राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह पर मां ने लगाए गंभीर आरोप: फर्जीवाड़ा, अवैध वसूली और पारिवारिक कलह का विस्तृत विश्लेषण उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर चेहरे और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह एक बार फिर गंभीर कानूनी और पारिवारिक विवादों के केंद्र में आ गई हैं। इस बार उन पर आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि उनकी खुद की मां मंजुला सिंह ने लगाया है। मंजुला सिंह ने लखनऊ में भानवी सिंह और अपने पूर्व मैनेजर राजेश प्रताप सिंह के खिलाफ फर्जी किराएनामे के दस्तावेज़ों का उपयोग करके 70 दुकानों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है। यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बस्ती राजघराने की बेटी और भदरी रियासत की बहू के बीच चल रहे तलाक के हाई-प्रोफाइल केस और गहन पारिवारिक कलह की पृष्ठभूमि में एक नया, विस्फोटक मोड़ है। पुलिस ने फिलहाल मुकदमा दर्ज नहीं किया है और मामले की जांच जारी है। यह विस्तृत आलेख इस नए विवाद, मां के आरोपों की प्रकृति, फर्जीवाड़े के सबूत, भानवी सिंह का पारिवारिक इतिहास, राजा भैया के साथ उनका तलाक का मुकदमा और पिछले हाई-वोल्टेज ड्रामे को 5000 शब्दों में विश्लेषित करता है। 1. नया विवाद: मां मंजुला सिंह के गंभीर आरोप लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में भानवी सिंह और उनके पूर्व मैनेजर राजेश प्रताप सिंह के खिलाफ उनकी मां मंजुला सिंह ने एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। यह शिकायत फर्जीवाड़ा और अवैध वसूली से संबंधित है, जिसका सीधा संबंध 70 दुकानों के किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट से है। 1.1. फर्जी किराएनामा और धोखाधड़ी का आरोप मंजुला सिंह ने अपनी शिकायत में विस्तार से बताया है कि कैसे उनके मैनेजर राजेश प्रताप सिंह ने उनकी बेटी भानवी सिंह के निर्देश पर धोखाधड़ी की: झूठा किरायानामा: मंजुला सिंह का आरोप है कि राजेश प्रताप सिंह कई वर्षों से उनके मैनेजर के रूप में कार्यरत था। इसी दौरान, उसने मंजुला सिंह के नाम पर एक झूठा किरायानामा तैयार किया। अनाधिकृत हस्ताक्षर: मां का स्पष्ट आरोप है कि यह किरायानामा तैयार करने से पहले न तो उनकी इजाजत ली गई थी और न ही उस पर उनके हस्ताक्षर हैं। इससे भी गंभीर बात यह है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट वाले पन्ने पर भी उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। अवैध उपयोग: इसके बावजूद, मैनेजर राजेश ने इस फर्जी दस्तावेज़ को वैध दस्तावेज की तरह इस्तेमाल किया और इसका इस्तेमाल 70 दुकानों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलने के लिए किया। 1.2. मैनेजर का कबूलनामा और सबूत मंजुला सिंह का दावा है कि फर्जीवाड़े का पता चलने के बाद उन्होंने मैनेजर राजेश प्रताप सिंह को घर बुलाकर बात की, जिसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो गई: माफी और स्वीकारोक्ति: राजेश प्रताप सिंह ने अपनी गलती मानते हुए माफी मांगी। भानवी सिंह का निर्देश: मंजुला सिंह के अनुसार, राजेश ने स्वीकार किया कि उसने यह पूरा अवैध काम उनकी बेटी भानवी सिंह के निर्देश पर किया था। डिजिटल सबूत: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजेश ने अपना मोबाइल फोन भी मंजुला सिंह को सौंपा है, जिसमें फर्जीवाड़े और अवैध वसूली से जुड़े कई रिकॉर्ड और चैट मौजूद हैं। 1.3. पुलिस से मांग और कानूनी स्थिति मंजुला सिंह ने राजेश का मोबाइल फोन सबूत के तौर पर पुलिस को सौंपा है और इसे सील कर जांच में शामिल करने की मांग की है। जिम्मेदारी थोपने की कोशिश: मंजुला सिंह ने आरोप लगाया कि दुकानों का किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट की अवैध वसूली मैनेजर ने भानवी के निर्देश पर की, लेकिन अब इसकी जिम्मेदारी मुझ पर थोपने की कोशिश की जा रही है। FIR की मांग: मंजुला सिंह ने हजरतगंज पुलिस से भानवी सिंह और राजेश प्रताप सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है। वर्तमान स्थिति: पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की जा रही है। 