मेरठ का सुनीता हत्याकांड: जेल में पारस सोम ने कबूली 3 साल की 'अधूरी लवस्टोरी'; बोला- 'रूबी ने भागने की जिद की, उसने मुझे अपने जूते तक दे दिए' मेरठ | 17 जनवरी 2026 मेरठ के चर्चित सुनीता हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। हत्या के मुख्य आरोपी पारस सोम से उसके वकील बलराम सोम ने मेरठ जिला जेल के मुलाकाती कमरे में करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस दौरान पारस ने अपनी और रूबी की 3 साल पुरानी प्रेम कहानी का खुलासा किया। पारस का दावा है कि वह निर्दोष है और पूरी साजिश रूबी के परिवार की ओर से उसकी शादी कहीं और तय करने के बाद शुरू हुई थी। 1. 9वीं का छात्र और 12वीं की छात्रा: स्कूल से शुरू हुआ सफर पारस ने बताया कि उनके प्यार की शुरुआत गांव के जनता इंटर कॉलेज से हुई थी। पहली मुलाकात: पारस तब 9वीं में था और रूबी 12वीं की छात्रा थी। उम्र में रूबी उससे बड़ी थी। स्कूल में पानी पीने के दौरान हुई एक मुस्कुराहट दोस्ती में बदल गई। शादी में इकरार: स्कूल छूटने के बाद करीब 3 साल पहले गांव की एक शादी में दोनों दोबारा मिले। वहीं से उनकी दोस्ती ने प्यार का रूप लिया। पारस ने बताया कि वे घंटों फोन पर बात करते थे और रूबी उसे 'लव लेटर' भी भेजती थी। 2. जब परिवार को पता चला 'अफेयर' का सच साल 2024 में दोनों के रिश्ते की खबर पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद स्थितियां बिगड़ गईं: पंचायती समझौता: दोनों परिवारों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पारस से उसका मोबाइल छीन लिया गया। छिपकर बातचीत: मोबाइल न होने पर पारस अपनी मां के फोन से या दोस्तों के फोन से रूबी से बात करता था। रूबी भी उसे कॉल करती थी। पारस का दावा है कि उसके पास आज भी वे चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स सुरक्षित हैं। 3. भागने की प्लानिंग: "जबरन शादी नहीं करूंगी" पारस के अनुसार, रूबी के घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर चुके थे। रूबी का अल्टीमेटम: रूबी ने अपने माता-पिता से साफ कह दिया था कि वह पारस के अलावा किसी से शादी नहीं करेगी। भागने की जिद: पारस ने वकील को बताया कि भागने की पूरी योजना रूबी की थी। उसने फोन पर रोते हुए कहा था, "हमें घर से भागना ही होगा, वरना ये लोग मेरी शादी जबरन करा देंगे।" 📊 केस फाइल: पारस और रूबी की फरारी का सच घटनाक्रम विवरण हत्या का दिन पारस का दावा है कि उसने सुनीता (रूबी की मां) को नहीं मारा, वह निर्दोष है। नंगे पांव फरारी कपसाड़ से भागते समय पारस का जूता नहर में बह गया। तब रूबी ने अपने जूते उतारकर पारस को दिए। सफर ट्रक से लिफ्ट लेकर सहारनपुर पहुंचे। पकड़े जाने के समय भी पारस ने रूबी के ही जूते पहने थे। पारस की मांग "मैं आज भी रूबी से शादी करना चाहता हूं, वह दबाव में झूठ बोल रही है।" 4. रूबी के यू-टर्न पर पारस का दर्द जेल में पारस इस बात को लेकर सबसे ज्यादा परेशान दिखा कि रूबी अब उसके खिलाफ बयान क्यों दे रही है। दबाव का शक: पारस ने वकील से कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा वह झूठ क्यों बोल रही है। शायद उसके घरवाले उसे डरा रहे हैं या बंधक बना लिया है।" सबूतों का दावा: पारस ने बताया कि उसके पास रूबी के लिखे लव लेटर, साथ में खिंचवाई गई फोटो और चैट्स के बैकअप मौजूद हैं, जो वह कोर्ट में पेश करेगा। 5. वकील का पक्ष: "पारस अभी सदमे में है" वकील बलराम सोम के अनुसार, पारस फिलहाल मानसिक तनाव और घबराहट में है। कानूनी रणनीति: बचाव पक्ष अब उन कॉल डिटेल्स और मैसेज को जुटाने में लगा है, जो यह साबित कर सकें कि रूबी अपनी मर्जी से पारस के साथ गई थी। अगली मुलाकात: वकील अब पारस की मुलाकात उसके माता-पिता से कराएंगे ताकि वह सामान्य हो सके और घटना वाली रात का पूरा विवरण दे सके।
मेरठ का सोनू हत्याकांड: कमिश्नरी पर कश्यप समाज का 'महाआक्रोश'; 'बुलडोजर' और 'जातिवाद' के आरोपों से गरमाई सियासत; 80 हजार की लूट और जिंदा जलाने की दहला देने वाली कहानी मेरठ (उत्तर प्रदेश) | 16 जनवरी 2026 मेरठ का ज्वालागढ़ क्षेत्र आज एक बार फिर सुलग उठा है। सोनू कश्यप की नृशंस हत्या के विरोध में शुक्रवार को कश्यप और निषाद समाज ने कमिश्नरी पार्क पर धावा बोल दिया। भारी पुलिस बल, PAC की दो कंपनियों और बैरिकेडिंग के बावजूद हजारों की संख्या में लोग 'सोनू को न्याय दो' के नारे लगाते हुए धरने पर बैठ गए हैं। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि 'OBC बनाम ठाकुर' की राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि आरोपी मुख्यमंत्री की बिरादरी से है, इसलिए पुलिस उसे बचा रही है। 1. दहला देने वाली वारदात: 80 हजार की लूट और जिंदा जलाया ग्राउंड जीरो से मिली जानकारी के अनुसार, यह हत्याकांड किसी भी रूह को कंपा देने वाला है। आखिरी बातचीत: सोनू की मौसी मदनवती ने बताया कि 5 जनवरी को सोनू ने फोन कर कहा था, "मौसी, मैं 80 हजार रुपए लेकर आ रहा हूं, भैया के साथ मिलकर नई बाइक खरीदेंगे।" * क्रूरता की हद: सोनू को बाइक तो क्या मिली, उसकी जान ले ली गई। पहले उसके सिर पर ईंट से हमला किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने या पहचान छिपाने के लिए उसके शरीर पर तेल डालकर उसे जिंदा जला दिया गया। लूट: परिजनों का आरोप है कि सोनू के पास मौजूद 80 हजार रुपए गायब हैं, जिसका पुलिस ने कोई हिसाब नहीं दिया है। 2. प्रदर्शनकारियों की 5 प्रमुख मांगें सोनू के परिजनों और कश्यप समाज ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित शर्तें रखी हैं: निष्पक्ष जांच: पुलिस केवल एक 'नाबालिग ऑटो ड्राइवर' को पकड़कर पल्ला झाड़ रही है, जबकि परिवार का दावा है कि इसमें कई रसूखदार लोग शामिल हैं। आर्थिक सहायता: गरीब परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद मुआवजे की तत्काल मांग। सरकारी नौकरी: सोनू की बड़ी बहन आरती कश्यप को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए। सुरक्षा: गवाहों और परिवार को जान का खतरा बताते हुए पुलिस सुरक्षा की मांग। रुपयों की बरामदगी: लूटे गए 80 हजार रुपए बरामद कर परिवार को सौंपे जाएं। 📊 मेरठ लाइव अपडेट: पल-पल की हलचल समय घटनाक्रम और अपडेट 02:02 PM सोनू की बहन आरती कश्यप का रो-रोकर बुरा हाल; कहा- पुलिस हमारे समर्थकों को रोक रही है। 02:30 PM आगरा, मुजफ्फरनगर और शामली से समर्थकों का पहुंचना जारी; पुलिस ने शहर की सीमाओं पर की नाकाबंदी। 03:44 PM सपा MLC किरण पाल को पुलिस ने सराधना पुल पर रोका; वे समर्थकों संग हाईवे पर ही धरने पर बैठे। 04:57 PM VIP पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का तीखा हमला- "पिछड़ा वर्ग का आरोपी होता तो अब तक बुलडोजर चल गया होता।" 06:48 PM कमिश्नरी पार्क छावनी में तब्दील; कश्यप समाज ने रात भर धरना देने का किया ऐलान। 3. 'बुलडोजर' और 'जातिवाद' पर छिड़ी जंग विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और कश्यप समाज के नेताओं ने सरकार की 'बुलडोजर नीति' पर सवाल उठाए हैं। पक्षपात का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बुलडोजर बिरादरी देखकर चलता है। अगर अपराधी ठाकुर समाज का है, तो कानून ढीला हो जाता है। वोट की चोट: "हम सरकार बना सकते हैं तो गिरा भी सकते हैं।" निषाद पार्टी और कश्यप समाज के कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला, तो आगामी चुनावों में भाजपा को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। 4. पुलिस का 'हाउस अरेस्ट' और घेराबंदी प्रशासन ने इस महापंचायत को रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। नजरबंदी: आजाद समाज पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री संजीव पाल समेत कई नेताओं को उनके घरों में ही 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर दिया गया है। सुरक्षा घेरा: कमिश्नरी पार्क की ओर आने वाले सभी रास्तों को बैरिकेड्स लगाकर सील कर दिया गया है ताकि भीड़ और न बढ़ सके।
मेरठ 'ब्लू ड्रम' हत्याकांड: फरवरी 2026 तक आ सकता है फैसला; मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ की कातिल पत्नी और प्रेमी को मौत की सजा की मांग मेरठ के सबसे सनसनीखेज 'ब्लू ड्रम' मर्डर केस में इंसाफ की घड़ी करीब आ गई है। मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या के मामले में आरोपी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को फरवरी 2026 के अंत तक सजा सुनाई जा सकती है। सरकारी अधिवक्ता और पीड़ित पक्ष के वकीलों की तेज पैरवी ने इस केस को फाइनल स्टेज तक पहुंचा दिया है। 1. ट्रायल का स्टेटस: फरवरी में फैसले की प्रबल संभावना शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, सौरभ हत्याकांड का मुकदमा अब अपने अंतिम चरण (Final Phase) में है। गवाहियां लगभग पूरी: केस में अब तक 14 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अंतिम साक्ष्य: अब केवल 2-3 तकनीकी गवाहों की गवाही शेष है। इसमें मुख्य रूप से फॉरेंसिक फील्ड यूनिट इंचार्ज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (CCTV और मोबाइल डेटा) का 65B सर्टिफिकेट देने वाले विशेषज्ञ की गवाही होनी है। फाइनल आर्गुमेंट: इन गवाहियों के तुरंत बाद कोर्ट में अंतिम बहस शुरू होगी। जिस तेजी से सुनवाई हो रही है, माना जा रहा है कि फरवरी के अंतिम सप्ताह तक अदालत अपना फैसला सुना देगी। 2. जघन्य हत्याकांड: रिश्तों का कत्ल और क्रूरता की हदें सौरभ राजपूत की हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवीय क्रूरता की पराकाष्ठा थी। वकीलों ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' (विरलतम से विरल) श्रेणी का मामला बताया है। तीन टुकड़ों में लाश: आरोपियों ने सौरभ की हत्या के बाद उसके शरीर को तीन हिस्सों में काट दिया था। गर्दन और हाथों के पंजों को शरीर से अलग कर दिया गया था। सीमेंट से सील ड्रम: सबूत मिटाने के लिए शव को एक नीले ड्रम में डालकर उसमें सीमेंट भर दिया गया था, ताकि गंध बाहर न आए और लाश कभी न मिले। विश्वासघात: पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते का कत्ल करते हुए मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को अंजाम दिया। 📊 केस फाइल: सौरभ राजपूत मर्डर मिस्ट्री विवरण प्रमुख जानकारी पीड़ित सौरभ राजपूत (मर्चेंट नेवी ऑफिसर) मुख्य आरोपी मुस्कान (पत्नी) और साहिल (प्रेमी) जेल की स्थिति दोनों 17 मार्च 2025 से मेरठ जिला जेल में बंद हैं। अपराध की प्रकृति हत्या, साक्ष्य मिटाना, आपराधिक साजिश (धारा 302, 201, 120B)। संभावित सजा मृत्युदंड (Fanging) या आजीवन कारावास। 3. क्या मुस्कान की नवजात बच्ची से सजा कम होगी? हाल ही में आरोपी मुस्कान ने जेल में एक बच्ची को जन्म दिया है। इस पर कानूनी विशेषज्ञों का रुख स्पष्ट है: सजा पर असर नहीं: कानून के अनुसार, जेल में महिला बंदी के बच्चे के पालन-पोषण का अलग प्रावधान है। 6 साल तक बच्चा मां के साथ जेल में रह सकता है, लेकिन यह मां के अपराध की गंभीरता या उसकी सजा को कम करने का आधार नहीं बन सकता। समान रोल, समान सजा: अभियोजन पक्ष का दावा है कि साहिल और मुस्कान दोनों का उद्देश्य और अपराध में भागीदारी 'समान' थी, इसलिए दोनों को फांसी या उम्रकैद की समान सजा मिलनी तय है। 4. मेरठ पुलिस और साक्ष्यों की मजबूती पुलिस ने इस केस में इलेक्ट्रॉनिक और साइंटिफिक साक्ष्यों का ऐसा जाल बुना है जिससे आरोपियों का बचना नामुमकिन माना जा रहा है। CCTV फुटेज: ड्रम ले जाते हुए और सामान खरीदते हुए आरोपियों की फुटेज। मोबाइल लोकेशन: हत्या के समय और शव को ठिकाने लगाने के दौरान दोनों की लोकेशन एक ही स्थान पर पाई गई। DNA रिपोर्ट: ड्रम से मिले अवशेषों का सौरभ के परिवार से मिलान।
मेरठ का 'ज्वालागढ़ कांड': रोनू कश्यप की 'क्रूर' हत्या पर गरमाई यूपी की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा; 18 को महापंचायत मेरठ का सरधना क्षेत्र इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उससे सटे ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक रोनू उर्फ सोनू कश्यप (28) की वीभत्स हत्या ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ पुलिस इसे आपसी विवाद और नाबालिग का कृत्य बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ज़िंदा जलाने' की अमानवीय घटना करार देकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहा है। 1. क्या है ज्वालागढ़ कांड? (क्राइम फाइल) 5 जनवरी 2026 (सोमवार) को मेरठ के सरधना में अक्खेपुर-रार्धना रोड पर एक अधजली लाश मिली। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के रोनू कश्यप के रूप में हुई। पुलिस की थ्योरी: पुलिस के अनुसार, रोनू और एक 16 वर्षीय टेंपो चालक के बीच टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पहले रोनू को शराब पिलाई, फिर ईंट से सिर वार कर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घसीटकर पत्तों और मोबिल ऑयल से जला दिया। परिजनों का आरोप: परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि रोनू को ज़िंदा जलाया गया है और इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई लोग शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि रोनू से 80,000 रुपये भी लूटे गए थे। 📊 पीड़ित परिवार की मार्मिक स्थिति सदस्य स्थिति रोनू कश्यप (मृतक) परिवार का इकलौता सहारा, मुंबई में हलवाई का काम करता था। बुजुर्ग माँ गंभीर रूप से बीमार, बेटे की शादी के सपने देख रही थीं। बड़ा भाई टीबी (TB) का मरीज, लंबे समय से इलाज चल रहा है। बड़ी बहन अविवाहित, दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। मकसद रोनू अपनी शादी के लिए लड़की देखने मुजफ्फरनगर से गांव आया था। 2. सियासी 'ज्वाला': अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर के कड़े तेवर इस घटना ने ठाकुर बनाम कश्यप (पिछड़ा वर्ग) का रंग ले लिया है, जिससे विपक्ष को 'PDA' और 'दलित-पिछड़ा' राजनीति को धार देने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव (सपा): उन्होंने इसे 'दबंगों का कुकृत्य' बताते हुए ट्वीट किया— "हम पूरे PDA समाज की तरफ से आवाज़ उठाते हैं। न्याय हो!" मायावती (BSP): बसपा सुप्रीमो ने इसे अति क्रूर और शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने शासन-प्रशासन से अपराधियों के मन में 'कानून का डर' पैदा करने की मांग की। चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नगीना सांसद ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी व मुआवजा मिले। चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया है। नरेंद्र कश्यप (राज्यमंत्री): सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के लिए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप 14 जनवरी को मेरठ पहुँच रहे हैं। 3. स्थानीय विरोध और 18 जनवरी की महापंचायत अतुल प्रधान की सक्रियता: सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलकर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया है। कश्यप समाज का आक्रोश: 12 जनवरी को मुजफ्फरनगर डीएम कार्यालय पर भारी प्रदर्शन हुआ। अब कश्यप समाज ने 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दौराला में एक विशाल 'शोक सभा' और पंचायत बुलाई है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। 4. पुलिस की जांच और 'नाबालिग' का पेंच मेरठ पुलिस के लिए यह केस सिरदर्द बन गया है। साक्ष्य: पुलिस ने शराब के पाउच के बारकोड और ठेके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से आरोपी को ट्रैक किया। विवाद: पुलिस ने 24 घंटे में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए केवल एक नाबालिग पर ठीकरा फोड़ रही है।
