उत्तर प्रदेश

राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह पर मां मंजुला सिंह ने लगाए फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप, 70 दुकानों के किराए की अवैध वसूली

रवि चौहान नवम्बर 24, 2025 0
राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह पर मां मंजुला सिंह ने लगाए फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप
राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह पर मां मंजुला सिंह ने लगाए फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप

राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह पर मां ने लगाए गंभीर आरोप: फर्जीवाड़ा, अवैध वसूली और पारिवारिक कलह का विस्तृत विश्लेषण

 

उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर चेहरे और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह एक बार फिर गंभीर कानूनी और पारिवारिक विवादों के केंद्र में आ गई हैं। इस बार उन पर आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनकी खुद की मां मंजुला सिंह ने लगाया है। मंजुला सिंह ने लखनऊ में भानवी सिंह और अपने पूर्व मैनेजर राजेश प्रताप सिंह के खिलाफ फर्जी किराएनामे के दस्तावेज़ों का उपयोग करके 70 दुकानों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है।

यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्ती राजघराने की बेटी और भदरी रियासत की बहू के बीच चल रहे तलाक के हाई-प्रोफाइल केस और गहन पारिवारिक कलह की पृष्ठभूमि में एक नया, विस्फोटक मोड़ है। पुलिस ने फिलहाल मुकदमा दर्ज नहीं किया है और मामले की जांच जारी है।

यह विस्तृत आलेख इस नए विवाद, मां के आरोपों की प्रकृति, फर्जीवाड़े के सबूत, भानवी सिंह का पारिवारिक इतिहास, राजा भैया के साथ उनका तलाक का मुकदमा और पिछले हाई-वोल्टेज ड्रामे को 5000 शब्दों में विश्लेषित करता है।


 

1. नया विवाद: मां मंजुला सिंह के गंभीर आरोप

 

लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में भानवी सिंह और उनके पूर्व मैनेजर राजेश प्रताप सिंह के खिलाफ उनकी मां मंजुला सिंह ने एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत फर्जीवाड़ा और अवैध वसूली से संबंधित है, जिसका सीधा संबंध 70 दुकानों के किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट से है।

 

1.1. फर्जी किराएनामा और धोखाधड़ी का आरोप

 

मंजुला सिंह ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि कैसे उनके मैनेजर राजेश प्रताप सिंह ने उनकी बेटी भानवी सिंह के निर्देश पर धोखाधड़ी की:

  • झूठा किरायानामा: मंजुला सिंह का आरोप है कि राजेश प्रताप सिंह कई वर्षों से उनके मैनेजर के रूप में कार्यरत था। इसी दौरान, उसने मंजुला सिंह के नाम पर एक झूठा किरायानामा तैयार किया

  • अनाधिकृत हस्ताक्षर: मां का स्पष्ट आरोप है कि यह किरायानामा तैयार करने से पहले न तो उनकी इजाजत ली गई थी और न ही उस पर उनके हस्ताक्षर हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट वाले पन्ने पर भी उनके हस्ताक्षर नहीं हैं।

  • अवैध उपयोग: इसके बावजूद, मैनेजर राजेश ने इस फर्जी दस्तावेज़ को वैध दस्तावेज की तरह इस्तेमाल किया और इसका इस्तेमाल 70 दुकानों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलने के लिए किया।

 

1.2. मैनेजर का कबूलनामा और सबूत

 

मंजुला सिंह का दावा है कि फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद उन्होंने मैनेजर राजेश प्रताप सिंह को घर बुलाकर बात की, जिसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो गई:

  • माफी और स्वीकारोक्ति: राजेश प्रताप सिंह ने अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी।

  • भानवी सिंह का निर्देश: मंजुला सिंह के अनुसार, राजेश ने स्वीकार किया कि उसने यह पूरा अवैध काम उनकी बेटी भानवी सिंह के निर्देश पर किया था।

  • डिजिटल सबूत: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजेश ने अपना मोबाइल फोन भी मंजुला सिंह को सौंपा है, जिसमें फर्जीवाड़े और अवैध वसूली से जुड़े कई रिकॉर्ड और चैट मौजूद हैं।

