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पुतिन भारत दौरे पर: S-500 मिसाइल, परमाणु पनडुब्बी लीज और नया रुपया-रूबल पेमेंट सिस्टम; 25 साल की साझेदारी

रवि चौहान दिसम्बर 4, 2025 0
रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत के लिए रवाना
रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत के लिए रवाना

🇷🇺 भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 साल: पुतिन का भारत दौरा, S-500 मिसाइल, परमाणु पनडुब्बी और नए पेमेंट सिस्टम पर मेगा डील 

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन आज शाम करीब 6:30 बजे भारत दौरे पर पहुँच रहे हैं। यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। यह यात्रा न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए, बल्कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुतिन करीब 30 घंटे तक भारत में रहेंगे, और उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-रूस के बीच रणनीतिक संबंधों के 25 साल पूरे होने का उत्सव मनाना है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2000 में तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर करके की थी।

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका, के दबाव में रूसी तेल की खरीद कम कर रहा है और पुतिन स्वयं इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के गिरफ्तारी वारंट के कारण दूसरे देशों की यात्राओं से बच रहे हैं। इसके बावजूद, यह दौरा दोनों देशों के बीच 'स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' की असाधारण मजबूती को दर्शाता है।

इस यात्रा के दौरान भारत और रूस के बीच 9 अहम समझौते होने की संभावना है, जो रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों को कवर करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण रक्षा डील में S-400 मिसाइल के अपडेट वर्जन S-500 और अधिक संख्या में S-400 की खरीद शामिल है। इसके अलावा, करीब 2 अरब डॉलर की परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन (पनडुब्बी) लीज पर लेने की डील भी लगभग फाइनल हो गई है। एनर्जी के क्षेत्र में, पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण उत्पन्न होने वाली भुगतान समस्याओं को हल करने के लिए नए पेमेंट सिस्टम पर सहमति बनने की उम्मीद है।

यह विस्तृत आलेख पुतिन के भारत दौरे के एजेंडे का गहन भू-राजनीतिक, रक्षा और आर्थिक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें रणनीतिक साझेदारी के 25 साल का महत्व, S-500 और Su-57 जैसे अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों पर चर्चा, परमाणु पनडुब्बी लीज डील के सामरिक निहितार्थ, ऊर्जा कूटनीति और आर्कटिक परियोजनाओं में भारतीय निवेश की संभावनाएँ, रुपया-रूबल ट्रेड और नए पेमेंट सिस्टम की आवश्यकता, ICC वारंट के चलते पुतिन की यात्रा का जोखिम, और द्विपक्षीय व्यापार को $60 अरब डॉलर तक बढ़ाने के रोडमैप का 5000 शब्दों में विस्तृत मूल्यांकन किया गया है।


1. 🛡️ रक्षा सहयोग: S-500, पनडुब्बी और सैन्य आधुनिकीकरण

भारत-रूस संबंध की रीढ़ हमेशा से रक्षा सहयोग रही है। पुतिन की यात्रा में रक्षा क्षेत्र में कई गेमचेंजर समझौते होने की संभावना है।

1.1. S-400 और S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम

  • S-400 की सफलता: भारत पहले ही रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीद चुका है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई पाकिस्तानी जेट्स को मार गिराकर भारत के लिए गेमचेंजर साबित हुआ था।

  • S-500 की मांग: भारत अब S-400 के अपडेट वर्जन S-500 को खरीदने की डील कर सकता है। S-500 दुनिया के सबसे उन्नत एंटी-मिसाइल सिस्टम में से एक है।

    • क्षमता: S-500 लंबी दूरी से आने वाली मिसाइलों और हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी रोकने में सक्षम है, जिससे भारत की वायु रक्षा क्षमताएँ अगले स्तर पर पहुँच जाएँगी।

  • बढ़ावा: यह सौदा ऐसे समय में भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, जब उसे चीन और पाकिस्तान की ओर से हवाई खतरों का सामना करना पड़ रहा है।

1.2. परमाणु पनडुब्बी लीज डील (करीब $2 अरब)

