सोशल मीडिया पर डिजिटल स्ट्राइक: कर्नाटक 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर बैन लगाने वाला पहला राज्य; आंध्र प्रदेश में भी तैयारी बेंगलुरु | 6 मार्च 2026 भारत में डिजिटल सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को आधिकारिक घोषणा की है कि राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसी राह पर चलते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने भी 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए समान प्रतिबंध की तैयारी शुरू कर दी है। यहाँ इस बड़े फैसले, इसके लागू होने की प्रक्रिया और वैश्विक संदर्भों का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बजट भाषण: "बच्चों का भविष्य प्राथमिकता" कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट पेश करते हुए इस कड़े कानून की आवश्यकता पर जोर दिया: गलत प्रभाव की चिंता: सीएम ने कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया की लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनके मानसिक विकास और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। नियमों की तैयारी: इस बैन को तकनीकी रूप से कैसे लागू किया जाएगा, इसके लिए आईटी विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों की टीम नियम तैयार कर रही है। नशे के खिलाफ जंग: सरकार ने केवल डिजिटल ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में नशे (Drugs) की समस्या को खत्म करने के लिए सख्त निगरानी और काउंसलिंग केंद्र खोले जाएंगे। 2. कैसे लागू होगा यह बैन? (एज वेरिफिकेशन और DPDP एक्ट) सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अब बच्चों की उम्र छिपाना आसान नहीं होगा। यह प्रस्ताव भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) और 2025 के नियमों के साथ एकीकृत किया जाएगा: पैरेंटल कंसेंट (माता-पिता की अनुमति): किसी भी नाबालिग का अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की डिजिटल सहमति अनिवार्य होगी। डिजिटल लॉकर और पहचान: उम्र के सत्यापन (Age Verification) के लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का उपयोग किया जाएगा। कंपनियों की जिम्मेदारी: फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वे नाबालिगों के अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करें। 3. आंध्र प्रदेश की तैयारी: 13 साल की डेडलाइन कर्नाटक के फैसले के कुछ ही घंटों बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी विधानसभा में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित करने जा रही है। नायडू ने इसे "भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित करने वाला कदम" बताया। 📊 सोशल मीडिया बैन: भारत बनाम दुनिया देश / राज्य उम्र सीमा कानून / स्थिति कर्नाटक (भारत) 16 साल से कम बजट 2026 में घोषणा; देश का पहला राज्य। ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम 'ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट बिल' (नवंबर 2024) लागू। आंध्र प्रदेश (भारत) 13 साल से कम विधानसभा में प्रस्ताव पेश। अमेरिका (कुछ राज्य) 14-16 साल कई राज्यों में पैरेंटल कंट्रोल कानून लागू। 4. टीनएजर्स और सोशल मीडिया: आकर्षण और जोखिम मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, किशोरावस्था (Teenage) में सोशल मीडिया के प्रति झुकाव के गहरे कारण हैं: सोशल वैलिडेशन: टीनएजर्स के लिए लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज केवल संख्या नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास का जरिया हैं। इंस्टेंट रिएक्शन उन्हें यह महसूस कराता है कि वे समाज में मायने रखते हैं। वर्चुअल आइडेंटिटी: बच्चे अक्सर अपनी असल जिंदगी से ज्यादा अपनी वर्चुअल पहचान (Profile) को संवारने में समय बिताते हैं, जिससे वे वास्तविक सामाजिक कौशल (Social Skills) खो देते हैं। साइबर जोखिम: कम उम्र में सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने से साइबर बुलिंग, प्राइवेसी ब्रीच और हानिकारक कंटेंट का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। 5. ऑस्ट्रेलिया मॉडल से प्रेरणा कर्नाटक सरकार का यह फैसला ऑस्ट्रेलिया के 'ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट बिल 2024' से प्रेरित माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने बड़ी टेक कंपनियों पर यह जिम्मेदारी डाली है कि वे उम्र की सख्त जांच करें। वहां इस कानून के उल्लंघन पर कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।