मेरठ: रूबी की घर वापसी और 'सजे हाथों' का रहस्य; आरोपी पारस के नाबालिग होने का दावा; भावुक भाई ने गले लगा कर कहा- 'तू आ गई, इतना काफी है' मेरठ के चर्चित कपसाड़ कांड की पीड़िता रूबी 5 दिन बाद आखिरकार अपने घर पहुँच गई है। 12 जनवरी की रात लगभग 8 बजे पुलिस सुरक्षा के बीच उसे परिजनों को सौंपा गया। हालांकि, रूबी की बरामदगी के बाद सामने आए एक वीडियो और आरोपी पारस की उम्र को लेकर नए विवाद खड़े हो गए हैं। 1. घर वापसी और 'वाइन कलर' के सूट की चर्चा आशा ज्योति केंद्र से निकलते वक्त रूबी को शॉल और कंबल से पूरी तरह ढका गया था, लेकिन सुरक्षा घेरे से कार तक पहुँचने के दौरान उसके पहनावे ने सबका ध्यान खींचा। मैचिंग नेलपेंट और सजावटी सूट: वीडियो में रूबी वाइन (गहरे लाल) रंग का गोटेदार नया सूट और हाथों में मैचिंग नेलपेंट लगाए नजर आ रही है। गले में लाल रंग का सजावटी दुपट्टा भी चर्चा का विषय है। सवाल और कयास: 8 जनवरी को रूबी मजदूरी (गन्ना छीलने) के लिए पुराने कपड़ों में घर से निकली थी। चर्चा है कि फरारी के दौरान उसके पास ये नए सजावटी कपड़े और नेलपेंट कहाँ से आए? क्या रूबी और पारस ने इस दौरान शादी कर ली थी? भावुक क्षण: कार में बैठते ही बड़े भाई नरसी ने रूबी को सीने से लगा लिया। रूबी अपनी मां को न बचा पाने के गम में रोती रही, जिस पर भाई ने ढांढस बंधाया— "मां चली गई उसका अफसोस है, लेकिन तू सही-सलामत आ गई, हमारे लिए इतना ही काफी है।" 2. आरोपी पारस: बालिग या नाबालिग? इस मामले में एक और बड़ा कानूनी पेंच फंस गया है। आरोपी पारस सोम के दस्तावेजों के आधार पर उसके नाबालिग होने का दावा किया जा रहा है। दस्तावेजी उम्र: आरोपी के वकील बलराम सोम के अनुसार, पारस की उम्र 18 साल पूरा होने में अभी 4 महीने बाकी हैं। कानूनी प्रभाव: यदि पारस नाबालिग सिद्ध होता है, तो उसे जिला जेल में नहीं रखा जा सकता। उसे किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के सामने पेश कर बाल सुधार गृह भेजा जाएगा। मंगलवार को वकील कोर्ट में इसके पुख्ता दस्तावेज पेश करेंगे। पुलिस की स्थिति: पुलिस ने पारस को न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेजा है, लेकिन उम्र के विवाद के बाद अब उसकी बोन-मैरो टेस्ट या मार्कशीट की जांच अनिवार्य हो गई है। 📊 रूबी केस: घटना से घर वापसी तक तारीख घटनाक्रम 8 जनवरी खेत जाते समय मां की हत्या और रूबी का कथित अपहरण। 10 जनवरी सहारनपुर/रुड़की से पारस और रूबी की बरामदगी। 11 जनवरी एसीजेएम-2 कोर्ट में रूबी के धारा 164 के तहत बयान दर्ज। 12 जनवरी काउंसलिंग के बाद रात 8 बजे रूबी को परिजनों को सौंपा गया। वर्तमान स्थिति रूबी घर पर सुरक्षित; गांव में भारी पुलिस बल और कैमरे तैनात। 3. सुरक्षा के कड़े इंतजाम कपसाड़ गांव में अभी भी तनावपूर्ण शांति है। रूबी की सुरक्षा को देखते हुए उसके घर के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और पुलिस का कड़ा पहरा है। पुलिस अधिकारी अब रूबी के 164 के बयानों और पारस की उम्र के दस्तावेजों के आधार पर चार्जशीट तैयार करने में जुटे हैं।
मेरठ हत्याकांड: "जज साहब! मैं निर्दोष हूं, हमारा रिश्ता सच्चा है" — कोर्ट में पारस की गुहार; 14 दिन की जेल, रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा मेरठ के कपसाड़ गांव में मां की हत्या और बेटी के कथित अपहरण मामले में नया मोड़ आ गया है। मुख्य आरोपी पारस सोम ने मेरठ की कोर्ट में खुद को बेगुनाह बताते हुए इस पूरी घटना को 'प्रेम प्रसंग' का नाम दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के बाद पारस को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है, जबकि रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। यहाँ इस पूरे कानूनी ड्रामे और पुलिस की जांच का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. कोर्ट रूम ड्रामा: पारस सोम की दलील विशेष सीजेएम विकास सावन की कोर्ट में पेशी के दौरान पारस सोम ने भावुक होकर जज के सामने अपनी बात रखी। बयान: "जज साहब! मैं निर्दोष हूं। मेरा और रूबी का रिश्ता 3 साल पुराना और सच्चा है। कोई किडनैपिंग नहीं हुई, वह अपनी मर्जी से मेरे साथ आई थी।" बचाव पक्ष का दावा: पारस के वकील बलराम सोम का कहना है कि उनके मुवक्किल को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और वे जेल में मिलकर पूरी सच्चाई सामने लाएंगे। न्यायिक आदेश: कोर्ट ने पारस को जेल भेज दिया है। दूसरी ओर, रूबी को एसीजेएम-2 नम्रता की कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे काउंसलिंग के लिए भेजा गया है। 📍 फरारी की पूरी टाइमलाइन (60 घंटे का घटनाक्रम) तारीख समय स्थान और गतिविधि 8 जनवरी दोपहर कपसाड़ में हत्या के बाद पारस और रूबी खतौली पहुँचे। 8 जनवरी रात दिल्ली के एक होटल में रुके। यहाँ रूबी को मां की मौत की खबर मिली। 9 जनवरी दिन गुरुग्राम में दोस्त के यहाँ रुके; मीडिया के जरिए गांव के हालात देखे। 9 जनवरी रात गुरुग्राम से ट्रेन पकड़कर सहारनपुर (टपरी गांव) अपनी बहन के घर पहुँचे। 10 जनवरी शाम हरिद्वार जाते समय रुड़की रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने दोनों को दबोचा। 2. एसएसपी मेरठ का बयान: "4 राज्यों के 7 जिलों में दबिश" एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने सफल ऑपरेशन की जानकारी देते हुए बताया: पुलिस की तत्परता: 10 से ज्यादा टीमें गठित की गई थीं। 60 घंटों के भीतर आरोपी को अरेस्ट और युवती को सकुशल बरामद किया गया। ट्रैकिंग: मैनुअल मुखबिरी, इंटेलिजेंस और सर्विलांस के जरिए पुलिस ने इनका पीछा किया। 4 राज्यों के 7 जिलों में पुलिस ने छापे मारे थे। मेडिकल और बयान: युवती का मेडिकल कराया गया है और कोर्ट में उसके बयान दर्ज कराए जा रहे हैं। इन्हीं बयानों के आधार पर मुकदमे में आगे की धाराएं बढ़ाई जाएंगी। 3. सियासत और गांव का तनाव यह मामला दलित बनाम राजपूत होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हो गया है। चंद्रशेखर और अतुल प्रधान: सांसद चंद्रशेखर आजाद और सपा विधायक अतुल प्रधान के हस्तक्षेप के बाद गांव में भारी पुलिस बल और आरएएफ (RAF) तैनात है। अंतिम संस्कार: वारदात के 30 घंटे बाद और प्रशासन द्वारा 10 लाख की मदद के आश्वासन के बाद ही मृतका का अंतिम संस्कार हो सका था।
मेरठ हत्याकांड में नया मोड़: 'अफेयर' के लिए मां की हत्या और फिर फरार; सहारनपुर से पकड़े गए रूबी और पारस मेरठ के कपसाड़ गांव में हुए चर्चित हत्याकांड और युवती के अपहरण मामले ने अब एक बिल्कुल नया मोड़ ले लिया है। पुलिस कस्टडी में आरोपी पारस सोम ने जो खुलासे किए हैं, उन्होंने शुरुआती 'अपहरण' की कहानी को 'प्रेम प्रसंग और आपसी सहमति से भागने' की ओर मोड़ दिया है। हालांकि, मां की बेरहमी से हत्या का आरोप अभी भी पारस पर बरकरार है। 1. 3 साल का अफेयर और भागने का खौफनाक अंत पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी पारस सोम ने बताया कि वह और रूबी पिछले तीन सालों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। शादी का दबाव: हाल ही में रूबी के परिजनों ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी थी। इसी बात से परेशान होकर दोनों ने घर छोड़कर भागने का प्लान बनाया। हत्या की वजह: 8 जनवरी को जब दोनों भागने वाले थे, तब मां सुनीता ने इसका विरोध किया। गुस्से में आकर पारस ने फरसे से हमला कर उनकी हत्या कर दी और रूबी को साथ ले गया। अंतिम संस्कार का विवाद: इस खौफनाक वारदात के बाद परिवार 30 घंटे तक अंतिम संस्कार न करने पर अड़ा रहा, जिसे प्रशासन ने 10 लाख के मुआवजे और न्याय के भरोसे के बाद शांत कराया। 📍 फरारी का रूट: कपसाड़ से सहारनपुर तक का सफर तारीख स्थान क्या हुआ? 8 जनवरी खतौली वारदात के बाद पारस अपनी रिश्तेदारी में पहुँचा। 8 जनवरी रात दिल्ली एक होटल में रात बिताई, यहीं रूबी को माँ की मौत का पता चला। 9 जनवरी गुरुग्राम पारस अपने दोस्त के यहाँ रुका और मीडिया पर नजर रखी। 9 जनवरी रात सहारनपुर गुरुग्राम से ट्रेन पकड़कर टपरी (सहारनपुर) अपनी बहन के घर पहुँचे। 10 जनवरी रुड़की स्टेशन हरिद्वार जाते समय पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। 2. सर्विलांस और पुलिस की घेराबंदी पारस का मोबाइल लगातार पुलिस की रडार पर था। एक कॉल और गिरफ्तारी: शनिवार को हरिद्वार जाते समय पारस ने एक सह-यात्री के फोन से अपने पूर्व मालिक (झोलाछाप डॉक्टर राजेंद्र) को फोन किया। मेरठ पुलिस ने लोकेशन मिलते ही हरिद्वार पुलिस को अलर्ट किया। रुड़की में ट्रैप: हरिद्वार एसएसपी के निर्देश पर रुड़की रेलवे स्टेशन की घेराबंदी की गई और ट्रेन पहुँचते ही दोनों को हिरासत में ले लिया गया। देर रात दोनों को मेरठ लाया गया। 3. कानूनी स्थिति और कोर्ट में पेशी आज पुलिस दोनों को विशेष सीजेएम कोर्ट (Special CJM Court) में पेश करेगी। रूबी के बयान: रूबी के बयानों पर सबकी नजर है। यदि वह कोर्ट में पारस के दावों की पुष्टि करती है, तो केस की दिशा बदल सकती है। फिलहाल उसे 'आशा ज्योति केंद्र' की कस्टडी में रखा गया है। सुनीता हत्याकांड: पुलिस का कहना है कि दोनों को हत्या का आरोपी बनाया जाएगा। रूबी के बयानों के आधार पर मुकदमे में अपहरण के बजाय अन्य गंभीर धाराएं जोड़ी जाएंगी। 4. गरमाई सियासत: चंद्रशेखर और अतुल प्रधान की एंट्री चूंकि मामला दलित युवती और राजपूत युवक से जुड़ा है, इसलिए राजनीतिक तनाव चरम पर है। अतुल प्रधान: सपा विधायक की पुलिस से धक्का-मुक्की हुई और वे धरने पर बैठे। चंद्रशेखर आजाद: शनिवार को सांसद चंद्रशेखर आजाद बैरिकेडिंग कूदकर पैदल ही गांव की ओर निकल पड़े। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और न्याय की मांग की। सुरक्षा: गांव में तनाव को देखते हुए आरएएफ (RAF) और 10 थानों की पुलिस अब भी तैनात है।
मेरठ दलित महिला हत्याकांड और अपहरण: 30 घंटे के तनाव के बाद अंतिम संस्कार; 'बुलडोजर' और 'न्याय' की मांग के बीच सुलगता कपसाड़ गांव उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाड़ गांव इस समय एक भीषण सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की गिरफ्त में है। एक दलित महिला की बेरहमी से हत्या और उसकी युवा बेटी के अपहरण ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। 1. घटनाक्रम: खेत की पगडंडी से शुरू हुआ मातम गुरुवार की सुबह मेरठ के कपसाड़ गांव में एक सामान्य दिन की शुरुआत हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते यहाँ चीख-पुकार मच गई। दुस्साहस: एक दलित महिला अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थी। रास्ते में आरोपी कंपाउंडर पारस ने लड़की के साथ छेड़छाड़ की। हत्या और अपहरण: जब माँ ने अपनी बेटी की अस्मत बचाने के लिए विरोध किया, तो आरोपी ने आव देखा न ताव और फरसे (धारदार हथियार) से हमला कर माँ की नृशंस हत्या कर दी। इसके बाद वह लड़की को जबरन अगवा कर फरार हो गया। शादी की खुशियां मातम में: पीड़िता के पिता सत्येंद्र ने रोते हुए बताया कि बेटी की शादी तय हो चुकी थी। मई की तारीख को बदलकर अप्रैल का मुहूर्त निकलवाना था, लेकिन एक झटके में सब बर्बाद हो गया। 2. 30 घंटे का 'डेडलॉक' और प्रशासनिक कवायद घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया था। उनकी मांग थी कि जब तक बेटी सकुशल नहीं मिलती और आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, वे टस से मस नहीं होंगे। भारी सुरक्षा बल: गांव में तनाव को देखते हुए 10 थानों की फोर्स, आरएएफ (RAF) और पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई। पूरा गांव एक छावनी में तब्दील हो गया। प्रशासन का समझौता: 30 घंटे की लंबी जद्दोजहद और मान-मनौव्वल के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। प्रशासन ने तुरंत 10 लाख रुपये का चेक सौंपा। अंतिम संस्कार: भारी सुरक्षा के बीच मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन गांव में अब भी गुस्सा शांत नहीं हुआ है। 📊 पीड़ित परिवार की 4 प्रमुख मांगें और सरकारी आश्वासन मांग स्थिति / आश्वासन बेटी की सकुशल बरामदगी पुलिस की 5 टीमें और क्राइम ब्रांच लगातार दबिश दे रही हैं। 50 लाख की आर्थिक मदद 10 लाख दिए गए, बाकी के लिए शासन को फाइल भेजी गई। सरकारी नौकरी परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार नौकरी का आश्वासन। शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा की दृष्टि से शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर विचार। 3. राजनीति का अखाड़ा बना कपसाड़: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष इस घटना ने मेरठ की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। अतुल प्रधान बनाम पुलिस: सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान जब गांव पहुँचे, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की हुई। उन्हें गांव के बाहर रोका गया, जहाँ वे समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। ढाई घंटे बाद उन्हें मिलने की अनुमति मिली। अखिलेश यादव का हस्तक्षेप: सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पीड़ित पिता से फोन पर बात की और 3 लाख रुपये की निजी आर्थिक मदद की घोषणा की। संगीत सोम की एंट्री: बीजेपी के कद्दावर नेता संगीत सोम भी गांव पहुँचे और परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। आजाद समाज पार्टी और भाकियू: चंद्रशेखर आजाद की पार्टी और किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। 4. भाई की आशंका: "मेरी बहन के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए" पीड़िता के भाई नरसिंह का बयान दिल दहला देने वाला है। उसने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और आरोपी ने अभी तक कोई सुराग नहीं छोड़ा है। बुलडोजर की मांग: परिजनों की मांग है कि आरोपी पारस के घर पर बुलडोजर चलाया जाए ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो। अनहोनी का डर: भाई को डर है कि आरोपी उसकी बहन को नुकसान पहुँचा सकता है।
🚩 संगीत सोम का तीखा हमला: "शाहरुख जैसे गद्दार देश बर्दाश्त नहीं करेंगे" मेरठ में एक कार्यक्रम के दौरान संगीत सोम ने बांग्लादेशी क्रिकेटर नाहिद राणा (जिन्हें KKR ने खरीदा है) के चयन पर कड़ी आपत्ति जताई। शाहरुख खान पर निशाना: सोम ने कहा कि शाहरुख खान जैसे लोग देश के पैसे से बांग्लादेशी खिलाड़ियों को पाल रहे हैं, जबकि वहां हिंदुओं का कत्लेआम हो रहा है। उन्होंने शाहरुख को 'गद्दार' तक कह डाला। खिलाड़ी को चेतावनी: उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बांग्लादेशी खिलाड़ी भारत में खेलने आएगा, तो वह यहां से सुरक्षित बाहर कदम नहीं रख पाएगा। तर्क: सोम का कहना है कि जब पाकिस्तान के खिलाड़ी भारत में नहीं खेल सकते, तो बांग्लादेश के क्यों? जहां प्रधानमंत्री मोदी को गालियां दी जा रही हैं और हिंदुओं का उत्पीड़न हो रहा है। 🕉️ देवकी नंदन ठाकुर की चेतावनी: "KKR का बहिष्कार करेंगे हिंदू" मथुरा में कथा के दौरान देवकी नंदन ठाकुर ने भी कड़ा रुख अपनाया: हीरो से जीरो: उन्होंने शाहरुख खान को याद दिलाया कि उन्हें भारतीयों ने ही हीरो बनाया है, और वही जनता उन्हें 'जीरो' भी बना सकती है। निष्कासन की मांग: उन्होंने मांग की कि KKR तुरंत बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम से बाहर करे। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो पूरा हिंदू समाज KKR और उसकी टीम का बहिष्कार करेगा। संवेदना का सवाल: उन्होंने पूछा कि क्या KKR मालिक को उस 6 साल की हिंदू बच्ची के जलाए जाने का दुख नहीं है, जो बांग्लादेश में हिंसा का शिकार हुई? 📝 संगीत सोम के बयान की 5 बड़ी बातें गद्दारों पर नजर: देश के अंदर छिपे गद्दारों पर पैनी नजर रखने की जरूरत है, जो अलग-अलग तरीके से भारत को कमजोर कर रहे हैं। कानून-व्यवस्था: यूपी में भाजपा सरकार ने अतीक और मुख्तार जैसे माफियाओं का सफाया कर सुरक्षा का माहौल बनाया है। चुनाव का दावा: आगामी चुनावों में भाजपा 350 से अधिक सीटें जीतेगी और विपक्ष 20-30 सीटों पर सिमट जाएगा। विदेशी सम्मान: पीएम मोदी के नेतृत्व में आज अमेरिका समेत पूरी दुनिया भारत का सम्मान कर रही है। बहिष्कार का आह्वान: बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ रेप और हत्याएं हो रही हैं, ऐसे में वहां के खिलाड़ियों का स्वागत भारत में नहीं होगा। 🔍 विवाद की जड़ (Context) हाल ही में आईपीएल ऑक्शन में KKR ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज नाहिद राणा को ₹9.5 करोड़ में खरीदा है। बांग्लादेश में जारी हिंदू विरोधी हिंसा और वहां की अंतरिम सरकार के भारत विरोधी बयानों के कारण भारत में इस खरीद का भारी विरोध हो रहा है। क्या आप चाहते हैं कि मैं इस विवाद पर सोशल मीडिया पर चल रहे 'Boycott KKR' ट्रेंड की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करूँ?