  • डील फाइनल: पुतिन की यात्रा से ठीक पहले, भारत ने रूस से करीब 2 अरब डॉलर में परमाणु-संचालित अटैक सबमरीन लीज पर लेने की डील लगभग फाइनल कर ली है।

  • शर्तें और उद्देश्य:

    • यह सबमरीन भारत को 10 साल की लीज पर मिलेगी।

    • लीज की शर्तों के मुताबिक, इसे युद्ध में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

    • इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसैनिकों को ट्रेनिंग देना और देश की अपनी परमाणु पनडुब्बी क्षमता (INS अरिहंत क्लास) को मजबूत करने में मदद करना है।

  • सामरिक महत्व: परमाणु पनडुब्बियाँ किसी भी देश की नौसेना को पानी के नीचे लंबी अवधि तक रहने और वैश्विक महासागरों में गश्त करने की अद्वितीय क्षमता प्रदान करती हैं। यह डील हिंद महासागर में भारत की सामरिक उपस्थिति को मजबूत करेगी।

1.3. नेक्स्ट-जेनरेशन फाइटर जेट्स (Su-57)

  • भारत की ज़रूरत: भारतीय एयरफोर्स इस समय फाइटर जेट्स की कमी झेल रही है।

  • Su-57 पर चर्चा: Su-57 जैसे आधुनिक हथियारों पर बात आगे बढ़ाई जा सकती है।

  • लाभ: भारतीय एयरफोर्स के पास पहले से ही 200 से ज्यादा रूसी फाइटर जेट हैं, इसलिए नेक्स्ट जेनरेशन के रूसी लड़ाकू विमान को अपनाना उसके लिए परिचालन और लॉजिस्टिक की दृष्टि से आसान होगा।

  • HAL की भूमिका: हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहले से ही रूसी विमानों की मरम्मत और देखभाल करती रही है, जिससे Su-57 जैसे नए जेट की सर्विसिंग भी भारत में आसानी से हो सकेगी।


2. 💰 आर्थिक सहयोग और पेमेंट सिस्टम का संकट समाधान

यूक्रेन युद्ध के बाद लगे पश्चिमी प्रतिबंधों ने भारत-रूस के व्यापार में पेमेंट (भुगतान) को एक बड़ी बाधा बना दिया है, जिस पर इस यात्रा में निर्णायक चर्चा होगी।

2.1. नया पेमेंट सिस्टम बनाने पर सहमति

  • समस्या: रूस, भारत को सस्ता क्रूड ऑयल बेच रहा है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के कारण भुगतान में मुश्किलें आती रही हैं।

  • समाधान: दोनों देश एक नया पेमेंट सिस्टम बनाने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे व्यापार बिना रुकावट चलता रहे। इसमें निम्नलिखित विकल्प शामिल हो सकते हैं:

    • रुपया-रूबल ट्रेड: स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करना, जिससे डॉलर पर निर्भरता खत्म हो।

    • डिजिटल भुगतान: एक समर्पित डिजिटल भुगतान पुल या प्रणाली का निर्माण।

    • तीसरे देश के बैंक का इस्तेमाल: किसी ऐसे देश के बैंक का उपयोग करना जो पश्चिमी प्रतिबंधों से प्रभावित न हो।

2.2. एनर्जी कूटनीति और तेल खरीद की मांग

  • तेल खरीद की मांग: बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन जंग के बाद भारत की तेल खरीद 2.5% से बढ़कर 35% हो गई थी, लेकिन अमेरिकी 25% टैरिफ के कारण यह खरीद अब कम हो गई है। पुतिन चाहते हैं कि भारत दोबारा बढ़-चढ़कर तेल खरीदे।

  • आर्कटिक में निवेश: रूस, भारत को आर्कटिक रीजन की एनर्जी परियोजनाओं में निवेश का मौका भी दे सकता है। आर्कटिक में रूस दुनिया के बड़े तेल-गैस भंडार डेवलप कर रहा है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक दीर्घकालिक और रणनीतिक अवसर होगा।

2.3. द्विपक्षीय व्यापार का रोडमैप

  • लक्ष्य: दोनों देशों के बीच वर्तमान में करीब $60 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। इस यात्रा से 2030 के लिए नए आर्थिक रोडमैप को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