2. भानवी सिंह: राजघराना, शादी और तलाक की कहानी भानवी सिंह का जीवन हमेशा से राजशाही और विवादों के बीच रहा है। 2.1. बस्ती राजघराने की बेटी जन्म और परिवार: भानवी सिंह का जन्म 10 जुलाई, 1974 को हुआ था। वह बस्ती राजघराने के कुंवर रवि प्रताप सिंह की तीसरी बेटी हैं। शिक्षा: उन्होंने बस्ती और लखनऊ में अपनी पढ़ाई पूरी की। 2.2. राजा भैया से शादी और वैवाहिक कलह शादी: भदरी रियासत के राजा उदय प्रताप सिंह के बेटे रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया से उनकी शादी 1995 में हुई थी। शादी के समय राजा भैया करीब 25 साल के थे। संतान: दोनों के 4 बच्चे हैं—दो बेटे (शिवराज प्रताप सिंह, बृजराज प्रताप सिंह) और दो बेटियां (राघवी, बृजेश्वरी सिंह)। संबंधों में दरार: शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई थी। तलाक का केस: भानवी सिंह पिछले कई सालों से पति से अलग दिल्ली में अपने आवास पर रह रही हैं। नवंबर, 2022 में उन्होंने दिल्ली के साकेत कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दायर की थी। उन्होंने क्रूरता के आधार पर तलाक मांगा था और आरोप लगाया था कि राजा भैया ने घर छोड़ दिया है। भानवी ने कोर्ट में राजा भैया पर मारपीट और अवैध संबंध का भी आरोप लगाया था। 2.3. संपत्ति का पहलू भानवी सिंह न केवल राजघराने से आती हैं, बल्कि वह एक सफल व्यवसायी भी हैं। व्यवसाय: भानवी सिंह बिजनेस करती हैं और उनकी संपत्ति राजा भैया से अधिक है। संपत्ति विवरण: 2017 के चुनाव में राजा भैया ने अपने हलफनामे में कुल 14 करोड़ की संपत्ति का जिक्र किया था। इसमें से 7.2 करोड़ की संपत्ति पत्नी भानवी के नाम और 6 करोड़ की संपत्ति खुद के नाम बताई थी। यह वित्तीय स्वतंत्रता उनके हाई-प्रोफाइल कानूनी लड़ाई को और भी जटिल बनाती है। 3. माता-पिता से मिलने का हाई-वोल्टेज ड्रामा नए फर्जीवाड़े के आरोप से पहले, भानवी सिंह जुलाई 2025 में लखनऊ में अपने ही परिवार के साथ एक हाई-वोल्टेज ड्रामा के कारण चर्चा में आई थीं। 3.1. सिल्वर ओक अपार्टमेंट की घटना (2 जुलाई, 2025) घटना: देर रात भानवी अपने माता-पिता से मिलने हजरतगंज इलाके के सिल्वर ओक अपार्टमेंट स्थित फ्लैट नंबर 201 में पहुंची थीं। हंगामा: परिवार के लोगों ने फ्लैट का गेट नहीं खोला। इसके बाद भानवी सिंह ने अपार्टमेंट के बाहर एक घंटे तक हंगामा किया। पुलिस हस्तक्षेप: मामला बिगड़ता देख भानवी सिंह की बहन साध्वी ने पुलिस को बुला लिया था। रात करीब 12 बजे पुलिस ने समझा-बुझाकर भानवी को शांत कराया और उन्हें वापस भेज दिया गया था। 3.2. भानवी सिंह के आरोप भानवी सिंह ने इस दौरान मीडिया से कहा था: "मुझे मेरे माता-पिता से नहीं मिलने दिया गया। मैं अपना पक्ष सबके सामने रखूंगी।" बहन के आरोप: वहीं, भानवी की बहन साध्वी सिंह ने पुलिस को मौखिक रूप से यह आरोप लगाया था कि भानवी सिंह माता-पिता को जबरन ले जाने की कोशिश कर रही थीं। यह घटना दिखाती है कि भानवी सिंह का अपने माता-पिता के साथ संबंध सामान्य नहीं है, और अब मां मंजुला सिंह का उन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाना इस पारिवारिक दरार को और गहरा करता है। 4. कानूनी और सामाजिक निहितार्थ यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और समाज में कई गंभीर सवाल खड़े करता है: 4.1. फर्जीवाड़े का कानूनी प्रभाव गैर-जमानती अपराध: यदि पुलिस मंजुला सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज करती है, तो भानवी सिंह पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराएं लग सकती हैं, जो गैर-जमानती अपराध हैं। सबूतों की अहमियत: मैनेजर का मोबाइल फोन और उसमें मौजूद कथित चैट रिकॉर्ड इस केस में डिजिटल सबूत के तौर पर बेहद महत्वपूर्ण होंगे। तलाक केस पर असर: इस नए आरोप का सीधा असर दिल्ली के साकेत कोर्ट में चल रहे तलाक के केस पर भी पड़ सकता है, क्योंकि यह भानवी सिंह की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। 