खाकी का 'अहंकार': मेरठ में महिला दरोगा की गुंडागर्दी; कपल को दी यूरिन करने की धमकी, अब हुईं लाइन हाजिर 1. 🛑 आबूलेन मार्केट में हाई वोल्टेज ड्रामा रविवार शाम करीब 7 बजे, जब मेरठ का आबूलेन और बॉम्बे बाजार खरीदारों से खचाखच भरा था, तब अलीगढ़ में तैनात दरोगा रचना राठी अपनी निजी आई-20 कार से वहां पहुंचीं। जाम में कार फंसने पर दरोगा का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने अपनी वर्दी की हनक दिखाना शुरू कर दिया। विवाद की वजह: ट्रैफिक जाम में सामने खड़ी कार ने जब तुरंत रास्ता नहीं दिया, तो रचना राठी कार से नीचे उतरीं और सामने वाले कपल पर हमलावर हो गईं। शर्मनाक धमकी: वायरल वीडियो में दरोगा को यह कहते सुना जा सकता है— "पुलिस की वर्दी पहन के खड़ी हूं, दरोगा हूं मैं, मुंह में यूरिन कर दूंगी। गाड़ी नहीं हटाई तो बेल्ट से पीटूंगी।" 2. 🕵️ सरकारी ड्यूटी के नाम पर 'शॉपिंग' और चालानों की फेहरिस्त पुलिस जांच में दरोगा की पोल खुलती गई: झूठ का सहारा: दरोगा रचना राठी अलीगढ़ के महुआ थाने से सरकारी काम का बहाना बनाकर मुजफ्फरनगर के लिए निकली थीं, लेकिन वह दोस्तों के साथ मेरठ में शॉपिंग करने पहुंच गईं। नियम तोड़ने की आदत: जिस कार (i-20) में दरोगा सवार थीं, उस पर ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के 14 चालान लंबित हैं, जिनकी कुल राशि 43,782 रुपए है। खुद कानून का पालन कराने वाली दरोगा ही नियमों की धज्जियां उड़ा रही थीं। 3. ⚖️ त्वरित कार्रवाई: लाइन हाजिर और जांच मामले का वीडियो सोमवार शाम वायरल होने के बाद मेरठ SSP डॉ. विपिन ताडा ने तुरंत संज्ञान लिया। अलीगढ़ SSP को रिपोर्ट: जांच में दरोगा की पहचान होने के बाद अलीगढ़ SSP को रिपोर्ट भेजी गई। सजा: अलीगढ़ SSP ने आरोपी दरोगा रचना राठी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दिए हैं। 4. 👩✈️ कौन हैं रचना राठी? 28 वर्षीय रचना राठी मूल रूप से बागपत की रहने वाली हैं और 2023 बैच की उप-निरीक्षक (SI) हैं। उनकी पहली पोस्टिंग अलीगढ़ में हुई थी। महज दो साल की नौकरी में इस तरह के आचरण ने पुलिस महकमे की छवि को धूमिल किया है।
🚆 नमो भारत ट्रेन अश्लील वीडियो मामला: लोकलाज के डर से छात्रा ने की खुदकुशी की कोशिश; ऑपरेटर बर्खास्त, FIR दर्ज 1. 🚨 छात्रा की मानसिक स्थिति और परिवार का दर्द वीडियो वायरल होने के बाद छात्रा इतनी गहरे सदमे और मानसिक दबाव में चली गई कि उसने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का प्रयास किया। आत्महत्या की कोशिश: लोकलाज और सोशल मीडिया पर हुई बदनामी से आहत होकर छात्रा ने जान देने की कोशिश की। समय रहते परिवार ने उसे बचा लिया और उपचार के बाद सुरक्षा के मद्देनजर उसे दूसरे शहर में किसी रिश्तेदार के घर भेज दिया है। बिखरा हुआ परिवार: छात्रा गाजियाबाद की रहने वाली है और बालिग है। वह बीसीए (BCA) की पढ़ाई कर रही है। उसके चाचा का कहना है कि बदनामी इतनी ज्यादा है कि लोग घर के अंदर झांकते हुए निकलते हैं। परिवार अब पुलिस गिरफ्तारी के डर और समाज के ताने-बाने के बीच डरा-सहमा है। 2. 📹 घटना का विवरण: प्रीमियम कोच में हुई थी हरकत एनसीआरटीसी (NCRTC) की जांच के अनुसार, यह घटना 24 नवंबर 2024 की शाम करीब 4 बजे की है। रूट: ट्रेन दुहाई स्टेशन से मुरादनगर की ओर जा रही थी। प्रीमियम कोच-23 की सीटें खाली थीं, जिसका फायदा उठाकर छात्र-छात्रा ने अश्लील कृत्य किया। पहचान: छात्रा कॉलेज यूनिफॉर्म और आईकार्ड में थी, जबकि छात्र सफेद स्वेटर में था। दोनों एक ही समाज (जाट बिरादरी) से ताल्लुक रखते हैं और उनके घर महज 3 किलोमीटर की दूरी पर हैं। 3. ⚖️ कानूनी कार्रवाई: ऑपरेटर पर गिरी गाज इस मामले में केवल छात्र-छात्रा ही नहीं, बल्कि वीडियो लीक करने वाले कर्मचारी पर भी सख्त कार्रवाई हुई है। ऑपरेटर बर्खास्त: नमो भारत के ट्रेन ऑपरेटर रिषभ ने केबिन के अंदर मोबाइल का इस्तेमाल कर सीसीटीवी फुटेज रिकॉर्ड किया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। कंपनी ने इसे सेवा शर्तों का उल्लंघन मानते हुए 3 दिसंबर को उसे नौकरी से निकाल दिया। FIR दर्ज: मुरादनगर थाने में सुरक्षा प्रमुख दुष्यंत कुमार की शिकायत पर छात्र-छात्रा और वीडियो वायरल करने वाले ऑपरेटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 4. 🏘️ पड़ोसियों और छात्रों की राय शादी का सुझाव: पड़ोसियों का मानना है कि चूंकि दोनों बच्चे एक ही समाज से हैं, इसलिए बिरादरी के लोगों को मिलकर उनकी शादी करा देनी चाहिए ताकि मामला शांत हो सके और परिवार बस जाए। करियर पर खतरा: कॉलेज के अन्य छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि ऐसी गलतियों से करियर तबाह हो जाता है। शिक्षकों के अनुसार, छात्रा पढ़ाई में बहुत होशियार और फोकस्ड थी, लेकिन इस एक गलती ने सब कुछ बदल दिया। 5. 🧐 डिजिटल एथिक्स और प्राइवेसी पर सवाल यह घटना सिखाती है कि सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी हर पल रहती है। साथ ही, ट्रेन ऑपरेटर द्वारा वीडियो वायरल करना यह दर्शाता है कि डेटा सुरक्षा कितनी चुनौतीपूर्ण है। एक निजी पल का सार्वजनिक होना न केवल अपराध है, बल्कि किसी की जान पर भी बन आती है।
🚫 रैपिड रेल में अश्लीलता: स्कूल यूनिफॉर्म में छात्रा और युवक की गंदी हरकत CCTV में कैद; NCRTC और पुलिस सख्त 1. 🎥 क्या है पूरा मामला? वायरल वीडियो का सच यह घटना 24 नवंबर की बताई जा रही है, जिसका सीसीटीवी फुटेज अब सार्वजनिक हुआ है। वीडियो मोदीनगर से मेरठ के बीच के सफर का है। घटना का विवरण: वीडियो में एक छात्रा स्कूल यूनिफॉर्म में नजर आ रही है, जबकि उसके साथ एक युवक सफेद स्वेटर में बैठा है। ट्रेन के केबिन में अन्य यात्री भी मौजूद थे, लेकिन उनकी मौजूदगी को नजरअंदाज करते हुए युवक पहले छात्रा को चूमता है और फिर चादर की ओट लेकर दोनों आपत्तिजनक हरकतें करने लगते हैं। सुरक्षा में चूक या लापरवाही: रैपिड रेल पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों से लैस है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थल पर ऐसी हरकत होना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। 2. ⚖️ पुलिस और NCRTC की कार्रवाई वीडियो वायरल होने के बाद राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) और पुलिस महकमा सक्रिय हो गया है। जांच का घेरा: पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, टिकट बुकिंग डेटा और ट्रेन के समय के आधार पर युवक और छात्रा की पहचान करने में जुटी है। दावा किया जा रहा है कि छात्रा मेरठ के एक प्रतिष्ठित स्कूल की है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है। वीडियो लीक पर सवाल: सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि रैपिड रेल के कंट्रोल रूम से यह संवेदनशील वीडियो बाहर कैसे आया और किसने इसे सोशल मीडिया पर वायरल किया? NCRTC अपने ही कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रहा है। अधिकारियों का बयान: एसपी आयुष विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया है कि वीडियो का संज्ञान लिया गया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 3. 🚆 नमो भारत (रैपिड रेल) की खासियतें और सुरक्षा तंत्र जिस ट्रेन में यह घटना हुई, वह देश की सबसे आधुनिक परिवहन प्रणालियों में से एक है: स्पीड और सुरक्षा: 180 किमी/घंटा की डिजाइन स्पीड वाली यह ट्रेन फिलहाल 160 किमी/घंटा पर चल रही है। सुरक्षा के लिए इसमें प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर (PSD) लगे हैं, जो ट्रेन के दरवाजों के साथ ही खुलते और बंद होते हैं। एआई सुरक्षा (AI Security): स्टेशनों पर यात्रियों की जांच के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सक्षम डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं। कोच की सुविधा: ट्रेन में 6 कोच हैं, जिसमें एक महिलाओं के लिए आरक्षित है और एक प्रीमियम कोच है। पूरी ट्रेन सीसीटीवी कैमरों से कवर है। 4. 📢 प्रशासन की अपील और सामाजिक संदेश NCRTC और पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन में गरिमा बनाए रखें। नियमों का पालन: परिवहन साधनों में किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक गतिविधि दंडनीय अपराध है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि ऐसी कोई भी हरकत देखने पर तुरंत कोच में लगे इमरजेंसी बटन या अधिकारियों को सूचना दें। साइबर सतर्कता: पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे अश्लील वीडियो को शेयर न करें, क्योंकि यह आईटी एक्ट के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
⚖️ वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की हुंकार: 22 जिलों में ऐतिहासिक 'महाबंद', ठप रहा मेरठ; वकीलों का नारा- 'बेंच नहीं, तो वोट नहीं' 1. 🛑 मेरठ बंद: ठप रहा कारोबार और सेवाएं बुधवार सुबह 11 बजे से ही मेरठ के प्रमुख बाजारों—खैरनगर, बुढ़ाना गेट और जिमखाना मैदान में सन्नाटा पसरा रहा। दुकानदारों ने स्वेच्छा से शटर गिराकर वकीलों की मांग का समर्थन किया। स्वास्थ्य सेवाएं: डॉक्टरों ने एकजुटता दिखाते हुए ओपीडी (OPD) सेवाएं कैंसिल कर दीं, हालांकि आपातकालीन सेवाएं सुचारु रहीं। शिक्षा: चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) ने बंद की गंभीरता को देखते हुए 17 दिसंबर की सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। अब ये परीक्षाएं 12 जनवरी को होंगी। नगर निगम: सफाई मजदूर संघ ने भी काम बंद रखा, जिससे शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई। 2. 🏛️ वकीलों का आक्रोश: '5 दशकों का संघर्ष' हाईकोर्ट बेंच की मांग पिछले 50 वर्षों से लंबित है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि हर बार पूर्वांचल की 'लॉबी' पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर भारी पड़ती है। बुलंदशहर: अंसारी रोड और चौक बाजार पूरी तरह बंद रहे। व्यापारियों और वकीलों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाजी की। हापुड़: वकीलों ने तहसील चौराहे पर चक्का जाम किया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। बाद में एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। बागपत: कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी (DM) के न मिलने पर वकील भड़क गए और दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम कर 'डीएम मुर्दाबाद' के नारे लगाए। बिजनौर: अधिवक्ताओं ने रजिस्ट्री कार्यालय पर ताला जड़ दिया और कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला। 3. 💬 राजनीतिक घमासान: भाजपा बनाम विपक्ष बेंच की मांग को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। सपा विधायक रफीक अंसारी: उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, "केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है। सबसे ज्यादा सांसद और विधायक भाजपा के हैं, फिर भी वेस्ट यूपी की उपेक्षा की जा रही है। भाजपा नेता सुस्त हैं।" सपा विधायक अतुल प्रधान: उन्होंने इसे 'जनांदोलन' बताते हुए कहा कि प्रयागराज जाना आम जनता की गाढ़ी कमाई और समय की बर्बादी है। उन्होंने कहा, "जनता को न सेंट्रल मार्केट मिली और न ही बेंच।" राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत (भाजपा): उन्होंने आंकड़ों के साथ बेंच की आवश्यकता का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में 63% मुकदमे पश्चिमी यूपी के हैं। उन्होंने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कम मुकदमों पर भी 5वीं बेंच दी गई है, तो यूपी में मेरठ, आगरा और गोरखपुर को बेंच क्यों नहीं मिल सकती? बसपा और कांग्रेस: बसपा ने कहा कि भाजपा की उदासीनता के कारण बेंच नहीं आ पा रही है, वहीं कांग्रेस ने तर्क दिया कि मेरठ से लाहौर और दिल्ली नजदीक हैं, लेकिन इलाहाबाद बहुत दूर है। 4. 📊 आंकड़ों में समझें जरूरत हाईकोर्ट बेंच की मांग केवल वकीलों की नहीं, बल्कि न्याय की सुलभता की मांग है: उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल: 2,40,928 वर्ग किमी। लंबित मुकदमे: लगभग 10,32,238। इलाहाबाद हाईकोर्ट का बोझ: लखनऊ और इलाहाबाद बेंच में 5-5 लाख से अधिक मुकदमे लंबित हैं। दूरी: पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे सहारनपुर, मेरठ) से इलाहाबाद की दूरी लगभग 700-800 किमी है, जिससे मुकदमों की पैरवी करना आम नागरिक के लिए आर्थिक रूप से कठिन हो जाता है। 5. 🤝 1200 संगठनों का महा-समर्थन अधिवक्ताओं के अनुसार, इस बार का बंद इसलिए सफल रहा क्योंकि इसे 1200 से अधिक व्यापारिक और सामाजिक संगठनों का लिखित समर्थन प्राप्त था। पेट्रोल पंप, स्कूल-कॉलेज, ट्रांसपोर्ट और मंडी संगठनों ने खुद आगे आकर बंद को सफल बनाया। सरधना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम त्यागी के नेतृत्व में वकीलों ने नवीन मंडी में भी प्रतिष्ठान बंद कराए।