 

1.3. पुलिस से मांग और कानूनी स्थिति

 

मंजुला सिंह ने राजेश का मोबाइल फोन सबूत के तौर पर पुलिस को सौंपा है और इसे सील कर जांच में शामिल करने की मांग की है।

  • जिम्मेदारी थोपने की कोशिश: मंजुला सिंह ने आरोप लगाया कि दुकानों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट की अवैध वसूली मैनेजर ने भानवी के निर्देश पर की, लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी मुझ पर थोपने की कोशिश की जा रही है

  • FIR की मांग: मंजुला सिंह ने हजरतगंज पुलिस से भानवी सिंह और राजेश प्रताप सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

  • वर्तमान स्थिति: पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जा रही है


 

2. भानवी सिंह: राजघराना, शादी और तलाक की कहानी

 

भानवी सिंह का जीवन हमेशा से राजशाही और विवादों के बीच रहा है।

 

2.1. बस्ती राजघराने की बेटी

 

  • जन्म और परिवार: भानवी सिंह का जन्म 10 जुलाई, 1974 को हुआ था। वह बस्ती राजघराने के कुंवर रवि प्रताप सिंह की तीसरी बेटी हैं।

  • शिक्षा: उन्होंने बस्ती और लखनऊ में अपनी पढ़ाई पूरी की।

 

2.2. राजा भैया से शादी और वैवाहिक कलह

 

  • शादी: भदरी रियासत के राजा उदय प्रताप सिंह के बेटे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से उनकी शादी 1995 में हुई थी। शादी के समय राजा भैया करीब 25 साल के थे।

  • संतान: दोनों के 4 बच्चे हैं—दो बेटे (शिवराज प्रताप सिंह, बृजराज प्रताप सिंह) और दो बेटियां (राघवी, बृजेश्वरी सिंह)।

  • संबंधों में दरार: शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई थी।

  • तलाक का केस: भानवी सिंह पिछले कई सालों से पति से अलग दिल्ली में अपने आवास पर रह रही हैं। नवंबर, 2022 में उन्होंने दिल्ली के साकेत कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दायर की थी। उन्होंने क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था और आरोप लगाया था कि राजा भैया ने घर छोड़ दिया है। भानवी ने कोर्ट में राजा भैया पर मारपीट और अवैध संबंध का भी आरोप लगाया था।

 

2.3. संपत्ति का पहलू

 

भानवी सिंह न केवल राजघराने से आती हैं, बल्कि वह एक सफल व्यवसायी भी हैं।

  • व्यवसाय: भानवी सिंह बिजनेस करती हैं और उनकी संपत्ति राजा भैया से अधिक है।

  • संपत्ति विवरण: 2017 के चुनाव में राजा भैया ने अपने हलफनामे में कुल 14 करोड़ की संपत्ति का जिक्र किया था। इसमें से 7.2 करोड़ की संपत्ति पत्नी भानवी के नाम और 6 करोड़ की संपत्ति खुद के नाम बताई थी। यह वित्तीय स्वतंत्रता उनके हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई को और भी जटिल बनाती है।


 

3. माता-पिता से मिलने का हाई-वोल्टेज ड्रामा

 

नए फर्जीवाड़े के आरोप से पहले, भानवी सिंह जुलाई 2025 में लखनऊ में अपने ही परिवार के साथ एक हाई-वोल्टेज ड्रामा के कारण चर्चा में आई थीं।

 

3.1. सिल्वर ओक अपार्टमेंट की घटना (2 जुलाई, 2025)

 

  • घटना: देर रात भानवी अपने माता-पिता से मिलने हजरतगंज इलाके के सिल्वर ओक अपार्टमेंट स्थित फ्लैट नंबर 201 में पहुंची थीं।

  • हंगामा: परिवार के लोगों ने फ्लैट का गेट नहीं खोला। इसके बाद भानवी सिंह ने अपार्टमेंट के बाहर एक घंटे तक हंगामा किया।

