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छत्तीसगढ़ में ISIS का डिजिटल जाल: नाबालिगों को गेमिंग, इंस्टाग्राम और डार्क वेब के जरिए ब्रेनवॉश करने का खुलासा

रवि चौहान नवम्बर 22, 2025 0
छत्तीसगढ़ में ISIS का डिजिटल जाल: नाबालिगों को गेमिंग
छत्तीसगढ़ में ISIS का डिजिटल जाल: नाबालिगों को गेमिंग

भूमिका : एक खामोश खतरा जो घरों के भीतर पल रहा था

 

पिछले कुछ वर्षों से भारत में आतंकवादी संगठनों द्वारा डिजिटल माध्यमों से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिशों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इंटरनेट की दुनिया जितनी तेज़ी से फैली, उतनी ही तेजी से इसके काले कोने भी सक्रिय होते गए। सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म, इंस्टेंट चैटिंग ऐप और डार्क वेब—ये सब अब सिर्फ तकनीकी शब्द नहीं रह गए, बल्कि अपराधियों और आतंकी संगठनों के लिए हथियार बन चुके हैं।

छत्तीसगढ़ की एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने हाल ही में एक ऐसा मामला उजागर किया, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। यह सिर्फ एक साइबर क्राइम या फेक अकाउंट का मामला नहीं था, बल्कि दो नाबालिग बच्चों के दिमाग को डिजिटल जिहाद की तरफ मोड़ने की साज़िश थी—एक ऐसी साज़िश, जो पूरी तरह मोबाइल स्क्रीन के अंदर चुपचाप चल रही थी और जिसकी भनक तक परिवारों को नहीं लगी।

ATS ने रायपुर और भिलाई से 2 नाबालिगों को पकड़ा। दोनों स्कूल के साधारण स्टूडेंट थे—10वीं और 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले। एक के पिता CRPF में जवान, दूसरे के पिता ऑटो चलाते हैं। यानी दोनों आम, सरल, मेहनती परिवारों से आने वाले बच्चे। लेकिन इंटरनेट की दुनियों में वे ऐसे नेटवर्क से जुड़ चुके थे जो पाकिस्तान में बैठे ISIS हैंडलर्स द्वारा संचालित किया जा रहा था।

कहानी यहीं से शुरू नहीं होती। इसकी शुरुआत सोशल मीडिया की एक छोटी-सी रिपोर्ट से होती है और धीरे-धीरे यह उस नेटवर्क तक पहुँचती है, जहाँ ISIS के डिजिटल ट्रेनर्स बच्चों को जिहादी मिशन के लिए तैयार कर रहे थे—वह भी केवल मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करके।

 


पहला अध्याय — एक छोटी-सी शिकायत, और आतंक की एक बड़ी दुनिया खुली

 

ATS के अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले की शुरुआत एक बिलकुल साधारण-सी सोशल मीडिया मॉनिटरिंग शिकायत से हुई। सोशल मीडिया पर एक कंटेंट की शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें धार्मिक और हिंसक सामग्री शामिल थी। यह कंटेंट किसने पोस्ट किया था? किस ग्रुप से आया था? शिकायत दर्ज होने पर ATS की साइबर टीम ने सामान्य जांच शुरू की, लेकिन जांच के शुरुआती 48 घंटों में जो सामने आया, उसने उन्हें चौकन्ना कर दिया।

सोशल मीडिया पर एक इंस्टाग्राम ग्रुप बार-बार उनकी निगरानी में दिख रहा था। ग्रुप का नाम और उसका आइकन इस बात का संकेत दे रहा था कि यह ISIS समर्थक किसी फर्जी नेटवर्क से जुड़ा हुआ हो सकता है। गहराई से जब इस ग्रुप के सदस्यों की जांच की गई, तो पता चला—

 

दो भारतीय नाबालिग इस प्रतिबंधित ग्रुप में लगातार एक्टिव थे।

 

वे न सिर्फ ग्रुप में मौजूद थे, बल्कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के साथ अलग-अलग चैट मॉड्यूल में भी बात कर रहे थे। पहली नजर में यह एक साइबर अपराध जैसा लग सकता था, लेकिन जब ATS ने चैट, वीडियो, वॉयस नोट्स और मैप क्लिपिंग्स की जांच शुरू की, मामला बेहद गंभीर हो गया।

