कर्नाटक की राजनीति में भूचाल ला देने वाला पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ यौन शोषण का हाई-प्रोफाइल मामला अब निर्णायक मोड़ पर आ चुका है। 17 वर्षीय रेप विक्टिम लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोप में येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच कर रही कर्नाटक CID ने 82 वर्षीय दिग्गज नेता समेत 4 आरोपियों के खिलाफ 750 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर दी है, जिसमें यौन उत्पीड़न, सबूत नष्ट करने और मामला दबाने के गंभीर आरोप शामिल हैं।
यह मामला तब और अधिक भावनात्मक हो गया जब मुख्य शिकायतकर्ता और विक्टिम की मां की 26 मई 2024 को लंग कैंसर के इलाज के दौरान मौत हो गई। अब विक्टिम का 26 वर्षीय भाई अपनी नाबालिग बहन को न्याय दिलाने के लिए यह लड़ाई लड़ रहा है।
बीते 13 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चल रहे POCSO मामले को रद्द करने की मांग की थी। अब, 2 दिसंबर को बेंगलुरु कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत सभी चारों आरोपियों को अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं। इस आदेश ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कर्नाटक के राजनीतिक इतिहास के सबसे बड़े दिग्गजों में से एक, 82 साल के येदियुरप्पा अब जेल जाएँगे?
यह विस्तृत आलेख विक्टिम की मां द्वारा लगाए गए सनसनीखेज आरोप और उनकी मौत, CID की 750 पन्नों की चार्जशीट में लगे आरोपों (छेड़छाड़, सबूत नष्ट करना), 2 फरवरी 2024 को येदियुरप्पा के आवास पर हुई घटना का विवरण, सीक्रेट वीडियो, CCTV फुटेज और ₹35,000 नकद जैसे सबूतों का विश्लेषण, हाईकोर्ट के याचिका खारिज करने का कानूनी निहितार्थ, POCSO मामले में येदियुरप्पा की अब तक गिरफ्तारी न होने (हैबिचुअल कंप्लेनर का तर्क और कोर्ट की टिप्पणी), और इस केस पर कांग्रेस तथा भाजपा के राजनीतिक रुख का 5000 शब्दों में गहन मूल्यांकन प्रस्तुत करता है।
POCSO मामले की शुरुआत 14 मार्च 2024 को हुई, जब विक्टिम की मां ने पुलिस के सामने शिकायत दर्ज कराई।
CID की चार्जशीट के अनुसार, घटना इस प्रकार हुई:
समय और स्थान: 2 फरवरी 2024 को सुबह 11:25 बजे, 17 साल की विक्टिम अपनी मां के साथ बेंगलुरु के डॉलर कॉलोनी स्थित येदियुरप्पा के आवास पर पहुँची।
उद्देश्य: माँ-बेटी एक पूर्व रेप केस में इंसाफ की आस लिए येदियुरप्पा से मदद मांगने गई थीं।
पहला संवाद: विक्टिम की मां ने पहले बच्ची के साथ हुई घटना के बारे में बताया।
छेड़छाड़ का आरोप: इसके बाद पूर्व सीएम बच्ची को एक अलग कमरे में ले गए और दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। कमरे में उन्होंने विक्टिम से उसके यौन शोषण करने वालों के चेहरे याद हैं या नहीं, यह पूछा। CID का आरोप है कि इस दौरान येदियुरप्पा ने विक्टिम से छेड़छाड़ करने की कोशिश की।
विक्टिम की प्रतिक्रिया: डरी हुई बच्ची ने हाथ छुड़ाया और दरवाजा खोलने को कहा।
पैसे और इनकार: बच्ची की बात सुनकर येदियुरप्पा ने दरवाजा खोला, जेब से कुछ रुपए निकालकर उसके हाथ में रख दिए, और कहा कि वे इस मामले में कोई मदद नहीं कर सकते। उन्होंने विक्टिम की मां को भी कुछ पैसे दिए।
शिकायत दर्ज कराते समय विक्टिम की मां ने स्पष्ट आरोप लगाया था:
विश्वासघात: "मैं बीएस येदियुरप्पा को अच्छा इंसान मानती थी, लेकिन उन्होंने मेरी बच्ची के साथ गलत किया।"
