उत्तर प्रदेश

ऑनलाइन गेम की लत ने लखनऊ के बेटे को बना दिया दरिंदा, मां की हत्या कर हुआ फरार — फतेहपुर से हुआ गिरफ्तार

रवि चौहान अक्टूबर 7, 2025 0
पुलिस गिरफ्त में हत्यारोपी बेटा
पुलिस गिरफ्त में हत्यारोपी बेटा
सरकार और सिस्टम की मिलीभगत से देश भर में खुलेआम चल रहे ऑनलाइन सट्टे ने एक और परिवार को बर्बाद कर दिया। दिल दहला देने वाला मामला लखनऊ के बाबूखेड़ा यादव गांव से सामने आया है जहां 
 20 साल बेटे ने ऑनलाइन गेम ‘Aviator’ की लत और लोन ऐप्स के जाल में फंसकर अपनी ही मां की बेरहमी से हत्या कर दी।
मामला रायबरेली रोड स्थित कल्ली पश्चिम इलाके का है। मृतका का नाम रेनू यादव था, जिनकी हत्या उनके मझले बेटे निखिल यादव उर्फ गोलू (20) ने की।
निखिल ने पुलिस को बताया कि वह ऑनलाइन गेम Aviator खेलने का आदी हो गया था और इसी गेम में वह करीब 24 हजार रुपये हार गया। नुकसान की भरपाई के लिए उसने पहले अपनी मां के गहने चोरी कर बेच दिए थे।
लेकिन जब वह दूसरी बार फिर गहने चोरी करने की कोशिश कर रहा था, तभी मां ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। डर और गुस्से में उसने पेचकस और गैस सिलेंडर से मां के सिर पर कई बार वार किए। मौके पर ही रेनू की मौत हो गई।
हत्या के बाद निखिल पिता की बाइक लेकर भाग निकला। वह प्रयागराज और फिर फतेहपुर पहुंचा, जहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

💰 ऑनलाइन लोन ऐप्स ने बढ़ाया दबाव
पुलिस जांच मे सामने आया कि निखिल ने नुकसान की भरपाई के लिए कई ऑनलाइन लोन ऐप्स से कर्ज लिया था।
उसने MPOKKET ऐप से ₹25,000, FLASH WALLET से ₹2,600 और RAM Fincorp से ₹2,000 का लोन लिया।
इन ऐप्स की सबसे खतरनाक बात यह है कि वे तुरंत लोन तो देते हैं, लेकिन भारी ब्याज, छिपे शुल्क और ब्लैकमेलिंग जैसी हरकतों में शामिल होते हैं।
लोन वसूली के लगातार दबाव ने निखिल को और तनावग्रस्त कर दिया।
त्योहार के समय उसने कुछ और कर्ज लिए थे, जिनकी किश्तें वह चुका नहीं पा रहा था।
यही आर्थिक दबाव और गेमिंग लत मिलकर एक खतरनाक विस्फोट में बदल गए — और उसने अपनी मां की जान ले ली।

 

 
घटना का खुलासा
डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल के अनुसार, निखिल को फतेहपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है।
उसके पास से मां के गहने, मोबाइल और हत्या में इस्तेमाल किया गया पेचकस बरामद हुआ है।
हत्या के बाद आरोपी ने पिता, दोस्त और मामा को फोन कर झूठा ड्रामा रचा कि कुछ लोग मां पर हमला कर रहे हैं और वह खुद बचकर भागा है।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी को अपनी हरकत पर जरा भी पछतावा नहीं था
उसने बिना किसी अपराधबोध के सब कुछ बताया।

 


⚠️ ऑनलाइन गेम्स युवाओं को बना रहे हैं मानसिक कैदी
भारत में तेजी से फैलते ऑनलाइन गेम्स युवाओं के भविष्य को निगल रहे हैं।
Aviator, Teen Patti, Dream11, Rummy Circle जैसे गेम्स युवाओं को जल्दी पैसा कमाने का झांसा देकर सट्टेबाजी और कर्ज के जाल में फंसा रहे हैं।
हर साल सैकड़ों युवा या तो अपराध की राह पकड़ लेते हैं या आत्महत्या कर लेते हैं।