  • पुराना आधार: पुतिन आखिरी बार 2021 में आए थे, तब 28 समझौतों पर दस्तखत हुए थे। इस बार का फोकस रक्षा सौदों से आगे बढ़कर निवेश और व्यापार को बढ़ाना है।


3. 🌍 भू-राजनीतिक और राजनयिक निहितार्थ

पुतिन का भारत दौरा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक पकड़ और रूस के लिए भारत के महत्व को दर्शाता है।

3.1. ICC वारंट और जोखिम

  • पुतिन का आइसोलेशन: मार्च 2023 में ICC ने पुतिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके बाद से पुतिन दूसरे देशों की यात्राएं करने से बचते रहे हैं (वे पिछले साल G20 और इस साल ब्राजील में हुई G20 समिट में भी शामिल नहीं हुए)।

  • भारत का महत्व: भारत, ICC का सदस्य नहीं है, इसलिए पुतिन के लिए यहाँ यात्रा करना सुरक्षित है। यह दौरा दर्शाता है कि रूस के लिए भारत कितना महत्वपूर्ण सहयोगी है जो अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उसके साथ खड़ा है।

  • वैश्विक संदेश: यह यात्रा पश्चिमी देशों को एक मजबूत संदेश देती है कि भारत, रूस के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को अमेरिका या यूरोपीय देशों के दबाव में नहीं छोड़ेगा।

3.2. रणनीतिक साझेदारी के 25 साल

  • आधार: अक्टूबर 2000 में शुरू हुई 'स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' की साझेदारी आज 25 साल पूरे कर रही है।

  • भविष्य की साझेदारी: यह साझेदारी केवल हथियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष, नागरिक परमाणु ऊर्जा, और तकनीक में भी सहयोग करती है। यह यात्रा इन सभी क्षेत्रों में भविष्य की साझेदारी को मजबूत करेगी।


4. 🇮🇳 राजनयिक शिष्टाचार: स्वागत और एजेंडा

पुतिन का यह दौरा उच्च-स्तरीय राजनयिक गतिविधियों से भरा होगा।

4.1. यात्रा का कार्यक्रम

  • आगमन और डिनर: पुतिन आज शाम करीब 6:30 बजे भारत पहुंचेंगे। पीएम मोदी आज शाम उनके सम्मान में एक प्राइवेट डिनर की मेजबानी करेंगे।

  • पिछला दौरा: पुतिन आखिरी बार 6 दिसंबर 2021 को भारत की यात्रा की थी, तब वे सिर्फ 4 घंटे के लिए आए थे। इस बार वे करीब 30 घंटे तक भारत में रहेंगे।

  • SCO मुलाकात: दोनों नेताओं के बीच इस साल आखिरी मुलाकात 1 सितम्बर को चीन के तियानजिन में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी।


5. 🌟 निष्कर्ष

व्लादिमिर पुतिन का भारत दौरा जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत-रूस संबंधों की अटूट प्रकृति को प्रमाणित करता है। यह दौरा न केवल दोनों देशों के बीच 25 साल की रणनीतिक साझेदारी का जश्न है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि भारत को S-500 जैसे अत्याधुनिक रक्षा उपकरण और परमाणु पनडुब्बी जैसी सामरिक क्षमताएँ मिलती रहें।

सबसे महत्वपूर्ण है नए पेमेंट सिस्टम पर बनने वाली सहमति, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक व्यापार को निर्बाध रूप से जारी रखने का रास्ता खोलेगी। भारत इस यात्रा का उपयोग अपनी गुटनिरपेक्ष और बहु-संरेखित विदेश नीति की मजबूती को प्रदर्शित करने के लिए कर रहा है।

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दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

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मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

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ट्रम्प ग्रीनलैंड का फ्यूचर स्विट्जरलैंड में तय करेंगे
Trump's New Map: कनाडा और ग्रीनलैंड को दिखाया अमेरिका का हिस्सा; दावोस में नाटो चीफ संग इमरजेंसी बैठक; ग्रीनलैंड में सैन्य विमान तैनात।