💔 मेरठ सौरभ हत्याकांड: मां बनने के बाद जेल में मुस्कान का बदला व्यवहार मेरठ के चर्चित मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ कुमार राजपूत हत्याकांड की मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी के व्यवहार में जेल में माँ बनने के बाद बड़ा बदलाव आया है। जेल अधीक्षक के अनुसार, वह अब पहले जैसी आक्रामक नहीं है और नवजात बच्ची की देखभाल में पूरा समय बिता रही है। 1. 🤱 जेल में मुस्कान का बदला व्यवहार हत्याकांड के बाद जेल में बंद मुस्कान ने हाल ही में एक बेटी को जन्म दिया है, जिसका नाम उसने राधा रखा है। जेल प्रशासन और बैरक की महिला बंदियों के अनुसार, माँ बनने के बाद मुस्कान का व्यवहार पूरी तरह से बदल गया है। पहलू विवरण भावनात्मक लगाव मुस्कान दिनभर अपनी नवजात बेटी राधा को सीने से लगाए रखती है और पूरी तरह से उसकी देखभाल में लगी रहती है। व्यवहार में बदलाव जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, मुस्कान अब पहले जैसी आक्रामक (Aggressive) नहीं है। शुरुआती दिनों में वह नशे की आदी थी, लेकिन माँ बनने के बाद वह बदल गई है। आध्यात्मिक झुकाव मुस्कान अब धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेती है और स्वयं को सुधारने की कोशिश कर रही है। परवरिश की व्यवस्था मुस्कान जिस बैरक में है, वहाँ चार अन्य महिला बंदियां भी हैं जिनके छोटे बच्चे हैं। जेल प्रशासन ने सभी माताओं और बच्चों के लिए खानपान, गर्म कपड़े, दूध और चिकित्सीय सुविधाएँ उपलब्ध कराई हैं। 2. 💔 साहिल और बच्ची राधा से मुलाकात की इच्छा हत्याकांड में मुस्कान का साथ देने वाला उसका प्रेमी साहिल शुक्ला उर्फ मोहित भी इसी जेल में बंद है। मुलाकात की माँग: मुस्कान ने अपनी नवजात बेटी राधा को अपने प्रेमी साहिल को दिखाने की इच्छा जताई है। साहिल ने भी जेल प्रशासन से बच्ची से मिलने की माँग की है। नियमों की बाधा: जेल के नियमों और सुरक्षा मानकों के कारण जेल प्रशासन ने उन्हें सीधे मिलने की अनुमति नहीं दी है। विकल्प (VC): जेल प्रशासन का कहना है कि मुस्कान और साहिल, जो अलग-अलग बैरक में बंद हैं, वे सिर्फ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के दौरान एक-दूसरे को देख सकते हैं। बच्ची को दिखाने का निर्णय भी नियमों के अनुसार लिया जाएगा। 3. 🧬 नवजात बच्ची पर कानूनी और पारिवारिक विवाद मुस्कान की बेटी को लेकर कानूनी और पारिवारिक विवाद खड़ा हो गया है। सौरभ परिवार की माँग: मृतक सौरभ के परिवार ने नवजात बच्ची का DNA टेस्ट कराए जाने की माँग की है। स्वीकार्यता की शर्त: सौरभ के परिवार का कहना है कि अगर बेटी का DNA टेस्ट यह साबित करता है कि वह सौरभ की संतान है, तभी वे उसे स्वीकार करेंगे। 4. 🔪 सौरभ हत्याकांड का विस्तृत घटनाक्रम मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ कुमार राजपूत की निर्मम हत्या को उनकी पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी ने सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया था: तिथि/घटना विवरण 3 मार्च की रात लंदन से लौटे सौरभ कुमार राजपूत की उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला उर्फ मोहित के साथ मिलकर हत्या कर दी। हत्या का तरीका पहले मुस्कान ने खाने में दवा मिलाकर सौरभ को बेहोश किया। बेडरूम में सोते समय मुस्कान ने ही पति के सीने में पहला चाकू मारा। शव के टुकड़े मौत के बाद लाश को बाथरूम में ले जाया गया, जहाँ साहिल ने सौरभ के दोनों हाथ और सिर काटकर धड़ से अलग कर दिया। शव को ठिकाना शव के टुकड़ों को प्लास्टिक के ड्रम में डाला गया और उसमें सीमेंट का घोल भरकर ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। गुमराह करने की कोशिश हत्या के बाद मुस्कान परिवार और पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए शिमला-मनाली चली गई। वह लगभग 13 दिनों तक इंस्टाग्राम पर वीडियो-फोटो अपलोड करती रही, ताकि लोग समझें कि सौरभ और वह साथ घूम रहे हैं। पर्दाफाश 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल अपने भाई के ब्रह्मपुरी के इंदिरा सेकेंड स्थित घर पहुँचा। उसने मुस्कान को साहिल के साथ घूमते देखा और घर के अंदर से बदबू आने पर संदेह हुआ। गिरफ्तारी राहुल ने शोर मचाया, पड़ोसी और पुलिस मौके पर पहुँचे। पुलिस कस्टडी में मुस्कान और साहिल ने कत्ल की पूरी कहानी सुनाई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। सौरभ हत्याकांड अपनी क्रूरता और पति द्वारा पत्नी की हत्या की साजिश के कारण मेरठ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में एक चर्चित और चौंकाने वाला मामला बना रहा। क्या आप इस मामले के कानूनी पहलुओं या DNA टेस्ट की प्रक्रिया के बारे में अधिक जानना चाहेंगे?
जेल की कालकोठरी में मुस्कान का मातृत्व: सौरभ राजपूत हत्याकांड की आरोपी ने दिया बच्चे को जन्म, रोई फूट-फूटकर; परिवार से दूरी और डीएनए टेस्ट की मांग उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में घटित सौरभ राजपूत हत्याकांड की मुख्य आरोपित मुस्कान ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है, जिसने इस बहुचर्चित और जघन्य मामले में एक नया भावनात्मक और कानूनी मोड़ ला दिया है। बीते 24 नवंबर को मेरठ मेडिकल कॉलेज में शिशु को जन्म देने वाली मुस्कान, मातृत्व की खुशी के बीच अकेलेपन, पछतावे और अनिश्चित भविष्य के गहरे दर्द से गुजरती दिखीं। उनकी डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर ने खुलासा किया है कि बच्चे के जन्म के बाद मुस्कान फूट-फूटकर रोई थीं, और अस्पताल से डिस्चार्ज होते वक्त उनकी आँखें नम थीं, क्योंकि उनसे या उनके नवजात शिशु से मिलने कोई नहीं आया। यह घटना न केवल मुस्कान के व्यक्तिगत जीवन की त्रासदी को दर्शाती है, बल्कि यह कानूनी और सामाजिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या 'जच्चा और बच्चा' दोनों के लिए 'जेल की कालकोठरी' उचित स्थान है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मृतक सौरभ के परिजनों ने इस नवजात शिशु के डीएनए टेस्ट की मांग की है, जिसने इस बच्चे के भविष्य और कानूनी पहचान पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। 26 नवंबर को डिस्चार्ज होने के बाद मुस्कान, अपने नवजात शिशु के साथ, फिर से जेल की कालकोठरी में पहुँच चुकी हैं। डॉक्टर शकुन ने बताया है कि माँ और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं, लेकिन मुस्कान का अकेलापन और चुप्पी उनकी मानसिक स्थिति को दर्शाती है। मुस्कान का अपने पहले बच्चे के जन्म के समय परिजनों का ताँता और इस बार किसी का न आना, उनके वर्तमान जीवन की सामाजिक अस्वीकृति और अकेलेपन को उजागर करता है। यह विस्तृत आलेख सौरभ राजपूत हत्याकांड की आरोपी मुस्कान के मातृत्व, बच्चे के जन्म के बाद उनकी भावनात्मक स्थिति (फूट-फूटकर रोना, चुप्पी), मेरठ मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर शकुन द्वारा दिए गए खुलासे (अकेलापन, पुराने दिनों की याद), जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य और जेल वापसी की कानूनी अनिवार्यता, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, मृतक सौरभ के परिजनों द्वारा बच्चे के डीएनए टेस्ट की मांग के कानूनी, नैतिक और सामाजिक निहितार्थों पर 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 🚨 सौरभ राजपूत हत्याकांड: पृष्ठभूमि और मुस्कान की भूमिका मेरठ का सौरभ राजपूत हत्याकांड एक ऐसा मामला रहा है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था और इस हत्याकांड में मुस्कान की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे थे। 1.1. जघन्य घटनाक्रम सौरभ राजपूत: इस मामले का मुख्य शिकार सौरभ राजपूत था, जिसकी जघन्य तरीके से हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपित मुस्कान: इस हत्याकांड में मुस्कान को मुख्य आरोपित बनाया गया, जिसके कारण वह लंबे समय से जेल में बंद हैं। कानूनी प्रक्रिया: मामला जघन्य होने के कारण मुस्कान को जमानत नहीं मिल सकी, और उन्हें अपनी गर्भावस्था और डिलीवरी जेल की कालकोठरी में ही गुजारनी पड़ी। 1.2. कानूनी और सामाजिक निहितार्थ एक जघन्य हत्याकांड के मुख्य आरोपित के रूप में मुस्कान की गिरफ्तारी ने उन्हें सामाजिक रूप से पूरी तरह से अलग-थलग कर दिया है, जिसकी झलक उनके मातृत्व के क्षणों में साफ देखने को मिली। 2. 🤱 मुस्कान का मातृत्व: अकेलापन और आँसू 24 नवंबर को मेरठ मेडिकल कॉलेज में मुस्कान ने एक शिशु को जन्म दिया, लेकिन यह क्षण खुशी से ज्यादा अकेलेपन और दर्द से भरा था। 2.1. फूट-फूटकर रोना डॉक्टर का खुलासा: मुस्कान की डिलीवरी कराने वाली डॉक्टर शकुन ने न्यूज़ 18 से ख़ास बातचीत में खुलासा किया कि मुस्कान शिशु को जन्म देने के बाद फूट-फूटकर रोई थीं। अकेलापन: डॉक्टर शकुन ने बताया कि अस्पताल से डिस्चार्ज होते वक्त भी मुस्कान की आँखें नम थीं, क्योंकि उनसे कोई मिलने तक नहीं आया। 2.2. चुप्पी और मानसिक स्थिति कम बोलना: मेडिकल कॉलेज में भर्ती मुस्कान डॉक्टरों से भी ज्यादा बात नहीं करती थीं। ज्यादातर सवालों का जवाब वह केवल 'हाँ' या 'ना' में ही देती थीं या सिर हिलाकर जवाब देती थीं। इक्का-दुक्का शब्द ही बोलती थीं। मानसिक संघर्ष: यह चुप्पी और अत्यधिक संक्षेप में जवाब देना, उनकी मानसिक अस्थिरता, दुख और पछतावे को दर्शाता है, जो उन्हें अपनी पिछली गलतियों और वर्तमान स्थिति के कारण महसूस हो रहा होगा। 2.3. पुराने दिनों की तुलना डॉक्टर शकुन ने मुस्कान के रोने का एक भावनात्मक कारण बताया: पहली डिलीवरी: "हो सकता है कि मुस्कान को अपने पुराने दिन याद आए होंगे जब उसने अपने पहली बिटिया को जन्म दिया था। तब उसका हालचाल जानने के लिए परिजनों का तांता रहता था।" वर्तमान हाल: "लेकिन इस बार उसकी शक्ल तो क्या बच्चे को भी देखने कोई नहीं आया।" यह तुलना उनकी वर्तमान सामाजिक बहिष्कार और अलगाव की स्थिति को स्पष्ट करती है। 3. ⚖️ जच्चा-बच्चा की जेल वापसी और कानूनी अनिवार्यता डिलीवरी के तुरंत बाद, मुस्कान और उनके शिशु को कानूनी मजबूरी के तहत फिर से जेल भेज दिया गया है। 3.1. स्वास्थ्य की स्थिति डिस्चार्ज: डॉक्टर शकुन ने बताया कि मुस्कान को 26 नवंबर को डिस्चार्ज कर दिया गया है। स्वस्थ: जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। टीकाकरण: मुस्कान की बच्ची का टीकाकरण भी किया गया है। 3.2. जेल की कालकोठरी में मातृत्व जेल वापसी: स्वास्थ्य ठीक होने के तुरंत बाद, मुस्कान, अपने नवजात शिशु के साथ, 'जेल की कालकोठरी' पहुँच गई हैं। कानूनी स्थिति: चूँकि मुस्कान विचाराधीन कैदी हैं और किसी गंभीर अपराध की आरोपित हैं, उन्हें अपने बच्चे को जेल में ही पालना होगा, जब तक कि उन्हें जमानत नहीं मिल जाती या कोर्ट कोई अलग आदेश नहीं देता। शिशु का अधिकार: जेल मैनुअल के अनुसार, नवजात शिशु को अपनी माँ के साथ रहने का अधिकार है, लेकिन शिशु का पालन-पोषण जेल के कठिन और सीमित वातावरण में ही होगा, जो उनके भविष्य के विकास पर सवाल खड़ा करता है। 4. 🧬 डीएनए टेस्ट की मांग: कानूनी और नैतिक प्रश्न इस पूरे मामले में सबसे विवादास्पद और कानूनी रूप से महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब मृतक सौरभ के परिजनों ने नवजात शिशु के डीएनए टेस्ट की मांग की। 4.1. मांग का आधार संशय: सौरभ के परिजनों की यह मांग संभवतः बच्चे के पितृत्व (Paternity) पर संशय और मामले की आपराधिक जाँच से जुड़ी है। कानूनी निहितार्थ: यदि यह डीएनए टेस्ट होता है, तो इससे यह स्थापित हो सकेगा कि शिशु का जैविक पिता कौन है। यह तथ्य सौरभ राजपूत हत्याकांड की जाँच और मुस्कान के आपराधिक इरादों को समझने में भी महत्वपूर्ण हो सकता है। 4.2. डीएनए टेस्ट की प्रक्रिया कोर्ट का आदेश: डॉक्टर शकुन ने स्पष्ट किया है कि डीएनए टेस्ट कोर्ट के ऑर्डर से ही हो पाएगा। सैंपल: इस टेस्ट के लिए बेबी के ब्लड का सैंपल लिया जाता है। लेब्रोटरी: डीएनए टेस्ट के लिए विशेष लेब्रोटरी की आवश्यकता होती है। 4.3. बच्चे का अधिकार और नैतिक दुविधा अधिकार: डीएनए टेस्ट की मांग न केवल मुस्कान के कानूनी अधिकारों, बल्कि सबसे बढ़कर, नवजात शिशु की निजता और पहचान के अधिकार को भी प्रभावित करती है। नैतिकता: एक मासूम बच्चे को, जिसने अभी दुनिया में कदम रखा है, अपनी पहचान साबित करने के लिए तुरंत कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यह न्यायिक प्रणाली और समाज के सामने एक बड़ी नैतिक दुविधा प्रस्तुत करता है। 5. 💔 निष्कर्ष: जेल और मातृत्व का विरोधाभास मुस्कान का मातृत्व, सौरभ राजपूत हत्याकांड के पूरे मामले की एक गहरी त्रासदी है। यह दिखाता है कि अपराध, सजा और कानूनी प्रक्रिया किस तरह से मानव जीवन, खासकर नवजात शिशु के जीवन पर अमिट छाप छोड़ते हैं। पछतावा: मुस्कान का फूट-फूटकर रोना, उनका अकेलापन और चुप्पी, यह स्पष्ट करता है कि वह अपने कृत्यों पर गहरा पछतावा कर रही होंगी, लेकिन कानून और समाज उन्हें तुरंत क्षमा करने को तैयार नहीं हैं। व्यवस्था की भूमिका: यह मामला न्यायिक और जेल व्यवस्था को भी मजबूर करता है कि वे जेल में जन्में बच्चों के लिए किस तरह की देखभाल और वातावरण प्रदान करते हैं। डीएनए टेस्ट का फैसला: अब सभी की निगाहें कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह सौरभ के परिजनों की डीएनए टेस्ट की मांग को स्वीकार करता है। यह फैसला न केवल इस हाई-प्रोफाइल केस को नया मोड़ देगा, बल्कि यह नवजात शिशु के भविष्य और उसकी कानूनी पहचान को भी निर्धारित करेगा।
