कर्नाटक की राजनीति में भूचाल ला देने वाला पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ यौन शोषण का हाई-प्रोफाइल मामला अब निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। 17 वर्षीय रेप विक्टिम लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोप में येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच कर रही कर्नाटक CID ने 82 वर्षीय दिग्गज नेता समेत 4 आरोपियों के खिलाफ 750 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें यौन उत्पीड़न, सबूत नष्ट करने और मामला दबाने के गंभीर आरोप शामिल हैं।
यह मामला तब और अधिक भावनात्मक हो गया जब मुख्य शिकायतकर्ता और विक्टिम की मां की 26 मई 2024 को लंग कैंसर के इलाज के दौरान मौत हो गई। अब विक्टिम का 26 वर्षीय भाई अपनी नाबालिग बहन को न्याय दिलाने के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है।
बीते 13 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे POCSO मामले को रद्द करने की मांग की थी। अब, 2 दिसंबर को बेंगलुरु कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत सभी चारों आरोपियों को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। इस आदेश ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक, 82 साल के येदियुरप्पा अब जेल जाएँगे?
यह विस्तृत आलेख विक्टिम की मां द्वारा लगाए गए सनसनीखेज आरोप और उनकी मौत, CID की 750 पन्नों की चार्जशीट में लगे आरोपों (छेड़छाड़, सबूत नष्ट करना), 2 फरवरी 2024 को येदियुरप्पा के आवास पर हुई घटना का विवरण, सीक्रेट वीडियो, CCTV फुटेज और ₹35,000 नकद जैसे सबूतों का विश्लेषण, हाईकोर्ट के याचिका खारिज करने का कानूनी निहितार्थ, POCSO मामले में येदियुरप्पा की अब तक गिरफ्तारी न होने (हैबिचुअल कंप्लेनर का तर्क और कोर्ट की टिप्पणी), और इस केस पर कांग्रेस तथा भाजपा के राजनीतिक रुख का 5000 शब्दों में गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
POCSO मामले की शुरुआत 14 मार्च 2024 को हुई, जब विक्टिम की मां ने पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई।
CID की चार्जशीट के अनुसार, घटना इस प्रकार हुई:
समय और स्थान: 2 फरवरी 2024 को सुबह 11:25 बजे, 17 साल की विक्टिम अपनी मां के साथ बेंगलुरु के डॉलर कॉलोनी स्थित येदियुरप्पा के आवास पर पहुँची।
उद्देश्य: माँ-बेटी एक पूर्व रेप केस में इंसाफ की आस लिए येदियुरप्पा से मदद मांगने गई थीं।
पहला संवाद: विक्टिम की मां ने पहले बच्ची के साथ हुई घटना के बारे में बताया।
छेड़छाड़ का आरोप: इसके बाद पूर्व सीएम बच्ची को एक अलग कमरे में ले गए और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। कमरे में उन्होंने विक्टिम से उसके यौन शोषण करने वालों के चेहरे याद हैं या नहीं, यह पूछा। CID का आरोप है कि इस दौरान येदियुरप्पा ने विक्टिम से छेड़छाड़ करने की कोशिश की।
विक्टिम की प्रतिक्रिया: डरी हुई बच्ची ने हाथ छुड़ाया और दरवाजा खोलने को कहा।
पैसे और इनकार: बच्ची की बात सुनकर येदियुरप्पा ने दरवाजा खोला, जेब से कुछ रुपए निकालकर उसके हाथ में रख दिए, और कहा कि वे इस मामले में कोई मदद नहीं कर सकते। उन्होंने विक्टिम की मां को भी कुछ पैसे दिए।
शिकायत दर्ज कराते समय विक्टिम की मां ने स्पष्ट आरोप लगाया था:
विश्वासघात: "मैं बीएस येदियुरप्पा को अच्छा इंसान मानती थी, लेकिन उन्होंने मेरी बच्ची के साथ गलत किया।"
डर और न्याय की मांग: "बेटी किसी तरह उनसे पीछा छुड़ाकर मेरे पास आई। वो डर से कांप रही थी। मैं चाहती हूँ कि येदियुरप्पा और इस हरकत में उनका साथ देने वाले लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।"