मिडल ईस्ट महाजंग Day 7: ईरान का 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4' और 22वीं मिसाइल लहर; कुवैत में अमेरिकी बेस पर सुसाइड ड्रोन अटैक, खामेनेई का बंकर तबाह तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगटन | 6 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े भीषण युद्ध का आज सातवां दिन है। युद्ध की विभीषिका कम होने के बजाय और अधिक आक्रामक होती जा रही है। ईरान ने इजराइल के विरुद्ध मिसाइलों की अपनी 22वीं बड़ी खेप दागी है, जिसे अब तक का सबसे सघन हमला माना जा रहा है। वहीं, युद्ध का दायरा बढ़ाते हुए ईरान ने कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी सुसाइड ड्रोनों से हमला करने का दावा किया है। यहाँ सातवें दिन के युद्ध, रणनीतिक बदलावों और वैश्विक प्रभाव की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. ईरान का 'ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4': मिसाइल वर्षा ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि इजराइल के खिलाफ उसके सैन्य अभियान का चौथा चरण शुरू हो चुका है। मिसाइलें: ईरान ने इस बार अपनी सबसे उन्नत मिसाइलों— खोर्रमशहर-4, खैबर और फत्ताह (हाइपरसोनिक)—का इस्तेमाल किया है। निशाना: इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों के 'अंदरूनी हिस्सों' (हार्टलैंड) को निशाना बनाया गया है। ईरान का दावा है कि ये मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को भेदने में सफल रही हैं। कलस्टर बमों का उपयोग: खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कलस्टर बमों का इस्तेमाल किया, जिससे नागरिक इलाकों में भारी नुकसान की आशंका है। 2. कुवैत में अमेरिकी बेस पर सुसाइड ड्रोन हमला ईरानी सेना के जमीनी बलों ने युद्ध को क्षेत्रीय स्तर पर फैलाते हुए कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। सुसाइड ड्रोन अटैक: ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, 'बड़ी संख्या में विनाशकारी सुसाइड ड्रोन' अमेरिकी बेस की ओर भेजे गए। कुवैत का बयान: कुवैत की सेना ने पुष्टि की है कि उनका एयर डिफेंस सिस्टम 'दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों' से मुकाबला कर रहा है। 20 बेसों को नुकसान: ईरान का दावा है कि कुवैत, बहरीन और यूएई में फैले करीब 20 अमेरिकी ठिकानों को अब तक के युद्ध में भारी क्षति पहुंची है। 3. इजराइल का बड़ा प्रहार: खामेनेई का 'सीक्रेट बंकर' तबाह इजराइली वायुसेना ने ईरान के मनोबल पर गहरी चोट करते हुए तेहरान में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सफलता का दावा किया है: 50 फाइटर जेट्स का मिशन: इजराइल के 50 लड़ाकू विमानों ने तेहरान के केंद्र में स्थित अयातुल्ला अली खामेनेई के विशाल अंडरग्राउंड बंकर को जमींदोज कर दिया। बंकर की बनावट: यह बंकर तेहरान की कई मुख्य सड़कों के नीचे फैला हुआ था, जिसमें अत्याधुनिक मीटिंग रूम और संचार केंद्र थे। इजराइल का दावा है कि खामेनेई की मौत (विवादित रिपोर्ट) के बाद भी ईरानी शीर्ष अधिकारी यहीं से युद्ध का संचालन कर रहे थे। लॉन्चरों की तबाही: इजराइल ने पिछले 24 घंटों में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करने का दावा किया है। 📊 युद्ध का लेखा-जोखा: 7 दिनों की तबाही (आंकड़े) श्रेणी विवरण संख्या / स्थिति कुल मौतें (ईरान) अमेरिका-इजराइल हमलों में 1332 लोग स्कूल हमला (मिनाब) गर्ल्स स्कूल पर हमला 175 मौतें (150 बच्चियां) मेडिकल सेंटर ईरानी अस्पताल / क्लीनिक 14 केंद्र तबाह बुनियादी ढांचा बिजली और पानी सप्लाई ईरान के 60% हिस्सों में ठप विस्थापित युद्ध प्रभावित लोग 20 लाख से अधिक (अनुमानित) 4. वैश्विक प्रभाव: रूस का फायदा और भारत को राहत युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार (Energy Market) में उथल-पुथल मची हुई है: रूस की चांदी: क्रेमलिन ने स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होने से रूसी तेल और गैस की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। भारत को 'स्पेशल लाइसेंस': अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारत को 30 दिन की विशेष छूट दी है। भारतीय रिफाइनरियां अब 3 अप्रैल तक समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीद सकेंगी, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का खतरा टल गया है। UN की सख्ती: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरान के गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। 