'दो घूंट पिला दे साकिया...': मेरठ के सोशल मीडिया स्टार शादाब जकाती की बढ़ी मुश्किलें, नाबालिग बेटी के साथ 'शराबी' एक्टिंग पर भड़के फैंस – POCSO और कंटेंट सेंसिटिविटी पर बड़ा विवाद मेरठ के सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर शादाब जकाती एक बार फिर से एक नए विवाद के केंद्र में हैं, जिसने उनके बढ़ते फॉलोअर्स बेस और गिरती साख के बीच एक गहरा विरोधाभास पैदा कर दिया है। हाल ही में, शादाब ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वे प्रसिद्ध कव्वाली ‘दो घूंट पिला दे साकिया...’ पर शराबियों की तरह एक्टिंग और डांस करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिन पहले उन्हें एक अन्य आपत्तिजनक वीडियो के लिए गिरफ्तार किया गया था, जिसमें वह अपनी बेटी और पत्नी के साथ थे और उस पर एफआईआर दर्ज हुई थी। शादाब जकाती, जिन्होंने '10 वाला बिस्कुट का पैकेट कितने का है जी...' जैसे वीडियो से ग्लोबल पहचान हासिल की और जिन्हें रैप सिंगर बादशाह तथा क्रिकेटर रिंकू सिंह जैसे सेलिब्रिटीज ने भी कॉपी किया, अब अपने ही फैंस के निशाने पर हैं। सोशल मीडिया पर लोग उनके इस नए वीडियो पर गंभीर आपत्ति जता रहे हैं, उन्हें 'दौलत के नशे में चूर' बता रहे हैं और नाबालिग बेटी से ऐसा कंटेंट न बनवाने की कड़ी नसीहत दे रहे हैं। यह विवाद कंटेंट क्रिएटर्स की संवेदनशीलता, वायरल होने की अंधी दौड़, और बच्चों को सोशल मीडिया कंटेंट में शामिल करने के नैतिक एवं कानूनी पहलुओं पर गंभीर बहस छेड़ता है। फैंस यहाँ तक कह रहे हैं कि शादाब को अपनी बेटी को 'महक-परी' (अश्लील वीडियो के लिए जेल जा चुकी संभल की दो बहनें) बनने की राह पर नहीं ले जाना चाहिए। यह विस्तृत आलेख शादाब जकाती के नए 'शराबी' वीडियो का विस्तृत विश्लेषण, पुराने विवादित वीडियो का विवरण जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी हुई, सोशल मीडिया पर फैंस की तीखी प्रतिक्रिया और अभद्र कमेंट्स, महक-परी विवाद का संदर्भ, कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने का कानूनी पक्ष, और भाजपा नेता राहुल ठाकुर के खिलाफ दर्ज हुई नई शिकायत 1. 🎤 'दो घूंट पिला दे साकिया...': नए वीडियो पर विवाद शादाब जकाती के इस नए वीडियो ने उनके पुराने विवादों पर बहस को और हवा दे दी है। 1.1. वीडियो में क्या है? अभिनय: वीडियो में शादाब जकाती अपनी बेटी और एक अन्य साथी के साथ बैठे हैं। सामने एक कटोरा रखा है, जो शराब के प्याले का प्रतीक है। गीत और एक्टिंग: तीनों लोग मिलकर 'दो घूंट पिला दे साकिया, बाकी मेरे पे रोड़ दे, पीना हो जिसकी जिंदगी, वो कैसा पीना छोड़ दे...' गीत पर एक्टिंग कर रहे हैं। बेटी की भूमिका: शादाब की नाबालिग बेटी आगे बैठकर इस गीत पर डांस करते और शराबियों जैसे एक्सप्रेशन देते दिख रही है। पीछे शादाब और उनके साथी तालियां बजा रहे हैं। शीर्षक: शादाब ने इस वीडियो का टाइटल भी अपनी बेटी के नाम पर दिया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि नाबालिग को मुख्य कलाकार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। 1.2. फैंस की नकारात्मक प्रतिक्रिया नशा और चकाचौंध: फैंस ने शादाब पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह "दौलत के नशे में चूर" हैं और "चकाचौंध की आंधी में अंधे हो गए हैं"। नैतिकता पर सवाल: लोगों ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि "कम से कम अपनी नाबालिग बेटी से तो ऐसा मत करवाओ।" यह सवाल उठाता है कि वायरल होने की चाहत में कंटेंट क्रिएटर्स अपनी नैतिक सीमाओं को कहाँ तक तोड़ रहे हैं। अभद्र कमेंट्स: लोग अब पहले जितना उन्हें नापसंद कर रहे हैं और कई लोग तो अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करने से भी नहीं चूक रहे हैं। 1.3. 'महक-परी' का डर संभल का संदर्भ: कुछ फैंस ने शादाब को आगाह करते हुए कहा कि "बेटी को महक-परी मत बनाओ।" महक-परी विवाद: महक और परी संभल की दो बहनें हैं, जो सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो पोस्ट करने के लिए जानी जाती थीं और जेल भी जा चुकी हैं। फैंस यह आशंका जता रहे हैं कि ऐसे 'शराबी' कंटेंट से शुरुआत कर शादाब अपनी बेटी को उसी दिशा में ले जा सकते हैं। 2. 🚨 पुराना विवाद और गिरफ्तारी शादाब जकाती की वर्तमान मुश्किलें उनके एक पुराने वीडियो से शुरू हुईं, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया और जमानत पर रिहा हुए। 2.1. विवादित वीडियो का विषय पात्र: वीडियो में शादाब जकाती, उनकी बेटी, उनकी पत्नी और एक अन्य महिला शामिल थीं। स्थान और संवाद: वीडियो एक परचून की दुकान पर फिल्माया गया था। शादाब बच्ची से अभद्र कमेंट करते हैं और उसकी माँ की सुंदरता पर टिप्पणी करते हैं, कहते हैं कि "जब ये इतनी खूबसूरत है तो इसकी मम्मी कितनी खूबसूरत होगी।" आपत्तिजनक मांग: शादाब फिर बच्ची के घर पहुँचते हैं और महिला (बच्ची की माँ) से कहते हैं कि बच्ची सामान लेकर आई थी, "अब तुम पैसे क्या दोगी? एक KISS ही दे दो।" परिवार का रोल: इस दौरान नाबालिग घर के अंदर से अपनी माँ (जो वीडियो में एक अन्य महिला होती है) के साथ बाहर आती है, और शादाब को अपना वास्तविक परिवार बताकर वह विवाद समाप्त होता है। 2.2. FIR और गिरफ्तारी शिकायत: भाजपा नेता राहुल ठाकुर की शिकायत पर शादाब जकाती के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ। गिरफ्तारी: 27 नवंबर को पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। कानूनी कार्रवाई की मांग: वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने शादाब पर कड़ी कार्रवाई और POCSO जैसी धाराएं लगाने की मांग की थी, क्योंकि संवाद में नाबालिग बच्ची और उसकी माँ को लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया था। 2.3. कोर्ट का फैसला और शादाब का दावा जमानत: शादाब के वकील सैय्यद मोहम्मद जामिर ने कोर्ट में दलील दी कि वीडियो उनकी बेटी और पत्नी के साथ बनाया गया था और इससे किसी को दिक्कत नहीं है। कोर्ट की टिप्पणी: कोर्ट ने शादाब को शांति भंग में चालान किए जाने पर जमानत दे दी और कहा कि "इससे शांति भंग नहीं हो रही है, इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है।" शादाब का आभार: जमानत मिलने पर शादाब ने लोगों के समर्थन का आभार जताते हुए कहा था कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है, लेकिन लोगों की नाराजगी के कारण उन्होंने वीडियो डिलीट कर दिया है। 3. 🌐 '10 वाला बिस्कुट' से 'शराबी एक्टिंग' तक: शादाब जकाती की प्रोफाइल शादाब जकाती का उदय सोशल मीडिया की अप्रत्याशित शक्ति को दर्शाता है, लेकिन उनका पतन कंटेट क्रिएशन की नैतिकता की कमी को भी उजागर करता है। 3.1. परिचय मूल निवास: शादाब जकाती, मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। शुरुआत: वह पहले सऊदी अरब में ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं और वहीं से उन्होंने वीडियो बनाना शुरू किया था। वायरल पहचान: उनका वीडियो '10 वाला बिस्कुट का पैकेट कितने का है जी...' जबरदस्त हिट हुआ। इसे अब तक करोड़ों लोग देख चुके हैं। सेलिब्रिटी फैनबेस: रैप सिंगर बादशाह, क्रिकेटर रिंकू सिंह और कुलदीप यादव समेत कई सेलिब्रिटीज ने इस ट्रेंड को कॉपी किया, जिससे उनकी लोकप्रियता ग्लोबल हो गई। 3.2. कंटेंट क्रिएशन की अंधी दौड़ एक तरफ शादाब की सादगी और क्षेत्रीय लहजे ने उन्हें स्टार बनाया, लेकिन जैसे-जैसे उनकी प्रसिद्धि बढ़ी, उनके कंटेंट की संवेदनशीलता कम होती गई। विवादित कंटेंट: प्रसिद्धि को भुनाने के लिए उन्होंने ऐसे स्क्रिप्टेड वीडियो बनाने शुरू किए जिनमें अभद्र संवाद और आपत्तिजनक विषय-वस्तु का इस्तेमाल हुआ, जिसका ताजा उदाहरण नाबालिग बेटी के साथ 'शराबी' एक्टिंग और पुराने वीडियो में 'KISS' मांगने वाला संवाद है। दौलत का नशा: फैंस के आरोप कि वह दौलत की आंधी में अंधे हो गए हैं, उनकी कंटेंट पसंद को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। 4. ⚖️ नया कानूनी मोड़: राहुल ठाकुर के खिलाफ शिकायत शादाब जकाती विवाद ने एक नया मोड़ तब लिया, जब शादाब के खिलाफ शिकायत करने वाले भाजपा नेता राहुल ठाकुर भी कानूनी शिकंजे में आ गए। 4.1. राहुल ठाकुर पर आरोप शिकायतकर्ता: भाजपा नेता राहुल ठाकुर के खिलाफ मेरठ के मवाना कलां के बिलाल मंसूरी ने शिकायत दर्ज कराई है। आरोप: बिलाल का आरोप है कि शादाब जकाती प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल ठाकुर ने दिव्यांगजनों के प्रति अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी की है। मानहानि: बिलाल के अनुसार, राहुल ठाकुर की टिप्पणी करोड़ों दिव्यांगों की गरिमा को ठेस पहुंचाती है और समाज में भेदभाव को बढ़ावा देती है, जो मानवाधिकारों तथा संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। 4.2. मांग बिलाल मंसूरी ने राहुल ठाकुर के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते समय भाषा की संवेदनशीलता कितनी महत्वपूर्ण है। 5. 💡 निष्कर्ष: कंटेंट क्रिएशन की नैतिकता और जिम्मेदारी शादाब जकाती का मामला सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर्स के लिए नैतिकता और जिम्मेदारी की एक बड़ी परीक्षा है। नाबालिगों का उपयोग: नाबालिग बेटी को 'शराबी' की एक्टिंग या अभद्र संवाद में शामिल करना न केवल अनैतिक है, बल्कि बाल कल्याण और POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) जैसे कानूनों के तहत भी इसकी जाँच होनी चाहिए। भले ही कोर्ट ने जमानत दी हो, लेकिन कंटेंट की प्रकृति पर कानूनी बहस अभी खत्म नहीं हुई है। फेम की कीमत: शादाब का यह हाल उन सभी कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक सबक है जो वायरल होने की अंधी दौड़ में अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को भूल जाते हैं। दौलत और प्रसिद्धि की चाह में बनाए गए असंवेदनशील कंटेंट का खामियाजा अंततः उनकी साख को भुगतना पड़ता है। सामाजिक संदेश: समाज, खासकर फैंस, ने स्पष्ट कर दिया है कि वे प्रसिद्धि के नाम पर अश्लीलता, अभद्रता या बच्चों के शोषण को स्वीकार नहीं करेंगे।
'किस दे दो' कंटेंट विवाद: सोशल मीडिया स्टार शादाब जकाती गिरफ्तार, डेढ़ घंटे में मिली जमानत; 'शांतिभंग' नहीं मानकर कोर्ट ने किया रिहा मेरठ के पॉपुलर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर शादाब जकाती गुरुवार को अपने एक वीडियो कंटेंट को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए। हालांकि, यह गिरफ्तारी महज डेढ़ घंटे ही चली, क्योंकि उन्हें तत्काल एसडीएम सदर की कोर्ट से जमानत मिल गई। बीजेपी नेता राहुल ठाकुर ने शादाब के 1.08 मिनट के वीडियो पर आपत्ति जताते हुए उन पर नाबालिग बच्चियों और महिलाओं से अश्लील बातें करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जकाती के खिलाफ शांतिभंग की धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटरों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक रूप से अपलोड किए जाने वाले कंटेंट की नैतिकता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहाँ शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर अश्लीलता और समाज में गलत संदेश देने वाला बताया, वहीं कोर्ट ने शांतिभंग न मानते हुए उन्हें रिहा कर दिया। इस विस्तृत आलेख में शादाब जकाती की गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम, विवादास्पद वीडियो की सामग्री, बीजेपी नेता राहुल ठाकुर की शिकायत और कानूनी कार्रवाई, सोशल मीडिया पर उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया, और जकाती के वकील का कोर्ट में दिया गया तर्क, साथ ही जकाती के पूर्व हिट वीडियो कंटेंट की पृष्ठभूमि का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। 1. 🚨 कंटेंट विवाद से गिरफ्तारी: घटनाक्रम शादाब जकाती की गिरफ्तारी उनके एक वायरल वीडियो पर बीजेपी नेता राहुल ठाकुर की आपत्ति के बाद हुई। 1.1. विवादित वीडियो कंटेंट वीडियो की अवधि और विषय: हाल ही में शादाब जकाती ने 1.08 मिनट का एक वीडियो कंटेंट बनाकर अपने सोशल मीडिया पेज पर अपलोड किया था। सामग्री: वीडियो में शादाब एक परचून की दुकान पर बैठे हैं। एक बच्ची सामान लेने आती है। विवादास्पद संवाद: जकाती बच्ची से उसकी माँ की सुंदरता पर कमेंट करते हुए कहते हैं कि "जब ये इतनी खूबसूरत है तो इसकी मम्मी कितनी खूबसूरत होगी।" अश्लील डिमांड: इसके बाद जकाती बच्ची के घर पहुंचते हैं। आवाज देने पर एक महिला दरवाजा खोलती है। जकाती महिला से कहते हैं कि तुम्हारी बच्ची सामान लेकर आई थी, अब तुम पैसे क्या दोगी? "एक KISS ही दे दो।" इसी बीच, एक दूसरी महिला घर से बाहर आती है, जिसे बच्ची अपनी माँ बताती है। 1.2. बीजेपी नेता की शिकायत आपत्ति: जाग्रति विहार कॉलोनी निवासी बीजेपी नेता राहुल ठाकुर ने इस वीडियो को अश्लील बताया और नाबालिग बच्चियों और महिलाओं से आपत्तिजनक बातें करने का आरोप लगाया। फोन पर बातचीत: राहुल ठाकुर ने शादाब जकाती से फोन पर बात की और वीडियो पर आपत्ति जताते हुए उसे हटाने की बात कही। शिकायत: वीडियो न हटाने पर राहुल ठाकुर ने इंचौली थाने में शिकायत दर्ज कराई। साथ ही, उन्होंने बाल आयोग और महिला आयोग को भी शिकायत भेजी। 1.3. गिरफ्तारी और ज़मानत गिरफ्तारी: पुलिस ने गुरुवार की शाम करीब 4 बजे शांतिभंग में केस दर्ज कर जकाती को उनके घर से अरेस्ट कर लिया। कोर्ट में पेशी: शाम करीब 5:30 बजे उन्हें एसडीएम सदर दीक्षा जोशी की कोर्ट में पेश किया गया। रिहाई: कोर्ट में सुनवाई के बाद शादाब जकाती को ज़मानत मिल गई और वे डेढ़ घंटे बाद ही रिहा हो गए। 2. 🗣️ शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच संवाद बीजेपी नेता राहुल ठाकुर और शादाब जकाती के बीच हुई बातचीत की ऑडियो भी सामने आई थी, जिसमें दोनों के दृष्टिकोण में बड़ा अंतर दिखा। 2.1. राहुल ठाकुर का सवाल राहुल ठाकुर ने शादाब से कहा: सामाजिक संदेश: "किसी भी समाज की बच्ची हो, किसी भी धर्म की हो, लेकिन उसके साथ ये सब बातें करना बहुत गलत है। आप क्यों ऐसी चीजें डाल रहे हैं? समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं?" कानूनी धमकी: "अगर वीडियो नहीं हटा तो मैं पुलिस में शिकायत करूंगा। मैं कोर्ट भी जाऊंगा और मुकदमा भी करूंगा।" सार्वजनिक कंटेंट: "ये परिवार के मेंबर वाली बात नहीं है, सार्वजनिक रूप से आपने ये वीडियो डाली है।" 2.2. शादाब जकाती का बचाव राहुल के सवालों पर शादाब ने अपनी सफाई दी: पारिवारिक सदस्य: शादाब ने दावा किया कि वीडियो में दिख रही बच्ची "मेरे परिवार की सदस्य है" और वह उसका ध्यान रखेंगे। सामान्य कंटेंट: "मैंने तो आज तक सारी वीडियो अच्छी डाली हैं। इसमें भी ऐसा कुछ नहीं है। मैंने तो एक कंटेंट बनाया है।" वीडियो डिलीट: ज़मानत पर रिहा होने के बाद शादाब जकाती ने कहा कि मैंने यह वीडियो डिलीट भी कर दी है। 