 


⚖️ जब सरकार और सिस्टम चुप है, तब अपराध बढ़ना तय है...
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकार और सरकारी सिस्टम इन ऑनलाइन गेम्स और लोन ऐप्स को खुली छूट दे रहा है।
ये प्लेटफॉर्म खुलेआम युवाओं को जुए और कर्ज के दलदल में धकेल रहे हैं,
फिर भी न तो कोई ठोस कानून बन रहा है और न कोई सख्त कार्रवाई हो रही है।

 

यहां तक कि कई अदालतों ने भी ऑनलाइन गेमिंग को “मनोरंजन” की श्रेणी में रखकर वैध ठहरा दिया है,
जबकि हकीकत यह है कि यह मनोरंजन नहीं, बल्कि डिजिटल नशा बन चुका है जो युवाओं की सोच, संवेदना और भविष्य — तीनों को खा रहा है।
सरकारें टैक्स और विज्ञापन के लालच में इन पर आंखें मूंदे बैठी हैं,
लेकिन इसी लापरवाही के कारण अब समाज में ऐसे अपराध जन्म ले रहे हैं,
जहाँ बेटा गेम में हारे पैसे निकालने के लिए अपनी ही मां की जान ले लेता है।

 

अगर सिस्टम अब भी नहीं जागा, तो आने वाले वर्षों में
"ऑनलाइन गेमिंग" भारत में अपराध, कर्ज और पारिवारिक विघटन का सबसे बड़ा कारण बन जाएगी। 

 

⚠️ समाज के लिए चेतावनी
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है।
ऑनलाइन गेम्स और लोन ऐप्स ने युवाओं की सोच और संवेदनाओं को निगलना शुरू कर दिया है।
माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर ध्यान दें — क्योंकि आज जो “गेम” लगता है, वही कल “गुनाह” बन सकता है।
 

 

क्यों आवाज उठाना जरूरी है
  1. क्योंकि ये केवल “एक परिवार” का मामला नहीं है:
    आज निखिल ने अपनी मां की जान ली, कल कोई और बेटे या बेटी का नाम खबरों में होगा।
    ऑनलाइन गेम, सट्टा और लोन ऐप्स जिस तरह से युवाओं की सोच को बिगाड़ रहे हैं,
    वो हर घर के लिए खतरा है।
  2. क्योंकि सिस्टम सोया हुआ है:
    सरकार और कोर्ट इन गेम्स को “मनोरंजन” कहकर छोड़ देते हैं,
    लेकिन इनकी असली तस्वीर — नशे, कर्ज और अपराध की है।
    जब तक जनता आवाज नहीं उठाएगी, कानून नहीं बनेगा।
  3. क्योंकि सोशल मीडिया पर ही बदलाव की ताकत है:
    जब जनता सोशल मीडिया पर शोर मचाती है, तभी नीति-निर्माता ध्यान देते हैं।
    चुप रहना अब विकल्प नहीं है।

📢 कैसे आवाज उठाई जा सकती है
  1. सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाएं:
    #BanAviatorGame #StopOnlineGambling जैसे हैशटैग ट्रेंड कराएं।
    छोटे-छोटे वीडियो, रील्स या पोस्ट बनाकर लोगों को जागरूक करें।
  2. स्कूल–कॉलेज में संवाद की शुरुआत करें:
    टीचर, पैरेंट्स और स्टूडेंट्स को मिलकर इस पर ओपन टॉक करनी चाहिए —
    कि ये गेम्स कैसे काम करते हैं, और कैसे नुकसान पहुंचाते हैं।
  3. जन प्रतिनिधियों से सवाल करें:
    स्थानीय विधायक या सांसद से पूछें कि सरकार इन ऐप्स पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही।
    RTI या ऑनलाइन याचिका दाखिल करना भी एक प्रभावी कदम है।
  4. मीडिया में दबाव बनाए रखें:
    ऐसे अपराधों को केवल “क्राइम न्यूज़” की तरह नहीं,
    बल्कि सोशल अलर्ट की तरह लगातार उठाया जाना चाहिए।

💬 समाज के लिए संदेश

 