ATS टीम ने अगले लगभग डेढ़ साल तक इन दोनों नाबालिगों को चुपचाप मॉनिटर किया।
निगरानी सिर्फ डिजिटल नहीं, बल्कि ह्यूमन सर्विलांस भी थी—यानि ऑफलाइन लाइफ को भी चेक किया गया।

और जितना ज़्यादा देखा गया, उतनी ही गहरी यह साज़िश सामने आती गई।

 


दूसरा अध्याय — इंस्टाग्राम का “सीक्रेट नेटवर्क” और हिंसा का ग्लैमर

 

ISIS का नेटवर्क अब पहले जैसा जमीन-आधारित नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में उसके फिजिकल कैंप लगभग खत्म हो चुके हैं, इसलिए उन्होंने तकनीक का नया रास्ता चुना—डिजिटल ब्रेनवॉशिंग।

ATS की जांच में पता चला कि पाकिस्तान में बैठे ISIS हैंडलर्स इंस्टाग्राम, गेमिंग ग्रुप्स और डार्क वेब के माध्यम से बच्चों तक पहुंच रहे थे। इन नाबालिगों का डिजिटल व्यवहार लगातार ट्रैक हो रहा था। इंस्टाग्राम का एल्गोरिद्म स्वयं हिंसक वीडियो, धार्मिक संघर्ष और युद्ध से जुड़े कंटेंट उन यूजर्स को सुझाव देता है, जो ऐसे विषयों पर अधिक समय बिताते हैं।

इन दोनों बच्चों का ऑनलाइन व्यवहार भी इसी दिशा में झुक रहा था—

  • एक बच्चा गेमिंग में बहुत एक्टिव था।

  • दूसरा इंस्टाग्राम पर धार्मिक बहस और विवादित कंटेंट देखता था।

यहीं से हैंडलर्स ने उन्हें टारगेट करना शुरू किया।

पहले यह सिलसिला शुरू हुआ मोटिवेशनल और धार्मिक पोस्ट से।

धीरे-धीरे इन्हें ऐसी सामग्री भेजी जाने लगी जिसमें युद्ध, हथियार, धमाके और हिंसा के ग्लैमर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता था।

फिर एक दिन हैंडलर्स ने दोनों को अलग-अलग चैट रूम में ले लिया।
वे धीरे-धीरे बच्चों को यह विश्वास दिलाने में सफल हो गए कि—

“तुम खास हो…
तुम्हें एक सीक्रेट मिशन के लिए चुना गया है…
तुम्हें जिहाद के लिए तैयार किया जा रहा है…”

यहीं से असल ब्रेनवॉशिंग शुरू हुई।

 


तीसरा अध्याय — गुप्त ग्रुप, फेक अकाउंट्स और हर दिन मिलने वाले “डिजिटल टास्क”

 

दोनों नाबालिगों की चैट हिस्ट्री बेहद डरावनी थी।
ATS की जांच में यह सामने आया कि हैंडलर्स उन्हें हर दिन छोटे-छोटे टास्क देते थे—

  • नया फेक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाना

  • ग्रुप में 10–20 नए यूजर्स जोड़ना

  • हिंसक वीडियो को रीपोस्ट करना

  • ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड कर भेजना

  • ग्रुप से जुड़े “जिहादी भाषण” को एडिट करके शेयर करना

  • अलग-अलग समय पर VPN बदलने के निर्देश

हैंडलर्स उन्हें इस तरह प्रशिक्षित कर रहे थे जैसे कोई संगठन अपने रिक्रूट को ट्रेनिंग देता है।
ये टास्क धीरे-धीरे बच्चों के दिमाग में यह बैठाने के लिए थे कि—

“हम तुम्हें परख रहे हैं… अगर तुम ये कर सकते हो, तो तुम असली मुजाहिद हो।”

ATS अधिकारियों का कहना है कि कंटेंट का पैटर्न इस तरह तैयार किया जा रहा था कि नाबालिग सिस्टम, समाज और दूसरे समुदाय के खिलाफ नफरत महसूस करने लगें। हैंडलर्स उनकी तारीफ करते—

“तुम बहुत बहादुर हो।”
“तुम सच्चे जांबाज हो।”
“तुम्हें बड़े मिशन के लिए चुना गया है।”

यही डिजिटल मनोवैज्ञानिक तकनीक धीरे-धीरे बच्चों के अवचेतन मन पर असर डालने लगी।

 