वीडियो अपलोड: इस घटना के बाद 20 फरवरी को महिला ने घटना से जुड़ा एक वीडियो फेसबुक पेज पर अपलोड कर दिया।
सहयोगियों का दबाव: CID को दिए बयान में विक्टिम की मां ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद येदियुरप्पा के सहयोगी अरुण वाइएम, रुद्रेश और मरीस्वामी उसके घर आए थे।
सबूत नष्ट करना: महिला ने बताया कि अरुण ने उससे फेसबुक और फोन से वीडियो डिलीट करने को कहा। तीनों ने बड़ी रकम की पेशकश की और दबाव डाला कि महिला किसी भी तरीके से वीडियो डिलीट कर दे।
चार्जशीट का आरोप: 750 पेज की चार्जशीट में साफ लिखा गया है कि तीनों आरोपी महिला और उसकी बच्ची को फिर से येदियुरप्पा के पास ले जाना चाहते थे, जो यौन उत्पीड़न के आरोपों को दबाने का प्रयास था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने 26 मई 2024 को एक मार्मिक मोड़ लिया जब मुख्य शिकायतकर्ता की मौत हो गई।
मृत्यु का कारण: विक्टिम की मां की लंग कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान मौत हो गई।
कानूनी स्थिति: शिकायतकर्ता की मौत के बावजूद, POCSO जैसे आपराधिक मामले में केस चलता रहता है, और विक्टिम तथा अन्य गवाहों के बयान पर कार्रवाई जारी रहती है।
शिकायतकर्ता 2: अब विक्टिम का 26 साल का बेटा (यानी विक्टिम का भाई) यह केस लड़ रहा है। वह हाईकोर्ट का रुख कर चुका है और CID को पूरा सहयोग दे रहा है।
डिजिटल सबूत: विक्टिम के भाई ने जांच एजेंसी को मामले से जुड़े CCTV फुटेज, फोन का मेमोरी कार्ड, हार्ड डिस्क जैसी सभी डिजिटल सामग्री इकट्ठा करके सौंपी है।
सोशल मीडिया पर अपील: उसने need4justice नाम का एक सोशल मीडिया पेज बनाया है और CM सिद्धारमैया तथा डिप्टी CM डीके शिवकुमार से अपनी बहन को न्याय दिलाने के लिए अच्छे सीनियर एडवोकेट हायर करने की गुजारिश की है।
कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने इस हाईप्रोफाइल केस की जांच CID को सौंपी, जिसने कड़ी मेहनत के बाद 750 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
CID के सीनियर अफसर ने जांच में जुटाए गए महत्वपूर्ण सबूतों का खुलासा किया है:
वीडियो साक्ष्य: विक्टिम के रिकॉर्डेड सीक्रेट वीडियो और येदियुरप्पा के घर के पास के CCTV फुटेज।
डिजिटल फोरेंसिक: सभी डिजिटल-फोरेंसिक रिकॉर्ड।
बरामद सामग्री: विक्टिम और उसकी मां को आरोपियों की तरफ से दिए गए ₹35,000 नकद, एक कैश बैग और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए, जो सबूत नष्ट करने के प्रयास को साबित करते हैं।
दो और वीडियो: CID को दो और वीडियो मिले, जिन्हें विक्टिम ने खुद बनाया था। पहले वीडियो में मां येदियुरप्पा को 'अप्पा जी' कह रही हैं और शिमोगा से आने तथा संपत्ति केस में मदद की गुहार लगा रही हैं। दूसरे वीडियो में महिला घर में घुसती दिख रही है और येदियुरप्पा के बगल में बैठकर उनका हाथ पकड़े हुए नजर आ रही है। CID ने इन वीडियोज को सबूत के तौर पर शामिल किया है।
CID ने येदियुरप्पा समेत चारों आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया है:
POCSO की धारा (यौन उत्पीड़न)
IPC की धारा 204: सबूतों को नष्ट करवाना।
IPC की धारा 214: अपराध की जांच के लिए उपहार या संपत्ति की पेशकश।
आपराधिक साजिश से जुड़ी अन्य धाराएं।
2 दिसंबर को बेंगलुरु कोर्ट के समक्ष येदियुरप्पा की पेशी का आदेश, उनके कानूनी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
याचिका खारिज: 13 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने POCSO मामले को रद्द करने की मांग की थी।