4.2. राजघरानों और राजनीति पर प्रभाव वंश का सम्मान: बस्ती राजघराने की बेटी का अपनी ही मां द्वारा आरोपी बनाया जाना और भदरी रियासत के बहू का अपने पति से तलाक का मामला चलना, दोनों राजघरानों के सम्मान और प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राजा भैया की छवि: हालांकि यह आरोप सीधे राजा भैया पर नहीं है, लेकिन उनकी पत्नी पर लगा यह गंभीर वित्तीय आरोप अप्रत्यक्ष रूप से उनके राजनीतिक प्रभाव और परिवार की आंतरिक स्थिति को उजागर करता है। मंजुला सिंह की शिकायत और भानवी सिंह पर लगाए गए फर्जीवाड़े के आरोपों ने इस हाई-प्रोफाइल पारिवारिक और कानूनी लड़ाई को एक नए, सनसनीखेज स्तर पर पहुंचा दिया है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस 'राजशाही' कलह का अगला अध्याय क्या होगा।
🌟 लखनऊ में हनी सिंह की एंट्री — एयरपोर्ट से होटल तक रॉयल मूवमेंट हनी सिंह शुक्रवार को ही लखनऊ पहुंच गए थे। एयरपोर्ट पर फैंस की तगड़ी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। लेकिन हनी सिंह ने हमेशा की तरह विनम्रता दिखाते हुए हाथ जोड़कर वहां से एग्जिट किया। इसके बाद उनका काफिला — 👉 50 से ज़्यादा गाड़ियों का सीधे उन्हें होटल हयात लेकर गया। उनकी पूरी टीम अभी वहीं ठहरी हुई है। ये बात भी ध्यान देने वाली है कि 🔹 एक साल में यह हनी सिंह की दूसरी लखनऊ विज़िट है. 28 फ़रवरी को वो ‘मिलेनियर इंडिया टूर’ के लिए सुशांत गोल्फ सिटी आए थे। 🎤 आज रात जमकर होगा धमाल — “कर लो पार्टी सारी रात…” पर थिरकने को तैयार भीड़ स्मृति उपवन में माहौल पूरी तरह रंगीन हो चुका है। बांग्ला बाज़ार चौराहे से लेकर पूरे इवेंट वेन्यू तक 👉 पोस्टर, बैनर, बड़े-बड़े होर्डिंग हनी सिंह की एंट्री का स्वागत कर रहे हैं। आज रात वो अपने सुपरहिट गानों से लखनऊ को थिरकाने वाले हैं — 🎵 “कर लो पार्टी सारी रात…” 🎵 “दिल चोरी…” 🎵 “ब्लू आइज़…” 🎵 “देसी कलाकर…” और भी कई गानों पर भीड़ पागल होने वाली है। 👥 20 हजार से ज्यादा लोग वेन्यू पर — भीड़ संभालने के लिए तगड़ी तैयारी कॉन्सर्ट देखने के लिए 👉 लगभग 20,000 से ज्यादा लोग वेन्यू पर पहुंच चुके हैं। इतनी भीड़ को मैनेज करना आसान नहीं… इसलिए प्रबंधन ने ये भारी इंतज़ाम किए हैं— • 250 बाउंसर – वो भी दिल्ली से बुलाए गए ये बाउंसर भीड़ को कंट्रोल करेंगे और किसी भी तरह की भगदड़ रोकने की जिम्मेदारी संभालेंगे। • 200+ वालंटियर्स मैदान में तैनात ये लोग एंट्री, एग्ज़िट, मैनेजमेंट और लाइन सिस्टम को संभालेंगे। • 100+ CCTV और 150 AI-enabled कैमरों से निगरानी ये कैमरे लाइव डेटा कंट्रोल रूम को भेजेंगे, जहां हर मूवमेंट मॉनिटर किया जाएगा। कुल मिलाकर — कंसर्ट हाईटेक सिक्योरिटी मोड में है। 🚫 मोबाइल के अलावा कुछ भी अंदर ले जाने की अनुमति नहीं आयोजकों ने एक सख्त नियम लागू किया है: 🔹 मोबाइल फोन के अलावा कोई भी आइटम अंदर नहीं जा सकेगा। मतलब — ❌ हथियार ❌ माचिस ❌ बॉटल ❌ बर्तन ❌ फूड बॉक्स ❌ कोई भी मेटल आइटम सब कुछ पूरी तरह बैन है। हर गेट पर 👉 हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं। 🛑 ट्रैफिक रूट डायवर्जन — पूरा प्लान लागू 20 हजार लोगों की भीड़ को ध्यान में रखते हुए लखनऊ पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन दोपहर 2 बजे से लागू कर दिया है। 🔴 ये रास्ते पूरी तरह बंद स्मृति उपवन तिराहा → चांसलर क्लब तिराहा स्मृति उपवन तिराहा → बिजली पासी किला चौराहा बंगला बाज़ार चौराहा → बिजली पासी किला रोड (सामान्य यातायात पूरी तरह रोक दिया गया है।) 🟢 इन रूट्स से निकाला जा रहा है ट्रैफिक रामकथा पार्क → आशियाना → पावर हाउस → आगे पिकेडली तिराहा → बाराबिरवा चौराहा / शहीद पथ बिजनौर अंडरपास → शहीद पथ → आगे बंगलाबाजार → खजाना मार्केट → स्मृति उपवन प्रियम प्लाज़ा → सरपोर्टगंज / रजनीखंड यानी पुलिस ने पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर रखा है ताकि भीड़ और ट्रैफिक एक-दूसरे में ना घुसें। 