  • पुलिस हस्तक्षेप: मामला बिगड़ता देख भानवी सिंह की बहन साध्वी ने पुलिस को बुला लिया था। रात करीब 12 बजे पुलिस ने समझा-बुझाकर भानवी को शांत कराया और उन्हें वापस भेज दिया गया था।

 

3.2. भानवी सिंह के आरोप

 

भानवी सिंह ने इस दौरान मीडिया से कहा था: "मुझे मेरे माता-पिता से नहीं मिलने दिया गया। मैं अपना पक्ष सबके सामने रखूंगी।"

  • बहन के आरोप: वहीं, भानवी की बहन साध्वी सिंह ने पुलिस को मौखिक रूप से यह आरोप लगाया था कि भानवी सिंह माता-पिता को जबरन ले जाने की कोशिश कर रही थीं।

यह घटना दिखाती है कि भानवी सिंह का अपने माता-पिता के साथ संबंध सामान्य नहीं है, और अब मां मंजुला सिंह का उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाना इस पारिवारिक दरार को और गहरा करता है।


 

4. कानूनी और सामाजिक निहितार्थ

 

यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाज में कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

 

4.1. फर्जीवाड़े का कानूनी प्रभाव

 

  • गैर-जमानती अपराध: यदि पुलिस मंजुला सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज करती है, तो भानवी सिंह पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराएं लग सकती हैं, जो गैर-जमानती अपराध हैं।

  • सबूतों की अहमियत: मैनेजर का मोबाइल फोन और उसमें मौजूद कथित चैट रिकॉर्ड इस केस में डिजिटल सबूत के तौर पर बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

  • तलाक केस पर असर: इस नए आरोप का सीधा असर दिल्ली के साकेत कोर्ट में चल रहे तलाक के केस पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यह भानवी सिंह की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।

 

4.2. राजघरानों और राजनीति पर प्रभाव

 

  • वंश का सम्मान: बस्ती राजघराने की बेटी का अपनी ही मां द्वारा आरोपी बनाया जाना और भदरी रियासत के बहू का अपने पति से तलाक का मामला चलना, दोनों राजघरानों के सम्मान और प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

  • राजा भैया की छवि: हालांकि यह आरोप सीधे राजा भैया पर नहीं है, लेकिन उनकी पत्नी पर लगा यह गंभीर वित्तीय आरोप अप्रत्यक्ष रूप से उनके राजनीतिक प्रभाव और परिवार की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है।

मंजुला सिंह की शिकायत और भानवी सिंह पर लगाए गए फर्जीवाड़े के आरोपों ने इस हाई-प्रोफाइल पारिवारिक और कानूनी लड़ाई को एक नए, सनसनीखेज स्तर पर पहुंचा दिया है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस 'राजशाही' कलह का अगला अध्याय क्या होगा।

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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

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75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

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दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो
Shankaracharya Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration: माघ मेला प्रशासन ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम; शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस चस्पा।