सरकारी वकील की दलील: सरकारी वकील प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने दलील दी कि CID की जांच और विक्टिम की बातों को गंभीरता से सुना गया है, और अदालत का आदेश तर्कसंगत और न्यायिक लिहाज से सही है, इसलिए इसे रद्द करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
कोर्ट का आदेश: बेंगलुरु कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत चारों आरोपियों को 2 दिसंबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
गिरफ्तारी का खतरा: चूंकि POCSO एक गैर-जमानती अपराध है, इसलिए यदि कोर्ट येदियुरप्पा की गिरफ्तारी पर लगी अस्थायी रोक हटाता है या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश देता है, तो 82 साल के येदियुरप्पा को जेल जाना पड़ सकता है।
कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. बसवराज इटनाल इस केस की शुरुआत से ही कई खामियां बता रहे हैं, जो येदियुरप्पा के मजबूत पक्ष को दर्शाती हैं।
अनेक शिकायतें: पुलिस ने खुलासा किया था कि पीड़ित की मां 'हैबिचुअल कंप्लेनर' थी। उसने पहले भी बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार समेत 50 लोगों के खिलाफ ऐसी ही शिकायतें दर्ज करवाई थीं।
राजनीतिक आरोप: महिला ने 18 जनवरी, 2022 को BJP नेता भास्कर राव पर भी साजिश रचने का आरोप लगाया था।
निष्पक्ष जांच की जरूरत: डॉ. बसवराज का मानना है कि ऐसे में महिला के बयानों और सबूतों की सख्त जांच होनी चाहिए थी ताकि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
कोर्ट का रुख: डॉ. बसवराज का दूसरा पॉइंट यह है कि POCSO एक गैर-जमानती अपराध है, लेकिन हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
न्यायिक टिप्पणी: हाईकोर्ट ने साफतौर पर कहा कि "एक 80 साल का बुजुर्ग, जो राज्य का बड़ा सामाजिक चेहरा है, उन पर जल्दबाजी में किसी भी तरह सख्त कार्रवाई करना ठीक नहीं है।"
सबूतों की कमी?: यह कोर्ट का रुख यह संकेत देता है कि शायद पुलिस को अभी तक वो ठोस सबूत नहीं मिले हैं, जिससे BJP नेता का अपराध बिना किसी संदेह के साबित हो सके।
यह केस कर्नाटक और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बना हुआ है।
नेशनल स्पोक्सपर्सन वैभव शुक्ला: उन्होंने कहा कि किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ POCSO का मामला आना मामूली बात नहीं है। उन्होंने BJP पर गंभीर अपराधों में शामिल नेताओं को बचाने का आरोप लगाया, उदाहरण के तौर पर ब्रजभूषण शरण सिंह और कुलदीप सिंह सेंगर का नाम लिया।
'बेटी-बचाओ' पर सवाल: शुक्ला ने कहा कि कर्नाटक BJP की चुप्पी यह बताती है कि वह अपनी 'बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की नीति पर खुद यकीन नहीं रखती।
बीवाई विजयेंद्र (कर्नाटक BJP अध्यक्ष): येदियुरप्पा के बेटे ने कहा कि यह सब राजनीतिक षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा बिना दिल छोटा किए न्याय के रास्ते पर चलते रहेंगे।
बसवराज केलागर (कर्नाटक BJP स्टेट वाइस प्रेसिडेंट): उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा पार्टी के दिग्गज चेहरा हैं, और सबको पता है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है।
लिंगायत समर्थन: यहदियुरप्पा कर्नाटक के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं, जो उनके साथ खड़ा हुआ है।
बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO मामला कर्नाटक की न्यायिक और राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