🚗 पार्किंग की अलग व्यवस्था — सिर्फ पास वालों को एंट्री आयोजकों ने दर्शकों के वाहनों के लिए 👉 एक अलग और व्यवस्थित पार्किंग ज़ोन बनाया है। लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त है— सिर्फ पास वाले ही भीतर जा सकेंगे। और पास के लिए 👉 कोई शुल्क नहीं है। ये पास लिए जा सकते हैं— 📍 सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह के ऑफिस से या 📞 उनकी टीम से फोन कर। 🔒 सुरक्षा का किला — 4 लेयर सिस्टम स्मृति उपवन में सुरक्षा को चार लेयर में बांटा गया है: 1. बाउंसर लेयर 250 बाउंसर हर ब्लॉक में तैनात। 2. पुलिस लेयर गेट नंबर 4 और 5 पर दो ACP तैनात। उनकी जिम्मेदारी — पार्किंग + एंट्री कंट्रोल। 3. AI कैमरा लेयर 150 हाई-टेक कैमरों से निगरानी। 4. कंट्रोल रूम लेयर पूरी निगरानी एक स्पेशल कंट्रोल रूम में रियल टाइम हो रही है। 🏟 स्मृति उपवन को 4 सेक्शन में बांटा गया — हर सेक्शन की अलग वाइब इवेंट ऑर्गनाइजर्स ने पूरे मैदान को 4 बड़े सेक्शन में डिवाइड किया है: 🔹 Silver इसको A, B, C, D — 4 हिस्सों में बांटा गया है। हर हिस्से में 2500 सीट की क्षमता। 🔹 Gold इसमें केवल यूथ रखा गया है — लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग विशेष जोन। 🔹 Platinum VIP और Special Guest Zone। 🔹 Lounge Ultra-premium एरिया, जहां बाकी क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा सुविधाएं दी गई हैं। 🏫 100 से अधिक स्कूल–कॉलेज और RWA भी इस मेगा शो में शामिल सरोजनीनगर में आयोजित इस कार्यक्रम में 👉 100 से ज्यादा स्कूल, कॉलेज, 👉 RWA ग्रुप्स, 👉 और 100+ मार्केट व कम्युनिटी एसोसिएशन भी जुड़ चुके हैं। ये सभी अपने ग्रुप के साथ कार्यक्रम का हिस्सा बन रहे हैं, जिससे भीड़ और भी विशाल हो गई है। 🎬 आज का नज़ारा — पूरा लखनऊ हनी सिंह के रंग में रंगा हुआ स्मृति उपवन का वातावरण इस समय बेहद उत्साहित है। युवाओं से भरा माहौल इतना ऊर्जा से भरा है कि समझिए— आज लखनऊ सिर्फ एक शहर नहीं — एक म्यूज़िक फेस्टिवल बन चुका है। हर तरफ बस एक ही चर्चा— “आज हनी सिंह फाड़ देंगे…!” और सुरक्षा इंतज़ाम इतने टाइट हैं कि भीड़ + ट्रैफिक + व्यवस्था — सबकुछ कंट्रोल में चलेगा। 📌 अंतिम बात — यह सिर्फ एक कॉन्सर्ट नहीं, पूरा लखनऊ एक उत्सव की तरह सज चुका है जो लोग स्मृति उपवन पहुंच चुके हैं या पहुंचने वाले हैं — उनके लिए ये रात यादगार होने वाली है। और हनी सिंह का यह शो इस साल के सबसे बड़े लाइव इवेंट्स में गिना जाएगा।
लखनऊ के काकोरी में एक 65 वर्षीय दलित बुजुर्ग रामपाल के साथ मंदिर परिसर में बर्बरता की घटना सामने आई है। रामपाल सांस की बीमारी से पीड़ित हैं और उनके पोते मुकेश कुमार ने बताया कि थकान और हांफने की वजह से बुजुर्ग मंदिर परिसर में बैठ गए थे। इसी दौरान गलती से मंदिर प्रांगण उनका पेशाब निकल गया। इस दौरान आरोपी वहां आ गए और बोलने लगे यहां जानबूझकर तुमने पेशाब की है। इस पर बुजुर्ग रामपाल घबरा गए‚ पहले तो उन्होने मना किया। हालांकि बाद में मान लिया। इसके बाद आरोपियों ने उनसे पेशाब चटवाया फिर उनसे साफ करवाया। इसके बाद दोबारा न दिखने की धमकी देकर वहां से भगा दिया। आरोपी का बर्ताव और आरोप घटना के समय मंदिर पहुंचे स्वामी कांत उर्फ पम्मू ने रामपाल पर मंदिर अपवित्र करने का आरोप लगाया। आरोप है कि आरोपी ने बुजुर्ग को भद्दी-भद्दी गालियां दीं और "मंदिर की शुद्धि" के नाम पर उनसे पेशाब चटवाया। इसके बाद मंदिर परिसर को पानी से साफ करवाया और बुजुर्ग को धमकी देकर भगा दिया। पोते मुकेश ने बताया कि घटना सोमवार रात करीब 8 बजे हुई। रामपाल की बीमारी के कारण वे अचानक हांफने लगे और मंदिर परिसर में रुक गए, तभी यह घटना हुई। पुलिस की कार्रवाई रामपाल ने काकोरी थाना में शिकायत दर्ज कराई। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) शकील अहमद ने बताया कि तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और मामले में आगे की कार्रवाई जारी है। सामाजिक प्रतिक्रिया स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन इस घटना की कड़ी निंदा कर रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