डर और न्याय की मांग: "बेटी किसी तरह उनसे पीछा छुड़ाकर मेरे पास आई। वो डर से कांप रही थी। मैं चाहती हूँ कि येदियुरप्पा और इस हरकत में उनका साथ देने वाले लोगों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।"
वीडियो अपलोड: इस घटना के बाद 20 फरवरी को महिला ने घटना से जुड़ा एक वीडियो फेसबुक पेज पर अपलोड कर दिया।
सहयोगियों का दबाव: CID को दिए बयान में विक्टिम की मां ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद येदियुरप्पा के सहयोगी अरुण वाइएम, रुद्रेश और मरीस्वामी उसके घर आए थे।
सबूत नष्ट करना: महिला ने बताया कि अरुण ने उससे फेसबुक और फोन से वीडियो डिलीट करने को कहा। तीनों ने बड़ी रकम की पेशकश की और दबाव डाला कि महिला किसी भी तरीके से वीडियो डिलीट कर दे।
चार्जशीट का आरोप: 750 पेज की चार्जशीट में साफ लिखा गया है कि तीनों आरोपी महिला और उसकी बच्ची को फिर से येदियुरप्पा के पास ले जाना चाहते थे, जो यौन उत्पीड़न के आरोपों को दबाने का प्रयास था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले ने 26 मई 2024 को एक मार्मिक मोड़ लिया जब मुख्य शिकायतकर्ता की मौत हो गई।
मृत्यु का कारण: विक्टिम की मां की लंग कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान मौत हो गई।
कानूनी स्थिति: शिकायतकर्ता की मौत के बावजूद, POCSO जैसे आपराधिक मामले में केस चलता रहता है, और विक्टिम तथा अन्य गवाहों के बयान पर कार्रवाई जारी रहती है।
शिकायतकर्ता 2: अब विक्टिम का 26 साल का बेटा (यानी विक्टिम का भाई) यह केस लड़ रहा है। वह हाईकोर्ट का रुख कर चुका है और CID को पूरा सहयोग दे रहा है।
डिजिटल सबूत: विक्टिम के भाई ने जांच एजेंसी को मामले से जुड़े CCTV फुटेज, फोन का मेमोरी कार्ड, हार्ड डिस्क जैसी सभी डिजिटल सामग्री इकट्ठा करके सौंपी है।
सोशल मीडिया पर अपील: उसने need4justice नाम का एक सोशल मीडिया पेज बनाया है और CM सिद्धारमैया तथा डिप्टी CM डीके शिवकुमार से अपनी बहन को न्याय दिलाने के लिए अच्छे सीनियर एडवोकेट हायर करने की गुजारिश की है।
कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने इस हाईप्रोफाइल केस की जांच CID को सौंपी, जिसने कड़ी मेहनत के बाद 750 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
CID के सीनियर अफसर ने जांच में जुटाए गए महत्वपूर्ण सबूतों का खुलासा किया है:
वीडियो साक्ष्य: विक्टिम के रिकॉर्डेड सीक्रेट वीडियो और येदियुरप्पा के घर के पास के CCTV फुटेज।
डिजिटल फोरेंसिक: सभी डिजिटल-फोरेंसिक रिकॉर्ड।
बरामद सामग्री: विक्टिम और उसकी मां को आरोपियों की तरफ से दिए गए ₹35,000 नकद, एक कैश बैग और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए, जो सबूत नष्ट करने के प्रयास को साबित करते हैं।
दो और वीडियो: CID को दो और वीडियो मिले, जिन्हें विक्टिम ने खुद बनाया था। पहले वीडियो में मां येदियुरप्पा को 'अप्पा जी' कह रही हैं और शिमोगा से आने तथा संपत्ति केस में मदद की गुहार लगा रही हैं। दूसरे वीडियो में महिला घर में घुसती दिख रही है और येदियुरप्पा के बगल में बैठकर उनका हाथ पकड़े हुए नजर आ रही है। CID ने इन वीडियोज को सबूत के तौर पर शामिल किया है।
CID ने येदियुरप्पा समेत चारों आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में केस दर्ज किया है:
POCSO की धारा (यौन उत्पीड़न)
IPC की धारा 204: सबूतों को नष्ट करवाना।