न्यायपालिका पर निर्भरता: अब सारी निगाहें 2 दिसंबर को बेंगलुरु कोर्ट के आदेश पर टिकी हैं। अदालत को यह तय करना होगा कि क्या CID की 750 पन्नों की चार्जशीट, सीक्रेट वीडियो और अन्य सबूत POCSO जैसे गंभीर अपराध में 'हैबिचुअल कंप्लेनर' के अतीत से ऊपर उठकर अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
राजनीतिक परिणाम: यदि येदियुरप्पा को जेल जाना पड़ता है, तो यह कर्नाटक में भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा, खासकर उनके लिंगायत समर्थन आधार के बीच। कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से संसद तक ले जाने की बात कह चुकी है।
कानून की कसौटी: अंततः, यह मामला साबित करेगा कि कानून की नजर में राजनीतिक कद और उम्र मायने रखती है या नहीं, जब मामला एक नाबालिग विक्टिम को न्याय दिलाने का हो। विक्टिम का भाई अपनी मृत मां की इच्छा पूरी करने और बहन को न्याय दिलाने के लिए संघर्षरत है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
पटना यूनिवर्सिटी में भारी हंगामा: CM नीतीश ने किया 147 करोड़ के भवनों का उद्घाटन; छात्र नेताओं ने 'डिप्टी CM गो बैक' के लगाए नारे पटना | 30 मार्च 2026 पटना विश्वविद्यालय (PU) के परिसर में आज उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नए प्रशासनिक और एकेडमिक भवनों का उद्घाटन करने पहुंचे। एक तरफ जहां विश्वविद्यालय को आधुनिक बुनियादी ढांचा मिला, वहीं दूसरी ओर छात्र राजनीति और प्रशासनिक खींचतान ने कार्यक्रम के रंग में भंग डाल दिया। छात्र नेताओं के उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी के बीच मुख्यमंत्री को अपना संबोधन और कार्यक्रम महज 7 से 8 मिनट में समेटकर वहां से निकलना पड़ा। यहाँ इस हंगामे, उद्घाटन और भविष्य की योजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. क्यों भड़के छात्र? सम्मान और स्वायत्तता की लड़ाई हंगामे की मुख्य वजह कार्यक्रम के निमंत्रण और प्रोटोकॉल को लेकर रही। कुलपति की अनदेखी का आरोप: छात्र संघ के अध्यक्ष शांतनु शेखर ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में खुद छात्र संघ और यहां तक कि कुलपति (VC) को भी उचित सम्मान या निमंत्रण नहीं दिया गया। "BJP ऑफिस नहीं बनने देंगे": छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाया कि कैंपस को राजनीतिक अखाड़ा बनाया जा रहा है। उन्होंने कुलपति से कहा, "आप अपने लिए खड़े होइए सर, हम आपके साथ हैं। हम यूनिवर्सिटी को बीजेपी का कार्यालय नहीं बनने देंगे।" नारेबाजी: प्रदर्शनकारी छात्रों ने पटना डीएम के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा को 'गो बैक' के नारों के साथ घेर लिया। 2. नीतीश कुमार का 8 मिनट का 'रैपिड' कार्यक्रम तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को अति संक्षिप्त रखा: पीछा करते छात्र: मुख्यमंत्री कैंपस में जहां-जाते, छात्र नेताओं का जत्था उनके पीछे-पीछे नारेबाजी करते हुए दौड़ता रहा। समर्थन और विरोध का संगम: हंगामे के बीच कुछ छात्र नीतीश कुमार के समर्थन में भी दिखे। उन्होंने "शेर आया, शेर आया" और "बिहार का मुख्यमंत्री कैसा हो, नीतीश कुमार जैसा हो" के नारे लगाए। कुछ छात्र हाथों में पोस्टर लिए थे जिस पर लिखा था— "हम छात्रों का अभिमान"। 3. 147.29 करोड़ की सौगात: क्या है खास? हंगामे से इतर, पटना यूनिवर्सिटी को आज दो अत्याधुनिक इमारतें मिली हैं जो शिक्षा और प्रशासन का नया केंद्र बनेंगी: भवन का नाम लागत विशेषता प्रशासनिक भवन (G+8) ₹147.29 करोड़ (संयुक्त) 9 मंजिला इमारत, जहाँ विश्वविद्यालय का मुख्यालय शिफ्ट होगा। एकेडमिक भवन (G+9) ₹147.29 करोड़ (संयुक्त) 10 मंजिला इमारत, जहाँ दरभंगा हाउस के सभी PG विभाग शिफ्ट होंगे। हाइ-टेक सुविधाएं: हर फ्लोर पर CCTV कैमरा, कंट्रोल रूम, मीटिंग हॉल और सेमिनार हॉल की व्यवस्था है। ईको-फ्रेंडली: परिसर में बिजली कटने की स्थिति के लिए विशाल सौर ऊर्जा (Solar) प्लांट और अपना विद्युत सब-स्टेशन बनाया गया है। 