चौथा अध्याय — सबसे खतरनाक मोड़: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय एयर स्ट्राइक मैप की मांग

 

मामले का सबसे डराने वाला हिस्सा इससे आगे है।
यह वह समय था जब भारत और पाकिस्तान के बीच मीडिया ब्लैकआउट था।
देश में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चल रहा था। दोनों देशों ने एक-दूसरे के न्यूज चैनलों को ब्लॉक कर रखा था।

इसी समय पाकिस्तानी हैंडलर्स ने मौका देखा।

ATS सूत्रों के मुताबिक:

**हैंडलर्स ने दोनों नाबालिगों को कहा—

“हमें भारत की एयर स्ट्राइक और सैन्य मूवमेंट के मैप की क्लिपिंग भेजो।”**

दोनों बच्चों ने भारतीय न्यूज चैनलों पर चल रहे स्ट्राइक मैप्स की वीडियो रिकॉर्डिंग की और इंस्टाग्राम के सीक्रेट चैट में यह क्लिपिंग भेज दी।

यह देश की सुरक्षा के लिए एक बेहद खतरनाक स्थिति थी।
हैंडलर्स इस जानकारी के आधार पर पाकिस्तान में बैठे अपने नेटवर्क को भारतीय सैन्य गतिविधि के बारे में अपडेट कर सकते थे।

 


पाँचवां अध्याय — गेमिंग चैट: ISIS की नई भर्ती तकनीक

 

इस मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया—गेमिंग चैट

ऑनलाइन शूटिंग और मिशन-बेस्ड मल्टीप्लेयर गेम्स में प्राइवेट चैट रूम बनाए जा सकते हैं।
यहां खिलाड़ी आपस में टेक्स्ट, वॉयस और ग्रुप चैट कर सकते हैं।
हैंडलर्स ने इसी सुविधा का फायदा उठाया।

जब बच्चे ऑनलाइन शूटिंग गेम, वॉर गेम, स्ट्रैटेजिक मिशन गेम खेलते थे, उसी दौरान हैंडलर्स उनसे बात करते—

  • “क्या तुम असली हथियार चलाना चाहोगे?”

  • “क्या तुम मिशन में शामिल होना चाहते हो?”

  • “गेम में जो कर रहे हो, उसे असली दुनिया में भी कर सकते हो…”

गेम में लड़ाई और हथियार पहले से ही नॉर्मल लगते थे, इसलिए बच्चे हैंडलर्स की बातें आसानी से मानते गए।

 


छठा अध्याय — डार्क वेब, TOR, VPN और डिजिटल पहचान छिपाने के तरीके नाबालिगों को सिखाए गए

 

ATS की साइबर जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे ISIS समर्थक इन नाबालिग बच्चों को डिजिटल सुरक्षा और पहचान छिपाने की पूरी ट्रेनिंग दे रहे थे—

  • TOR ब्राउज़र इस्तेमाल करना

  • डार्क वेब से जानकारी लेना

  • VPN बदलना

  • फर्जी IP एड्रेस तैयार करना

  • एन्क्रिप्टेड चैट ऐप्स पर शिफ्ट होना

  • ऑटो-डिलीट होने वाले मैसेज ऐप्स का इस्तेमाल

  • अलग-अलग ‘बर्नर’ अकाउंट बनाना

ये सभी तकनीकें आमतौर पर साइबर अपराधी और आतंकी इस्तेमाल करते हैं ताकि वे किसी भी डिजिटल ट्रेस से बच सकें।

बातचीत के पैटर्न से साफ पता चलता है कि हैंडलर्स बच्चों को एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का हिस्सा बनाना चाहते थे।

 


सातवां अध्याय — ATS ने परिजनों को दिखाए सबूत और माता-पिता का सदमा

 

जब ATS ने दोनों नाबालिगों के माता-पिता को बुलाया और मोबाइल चैट, फेक अकाउंट्स, हिंसक वीडियो, पाकिस्तान के हैंडलर्स के साथ हुए वॉयस कॉल और मैप क्लिपिंग्स दिखाईं, तो परिवार स्तब्ध रह गया।

वे बिल्कुल नहीं समझ पाए कि उनके बच्चे किस दुनिया में फंस चुके थे।

ATS SP राजश्री मिश्रा ने बताया कि दोनों बच्चों के माता-पिता ने कहा—

“हमें बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि मोबाइल में ये सब चल रहा है…
वो तो हम समझते थे गेम खेल रहे होंगे।”