अगर हम अभी नहीं बोले,
तो आने वाले समय में “डिजिटल नशा” हमारे घरों, रिश्तों और समाज की जड़ों को खोखला कर देगा।
सरकार, अदालत और तकनीकी कंपनियाँ तभी कदम उठाएँगी,
जब जनता इनसे जवाब माँगेगी।

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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

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मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

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75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

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दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो
Shankaracharya Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration: माघ मेला प्रशासन ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम; शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस चस्पा।

प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य की पदवी पर आर-पार; प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'क्या अब प्रशासन तय करेगा कि मैं शंकराचार्य हूं या नहीं?' प्रयागराज | 20 जनवरी 2026 संगम नगरी प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद ने अब बेहद उग्र रूप ले लिया है। मेला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शंकराचार्य के शिविर पर नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर यह साबित करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिख रहे हैं। वहीं, सड़क पर धरना दे रहे अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और संतों का अपमान करार दिया है। 1. रात 12 बजे नोटिस और सुबह की गहमागहमी प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब कानूनी नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मिडनाइट ड्रामा: सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। हालांकि, शिष्यों ने यह कहकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। नोटिस चस्पा: मंगलवार सुबह प्रशासन ने दोबारा शिविर का रुख किया और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। मुख्य आधार: नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के पद पर अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने पर रोक लगाई गई थी। 2. अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: 'प्रशासन की बंदूक, सुप्रीम कोर्ट का कंधा' नोटिस के जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सरकार के विरोधाभास: उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान खुद सरकार ने एक आधिकारिक पत्रिका छापी थी, जिसमें उन्हें 'शंकराचार्य' के रूप में संबोधित किया गया था। अब प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। पद की गरिमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई जिलाधिकारी या देश का राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही करेंगे। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं, अब प्रशासन को और क्या प्रमाण चाहिए?" 📊 विवाद के मुख्य बिंदु: पद, परंपरा और कानून श्रेणी प्रशासन का तर्क (नोटिस) शंकराचार्य का तर्क (जवाब) कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केस लंबित रहने तक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। कोर्ट ने पद पर बैठने से रोका है, लेकिन मान्यता संतों से मिलती है। शिविर का बोर्ड बोर्ड पर "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" लिखना कोर्ट की अवहेलना है। सरकार ने खुद अपनी पत्रिका में मुझे शंकराचार्य छापा है। मान्यता पदवी विवादित है (अविमुक्तेश्वरानंद बनाम वासुदेवानंद)। अन्य पीठों के शंकराचार्य मुझे स्वीकार करते हैं, यही सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्तमान स्थिति 24 घंटे में प्रमाण देने का अल्टीमेटम। जब तक माफी नहीं, तब तक आश्रम में प्रवेश नहीं; फुटपाथ पर रहेंगे। 3. मौनी अमावस्या का वो विवाद जिसने आग सुलगाई इस पूरे विवाद की जड़ 18 फरवरी (मौनी अमावस्या) को हुई घटना है। पालकी रोकने पर बवाल: शंकराचार्य पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। झड़प और हिरासत: शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पालकी को खींचकर संगम से 1 किमी दूर कर दिया था। प्रायश्चित धरना: इसी अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने शिविर त्याग दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर मेले में आएंगे, लेकिन प्रशासन के व्यवहार के विरोध में फुटपाथ पर ही रहेंगे। 4. ज्योतिषपीठ का पुराना विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है। प्रशासन इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक पदवी को चुनौती दे रहा है, जबकि शंकराचार्य इसे अपनी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