4. दरभंगा हाउस और वाणिज्य कॉलेज का नया ठिकाना नए भवनों के उद्घाटन के बाद विश्वविद्यालय की व्यवस्था में बड़े बदलाव होंगे: दरभंगा हाउस: वर्तमान में यहाँ चल रहे सभी पोस्ट ग्रेजुएट (PG) विभाग नए एकेडमिक ब्लॉक में चले जाएंगे। वाणिज्य कॉलेज: खाली हुए दरभंगा हाउस में फिलहाल वाणिज्य कॉलेज को शिफ्ट किया जाएगा, जिससे छात्रों को अधिक स्थान मिल सकेगा। पार्किंग और गार्डन: तीन एकड़ में फैले इस परिसर में पार्किंग की आधुनिक व्यवस्था और सुंदर गार्डन का निर्माण भी किया जा रहा है। 5. समझाने की कोशिशें रहीं नाकाम जब छात्र बेकाबू होने लगे, तो सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने मोर्चा संभाला: विजय कुमार सिन्हा (डिप्टी CM): उन्होंने छात्रों को शांत करने और उनकी बात सुनने की कोशिश की, लेकिन छात्रों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। सुनील कुमार (शिक्षा मंत्री): शिक्षा मंत्री ने भी छात्रों को समझाने का प्रयास किया कि यह विकास का कार्य है, लेकिन छात्र संघ अध्यक्ष शांतनु शेखर गेट पर ताला लगाने की जिद पर अड़े रहे।
Gemini said राहुल गांधी का वडोदरा में बड़ा हमला: "मोदी 100% ट्रम्प के कंट्रोल में हैं; अडाणी केस असल में प्रधानमंत्री को धमकाने के लिए है" वडोदरा | 23 मार्च 2026 कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को गुजरात के वडोदरा में आयोजित 'आदिवासी अधिकार संवाद' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल ने वैश्विक भू-राजनीति से लेकर स्थानीय आदिवासी अधिकारों तक के मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि भारत की विदेश नीति और आर्थिक फैसले अब वाशिंगटन (अमेरिका) से तय हो रहे हैं और प्रधानमंत्री मोदी पूरी तरह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दबाव में हैं। यहाँ राहुल गांधी के भाषण की विस्तृत रिपोर्ट और मुख्य बिंदु दिए गए हैं: 1. ट्रम्प-मोदी और अडाणी कनेक्शन: "कम्प्रोमाइज्ड हैं प्रधानमंत्री" राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी संसद में अमेरिका या ट्रम्प के खिलाफ एक शब्द भी नहीं बोल पा रहे हैं: ट्रम्प का कंट्रोल: राहुल ने कहा, "मोदी जी ने लोकसभा में 25 मिनट भाषण दिया, लेकिन अमेरिका के खिलाफ चुप रहे। वे 100% ट्रम्प के कंट्रोल में हैं और संसद में डिबेट नहीं कर सकते क्योंकि वे कम्प्रोमाइज्ड (समझौतावादी) हैं।" अडाणी केस का सच: राहुल के मुताबिक, अमेरिका में अडाणी पर चल रहा कानूनी केस असल में पीएम मोदी को संदेश देने के लिए है। उन्होंने दावा किया कि ट्रम्प का सीधा मैसेज है— "ज्यादा ऊटपटांग हरकत की तो समझ लेना, मैं तुम्हारा करियर खत्म कर सकता हूं।" तेल और गैस पर सरेंडर: राहुल ने आरोप लगाया कि मोदी ने ट्रम्प को आश्वासन दिया है कि भारत रूस, ईरान या वेनेजुएला से तेल खरीदने से पहले अमेरिका से पूछेगा। "आप जो हुक्म करेंगे, हम वही करेंगे"—यह आज की विदेश नीति बन गई है। 