IPC की धारा 214: अपराध की जांच के लिए उपहार या संपत्ति की पेशकश।
आपराधिक साजिश से जुड़ी अन्य धाराएं।
2 दिसंबर को बेंगलुरु कोर्ट के समक्ष येदियुरप्पा की पेशी का आदेश, उनके कानूनी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
याचिका खारिज: 13 नवंबर को कर्नाटक हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने POCSO मामले को रद्द करने की मांग की थी।
सरकारी वकील की दलील: सरकारी वकील प्रोफेसर रविवर्मा कुमार ने दलील दी कि CID की जांच और विक्टिम की बातों को गंभीरता से सुना गया है, और अदालत का आदेश तर्कसंगत और न्यायिक लिहाज से सही है, इसलिए इसे रद्द करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
कोर्ट का आदेश: बेंगलुरु कोर्ट ने येदियुरप्पा समेत चारों आरोपियों को 2 दिसंबर को अदालत में पेश होने का आदेश दिया है।
गिरफ्तारी का खतरा: चूंकि POCSO एक गैर-जमानती अपराध है, इसलिए यदि कोर्ट येदियुरप्पा की गिरफ्तारी पर लगी अस्थायी रोक हटाता है या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश देता है, तो 82 साल के येदियुरप्पा को जेल जाना पड़ सकता है।
कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. बसवराज इटनाल इस केस की शुरुआत से ही कई खामियां बता रहे हैं, जो येदियुरप्पा के मजबूत पक्ष को दर्शाती हैं।
अनेक शिकायतें: पुलिस ने खुलासा किया था कि पीड़ित की मां 'हैबिचुअल कंप्लेनर' थी। उसने पहले भी बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर आलोक कुमार समेत 50 लोगों के खिलाफ ऐसी ही शिकायतें दर्ज करवाई थीं।
राजनीतिक आरोप: महिला ने 18 जनवरी, 2022 को BJP नेता भास्कर राव पर भी साजिश रचने का आरोप लगाया था।
निष्पक्ष जांच की जरूरत: डॉ. बसवराज का मानना है कि ऐसे में महिला के बयानों और सबूतों की सख्त जांच होनी चाहिए थी ताकि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके।
कोर्ट का रुख: डॉ. बसवराज का दूसरा पॉइंट यह है कि POCSO एक गैर-जमानती अपराध है, लेकिन हाईकोर्ट ने येदियुरप्पा की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
न्यायिक टिप्पणी: हाईकोर्ट ने साफतौर पर कहा कि "एक 80 साल का बुजुर्ग, जो राज्य का बड़ा सामाजिक चेहरा है, उन पर जल्दबाजी में किसी भी तरह सख्त कार्रवाई करना ठीक नहीं है।"
सबूतों की कमी?: यह कोर्ट का रुख यह संकेत देता है कि शायद पुलिस को अभी तक वो ठोस सबूत नहीं मिले हैं, जिससे BJP नेता का अपराध बिना किसी संदेह के साबित हो सके।
यह केस कर्नाटक और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बना हुआ है।
नेशनल स्पोक्सपर्सन वैभव शुक्ला: उन्होंने कहा कि किसी मुख्यमंत्री के खिलाफ POCSO का मामला आना मामूली बात नहीं है। उन्होंने BJP पर गंभीर अपराधों में शामिल नेताओं को बचाने का आरोप लगाया, उदाहरण के तौर पर ब्रजभूषण शरण सिंह और कुलदीप सिंह सेंगर का नाम लिया।
'बेटी-बचाओ' पर सवाल: शुक्ला ने कहा कि कर्नाटक BJP की चुप्पी यह बताती है कि वह अपनी 'बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की नीति पर खुद यकीन नहीं रखती।
बीवाई विजयेंद्र (कर्नाटक BJP अध्यक्ष): येदियुरप्पा के बेटे ने कहा कि यह सब राजनीतिक षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा बिना दिल छोटा किए न्याय के रास्ते पर चलते रहेंगे।