3. ⚖️ कोर्ट की दलील और फैसला: 'शांति भंग नहीं' कोर्ट में शादाब जकाती के वकील ने महत्वपूर्ण दलीलें पेश कीं, जिन्हें कोर्ट ने स्वीकार किया। 3.1. वकील की दलीलें वकील: शादाब जकाती के वकील सैय्यद मोहम्मद जामिर ने कोर्ट में जकाती का पक्ष रखा। पारिवारिक प्रमाण: वकील ने दलील दी कि जिस बच्ची के साथ शादाब ने वीडियो बनाया है, वह उनकी बेटी है, और महिला उनकी पत्नी है। कानूनी आधार का अभाव: वकील ने कहा, "मैंने वीडियो देखा, इसमें कोई शांतिभंग करने जैसा नहीं था।" 3.2. कोर्ट का फैसला निर्णय: कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद जकाती को जमानत दे दी। कोर्ट की टिप्पणी: वकील ने बताया कि कोर्ट ने कहा कि इस वीडियो से शांति भंग नहीं हो रही है, इसमें ऐसा कुछ भी नहीं है। कोर्ट ने उनकी बात को समझा और माना। जमानत: जकाती को शांतिभंग के तहत दर्ज मामले में जमानत मिल गई। 4. 🌐 सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया और जिम्मेदारी वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो ध्रुवों में बंट गए थे। 4.1. यूजर्स की आपत्ति ट्रोलिंग और कार्रवाई की मांग: वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स शादाब के खिलाफ उतर आए और उन पर कार्रवाई की मांग की। गंभीर धाराओं की मांग: कई यूजर्स ने इसे गंभीर मामला बताते हुए POCSO जैसी धाराएं लगाने की मांग की, क्योंकि संवाद में एक नाबालिग बच्ची शामिल थी। जिम्मेदारी: कुछ लोगों ने कहा कि वायरल स्टार्स को कंटेंट बनाते समय जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। 4.2. जकाती की प्रतिक्रिया ज़मानत पर रिहा होने के बाद शादाब जकाती ने कहा: माफी: "अगर किसी को मेरी उस वीडियो से परेशानी हुई है, उनका दिल दुखा है तो मैं उसके लिए सॉरी बोलते हैं।" सद्भाव: "मेरी सभी लोगों के लिए दुआएं हैं। जिन्होंने मेरी शिकायत की है, मैं उनको भी दुआएं देता हूं।" 5. 🎤 शादाब जकाती की पृष्ठभूमि शादाब जकाती एक लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर हैं जिनकी शुरुआत विनम्र पृष्ठभूमि से हुई थी। 5.1. करियर और शौक निवास: शादाब जकाती मेरठ के इंचौली थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। पूर्व पेशा: वे पहले सऊदी अरब में ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं और वहीं से उन्होंने वीडियो बनाने की शुरुआत की थी। पहचान: अब वे सोशल मीडिया पर एक बड़ी पहचान बन चुके हैं और क्रिकेट के शौकीन हैं। 5.2. '10 वाला बिस्कुट' की सफलता वायरल कंटेंट: शादाब का एक वीडियो "10 वाला बिस्कुट का पैकेट कितने का है जी" हिट हो चुका है। सेलेब्रिटी फॉलोअर्स: इस वीडियो को अब तक करोड़ों लोग देख चुके हैं, और सिंगर बादशाह, क्रिकेटर रिंकू सिंह और कुलदीप यादव समेत तमाम सेलिब्रिटीज इस ट्रेंड को कॉपी कर चुके हैं। यह विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी और नैतिक बहस को जन्म देता है कि जब कंटेंट क्रिएटर पारिवारिक सदस्यों के साथ भी सार्वजनिक रूप से संवेदनशील संवाद वाले वीडियो बनाते हैं, तो उस कंटेंट की सीमाएँ क्या होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट ने शांतिभंग नहीं माना, लेकिन बाल आयोग और महिला आयोग की शिकायतें अभी भी लंबित हैं।
'राधा' का जन्म और नीले ड्रम हत्याकांड का सस्पेंस: अस्पताल से डिस्चार्ज हुई सौरभ की हत्यारोपी मुस्कान, DNA विवाद और माइंड गेम के आरोप मेरठ में पति सौरभ राजपूत की जघन्य हत्या की आरोपी मुस्कान रस्तोगी को अपनी नवजात बेटी के साथ मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज कर दिया गया है। 24 नवंबर को बेटी को जन्म देने के बाद, मुस्कान को वापस चौधरी चरण सिंह जिला जेल की क्वारैंटाइन बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है। उसने अपनी बेटी का नाम राधा रखा है, जो पहले से ही तय किए गए नामों (बेटा-कृष्ण, बेटी-राधा) के अनुसार है। यह घटनाक्रम नीले ड्रम हत्याकांड के कानूनी और भावनात्मक पहलुओं में एक नया मोड़ लाया है, जहां एक नवजात शिशु को जेल की सलाखों के पीछे अपनी जिंदगी शुरू करनी पड़ी है। हालांकि, इस जन्म ने मुस्कान की जमानत की उम्मीदों को हवा दी है, वहीं सौरभ का परिवार और उनके वकील इस बात पर अड़े हैं कि बच्चे के जन्म से जमानत का कोई आधार मजबूत नहीं होता। सबसे बड़ा विवाद और आक्रोश सौरभ के भाई राहुल उर्फ बबलू की तरफ से आया है, जिन्होंने मुस्कान पर हर कदम पर 'माइंड गेम' खेलने का आरोप लगाया है और उसके चरित्र पर अविश्वास व्यक्त किया है। यह विस्तृत आलेख मुस्कान और राधा के जेल में आगमन, चिकित्सा और जेल प्रशासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं, सौरभ-मुस्कान-साहिल की जटिल प्रेम कहानी, जघन्य हत्याकांड का विवरण, और इस हाई-प्रोफाइल मामले के कानूनी व भावनात्मक विवादों का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 👶 जेल में 'राधा' का आगमन: सुरक्षा और सुविधाएँ मुस्कान रस्तोगी को बेटी को जन्म देने के दो दिन बाद मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज किया गया और सीधे जिला जेल लाया गया। 1.1. जेल में विशेष व्यवस्था क्वारैंटाइन बैरक: मुस्कान और नवजात राधा को चौधरी चरण सिंह जिला जेल की एक विशेष क्वारैंटाइन बैरक में रखा गया है। अलगाव: इस बैरक में मुस्कान और उसकी बेटी के अलावा कोई अन्य महिला बंदी नहीं है। इससे पहले मुस्कान 30 महिलाओं वाली कॉमन बैरक में रहती थी। स्वास्थ्य जांच: जिला जेल में मौजूद डॉक्टर ने माँ और बेटी का प्राथमिक स्वास्थ्य चेकअप किया। सब कुछ सही पाए जाने पर उन्हें बैरक में शिफ्ट किया गया। 1.2. माँ और बेटी का स्वास्थ्य अपडेट डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि मुस्कान और राधा दोनों स्वस्थ हैं: मुस्कान की सेहत: डॉ. शगुन ने बताया कि मुस्कान का वजन 70Kg है, और ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट रेट सब नॉर्मल थे। डॉ. अनुपमा ने बताया कि मुस्कान को एक सप्ताह की दवाएं (आयरन, कैल्शियम, मल्टी विटामिन) दी गई हैं। राधा की सेहत: नवजात बेटी राधा का वजन 2kg और 500 ग्राम है। वह पूरी तरह स्वस्थ है और मुस्कान उसे अपना दूध पिला रही है। डाइट चार्ट: जेल प्रशासन अब मुस्कान को सादा और पौष्टिक भोजन दे रहा है, जिसमें दाल, दूध, दलिया, रोटी, हरी सब्जी और एक फल शामिल है। 1.3. जेल मैनुअल के तहत सुविधाएँ वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि जेल मैनुअल के अनुसार सभी सुविधाएं दी जा रही हैं: साफ-सफाई: बैरक में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। काम से छूट: मुस्कान से एक महीने तक कोई काम नहीं कराया जाएगा, ताकि वह बच्ची का ख्याल रख सके। एक महीने बाद हल्का काम कराया जाएगा। बच्चे की सुविधा: बच्ची को बच्चों के खेलने के लिए क्रैच की सुविधा मिलेगी और उसका आंगनबाड़ी में रजिस्ट्रेशन कराया जाएगा। 2. 💔 सौरभ के परिवार का आक्रोश: 'माइंड गेम' और DNA विवाद मुस्कान की नवजात बेटी के जन्म ने सौरभ के परिवार के आक्रोश को और बढ़ा दिया है। 2.1. किसी ने नहीं की मुलाकात परिवार ने मोड़ा मुंह: मेडिकल कॉलेज के बाद जेल में भी मुस्कान या उसकी बेटी से मुलाकात करने के लिए कोई नहीं आया। मुस्कान का परिवार: मुस्कान के पिता प्रमोद रस्तोगी और माँ कविता, जो उसकी पहली बेटी पीहू को पाल रहे हैं, वह भी दूसरी बेटी राधा के हाल जानने जेल नहीं पहुंचे। सौरभ का परिवार: सौरभ के परिवार ने भी इस बच्चे को देखने से मुंह मोड़ लिया है। 2.2. 'कैरेक्टर पर भरोसा नहीं' सौरभ के बड़े भाई राहुल उर्फ बबलू ने मुस्कान के चरित्र और मंशा पर गंभीर आरोप लगाए हैं: माइंड गेम: राहुल ने कहा कि मुस्कान ने जो कुछ किया, उसके बाद उसके कैरेक्टर पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। राहुल के अनुसार, मुस्कान ने हर स्टेप पर माइंड गेम खेला है। सजा दिलाना: सौरभ का परिवार स्पष्ट है कि वे अपने भाई की मौत के जिम्मेदारों को सजा दिलाना चाहते हैं। राहुल के आरोपों से स्पष्ट होता है कि सौरभ का परिवार इस बच्चे को सौरभ की संतान के रूप में स्वीकार करने को तैयार नहीं है, जिसके चलते DNA टेस्ट की मांग भविष्य में उठ सकती है। 3. ⚖️ जमानत का कानूनी विवाद: 'बच्चे के आधार पर ग्राउंड नहीं' नवजात बेटी के जन्म के बाद मुस्कान की जमानत को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। 3.1. सौरभ के वकील का पक्ष सौरभ राजपूत का केस लड़ रहे वकील विजय बहादुर सिंह ने जमानत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया: जमानत नहीं: वकील ने स्पष्ट किया कि बच्चे के जन्म के बाद मुस्कान की जमानत का ग्राउंड मजबूत नहीं हुआ है। नियम: जेल में बच्चे को मां के साथ रखने और आवश्यक सुविधाएं देने का नियम है, इसलिए बच्चे के पालन-पोषण के आधार पर जमानत का कोई ग्राउंड नहीं बनता। अपील: मुस्कान और साहिल की जमानत को कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। 3.2. मुस्कान की वकील का पक्ष मुस्कान की वकील रेखा जैन ने भी जमानत के संबंध में कोई तत्काल कदम उठाने से इनकार किया: कोई संपर्क नहीं: वकील ने बताया कि मुस्कान की तरफ से अभी उनसे कोई बात नहीं की गई है। कोई आवेदन नहीं: अभी मुस्कान-साहिल की बेल को लेकर कोई अप्लीकेशन दोबारा से अप्लाई नहीं की गई है। 3.3. ट्रायल की स्थिति ट्रायल जारी: केस जिला जज की कोर्ट में ट्रायल पर चल रहा है। गवाही: एसएसआई कर्मवीर सिंह की गवाही महत्वपूर्ण है, लेकिन वकीलों की हड़ताल के चलते गवाही नहीं हो सकी। अगली तारीख दो दिसंबर तय की गई है। 4. 🔪 नीले ड्रम हत्याकांड की पूरी कहानी यह हाई-प्रोफाइल मामला सौरभ राजपूत, मुस्कान और साहिल शुक्ला के जटिल और जघन्य अपराध की कहानी है। 4.1. लव मैरिज और विरोध (2016-2019) पहला प्यार: मर्चेंट नेवी में लंदन में पोस्टेड सौरभ राजपूत 2016 में मेरठ आए और यहीं मुस्कान रस्तोगी से मिले। मुस्कान सौरभ के प्रोफाइल पर फिदा हो गई। पारिवारिक विरोध: परिवार के खिलाफ जाकर सौरभ ने मुस्कान से लव मैरिज की, जिसके चलते परिजनों ने उन्हें प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया। पहला बच्चा: दोनों इंद्रानगर में किराए के मकान में 8 साल की बेटी पीहू के साथ रह रहे थे। 4.2. साहिल से दूसरा प्यार (2019-2022) ट्विस्ट: सौरभ साल के 8 से 10 महीने विदेश में रहता था। 2019 में मुस्कान की मुलाकात प्ले स्कूल के बाहर साहिल शुक्ला से हुई। अवैध संबंध: मुस्कान के अकेले रहने का फायदा साहिल ने उठाया। दोनों के शारीरिक संबंध बने। मुस्कान बाकी वक्त साहिल के साथ गुजारती थी। दबाव: 2022 तक साहिल मुस्कान पर शादी करने और सौरभ को तलाक देने का दबाव बनाने लगा। 4.3. हत्या की खौफनाक रात (4 मार्च, 2025) जन्मदिन: 25 फरवरी, 2025 को मुस्कान का जन्मदिन था, जिसके लिए सौरभ एक दिन पहले 24 फरवरी को मेरठ आया था। षड्यंत्र: साहिल के दबाव के चलते 4 मार्च को सौरभ को रास्ते से हटाने का तय हुआ। डिनर में दवा: मुस्कान ने पीहू को बगल के कमरे में सुला दिया और डिनर में नशे की दवा मिला दी। सौरभ जल्दी सो गया। चाकू और टुकड़े: मुस्कान ने साहिल को बुलाया। साहिल के आने के बाद मुस्कान ने सौरभ के सीने में चाकू घोंप दिया। सौरभ की मौत के बाद दोनों ने मिलकर लाश को बाथरूम में ले जाकर 4 टुकड़े किए। नीला ड्रम: लाश के टुकड़ों को छिपाने के लिए बाजार से पानी भरने वाला एक बड़ा प्लास्टिक का ड्रम लाया गया। लाश के टुकड़े इसी ड्रम में भर दिए गए। 4.4. सबूत मिटाना और गिरफ्तारी सीमेंट: बदबू न आए इसलिए लाश के ऊपर पानी डाला और सीमेंट भर दी। रातभर साथ: मुस्कान और साहिल रातभर उसी लॉबी में रहे जहां लाश वाला ड्रम था। फरारी और वापसी: 5 मार्च को मुस्कान पीहू को माँ के घर छोड़कर साहिल के साथ शिमला-मनाली घूमने चली गई। मुस्कान वहां से सौरभ का वॉट्सऐप चलाती रही। शादी: साहिल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने शिमला के एक मंदिर में शादी की। पैसे खत्म: सौरभ के 6 लाख रुपए निकालने में असमर्थ होने और पैसे खत्म होने पर 17 मार्च को मुस्कान साहिल के साथ मेरठ वापस लौट आई, जिसके बाद पूरा मामला खुल गया और दोनों को गिरफ्तार किया गया। इस जघन्य हत्याकांड में अब नवजात राधा का जन्म एक नया भावनात्मक मोड़ लाया है, लेकिन कानून और सौरभ के परिवार का रुख स्पष्ट है: अपराध की सजा मिलेगी और बच्चे के कारण उसमें कोई रियायत नहीं होगी।