ट्रम्प का 'ग्रेटर अमेरिका' प्लान: ग्रीनलैंड पर नाटो चीफ से फोन पर बात, दावोस में होगी इमरजेंसी बैठक; सोशल मीडिया पर शेयर किया ग्रीनलैंड-कनाडा-वेनेजुएला वाला 'नया नक्शा' वाशिंगटन/नुउक | 20 जनवरी 2026 दुनिया के सबसे बड़े द्वीप ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोमवार को नाटो (NATO) चीफ मार्क रूट से फोन पर लंबी बातचीत की, जिसके बाद ग्रीनलैंड मुद्दे को सुलझाने के लिए स्विट्जरलैंड के दावोस में एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इस कूटनीतिक हलचल के बीच ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विवादित नक्शा पोस्ट किया है, जिसमें कनाडा, ग्रीनलैंड और वेनेजुएला को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। यह नक्शा दुनिया भर में चर्चा और विवाद का विषय बन गया है। 1. ट्रम्प और नाटो चीफ की 'दावोस डील' ट्रम्प ने मार्क रूट के साथ हुई बातचीत को 'अति प्रभावशाली' बताया। शांति के लिए ताकत: ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गैर-परक्राम्य (Non-negotiable) है। उन्होंने कहा, "दुनिया में शांति केवल ताकत के जरिए ही आ सकती है, और अमेरिका सबसे ताकतवर है।" रूट का संदेश: ट्रम्प ने मार्क रूट का एक निजी संदेश साझा किया जिसमें रूट ने ट्रम्प की सीरिया और गाजा नीतियों की प्रशंसा की और ग्रीनलैंड मामले में 'रास्ता निकालने' की प्रतिबद्धता जताई। दावोस बैठक: ग्रीनलैंड के भविष्य और डेनमार्क के साथ जारी तनाव को कम करने के लिए दावोस में अंतरराष्ट्रीय हितधारकों की बैठक होगी। 2. ग्रीनलैंड में सैन्य टकराव की आहट: अमेरिका और डेनमार्क ने भेजे विमान कूटनीति के साथ-साथ जमीन पर सैन्य हलचल भी तेज हो गई है: अमेरिकी विमान: अमेरिका ने NORAD (North American Aerospace Defense Command) का एक सैन्य विमान ग्रीनलैंड के पिटुफिक स्पेस बेस (थुले एयर बेस) भेजा है। कमांड ने इसे 'नियमित रक्षा गतिविधि' बताया है। डेनमार्क का जवाब: डेनमार्क ने भी चुप बैठने के बजाय सोमवार को कई विमानों के जरिए अतिरिक्त सैनिक और भारी सैन्य उपकरण ग्रीनलैंड पहुंचाए। यूरोपीय मोर्चेबंदी: जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और फिनलैंड जैसे देश पहले ही 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' के तहत वहां अपने सैनिक भेज चुके हैं, जिसे ट्रम्प प्रशासन एक चुनौती के रूप में देख रहा है। 📊 ग्रीनलैंड का सैन्य ढांचा: वर्तमान तैनाती पक्ष यूनिट / बेस सैनिक संख्या मुख्य कार्य अमेरिका पिटुफिक स्पेस बेस (थुले) ~150-200 मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी। डेनमार्क जॉइंट आर्कटिक कमांड ~150-200 संप्रभुता रक्षा, सर्च एंड रेस्क्यू। स्पेशल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल 12-14 कुत्तों की स्लेज से आर्कटिक गश्त। NATO (EU) आर्कटिक एंड्योरेंस ~40-50 राजनीतिक एकजुटता का संदेश। 