5. लेबनान फ्रंट: सिडोन पर हमला इजराइल ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि लेबनान में भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दक्षिणी लेबनान के सिडोन शहर पर हुए इजराइली हमले में 5 लोगों की मौत हो गई है। इजराइल का मानना है कि लेबनान की जमीन का इस्तेमाल ईरान समर्थक गुट हमलों के लिए कर रहे हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट में फिर 'सर्जरी' की तैयारी: कप्तान सलमान अली आगा की छुट्टी तय; श्रीलंका से हारते ही वर्ल्ड कप से बाहर होगी टीम लाहौर/कैंडी | 28 फरवरी 2026 पाकिस्तान क्रिकेट में एक बार फिर बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। टी-20 वर्ल्ड कप में टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कप्तान सलमान अली आगा की कुर्सी खतरे में है। समाचार एजेंसी PTI ने पीसीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि बोर्ड चेयरमैन मोहसिन नकवी टीम के प्रदर्शन और कप्तानी से बेहद नाराज हैं और टूर्नामेंट खत्म होते ही 'बड़ी सर्जरी' की जा सकती है। यहाँ पाकिस्तान क्रिकेट के मौजूदा संकट, कप्तानी के समीकरण और आज होने वाले 'करो या मरो' के मुकाबले का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. सलमान अली आगा की कप्तानी पर गिरेगी गाज पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के भीतर इस बात को लेकर सहमति बन गई है कि सलमान अली आगा टीम को उस ऊंचाई पर ले जाने में विफल रहे हैं जिसकी उम्मीद की गई थी। खराब प्रदर्शन का ठीकरा: सुपर-8 राउंड में इंग्लैंड से मिली करारी हार और ग्रुप स्टेज में भारत के हाथों मिली शिकस्त ने सलमान की कप्तानी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सीनियर खिलाड़ियों का अंत: रिपोर्ट के अनुसार, न केवल कप्तान बदला जाएगा, बल्कि कई सीनियर खिलाड़ियों के करियर का यह आखिरी टूर्नामेंट साबित हो सकता है। बोर्ड अब युवाओं पर निवेश करने की रणनीति बना रहा है। चेयरमैन की नाराजगी: मोहसिन नकवी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि वह टीम में अनुशासन और प्रदर्शन के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। 2. कप्तानी का 'म्यूजिकल चेयर' खेल पाकिस्तान क्रिकेट में पिछले दो सालों से कप्तानी किसी म्यूजिकल चेयर की तरह बदल रही है: बाबर का इस्तीफा: 2024 टी-20 वर्ल्ड कप की विफलता के बाद 1 अक्टूबर 2024 को बाबर आजम ने कप्तानी छोड़ दी थी। बार-बार बदलाव: बाबर के बाद बोर्ड ने अलग-अलग प्रयोग किए, लेकिन नतीजे सिफर रहे। टीम न केवल व्हाइट बॉल क्रिकेट में पिटी, बल्कि बांग्लादेश के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में भी 2-0 से ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा। बोर्ड की विफलता: चयनकर्ताओं और मैनेजमेंट ने हर बार नए कप्तान के साथ बेहतर प्रदर्शन का वादा किया, लेकिन पाकिस्तान की टीम सुपर-8 में भी संघर्ष करती नजर आ रही है। 3. आज 'करो या मरो' का मुकाबला: श्रीलंका से भिड़ंत आज कैंडी के पल्लेकेले स्टेडियम में पाकिस्तान का सामना श्रीलंका से होगा। यह मैच तय करेगा कि पाकिस्तान का सफर जारी रहेगा या वे आज ही घर वापसी करेंगे। सेमीफाइनल का समीकरण: पाकिस्तान को अगर टॉप-4 में जगह बनानी है, तो उसे केवल जीतना ही नहीं होगा, बल्कि नेट रन रेट (NRR) को भी सुधारना होगा। जीत का अंतर: श्रीलंका को कम से कम 64 रन से हराना होगा। रन चेज: अगर श्रीलंका पहले बल्लेबाजी करती है, तो पाकिस्तान को लक्ष्य 13.1 ओवर के भीतर हासिल करना होगा। पॉइंट्स टेबल: फिलहाल पाकिस्तान ग्रुप-2 में तीसरे नंबर पर है। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर काबिज हैं। 📊 पाकिस्तान का टी-20 वर्ल्ड कप 2026 सफर: एक नजर में मैच प्रतिद्वंद्वी नतीजा मुख्य कारण लीग मैच भारत हार बल्लेबाजी का पूरी तरह फ्लॉप होना। सुपर-8 इंग्लैंड हार खराब गेंदबाजी और दिशाहीन कप्तानी। सुपर-8 श्रीलंका (आज) सेमीफाइनल की आखिरी उम्मीद। 4. विशेषज्ञों की राय: क्या केवल कप्तान बदलना समाधान है? क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि पाकिस्तान की समस्या केवल कप्तान नहीं है, बल्कि घरेलू ढांचा और खिलाड़ियों के बीच आपसी तालमेल की कमी है। बाबर आजम के बाद सलमान अली आगा को जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन टीम की मानसिकता में बदलाव नहीं आया। भारत के खिलाफ 9 वर्ल्ड कप मैचों में 8वीं हार ने प्रशंसकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