ATS ने पूरी पूछताछ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के नियमों के अनुसार की।
परिवार की उपस्थिति में ही बच्चों से सवाल किए गए।
दोनों को साइकोलॉजिकल काउंसलिंग दी जा रही है ताकि वे इस मानसिक दबाव से बाहर निकल सकें।

 


आठवां अध्याय — UAPA के तहत FIR, और नेटवर्क की गहरी जांच जारी

 

ATS ने इस मामले में UAPA 1967 के तहत FIR दर्ज की है।
यह आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों के लिए सबसे कड़ा कानून है।

इसके अलावा ATS ने भिलाई के 4 और नाबालिगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है।
जांच में शुरुआती संकेत मिले हैं कि—

  • कई बच्चे इस नेटवर्क से अलग-अलग स्तर पर जुड़े हुए थे

  • कुछ फेक अकाउंट्स चलाते थे

  • कुछ कंटेंट आगे बढ़ाते थे

  • कुछ गेमिंग चैट में संपर्क में थे

ATS को अब यह पता लगाना है कि—

  • पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स कौन थे?

  • वे किस संगठन से जुड़े हैं?

  • भारत में उनके कितने डिजिटल मॉड्यूल सक्रिय हैं?

जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारी या पूछताछ की संभावना है।

 


नौवां अध्याय — निष्कर्ष: आतंकवाद का सबसे खतरनाक चेहरा अब मोबाइल स्क्रीन में छिपा है

 

ISIS जैसे संगठन अब बंदूक के भरोसे नहीं, बल्कि इंटरनेट के भरोसे काम कर रहे हैं।
सोशल मीडिया, गेमिंग प्लेटफॉर्म, शॉर्ट वीडियो ऐप, डार्क वेब, VPN—ये सब उनके नए हथियार हैं।

सबसे डरावनी बात यह है—

बच्चे बिना घर से बाहर निकले, बिना किसी मीटिंग के, सिर्फ मोबाइल और इंटरनेट से ब्रेनवॉश होकर आतंकी मिशन तक पहुंच सकते हैं।

छत्तीसगढ़ का यह मामला सिर्फ दो बच्चों की कहानी नहीं है;
यह चेतावनी है कि डिजिटल आतंकी नेटवर्क कितना खतरनाक हो चुका है।

 


यह पूरी कहानी हमें क्या सिखाती है?

 

  • बच्चों को ऑनलाइन क्या देख रहे हैं, यह जानना अब बेहद जरूरी है

  • इंटरनेट सिर्फ मनोरंजन नहीं, अपराधियों का बड़ा अड्डा भी है

  • डिजिटल ब्रेनवॉशिंग असल ब्रेनवॉशिंग से कहीं तेज़ है

  • परिवारों को बच्चों के ऑनलाइन व्यवहार को समझना होगा

  • सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे मामलों के लिए नई तकनीकों की जरूरत है

यह मामला साफ दिखाता है कि अब आतंकवाद का सबसे बड़ा रणक्षेत्र डिजिटल दुनिया बन चुकी है—जहाँ हथियार की जगह मोबाइल है, कैंप की जगह चैट ग्रुप है और भर्ती की जगह गेमिंग नेटवर्क।

 

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मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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दावा-अफसर रिटायर होकर 20 साल बुक पब्लिश नहीं करा सकेंगे
जनरल नरवणे की किताब पर विवाद के बीच सरकार का बड़ा कदम; जानें क्या हैं नए नियम।