'राधा' का जन्म और 'ब्लू ड्रम मर्डर' का DNA विवाद: मुस्कान जेल में, सौरभ का परिवार सदमे में – 'यह माइंड गेम है, बच्ची को खतरा है' मेरठ के बहुचर्चित 'नीले ड्रम हत्याकांड' की मुख्य आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने 24 नवंबर को एक बेटी को जन्म दिया, और आज 26 नवंबर को उसे मेरठ मेडिकल अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बच्ची के साथ मुस्कान को कड़ी सुरक्षा के बीच जिला जेल लाया गया है। मुस्कान और उसकी नवजात बेटी, जिसका नाम उसने राधा रखा है, अब जेल के भीतर ही अपने नए जीवन की शुरुआत करेंगी। यह बच्ची ठीक उसी दिन पैदा हुई, जिस दिन मुस्कान ने जिस पति, मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या की थी, उसका जन्मदिन होता है। इस नाटकीय मोड़ ने न केवल सौरभ के परिवार के घावों को कुरेद दिया है, बल्कि कानूनी और नैतिक सवालों का एक नया बवंडर खड़ा कर दिया है। सौरभ के परिवार को संदेह है कि यह बच्चा मृत पति सौरभ का नहीं, बल्कि हत्या में सह-आरोपी और मुस्कान के बॉयफ्रेंड साहिल का है। सौरभ के बड़े भाई राहुल राजपूत ने इसे मुस्कान का 'माइंड गेम' बताया है और DNA टेस्ट की अनिवार्य मांग की है। इससे भी बढ़कर, उन्होंने बच्ची की सुरक्षा पर गंभीर संदेह जताते हुए आशंका जताई है कि मुस्कान जेल के भीतर भी उस बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। यह विस्तृत आलेख मुस्कान की डिलीवरी के बाद के घटनाक्रम, सौरभ के परिवार के आक्रोश, जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं, और इस हाई-प्रोफाइल मामले के पीछे की जटिल प्रेम कहानी और निर्मम हत्या के पूरे घटनाक्रम का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 🏥 अस्पताल से जेल तक: राधा का नया घर मुस्कान रस्तोगी ने 24 नवंबर की शाम मेरठ मेडिकल अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी से बेटी को जन्म दिया था। आज, 26 नवंबर को, 10 डॉक्टरों की टीम द्वारा उसे डिस्चार्ज करने की अनुमति मिलने के बाद, मुस्कान को बच्ची के साथ मेरठ जिला जेल लाया गया है। 1.1. जेल में पहला पड़ाव हेल्थ चेकअप: जेल में पहुँचते ही सबसे पहले जेल के डॉक्टरों ने मुस्कान और बच्ची का हेल्थ चेकअप किया और उनकी सारी मेडिकल डिटेल्स की जाँच की गई, जिसके बाद उन्हें जेल में दाखिल किया गया। मुस्कान का हाल: अस्पताल सूत्रों के अनुसार, डिस्चार्ज होने तक मुस्कान बेटी को गोद में लेकर खिलाती रही। हालांकि, उसकी निगाहें किसी अपने को ढूंढ रही थीं, लेकिन उसके परिवार या ससुराल पक्ष से कोई भी उससे मिलने नहीं पहुंचा। राधा नामकरण: मुस्कान ने अपनी बेटी का नाम राधा रखा है। 1.2. सौरभ के घर पर सन्नाटा जिस दिन राधा का जन्म हुआ, अगर सौरभ की हत्या नहीं हुई होती तो वह आज 31 साल का होता। लेकिन सौरभ के घर, ब्रह्मपुरी में, सन्नाटा पसरा हुआ है। परिवार का दर्द: घर के अंदर सौरभ के बड़े भाई राहुल उर्फ बबलू और उनकी माँ रेनू राजपूत मौजूद थीं। कोई रिश्तेदार घर नहीं पहुंचा था, न ही आसपास के लोगों का कोई जमावड़ा था। पहली बेटी पीहू: मुस्कान की पहली बेटी पीहू इस समय अपने नाना-नानी के घर पर है, जिससे उसका परिवार कोई संपर्क नहीं कर पाया है। 2. 😡 सौरभ के भाई का आक्रोश: 'यह माइंड गेम है' सौरभ के बड़े भाई राहुल राजपूत ने बच्ची के जन्म की खबर पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे मुस्कान की एक गहरी साजिश बताया है। 2.1. DNA टेस्ट की अनिवार्य मांग संदेह: राहुल ने स्पष्ट कहा, "बेटा हो या बेटी…हमें कोई मतलब नहीं। हम तो ये चाहते थे कि सौरभ का बेबी है, तो वो हमें दिया जाए। इसीलिए बच्चे की DNA जांच कराना जरूरी हो जाता है।" शर्त: उन्होंने दोहराया कि "अगर बच्चा सौरभ का है, तो हम उसे अपनाएंगे। अगर बेटा होता तो मुस्कान कहती कि सौरभ ही वापस आ गया और वो हम ले लेते। सौरभ के बर्थडे के दिन ही उसने बच्चा कराया।" कठोर रुख: "अगर बच्चा सौरभ का है, तो हम नहीं चाहते वो उसके पास जरा भी रहे।" 2.2. जानबूझकर डिलीवरी का आरोप राहुल ने 24 नवंबर को डिलीवरी होने को 'माइंड गेम' बताया है: साजिश: राहुल ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने डिलीवरी की डेट 28 नवंबर दी थी, लेकिन मुस्कान ने जानबूझकर 24 नवंबर को डिलीवरी कराई। उद्देश्य: "जिससे अगर बेटा हो जाए, तो लोगों को लगे कि सौरभ वापस आ गया है। पब्लिक की सहानुभूति मिलेगी।" विफलता: राहुल ने कहा कि "भगवान नहीं चाहता कि मुस्कान सफल हो," इसलिए उसे बेटी हुई। 2.3. बच्ची की सुरक्षा पर गंभीर खतरा राहुल ने बच्ची के जेल में सुरक्षित रहने पर भी गंभीर संदेह जताया है: हत्या की आशंका: "मुस्कान बहुत तेज दिमाग की है। वो किसी भी तरह से उस बच्ची को मार सकती है। उसे कोई भी एक्सीडेंट बता देगी। कोई समझ नहीं पाएगा कि ये बच्चा कैसे मरा? मुस्कान उसकी हत्या कर देगी।" दबाव: सौरभ का परिवार शुरू से ही इस बच्चे के डीएनए टेस्ट की मांग कर रहा है। 3. 💔 माँ रेनू का दर्द और पीहू के लिए चिंता सौरभ की माँ रेनू राजपूत ने भी डीएनए टेस्ट की मांग का समर्थन करते हुए मुस्कान की साजिशों पर बात की। 3.1. 'बच्ची सौरभ की नहीं हो सकती' अविश्वास: माँ रेनू ने साफ कहा, "ये बच्ची हमारे बेटे सौरभ की तो हो ही नहीं सकती। फिर भी हमारी एडमिनिस्ट्रेशन से मांग है कि इस बच्ची का DNA टेस्ट कराया जाए।" मुंह भी नहीं देखेंगे: "अगर वो सौरभ की निकली, तो हम उसे रखेंगे। अगर ऐसा नहीं है, तो उसका मुंह भी नहीं देखेंगे।" साजिश का पर्दाफाश: उन्होंने भी 28 नवंबर की जगह 4 दिन पहले डिलीवरी कराने को मुस्कान की बड़ी साजिश बताया, जिसका उद्देश्य उन पर दबाव बनाना था, लेकिन "अब वो हम लोगों पर दबाव नहीं बना पाएगी।" 3.2. पीहू की बर्बादी का डर राहुल ने मुस्कान की पहली बेटी पीहू की चिंता व्यक्त की, जो अपने नाना-नानी के घर है: कस्टडी की मांग: "हमने तो ये भी मांग की है कि पीहू को हमें सौंप दिया जाए। लेकिन, उसके नाना, नानी हमें पीहू को दे ही नहीं रहे।" भविष्य की चिंता: राहुल ने आरोप लगाया कि मुस्कान के माता-पिता पीहू की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं। "मेरा भाई सौरभ तो पीहू को लंदन में भेजकर पढ़ाना चाहता था। लेकिन, मुस्कान के माता-पिता तो उसे सरकारी स्कूल में भी नहीं पढ़ा पा रहे।" 4. ⚖️ जेल प्रशासन की व्यवस्था और साहिल की प्रतिक्रिया वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने मुस्कान और बच्ची की सुरक्षा व जेल मैनुअल के प्रावधानों पर जानकारी दी। 4.1. जेल मैनुअल और सुविधाएं 6 साल का प्रवास: जेल अधीक्षक ने बताया कि मुस्कान को यह बता दिया गया है कि 6 साल तक यह बच्ची जेल में माँ के पास रह सकती है। व्यवस्थाएं: चूंकि मुस्कान के परिजन या ससुराल पक्ष से कोई संपर्क नहीं हुआ, इसलिए बच्ची की दवाएं, कपड़े और जरूरी सामान की व्यवस्था जेल प्रशासन की ओर से ही की जा रही है। बच्चों की सुविधा: यूपी जेल मैनुअल के तहत जेल में बच्चों के खेलने के लिए क्रेच है। उन्हें स्वास्थ्य विभाग से फ्री टीकाकरण, पूरा इलाज और दवाएं मिलती हैं। उनका आंगनबाड़ी में रजिस्ट्रेशन होता है और उन्हें शिक्षामित्रों/टीचर के जरिए जेल में ही पढ़ाया जाता है। सुरक्षा: हॉस्पिटल से जेल आने के बाद भी मुस्कान को अलग रखा जाएगा। 4.2. साहिल की जिज्ञासा मुस्कान के बॉयफ्रेंड और हत्याकांड के सह-आरोपी साहिल ने बच्ची के बारे में जानने की कोशिश की थी: पूछताछ: जेल अधीक्षक ने पुष्टि की कि साहिल ने बैरक के वॉर्डन से मुस्कान का हालचाल और बच्ची के बारे में जानने का प्रयास किया था। वर्तमान स्थिति: साहिल जेल में बागवानी का काम कर रहा है और उसका व्यवहार सामान्य है। 5. 🔮 ज्योतिषी की भविष्यवाणी और केस की सुनवाई मुस्कान की डिलीवरी और बच्ची के भविष्य को लेकर ज्योतिषीय राय भी सामने आई है। 5.1. राधा नाम और भाग्य मेरठ के ज्योतिषाचार्य राहुल अग्रवाल ने राधा की कुंडली (धनु राशि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र) पर विश्लेषण किया: मुस्कान के लिए शुभ: ज्योतिषी ने कहा कि बच्ची की कुंडली माँ मुस्कान के लिए बहुत सूटेबल और शुभ है, क्योंकि बच्ची की राशि का चंद्रमा माँ के लिए अच्छा है। सरल डिलीवरी: उन्होंने कहा कि स्त्रीकारक ग्रहों का प्रभाव और चंद्रमा की अच्छी स्थिति के कारण ही मुस्कान की डिलीवरी बहुत आसानी से नॉर्मल हुई, जो जेल में गर्भावस्था बिताने के बाद अमूमन संभव नहीं होता। राधा नाम: नक्षत्र के हिसाब से नाम अक्षर 'ढा' निकलता है। मुस्कान द्वारा रखा गया नाम राधा (स्वामी शुक्र) बुध, शुक्र पंचम भाग में स्थित होने के कारण बेहद उपयुक्त है। 5.2. केस की सुनवाई 26 नवंबर को, जिस दिन मुस्कान डिस्चार्ज होकर जेल आई, सौरभ मर्डर केस में जिला जज के यहां 14वें गवाह की गवाही होनी है। यह गवाही केस के विवेचक (IO) की होगी। इस केस में साहिल और मुस्कान के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और अब ट्रायल चल रहा है। 6. 🔪 सौरभ-मुस्कान की दुखद लव स्टोरी और हत्या की कहानी मुस्कान की यह जघन्य अपराध गाथा 2016 में शुरू हुई थी, जब सौरभ पहली बार उससे मिला। 6.1. प्रेम से हत्या तक शादी और विरोध (2016): मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ कुमार राजपूत ने 2016 में परिवार के विरोध के बावजूद मुस्कान से लव मैरिज की थी। इसी कारण परिवार ने उन्हें प्रॉपर्टी से बेदखल कर दिया था। सौरभ, मुस्कान और उनकी पहली बेटी पीहू (जो पढ़ाई में 2 क्लास पीछे है) के साथ इंद्रानगर में किराए पर रहते थे। साहिल से मुलाकात (2019): सौरभ के विदेश में रहने का फायदा उठाकर, 2019 में मुस्कान की मुलाकात साहिल शुक्ला से हुई। साहिल ने मुस्कान पर सौरभ को तलाक देकर शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। निर्मम हत्या (3 मार्च 2025): 24 फरवरी को सौरभ के वापस आने के बाद साहिल परेशान रहने लगा। 4 मार्च को सौरभ को रास्ते से हटाने का प्लान बना। 3 मार्च की रात मुस्कान ने डिनर में नशे की दवा मिलाई। सौरभ के सोने के बाद, मुस्कान ने साहिल को बुलाया और सौरभ के सीने में चाकू घोंप दिया। शव ठिकाने लगाना: मौत के बाद लाश को बाथरूम में घसीटकर मुस्कान और साहिल ने मिलकर 4 टुकड़े किए। टुकड़ों को एक बड़े प्लास्टिक के ड्रम में भरा और उसमें पानी डालकर सीमेंट और बालू का घोल भर दिया। रातभर दोनों उसी लॉबी में लाश के साथ रहे। फरार: 5 मार्च को मुस्कान पीहू को अपनी माँ के घर छोड़कर, साहिल के साथ शिमला-मनाली घूमने चली गई। मुस्कान वहां से सौरभ के मोबाइल से वॉट्सऐप चलाती रही ताकि सबको लगे कि वे घूम रहे हैं। साहिल के मुताबिक, उन्होंने शिमला के एक मंदिर में शादी भी की। गिरफ्तारी: 17 मार्च को सौरभ के भाई राहुल ने घर आकर बदबू और मुस्कान को साहिल के साथ देखने के बाद पुलिस को बुलाया, जिसके बाद इस कत्ल का खुलासा हुआ। मुस्कान की बेटी राधा अब इस जघन्य अपराध की परछाई में जेल की दीवारों के बीच रहेगी, जब तक कि DNA टेस्ट से उसके पितृत्व का रहस्य नहीं सुलझ जाता।
नीले ड्रम हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने जेल में दिया बेटी को जन्म: DNA टेस्ट की मांग और अनसुलझा पितृत्व का सवाल उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए 'नीले ड्रम हत्याकांड' की आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने जेल में रहते हुए एक बच्ची को जन्म दिया है। यह केस, जिसमें मुस्कान पर अपने पति मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की निर्मम हत्या कर लाश को सीमेंट से भरे नीले ड्रम में दफनाने का आरोप है, पहले ही देश भर में सुर्खियां बटोर चुका है। बच्ची का जन्म 24 नवंबर की शाम 6.50 बजे नॉर्मल डिलीवरी से हुआ। यह घटना न केवल इस आपराधिक मामले में एक नया भावनात्मक और कानूनी मोड़ लेकर आई है, बल्कि इसने एक बड़ा और मार्मिक सवाल खड़ा कर दिया है: नवजात बच्ची का पिता कौन है—मृत पति सौरभ राजपूत या हत्या में सह-आरोपी बॉयफ्रेंड साहिल? यह विचित्र संयोग है कि बच्ची का जन्म 24 नवंबर को हुआ, जिस दिन मुस्कान ने जिस पति सौरभ की हत्या की थी, उसका जन्मदिन भी होता है। सौरभ के परिवार ने तुरंत बच्ची के DNA टेस्ट की मांग की है, ताकि उसकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। यह विस्तृत आलेख इस पूरे घटनाक्रम, बच्ची के जन्म के हालात, जेल प्रशासन की व्यवस्था, सुरक्षा चुनौतियों और इस हाई-प्रोफाइल मामले के कानूनी निहितार्थों का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। 1. 👶 विवाद के बीच बच्ची का जन्म और चौंकाने वाला संयोग मुस्कान रस्तोगी को पति सौरभ राजपूत की हत्या के जुर्म में 19 मार्च 2025 को उनके बॉयफ्रेंड साहिल के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय वह लगभग डेढ़ महीने की गर्भवती थी। 1.1. डिलीवरी का विवरण जन्म: 24 नवंबर की शाम 6.50 बजे। डिलीवरी: डॉक्टरों ने नॉर्मल डिलीवरी कराई। वजन: बच्ची का वजन ढाई किलो है। स्थान: मेरठ मेडिकल अस्पताल का गायनिक वार्ड। मेडिकल टीम: HOD डॉ. शगुन के नेतृत्व में 5 डॉक्टरों की टीम ने डिलीवरी कराई। नामकरण: मुस्कान ने बच्ची का नाम राधा रखा है। 1.2. 24 नवंबर का भयानक संयोग जन्म की तारीख 24 नवंबर का संयोग इस दुखद कहानी को और भी मार्मिक बना देता है। मुस्कान ने जिस पति सौरभ की हत्या की, उसका जन्मदिन भी 24 नवंबर को ही होता था। इस हत्यारी मां की बच्ची का जन्म उसी तारीख को होना, विधि के विधान पर सवाल खड़ा करता है। 1.3. मुस्कान का भावनात्मक पहलू जेल सुपरिंटेंडेंट डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान सुबह से बच्ची को गोद में लिए बैठी है और उसे लगातार दुलार कर रही है। मंगलवार सुबह डॉक्टर द्वारा बच्ची के स्वस्थ होने की जानकारी देने पर मुस्कान काफी खुश दिखी। यह मुस्कान की दूसरी बेटी है। उसकी बड़ी बेटी पीहू इस समय अपने नाना-नानी के साथ रहती है। 2. ❓ पितृत्व का अनसुलझा सवाल और DNA टेस्ट की मांग बच्ची के जन्म के साथ ही सबसे बड़ा कानूनी और नैतिक सवाल यह है कि इस नवजात का पिता कौन है। 2.1. सौरभ के भाई की शर्त मृत पति सौरभ के बड़े भाई राहुल ने इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाया है। DNA टेस्ट की मांग: राहुल ने कहा, "मुस्कान की बेटी का हम लोग DNA टेस्ट कराएंगे।" बच्ची को अपनाने की शर्त: उन्होंने स्पष्ट किया कि "अगर वह बच्ची सौरभ की है, तो उसको हम लोग अपनाएंगे। अन्यथा उन्हें उससे कोई मतलब नहीं होगा।" यह मांग कानूनी रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि सौरभ के परिवार की सहमति के बिना बच्ची को उनकी संपत्ति या कानूनी वारिस का दर्जा नहीं मिल पाएगा। 2.2. साहिल की जेल में जिज्ञासा इस बीच, सौरभ हत्याकांड में मुस्कान का सह-आरोपी और बॉयफ्रेंड साहिल भी जेल में बंद है। पूछताछ: साहिल ने मंगलवार सुबह जेल स्टाफ से पूछा कि "मुस्कान को क्या हुआ? उसको बेटा या बेटी क्या हुआ है?" जानकारी: जेल स्टाफ ने उसे बताया कि मुस्कान को बेटी हुई है और वह ठीक है। साहिल जेल में खेती का काम कर रहा है और उसके बाल भी कट चुके हैं। उससे मिलने केवल उसकी नानी और भाई ही आए थे। 