2. आदिवासी बनाम वनवासी: "जल-जंगल-जमीन" की लड़ाई राहुल गांधी ने आदिवासियों की पहचान और अधिकारों पर RSS-BJP की विचारधारा पर सवाल उठाए: असली मालिक: राहुल ने कहा कि 'आदिवासी' का मतलब है इस देश के असली मालिक, जिनकी इस जमीन पर पहली दावेदारी है। शब्दों का खेल: उन्होंने आरोप लगाया कि RSS 'वनवासी' शब्द का इस्तेमाल करके आदिवासियों को केवल जंगल का निवासी बताना चाहती है, ताकि उनसे उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकार छीने जा सकें। बिरसा मुंडा का अपमान: राहुल ने कहा कि बीजेपी बिरसा मुंडा की मूर्ति के सामने हाथ तो जोड़ती है, लेकिन उनके उन विचारों पर हमला करती है जिनके लिए वे शहीद हुए थे। 3. ट्रेड डील और किसानों का संकट राहुल ने हालिया भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर चिंता जताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने भारत के कृषि क्षेत्र को अमेरिकी कॉर्पोरेट्स के लिए खोल दिया है: असमान मुकाबला: भारत में छोटे किसान (1-5 एकड़) हाथ से मेहनत करते हैं, जबकि अमेरिका में 10,000 एकड़ के खेतों में मशीनों से खेती होती है। नुकसान: अगर दाल, सोयाबीन, फल और कपास जैसे अमेरिकी उत्पाद बिना शुल्क के भारत आए, तो हमारे किसानों की कमर टूट जाएगी। पहले सरकार इस पर राजी नहीं थी, लेकिन अब ट्रम्प के दबाव में इसे लागू किया जा रहा है। 📊 राहुल गांधी के भाषण की 6 बड़ी बातें मुद्दा राहुल गांधी का बयान युद्ध का दावा ट्रम्प बार-बार कहते हैं कि उन्होंने भारत-पाक युद्ध रुकवाया, यह हमारी सेना का अपमान है और मोदी चुप हैं। अडाणी का ढांचा मोदी और बीजेपी का पूरा फाइनेंशियल स्ट्रक्चर अडाणी है। सारा इन्फ्रास्ट्रक्चर उन्हें सौंप दिया गया है। प्रतिनिधित्व अडाणी की कंपनी, निजी अस्पतालों या यूनिवर्सिटी के मालिकों में एक भी आदिवासी नहीं मिलेगा। निजीकरण पब्लिक सेक्टर खत्म किए जा रहे हैं ताकि दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों का रिजर्वेशन खत्म हो जाए। संविधान पर हमला जब आदिवासियों की जमीन बिना मुआवजे के छीनी जाती है, तो वह सीधे संविधान पर हमला है। जातिगत जनगणना जब भी मैं इसकी बात करता हूं, RSS-BJP मुझ पर आक्रमण करती है क्योंकि वे सच से डरते हैं। Export to Sheets 4. गुजरात निकाय चुनाव: मिशन 2026 राहुल गांधी का यह दौरा गुजरात में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय (नगर निगम और जिला पंचायत) चुनावों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है: चुनावों का ऐलान: गुजरात विधानसभा का सत्र 25 मार्च को खत्म हो रहा है। इसके ठीक बाद 26 मार्च को राज्य चुनाव आयोग चुनावों के शेड्यूल की घोषणा कर सकता है। कांग्रेस की सक्रियता: राहुल के इस दौरे के बाद कांग्रेस के अन्य केंद्रीय नेताओं के भी गुजरात आने की संभावना है। कांग्रेस आदिवासियों और किसानों के मुद्दों के सहारे राज्य में अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।
नीतीश कुमार की 'समृद्धि यात्रा': बेगूसराय में 330 करोड़ की योजनाओं की सौगात; मंच से महिलाओं को टोका— "कहां भाग रही हो", हेलीपैड पर बैल ने मचाया तांडव बेगूसराय/शेखपुरा | 14 मार्च 2026 बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी महत्वाकांक्षी 'समृद्धि यात्रा' के तहत शनिवार को बेगूसराय पहुंचे। यहाँ उन्होंने विकास योजनाओं की झड़ी लगाते हुए विरोधियों पर तीखे प्रहार किए। हालांकि, यह यात्रा केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि सुरक्षा में चूक, मंच पर नोक-झोंक और 'निशांत कुमार' के समर्थन में लगे नारों ने इस दौरे को काफी चर्चा में ला दिया है। यहाँ मुख्यमंत्री के बेगूसराय और शेखपुरा दौरे की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. सुरक्षा में बड़ी चूक: हेलीपैड पर बैल का 'आतंक' मुख्यमंत्री के आने से कुछ समय पहले बेगूसराय के हेलीपैड पर अफरा-तफरी मच गई: पुलिसवालों को दौड़ाया: एक आवारा बैल सुरक्षा घेरा तोड़कर हेलीपैड के अंदर घुस गया। बैल इतना आक्रामक था कि उसने वहां तैनात पुलिसकर्मियों को दौड़ा लिया। फायर ब्रिगेड पर चढ़े जवान: बैल के हमले से बचने के लिए एक पुलिसकर्मी को जान बचाकर फायर ब्रिगेड की गाड़ी के ऊपर चढ़ना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद बैल को परिसर से बाहर खदेड़ा गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड हुआ। 