पूर्व अधिकारियों के लिए 20 साल का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड'? जनरल नरवणे की अनपब्लिश किताब से शुरू हुआ नया राष्ट्रीय विवाद नई दिल्ली | 14 फरवरी 2026 भारत सरकार सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवा से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने के नियमों में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, अब रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान वे अपनी सर्विस से जुड़ी किसी भी संवेदनशील जानकारी या घटनाओं पर आधारित पुस्तक प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। यह मुद्दा पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” (Four Stars of Destiny) को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच गरमाया है। 1. कैबिनेट में उठी कूलिंग-ऑफ पीरियड की मांग हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आधिकारिक एजेंडे से हटकर इस विषय पर चर्चा हुई। मंत्रियों की राय: कई वरिष्ठ मंत्रियों ने सुझाव दिया कि सैन्य और खुफिया सेवाओं जैसे अति-संवेदनशील पदों से रिटायर होने वाले अधिकारियों के लिए किताब लिखने से पहले एक लंबी समय-सीमा तय होनी चाहिए। उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करने वाली गोपनीय जानकारियों को 'समय से पहले' सार्वजनिक होने से रोकना है। संभावित आदेश: हालांकि अभी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही इस पर नए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। 2. जनरल नरवणे की किताब: विवाद की जड़ क्या है? जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" जनवरी 2024 में रिलीज होनी थी, लेकिन यह रक्षा मंत्रालय के पास अटकी हुई है। विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: लद्दाख सीमा विवाद (2020): किताब में कथित तौर पर दावा किया गया है कि 31 अगस्त 2020 को कैलाश रेंज में चीनी उकसावे का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से तत्काल कोई राजनीतिक निर्देश नहीं मिला था। सेना को अपने स्तर पर निर्णय लेने पड़े थे। अग्निपथ योजना: किताब के कुछ अंशों में 'अग्निपथ योजना' (अग्निवीर) के शुरुआती प्रस्ताव और कार्यान्वयन को लेकर भी खुलासे होने की बात कही गई है, जिसे सरकार असहज मान रही है। गैर-कानूनी सर्कुलेशन: राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब का जिक्र करने के बाद इसका PDF और मैन्युस्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर लीक हो गई। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है और कॉपीराइट उल्लंघन की जांच कर रही है। 3. वर्तमान नियम और कानून की स्थिति अभी रिटायर अधिकारियों के लिए निम्नलिखित कानूनी प्रावधान लागू होते हैं: नियम/कानून विवरण CCS Rules 1972 (2021 संशोधन) संवेदनशील या सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रकाशित करने से पहले संबंधित विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (OSA) राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय डेटा को सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है। डिफेंस मिनिस्ट्री क्लियरेंस सैन्य अधिकारियों के लिए अपनी सर्विस लाइफ पर किताब लिखने के लिए सेना और मंत्रालय से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लेना होता है। 4. राहुल गांधी और 'किताब राजनीति' नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 4 फरवरी को संसद में किताब की एक प्रति (Copy) दिखाकर सरकार को घेरा था। उनका तर्क है कि जब किताब के प्री-ऑर्डर लिंक उपलब्ध थे और कुछ अंश न्यूज़ एजेंसियों ने छापे थे, तो इसे 'अनपब्लिश' मानकर चर्चा से रोकना गलत है। वहीं, सरकार का कहना है कि बिना क्लियरेंस के किसी संवेदनशील किताब के अंशों का राजनीतिक उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है। 5. क्या होगा 20 साल के नियम का असर? अगर 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होता है, तो: मेमॉयर (संस्मरण) पर रोक: कोई भी पूर्व सचिव, सेना प्रमुख या खुफिया एजेंसी का प्रमुख अपनी सेवा के अनुभव 20 साल तक नहीं लिख पाएगा। ऐतिहासिक रिकॉर्ड की कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समकालीन इतिहास के सैन्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण लुप्त हो सकते हैं। गोपनीयता की सुरक्षा: सरकार का मानना है कि 20 साल बाद कई संवेदनशील अभियान 'डिक्लासिफाइड' हो जाते हैं, तब उनका खुलासा करना देश के लिए कम जोखिम भरा होता है।

रवि चौहान फ़रवरी 14, 2026 0
लोकसभा में 'हरदीप पुरी इस्तीफा दो' के नारे लगे

9 मार्च तक स्थगित हुई संसद; निशिकांत दुबे का आरोप- राहुल गांधी कर रहे देश के बंटवारे की प्लानिंग।

राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं आएगा

राहुल गांधी के खिलाफ 'लाइफटाइम बैन' का प्रस्ताव; निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस को सुनाई खरी-खोटी।

राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं आएगा

निशिकांत दुबे ने की राहुल गांधी को उम्रभर के लिए बैन करने की मांग; किरेन रिजिजू ने जारी किया 'गाली-गलौज' वाला वीडियो।

राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव नहीं आएगा
निशिकांत दुबे ने की राहुल गांधी को उम्रभर के लिए बैन करने की मांग; किरेन रिजिजू ने जारी किया 'गाली-गलौज' वाला वीडियो।