प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य की पदवी पर आर-पार; प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'क्या अब प्रशासन तय करेगा कि मैं शंकराचार्य हूं या नहीं?' प्रयागराज | 20 जनवरी 2026 संगम नगरी प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद ने अब बेहद उग्र रूप ले लिया है। मेला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शंकराचार्य के शिविर पर नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर यह साबित करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिख रहे हैं। वहीं, सड़क पर धरना दे रहे अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और संतों का अपमान करार दिया है। 1. रात 12 बजे नोटिस और सुबह की गहमागहमी प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब कानूनी नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मिडनाइट ड्रामा: सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। हालांकि, शिष्यों ने यह कहकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। नोटिस चस्पा: मंगलवार सुबह प्रशासन ने दोबारा शिविर का रुख किया और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। मुख्य आधार: नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के पद पर अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने पर रोक लगाई गई थी। 2. अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: 'प्रशासन की बंदूक, सुप्रीम कोर्ट का कंधा' नोटिस के जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सरकार के विरोधाभास: उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान खुद सरकार ने एक आधिकारिक पत्रिका छापी थी, जिसमें उन्हें 'शंकराचार्य' के रूप में संबोधित किया गया था। अब प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। पद की गरिमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई जिलाधिकारी या देश का राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही करेंगे। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं, अब प्रशासन को और क्या प्रमाण चाहिए?" 📊 विवाद के मुख्य बिंदु: पद, परंपरा और कानून श्रेणी प्रशासन का तर्क (नोटिस) शंकराचार्य का तर्क (जवाब) कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केस लंबित रहने तक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। कोर्ट ने पद पर बैठने से रोका है, लेकिन मान्यता संतों से मिलती है। शिविर का बोर्ड बोर्ड पर "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" लिखना कोर्ट की अवहेलना है। सरकार ने खुद अपनी पत्रिका में मुझे शंकराचार्य छापा है। मान्यता पदवी विवादित है (अविमुक्तेश्वरानंद बनाम वासुदेवानंद)। अन्य पीठों के शंकराचार्य मुझे स्वीकार करते हैं, यही सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्तमान स्थिति 24 घंटे में प्रमाण देने का अल्टीमेटम। जब तक माफी नहीं, तब तक आश्रम में प्रवेश नहीं; फुटपाथ पर रहेंगे। 3. मौनी अमावस्या का वो विवाद जिसने आग सुलगाई इस पूरे विवाद की जड़ 18 फरवरी (मौनी अमावस्या) को हुई घटना है। पालकी रोकने पर बवाल: शंकराचार्य पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। झड़प और हिरासत: शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पालकी को खींचकर संगम से 1 किमी दूर कर दिया था। प्रायश्चित धरना: इसी अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने शिविर त्याग दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर मेले में आएंगे, लेकिन प्रशासन के व्यवहार के विरोध में फुटपाथ पर ही रहेंगे। 4. ज्योतिषपीठ का पुराना विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है। प्रशासन इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक पदवी को चुनौती दे रहा है, जबकि शंकराचार्य इसे अपनी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
ठाकुर लड़के-दलित लड़की की लव स्टोरी

जेल में पारस सोम का खुलासा; 'रूबी ने दी थी भागने की सलाह, उसी के जूते पहनकर भागा था'; 3 साल की लवस्टोरी का सच।

सोनू हत्याकांड- मेरठ कमिश्नरी पर प्रदर्शन

मेरठ में कश्यप समाज का बड़ा प्रदर्शन; 'जिंदा जलाने' के आरोपी को बचाने का आरोप; बुलडोजर कार्रवाई पर उठे सवाल।

ब्लू ड्रम केस में फरवरी तक हो सकती है सजा

मर्चेंट नेवी ऑफिसर सौरभ राजपूत मर्डर केस में फरवरी में आएगा फैसला; पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को हो सकती है फांसी।

मेरठ सोनू कश्यप हत्याकांड पर शुरू हुई सियासत
रोनू कश्यप हत्याकांड पर भड़की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने की मुआवजे की मांग; 18 को महापंचायत।

