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह (दम घुटने से मौत या कुछ और) साफ हो पाएगी।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
शंकराचार्य बनाम रामभद्राचार्य शिष्य: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बच्चों के यौन शोषण का आरोप; पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर, 20 फरवरी को अगली सुनवाई प्रयागराज | 11 फरवरी 2026 धर्मनगरी प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ विवाद अब अदालती दहलीज तक पहुंच गया है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। आशुतोष ब्रह्मचारी ने अविमुक्तेश्वरानंद के गुरुकुल में बच्चों के यौन शोषण (Child Sexual Abuse) का दावा करते हुए प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो (POCSO) कोर्ट में याचिका दायर की है। यह मामला केवल धार्मिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें अब गंभीर आपराधिक आरोप और आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग भी जुड़ गई है। 1. पॉक्सो कोर्ट में याचिका: क्या हैं गंभीर आरोप? आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज, जो श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले के मुख्य पक्षकार भी हैं, ने 8 फरवरी को कोर्ट में याचिका दायर की। उनके आरोपों का सारांश नीचे दिया गया है: यौन शोषण का दावा: आशुतोष महाराज ने दो नाबालिग बच्चों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुकुल की आड़ में बच्चों का मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किया जा रहा है। गुरु-सेवा के नाम पर कुकर्म: याचिका में आरोप है कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी बच्चों को यह कहकर डराते थे कि यह 'गुरु-सेवा' है और इससे आशीर्वाद मिलेगा। बच्चों ने दावा किया कि उन्हें अविमुक्तेश्वरानंद के साथ सोने के लिए मजबूर किया जाता था। समय और स्थान: आरोप है कि यह शोषण पिछले एक साल से चल रहा है। महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान भी मेला क्षेत्र में बच्चों के साथ कुकर्म किया गया। अवैध गतिविधियां: याचिका में यह भी कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद के पास आय से अधिक संपत्ति है और उनके शिविर में अवैध हथियार होने की भी आशंका है। 2. विवाद की पृष्ठभूमि: मौनी अमावस्या और पालकी विवाद इस कानूनी लड़ाई की जड़ें 18 जनवरी 2026 को हुए माघ मेले के विवाद में छिपी हैं: पालकी रोकी गई: मौनी अमावस्या के दिन प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोक दी थी। पुलिस ने उन्हें पैदल संगम जाने को कहा, जिसे शंकराचार्य के शिष्यों ने अपमान माना। धक्का-मुक्की और हिरासत: पुलिस और शिष्यों के बीच हुई झड़प में पालकी का क्षत्रप टूट गया और कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। इससे नाराज होकर शंकराचार्य बिना स्नान किए ही लौट गए। विवाद के बाद शिकायत: इस घटना के ठीक 6 दिन बाद, 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से पहली शिकायत की। 3. दो धाराओं में शिकायत: फर्जी लेटरपैड का मामला आशुतोष महाराज ने केवल शोषण ही नहीं, बल्कि धोखाधड़ी के आरोप भी लगाए हैं: शंकराचार्य पद पर सवाल: शिकायत में कहा गया है कि अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बताकर फर्जी लेटरपैड का इस्तेमाल कर रहे हैं। भ्रामक दस्तावेज: आरोप है कि प्रशासन को गुमराह करने के लिए "ज्योतिष्पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर" के नाम से फर्जी पत्र जारी किए जा रहे हैं, जिनकी कोई कानूनी वैधता नहीं है। 4. रामभद्राचार्य और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच जुबानी जंग इस विवाद ने संतों के दो बड़े गुटों को आमने-सामने ला खड़ा किया है: रामभद्राचार्य का पक्ष: उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि संगम तक पालकी ले जाने का कोई नियम नहीं है। अविमुक्तेश्वरानंद को सही नोटिस दिया गया था। अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: उन्होंने रामभद्राचार्य पर कटाक्ष करते हुए कहा, "उन्हें लोग गंभीरता से नहीं लेते। वे हमारे कुल के नहीं हैं, वरना हमारा दर्द समझते।" 📊 अदालती कार्यवाही और घटनाक्रम तिथि घटनाक्रम 18 जनवरी मौनी अमावस्या पर पालकी विवाद हुआ। 