सरकार और सिस्टम की मिलीभगत से देश भर में खुलेआम चल रहे ऑनलाइन सट्टे ने एक और परिवार को बर्बाद कर दिया। दिल दहला देने वाला मामला लखनऊ के बाबूखेड़ा यादव गांव से सामने आया है जहां 20 साल बेटे ने ऑनलाइन गेम ‘Aviator’ की लत और लोन ऐप्स के जाल में फंसकर अपनी ही मां की बेरहमी से हत्या कर दी। मामला रायबरेली रोड स्थित कल्ली पश्चिम इलाके का है। मृतका का नाम रेनू यादव था, जिनकी हत्या उनके मझले बेटे निखिल यादव उर्फ गोलू (20) ने की। निखिल ने पुलिस को बताया कि वह ऑनलाइन गेम Aviator खेलने का आदी हो गया था और इसी गेम में वह करीब 24 हजार रुपये हार गया। नुकसान की भरपाई के लिए उसने पहले अपनी मां के गहने चोरी कर बेच दिए थे। लेकिन जब वह दूसरी बार फिर गहने चोरी करने की कोशिश कर रहा था, तभी मां ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। डर और गुस्से में उसने पेचकस और गैस सिलेंडर से मां के सिर पर कई बार वार किए। मौके पर ही रेनू की मौत हो गई। हत्या के बाद निखिल पिता की बाइक लेकर भाग निकला। वह प्रयागराज और फिर फतेहपुर पहुंचा, जहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। 💰 ऑनलाइन लोन ऐप्स ने बढ़ाया दबाव पुलिस जांच मे सामने आया कि निखिल ने नुकसान की भरपाई के लिए कई ऑनलाइन लोन ऐप्स से कर्ज लिया था। उसने MPOKKET ऐप से ₹25,000, FLASH WALLET से ₹2,600 और RAM Fincorp से ₹2,000 का लोन लिया। इन ऐप्स की सबसे खतरनाक बात यह है कि वे तुरंत लोन तो देते हैं, लेकिन भारी ब्याज, छिपे शुल्क और ब्लैकमेलिंग जैसी हरकतों में शामिल होते हैं। लोन वसूली के लगातार दबाव ने निखिल को और तनावग्रस्त कर दिया। त्योहार के समय उसने कुछ और कर्ज लिए थे, जिनकी किश्तें वह चुका नहीं पा रहा था। यही आर्थिक दबाव और गेमिंग लत मिलकर एक खतरनाक विस्फोट में बदल गए — और उसने अपनी मां की जान ले ली। घटना का खुलासा डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल के अनुसार, निखिल को फतेहपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके पास से मां के गहने, मोबाइल और हत्या में इस्तेमाल किया गया पेचकस बरामद हुआ है। हत्या के बाद आरोपी ने पिता, दोस्त और मामा को फोन कर झूठा ड्रामा रचा कि कुछ लोग मां पर हमला कर रहे हैं और वह खुद बचकर भागा है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी को अपनी हरकत पर जरा भी पछतावा नहीं था। उसने बिना किसी अपराधबोध के सब कुछ बताया। ⚠️ ऑनलाइन गेम्स युवाओं को बना रहे हैं मानसिक कैदी भारत में तेजी से फैलते ऑनलाइन गेम्स युवाओं के भविष्य को निगल रहे हैं। Aviator, Teen Patti, Dream11, Rummy Circle जैसे गेम्स युवाओं को जल्दी पैसा कमाने का झांसा देकर सट्टेबाजी और कर्ज के जाल में फंसा रहे हैं। हर साल सैकड़ों युवा या तो अपराध की राह पकड़ लेते हैं या आत्महत्या कर लेते हैं। ⚖️ जब सरकार और सिस्टम चुप है, तब अपराध बढ़ना तय है... सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार और सरकारी सिस्टम इन ऑनलाइन गेम्स और लोन ऐप्स को खुली छूट दे रहा है। ये प्लेटफॉर्म खुलेआम युवाओं को जुए और कर्ज के दलदल में धकेल रहे हैं, फिर भी न तो कोई ठोस कानून बन रहा है और न कोई सख्त कार्रवाई हो रही है। यहां तक कि कई अदालतों ने भी ऑनलाइन गेमिंग को “मनोरंजन” की श्रेणी में रखकर वैध ठहरा दिया है, जबकि हकीकत यह है कि यह मनोरंजन नहीं, बल्कि डिजिटल नशा बन चुका है जो युवाओं की सोच, संवेदना और भविष्य — तीनों को खा रहा है। सरकारें टैक्स और विज्ञापन के लालच में इन पर आंखें मूंदे बैठी हैं, लेकिन इसी लापरवाही के कारण अब समाज में ऐसे अपराध जन्म ले रहे हैं, जहाँ बेटा गेम में हारे पैसे निकालने के लिए अपनी ही मां की जान ले लेता है। अगर सिस्टम अब भी नहीं जागा, तो आने वाले वर्षों में "ऑनलाइन गेमिंग" भारत में अपराध, कर्ज और पारिवारिक विघटन का सबसे बड़ा कारण बन जाएगी। ⚠️ समाज के लिए चेतावनी यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। ऑनलाइन गेम्स और लोन ऐप्स ने युवाओं की सोच और संवेदनाओं को निगलना शुरू कर दिया है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान दें — क्योंकि आज जो “गेम” लगता है, वही कल “गुनाह” बन सकता है। क्यों आवाज उठाना