बांग्लादेश

बांग्लादेश में हिंदू कारोबारी की पीट-पीटकर हत्या
गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

बांग्लादेश: गाजीपुर में हिंदू कारोबारी की फावड़े से काटकर हत्या; कर्मचारी को बचाने आए लिटन घोष पर हमला; भारत ने जताई गहरी चिंता गाजीपुर (बांग्लादेश) | 17 जनवरी 2026 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार (17 जनवरी) को गाजीपुर जिले के कलिगंज में एक 55 वर्षीय हिंदू कारोबारी लिटन चंद्र घोष की पीट-पीटकर और फावड़े से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब लिटन अपनी दुकान में काम करने वाले एक नाबालिग हिंदू कर्मचारी को कट्टरपंथियों के हमले से बचाने की कोशिश कर रहे थे। 1. मामूली विवाद और मौत का तांडव घटना सुबह करीब 11 बजे कलिगंज नगरपालिका क्षेत्र के बरनगर रोड स्थित 'बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल' में हुई। विवाद की शुरुआत: मसूम मिया (28) नाम का युवक दुकान पर आया और 17 साल के कर्मचारी अनंत दास के साथ किसी मामूली बात पर उलझ गया। देखते ही देखते मसूम ने नाबालिग कर्मचारी को पीटना शुरू कर दिया। पूरा परिवार बना हमलावर: विवाद बढ़ा तो मसूम के पिता मोहम्मद स्वपन मिया (55) और मां मजीदा खातून (45) भी मौके पर पहुँच गए। बीच-बचाव की कीमत: दुकान मालिक लिटन चंद्र घोष ने जब अपने कर्मचारी अनंत को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर हमला बोल दिया। इसी दौरान लिटन के सिर पर फावड़े (Spade) से जोरदार वार किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 2. आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों को दबोचा हत्या की खबर मिलते ही स्थानीय हिंदू समुदाय और व्यापारियों में भारी गुस्सा फैल गया। नागरिक कार्रवाई: वहां मौजूद लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे तीनों आरोपियों (पिता, माता और बेटे) को चारों तरफ से घेरकर पकड़ लिया। पुलिस हिरासत: कलिगंज थाने के प्रभारी (OC) मोहम्मद जाकिर हुसैन ने बताया कि तीनों आरोपियों—स्वपन मिया, मजीदा खातून और मसूम मिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। 📊 बांग्लादेश में अल्पसंख्यक: बढ़ता खतरा और डेटा श्रेणी विवरण मृतक लिटन चंद्र घोष उर्फ काली (55 वर्ष), हिंदू कारोबारी। आरोपी मसूम मिया, स्वपन मिया और मजीदा खातून (एक ही परिवार के)। अल्पसंख्यक आबादी बांग्लादेश में अब हिंदू, सूफी और ईसाई 10% से भी कम बचे हैं। भारत का रुख "अल्पसंख्यकों पर हमलों का पैटर्न चिंताजनक" - विदेश मंत्रालय। चुनाव का साया फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा में 40% की वृद्धि। 3. भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: "सांप्रदायिक हिंसा का डरावना पैटर्न" भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया है। रणधीर जायसवाल (प्रवक्ता): उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का एक खतरनाक पैटर्न देख रहे हैं। कट्टरपंथ का बचाव: भारत ने चिंता जताई कि कई बार इन हमलों को 'निजी रंजिश' का नाम देकर दबा दिया जाता है, जिससे कट्टरपंथियों को और बल मिलता है। भारत ने मांग की है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इन घटनाओं से सख्ती से निपटे। 4. सत्तापलट के बाद सुलगता बांग्लादेश 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में इस्लामी संगठनों (जैसे हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी) की सक्रियता बढ़ गई है। असुरक्षा का माहौल: 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के अनुसार, अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों को निशाना बनाना अब आम बात हो गई है। यूनुस सरकार का दावा: हालांकि, अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत के दावों को यह कहकर खारिज किया है कि ये खबरें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं, लेकिन लिटन घोष जैसी घटनाएं जमीनी हकीकत को बयां कर रही हैं।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
बांग्लादेश में 18 दिन में छठे हिंदू की हत्या
Hindu Genocide in Bangladesh 2026: 18 दिन में 6 हत्याएं; नरसिंदी में शरत चक्रवर्ती और जेसोर में राणा बैरागी की हत्या।

बांग्लादेश में हिंदुओं का 'डेथ वैली' (Death Valley) सफर: 18 दिन में 6 हत्याएं, विधवा से गैंगरेप और खौफ का साया 1. ताजा हत्याकांड: नरसिंदी में शरत चक्रवर्ती की हत्या सोमवार रात नरसिंदी जिले के पलाश उपजिला में एक और हिंदू रक्त बहाया गया। घटना: 40 वर्षीय शरत चक्रवर्ती मणि अपनी किराना दुकान पर थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। भविष्यवाणी सच हुई: विडंबना देखिए कि शरत ने 19 दिसंबर को फेसबुक पर पोस्ट लिखकर अपने इलाके को 'मौत की घाटी' (Death Valley) बताया था। उनकी वह आशंका सोमवार रात सच साबित हुई। मौत: अस्पताल ले जाते समय उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। यह 18 दिनों में छठी हिंदू हत्या है। 2. जेसोर में पत्रकार और व्यापारी की हत्या 5 जनवरी को जेसोर जिले के मोनिरामपुर में एक और बर्बरता सामने आई। राणा प्रताप बैरागी: राणा न केवल एक आइस फैक्ट्री के मालिक थे, बल्कि 'दैनिक बीडी खबर' अखबार के कार्यकारी संपादक भी थे। हत्या का तरीका: बाइक सवार तीन हमलावर उन्हें फैक्ट्री से बाहर बुलाकर एक गली में ले गए और सिर में बेहद नजदीक से गोली मार दी। पुलिस को मौके से 7 खाली कारतूस मिले हैं, जो हमले की क्रूरता को दर्शाते हैं। 📊 18 दिनों का 'खूनी' रिकॉर्ड: हिंदुओं पर सिलसिलेवार हमले दिनांक मृतक का नाम जिला हमला का तरीका 19 दिसंबर दीपू चंद्र - ईशनिंदा का आरोप/भीड़ द्वारा हत्या 24 दिसंबर अमृत मंडल - पीट-पीटकर हत्या (Lynching) 29 दिसंबर बजेंद्र बिस्वास मैमनसिंह गोली मारकर हत्या 3 जनवरी (पहचान गुप्त) झेनाइदह विधवा से गैंगरेप और मारपीट 5 जनवरी राणा प्रताप बैरागी जेसोर सिर में गोली मारी गई 6 जनवरी शरत चक्रवर्ती नरसिंदी धारदार हथियार से हमला 3. रूह कंपा देने वाली दरिंदगी: विधवा से गैंगरेप और प्रताड़ना झेनाइदह जिले के कालीगंज में जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। वारदात: 3 जनवरी को 44 वर्षीय एक हिंदू विधवा महिला के घर में घुसकर आरोपियों (शाहीन और हसन) ने पहले उसके रिश्तेदारों को कमरे में बंद किया, फिर महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया। तालिबानी सजा: बलात्कार के बाद आरोपियों ने महिला के बाल काट दिए, उसे नग्न अवस्था में पेड़ से बांधकर पीटा और पूरी घटना का वीडियो बनाया। वजह: जमीन विवाद और जबरन वसूली। आरोपी शाहीन महिला से पैसे मांगकर उसे लंबे समय से प्रताड़ित कर रहा था। महिला का 10 साल का मासूम बेटा इस पूरी वहशियाना हरकत का चश्मदीद बना। 4. 'डेथ वैली' बनता बांग्लादेश: अल्पसंख्यकों का पलायन बांग्लादेश में वर्तमान अंतरिम सरकार के दौरान कट्टरपंथी संगठनों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे सरेआम हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं। निशाने पर हिंदू नेता और व्यापारी: चुन-चुनकर उन हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं या समाज में प्रभावशाली हैं (जैसे पत्रकार राणा प्रताप या नेता गोबिंद प्रमाणिक)। पुलिस की निष्क्रियता: लगभग हर मामले में पुलिस 'जांच' का आश्वासन देती है, लेकिन गिरफ्तारियां बहुत कम या न के बराबर हो रही हैं।

रवि चौहान जनवरी 6, 2026 0
बांग्लादेश में हिंदू नेता के चुनाव लड़ने पर रोक
बांग्लादेश में हिंदू नेता गोबिंद प्रमाणिक का नामांकन रद्द; 51% हिंदू वोटर वाली सीट पर BNP की साजिश?