24-27 जनवरी पुलिस कमिश्नर और माघ मेला एसपी को ईमेल/डाक से शिकायत भेजी गई। 8 फरवरी आशुतोष ब्रह्मचारी ने स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर की। 10 फरवरी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील ने कोर्ट में जवाब दाखिल किया और आरोपों को नकारा। 20 फरवरी दोनों पक्षों के वकीलों के बीच कोर्ट में अगली बहस और सुनवाई होगी। 5. अविमुक्तेश्वरानंद पक्ष की प्रतिक्रिया जब इन आरोपों पर अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर से संपर्क किया गया, तो उनके शिष्य मुकुलानंद ने बताया कि महाराज जी शाम को संगत में बैठेंगे, तब वे इन प्रश्नों का उत्तर देंगे। फिलहाल उनके वकीलों ने इन सभी आरोपों को निराधार और षड्यंत्र का हिस्सा बताया है।
प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य की पदवी पर आर-पार; प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'क्या अब प्रशासन तय करेगा कि मैं शंकराचार्य हूं या नहीं?' प्रयागराज | 20 जनवरी 2026 संगम नगरी प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद ने अब बेहद उग्र रूप ले लिया है। मेला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शंकराचार्य के शिविर पर नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर यह साबित करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिख रहे हैं। वहीं, सड़क पर धरना दे रहे अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और संतों का अपमान करार दिया है। 1. रात 12 बजे नोटिस और सुबह की गहमागहमी प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब कानूनी नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मिडनाइट ड्रामा: सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। हालांकि, शिष्यों ने यह कहकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। नोटिस चस्पा: मंगलवार सुबह प्रशासन ने दोबारा शिविर का रुख किया और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। मुख्य आधार: नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के पद पर अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने पर रोक लगाई गई थी। 2. अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: 'प्रशासन की बंदूक, सुप्रीम कोर्ट का कंधा' नोटिस के जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सरकार के विरोधाभास: उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान खुद सरकार ने एक आधिकारिक पत्रिका छापी थी, जिसमें उन्हें 'शंकराचार्य' के रूप में संबोधित किया गया था। अब प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। पद की गरिमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई जिलाधिकारी या देश का राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही करेंगे। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं, अब प्रशासन को और क्या प्रमाण चाहिए?" 📊 विवाद के मुख्य बिंदु: पद, परंपरा और कानून श्रेणी प्रशासन का तर्क (नोटिस) शंकराचार्य का तर्क (जवाब) कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केस लंबित रहने तक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। कोर्ट ने पद पर बैठने से रोका है, लेकिन मान्यता संतों से मिलती है। शिविर का बोर्ड बोर्ड पर "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" लिखना कोर्ट की अवहेलना है। सरकार ने खुद अपनी पत्रिका में मुझे शंकराचार्य छापा है। मान्यता पदवी विवादित है (अविमुक्तेश्वरानंद बनाम वासुदेवानंद)। अन्य पीठों के शंकराचार्य मुझे स्वीकार करते हैं, यही सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्तमान स्थिति 24 घंटे में प्रमाण देने का अल्टीमेटम। जब तक माफी नहीं, तब तक आश्रम में प्रवेश नहीं; फुटपाथ पर रहेंगे। 3. मौनी अमावस्या का वो विवाद जिसने आग सुलगाई इस पूरे विवाद की जड़ 18 फरवरी (मौनी अमावस्या) को हुई घटना है। पालकी रोकने पर बवाल: शंकराचार्य पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। झड़प और हिरासत: शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पालकी को खींचकर संगम से 1 किमी दूर कर दिया था। प्रायश्चित धरना: इसी अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने शिविर त्याग दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर मेले में आएंगे, लेकिन प्रशासन के व्यवहार के विरोध में फुटपाथ पर ही रहेंगे। 4. ज्योतिषपीठ का पुराना विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है। प्रशासन इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक पदवी को चुनौती दे रहा है, जबकि शंकराचार्य इसे अपनी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।