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मेरठ का 'ज्वालागढ़ कांड': रोनू कश्यप की 'क्रूर' हत्या पर गरमाई यूपी की सियासत; अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर ने खोला मोर्चा; 18 को महापंचायत मेरठ का सरधना क्षेत्र इस समय उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। कपसाड़ कांड की तपिश अभी शांत भी नहीं हुई थी कि उससे सटे ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक रोनू उर्फ सोनू कश्यप (28) की वीभत्स हत्या ने सूबे के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। जहाँ पुलिस इसे आपसी विवाद और नाबालिग का कृत्य बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'ज़िंदा जलाने' की अमानवीय घटना करार देकर योगी सरकार को कानून-व्यवस्था पर घेर रहा है। 1. क्या है ज्वालागढ़ कांड? (क्राइम फाइल) 5 जनवरी 2026 (सोमवार) को मेरठ के सरधना में अक्खेपुर-रार्धना रोड पर एक अधजली लाश मिली। मृतक की पहचान मुजफ्फरनगर के रोनू कश्यप के रूप में हुई। पुलिस की थ्योरी: पुलिस के अनुसार, रोनू और एक 16 वर्षीय टेंपो चालक के बीच टेंपो में तेज गाना बजाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी ने पहले रोनू को शराब पिलाई, फिर ईंट से सिर वार कर उसकी हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए शव को घसीटकर पत्तों और मोबिल ऑयल से जला दिया। परिजनों का आरोप: परिवार और स्थानीय लोगों का दावा है कि रोनू को ज़िंदा जलाया गया है और इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई लोग शामिल हैं। चंद्रशेखर आजाद ने आरोप लगाया है कि रोनू से 80,000 रुपये भी लूटे गए थे। 📊 पीड़ित परिवार की मार्मिक स्थिति सदस्य स्थिति रोनू कश्यप (मृतक) परिवार का इकलौता सहारा, मुंबई में हलवाई का काम करता था। बुजुर्ग माँ गंभीर रूप से बीमार, बेटे की शादी के सपने देख रही थीं। बड़ा भाई टीबी (TB) का मरीज, लंबे समय से इलाज चल रहा है। बड़ी बहन अविवाहित, दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। मकसद रोनू अपनी शादी के लिए लड़की देखने मुजफ्फरनगर से गांव आया था। 2. सियासी 'ज्वाला': अखिलेश, मायावती और चंद्रशेखर के कड़े तेवर इस घटना ने ठाकुर बनाम कश्यप (पिछड़ा वर्ग) का रंग ले लिया है, जिससे विपक्ष को 'PDA' और 'दलित-पिछड़ा' राजनीति को धार देने का मौका मिल गया है। अखिलेश यादव (सपा): उन्होंने इसे 'दबंगों का कुकृत्य' बताते हुए ट्वीट किया— "हम पूरे PDA समाज की तरफ से आवाज़ उठाते हैं। न्याय हो!" मायावती (BSP): बसपा सुप्रीमो ने इसे अति क्रूर और शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने शासन-प्रशासन से अपराधियों के मन में 'कानून का डर' पैदा करने की मांग की। चंद्रशेखर आज़ाद (आसपा): नगीना सांसद ने इसे मानवता को शर्मसार करने वाला अपराध बताया। उन्होंने मांग की कि आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी व मुआवजा मिले। चंद्रशेखर ने जल्द ही पीड़ित परिवार से मिलने का ऐलान किया है। नरेंद्र कश्यप (राज्यमंत्री): सरकार की ओर से डैमेज कंट्रोल के लिए राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप 14 जनवरी को मेरठ पहुँच रहे हैं। 3. स्थानीय विरोध और 18 जनवरी की महापंचायत अतुल प्रधान की सक्रियता: सरधना विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मिलकर 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की है और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर पुलिस पर दबाव बनाया है। कश्यप समाज का आक्रोश: 12 जनवरी को मुजफ्फरनगर डीएम कार्यालय पर भारी प्रदर्शन हुआ। अब कश्यप समाज ने 18 जनवरी 2026 (रविवार) को दौराला में एक विशाल 'शोक सभा' और पंचायत बुलाई है, जिसमें आगे के आंदोलन की रूपरेखा तय होगी। 4. पुलिस की जांच और 'नाबालिग' का पेंच मेरठ पुलिस के लिए यह केस सिरदर्द बन गया है। साक्ष्य: पुलिस ने शराब के पाउच के बारकोड और ठेके के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज से आरोपी को ट्रैक किया। विवाद: पुलिस ने 24 घंटे में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि पुलिस मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए केवल एक नाबालिग पर ठीकरा फोड़ रही है।

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