मेरठ का 'ज्वालागढ़ कांड': रोनू कश्यप की 'क्रूर' हत्या पर गरमाई यूपी की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा; 18 को महापंचायत मेरठ का सरधना क्षेत्र इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उससे सटे ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक रोनू उर्फ सोनू कश्यप (28) की वीभत्स हत्या ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ पुलिस इसे आपसी विवाद और नाबालिग का कृत्य बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ज़िंदा जलाने' की अमानवीय घटना करार देकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहा है। 1. क्या है ज्वालागढ़ कांड? (क्राइम फाइल) 5 जनवरी 2026 (सोमवार) को मेरठ के सरधना में अक्खेपुर-रार्धना रोड पर एक अधजली लाश मिली। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के रोनू कश्यप के रूप में हुई। पुलिस की थ्योरी: पुलिस के अनुसार, रोनू और एक 16 वर्षीय टेंपो चालक के बीच टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पहले रोनू को शराब पिलाई, फिर ईंट से सिर वार कर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घसीटकर पत्तों और मोबिल ऑयल से जला दिया। परिजनों का आरोप: परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि रोनू को ज़िंदा जलाया गया है और इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई लोग शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि रोनू से 80,000 रुपये भी लूटे गए थे। 📊 पीड़ित परिवार की मार्मिक स्थिति सदस्य स्थिति रोनू कश्यप (मृतक) परिवार का इकलौता सहारा, मुंबई में हलवाई का काम करता था। बुजुर्ग माँ गंभीर रूप से बीमार, बेटे की शादी के सपने देख रही थीं। बड़ा भाई टीबी (TB) का मरीज, लंबे समय से इलाज चल रहा है। बड़ी बहन अविवाहित, दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। मकसद रोनू अपनी शादी के लिए लड़की देखने मुजफ्फरनगर से गांव आया था। 2. सियासी 'ज्वाला': अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर के कड़े तेवर इस घटना ने ठाकुर बनाम कश्यप (पिछड़ा वर्ग) का रंग ले लिया है, जिससे विपक्ष को 'PDA' और 'दलित-पिछड़ा' राजनीति को धार देने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव (सपा): उन्होंने इसे 'दबंगों का कुकृत्य' बताते हुए ट्वीट किया— "हम पूरे PDA समाज की तरफ से आवाज़ उठाते हैं। न्याय हो!" मायावती (BSP): बसपा सुप्रीमो ने इसे अति क्रूर और शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने शासन-प्रशासन से अपराधियों के मन में 'कानून का डर' पैदा करने की मांग की। चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नगीना सांसद ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी व मुआवजा मिले। चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया है। नरेंद्र कश्यप (राज्यमंत्री): सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के लिए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप 14 जनवरी को मेरठ पहुँच रहे हैं। 3. स्थानीय विरोध और 18 जनवरी की महापंचायत अतुल प्रधान की सक्रियता: सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलकर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया है। कश्यप समाज का आक्रोश: 12 जनवरी को मुजफ्फरनगर डीएम कार्यालय पर भारी प्रदर्शन हुआ। अब कश्यप समाज ने 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दौराला में एक विशाल 'शोक सभा' और पंचायत बुलाई है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। 4. पुलिस की जांच और 'नाबालिग' का पेंच मेरठ पुलिस के लिए यह केस सिरदर्द बन गया है। साक्ष्य: पुलिस ने शराब के पाउच के बारकोड और ठेके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से आरोपी को ट्रैक किया। विवाद: पुलिस ने 24 घंटे में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए केवल एक नाबालिग पर ठीकरा फोड़ रही है।

रवि चौहान जनवरी 13, 2026 0
बच्चे की तरह भाई से चिपकी कपसाड़ कांड पीड़िता

रूबी पहुंची घर; वीडियो में दिखे सजे हाथ और नया सूट, उठी शादी की चर्चा; आरोपी पारस के नाबालिग होने का दावा।

'मेरा रूबी से 3 साल पुराना अफेयर, मैं निर्दोष हूं'

पारस सोम जेल भेजा गया; कोर्ट में कहा- 'रिश्ता सच्चा है'; रूबी को काउंसलिंग के लिए भेजा।

मेरठ में अगवा करके दलित लड़की को दिल्ली ले गया

रूबी और पारस सहारनपुर से गिरफ्तार; 3 साल के अफेयर की कहानी आई सामने; मेरठ कोर्ट में पेशी आज।

मेरठ में दलित मां का 30 घंटे बाद अंतिम संस्कार; सपा विधायक- पुलिस में धक्का-मुक्की
मेरठ के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण मामले में 30 घंटे बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