आंध्र प्रदेश: काकीनाडा की पटाखा यूनिट में भीषण धमाका; 20 मजदूरों की मौत, धान के खेतों में बिखरे मिले शवों के चिथड़े काकीनाडा | 28 फरवरी 2026 आंध्र प्रदेश के काकीनाडा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। शनिवार दोपहर वेटलापलेम गांव में स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई (Firecracker Unit) में जोरदार विस्फोट होने से 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। धमाका इतना शक्तिशाली था कि पूरी फैक्ट्री ताश के पत्तों की तरह ढह गई और वहां काम कर रहे मजदूरों के शवों के टुकड़े कई मीटर दूर खेतों में जाकर गिरे। यहाँ इस भीषण त्रासदी, राहत कार्य और सरकार की प्रतिक्रिया का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. दोपहर 2 बजे का वो भयावह मंजर प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह हादसा शनिवार दोपहर करीब 2:00 बजे हुआ: भीषण आवाज: धमाका इतना तेज था कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। आसपास के घरों की खिड़कियां चटक गईं और लोग भूकंप की आशंका से घरों से बाहर निकल आए। मलबे का ढेर: विस्फोट के कुछ ही सेकंड के भीतर पूरी यूनिट जलकर राख हो गई। मौके पर केवल काला धुआं और मलबे का ढेर नजर आ रहा था। खेतों में बिखरी लाशें: पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ब्लास्ट के दबाव के कारण मजदूरों के शव उड़कर पास के धान के खेतों में जा गिरे। स्थानीय ग्रामीण खाद की बोरियों से बनी चादरों (बाराकालू) में क्षत-विक्षत शवों को समेटते देखे गए, जो बेहद डरावना मंजर था। 2. राहत एवं बचाव कार्य: ड्रोन से की जा रही तलाश प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है: ड्रोन का उपयोग: खेतों में फसल घनी होने के कारण शवों के हिस्सों और लापता लोगों का पता लगाने के लिए पुलिस ने ड्रोन कैमरों की मदद ली है। गंभीर रूप से झुलसे घायल: काकीनाडा गवर्नमेंट हॉस्पिटल के अधीक्षक के अनुसार, अस्पताल लाए गए 6 घायल 90% से 100% तक झुलस चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक है और मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। 📊 हादसे का विवरण: एक नजर में विवरण तथ्य स्थान वेटलापलेम गांव, काकीनाडा जिला (आंध्र प्रदेश) समय शनिवार दोपहर, लगभग 2:00 बजे मृतकों की संख्या 20 (पुष्टि हो चुकी है) घायलों की स्थिति 6 गंभीर (90-100% बर्न इंजरी) धमाके की तीव्रता 5 किमी के दायरे में सुनाई दी मुख्य कारण पटाखा निर्माण के दौरान बारूद में विस्फोट (जांच जारी) 3. मुख्यमंत्री और सरकार की प्रतिक्रिया हादसे की खबर मिलते ही राज्य सरकार सक्रिय हो गई है: चंद्रबाबू नायडू का शोक: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने स्थानीय मंत्रियों और जिला कलेक्टर को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करने और पीड़ितों के परिवारों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री का बयान: राज्य की गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने कहा कि प्राथमिकता घायलों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराना है। उन्होंने फैक्ट्री के लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की जांच के आदेश भी दिए हैं। 4. जांच के घेरे में सुरक्षा मानक प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, धमाके के समय यूनिट के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी काम कर रहे थे। अब जांच इस दिशा में की जा रही है कि: क्या फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था? क्या क्षमता से अधिक विस्फोटक सामग्री वहां जमा की गई थी? क्या निर्माण प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था?