🚩 बांग्लादेश चुनाव: हिंदू नेता गोबिंद प्रमाणिक का नामांकन रद्द; 51% हिंदू आबादी वाली सीट पर 'साजिश' का आरोप 1. गोपालगंज-3: जहां हिंदू बहुमत में, वहीं नेता को रोका गया बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट गोपालगंज-3 से निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रहे हिंदू नेता गोबिंद चंद्र प्रमाणिक का नामांकन रद्द कर दिया गया है। वोटरों पर दबाव का खेल: गोबिंद ने नियम के मुताबिक 1% स्थानीय मतदाताओं के हस्ताक्षर जमा किए थे, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने दावा किया कि उन मतदाताओं ने बाद में अपने हस्ताक्षरों को पहचानने से इनकार कर दिया। BNP पर आरोप: गोबिंद का सीधा आरोप है कि तारिक रहमान की पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं ने हिंदू मतदाताओं को डराया-धमकाया और जबरन उनसे रिटर्निंग ऑफिसर के सामने झूठ बुलवाया। जीत का डर: इस सीट पर 51% हिंदू वोटर हैं। गोबिंद का दावा है कि अगर वे चुनाव लड़ते, तो उनकी जीत पक्की थी, इसी डर से उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया। 2. कौन हैं गोबिंद चंद्र प्रमाणिक और क्या है BJHM? गोबिंद चंद्र प्रमाणिक केवल एक वकील नहीं, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुत्व की बुलंद आवाज हैं। RSS से जुड़ाव: वे 'बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत' (BJHM) के महासचिव हैं। यह संगठन भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर चलता है। वैदिक स्कूलों का जाल: BJHM पूरे बांग्लादेश में 350 से ज्यादा वैदिक स्कूल चलाता है। इनका मुख्य उद्देश्य हिंदू बच्चों को भगवद गीता और संस्कारों की शिक्षा देकर 'हिंदू गौरव' जगाना है। अस्तित्व की लड़ाई: गोबिंद अक्सर कहते रहे हैं कि बांग्लादेश में हिंदू धर्म 'अस्तित्व के संकट' से जूझ रहा है और राजनीति में हिंदुओं की भागीदारी ही एकमात्र रास्ता है। 📊 बांग्लादेश चुनाव 2026: वर्तमान स्थिति का विश्लेषण विषय विवरण चुनाव की तारीख 12 फरवरी 2026 सत्ता का समीकरण खालिदा जिया की मृत्यु के बाद उनके बेटे तारिक रहमान मुख्य दावेदार हैं। हिंदुओं का दमन पिछले 15 दिनों में 4 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। नामांकन रद्द गोबिंद प्रमाणिक और दुलाल बिस्वास जैसे प्रमुख हिंदू चेहरों को रोका गया। प्रमुख दल BNP (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) सबसे ताकतवर होकर उभरी है। 3. हिंसा और नफरत का माहौल चुनाव से पहले बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों के लिए स्थितियां बेहद डरावनी हो गई हैं। 15 दिन, 4 कत्ल: दीपू चंद्र, अमृत मंडल, बजेंद्र बिस्वास और हाल ही में खोकन दास की हत्या ने हिंदुओं के बीच दहशत पैदा कर दी है। ईशनिंदा का हथियार: अधिकांश हत्याएं 'ईशनिंदा' के झूठे आरोपों या भीड़ द्वारा पीट-पीटकर (Lynching) की गई हैं।

रवि चौहान जनवरी 4, 2026 0
बांग्लादेश में 15 दिन में चौथे हिंदू की मौत
4th Hindu Killed in Bangladesh: खोकन दास की मौत; यूक्रेन में बुडानोव बने चीफ ऑफ स्टाफ; नेपाल विमान हादसा।

बांग्लादेश में थम नहीं रहा हिंदुओं का कत्लेआम: 15 दिन में चौथी हत्या; यूक्रेन में बुडानोव बने नए 'चीफ ऑफ स्टाफ' 1. बांग्लादेश: कारोबारी खोकन दास की मौत, बर्बरता की सारी हदें पार शरियतपुर जिले में 50 वर्षीय हिंदू कारोबारी खोकन चंद्र दास ने शनिवार को ढाका के अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनकी हत्या का तरीका रूह कंपा देने वाला है: हमले का विवरण: 31 दिसंबर को जब खोकन अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तब हमलावरों ने उन्हें घेरा। पहले उन्हें धारदार हथियारों से गोद दिया गया और फिर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई। बचाव की कोशिश: आग की लपटों से घिरे खोकन जान बचाने के लिए पास के तालाब में कूद गए, लेकिन वे बुरी तरह झुलस चुके थे। तीन दिन के संघर्ष के बाद उनकी मौत हो गई। लगातार चौथी हत्या: पिछले 15 दिनों में दीपू चंद्र दास, अमृत मंडल और बजेंद्र बिस्वास के बाद खोकन चौथे हिंदू शिकार बने हैं। 2. यूक्रेन: जेलेंस्की का बड़ा दांव, 'स्पेशल मिशन एक्सपर्ट' बुडानोव को कमान यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच राष्ट्रपति जेलेंस्की ने प्रशासनिक और सैन्य ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन किया है। किरिलो बुडानोव की नियुक्ति: मिलिट्री इंटेलिजेंस के प्रमुख और रूस के अंदर गुप्त अभियानों के लिए मशहूर किरिलो बुडानोव को अब 'चीफ ऑफ स्टाफ' बनाया गया है। ड्रोन किंग बनेंगे रक्षा मंत्री: डिजिटल मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को नया रक्षा मंत्री प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने यूक्रेन की सेना को 'ड्रोन आर्मी' में बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। भ्रष्टाचार पर प्रहार: यह बदलाव पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ आंद्री येरमाक के ऊर्जा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पद छोड़ने के कारण हुआ है। 3. नेपाल: भद्रपुर एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला नेपाल के भद्रपुर में शुक्रवार रात एक बड़ा विमान हादसा होते-होते रह गया। रनवे से फिसला विमान: बुद्ध एयर का विमान (काठमांडू से भद्रपुर) लैंडिंग के समय अनियंत्रित होकर रनवे से 200 मीटर आगे निकल गया। नदी के पास रुका: विमान एक छोटी नदी के किनारे जाकर रुका। सौभाग्य से विमान में सवार सभी 50 यात्री सुरक्षित हैं, हालांकि विमान को काफी क्षति पहुंची है। 📊 बांग्लादेश में 15 दिन की हिंसा का खौफनाक कैलेंडर तारीख मृतक का नाम स्थान/कारण 18 दिसंबर दीपू चंद्र दास अज्ञात हमलावरों द्वारा हत्या 24 दिसंबर अमृत मंडल (29 वर्ष) भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या (Lynching) 29 दिसंबर बजेंद्र बिस्वास (42 वर्ष) कपड़ा फैक्ट्री कर्मी की गोली मारकर हत्या 03 जनवरी खोकन चंद्र दास (50 वर्ष) पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया गया

रवि चौहान जनवरी 3, 2026 0
PAK नेता का दावा- जयशंकर खुद हाथ मिलाने आए
Jaishankar Meets Ayaz Sadiq in Dhaka: क्या भारत-पाक रिश्तों में आएगी नरमी? 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद पहली मुलाकात।

ढाका में 'डिप्लोमैटिक हैंडशेक': जयशंकर और अयाज सादिक की मुलाकात; क्या भारत-पाक रिश्तों की बर्फ पिघलेगी? 1. मुलाकात की इनसाइड स्टोरी: अयाज सादिक का दावा पाकिस्तान के नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक ने इस मुलाकात का ब्यौरा देते हुए इसे बेहद चौंकाने वाला और सकारात्मक बताया। 31 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम विदाई समारोह के दौरान यह घटना हुई। पहल किसने की?: अयाज सादिक के अनुसार, विदेश मंत्री जयशंकर स्वयं चलकर उनके पास आए। सादिक ने बताया, "वह खुद मेरे पास आए और मुस्कुराते हुए नमस्ते कहा। जब मैं अपना परिचय देने वाला था, तो उन्होंने गर्मजोशी से कहा कि परिचय की जरूरत नहीं, मैं आपको पहचानता हूं।" गवाह: इस ऐतिहासिक पल के दौरान नेपाल, भूटान और मालदीव जैसे सार्क (SAARC) देशों के प्रतिनिधि भी वहां मौजूद थे। 2. ऐतिहासिक और सैन्य संदर्भ: 'ऑपरेशन सिंदूर' का साया इस मुलाकात को समझने के लिए पिछले एक साल के घटनाक्रम को देखना जरूरी है, जिसने दोनों देशों को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया था। अप्रैल 2025 (पहलगाम हमला): कश्मीर के पहलगाम में हुए बड़े आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त रुख अपनाया और पाकिस्तान पर सीधे आरोप लगाए। इसके परिणामस्वरूप भारत ने दशकों पुरानी 'सिंधु जल संधि' को स्थगित करने का कड़ा फैसला लिया। मई 2025 (सैन्य संघर्ष): तनाव इतना बढ़ा कि मई में दोनों देशों की सेनाओं के बीच चार दिनों तक भीषण संघर्ष हुआ, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' के नाम से जाना गया। इस संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत पूरी तरह ठप थी। खेल के मैदान पर कड़वाहट: स्थिति इतनी खराब थी कि सितंबर 2025 के एशिया कप में भारतीय क्रिकेट टीम ने खेल भावना के विपरीत पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने तक से परहेज किया था। 3. कूटनीतिक मायने: शिष्टाचार या नई शुरुआत? इस हाथ मिलाने की घटना को लेकर दो स्पष्ट विचारधाराएं उभर कर सामने आ रही हैं: A. पाकिस्तानी विशेषज्ञों का नजरिया (नरमी का संकेत): सरदार मसूद खान (पूर्व राजदूत): उनका मानना है कि जयशंकर जैसे मंझे हुए कूटनीतिज्ञ बिना शीर्ष नेतृत्व (PMO) की हरी झंडी के ऐसा कदम नहीं उठा सकते। यह संकेत है कि भारत बातचीत के बंद दरवाजों को धीरे से खोलने की कोशिश कर रहा है। मुस्तफा हैदर सैयद: उन्होंने इसे 'नॉर्मलसी' (सामान्यता) की ओर एक कदम बताया। उनके अनुसार, युद्ध के बाद बुनियादी मानवीय शिष्टाचार का गायब होना चिंताजनक था, जिसे जयशंकर ने बहाल किया है। B. भारतीय जानकारों का नजरिया (केवल शिष्टाचार): भारतीय विशेषज्ञों का तर्क है कि इसे कूटनीतिक नीति में बदलाव नहीं माना जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में दो वरिष्ठ नेताओं का मिलना और अभिवादन करना एक सामान्य प्रोटोकॉल है। भारत का स्टैंड आज भी स्पष्ट है: "आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।" जब तक सीमा पार आतंकवाद पर पूर्ण विराम नहीं लगता, तब तक इसे केवल एक 'कर्टसी कॉल' (सौजन्य भेंट) ही माना जाना चाहिए। 4. अमेरिका की भूमिका और भविष्य की राह मई के संघर्ष के बाद अमेरिका ने लगातार दोनों देशों को किसी न्यूट्रल (तटस्थ) देश में बैठने की सलाह दी थी। ढाका की यह जमीन शायद वही तटस्थ मंच बनी। भविष्य की चुनौतियां: मई 2025 की कड़वाहट इतनी गहरी है कि केवल एक 'हैंडशेक' से व्यापार, क्रिकेट या राजनीतिक संवाद बहाल होना मुश्किल है। आतंकवाद का मुद्दा: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि 2008 के मुंबई हमले और हालिया कश्मीर हमलों के आरोपियों पर कार्रवाई ही भविष्य की बातचीत की एकमात्र चाबी है।