मेरठ का 'ज्वालागढ़ कांड': रोनू कश्यप की 'क्रूर' हत्या पर गरमाई यूपी की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा; 18 को महापंचायत मेरठ का सरधना क्षेत्र इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उससे सटे ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक रोनू उर्फ सोनू कश्यप (28) की वीभत्स हत्या ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ पुलिस इसे आपसी विवाद और नाबालिग का कृत्य बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ज़िंदा जलाने' की अमानवीय घटना करार देकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहा है। 1. क्या है ज्वालागढ़ कांड? (क्राइम फाइल) 5 जनवरी 2026 (सोमवार) को मेरठ के सरधना में अक्खेपुर-रार्धना रोड पर एक अधजली लाश मिली। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के रोनू कश्यप के रूप में हुई। पुलिस की थ्योरी: पुलिस के अनुसार, रोनू और एक 16 वर्षीय टेंपो चालक के बीच टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पहले रोनू को शराब पिलाई, फिर ईंट से सिर वार कर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घसीटकर पत्तों और मोबिल ऑयल से जला दिया। परिजनों का आरोप: परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि रोनू को ज़िंदा जलाया गया है और इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई लोग शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि रोनू से 80,000 रुपये भी लूटे गए थे। 📊 पीड़ित परिवार की मार्मिक स्थिति सदस्य स्थिति रोनू कश्यप (मृतक) परिवार का इकलौता सहारा, मुंबई में हलवाई का काम करता था। बुजुर्ग माँ गंभीर रूप से बीमार, बेटे की शादी के सपने देख रही थीं। बड़ा भाई टीबी (TB) का मरीज, लंबे समय से इलाज चल रहा है। बड़ी बहन अविवाहित, दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। मकसद रोनू अपनी शादी के लिए लड़की देखने मुजफ्फरनगर से गांव आया था। 2. सियासी 'ज्वाला': अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर के कड़े तेवर इस घटना ने ठाकुर बनाम कश्यप (पिछड़ा वर्ग) का रंग ले लिया है, जिससे विपक्ष को 'PDA' और 'दलित-पिछड़ा' राजनीति को धार देने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव (सपा): उन्होंने इसे 'दबंगों का कुकृत्य' बताते हुए ट्वीट किया— "हम पूरे PDA समाज की तरफ से आवाज़ उठाते हैं। न्याय हो!" मायावती (BSP): बसपा सुप्रीमो ने इसे अति क्रूर और शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने शासन-प्रशासन से अपराधियों के मन में 'कानून का डर' पैदा करने की मांग की। चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नगीना सांसद ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी व मुआवजा मिले। चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया है। नरेंद्र कश्यप (राज्यमंत्री): सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के लिए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप 14 जनवरी को मेरठ पहुँच रहे हैं। 3. स्थानीय विरोध और 18 जनवरी की महापंचायत अतुल प्रधान की सक्रियता: सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलकर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया है। कश्यप समाज का आक्रोश: 12 जनवरी को मुजफ्फरनगर डीएम कार्यालय पर भारी प्रदर्शन हुआ। अब कश्यप समाज ने 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दौराला में एक विशाल 'शोक सभा' और पंचायत बुलाई है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। 4. पुलिस की जांच और 'नाबालिग' का पेंच मेरठ पुलिस के लिए यह केस सिरदर्द बन गया है। साक्ष्य: पुलिस ने शराब के पाउच के बारकोड और ठेके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से आरोपी को ट्रैक किया। विवाद: पुलिस ने 24 घंटे में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए केवल एक नाबालिग पर ठीकरा फोड़ रही है।