बसवराज केलागर (कर्नाटक BJP स्टेट वाइस प्रेसिडेंट): उन्होंने कहा कि येदियुरप्पा पार्टी के दिग्गज चेहरा हैं, और सबको पता है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का कोई आधार नहीं है।
लिंगायत समर्थन: यहदियुरप्पा कर्नाटक के प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से आते हैं, जो उनके साथ खड़ा हुआ है।
बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ POCSO मामला कर्नाटक की न्यायिक और राजनीतिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
न्यायपालिका पर निर्भरता: अब सारी निगाहें 2 दिसंबर को बेंगलुरु कोर्ट के आदेश पर टिकी हैं। अदालत को यह तय करना होगा कि क्या CID की 750 पन्नों की चार्जशीट, सीक्रेट वीडियो और अन्य सबूत POCSO जैसे गंभीर अपराध में 'हैबिचुअल कंप्लेनर' के अतीत से ऊपर उठकर अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
राजनीतिक परिणाम: यदि येदियुरप्पा को जेल जाना पड़ता है, तो यह कर्नाटक में भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका होगा, खासकर उनके लिंगायत समर्थन आधार के बीच। कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से संसद तक ले जाने की बात कह चुकी है।
कानून की कसौटी: अंततः, यह मामला साबित करेगा कि कानून की नजर में राजनीतिक कद और उम्र मायने रखती है या नहीं, जब मामला एक नाबालिग विक्टिम को न्याय दिलाने का हो। विक्टिम का भाई अपनी मृत मां की इच्छा पूरी करने और बहन को न्याय दिलाने के लिए संघर्षरत है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
पूर्व अधिकारियों के लिए 20 साल का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड'? जनरल नरवणे की अनपब्लिश किताब से शुरू हुआ नया राष्ट्रीय विवाद नई दिल्ली | 14 फरवरी 2026 भारत सरकार सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सेवा से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने के नियमों में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। ताज़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, अब रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ पदों पर रहे अधिकारियों के लिए 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू किया जा सकता है। इस अवधि के दौरान वे अपनी सर्विस से जुड़ी किसी भी संवेदनशील जानकारी या घटनाओं पर आधारित पुस्तक प्रकाशित नहीं कर सकेंगे। यह मुद्दा पूर्व आर्मी चीफ जनरल (रिटायर्ड) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” (Four Stars of Destiny) को लेकर चल रहे राजनीतिक घमासान के बीच गरमाया है। 1. कैबिनेट में उठी कूलिंग-ऑफ पीरियड की मांग हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आधिकारिक एजेंडे से हटकर इस विषय पर चर्चा हुई। मंत्रियों की राय: कई वरिष्ठ मंत्रियों ने सुझाव दिया कि सैन्य और खुफिया सेवाओं जैसे अति-संवेदनशील पदों से रिटायर होने वाले अधिकारियों के लिए किताब लिखने से पहले एक लंबी समय-सीमा तय होनी चाहिए। उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करने वाली गोपनीय जानकारियों को 'समय से पहले' सार्वजनिक होने से रोकना है। संभावित आदेश: हालांकि अभी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार जल्द ही इस पर नए दिशा-निर्देश जारी कर सकती है। 