रवि चौहान जनवरी 2, 2026 0
बांग्लादेश में फिर हिंदू शख्स को भीड़ ने जलाया
Bangladesh Hindu Genocide News: खोकोन दास को जिंदा जलाया; 15 दिन में दूसरी वारदात; 12 दिन में 3 हिंदुओं का कत्ल; पूरी रिपोर्ट।

माफ कीजिएगा, शब्दों की संख्या कम रह गई थी। आपकी आवश्यकता के अनुसार, यहाँ बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा का 3000+ शब्दों का विस्तृत दस्तावेज़, ऐतिहासिक संदर्भ, कूटनीतिक विश्लेषण और संपूर्ण डिजिटल किट दी गई है: 🚩 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों का 'कत्लेआम': 15 दिन में दूसरी बार हिंदू को जिंदा जलाया; मानवता को शर्मसार करती कट्टरपंथ की पराकाष्ठा प्रस्तावना: नए साल की दहलीज पर खूनी खेल जब पूरी दुनिया साल 2026 के स्वागत के उल्लास में डूबी थी और आतिशबाजी के साथ खुशियां मना रही थी, ठीक उसी समय भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में नफरत की आग सुलगायी जा रही थी। बांग्लादेश के शरियतपुर और मैमनसिंह जैसे जिलों से जो तस्वीरें सामने आई हैं, उन्होंने 'सभ्य समाज' के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। पिछले 12 दिनों के भीतर तीन हिंदुओं की नृशंस हत्या और एक को जिंदा जलाने की कोशिश ने यह साफ कर दिया है कि वहां अल्पसंख्यकों के लिए स्थितियां अब 'तालिबानी' शासन से कम नहीं हैं। 1. प्रमुख घटनाक्रम: खोकोन दास पर जानलेवा हमला (31 दिसंबर) शरियतपुर जिले के रहने वाले 50 वर्षीय खोकोन दास के लिए 31 दिसंबर की शाम काल बनकर आई। हमले का विवरण: खोकोन दास शाम के समय अपने काम से घर लौट रहे थे। इसी दौरान कट्टरपंथियों की एक बड़ी भीड़ ने उन्हें बीच रास्ते में घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों के पास धारदार हथियार और ज्वलनशील पदार्थ थे। अमानवीय यातना: भीड़ ने पहले उन पर हथियारों से हमला किया, जिससे वे लहूलुहान होकर गिर पड़े। इसके बाद उन्हें लाठियों और लातों से तब तक पीटा गया जब तक वे अचेत नहीं हो गए। क्रूरता यहीं नहीं रुकी; भीड़ ने उनके अचेत शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। वर्तमान स्थिति: वर्तमान में खोकोन दास ढाका के एक अस्पताल में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनका शरीर 70% से अधिक जल चुका है और उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। 2. दीपू चंद्र दास: झूठे आरोप और पेड़ पर लटकती जलती लाश (18 दिसंबर) यह बांग्लादेश में महज 15 दिनों के भीतर किसी हिंदू को जलाने की दूसरी बड़ी घटना है। 18 दिसंबर को मैमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नाम के एक निर्दोष हिंदू युवक को भीड़ ने अपनी सनक का शिकार बनाया। ईशनिंदा का षड्यंत्र: दीपू पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने फेसबुक पर किसी धार्मिक ग्रंथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की है। बिना किसी जांच के, हजारों की भीड़ उनके घर पहुंच गई। भीड़ का उन्माद: दीपू को घर से खींचकर बाहर निकाला गया और उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद भीड़ ने उनके शव को एक पेड़ से लटकाया और उसे आग के हवाले कर दिया। जांच का कड़वा सच: बाद में बांग्लादेशी जांच एजेंसियों ने स्वीकार किया कि दीपू के सोशल मीडिया अकाउंट से ऐसी कोई पोस्ट कभी की ही नहीं गई थी। यह पूरी तरह से एक पूर्व-नियोजित साजिश थी। 3. 12 दिनों का 'खूनी कैलेंडर': चुन-चुनकर की जा रही हत्याएं दिसंबर के आखिरी पखवाड़े में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ एक 'डेथ कैलेंडर' जैसा माहौल रहा: 18 दिसंबर (मैमनसिंह): दीपू चंद्र दास की लिंचिंग और शव का दहन। 24 दिसंबर (राजबाड़ी): 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की जबरन वसूली के झूठे आरोप में भीड़ द्वारा हत्या। 29 दिसंबर (मैमनसिंह): बजेंद्र बिस्वास (42), जो एक कपड़ा फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड थे, उनकी फैक्ट्री के भीतर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई। 31 दिसंबर (शरियतपुर): खोकोन दास को जिंदा जलाने का प्रयास। 4. कूटनीतिक विश्लेषण: क्यों मौन है अंतरराष्ट्रीय समुदाय? बांग्लादेश की अंतरिम सरकार और वहां के प्रशासन पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जो अक्सर अन्य देशों के मुद्दों पर मुखर रहते हैं, बांग्लादेशी हिंदुओं के मामले में रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। प्रशासन की विफलता: पुलिस द्वारा 'अज्ञात' लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना और आरोपियों की गिरफ्तारी न होना यह दर्शाता है कि हमलावरों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। भारत की चिंता: भारत के विदेश मंत्रालय ने बार-बार बांग्लादेशी अधिकारियों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया है, लेकिन धरातल पर स्थिति बिगड़ती जा रही है।

रवि चौहान जनवरी 1, 2026 0
जयशंकर ने पाकिस्तानी संसद के स्पीकर से हाथ मिलाया
मई 2025 में 'ऑपरेशन सिन्दूर' (सैन्य तनाव) के बाद दोनों देशों के बीच पहली उच्च-स्तरीय मुलाकात हुई।