संसद में महासंग्राम: राहुल गांधी की सदस्यता पर 'लाइफटाइम बैन' की मांग; निशिकांत दुबे का 'सब्सटेंसिव मोशन' और 'चैंबर हंगामे' के वीडियो पर छिड़ी जंग नई दिल्ली | 12 फरवरी 2026 संसद के बजट सत्र का 12वां दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे तीखे टकरावों में से एक के रूप में दर्ज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। जहाँ एक ओर उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए 'सब्सटेंसिव मोशन' पेश किया गया है, वहीं दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक 'लीक' वीडियो के जरिए विपक्ष पर स्पीकर के अपमान का गंभीर आरोप लगाया है। यहाँ आज के घटनाक्रम और संसद के भीतर-बाहर चल रहे घमासान का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. निशिकांत दुबे का बड़ा दांव: राहुल गांधी पर 'लाइफटाइम बैन' की मांग भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक 'सब्सटेंसिव मोशन' (Substantive Motion) पेश किया। आरोप: दुबे का दावा है कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी विदेशी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं और संसद में लगातार झूठ बोल रहे हैं। मांग: उन्होंने मांग की है कि न केवल राहुल की संसद सदस्यता रद्द की जाए, बल्कि उन पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध (Lifetime Ban) लगाया जाए। क्या होता है सब्सटेंसिव मोशन? यह एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर प्रस्ताव होता है, जो किसी गंभीर मामले (जैसे राष्ट्रपति, जज या सांसद के आचरण) पर सदन की राय या फैसला लेने के लिए लाया जाता है। 2. किरेन रिजिजू का वीडियो बम: "स्पीकर के चैंबर में दी गईं गालियां" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर 4 फरवरी का एक वीडियो साझा किया, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। दावा: रिजिजू का कहना है कि 20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में जबरन घुसे, उन्हें गालियां दीं और प्रधानमंत्री को धमकियां दीं। प्रियंका गांधी पर निशाना: रिजिजू ने आरोप लगाया कि यह सब प्रियंका गांधी की मौजूदगी में हुआ और उन्होंने सांसदों को उकसाया। प्रियंका की सफाई: प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "गाली देने वाली बात सरासर झूठ है। मैं वहां चुपचाप बैठी थी और अंत में केवल शांति से अपनी बात रखी थी।" 3. ट्रेड डील पर पीयूष गोयल का राहुल को जवाब राहुल गांधी द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को 'किसानों के साथ गद्दारी' बताने पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभाला: तथ्यों की सुरक्षा: गोयल ने स्पष्ट किया कि डील में 90-95% कृषि उत्पाद (डेयरी, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, मक्का, दालें आदि) पूरी तरह बाहर रखे गए हैं ताकि भारतीय किसानों को कोई नुकसान न हो। हमला: गोयल ने कहा, "राहुल गांधी झूठ का पुलिंदा हैं। वे देश को तेजी से आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकते और विकास के खिलाफ हैं।" 4. राहुल गांधी का मीडिया पर पलटवार: "आप भाजपा के लिए काम कर रहे हैं" संसद के बाहर जब मीडिया ने राहुल गांधी से 'प्रिविलेज मोशन' पर सवाल पूछा, तो वे भड़क गए: मीडिया की भूमिका पर सवाल: राहुल ने पत्रकारों से कहा, "क्या आज का कोड वर्ड 'प्रिविलेज मोशन' है? कल 'ऑथेंटिकेट' था। आप लोग पूरी तरह भाजपा के लिए काम कर रहे हैं, थोड़ा तो ऑब्जेक्टिव रहने की कोशिश कीजिए। यह देश के साथ अन्याय है।" अडानी-अंबानी का मुद्दा: राहुल अपनी इस बात पर कायम रहे कि अनिल अंबानी और अडानी के खिलाफ विदेशी फाइलों में सबूत हैं और सरकार उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचा रही है। 5. केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले का पक्ष केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस संगठन महासचिव ने कहा कि सरकार राहुल गांधी की आवाज दबाने के लिए चेयर (स्पीकर) पर दबाव डाल रही है। उन्होंने कहा, "पिछली बार सदस्यता छीनी तो जनता ने और ज्यादा वोट दिए, इस बार फांसी देना चाहते हैं तो दे दें, हम सच बोलते रहेंगे।" सुप्रिया सुले: उन्होंने नए श्रम कानूनों (Labour Code) का विरोध करते हुए कहा कि जब देश के श्रमिक सड़कों पर हड़ताल कर रहे हैं, तब सदन में उनके खिलाफ बिल लाना अन्यायपूर्ण है। 📊 संसद डायरी: 12 फरवरी के मुख्य अपडेट्स समय घटना विवरण 11:15 AM सदन स्थगित विपक्ष के भारी हंगामे और 'ट्रेड डील वापस लो' के नारों के बीच लोकसभा 12 बजे तक स्थगित। 12:10 PM पीएम मोदी की एंट्री प्रधानमंत्री मोदी राज्यसभा पहुंचे, भाजपा सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। 01:30 PM राहुल का बयान राहुल गांधी ने मीडिया को 'ऑब्जेक्टिव' रहने की सलाह दी। 02:15 PM मंडाविया का जवाब श्रम मंत्री ने कहा कि नए लेबर कोड का हड़ताल से ज्यादा समर्थन हो रहा है। 02:30 PM पीएम की तारीफ मोदी ने निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के जवाब की सराहना की। 6. राहुल गांधी की सदस्यता का कानूनी इतिहास यह पहली बार नहीं है जब राहुल की सदस्यता पर तलवार लटकी है: मार्च 2023: 'मोदी सरनेम' केस में 2 साल की सजा के बाद उनकी सदस्यता रद्द हुई थी। अगस्त 2023: सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद सदस्यता बहाल हुई। नया संकट: निशिकांत दुबे का 'सब्सटेंसिव मोशन' यदि स्वीकार होता है, तो यह राहुल गांधी के राजनीतिक करियर के लिए अब तक की सबसे बड़ी कानूनी और संवैधानिक चुनौती बन सकता है।