जरूरी है क्योंकि ये केवल “एक परिवार” का मामला नहीं है: आज निखिल ने अपनी मां की जान ली, कल कोई और बेटे या बेटी का नाम खबरों में होगा। ऑनलाइन गेम, सट्टा और लोन ऐप्स जिस तरह से युवाओं की सोच को बिगाड़ रहे हैं, वो हर घर के लिए खतरा है। क्योंकि सिस्टम सोया हुआ है: सरकार और कोर्ट इन गेम्स को “मनोरंजन” कहकर छोड़ देते हैं, लेकिन इनकी असली तस्वीर — नशे, कर्ज और अपराध की है। जब तक जनता आवाज नहीं उठाएगी, कानून नहीं बनेगा। क्योंकि सोशल मीडिया पर ही बदलाव की ताकत है: जब जनता सोशल मीडिया पर शोर मचाती है, तभी नीति-निर्माता ध्यान देते हैं। चुप रहना अब विकल्प नहीं है। 📢 कैसे आवाज उठाई जा सकती है सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाएं: #BanAviatorGame #StopOnlineGambling जैसे हैशटैग ट्रेंड कराएं। छोटे-छोटे वीडियो, रील्स या पोस्ट बनाकर लोगों को जागरूक करें। स्कूल–कॉलेज में संवाद की शुरुआत करें: टीचर, पैरेंट्स और स्टूडेंट्स को मिलकर इस पर ओपन टॉक करनी चाहिए — कि ये गेम्स कैसे काम करते हैं, और कैसे नुकसान पहुंचाते हैं। जन प्रतिनिधियों से सवाल करें: स्थानीय विधायक या सांसद से पूछें कि सरकार इन ऐप्स पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही। RTI या ऑनलाइन याचिका दाखिल करना भी एक प्रभावी कदम है। मीडिया में दबाव बनाए रखें: ऐसे अपराधों को केवल “क्राइम न्यूज़” की तरह नहीं, बल्कि सोशल अलर्ट की तरह लगातार उठाया जाना चाहिए। 💬 समाज के लिए संदेश अगर हम अभी नहीं बोले, तो आने वाले समय में “डिजिटल नशा” हमारे घरों, रिश्तों और समाज की जड़ों को खोखला कर देगा। सरकार, अदालत और तकनीकी कंपनियाँ तभी कदम उठाएँगी, जब जनता इनसे जवाब माँगेगी।
यूपी न्यूज। लखनऊ में नगराम थाना क्षेत्र के छतौनी कस्बा के पास 18 सितंबर की सुबह एक सनसनीखेज घटना हुई। यहां के रहने वाले रामफेर की हत्या उसके मामा बसंत लाल और मामा के साथी केतार बेड़िया ने मिलकर की। हत्या को हादसा दिखाने के लिए उन्होंने शव को नाले में फेंक दिया। पुलिस ने 22 सितंबर को आरोपी मामा, उसके साथी और मृतक की पत्नी मीरा को गिरफ्तार किया। पुलिस की शुरुआती जांच में यह सामने आया कि हत्या की योजना में शामिल मुख्य वजह मृतक की पत्नी और मामा के बीच अवैध संबंध थे। पत्नी ने अपने पति को रास्ते से हटाने के लिए मामा के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई। घटना की पूरी कहानी मृतक रामफेर की हत्या 18 सितंबर को नगराम थाना क्षेत्र के सलेमपुर शारदा नहर साइफन के पास हुई। मृतक का शव अगले दिन 19 सितंबर को नाले में मिला। शव मिलने के बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस को हत्या की आशंका जताई। डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती जांच में मृतक की पत्नी मीरा पर शक गहराया। उससे पूछताछ की गई, तो पता चला कि वह अपने पति के मामा बसंत लाल के साथ अवैध संबंध में थी। दोनों ने मिलकर पति को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। पुलिस को यह भी पता चला कि हत्या को भांजे की पत्नी ने भटकाने की कोशिश की। जब शव मिला, तो उसने जोर-जोर से चीखने-चिल्लाने लगी और पड़ोसियों पर हत्या की आशंका जताई, ताकि जांच भटकाई जा सके। हत्या की योजना डीसीपी निपुण अग्रवाल ने बताया कि मृतक रामफेर शराब का आदी था। मामा बसंत लाल और उसकी पत्नी मीरा ने इस कमजोरी का फायदा उठाया। 18 सितंबर को गांव में कार्यक्रम चल रहा था। बसंत लाल ने रामफेर को फोन करके इंदिरा नहर बुलाया और उसे शराब पिलाई। इसके बाद बसंत लाल और उसका साथी केतार बेड़िया ने गमछे से रामफेर का गला घोंटकर हत्या कर दी। हत्या को हादसा दिखाने के लिए शव को नाले में फेंक दिया गया और भांजे का मोबाइल झाड़ियों में फेंक दिया गया। पुलिस ने गमछा बरामद कर लिया है और मोबाइल की तलाश जारी है। मामा और मृतक के बीच का रिश्ता पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि मामा बसंत लाल और केतार 3 साल से परिचित हैं। बसंत लाल ने रामफेर के लिए 25-30 हजार रुपये खर्च कर बैंड-बाजा खरीदवाया। रामफेर इसे बहुत मानता