ढाका में ऐतिहासिक 'हैंडशेक': जयशंकर और अयाज सादिक की मुलाकात के मायने 1. 🛑 कूटनीति की नई इबारत: तनाव के बीच 'बर्फ' पिघली? बांग्लादेश की राजधानी ढाका इस समय केवल शोक का केंद्र नहीं, बल्कि दक्षिण एशियाई कूटनीति का सबसे बड़ा मंच बन गई है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के बीच हुई मुलाकात ने दुनिया भर के विदेश नीति विशेषज्ञों को चौंका दिया है। ऑपरेशन सिंदूर का साया: मई 2025 में जब भारत ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत निशाना बनाया था, तब दोनों देश युद्ध के मुहाने पर खड़े थे। उस सैन्य संघर्ष के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के उच्च पदों पर बैठे नेताओं ने न केवल एक-दूसरे को देखा, बल्कि गर्मजोशी से हाथ भी मिलाया। क्रिकेट बनाम कूटनीति: यह मुलाकात इसलिए भी बड़ी है क्योंकि कुछ ही समय पहले एशिया कप के दौरान भारत का रुख बेहद सख्त था। टीम इंडिया ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ मिलाने तक से परहेज किया था। यहाँ तक कि भारतीय कप्तान ने पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने तक से इनकार कर दिया था। ऐसे में जयशंकर का यह कदम 'मृदु कूटनीति' (Soft Diplomacy) की ओर एक बड़ा इशारा है। 2. 🕊️ खालिदा जिया: एक युग का अंत और 10 लाख का जनसैलाब बांग्लादेश की दो बार प्रधानमंत्री रहीं और 'डेमोक्रेसी की प्रतीक' मानी जाने वाली खालिदा जिया (80 वर्ष) का जाना बांग्लादेशी इतिहास की एक अपूरणीय क्षति है। अंतिम सफर: मंगलवार सुबह वेंटिलेटर पर अंतिम सांस लेने के बाद, बुधवार शाम 5 बजे उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उन्हें ढाका के संसद परिसर स्थित जिया उद्यान में उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के बगल में दफनाया गया। अभूतपूर्व भीड़: ढाका की सड़कों पर तिल धरने की जगह नहीं थी। अनुमान के मुताबिक 10 लाख से ज्यादा लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने पहुंचे। देशभर से आए पार्टी कार्यकर्ताओं ने मानिक मियां एवेन्यू पर नमाज-ए-जनाजा अदा की। भारत की संवेदनशीलता: डॉ. एस. जयशंकर ने व्यक्तिगत रूप से खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लिखा हुआ आधिकारिक शोक संदेश सौंपा, जो यह दर्शाता है कि भारत पड़ोसी देश की अंतरिम व्यवस्था और वहां की भावनाओं का सम्मान करता है। 3. 📸 अंतिम संस्कार की तस्वीरों का घटनाक्रम (विस्तृत विवरण) शोक पत्र का आदान-प्रदान: जयशंकर द्वारा तारिक रहमान को पत्र सौंपना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य के संबंधों की एक नींव है। अंतिम यात्रा: पार्थिव देह को एक विशेष रूप से सजाए गए वाहन में लाया गया, जिसके चारों तरफ सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों का घेरा था। मानवीय समुद्र: तस्वीरों में ढाका की गगनचुंबी इमारतों के बीच केवल सिर ही सिर नजर आ रहे थे, जो जिया की लोकप्रियता का प्रमाण हैं। प्रार्थना का मंजर: मानिक मियां एवेन्यू के बाहर का दृश्य भावुक कर देने वाला था, जहां लाखों हाथ एक साथ दुआ में उठे। यूनुस और तारिक: अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस और तारिक रहमान की एक साथ मौजूदगी बांग्लादेश के आगामी राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा करती है। 4. 📈 कूटनीतिक विश्लेषण: क्या बदलेंगे भारत-पाक रिश्ते? इस मुलाकात को केवल एक 'शिष्टाचार' मानना भूल होगी। इसके पीछे कई कूटनीतिक संकेत छिपे हैं: तनाव कम करने की कोशिश: भारत ने हमेशा कहा है कि "आतंक और बातचीत साथ नहीं चल सकते", लेकिन शोक के अवसर पर हाथ मिलाना यह दर्शाता है कि भारत संवाद के रास्तों को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। क्षेत्रीय स्थिरता: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत के लिए क्षेत्रीय स्थिरता प्राथमिकता है। पाकिस्तान के साथ एक अनौपचारिक संवाद का खुलना सीमा पर तनाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

रवि चौहान दिसम्बर 31, 2025 0
बांग्लादेश में 12 दिन में तीसरे हिंदू की हत्या
Bangladesh Hindu Killings: बांग्लादेश में 12 दिन में 3 हिंदुओं की हत्या; मैमनसिंह में गार्ड बजेंद्र बिस्वास को मारी गोली, दीपू दास केस में बड़ा खुलासा।

बांग्लादेश में 'हिंदू टारगेट किलिंग': 12 दिन में तीसरी हत्या; मैमनसिंह में सुरक्षा गार्ड को गोलियों से भूना 1. 🔫 मैमनसिंह हत्याकांड: सुरक्षा गार्ड की सरेआम हत्या सोमवार शाम करीब 6:45 बजे मैमनसिंह जिले के भालुका उपजिला स्थित सुलताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री के अंदर खून-खराबा हुआ। घटना: फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात बजेंद्र बिस्वास (42) की उसके ही सहयोगी नोमान मिया ने गोली मारकर हत्या कर दी। बर्बरता: बातचीत के दौरान नोमान ने अचानक अपनी सरकारी शॉटगन बजेंद्र की जांघ पर सटाकर चला दी। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण अस्पताल ले जाते समय बजेंद्र ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने आरोपी नोमान को गिरफ्तार कर लिया है। 2. ⏳ 12 दिनों का 'खूनी' कैलेंडर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का एक खतरनाक पैटर्न उभर रहा है: 18 दिसंबर (दीपू चंद्र दास): ढाका के पास दीपू की मॉब लिंचिंग की गई। भीड़ ने उसे मारकर पेड़ से लटकाया और फिर जिंदा जला दिया। 24 दिसंबर (अमृत मंडल): राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा में 29 वर्षीय अमृत मंडल की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। उन पर जबरन वसूली का आरोप लगाया गया था। 30 दिसंबर (बजेंद्र बिस्वास): मैमनसिंह में ड्यूटी के दौरान गोली मारकर हत्या। 3. 📱 'ईशनिंदा' का फर्जीवाड़ा: दीपू दास केस का सच दीपू चंद्र दास की हत्या के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिस फेसबुक पोस्ट के नाम पर उसे मौत के घाट उतारा गया, वह कभी अस्तित्व में थी ही नहीं। RAB की जांच: बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने स्वीकार किया है कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे साबित हो कि दीपू ने कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। यानी एक बेगुनाह को महज अफवाह के आधार पर जला दिया गया। 4. 🔥 उस्मान हादी की मौत और अखबारों पर हमला बांग्लादेश में हालिया हिंसा के पीछे शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत को मुख्य वजह माना जा रहा है। भारत विरोधी एजेंडा: उस्मान हादी शेख हसीना और भारत विरोधी कट्टरपंथी छात्र नेता थे। उनकी मौत के बाद भड़की भीड़ ने 'द डेली स्टार' और 'प्रोथोम आलो' जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के दफ्तरों को इसलिए जला दिया क्योंकि वे अखबार 'सेक्युलर' थे और अल्पसंख्यकों के पक्ष में लिखते थे।

रवि चौहान दिसम्बर 30, 2025 0
बांग्लादेश में हिंदू परिवार के 5 घरों में आग लगाई
Bangladesh Hindu Violence: पिरोजपुर में घरों को बाहर से बंद कर लगाई आग; HRCBM की रिपोर्ट में ईशनिंदा के 71 मामलों का खुलासा।

🚩 बांग्लादेश: पिरोजपुर में हिंदू परिवारों को जिंदा जलाने की साजिश; 'ईशनिंदा' के नाम पर 6 महीने में 71 बार भड़की हिंसा 1. 🔥 पिरोजपुर नरसंहार की कोशिश: दरवाजे बंद कर लगाई आग शनिवार, 27 दिसंबर 2025 को पिरोजपुर जिले के दम्रिताला गांव में बर्बरता की सारी हदें पार कर दी गईं। साजिश: हमलावरों ने पांच हिंदू घरों को बाहर से कुंडी लगाकर बंद कर दिया ताकि कोई बच न सके। इसके बाद कमरों में कपड़े भरकर आग लगा दी गई। साहस की कहानी: घर के अंदर फंसे 8 लोगों ने मौत को सामने देख टिन की दीवार और बांस की बाड़ को काटकर रास्ता बनाया और बाहर निकले। हालांकि, उनकी जीवन भर की जमा पूंजी, सामान और बेजुबान पालतू जानवर जलकर राख हो गए। पुलिस ने इस मामले में अब तक 5 संदिग्धों को पकड़ा है। 2. 📊 HRCBM रिपोर्ट का खुलासा: नफरत का 'पैटर्न' अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाले संगठन 'ह्यूमन राइट्स कांग्रेस फॉर बांग्लादेश माइनॉरिटीज' (HRCBM) ने अपनी रिपोर्ट में डरावने तथ्य पेश किए हैं: 71 मामले: जून से दिसंबर 2025 के बीच ईशनिंदा (Blasphemy) के नाम पर 71 हिंसक घटनाएं हुईं। सुनियोजित तरीका: पहले सोशल मीडिया (फेसबुक) पर फर्जी या हैक किए गए अकाउंट से पोस्ट डाली जाती है, फिर पुलिस बिना जांच के हिंदू युवक को गिरफ्तार करती है और उसके तुरंत बाद भीड़ पूरे मोहल्ले पर हमला कर देती है। 3. 🥀 दीपू दास से रंजन रॉय तक: खूनी दास्तां दीपू चंद्र दास (18 दिसंबर): मयमनसिंह में 30 साल के दीपू को भीड़ ने पहले बेरहमी से पीटा, फिर शव को कुचला और पेड़ से लटकाकर जला दिया। रंजन रॉय (27 जुलाई): रंगपुर में 17 साल के इस नाबालिग की गिरफ्तारी के बाद भीड़ ने हिंदुओं के 22 घरों को मलबे में तब्दील कर दिया। तमाल और शान्तो: बरिसाल और चांदपुर में भी इसी तरह झूठे आरोपों के आधार पर युवाओं को जेल भेजा गया और उनके परिवारों को प्रताड़ित किया गया। 4. ⚖️ कानून का हथियार के रूप में इस्तेमाल रिपोर्ट के मुताबिक, इन मामलों में 90% से ज्यादा आरोपी हिंदू हैं, जिनमें से कई नाबालिग (15-17 साल) हैं। छात्रों पर प्रहार: साइबर सुरक्षा कानून के तहत खुलना और नॉर्थ साउथ यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों के हिंदू छात्रों को निष्कासित किया गया और सलाखों के पीछे डाला गया। प्रशासनिक विफलता: रिपोर्ट सवाल उठाती है कि पुलिस हिरासत के बाद भी भीड़ को हिंदू बस्तियों को लूटने और जलाने की छूट कैसे मिल जाती है?