रवि चौहान फ़रवरी 12, 2026 0
सीतारमण बोलीं- पेट्रोल बंगाल में दिल्ली से ₹10 ज्यादा महंगा

निर्मला सीतारमण ने TMC और राहुल गांधी के आरोपों को धोया; अडाणी, GST और एपस्टीन फाइल्स पर संसद में भारी बवाल।

दिल्ली पुलिस ने पेंगुइन इंडिया को नोटिस भेजा

दिल्ली पुलिस का पेंगुइन इंडिया को नोटिस; 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के उन अंशों पर बवाल, जिन्होंने हिलाई मोदी सरकार।

लोकसभा में रिजिजू बोले- PM पर आरोप लगाया, सबूत दें

राहुल ने अडानी और एपस्टीन फाइल्स पर सरकार को घेरा; किरेन रिजिजू बोले- लाएंगे प्रिविलेज नोटिस।

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस पेश
विपक्ष ने स्पीकर के खिलाफ पेश किया नोटिस; राहुल गांधी का जनरल नरवणे की किताब पर बड़ा दावा; अखिलेश बोले- बजट दिशाहीन।

संसद में महासंग्राम: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का ऐतिहासिक कदम; 'नरवणे बुक' और बजट पर घमासान नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026 भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। बजट सत्र के 10वें दिन विपक्ष ने एक बड़ा संवैधानिक दांव खेलते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस पेश कर दिया। उधर, सदन के बाहर पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच 'जुबानी जंग' तेज हो गई है। यहाँ आज की संसदीय कार्यवाही और विवादों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है: 1. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: मुख्य वजह और प्रक्रिया विपक्ष ने लोकसभा सचिवालय को दोपहर 1:14 बजे आधिकारिक नोटिस सौंपा। इस कदम के पीछे की कूटनीति और नियम निम्नलिखित हैं: आरोप: प्रस्ताव में कहा गया है कि स्पीकर ओम बिरला खुलेआम 'एकतरफा' तरीके से सदन चला रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों (जैसे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव) पर बोलने नहीं दिया गया और विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए 8 सांसदों को मनमाने ढंग से सस्पेंड किया गया। नोटिस पर हस्ताक्षर: कुल 118 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कांग्रेस, सपा, डीएमके और वामपंथी दल शामिल हैं। TMC का रुख: दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने फिलहाल इस नोटिस पर साइन नहीं किए हैं। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे प्रस्ताव का समर्थन करते हैं लेकिन स्पीकर को जवाब देने के लिए 1-2 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं: सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने खुद इस नोटिस पर साइन नहीं किए हैं, जो एक सोची-समझी रणनीतिक दूरी हो सकती है। संवैधानिक प्रावधान: यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत दिया गया है। स्पीकर ने सेक्रेटरी जनरल को इस नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया है। 2. सदन की कार्यवाही: हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल मंगलवार को लोकसभा में कामकाज के नाम पर केवल शोर-शराबा ही देखने को मिला: 11:00 AM: सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में आ गए। महज 1 मिनट में कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। विशेष बात यह थी कि आज स्पीकर की कुर्सी पर ओम बिरला नहीं, बल्कि पीसी मोहन बैठे थे। 