3. 'ग्रेटर अमेरिका' मैप: कनाडा और वेनेजुएला पर नजर? ट्रम्प द्वारा साझा किए गए नक्शे ने राजनयिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विस्तारवाद: नक्शे में न केवल ग्रीनलैंड, बल्कि कनाडा और वेनेजुएला को भी अमेरिका के हिस्से के रूप में रंगा गया है। कनाडा का रुख: कनाडा ने फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन इसे ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के चरम विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। वेनेजुएला: दक्षिण अमेरिका के तेल समृद्ध देश वेनेजुएला को अमेरिकी नक्शे में दिखाना ट्रम्प की ऊर्जा सुरक्षा नीति का हिस्सा माना जा रहा है। 4. ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए 'गोल्ड माइन' क्यों है? ट्रम्प की इस जिद के पीछे ठोस आर्थिक और रणनीतिक कारण हैं: प्राकृतिक संसाधन: ग्रीनलैंड में 'रेयर अर्थ एलिमेंट्स' (Rare Earth Elements) का भंडार है। वर्तमान में चीन इनका 90% उत्पादन नियंत्रित करता है। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चीन की निर्भरता खत्म कर देगा। नई शिपिंग रूट्स: ग्लोबल वार्मिंग से बर्फ पिघल रही है, जिससे आर्कटिक में नए व्यापारिक रास्ते खुल रहे हैं। अमेरिका इन रास्तों पर अपना प्रभुत्व चाहता है। मिसाइल डिफेंस: यह रूस और अमेरिका के बीच सबसे छोटा हवाई मार्ग है, जो मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। रणनीतिक घेराबंदी: यहाँ से अमेरिका रूस और चीन की आर्कटिक गतिविधियों पर सीधी नजर रख सकता है। 5. कानूनी पेच: क्या ग्रीनलैंड को खरीदा जा सकता है? नाटो के नियमों के मुताबिक, यह प्रक्रिया लगभग असंभव है: Article 5 का उल्लंघन: अमेरिका और डेनमार्क दोनों नाटो सदस्य हैं। एक सदस्य दूसरे की जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता। जनमत संग्रह (Referendum): 2009 के 'सेल्फ गवर्नमेंट एक्ट' के अनुसार, ग्रीनलैंड के लोग केवल जनमत संग्रह के जरिए ही स्वतंत्र हो सकते हैं या किसी अन्य देश के साथ जुड़ने का फैसला ले सकते हैं। डेनिश संसद की मंजूरी भी अनिवार्य है। 6. आर्थिक युद्ध: यूरोप का 'ट्रेड बाजूका' यूरोपीय संघ (EU) ने ट्रम्प के 10% टैरिफ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रेड बाजूका: EU अपने 'एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट' का इस्तेमाल कर अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने और 750 बिलियन डॉलर के ऊर्जा समझौते को रद्द करने की धमकी दे रहा है। 1 फरवरी की डेडलाइन: ट्रम्प का टैरिफ 1 फरवरी से लागू होगा, जिससे ट्रांस-अटलांटिक व्यापारिक संबंध अब तक के सबसे बुरे दौर में पहुँच सकते हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
अमेरिकी धमकी के बाद 7 देशों के सैनिक ग्रीनलैंड पहुंचे