2.3. मुस्कान के परिवार का बहिष्कार मुस्कान के परिवार ने इस पूरे मामले से दूरी बना ली है। जेल सुपरिंटेंडेंट ने बताया कि मुस्कान के परिजन न तो मेडिकल अस्पताल में आए हैं, न ही उनकी तरफ से आज तक जेल में हमसे कोई संपर्क किया गया है। यह स्पष्ट करता है कि मुस्कान का परिवार उससे कोई ताल्लुक नहीं रखना चाहता। 3. ⚖️ जेल मैनुअल और बच्ची का भविष्य उत्तर प्रदेश जेल मैनुअल के तहत मुस्कान और उसकी बच्ची के लिए विशेष प्रावधान हैं। 3.1. 6 साल तक जेल में रहने का प्रावधान जेल अधीक्षक की पुष्टि: वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि 6 साल तक यह बच्ची जेल में अपनी मां के पास रह सकती है, जैसे अन्य महिला बंदियों के बच्चे जेल में रह रहे हैं। व्यवस्थाएं: यूपी जेल मैनुअल में 6 साल तक के बच्चों के लिए विशेष प्रावधान हैं: स्वास्थ्य: स्वास्थ्य विभाग से नि:शुल्क टीकाकरण कराया जाता है। बच्चे को पूरा इलाज और दवाएं मिलती हैं। शिक्षा: बच्चे के खेलने की व्यवस्था है। आंगनवाड़ी में उसका रजिस्ट्रेशन होता है, और उसे शिक्षामित्र/टीचर के जरिए जेल में ही पढ़ाया जाता है। 3.2. जेल प्रशासन द्वारा देखभाल चूंकि मुस्कान के परिजन ने कोई संपर्क नहीं किया, इसलिए बच्ची की दवाएं, कपड़े और जो भी जरूरी सामान है, उसकी व्यवस्था जेल प्रशासन की ओर से ही की जा रही है। डॉक्टर बताएंगे कि कब मुस्कान को डिस्चार्ज करना है, जिसके बाद उसे पूरी सुरक्षा के बीच मेरठ जेल लाया जाएगा। 4. 🏥 अस्पताल में सुरक्षा और आम मरीजों की परेशानी मुस्कान को 23 नवंबर की रात अल्ट्रासाउंड के लिए मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। सुरक्षा कारणों से उसे विशेष निगरानी में रखा गया था। 4.1. कड़े सुरक्षा घेरे प्राइवेट वार्ड: लगभग 30 घंटे बाद लेबर रूम से वार्ड में शिफ्ट होने पर, सुरक्षा कारणों से मुस्कान को स्पेशली प्राइवेट वार्ड में एक रूम अलग से दिया गया है। सुरक्षा बल: मुस्कान की सुरक्षा में एक दरोगा, 4 पुलिसकर्मी, मेडिकल अस्पताल की सुरक्षा एजेंसी की ओर से 2 गनमैन और 2 गार्ड्स तैनात किए गए हैं। भीड़ नियंत्रण: मुस्कान को देखने और उसकी वीडियो शूट करने के लिए कई लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे थे, जिसके कारण महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की स्पेशल ड्यूटी लगाई गई थी। महिला वार्ड का गेट बंद कर दिया गया और गैलरी को बंद करके सुरक्षा बढ़ा दी गई। 4.2. आम मरीजों की परेशानी मुस्कान की अत्यधिक सुरक्षा और गोपनीयता के कारण अन्य मरीज और उनके परिजन परेशान हुए। परिजनों का आरोप: एक मरीज के परिजन लोकेश कुमार सैनी ने बताया कि जब से मुस्कान आई है, उन्हें बहुत मुश्किल हो रही है। बार-बार गेट बंद करने पड़ रहे हैं और उसे लाते ही पूरी गैलरी खाली करा दी जाती है। निष्कर्ष: मुस्कान के कारण अन्य मरीजों और उनके तीमारदारों को असुविधा हो रही थी। 5. 🔮 ज्योतिषी की भविष्यवाणी और कानूनी स्थिति बच्ची के जन्म के बाद, एक ज्योतिषी ने उसकी कुंडली बनाकर उसके भविष्य पर टिप्पणी की है। 5.1. बच्ची का भाग्य मेरठ के ज्योतिषी राहुल अग्रवाल ने बच्ची की कुंडली (जन्म: धनु राशि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र) के आधार पर भविष्यवाणी की: व्यक्तित्व: बच्ची आत्मविश्वासी, साहसिक और जीवन में विजय प्राप्त करेगी। भविष्य: वह कठिन हालातों से बाहर निकलेगी और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करेगी। करियर: उसका भविष्य संगीत, फैशन, पत्रकारिता और प्रशासनिक जैसे क्षेत्रों में सफल दिख रहा है। नाम: नक्षत्र के हिसाब से बच्ची का नाम 'ढ' अक्षर से निकलना चाहिए (जैसे- यशिका)। 5.2. केस की कानूनी स्थिति ट्रायल: सौरभ हत्याकांड का केस मेरठ जिला जज की कोर्ट में ट्रायल पर चल रहा है। गवाह: अब तक 13 लोगों की गवाही हो चुकी है। चार्जशीट: पुलिस चार्जशीट पहले ही दाखिल कर चुकी है। हत्याकांड की जांच में यह खुलासा हुआ था कि मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला उर्फ मोहित ने 3 मार्च की रात सौरभ को खाने में दवा मिलाकर बेहोश किया। फिर बेडरूम में सोते समय मुस्कान ने ही पति के सीने में पहला चाकू मारा। साहिल ने लाश को बाथरूम में ले जाकर तीन टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में सीमेंट और बालू के घोल से सील कर दिया था। 13 दिन तक मुस्कान शिमला-मनाली में इंस्टाग्राम पर वीडियो अपलोड करती रही, ताकि लोग गुमराह रहें। मुस्कान के जेल से बाहर आने और उसकी बेटी की डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही इस दुखद और जटिल कहानी का अगला अध्याय शुरू हो पाएगा। यह बच्ची, भले ही वह जेल में पैदा हुई हो, एक ऐसे हत्याकांड की सबसे मासूम और अनिश्चित गवाह बन गई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
'नीले ड्रम' हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी: जेल में प्रसव और DNA टेस्ट का विवाद मेरठ की एक सनसनीखेज आपराधिक घटना की आरोपी, मुस्कान रस्तोगी, जिसे 'नीले ड्रम वाली मुस्कान' के नाम से जाना जाता है, इस समय सुर्खियों में है। अपने पति सौरभ राजपूत की जघन्य हत्या के आरोप में मेरठ जिला जेल में बंद मुस्कान को नौ महीने की गर्भावस्था पूरी होने के कारण रविवार की रात अचानक तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। यह मामला न केवल एक आपराधिक मुकदमे के कारण चर्चा में है, बल्कि बच्चे के पितृत्व (Paternity) को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों और बच्चे के जन्म की तारीख के संयोग के कारण भी भावनात्मक और सामाजिक रूप से जटिल हो गया है। यह विस्तृत आलेख मुस्कान रस्तोगी के जेल में प्रसव, चिकित्सा विवरण, सुरक्षा व्यवस्था, पति के परिवार के डीएनए टेस्ट की मांग, और इस जघन्य हत्याकांड के पूरे घटनाक्रम का गहन विश्लेषण करता है। 1. जेल से गायनिक वार्ड तक: प्रसव की प्रक्रिया और चिकित्सा निगरानी मेरठ जेल में बंद मुस्कान रस्तोगी नौ महीने की गर्भवती है। रविवार की रात अचानक उनके पेट में तेज दर्द उठा, जिसके बाद जेल प्रशासन हरकत में आ गया। 1.1. जेल प्रशासन की त्वरित कार्यवाही वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि मुस्कान की प्रेग्नेंसी का समय पूरा हो चुका है। जेल के डॉक्टरों ने प्राथमिक चेकअप के बाद स्थिति की गंभीरता को समझते हुए, अल्ट्रासाउंड और आगे के इलाज के लिए उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मुस्कान को मेडिकल अस्पताल के गायनिक वार्ड में भर्ती कराया गया है। जेल अधीक्षक ने यह उम्मीद जताई कि सोमवार, 24 नवंबर को मुस्कान के बेबी हो जाएगा। 1.2. विशेषज्ञ डॉक्टर्स की निगरानी मुस्कान का इलाज गायनिक विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. शगुन की देखरेख में चल रहा है। डॉ. शगुन ने मीडिया को बताया कि मुस्कान की निगरानी के लिए एक बड़ी टीम तैनात है। चिकित्सा टीम: लगभग 10 डॉक्टर्स की टीम लगातार मुस्कान की निगरानी कर रही है, जिसमें पांच सीनियर डॉक्टर्स की टीम विशेष रूप से प्रसव प्रक्रिया पर ध्यान दे रही है। प्रसव का प्रयास: डॉ. शगुन ने बताया कि मुस्कान का पहला बेबी नॉर्मल हुआ था, इसलिए डॉक्टर्स का प्रयास है कि दूसरा बेबी भी नॉर्मल डिलीवरी से हो। बच्चे का स्वास्थ्य: अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के अनुसार, बेबी का वजन लगभग ढाई किलो है और वह स्वस्थ है। जटिलता (Complication): डॉक्टरों ने एक संभावित जटिलता की ओर इशारा किया है कि मुस्कान में फिलहाल फ्लूड (तरल पदार्थ) की कमी है, जिसके कारण डिलीवरी में थोड़ी मुश्किल या कॉम्प्लीकेशन आ सकता है। 2. तारीख का संयोग: पति के जन्मदिन पर बच्चे का जन्म इस मामले को जो बात अत्यधिक भावनात्मक और नाटकीय बनाती है, वह है बच्चे के जन्म की संभावित तारीख का संयोग। पति सौरभ का जन्मदिन: मुस्कान के पति सौरभ राजपूत, जिनकी हत्या के जुर्म में वह जेल में है, का जन्मदिन आज, 24 नवंबर को है। संभावित जन्म: मुस्कान को दर्द आ रहे हैं और डॉक्टरों का अनुमान है कि बच्चे का जन्म आज 8 से 8:30 बजे रात तक हो सकता है। हालांकि डॉक्टरों ने डिलीवरी की मूल तारीख 28 नवंबर दी थी, लेकिन यह 4 दिन पहले हो रही है। यदि आज, सौरभ राजपूत के जन्मदिन के दिन मुस्कान बच्चे को जन्म देती है, तो यह एक अजीब विडंबना होगी। जिस पति की हत्या के आरोप में पत्नी जेल में है, उसी के जन्मदिन पर बच्चे का जन्म होना इस क्रूर कहानी में एक भावनात्मक मोड़ लाता है। 3. डीएनए टेस्ट की मांग: पितृत्व का सवाल मुस्कान की गर्भावस्था का समय उनकी गिरफ्तारी के समय से ही विवादों में रहा है, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी के समय वह डेढ़ महीने की गर्भवती थी। यह सवाल कि बच्चे का पिता कौन है—स्वर्गीय पति सौरभ या बॉयफ्रेंड साहिल—इस केस का सबसे बड़ा भावनात्मक और कानूनी पेंच है। बड़े भाई राहुल का बयान: सौरभ के बड़े भाई राहुल ने साफ़ कर दिया है कि वे बच्चे को तभी स्वीकार करेंगे जब डीएनए टेस्ट से यह साबित हो जाए कि वह बच्चा सौरभ का है। राहुल ने कहा: "मुस्कान के होने वाले बच्चे का हम लोग DNA टेस्ट कराएंगे। अगर वह बच्चा सौरभ का होता है, तो उसको हम लोग अपनाएंगे।" परिवार का रुख: सौरभ के परिवार का रुख स्पष्ट है कि अगर बच्चा साहिल का निकला, तो उन्हें उस बच्चे से कोई मतलब नहीं होगा। यह दिखाता है कि परिवार न केवल हत्या से, बल्कि मुस्कान के कथित अवैध संबंधों से भी आहत है। 4. सुरक्षा और सामाजिक ड्रामा: आम मरीज परेशान मुस्कान का मामला इतना हाई-प्रोफाइल है कि उनके अस्पताल में भर्ती होते ही सुरक्षा व्यवस्था और सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। 4.1. सुरक्षा घेरा और भीड़ मुस्कान का नाम सुनते ही उन्हें देखने के लिए तमाम लोग मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। भीड़ उन्हें देखना और उनकी वीडियो शूट करना चाहती है। इस स्थिति को संभालने के लिए, अस्पताल में महिला और पुरुष पुलिसकर्मियों की स्पेशल ड्यूटी लगाई गई है। पुलिसकर्मी मुस्कान की देखरेख और सुरक्षा को संभालने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। 4.2. आम मरीजों की परेशानी मुस्कान की सुरक्षा और वीआईपी मूवमेंट के कारण अन्य मरीज और उनके तीमारदार परेशान हैं। एक मरीज के तीमारदार लोकेश कुमार सैनी ने बताया कि मुस्कान के आने के बाद से उन्हें बहुत मुश्किल हो रही है। सुरक्षा कारणों से बार-बार गेट बंद करने पड़ रहे हैं और जैसे ही मुस्कान को किसी जांच के लिए गैलरी से लाया जाता है, पूरी गैलरी खाली करा दी जाती है। इस कारण अन्य मरीजों को इलाज और आवाजाही में दिक्कत हो रही है। 5. कानूनी और जेल प्रक्रिया: बच्चे का भविष्य मुस्कान की तरफ से अस्पताल में कोई तीमारदार (Caregiver) नहीं पहुंचा है। उनकी देखरेख केवल जेल पुलिस और लोकल पुलिस कर रही है। सामान की व्यवस्था: बच्चे का सारा सामान (कपड़े आदि) जेल से ही आएगा। कानूनी प्रक्रिया: सबसे पहले जेल की तरफ से कोर्ट को सूचित किया जाएगा कि जेल में बंद महिला कैदी ने बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे का निवास: कोर्ट ऑर्डर करेगा, जिसके बाद बच्चा अपनी मां के साथ जेल में ही रहेगा। नियमानुसार, बच्चा आमतौर पर अपनी माँ के साथ छह साल की उम्र तक जेल में रह सकता है। 6. सौरभ हत्याकांड: जघन्य अपराध की कहानी मुस्कान का नाम 'नीले ड्रम वाली मुस्कान' इसलिए पड़ा क्योंकि उसने अपने पति सौरभ की हत्या के बाद उसकी लाश को नीले रंग के प्लास्टिक के ड्रम में भरा था। 6.1. हत्या का घटनाक्रम (3 मार्च 2025) पीड़ित: मर्चेंट नेवी में अफसर सौरभ कुमार राजपूत, जो लंदन से मेरठ लौटे थे। हत्या का दिन: 3 मार्च की रात को ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में। आरोपी: पत्नी मुस्कान रस्तोगी और बॉयफ्रेंड साहिल शुक्ला उर्फ मोहित। हत्या का तरीका: पहले सौरभ को खाने में दवा मिलाकर बेहोश किया गया। बेडरूम में सोते समय मुस्कान ने ही पहला चाकू पति के सीने में मारा। मौत के बाद लाश को बाथरूम में ले जाया गया, जहाँ साहिल ने दोनों हाथ और सिर काटकर धड़ से अलग किया। बॉडी को ठिकाने लगाने के लिए प्लास्टिक के नीले ड्रम में टुकड़े डाले और फिर उसमें सीमेंट और बालू का घोल भर दिया गया। 6.2. गुमराह करने की कोशिश और खुलासा हत्या के बाद, मुस्कान और साहिल शिमला-मनाली चले गए। मुस्कान ने 13 दिन तक इंस्टाग्राम पर वीडियो-फोटो अपलोड करती रही, ताकि लोग यही समझते रहें कि वे दोनों घूम रहे हैं। कत्ल से पर्दा तब हटा, जब 18 मार्च को सौरभ का छोटा भाई राहुल ब्रह्मपुरी के इंदिरा सेकंड स्थित भाई के घर पहुंचा और मुस्कान को साहिल के साथ घूमते देखा। घर से बदबू आने और मुस्कान द्वारा सही जवाब न देने पर, राहुल ने पुलिस को बुलाया। पुलिस कस्टडी में मुस्कान और साहिल ने कत्ल की पूरी कहानी सुनाई। 7. न्यायिक स्थिति और आरोपी साहिल ट्रायल: सौरभ हत्याकांड का केस मेरठ जिला जज की कोर्ट में ट्रायल पर चल रहा है। गवाही: पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और अब तक 13 गवाहों की गवाही हो चुकी है। साहिल की स्थिति: सौरभ हत्याकांड का आरोपी और मुस्कान का बॉयफ्रेंड साहिल भी उसी जेल में बंद है। जानकारी के अनुसार, वह जेल में खेती कर रहा है। उसके बाल भी कट चुके हैं। उससे मिलने उसकी नानी और भाई ही आए थे, जबकि मुस्कान से आज तक कोई मिलने नहीं गया, जिसका अर्थ है कि उसका परिवार उससे कोई ताल्लुक नहीं रखना चाहता। मुस्कान का जेल में प्रसव और इसके बाद डीएनए टेस्ट की मांग, इस जघन्य हत्याकांड में एक नया और संवेदनशील अध्याय जोड़ता है, जिसका कानूनी और भावनात्मक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