मेरठ दलित महिला हत्याकांड और अपहरण: 30 घंटे के तनाव के बाद अंतिम संस्कार; 'बुलडोजर' और 'न्याय' की मांग के बीच सुलगता कपसाड़ गांव उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाड़ गांव इस समय एक भीषण सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की गिरफ्त में है। एक दलित महिला की बेरहमी से हत्या और उसकी युवा बेटी के अपहरण ने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। 1. घटनाक्रम: खेत की पगडंडी से शुरू हुआ मातम गुरुवार की सुबह मेरठ के कपसाड़ गांव में एक सामान्य दिन की शुरुआत हुई थी, लेकिन दोपहर होते-होते यहाँ चीख-पुकार मच गई। दुस्साहस: एक दलित महिला अपनी बेटी के साथ खेत की ओर जा रही थी। रास्ते में आरोपी कंपाउंडर पारस ने लड़की के साथ छेड़छाड़ की। हत्या और अपहरण: जब माँ ने अपनी बेटी की अस्मत बचाने के लिए विरोध किया, तो आरोपी ने आव देखा न ताव और फरसे (धारदार हथियार) से हमला कर माँ की नृशंस हत्या कर दी। इसके बाद वह लड़की को जबरन अगवा कर फरार हो गया। शादी की खुशियां मातम में: पीड़िता के पिता सत्येंद्र ने रोते हुए बताया कि बेटी की शादी तय हो चुकी थी। मई की तारीख को बदलकर अप्रैल का मुहूर्त निकलवाना था, लेकिन एक झटके में सब बर्बाद हो गया। 2. 30 घंटे का 'डेडलॉक' और प्रशासनिक कवायद घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया था। उनकी मांग थी कि जब तक बेटी सकुशल नहीं मिलती और आरोपी गिरफ्तार नहीं होता, वे टस से मस नहीं होंगे। भारी सुरक्षा बल: गांव में तनाव को देखते हुए 10 थानों की फोर्स, आरएएफ (RAF) और पीएसी (PAC) तैनात कर दी गई। पूरा गांव एक छावनी में तब्दील हो गया। प्रशासन का समझौता: 30 घंटे की लंबी जद्दोजहद और मान-मनौव्वल के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ। प्रशासन ने तुरंत 10 लाख रुपये का चेक सौंपा। अंतिम संस्कार: भारी सुरक्षा के बीच मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन गांव में अब भी गुस्सा शांत नहीं हुआ है। 📊 पीड़ित परिवार की 4 प्रमुख मांगें और सरकारी आश्वासन मांग स्थिति / आश्वासन बेटी की सकुशल बरामदगी पुलिस की 5 टीमें और क्राइम ब्रांच लगातार दबिश दे रही हैं। 50 लाख की आर्थिक मदद 10 लाख दिए गए, बाकी के लिए शासन को फाइल भेजी गई। सरकारी नौकरी परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार नौकरी का आश्वासन। शस्त्र लाइसेंस सुरक्षा की दृष्टि से शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर विचार। 3. राजनीति का अखाड़ा बना कपसाड़: सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष इस घटना ने मेरठ की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है। अतुल प्रधान बनाम पुलिस: सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान जब गांव पहुँचे, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी धक्का-मुक्की हुई। उन्हें गांव के बाहर रोका गया, जहाँ वे समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। ढाई घंटे बाद उन्हें मिलने की अनुमति मिली। अखिलेश यादव का हस्तक्षेप: सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पीड़ित पिता से फोन पर बात की और 3 लाख रुपये की निजी आर्थिक मदद की घोषणा की। संगीत सोम की एंट्री: बीजेपी के कद्दावर नेता संगीत सोम भी गांव पहुँचे और परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया। आजाद समाज पार्टी और भाकियू: चंद्रशेखर आजाद की पार्टी और किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने प्रशासन पर दबाव और बढ़ा दिया है। 4. भाई की आशंका: "मेरी बहन के साथ कुछ अनहोनी न हो जाए" पीड़िता के भाई नरसिंह का बयान दिल दहला देने वाला है। उसने कहा कि 24 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और आरोपी ने अभी तक कोई सुराग नहीं छोड़ा है। बुलडोजर की मांग: परिजनों की मांग है कि आरोपी पारस के घर पर बुलडोजर चलाया जाए ताकि अपराधियों में खौफ पैदा हो। अनहोनी का डर: भाई को डर है कि आरोपी उसकी बहन को नुकसान पहुँचा सकता है।

रवि चौहान जनवरी 9, 2026 0
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रवि चौहान जनवरी 21, 2026 0