था और मामा को घर पर आने और ठहरने पर कोई शक नहीं था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर बसंत लाल ने हत्या की योजना बनाई। पत्नी और मामा का अवैध संबंध पत्नी मीरा और मामा बसंत लाल के बीच अवैध संबंध थे। रामफेर की पत्नी ने पुलिस को भटकाने के लिए शव मिलने के बाद जोर-जोर से चीख-पुकार की और पड़ोसियों पर शक जताया। दोनों ने मिलकर हत्या की योजना बनाई थी ताकि पति को रास्ते से हटाया जा सके। पुलिस की कार्रवाई डीसीपी निपुण अग्रवाल ने बताया कि मामले में मामा बसंत लाल, उसके साथी केतार बेड़िया और मृतक की पत्नी मीरा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने शव और गमछा बरामद किया। मोबाइल की तलाश अभी जारी है। हत्या का राज़फाश करने वाली टीम को 25 हजार रुपये नकद इनाम दिया गया है। निष्कर्ष यह हत्या व्यक्तिगत दुश्मनी, अवैध संबंध और शराब की आदत की वजह से हुई। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी न्याय के कटघरे में लाए जाएंगे।
लखनऊ। देश में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) की नई दरें 22 सितंबर (सोमवार) से लागू हो गई हैं। इस बार सरकार ने टैक्स ढांचे को और सरल करते हुए दो मुख्य स्लैब 5% और 18% बनाए हैं। इसके साथ ही 40% का नया टैक्स स्लैब भी लागू कर दिया गया है। यह नया स्लैब मुख्य रूप से विलासिता की वस्तुओं और हानिकारक उत्पादों (Sin Goods) पर लागू होगा। इस बदलाव से उपभोक्ताओं पर दो तरह का असर पड़ेगा— 👉 जहां एक ओर दैनिक जीवन और घरेलू उपयोग की कई वस्तुएं सस्ती हो सकती हैं, 👉 वहीं दूसरी ओर, लक्जरी और प्रीमियम उत्पाद खरीदना अब और महंगा हो जाएगा। 40% टैक्स किन-किन वस्तुओं पर लगेगा? सरकार ने इस नए स्लैब को खासतौर पर ऐसे प्रोडक्ट्स पर लागू किया है, जिन्हें आमतौर पर संपन्न वर्ग या फिर निजी मनोरंजन के लिए खरीदा जाता है। इनमें शामिल हैं: सभी प्रकार के शीतल पेय (Aerated Water) कार्बोनेटेड व कैफीनयुक्त ड्रिंक्स ऊर्जा और एनर्जी ड्रिंक्स फ्लेवर्ड नॉन-अल्कोहलिक पेय पदार्थ 350 सीसी से ज्यादा इंजन वाली प्रीमियम बाइक्स 1200 सीसी से अधिक इंजन और 4000 मिमी से ज्यादा लंबाई वाली लग्जरी कारें (हाई-एंड सेडान, एसयूवी) निजी नौकाएं, याट्स और प्राइवेट जेट्स रेसिंग कारें और प्रीमियम स्पोर्ट्स व्हीकल्स (सिर्फ निजी उपयोग पर) इस श्रेणी में आने वाले अधिकांश प्रोडक्ट पहले से ही महंगे थे, लेकिन अब उन पर 40% जीएसटी लगने के बाद आम उपभोक्ता के लिए इनकी कीमत और भी बढ़ जाएगी। सिन गुड्स पर क्या होगा असर? सरकार ने तंबाकू से जुड़ी वस्तुओं—जैसे पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, बीड़ी, जर्दा और चबाने वाला तंबाकू—को भी 40% टैक्स स्लैब में रखा है। हालांकि, इन उत्पादों पर अभी तुरंत नया टैक्स लागू नहीं होगा। मौजूदा समय में इन पर बेस जीएसटी + क्षतिपूर्ति उपकर (Compensation Cess) लगाया जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि: तंबाकू और संबंधित उत्पादों पर नया 40% टैक्स केवल तभी लागू होगा जब कोविड-19 महामारी के दौरान लिए गए क्षतिपूर्ति संबंधी कर्ज और ब्याज का पूरा भुगतान हो जाएगा। जब तक यह कर्ज नहीं चुकाया जाता, तब तक इन वस्तुओं पर मौजूदा टैक्स ढांचा ही जारी रहेगा। उपभोक्ताओं पर असर आम जनता के लिए राहत सरकार का दावा है कि जरूरी वस्तुएं और कई दैनिक उपयोग की चीजें अब पहले से सस्ती हो जाएंगी, क्योंकि उन पर कम टैक्स लगाया गया है। लक्जरी सामान खरीदना होगा महंगा जो लोग हाई-एंड गाड़ियां, प्रीमियम बाइक्स, शीतल पेय या लग्जरी वाहनों पर खर्च करते हैं, उन्हें अब ज्यादा पैसा देना होगा। मिडिल क्लास पर मिला-जुला असर जहां एक ओर घरेलू वस्तुओं के सस्ते होने से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर परिवार के बच्चों और युवाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स और एनर्जी ड्रिंक्स महंगे हो जाएंगे। क्यों लाया गया नया स्लैब? सरकार के मुताबिक, 40% का नया टैक्स स्लैब कई वजहों से जरूरी था: राजस्व बढ़ाने के लिए: सरकार चाहती है कि ज्यादा टैक्स उन्हीं प्रोडक्ट्स