2. जनरल नरवणे की किताब: विवाद की जड़ क्या है? जनरल एमएम नरवणे 2019 से 2022 तक सेना प्रमुख रहे। उनकी आत्मकथा "फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी" जनवरी 2024 में रिलीज होनी थी, लेकिन यह रक्षा मंत्रालय के पास अटकी हुई है। विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं: लद्दाख सीमा विवाद (2020): किताब में कथित तौर पर दावा किया गया है कि 31 अगस्त 2020 को कैलाश रेंज में चीनी उकसावे का जवाब देने के लिए सरकार की ओर से तत्काल कोई राजनीतिक निर्देश नहीं मिला था। सेना को अपने स्तर पर निर्णय लेने पड़े थे। अग्निपथ योजना: किताब के कुछ अंशों में 'अग्निपथ योजना' (अग्निवीर) के शुरुआती प्रस्ताव और कार्यान्वयन को लेकर भी खुलासे होने की बात कही गई है, जिसे सरकार असहज मान रही है। गैर-कानूनी सर्कुलेशन: राहुल गांधी द्वारा संसद में इस किताब का जिक्र करने के बाद इसका PDF और मैन्युस्क्रिप्ट सोशल मीडिया पर लीक हो गई। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज की है और कॉपीराइट उल्लंघन की जांच कर रही है। 3. वर्तमान नियम और कानून की स्थिति अभी रिटायर अधिकारियों के लिए निम्नलिखित कानूनी प्रावधान लागू होते हैं: नियम/कानून विवरण CCS Rules 1972 (2021 संशोधन) संवेदनशील या सुरक्षा संबंधी जानकारी प्रकाशित करने से पहले संबंधित विभाग की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (OSA) राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय डेटा को सार्वजनिक करना दंडनीय अपराध है। डिफेंस मिनिस्ट्री क्लियरेंस सैन्य अधिकारियों के लिए अपनी सर्विस लाइफ पर किताब लिखने के लिए सेना और मंत्रालय से 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) लेना होता है। 4. राहुल गांधी और 'किताब राजनीति' नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 4 फरवरी को संसद में किताब की एक प्रति (Copy) दिखाकर सरकार को घेरा था। उनका तर्क है कि जब किताब के प्री-ऑर्डर लिंक उपलब्ध थे और कुछ अंश न्यूज़ एजेंसियों ने छापे थे, तो इसे 'अनपब्लिश' मानकर चर्चा से रोकना गलत है। वहीं, सरकार का कहना है कि बिना क्लियरेंस के किसी संवेदनशील किताब के अंशों का राजनीतिक उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ है। 5. क्या होगा 20 साल के नियम का असर? अगर 20 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होता है, तो: मेमॉयर (संस्मरण) पर रोक: कोई भी पूर्व सचिव, सेना प्रमुख या खुफिया एजेंसी का प्रमुख अपनी सेवा के अनुभव 20 साल तक नहीं लिख पाएगा। ऐतिहासिक रिकॉर्ड की कमी: विशेषज्ञों का मानना है कि इससे समकालीन इतिहास के सैन्य और प्रशासनिक दृष्टिकोण लुप्त हो सकते हैं। गोपनीयता की सुरक्षा: सरकार का मानना है कि 20 साल बाद कई संवेदनशील अभियान 'डिक्लासिफाइड' हो जाते हैं, तब उनका खुलासा करना देश के लिए कम जोखिम भरा होता है।
संसद में महासंग्राम: राहुल गांधी की सदस्यता पर 'लाइफटाइम बैन' की मांग; निशिकांत दुबे का 'सब्सटेंसिव मोशन' और 'चैंबर हंगामे' के वीडियो पर छिड़ी जंग नई दिल्ली | 12 फरवरी 2026 संसद के बजट सत्र का 12वां दिन भारतीय राजनीति के इतिहास में सबसे तीखे टकरावों में से एक के रूप में दर्ज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चौतरफा हमला बोल दिया है। जहाँ एक ओर उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए 'सब्सटेंसिव मोशन' पेश किया गया है, वहीं दूसरी ओर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक 'लीक' वीडियो