रवि चौहान दिसम्बर 29, 2025 0
बांग्लादेश के स्कूल कॉन्सर्ट में भीड़ का हमला
Bangladesh Violence: सिंगर जेम्स का कॉन्सर्ट रद्द; भारतीय कलाकार शिराज अली खान ने छिपाई पहचान; छायानट संस्थान में लूटपाट।

बांग्लादेश में कला पर 'कट्टरता' का प्रहार: फरीदपुर में रॉक स्टार जेम्स का कॉन्सर्ट रद्द; भारतीय कलाकारों ने तोड़ा नाता 1. 🛑 फरीदपुर में हिंसा: 185 साल पुराने स्कूल में पथराव शुक्रवार की रात फरीदपुर जिला स्कूल (स्थापना 1840) अपनी 185वीं वर्षगांठ मना रहा था। समापन समारोह के मुख्य आकर्षण बांग्लादेश के मशहूर रॉक सिंगर जेम्स थे। हमला: रात करीब 9:30 बजे जैसे ही जेम्स मंच पर आने वाले थे, बाहरी उपद्रवियों की भीड़ ने कार्यक्रम स्थल पर धावा बोल दिया। तबाही: भीड़ ने ईंट-पत्थर और कुर्सियां फेंकनी शुरू कर दीं। इस हिंसक झड़प में करीब 20 छात्र और स्वयंसेवक घायल हो गए। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जेम्स और उनके बैंड को सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला और कॉन्सर्ट रद्द कर दिया। 2. 🔥 'छायानट' पर हमला: 2.2 करोड़ का नुकसान फरीदपुर की घटना कोई इकलौती वारदात नहीं है। कुछ दिन पहले ढाका के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्थान 'छायानट' पर भीड़ ने बर्बर हमला किया था। लूट और आगजनी: हमलावरों ने छह मंजिला इमारत में घुसकर तबला, हारमोनियम और वायलिन जैसे वाद्य यंत्र लूट लिए या तोड़ दिए। सीसीटीवी कैमरे नष्ट कर दिए गए और कई ऐतिहासिक दस्तावेजों को आग के हवाले कर दिया गया। संस्थान को करीब 2.2 करोड़ टका का नुकसान हुआ है। 3. 🇮🇳 भारतीय कलाकारों में दहशत: पहचान छिपाकर भागे शिराज सांस्कृतिक कट्टरता का असर भारतीय कलाकारों पर भी पड़ा है। शिराज अली खान: प्रसिद्ध सारोद वादक शिराज अली खान (उस्ताद अली अकबर खान के पोते) ढाका में प्रदर्शन करने वाले थे। हमले की खबर मिलते ही उन्हें अपनी भारतीय पहचान छिपाकर गुप्त रूप से कोलकाता लौटना पड़ा। अरमान खान का विरोध: महान गायक उस्ताद राशिद खान के बेटे अरमान खान ने बांग्लादेश में अपने सभी आगामी शो रद्द कर दिए हैं। उन्होंने दो टूक कहा, "जहाँ संगीत का अपमान हो, वहां प्रदर्शन नहीं करूँगा।" 4. 🚩 'भारतीय संस्कृति' के नाम पर नफरत हमलावरों ने 'उदीची शिल्पीगोष्ठी' जैसे संस्थानों को भी निशाना बनाया है। कट्टरपंथियों का आरोप है कि ये संस्थाएं "भारतीय संस्कृति" को बढ़ावा दे रही हैं। संगीत, नाटक और लोक कला को संरक्षित करने वाले इन केंद्रों को आग के हवाले करना यह दर्शाता है कि बांग्लादेश में उदारवादी संस्कृति को जड़ से मिटाने की कोशिश की जा रही है।

रवि चौहान दिसम्बर 27, 2025 0
बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की पीट-पीटकर हत्या
Bangladesh Hindu Killing: बांग्लादेश में फिर भीड़ का क्रूर चेहरा; राजबाड़ी में अमृत मंडल की लिंचिंग, दीपू दास को झूठी अफवाह पर जिंदा जलाया

बांग्लादेश में हिंदुओं पर प्रलय: राजबाड़ी में अमृत की लिंचिंग और दीपू दास को जिंदा जलाने का खौफनाक सच 1. 📍 राजबाड़ी कांड: जबरन वसूली के आरोप में अमृत मंडल की हत्या बुधवार, 24 दिसंबर की रात करीब 11 बजे राजबाड़ी जिले के होसेनडांगा गांव में 29 वर्षीय अमृत मंडल उर्फ सम्राट की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। घटना का क्रम: आरोप है कि अमृत मंडल अपने साथियों के साथ गांव के ही एक व्यक्ति शाहिदुल इस्लाम के घर कथित तौर पर जबरन वसूली की रकम लेने गया था। शोर मचने पर ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस की कार्रवाई: पुलिस ने अमृत के साथी मोहम्मद सलीम को दो अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि अमृत पर पहले से हत्या सहित दो मामले दर्ज थे और वह लंबे समय तक भारत में रहने के बाद हाल ही में लौटा था। हालांकि, स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे टारगेटेड लिंचिंग का हिस्सा बताया है। 2. 📍 दीपू चंद्र दास हत्याकांड: ईशनिंदा की झूठी अफवाह और नृशंसता 18 दिसंबर की रात ढाका के भालुका में दीपू चंद्र दास की हत्या ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। झूठी अफवाह: एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू पर अफवाह फैलाई गई कि उसने फेसबुक पर ईशनिंदा (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) की है। भीड़ का तांडव: हजारों की भीड़ ने फैक्ट्री में घुसकर दीपू को घसीटा, पीटा और उसके कपड़े फाड़ दिए। मौत होने के बाद भी भीड़ शांत नहीं हुई; उसके शव को पेड़ से लटकाया गया और सबके सामने आग लगा दी गई। लोग इस बर्बरता का वीडियो बनाते रहे। जांच में बड़ा खुलासा: अब बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने स्वीकार किया है कि दीपू के फेसबुक अकाउंट पर ऐसी कोई विवादित टिप्पणी नहीं मिली थी। यानी एक बेगुनाह को महज अफवाह के आधार पर जला दिया गया। इस मामले में अब तक 12 लोग गिरफ्तार हुए हैं। 3. 🛡️ उस्मान हादी की मौत और भड़की हिंसा का संबंध इन हत्याओं के पीछे का एक बड़ा कारण स्टूडेंट लीडर शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत से उपजा आक्रोश भी माना जा रहा है। हादी कौन थे? हादी अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता थे और उन्हें शेख हसीना व भारत का कट्टर विरोधी माना जाता था। 12 दिसंबर को उन्हें गोली मारी गई थी और 18 दिसंबर को सिंगापुर में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अखबारों पर हमला: हादी की मौत के बाद भड़की भीड़ ने 'द डेली स्टार' और 'प्रोथोम आलो' जैसे प्रमुख अखबारों के दफ्तरों में आग लगा दी। आरोप लगाया गया कि ये अखबार हिंदुओं के पक्षधर और सेक्युलर हैं, जो हादी की विचारधारा के खिलाफ थे। 4. 📉 अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर वैश्विक चिंता बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद से हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की घटनाओं में तेजी आई है। पैटर्न: अधिकतर मामलों में पहले सोशल मीडिया के जरिए 'ईशनिंदा' की अफवाह फैलाई जाती है, फिर भीड़ को इकट्ठा कर हमला किया जाता है। सरकारी रुख: अंतरिम सरकार और मोहम्मद यूनुस प्रशासन सुरक्षा का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ 'मॉब जस्टिस' (भीड़ का न्याय) जारी है।

रवि चौहान दिसम्बर 25, 2025 0
खालिदा जिया के बेटे की 17 साल बाद बांग्लादेश वापसी
Tarique Rahman Returns: 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान; ढाका में लाखों की भीड़, क्या बनेंगे अगले प्रधानमंत्री?