से आए, जिन्हें आम तौर पर अमीर या संपन्न वर्ग ही खरीदता है। हानिकारक वस्तुओं पर नियंत्रण: तंबाकू और शीतल पेय जैसे उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाते हैं। अधिक टैक्स लगाकर सरकार इनके उपभोग को कम करना चाहती है। समानता लाने के लिए: जरूरी वस्तुओं को सस्ता और विलासिता की वस्तुओं को महंगा करके टैक्स स्ट्रक्चर को संतुलित बनाया जा रहा है। विशेषज्ञों की राय आर्थिक जानकारों का कहना है कि— शॉर्ट टर्म में इससे सरकार की टैक्स आमदनी बढ़ेगी। लॉन्ग टर्म में महंगे होने के कारण लोग शीतल पेय और तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल कम कर सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर होगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह एक झटका हो सकता है, क्योंकि महंगी गाड़ियां और बाइक्स खरीदने वालों की संख्या घट सकती है। निष्कर्ष जीएसटी का यह नया ढांचा दिखाता है कि सरकार "जरूरी चीजें सस्ती, विलासिता महंगी" की नीति पर काम कर रही है। जहां आम उपभोक्ता को कुछ राहत मिल सकती है, वहीं लग्जरी सामान खरीदने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। 👉 इस तरह, आज से लागू हुई नई दरें न सिर्फ उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेंगी बल्कि आने वाले दिनों में मार्केट और इंडस्ट्रीज की दिशा भी तय करेंगी।
सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव खत्म करने की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब जाति आधारित रैलियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही वाहनों पर जाति बताने वाले स्लोगन या स्टीकर लगाने वालों पर चालान होगा। नए आदेश के अनुसार— एफआईआर, गिरफ्तारी मेमो, चार्जशीट और अन्य पुलिस दस्तावेजों में अब जाति का उल्लेख नहीं होगा। पुलिस रिकॉर्ड, नोटिस बोर्ड और थानों की सूची से भी जाति कॉलम हटाया जाएगा। अब अभियुक्त के पिता के नाम के साथ-साथ मां का नाम भी दर्ज किया जाएगा। सरकार का कहना है कि जातिगत पहचान को रिकॉर्ड में शामिल करना सामाजिक समरसता को प्रभावित करता है। इसी संदर्भ में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में आदेश दिया था कि एफआईआर और जब्ती मेमो से जाति का उल्लेख हटाया जाए। उसी दिशा में राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। क्या है आदेश की अहम बातें? सभी पुलिस फॉर्म, गिरफ्तारी/सरेंडर मेमो और अंतिम रिपोर्ट से जाति/जनजाति का उल्लेख हटेगा। अभियुक्तों के नाम के साथ मां का नाम भी दर्ज किया जाएगा। थानों और सार्वजनिक स्थानों से जाति का महिमामंडन करने वाले बोर्ड और स्टीकर तुरंत हटाए जाएंगे। सोशल मीडिया पर जाति आधारित भड़काऊ सामग्री पर भी कड़ी निगरानी होगी। हालांकि, SC-ST एक्ट जैसे मामलों में, जहाँ कानूनी रूप से जाति का उल्लेख जरूरी है, वहाँ यह नियम लागू नहीं होगा। हाईकोर्ट की टिप्पणी: न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने हाल ही में शराब तस्करी के एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि अभियुक्त की जाति दर्ज करना एक कानूनी भ्रांति और सामाजिक प्रोफाइलिंग है, जो संवैधानिक नैतिकता और लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। इसी आदेश के बाद सरकार ने पुलिस नियमावली में बदलाव और एसओपी तैयार करने का फैसला किया है। केंद्र सरकार के लिए सिफारिशें: हाईकोर्ट ने केंद्र से भी कहा है कि— मोटर वाहन नियमों में संशोधन कर वाहनों पर जाति आधारित स्लोगन/पहचान पर रोक लगाई जाए। सोशल मीडिया पर जाति का महिमामंडन करने वाली सामग्री पर कड़ी कार्रवाई हो। ऐसे मामलों की रिपोर्ट करने के लिए निगरानी तंत्र तैयार किया जाए। पृष्ठभूमि का मामला: यह आदेश उस मामले के बाद आया, जिसमें इटावा के जसवंतनगर थाने की पुलिस ने शराब तस्करी में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के दौरान उनके जातीय परिचय को जब्ती मेमो में दर्ज किया था। हाईकोर्ट ने इसे गलत ठहराते हुए इसे तुरंत समाप्त करने का आदेश दिया।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