2. मंच से महिलाओं को टोका: "बैठिए और चुपचाप सुनिए" सभा के दौरान एक अजीब स्थिति पैदा हो गई जब संबोधन के बीच ही कुछ महिलाएं उठकर जाने लगीं। मुख्यमंत्री ने उन्हें सीधे टोकते हुए कहा: तल्ख तेवर: "अरे कहां भाग रही हो? हम बोलना बंद कर दें क्या? कोई पीछे भाग रहा है, कोई आगे। बैठिए अभी, हाथ उठाकर बताइए हम बोलें या नहीं? अब तो सब कुछ कर ही रहे हैं, फिर क्यों भाग रही हो? चुपचाप बैठिए और सुनिए।" 3. 'निशांत कुमार' के नारे और सियासी हलचल कार्यक्रम के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात तब हुई जब मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम (सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा) की मौजूदगी में भीड़ से नारे लगने लगे— "बिहार का CM कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो।" > निशांत कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र हैं, जो आमतौर पर राजनीति से दूर रहते हैं। इन नारों ने भविष्य के उत्तराधिकार को लेकर नई चर्चाएं छेड़ दी हैं। 4. संबोधन की मुख्य बातें: 'जंगलराज' बनाम 'कानून का राज' नीतीश कुमार ने अपने भाषण में लालू यादव की पुरानी सरकार पर जमकर हमला बोला और अपनी उपलब्धियां गिनाईं: हिंदू-मुस्लिम शांति: CM ने कहा, "पहले आए दिन झगड़े होते थे। हमने कब्रिस्तानों की घेराबंदी की और मंदिरों की बाउंड्री बनवाई। आज सब जगह शांति है।" शिक्षा और स्वास्थ्य: 2005 से पहले बिहार की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था चौपट थी, जिसे हमने मेडिकल कॉलेज खुलवाकर और शिक्षकों की भर्ती कर सुधारा। मुफ्त बिजली और सोलर: "गांव-गांव बिजली पहुँचाने के बाद अब हम सोलर पैनल लगा रहे हैं। आपकी छत पर सोलर लगेगा और खर्चा सरकार उठाएगी।" रोजगार का लक्ष्य: CM ने दावा किया कि अब तक 50 लाख युवाओं को रोजगार दिया गया है और अगले 5 सालों में 1 करोड़ नौकरी-रोजगार का लक्ष्य है। 📊 बेगूसराय और शेखपुरा: विकास का लेखा-जोखा जिला योजनाओं की संख्या कुल लागत (करोड़ में) मुख्य आकर्षण बेगूसराय 402 योजनाएं ₹330 करोड़ कैंपा कोला फैक्ट्री की आधारशिला, बियाडा कैंपस। शेखपुरा 100+ योजनाएं ₹300 करोड़+ सर्वा पंचायत का विकास, समीक्षा बैठक। जीविका दीदियां 9,715 समूह ₹578.09 करोड़ बैंक ऋण और चेक वितरण। 5. जीविका दीदियों को 'थैंक्यू' और सम्मान मुख्यमंत्री ने बेगूसराय में जीविका दीदियों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का जायजा लिया। उन्होंने दीदियों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कई बार 'थैंक्यू' और 'बधाई हो' कहा। चेक वितरण: 578 करोड़ रुपये का बैंक ऋण ऋण चेक वितरित किया गया। अधिकार केंद्र: दीदियों को 'अधिकार केंद्र' की चाबियां सौंपी गईं, जो ग्रामीण स्तर पर महिलाओं के सशक्तिकरण का केंद्र बनेंगे। 6. शेखपुरा का दौरा: 2 घंटे 5 मिनट का प्रवास बेगूसराय के बाद CM शेखपुरा के बरबीघा पहुंचे। यहाँ सर्वा गांव में उन्होंने 300 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण किया और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। दोपहर 2:55 बजे वे पटना के लिए रवाना हो गए।