सोशल मीडिया पर डिजिटल स्ट्राइक: कर्नाटक 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर बैन लगाने वाला पहला राज्य; आंध्र प्रदेश में भी तैयारी बेंगलुरु | 6 मार्च 2026 भारत में डिजिटल सुरक्षा और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को आधिकारिक घोषणा की है कि राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। इसी राह पर चलते हुए आंध्र प्रदेश सरकार ने भी 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए समान प्रतिबंध की तैयारी शुरू कर दी है। यहाँ इस बड़े फैसले, इसके लागू होने की प्रक्रिया और वैश्विक संदर्भों का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बजट भाषण: "बच्चों का भविष्य प्राथमिकता" कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट पेश करते हुए इस कड़े कानून की आवश्यकता पर जोर दिया: गलत प्रभाव की चिंता: सीएम ने कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया की लत तेजी से बढ़ रही है, जिससे उनके मानसिक विकास और व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। नियमों की तैयारी: इस बैन को तकनीकी रूप से कैसे लागू किया जाएगा, इसके लिए आईटी विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों की टीम नियम तैयार कर रही है। नशे के खिलाफ जंग: सरकार ने केवल डिजिटल ही नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया है। स्कूलों और कॉलेजों में नशे (Drugs) की समस्या को खत्म करने के लिए सख्त निगरानी और काउंसलिंग केंद्र खोले जाएंगे। 2. कैसे लागू होगा यह बैन? (एज वेरिफिकेशन और DPDP एक्ट) सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अब बच्चों की उम्र छिपाना आसान नहीं होगा। यह प्रस्ताव भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 (DPDP) और 2025 के नियमों के साथ एकीकृत किया जाएगा: पैरेंटल कंसेंट (माता-पिता की अनुमति): किसी भी नाबालिग का अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की डिजिटल सहमति अनिवार्य होगी। डिजिटल लॉकर और पहचान: उम्र के सत्यापन (Age Verification) के लिए सरकारी पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर का उपयोग किया जाएगा। कंपनियों की जिम्मेदारी: फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश दिए जाएंगे कि वे नाबालिगों के अकाउंट्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करें। 3. आंध्र प्रदेश की तैयारी: 13 साल की डेडलाइन कर्नाटक के फैसले के कुछ ही घंटों बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी विधानसभा में बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित करने जा रही है। नायडू ने इसे "भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित करने वाला कदम" बताया। 📊 सोशल मीडिया बैन: भारत बनाम दुनिया देश / राज्य उम्र सीमा कानून / स्थिति कर्नाटक (भारत) 16 साल से कम बजट 2026 में घोषणा; देश का पहला राज्य। ऑस्ट्रेलिया 16 साल से कम 'ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट बिल' (नवंबर 2024) लागू। आंध्र प्रदेश (भारत) 13 साल से कम विधानसभा में प्रस्ताव पेश। अमेरिका (कुछ राज्य) 14-16 साल कई राज्यों में पैरेंटल कंट्रोल कानून लागू। 4. टीनएजर्स और सोशल मीडिया: आकर्षण और जोखिम मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, किशोरावस्था (Teenage) में सोशल मीडिया के प्रति झुकाव के गहरे कारण हैं: सोशल वैलिडेशन: टीनएजर्स के लिए लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज केवल संख्या नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास का जरिया हैं। इंस्टेंट रिएक्शन उन्हें यह महसूस कराता है कि वे समाज में मायने रखते हैं। वर्चुअल आइडेंटिटी: बच्चे अक्सर अपनी असल जिंदगी से ज्यादा अपनी वर्चुअल पहचान (Profile) को संवारने में समय बिताते हैं, जिससे वे वास्तविक सामाजिक कौशल (Social Skills) खो देते हैं। साइबर जोखिम: कम उम्र में सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने से साइबर बुलिंग, प्राइवेसी ब्रीच और हानिकारक कंटेंट का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। 5. ऑस्ट्रेलिया मॉडल से प्रेरणा कर्नाटक सरकार का यह फैसला ऑस्ट्रेलिया के 'ऑनलाइन सेफ्टी अमेंडमेंट बिल 2024' से प्रेरित माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने बड़ी टेक कंपनियों पर यह जिम्मेदारी डाली है कि वे उम्र की सख्त जांच करें। वहां इस कानून के उल्लंघन पर कंपनियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।