ट्रम्प ने 8 यूरोपीय देशों पर लगाया 10% टैरिफ; जवाब में NATO ने तैनात किए सैनिक; ट्रेड वॉर की शुरुआत।

दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला

ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या

गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

अमेरिकी राजदूत की ईरान को चेतावनी
ट्रम्प की चेतावनी के बाद झुका ईरान, रुकी 800 लोगों की फांसी; अमेरिका ने लगाए नए प्रतिबंध।

ईरान पर UNSC की आपात बैठक: अमेरिका की 'सैन्य विकल्प' की चेतावनी; ट्रम्प के खौफ से 800 की फांसी रुकी; 180 घंटे से देश में 'डिजिटल ब्लैकआउट' संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में गुरुवार (15 जनवरी 2026) को ईरान संकट पर हुई आपात बैठक के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तीखी हो गई। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट शब्दों में तेहरान को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नरसंहार रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं और उनके पास 'सभी विकल्प' खुले हैं। 1. माइक वाल्ट्ज का अल्टीमेटम: "ट्रम्प एक्शन वाले इंसान हैं" UNSC में अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने ईरान के शासन को आईना दिखाते हुए कहा कि दुनिया अब और खामोश नहीं रहेगी। बहादुरी को सलाम: वाल्ट्ज ने उन ईरानी प्रदर्शनकारियों की सराहना की जो गोलियों के सामने खड़े होकर आजादी मांग रहे हैं। सीधी चेतावनी: उन्होंने कहा कि ट्रम्प केवल बातें नहीं करते, एक्शन लेते हैं। ईरान को समझ लेना चाहिए कि अगर क्रूरता नहीं रुकी, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। व्हाइट हाउस का दावा: प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने पुष्टि की कि ट्रम्प के सीधे दबाव के कारण ही ईरान ने अंतिम समय में 800 कैदियों की फांसी टाल दी है। 2. ईरान का पलटवार: "टकराव नहीं, लेकिन हमला हुआ तो जवाब देंगे" ईरान के उप-राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिकी आरोपों को 'झूठा' और 'दुष्प्रचार' बताया। इल्जाम: ईरान का दावा है कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी ताकतें हैं जो अशांति फैलाकर 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) करना चाहती हैं। जवाबी हमला: दर्जी ने कहा कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन अगर अमेरिका ने कोई भी आक्रामक कदम उठाया, तो उसे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत "निर्णायक जवाब" दिया जाएगा। 📊 ईरान संकट: UNSC की बैठक के मुख्य बिंदु और डेटा श्रेणी विवरण और आंकड़े मौत का तांडव मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 3,428 प्रदर्शनकारी मारे गए। गिरफ्तारियां अब तक 18,000 से अधिक लोग जेलों में बंद। नए प्रतिबंध अमेरिका ने अली लारीजानी समेत 18 व्यक्तियों/संस्थाओं को ब्लैकलिस्ट किया। डिजिटल ब्लैकआउट 8 जनवरी से अब तक 180+ घंटे से इंटरनेट बंद (कनेक्टिविटी महज 1%)। वैश्विक रुख अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस (निंदा) बनाम रूस, चीन (हस्तक्षेप का विरोध)। 3. रूस और पश्चिमी देशों के बीच 'कोल्ड वॉर' सुरक्षा परिषद में ईरान को लेकर दुनिया दो धड़ों में बंट गई है: रूस की आपत्ति: रूसी राजदूत वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अपनी आक्रामकता को सही ठहराने के लिए UNSC का इस्तेमाल कर रहा है। रूस ने चेतावनी दी कि ईरान पर हमले से पूरा मिडिल ईस्ट खून-खराबे में डूब जाएगा। यूरोपीय देशों का रुख: ब्रिटेन और फ्रांस ने ईरान की कार्रवाई को "क्रूर दमन" बताया और तेहरान पर नए कड़े प्रतिबंधों का समर्थन किया। 4. 180 घंटे का सन्नाटा: ईरान में 'डिजिटल दीवार' ईरान में इंटरनेट की स्थिति को 'डिजिटल ब्लैकआउट' घोषित किया गया है। नेट ब्लॉक के अनुसार, 9 करोड़ की आबादी को दुनिया से पूरी तरह काट दिया गया है। उद्देश्य: सरकार नहीं चाहती कि सुरक्षा बलों की बर्बरता के वीडियो दुनिया तक पहुँचें। प्रभाव: बैंकिंग सेवाएं, फोन लाइनें और सोशल मीडिया पूरी तरह ठप हैं। यह ईरान के इतिहास की सबसे लंबी सेंसरशिप है। 5. क्यों सुलग रहा है ईरान? (प्रमुख कारण) आर्थिक पतन: रियाल की वैल्यू गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है ($1 = ~14.5 लाख रियाल)। महंगाई की मार: चाय और ब्रेड जैसी बुनियादी चीजों पर 70% तक महंगाई बढ़ गई है। सत्ता के खिलाफ गुस्सा: प्रदर्शनकारी अब केवल सुधार नहीं, बल्कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई का इस्तीफा और राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 16, 2026 0
ट्रम्प पाकिस्तान-बांग्लादेश समेत 75 देशों के लिए वीजा सर्विस रोकेंगे

अमेरिका ने 75 देशों के लिए इमिग्रेंट वीजा रोका; पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल सूची में शामिल।

ईरान की ओर बढ़ रहा अमेरिकी वॉरशिप

ट्रम्प का ईरान पर 'साउदर्न स्पीयर' जैसा हमला? दक्षिण चीन सागर से रवाना हुआ अमेरिकी नौसेना का सबसे ताकतवर बेड़ा।