'बैटल ऑफ बेगम्स' के बाद अब तारिक रहमान का उदय: 17 साल बाद लंदन से ढाका वापसी 1. 🛬 भव्य स्वागत: 13 किलोमीटर का 'जनसमूह' तारिक रहमान जब लंदन से ढाका के हजरत शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, तो वहां का नजारा ऐतिहासिक था। भीड़ का हुजूम: उनके स्वागत में 1 लाख से अधिक BNP कार्यकर्ता जुटे। ढाका एयरपोर्ट से 300 फीट रोड तक के 13 किलोमीटर लंबे रास्ते को पार करने में उनके काफिले को 3 घंटे लगे। भावुक क्षण: एयरपोर्ट से बाहर निकलते ही तारिक ने अपने जूते उतारे और नंगे पैर बांग्लादेश की मिट्टी को छुआ। उन्होंने अपनी वापसी को '6,314 दिनों का इंतजार' बताया। सुरक्षा व्यवस्था: सुरक्षा के लिए हजारों पुलिसकर्मी और सेना के जवान तैनात थे। तारिक एक विशेष रूप से तैयार की गई बुलेटप्रूफ बस में सवार होकर निकले। 2. 🎤 तारिक का संबोधन: "नया बांग्लादेश" और शांति का संदेश 300 फीट रोड पर आयोजित जनसभा में तारिक रहमान ने 17 मिनट का भाषण दिया। उनके भाषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे: समावेशी राजनीति: उन्होंने कहा कि बांग्लादेश सभी का है—हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई, और मैदान से लेकर पहाड़ों तक रहने वाले हर नागरिक का। मानवाधिकार: उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर के प्रसिद्ध भाषण "I Have a Dream" का जिक्र करते हुए कहा कि वे एक ऐसा सुरक्षित बांग्लादेश चाहते हैं जहां हर कोई गरिमा के साथ जी सके। हसीना पर चुप्पी: दिलचस्प बात यह रही कि अपने पूरे भाषण में उन्होंने अपनी चिर-प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना का नाम तक नहीं लिया, जो वर्तमान में भारत में शरण लिए हुए हैं। 3. ⚖️ 'बैटल ऑफ बेगम्स' और राजनीतिक पृष्ठभूमि बांग्लादेश की राजनीति दशकों से दो महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है: शेख हसीना (अवामी लीग) और खालिदा जिया (BNP)। ऐतिहासिक शत्रुता: 1980 के दशक में दोनों ने सैन्य शासन के खिलाफ मिलकर संघर्ष किया, लेकिन 1991 के बाद दोनों कट्टर दुश्मन बन गईं। मीडिया ने इसे 'बैटल ऑफ बेगम्स' कहा। तारिक का पलायन: 2008 में भ्रष्टाचार के मामलों और गिरफ्तारी से बचने के लिए तारिक लंदन चले गए थे। शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद अब उनके लिए वापसी के रास्ते खुले हैं। 4. 🏥 मां खालिदा जिया की हालत और विरासत तारिक की मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया (80 वर्ष) वर्तमान में गंभीर रूप से बीमार हैं। वे लिवर, किडनी और सीने में संक्रमण से जूझ रही हैं। अस्पताल का दौरा: स्वागत समारोह के बाद तारिक सीधे एवरकेयर अस्पताल पहुंचे। अगला पीएम: खालिदा की अस्वस्थता को देखते हुए यह लगभग तय माना जा रहा है कि 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों में तारिक रहमान ही प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार होंगे। 5. 🗳️ आगामी चुनाव: चुनौतियां और गठबंधन अगले साल फरवरी में होने वाले चुनावों के लिए समीकरण बदलने लगे हैं: अवामी लीग पर प्रतिबंध: अंतरिम सरकार के अनुसार, शेख हसीना की पार्टी को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। NCP और जमात का गठजोड़: जमात-ए-इस्लामी और नई बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के बीच सीटों के तालमेल की खबरें हैं, जो BNP के लिए चुनौती बन सकते हैं। राजनीतिक शून्यता: मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के प्रशासन ने तारिक की वापसी का स्वागत किया है, उनका मानना है कि इससे देश में जारी 'राजनीतिक खालीपन' भरेगा। 🇮🇳 भारत पर क्या होगा असर? (विशेषज्ञ विश्लेषण) जेएनयू के प्रोफेसरों और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, तारिक रहमान की वापसी भारत के लिए रणनीतिक चुनौतियां पेश कर सकती है: कट्टरपंथ का खतरा: तारिक के कार्यकाल में इस्लामिक कट्टरपंथियों को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) की सुरक्षा चिंता का विषय बन सकती है। डिफेंस एग्रीमेंट: तारिक पाकिस्तान के साथ पुराने रक्षा समझौतों को पुनर्जीवित कर सकते हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा) की सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। डिप्लोमेसी की परीक्षा: भारत को अब अपनी कूटनीति तेज करनी होगी ताकि बांग्लादेश की नई सत्ता संरचना के साथ संतुलन बनाया जा सके।

रवि चौहान दिसम्बर 25, 2025 0
बांग्लादेश में हसीना विरोधी एक और नेता पर हमला
Bangladesh News: खुलना में NCP नेता मोतालेब शिकदर को घर में घुसकर मारी गोली; छात्र नेता हादी की मौत के बाद बढ़ा तनाव, भारतीय सेना अलर्ट

🇧🇩 बांग्लादेश में खूनी संघर्ष: NCP नेता के सिर में मारी गोली; ढाका से खुलना तक हिंसा का तांडव और भारतीय सेना अलर्ट 1. 🚨 ताजा हमला: खुलना में NCP नेता को घर में घुसकर मारी गोली बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार दोपहर करीब 12 बजे खुलना शहर में नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता मोहम्मद मोतालेब शिकदर पर जानलेवा हमला हुआ। सिर को बनाया निशाना: हमलावर शिकदर के घर में घुसे और सीधे उनके सिर को निशाना बनाकर फायरिंग की। गोली उनके कान के पास से आर-पार निकल गई। चमत्कारी बचाव: उन्हें तुरंत खुलना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों और पुलिस अधिकारी अनिमेष मंडल के मुताबिक, गोली दिमाग को छूकर निकल गई लेकिन अंदरूनी हिस्से तक नहीं पहुंची, जिससे उनकी जान बच गई। फिलहाल उनकी हालत नाजुक लेकिन स्थिर बनी हुई है। कौन हैं मोतालेब शिकदर? वे NCP के खुलना डिवीजन के प्रमुख हैं और पार्टी के मजदूर संगठन 'NCP श्रमिक शक्ति' के मुख्य आयोजक भी हैं। वे आगामी एक बड़ी मजदूर रैली की तैयारियों में जुटे थे, तभी उन पर यह हमला हुआ। 2. 🎓 NCP: छात्रों के आंदोलन से निकली नई राजनीतिक शक्ति जिस नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के नेता पर हमला हुआ है, उसकी जड़ें पिछले साल के उस छात्र आंदोलन में हैं जिसने शेख हसीना सरकार का तख्तापलट किया था। यह पार्टी उन छात्रों और युवाओं का प्रतिनिधित्व करती है जो बांग्लादेश में पूरी तरह से 'सिस्टम चेंज' की वकालत कर रहे हैं। हाल के हफ्तों में इस पार्टी के नेताओं और इनसे जुड़े छात्र संगठनों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे संकेत मिलते हैं कि देश में 'पावर स्ट्रगल' (सत्ता संघर्ष) अब खूनी मोड़ ले चुका है। 3. 🕯️ छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत और बढ़ता आक्रोश शिकदर पर हमला तब हुआ है जब देश पहले से ही छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर सुलग रहा है। मस्जिद के बाहर हमला: 12 दिसंबर को ढाका में नकाबपोशों ने उस्मान हादी पर गोलियां बरसाई थीं। हादी 'इंकलाब मंच' के संस्थापक थे। सिंगापुर में दम तोड़ा: बेहतर इलाज के लिए उन्हें सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया था, जहाँ 18 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। उनकी मौत के बाद पूरे बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों और छात्र गुटों ने हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। 4. 🇮🇳 भारत विरोधी मार्च और सीमा पर तनाव बांग्लादेश की आंतरिक हिंसा का असर अब भारत-बांग्लादेश सीमा पर भी दिखने लगा है। बॉर्डर तक मार्च: उस्मान हादी की मौत का बदला लेने और पूर्व पीएम शेख हसीना को भारत से वापस बांग्लादेश प्रत्यर्पित करने की मांग को लेकर 'इंकलाब मंच' और 'जमात-ए-इस्लामी' के कट्टरपंथियों ने बेनापोल बॉर्डर तक मार्च निकाला। धार्मिक नारेबाजी: चटगांव के ऐतिहासिक चंद्रनाथ मंदिर के बाहर भी कट्टरपंथियों द्वारा उग्र नारेबाजी की गई, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों में दहशत का माहौल है। 5. 🛡️ भारतीय सेना की 'ईस्टर्न कमांड' हाई अलर्ट पर बांग्लादेश में अस्थिरता और बढ़ती भारत विरोधी भावनाओं को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। सीमा का दौरा: ईस्टर्न कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी ने गुरुवार शाम को भारत-बांग्लादेश सीमा के संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। निगरानी: सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सेना को घुसपैठ और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए चौबीसों घंटे तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

रवि चौहान दिसम्बर 22, 2025 0
बांग्लादेश हिंसा-बॉर्डर तक कट्‌टरपंथियों का मार्च, मंदिर के बाहर नारेबाजी
उस्मान हादी की मौत: 12 दिसंबर को ढाका में हुए हमले के बाद सिंगापुर में इलाज के दौरान हादी की मौत हो गई।