नई दिल्ली, 2025 – 2025 के त्योहारी सीजन में बाजार में रौनक पहले जैसी तो है, लेकिन खरीदारी करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ता अब वैल्यू फॉर मनी, लॉन्ग टर्म यूटिलिटी और फाइनेंशियल प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे फैशन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या होम डेकोर — हर क्षेत्र में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है कि खरीदार अब जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं। खरीदारी पहले से शुरू भारतीय उपभोक्ताओं ने इस बार अपनी खरीदारी साल के पहले ही शुरू कर दी, जो पारंपरिक आखिरी मिनट की खरीदारी से अलग है। रिटेलर्स और ब्रांड्स अब लंबी एंगेजमेंट विंडो देख रहे हैं, जिससे खरीदार आराम से उत्पाद देख, तुलना कर और खरीद सकते हैं। खरीदारी अब सामूहिक अनुभव बन गई है; परिवार के सदस्य चर्चा और निर्णय में शामिल होते हैं। फेस्टिव शॉपिंग में कौन से सेक्टर हैं आगे अपैरल (वस्त्र) लगभग 63% खरीदार नए कपड़े खरीद रहे हैं। एथनिक वियर, समकालीन फ़्यूज़न स्टाइल और हस्तनिर्मित वस्त्र सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। ब्यूटी और वेलनेस कुल खरीदारी का 42% हिस्सा ब्यूटी और वेलनेस का है। प्राकृतिक स्किनकेयर, आयुर्वेदिक वेलनेस और प्रीमियम पर्सनल केयर ब्रांड विशेष रूप से लोकप्रिय। होम डेकोर लगभग 40% खरीदार घर में त्योहारी माहौल बनाने के लिए होम डेकोर पर फोकस कर रहे हैं। मोबाइल और ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता रुझान 43% उपभोक्ता साप्ताहिक रूप से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी कर रहे हैं। 64% खरीदार पूरी त्योहारी खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, भौतिक दुकानों से बचते हैं। AI का इस्तेमाल और पर्सनलाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव दे रहा है। ब्रांड्स खरीदारों को उनकी प्राथमिकताओं, ब्राउज़िंग इतिहास और ट्रेंड्स के आधार पर अनुकूलित सुझाव दे रहे हैं। पारंपरिक ब्राउज़िंग अब आकर्षक और सहज यात्रा में बदल चुकी है। परंपरा और इनोवेशन का संगम भारतीय त्योहारी खरीदारी अब सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं; यह अनुभव, जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बन गई है। आधुनिकता और परंपरा का संतुलित मिश्रण उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से जुड़ने और खरीदारी का आनंद लेने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान। Jaisalmer से Jodhpur जा रही एक प्राइवेट बस में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मरने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसा Jaisalmer–Jodhpur Highway पर हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस मोडिफाइड थी और उसकी बॉडी में एक्स्ट्रा क्लोथिंग व फाइबर लगाए गए थे, जो अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री है। यही कारण था कि आग कुछ ही मिनटों में पूरी बस में फैल गई और यात्रियों को भागने का मौका तक नहीं मिल पाया। 🔥 दरवाजे नहीं खुले, कई यात्री बाहर नहीं निकल सके बस में कोई अतिरिक्त दरवाजा नहीं था। आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खुला और यात्री अंदर फंस गए। कुछ यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की और अपनी जान बचाई। बाद में राहतकर्मियों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा। 💥 डिग्गी में पटाखे रखे होने का शक खबरों के मुताबिक बस की डिग्गी में पटाखे रखे होने की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बस में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। 🏥 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को जोधपुर भेजा गया जैसलमेर में बर्न आईसीयू न होने के कारण घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर रेफर किया गया। 16 गंभीर रूप से झुलसे यात्रियों को इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और राहतकर्मियों ने मिलकर बचाव कार्य किया। 🕯️ 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत पोकरण से भाजपा विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक यात्री ने जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह हादसा बस के रवाना होने के लगभग 10 मिनट बाद ही हुआ। 