अमेरिका की धमकी के बाद ईरान पीछे हटा

ईरानी विदेश मंत्री बोले- फांसी की कोई योजना नहीं; भारत ने जारी की हाई-लेवल एडवायजरी।

थाइलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर क्रेन गिरी, 30 की मौत
Thailand Train Accident: थाईलैंड में पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 की मौत, 67 घायल; छात्रों से भरी थी ट्रेन।

थाईलैंड ट्रेन हादसा: 65 फीट ऊंचाई से पैसेंजर ट्रेन पर गिरी क्रेन; 30 लोगों की मौत, 67 घायल; ट्रेन में सवार थे 195 छात्र थाईलैंड के नाखोन राचासिमा प्रांत में बुधवार को एक हृदयविदारक रेल दुर्घटना हुई। एक निर्माणाधीन रेल ब्रिज पर काम कर रही विशालकाय क्रेन अचानक 65 फीट की ऊंचाई से तेज रफ्तार पैसेंजर ट्रेन पर गिर गई। इस जघन्य हादसे में अब तक 30 लोगों की जान जा चुकी है और 67 यात्री गंभीर रूप से घायल हैं। 1. कैसे हुआ हादसा? (घटनाक्रम) समय और स्थान: यह दुर्घटना बुधवार को नाखोन राचासिमा प्रांत के सिखियो जिले में हुई। ट्रेन राजधानी बैंकॉक से उबोन राचाथानी की ओर जा रही थी। तेज रफ्तार: हादसे के समय ट्रेन लगभग 120 किमी/घंटा की रफ्तार से चल रही थी। अचानक प्रहार: रेल ब्रिज के निर्माण में लगी क्रेन अचानक ट्रेन के तीन डिब्बों पर गिर गई। क्रेन का वजन और ऊंचाई इतनी अधिक थी कि ट्रेन का एक डिब्बा दो हिस्सों में कट गया। आग और विस्फोट: स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्रेन गिरने के बाद दो जोरदार धमाके हुए और डिब्बों में भीषण आग लग गई। 2. हताहतों का विवरण: डिब्बों में फंसे थे छात्र ट्रेन में कुल 195 लोग सवार थे, जिनमें से अधिकांश स्कूल के छात्र थे। मौत: अब तक 30 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव दल ने मलबे से शव निकालने का काम जारी रखा है। घायल: 67 घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। ड्राइवर की स्थिति: क्रेन इतनी अचानक गिरी कि ड्राइवर को आपातकालीन ब्रेक लगाने का भी मौका नहीं मिला। 📸 हादसे की भयावहता: मुख्य बिंदु विवरण प्रभाव क्रेन की ऊंचाई 65 फीट से सीधी टक्कर। ट्रेन की गति 120 किमी/घंटा। नुकसान ट्रेन के डिब्बे पटरी से उतरे, दो हिस्सों में कटे और आग लगी। रेस्क्यू ऑपरेशन कटर मशीनों से डिब्बे काटकर यात्रियों को निकाला गया। 3. जांच और लापरवाही के सवाल रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच की जा रही है: सुरक्षा नियमों का उल्लंघन: क्या ब्रिज निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? तकनीकी विफलता: क्या क्रेन में कोई यांत्रिक खराबी थी या यह मानवीय चूक का परिणाम है?

रवि चौहान जनवरी 14, 2026 0
लश्कर के आतंकी की हिंदुओं का गला काटने की धमकी

eT Terrorist Abu Musa Threatens Hindus: 'गर्दन काटने' की धमकी; पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड अबू मूसा PoK में सक्रिय।

ट्रम्प बोले- ग्रीनलैंड पर कब्जे से कम कुछ मंजूर नहीं

क्या ग्रीनलैंड बनेगा अमेरिका का 51वां राज्य? NATO टूटने का खतरा; डेनमार्क की चेतावनी।

ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज

क्या रद्द होंगे ट्रम्प के ग्लोबल टैरिफ? भारत और चीन की नजर; IEEPA कानून का सच।

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