के जरिए विपक्ष पर स्पीकर के अपमान का गंभीर आरोप लगाया है। यहाँ आज के घटनाक्रम और संसद के भीतर-बाहर चल रहे घमासान का विस्तृत विश्लेषण दिया गया है: 1. निशिकांत दुबे का बड़ा दांव: राहुल गांधी पर 'लाइफटाइम बैन' की मांग भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने गुरुवार को लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक 'सब्सटेंसिव मोशन' (Substantive Motion) पेश किया। आरोप: दुबे का दावा है कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी विदेशी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं और संसद में लगातार झूठ बोल रहे हैं। मांग: उन्होंने मांग की है कि न केवल राहुल की संसद सदस्यता रद्द की जाए, बल्कि उन पर भविष्य में चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध (Lifetime Ban) लगाया जाए। क्या होता है सब्सटेंसिव मोशन? यह एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर प्रस्ताव होता है, जो किसी गंभीर मामले (जैसे राष्ट्रपति, जज या सांसद के आचरण) पर सदन की राय या फैसला लेने के लिए लाया जाता है। 2. किरेन रिजिजू का वीडियो बम: "स्पीकर के चैंबर में दी गईं गालियां" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर 4 फरवरी का एक वीडियो साझा किया, जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। दावा: रिजिजू का कहना है कि 20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में जबरन घुसे, उन्हें गालियां दीं और प्रधानमंत्री को धमकियां दीं। प्रियंका गांधी पर निशाना: रिजिजू ने आरोप लगाया कि यह सब प्रियंका गांधी की मौजूदगी में हुआ और उन्होंने सांसदों को उकसाया। प्रियंका की सफाई: प्रियंका गांधी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "गाली देने वाली बात सरासर झूठ है। मैं वहां चुपचाप बैठी थी और अंत में केवल शांति से अपनी बात रखी थी।" 3. ट्रेड डील पर पीयूष गोयल का राहुल को जवाब राहुल गांधी द्वारा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को 'किसानों के साथ गद्दारी' बताने पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मोर्चा संभाला: तथ्यों की सुरक्षा: गोयल ने स्पष्ट किया कि डील में 90-95% कृषि उत्पाद (डेयरी, पोल्ट्री, चावल, गेहूं, मक्का, दालें आदि) पूरी तरह बाहर रखे गए हैं ताकि भारतीय किसानों को कोई नुकसान न हो। हमला: गोयल ने कहा, "राहुल गांधी झूठ का पुलिंदा हैं। वे देश को तेजी से आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकते और विकास के खिलाफ हैं।" 4. राहुल गांधी का मीडिया पर पलटवार: "आप भाजपा के लिए काम कर रहे हैं" संसद के बाहर जब मीडिया ने राहुल गांधी से 'प्रिविलेज मोशन' पर सवाल पूछा, तो वे भड़क गए: मीडिया की भूमिका पर सवाल: राहुल ने पत्रकारों से कहा, "क्या आज का कोड वर्ड 'प्रिविलेज मोशन' है? कल 'ऑथेंटिकेट' था। आप लोग पूरी तरह भाजपा के लिए काम कर रहे हैं, थोड़ा तो ऑब्जेक्टिव रहने की कोशिश कीजिए। यह देश के साथ अन्याय है।" अडानी-अंबानी का मुद्दा: राहुल अपनी इस बात पर कायम रहे कि अनिल अंबानी और अडानी के खिलाफ विदेशी फाइलों में सबूत हैं और सरकार उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचा रही है। 5. केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले का पक्ष केसी वेणुगोपाल: कांग्रेस संगठन महासचिव ने कहा कि सरकार राहुल गांधी की आवाज दबाने के लिए चेयर (स्पीकर) पर दबाव डाल रही है। उन्होंने कहा, "पिछली बार सदस्यता छीनी तो जनता ने और ज्यादा वोट दिए, इस बार फांसी देना चाहते हैं तो दे दें, हम सच बोलते रहेंगे।" सुप्रिया सुले: उन्होंने नए श्रम कानूनों (Labour Code) का विरोध करते हुए कहा कि जब देश के श्रमिक सड़कों पर हड़ताल कर रहे हैं, तब सदन में उनके खिलाफ बिल लाना अन्यायपूर्ण है। 📊 संसद डायरी: 12 फरवरी के मुख्य अपडेट्स समय घटना विवरण 11:15 AM सदन स्थगित विपक्ष के भारी हंगामे और 'ट्रेड डील वापस लो' के नारों के बीच लोकसभा 12 बजे तक स्थगित। 12:10 PM पीएम मोदी की एंट्री प्रधानमंत्री मोदी राज्यसभा पहुंचे, भाजपा सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। 01:30 PM राहुल का बयान राहुल गांधी ने मीडिया को 'ऑब्जेक्टिव' रहने की सलाह दी। 02:15 PM मंडाविया का जवाब श्रम मंत्री ने कहा कि नए लेबर कोड का हड़ताल से ज्यादा समर्थन हो रहा है। 02:30 PM पीएम की तारीफ मोदी ने निर्मला सीतारमण के बजट भाषण के जवाब की सराहना की। 6. राहुल गांधी की सदस्यता का कानूनी इतिहास यह पहली बार नहीं है जब राहुल की सदस्यता पर तलवार लटकी है: मार्च 2023: 'मोदी सरनेम' केस में 2 साल की सजा के बाद उनकी सदस्यता रद्द हुई थी। अगस्त 2023: सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद सदस्यता बहाल हुई। नया संकट: निशिकांत दुबे का 'सब्सटेंसिव मोशन' यदि स्वीकार होता है, तो यह राहुल गांधी के राजनीतिक करियर के लिए अब तक की सबसे बड़ी कानूनी और संवैधानिक चुनौती बन सकता है।
संसद में महासंग्राम: स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का ऐतिहासिक कदम; 'नरवणे बुक' और बजट पर घमासान नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026 भारतीय संसदीय इतिहास में आज का दिन बेहद उथल-पुथल भरा रहा। बजट सत्र के 10वें दिन विपक्ष ने एक बड़ा संवैधानिक दांव खेलते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) का नोटिस पेश कर दिया। उधर, सदन के बाहर पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की किताब को लेकर राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच 'जुबानी जंग' तेज हो गई है। यहाँ आज की संसदीय कार्यवाही और विवादों का विस्तृत ब्यौरा दिया गया है: 1. स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: मुख्य वजह और प्रक्रिया विपक्ष ने लोकसभा सचिवालय को दोपहर 1:14 बजे आधिकारिक नोटिस सौंपा। इस कदम के पीछे की कूटनीति और नियम निम्नलिखित हैं: आरोप: प्रस्ताव में कहा गया है कि स्पीकर ओम बिरला खुलेआम 'एकतरफा' तरीके से सदन चला रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों (जैसे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव) पर बोलने नहीं दिया गया और विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए 8 सांसदों को मनमाने ढंग से सस्पेंड किया गया। नोटिस पर हस्ताक्षर: कुल 118 सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें कांग्रेस, सपा, डीएमके और वामपंथी दल शामिल हैं। TMC का रुख: दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने फिलहाल इस नोटिस पर साइन नहीं किए हैं। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि वे प्रस्ताव का समर्थन करते हैं लेकिन स्पीकर को जवाब देने के लिए 1-2 दिन का समय दिया जाना चाहिए था। राहुल गांधी के हस्ताक्षर नहीं: सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने खुद इस नोटिस पर साइन नहीं किए हैं, जो एक सोची-समझी रणनीतिक दूरी हो सकती है। संवैधानिक प्रावधान: यह नोटिस संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत दिया गया है। स्पीकर ने सेक्रेटरी जनरल को इस नोटिस की जांच करने का निर्देश दिया है। 2. सदन की कार्यवाही: हंगामे की भेंट चढ़ा प्रश्नकाल मंगलवार को लोकसभा में कामकाज के नाम पर केवल शोर-शराबा ही देखने को मिला: 11:00 AM: सदन शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में आ गए। महज 1 मिनट में कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। विशेष बात यह थी कि आज स्पीकर की कुर्सी पर ओम बिरला नहीं, बल्कि पीसी मोहन बैठे थे। 12:00 PM: दोबारा कार्यवाही शुरू हुई, लेकिन विपक्ष ने 'वी वॉन्ट जस्टिस' के नारे जारी रखे। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने हाथ जोड़कर विपक्ष से बजट पर चर्चा करने की विनती की, लेकिन शोर नहीं थमा और सदन 2 बजे तक स्थगित हो गया। 02:00 PM: तीसरी बार कार्यवाही शुरू होने पर केपी तेनेट्टी ने चेयर संभाली। हंगामे के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट पर चर्चा की शुरुआत की। 3. 'नरवणे बुक' कॉन्ट्रोवर्सी: राहुल गांधी का बड़ा बयान सदन के बाहर राहुल गांधी ने पूर्व आर्मी चीफ जनरल एम.एम. नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' को लेकर सरकार को घेरा: "या तो नरवणे झूठ बोल रहे हैं, या पेंगुइन (पब्लिशर)। नरवणे ने खुद X पर पोस्ट किया था कि किताब उपलब्ध है। मैं पेंगुइन के बजाय एक पूर्व आर्मी चीफ की बात पर विश्वास करना चुनूंगा। सरकार इस किताब से डरी हुई है क्योंकि इसमें अग्निवीर, चीन विवाद और इंडो-US ट्रेड डील से जुड़ी असुविधाजनक बातें हैं।" उधर, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि जब पब्लिशर कह रहा है कि किताब छपी ही नहीं, तो राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं। 📊 बजट चर्चा: शशि थरूर और अखिलेश यादव के प्रहार जब 2 बजे बजट पर चर्चा शुरू हुई, तो विपक्ष ने सरकार के आर्थिक दावों की धज्जियां उड़ाईं: नेता मुख्य आरोप / बिंदु शशि थरूर सरकार केवल 'हेडलाइन मैनेजमेंट' करती है। जल जीवन और SC विकास योजनाओं का पैसा खर्च ही नहीं हुआ। आम जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ गया है। अखिलेश यादव यह बजट 'दिशाहीन' है। 11 साल से बजट आ रहा है लेकिन लोगों की आय नहीं बढ़ी। सरकार बताए कि '0' बड़ा है या '18' (टैक्स कटौती का संदर्भ)। अखिलेश यादव यूपी के लिए इस बजट में कुछ नहीं है। यूएस डील के बाद विदेशी माल आएगा, तो हमारे किसान क्या उगाएंगे? 4. सत्ता पक्ष का बचाव और जवाबी हमला किरेन रिजिजू का वीडियो: रिजिजू ने 4 फरवरी के हंगामे का वीडियो शेयर कर आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद गुंडागर्दी कर रहे थे और पीएम की सीट तक पहुंच गए थे। गिरिराज सिंह का प्रहार: उन्होंने नेहरू पर कश्मीर को गिरवी रखने का आरोप लगाया और कहा कि राहुल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहिए। संख्या बल: रिजिजू ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के पास नंबर नहीं हैं, इसलिए वे अविश्वास प्रस्ताव के जरिए स्पीकर को हटा नहीं पाएंगे, वे केवल ड्रामा कर रहे हैं।