🚒 सीएम पहुंचे घटनास्थल पर हादसे की जानकारी मिलते ही Bhajanlal Sharma मंगलवार रात ही जैसलमेर पहुंचे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया और चिकित्सा सुविधाओं के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। बस अग्निकांड हादसे में सरकार ने एक्शन लिया है। हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था। बस बॉडी को अप्रूव करने वाले चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया है। इधर, मंगलवार देर रात पहली FIR दर्ज हुई। हादसे का शिकार हुए पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में केस दर्ज कराया। इधर अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025 – भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ कारोबार बंद किया। हफ्ते के आखिरी दिन बीएसई सेंसेक्स 733.22 अंकों (0.90%) की गिरावट के साथ 80,426.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 236.15 अंकों (0.95%) की गिरावट के साथ 24,654.70 अंक पर बंद हुआ। बाजार पर दबाव का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अक्टूबर, 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के इंपोर्ट पर 100% तक के टैरिफ की घोषणा की है। इसके असर से आज फार्मा सेक्टर सहित कई अन्य सेक्टर्स में बिकवाली हुई और बाजार में भारी दबाव देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी का हाल सेंसेक्स की 30 कंपनियों में सिर्फ 4 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी 25 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में रहे। निफ्टी 50 में भी सिर्फ 6 कंपनियों के शेयर बढ़त में, जबकि 44 कंपनियों के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। आज सेंसेक्स में एलएंडटी का शेयर सबसे अधिक 2.38% की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर सबसे ज्यादा 3.62% गिरा। पॉजिटिव मूव के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर टाटा मोटर्स: 1.32% बढ़त आईटीसी: 1.21% बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज: 0.39% बढ़त गिरावट के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर एटरनल: 3.39% गिरावट टाटा स्टील: 2.81% गिरावट बजाज फाइनेंस: 2.75% गिरावट एशियन पेंट्स: 2.62% गिरावट सनफार्मा: 2.55% गिरावट टेक महिंद्रा: 2.51% गिरावट इंफोसिस: 2.43% गिरावट टीसीएस: 2.04% गिरावट एचसीएल टेक: 2.00% गिरावट बीईएल: 1.87% गिरावट और अन्य प्रमुख शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। निष्कर्ष आज के कारोबार में वैश्विक और घरेलू घटनाओं ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाला। फार्मा सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ का असर और त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू नीति निर्णयों पर निर्भर करेगी।
⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025 — दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है। इस दिन शुभता, समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना की जाती है। आमतौर पर धनतेरस पर कई वस्तुएँ खरीदी जाती हैं — जैसे कि कौड़ी, कमलगट्टा, धनिया, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सोना-चांदी, और झाड़ू। लेकिन इस वर्ष का दिन विशेष राजनीति ग्रहों के संयोग के कारण कुछ वस्तुओं की खरीदारी को अनुकूल नहीं माना गया है। क्यों न करें आज झाड़ू और सरसों का तेल की खरीदारी? शनिवार का दिन इस वर्ष धनतेरस का दिन शनिवार को है। ज्योतिषीय मतानुसार शनिवार को झाड़ू खरीदना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यदि इसे ऐसे दिन खरीदा जाए, तो कहा जाता है कि लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है। सरसों का तेल सरसों का तेल शनि ( शनिदेव ) का प्रतीक माना जाता है। इस दिन इसे खरीदने का दृष्टिकोण नकारात्मक माना गया है — इसके बजाय कहा गया है कि यदि तेल की आवश्यकता हो, तो दान किया जाए। प्रदोष व्रत का महत्व इस दिन के साथ शनि प्रदोष व्रत भी है। इस दिन शाम को शनिदेव को दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही, महादेव की पूजा अर्चना करते समय काले तिल अर्पित करने से शनिदोष कम होता है। अन्य सुझाव व उपाय धनतेरस की खरीदारी को 午दोपहर 12:18 बजे से शुरू मानते हुए 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे तक खरीदी करना उपयुक्त माना गया है। लेकिन इस अवधि में भी झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए। जिन लोगों पर शनिदोष हो, वे इस दिन विशेष पूजा करें। यदि आज स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या कर्ज का बोझ हो, तो इस व्रत से लाभ मिलने की मान्यता है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”