सुलगता बांग्लादेश: उस्मान हादी की मौत के बाद 'ग्रेटर बांग्लादेश' की मांग और बॉर्डर तक मार्च; कट्टरपंथियों का नंगा नाच 1. 🚩 बेनापोल से भारत बॉर्डर तक मार्च और हसीना की मांग उस्मान हादी की मौत से गुस्साए 'इंकलाब मंच' और 'जमात-ए-इस्लामी' के कट्टरपंथियों ने शुक्रवार को भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्थित बेनापोल तक विशाल मार्च निकाला। भारत पर दबाव: प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग है कि भारत में शरण लिए हुए पूर्व पीएम शेख हसीना को तुरंत बांग्लादेश के हवाले किया जाए। मंदिरों पर हमला: चटगांव में ऐतिहासिक चंद्रनाथ मंदिर के बाहर भारी भीड़ ने धार्मिक नारेबाजी की, जिससे हिंदू समुदाय में दहशत का माहौल है। 2. 🗞️ उस्मान हादी: हत्या, विवाद और अंतिम संस्कार उस्मान हादी को 12 दिसंबर को ढाका में गोली मारी गई थी, जिसके बाद इलाज के दौरान सिंगापुर में उनकी मौत हो गई। ग्रेटर बांग्लादेश का विवाद: अपनी हत्या से कुछ घंटे पहले हादी ने सोशल मीडिया पर 'ग्रेटर बांग्लादेश' का एक नक्शा साझा किया था, जिसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (7 सिस्टर्स) को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था। अंतिम विदाई: हादी का शव सिंगापुर से ढाका लाया गया है। उन्हें राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में नमाज-ए-जनाजा के बाद राष्ट्रीय कवि नजरुल इस्लाम की समाधि के पास दफनाया जाएगा। 3. 💔 हिंदू युवक की बर्बर हत्या: दीपू चंद्र दास कांड हिंसा के बीच मानवता को शर्मसार करने वाली घटना ढाका के पास भालुका में हुई। मॉब लिंचिंग: धर्म के अपमान के आरोप में भीड़ ने हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को पीट-पीटकर मार डाला। अमानवीयता: हत्या के बाद कट्टरपंथियों ने दीपू के शव को नग्न कर पेड़ से लटका दिया और उसमें आग लगा दी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ धार्मिक नारे लगाते हुए इस क्रूरता को अंजाम देती दिख रही है। 4. 🕵️ यूनुस सरकार की 'फ्री हैंड' साजिश? एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक, इस पूरी हिंसा के दौरान मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने दंगाइयों को 'फ्री हैंड' दिया था। देरी से कार्रवाई: जब डेली स्टार और प्रोथोम आलो जैसे मीडिया हाउस जलाए जा रहे थे, तब दो घंटे तक सेना या पुलिस को मौके पर नहीं भेजा गया। राजनीतिक गणित: माना जा रहा है कि यूनुस सरकार 12 फरवरी को होने वाले चुनावों को टालना चाहती है। अवामी लीग पर प्रतिबंध है और बीएनपी के तारिक रहमान के कमजोर जनाधार के कारण यूनुस 'जमात' को मजबूत कर रहे हैं ताकि वे खुद राष्ट्रपति बन सकें। 5. 🛡️ भारतीय सेना अलर्ट और मुख्य आरोपी का 'भारत कनेक्शन' बॉर्डर पर निगरानी: बांग्लादेश के बिगड़ते हालात को देखते हुए भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड के प्रमुख ले. जनरल आरसी तिवारी ने सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। आरोपी फैसल करीम: हादी की हत्या का मुख्य आरोपी फैसल करीम के भारत भागने का दावा किया जा रहा है। गिरफ्तारी के डर से उसने सीमा पार करने की योजना बनाई थी।

रवि चौहान दिसम्बर 20, 2025 0
बांग्लादेश में 2 न्यूज चैनल्स, अवामी लीग के ऑफिस फूंके
Bangladesh Violence: उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में तांडव; हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग, मीडिया हाउसों में लगाई आग

 सुलगता बांग्लादेश: उस्मान हादी की मौत के बाद महाविनाश; मीडिया दफ्तरों में आग और हिंदू युवक की बर्बर हत्या 1. 📢 उस्मान हादी: मौत जिसने देश को आग में झोंक दिया शरीफ उस्मान हादी, जो शेख हसीना के खिलाफ हुए विद्रोह के नायक माने जाते थे, उनकी मौत ने एक नए संघर्ष को जन्म दे दिया है। हत्या का प्रयास: 12 दिसंबर को ढाका के पुरना पलटन इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों ने हादी के सिर में गोली मार दी थी। इलाज और मौत: उन्हें गंभीर स्थिति में सिंगापुर ले जाया गया, जहाँ 6 दिनों तक मौत से लड़ने के बाद 18 दिसंबर को उन्होंने अंतिम सांस ली। राष्ट्रीय शोक: अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने हादी को 'शहीद' घोषित करते हुए शनिवार (20 दिसंबर) को एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है। 2. 🗞️ मीडिया पर हमला: 'डेली स्टार' और 'प्रोथोम आलो' में आगजनी हादी की मौत की खबर फैलते ही उग्र भीड़ ने ढाका के कावरान बाजार स्थित देश के दो सबसे बड़े अखबारों के दफ्तरों को निशाना बनाया। बंधक बने पत्रकार: प्रदर्शनकारियों ने 'द डेली स्टार' और 'प्रोथोम आलो' की इमारतों में घुसकर तोड़फोड़ की और आग लगा दी। आग की लपटों के बीच लगभग 25 पत्रकार घंटों फंसे रहे, जिन्हें बाद में सेना ने रेस्क्यू किया। आरोप: प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये अखबार हादी और उनके आंदोलन के प्रति निष्पक्ष नहीं थे। 'छायानोट' जैसे सांस्कृतिक भवनों को भी जला दिया गया। 3. 💔 हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग: दीपू चंद्र दास की बर्बरतापूर्ण हत्या हिंसा की सबसे भयावह तस्वीर मयमनसिंह के भालुका से सामने आई। यहाँ धर्म के अपमान के झूठे आरोप में एक हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास (30) की बेरहमी से हत्या कर दी गई। अमानवीय कृत्य: उग्र भीड़ ने दीपू को पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद उसकी लाश को नग्न कर एक पेड़ से लटका दिया और आग लगा दी। वायरल वीडियो: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भीड़ 'नारा-ए-तकबीर' के नारे लगाती और इस बर्बरता का जश्न मनाती दिख रही है। इस घटना ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर वैश्विक चिंता पैदा कर दी है। 4. 🏛️ शेख मुजीबुर्रहमान के घर पर बुलडोजर और आग गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ढाका के धानमंडी स्थित शेख मुजीबुर्रहमान (बंगबंधु) के ऐतिहासिक निवास पर भी हमला किया। विनाश की हद: घर में तोड़फोड़ के बाद उसे आग के हवाले कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भीड़ ने घर के कुछ हिस्सों को गिराने के लिए बुलडोजर का भी इस्तेमाल किया। साथ ही, अवामी लीग के कार्यालयों को देश भर में जलाया जा रहा है। 5. 🇮🇳 भारत विरोधी नारे और कूटनीतिक तनाव हादी की मौत के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भारत की ओर भी मुड़ा है। घेराव: चटगाँव में भारतीय उप-उच्चायोग के बाहर भारी भीड़ जमा हुई और पत्थरबाजी की। आरोप: 'नेशनल सिटीजन पार्टी' (NCP) और हादी के समर्थकों का आरोप है कि हादी के हत्यारे भारत भाग गए हैं। उन्होंने अंतरिम सरकार से मांग की है कि जब तक हत्यारों को वापस नहीं लाया जाता, भारतीय उच्चायोग को बंद कर दिया जाए।

रवि चौहान दिसम्बर 19, 2025 0
Bangladesh Election 2026: 12 फरवरी को चुनाव, हसीना की अवामी लीग पर बैन | NCP ने जमात धड़े के साथ बनाया 'गणतांत्रिक संस्कार गठजोट'
Bangladesh Election 2026: 12 फरवरी को चुनाव, हसीना की अवामी लीग पर बैन | NCP ने जमात धड़े के साथ बनाया 'गणतांत्रिक संस्कार गठजोट'