12:00 PM: दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष ने 'वी वॉन्ट जस्टिस' के नारे जारी रखे। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने हाथ जोड़कर विपक्ष से बजट पर चर्चा करने की विनती की, लेकिन शोर नहीं थमा और सदन 2 बजे तक स्थगित हो गया। 02:00 PM: तीसरी बार कार्यवाही शुरू होने पर केपी तेनेट्टी ने चेयर संभाली। हंगामे के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की। 3. 'नरवणे बुक' कॉन्ट्रोवर्सी: राहुल गांधी का बड़ा बयान सदन के बाहर राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर सरकार को घेरा: "या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन (पब्लिशर)। नरवणे ने खुद X पर पोस्ट किया था कि किताब उपलब्ध है। मैं पेंगुइन के बजाय एक पूर्व आर्मी चीफ की बात पर विश्वास करना चुनूंगा। सरकार इस किताब से डरी हुई है क्योंकि इसमें अग्निवीर, चीन विवाद और इंडो-US ट्रेड डील से जुड़ी असुविधाजनक बातें हैं।" उधर, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जब पब्लिशर कह रहा है कि किताब छपी ही नहीं, तो राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं। 📊 बजट चर्चा: शशि थरूर और अखिलेश यादव के प्रहार जब 2 बजे बजट पर चर्चा शुरू हुई, तो विपक्ष ने सरकार के आर्थिक दावों की धज्जियां उड़ाईं: नेता मुख्य आरोप / बिंदु शशि थरूर सरकार केवल 'हेडलाइन मैनेजमेंट' करती है। जल जीवन और SC विकास योजनाओं का पैसा खर्च ही नहीं हुआ। आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है। अखिलेश यादव यह बजट 'दिशाहीन' है। 11 साल से बजट आ रहा है लेकिन लोगों की आय नहीं बढ़ी। सरकार बताए कि '0' बड़ा है या '18' (टैक्स कटौती का संदर्भ)। अखिलेश यादव यूपी के लिए इस बजट में कुछ नहीं है। यूएस डील के बाद विदेशी माल आएगा, तो हमारे किसान क्या उगाएंगे? 4. सत्ता पक्ष का बचाव और जवाबी हमला किरेन रिजिजू का वीडियो: रिजिजू ने 4 फरवरी के हंगामे का वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद गुंडागर्दी कर रहे थे और पीएम की सीट तक पहुंच गए थे। गिरिराज सिंह का प्रहार: उन्होंने नेहरू पर कश्मीर को गिरवी रखने का आरोप लगाया और कहा कि राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। संख्या बल: रिजिजू ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के पास नंबर नहीं हैं, इसलिए वे अविश्वास प्रस्ताव के जरिए स्पीकर को हटा नहीं पाएंगे, वे केवल ड्रामा कर रहे हैं।

रवि चौहान फ़रवरी 10, 2026 0
पेंगुइन का दावा- नरवणे की किताब पब्लिश नहीं हुई

राहुल गांधी बनाम पेंगुइन इंडिया; 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' के लीक होने पर दिल्ली पुलिस की FIR।

फरीदाबाद जेल में आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या

राम मंदिर उड़ाने की साजिश रचने वाले आतंकी की हत्या; कैदी अब्बू जट ने नीमका जेल में मार डाला।

राहुल बोले- स्पीकर ने कमिट किया, क्या आप बोलने देंगे

Lok Sabha Adjourned: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी; राहुल गांधी बोले- सरकार बहस से डर रही है।

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भारतीय क्रिकेटर वर्ल्ड कप के दौरान पत्नियों को साथ नहीं रख सकेंगे; नियम तोड़ा तो IPL से होंगे बाहर।

रवि चौहान फ़रवरी 10, 2026 0