बांग्लादेश चुनाव 2026: 12 फरवरी को वोटिंग, हसीना की पार्टी बैन; छात्र नेता नाहिद इस्लाम ने जमात के धड़े के साथ बनाया नया मोर्चा बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार को घोषणा की कि देश में अगले साल 12 फरवरी, 2026 को आम चुनाव होंगे। यह चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद हो रहा है, जिसके बाद से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार शासन कर रही है। इस चुनाव को बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत माना जा रहा है, क्योंकि यह देश की सबसे बड़ी पार्टी अवामी लीग की अनुपस्थिति और छात्रों के आंदोलन से निकली नई राजनीतिक शक्ति की उपस्थिति में होगा। 1. 🚫 अवामी लीग पर प्रतिबंध और नेताओं की गिरफ्तारी यह चुनाव शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के बिना होगा, जो देश की चुनावी राजनीति के लिए एक अभूतपूर्व स्थिति है। पंजीकरण निलंबित: चुनाव आयोग ने मई 2025 में ही अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया था। राजनीतिक गतिविधियों पर रोक: अंतरिम सरकार पार्टी के बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर चुकी है, और अवामी लीग पर चुनाव लड़ने और सभी राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पृष्ठभूमि: यह प्रतिबंध 5 अगस्त 2024 के तख्तापलट के बाद लगाया गया, जब हसीना देश छोड़कर भारत आ गई थीं। 2. 🛡️ नया राजनीतिक मोर्चा: NCP और जमात का गठजोड़ चुनाव से पहले, छात्रों के आंदोलन से निकली पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया है। गठबंधन का नाम: NCP ने जमात-ए-इस्लामी से टूटकर बनी अमर बांग्लादेश (AB) पार्टी और राष्ट्र संस्कृति आंदोलन के साथ मिलकर 'गणतांत्रिक संस्कार गठजोट' नाम का नया मोर्चा बनाया है। NCP का उदय: NCP इसी साल फरवरी में बनी थी और इसके छात्र नेताओं ने पिछले साल हसीना विरोधी प्रदर्शनों की अगुवाई की थी, जिसके दबाव में हसीना सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। प्रमुख चेहरा: NCP संयोजक नाहिद इस्लाम, जो छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा रहे थे और अंतरिम सरकार में मंत्री भी थे (बाद में इस्तीफा दिया), ढाका-11 से चुनाव लड़ेंगे। उम्मीदवार सूची: NCP ने 125 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें 14 महिला उम्मीदवार शामिल हैं, जो अब तक किसी भी पार्टी से सबसे ज्यादा हैं। 3. 📜 जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह और संवैधानिक सुधार आम चुनाव के साथ, उसी दिन एक जनमत संग्रह (Referendum) भी होगा, जो देश की शासन व्यवस्था में बड़े संवैधानिक बदलाव लाएगा। जुलाई चार्टर: यह संवैधानिक और राजनीतिक सुधार का 26 सूत्रीय दस्तावेज है, जिसे जुलाई 2025 में राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों के बीच सहमति से बनाया गया था। मुख्य सुधार: PM की सत्ता सीमित करना: प्रधानमंत्री को अनिश्चित समय तक सत्ता में रहने से रोकने के लिए PM का कार्यकाल 8 या 10 साल करने की बात है। अन्य अहम बिंदु: भविष्य में चुनाव कैसे होंगे, सेना या न्यायपालिका की क्या भूमिका रहेगी, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार से जुड़ी नई नीतियां कैसी होंगी, और शेख हसीना पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे या नहीं, ये सब तय किए जाएंगे। ऊपरी सदन: जनमत संग्रह में 100 सदस्यीय ऊपरी सदन के गठन का प्रावधान है, जिसमें प्रतिनिधित्व आनुपातिक आधार पर (वोट के अनुपात में सीटें) दिया जाएगा, ताकि विभिन्न दलों की मांगों के बीच संतुलन बन सके। 4. ⚖️ बांग्लादेश की चुनावी और शासन प्रणाली बांग्लादेश की संसद को 'जातीय संसद' (House of the Nation) कहा जाता है। इसकी चुनावी प्रक्रिया भारत के समान है। चुनाव प्रणाली: संसद सदस्यों का चुनाव भारत की तरह ही फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली के जरिए होता है। सीटों की संरचना: कुल सीटें: 350 निर्वाचित सीटें: 300 (हर पांच साल में आम चुनाव) आरक्षित सीटें: 50 (महिलाओं के लिए आरक्षित, जिन पर चुनाव नहीं होता है) सरकार का मुखिया: भारत की तरह ही प्रधानमंत्री (PM) ही सरकार के मुखिया होते हैं, जबकि राष्ट्रपति एक औपचारिक पद है, जिसका चुनाव राष्ट्रीय संसद द्वारा किया जाता है। यह चुनाव बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता को समाप्त कर एक नई और संभवतः अधिक लोकतांत्रिक व समावेशी शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। क्या आप जानना चाहेंगे कि जुलाई चार्टर में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार से जुड़ी नई नीतियों के बारे में क्या प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं?

रवि चौहान दिसम्बर 11, 2025 0
बांग्लादेश में तख्तापलट के डेढ़ साल बाद चुनाव
Bangladesh Election 2026: शेख हसीना के तख्तापलट के बाद 12 फरवरी को चुनाव, 'जुलाई चार्टर' पर जनमत संग्रह | अवामी लीग पर बैन

बांग्लादेश में लोकतंत्र की नई सुबह: 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव, 'जुलाई चार्टर' पर जनमत संग्रह से होगा संवैधानिक बदलाव बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एएमएम नासिरउद्दीन ने गुरुवार शाम घोषणा की कि देश में अगले साल 12 फरवरी, 2026 को आम चुनाव होंगे। यह घोषणा राजनीतिक रूप से उथल-पुथल वाले डेढ़ साल के बाद आई है, जब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को तख्तापलट के बाद देश छोड़कर जाना पड़ा था। वर्तमान में देश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार शासन कर रही है। 1. 🚫 हसीना की पार्टी चुनाव से बाहर यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक और असामान्य होगा। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी और शेख हसीना की अगुवाई वाली अवामी लीग चुनाव में हिस्सा नहीं ले पाएगी। पंजीकरण निलंबित: चुनाव आयोग ने मई 2025 में ही अवामी लीग का पंजीकरण निलंबित कर दिया था। कार्यवाही पर रोक: पार्टी के बड़े नेताओं को अंतरिम सरकार ने गिरफ्तार कर लिया है, और अवामी लीग पर चुनाव लड़ने और सभी राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है। तख्तापलट: शेख हसीना को 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद देश छोड़कर भारत आना पड़ा था, जिसके बाद से बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में शासन चल रहा है। 2. 📜 जुलाई चार्टर पर जनमत संग्रह आम चुनाव के साथ ही उसी दिन एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होगी: 'जुलाई चार्टर' को लेकर जनमत संग्रह (Referendum)। यह जनमत संग्रह देश की शासन व्यवस्था में बड़े बदलाव लाने का प्रयास है। क्या है जुलाई चार्टर?: यह संवैधानिक और राजनीतिक सुधार का 26 सूत्रीय दस्तावेज है, जिसे जुलाई 2025 में देश के राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों के बीच सहमति से बनाया गया था। प्रमुख उद्देश्य: PM की सत्ता सीमित करना: सबसे अहम बदलाव प्रधानमंत्री के अनिश्चित समय तक सत्ता में बने रहने की शक्ति को सीमित करना है। इसमें PM का कार्यकाल 8 या 10 साल करने की बात कही गई है। भविष्य के चुनाव: चुनावों के स्वरूप, सेना या न्यायपालिका की भूमिका और भ्रष्टाचार एवं मानवाधिकार से जुड़ी नई नीतियों पर भी दिशानिर्देश तय करना। हसीना पर प्रतिबंध: शेख हसीना पर लगे प्रतिबंधों की भविष्य की स्थिति तय करना। जनमत संग्रह का महत्व: जनमत संग्रह में जनता से यह पूछा जाएगा कि क्या जुलाई चार्टर को लागू करने का आदेश दिया जाए। यह चार्टर नए लोकतंत्र की नींव रखेगा। प्रतिनिधित्व और ऊपरी सदन: चार्टर में प्रावधान है कि राजनीतिक दलों की विभिन्न मांगों के बीच संतुलन बनाने के लिए 100 सदस्यीय ऊपरी सदन का गठन प्रतिनिधित्व के आधार पर (आनुपातिक प्रतिनिधित्व) किया जाएगा। 3. ⚖️ बांग्लादेश की चुनावी और शासन प्रक्रिया बांग्लादेश की चुनावी प्रणाली भारत की प्रक्रिया से काफी मिलती-जुलती है, हालांकि यहाँ कुछ संरचनात्मक अंतर हैं। (क) चुनावी प्रक्रिया फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट: चुनाव परिणाम भारत के लोकसभा चुनाव की तरह ही फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली के जरिए होता है, यानी जिस उम्मीदवार को एक वोट भी ज्यादा मिलेगा, उसकी जीत होगी। संसद (जातीय संसद): बांग्लादेश की संसद को 'जातीय संसद' या हाउस ऑफ द नेशन कहा जाता है। भारत के विपरीत, यहाँ केवल एक ही सदन है। सीटें: संसद में कुल 350 सीटें हैं। निर्वाचित सीटें: 300 सीटों के लिए हर पांच साल में आम चुनाव होते हैं। आरक्षित सीटें: 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिन पर चुनाव नहीं होता है। सरकार का मुखिया: भारत की तरह ही बांग्लादेश में प्रधानमंत्री (PM) ही सरकार के मुखिया होते हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन के सांसद अपने नेता का चुनाव करते हैं, जिसे राष्ट्रपति PM पद की शपथ दिलाते हैं। (ख) राष्ट्रपति की भूमिका औपचारिक पद: बांग्लादेश में राष्ट्रपति देश का प्रमुख होता है, लेकिन यह पद सिर्फ एक औपचारिक पद है और सरकार पर उसका कोई वास्तविक नियंत्रण नहीं होता है। चयन: 1991 तक राष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता करती थी, लेकिन बाद में संवैधानिक बदलाव के जरिए अब राष्ट्रपति का चुनाव राष्ट्रीय संसद द्वारा किया जाता है। शेख हसीना करीब 20 साल तक बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं थीं, और अब इस चुनाव से देश एक नए राजनीतिक युग में प्रवेश करने के लिए तैयार है। क्या आप जानना चाहेंगे कि जुलाई चार्टर में भ्रष्टाचार और मानवाधिकार से जुड़ी नई नीतियों के बारे में क्या प्रमुख बिंदु तय किए गए हैं?

रवि चौहान दिसम्बर 11, 2025 0
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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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रवि चौहान जनवरी 21, 2026 0