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ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

खामेनेई का 'खूनी प्लान': ईरान में नरसंहार के लिए बुलाए 5,000 इराकी लड़ाके; जब सेना ने अपनों पर गोली चलाने से किया इनकार, तब विदेशी मिलिशिया ने मचाई तबाही तेहरान/न्यूयॉर्क | 17 जनवरी 2026 ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जारी ऐतिहासिक विद्रोह को कुचलने के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। CNN और न्यूयॉर्क पोस्ट की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए इराक से 5,000 से अधिक कट्टरपंथी शिया लड़ाकों को तैनात किया है। यह खुलासा तब हुआ है जब ईरान की अपनी सेना और सुरक्षा बलों ने अपने ही नागरिकों पर सीधी गोलीबारी करने से मना कर दिया था। विदेशी लड़ाकों के इस 'नरसंहार' के बाद ईरान की सड़कों पर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। 1. खामेनेई की रणनीति: सेना के इनकार के बाद विदेशी 'भाड़े के सैनिक' रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनों के दूसरे हफ्ते में ईरानी सेना के भीतर असंतोष फैलने लगा था। कई सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। सहानुभूति का डर: खामेनेई को डर था कि स्थानीय पुलिस और सेना के जवान अपने ही भाई-बहनों और रिश्तेदारों के प्रति नरम पड़ सकते हैं। विदेशी लड़ाकों का चुनाव: इसीलिए जान-बूझकर ऐसे लड़ाकों को बुलाया गया जिनकी ईरान के लोगों के साथ कोई भाषाई या भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। ये लड़ाके अरबी भाषी हैं, जबकि ईरान की मुख्य भाषा फारसी है। इससे प्रदर्शनकारियों और लड़ाकों के बीच सहानुभूति पनपने की कोई गुंजाइश नहीं रही। 2. 'तीर्थयात्री' बनकर आईं मौत की बसें इन लड़ाकों को ईरान लाने के लिए एक बेहद गुप्त और शातिर तरीका अपनाया गया। धार्मिक कवर: 11 जनवरी को इराक-ईरान बॉर्डर पर 60 से ज्यादा बसों का काफिला देखा गया। इराकी गृह मंत्रालय के अधिकारी अली डी. के अनुसार, इन्हें 'तीर्थयात्री' बताया गया। पहचान: इन बसों में न तो महिलाएं थीं, न बच्चे और न ही बुजुर्ग। सभी लड़ाके जवान थे और उन्होंने एक जैसी काली टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्हें इराक के मायसान, वासित और दियाला प्रांतों के रास्ते ईरान में दाखिल कराया गया। संगठन: ये लड़ाके पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के तहत आने वाले कताइब हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा और बद्र संगठन जैसे कट्टरपंथी समूहों से जुड़े हैं, जिन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ही पैसा और हथियार देती है। 📊 ईरान नरसंहार: डेटा और जमीनी हकीकत श्रेणी विवरण और साक्ष्य कुल विदेशी लड़ाके 5,000+ (शुरुआती अनुमान 800 था)। मौतों का आंकड़ा अब तक लगभग 3,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। प्रमुख हथियार सड़कों पर तैनात लड़ाकों के पास भारी मशीनगन और ड्रोन हैं। वर्तमान स्थिति तेहरान और प्रमुख शहरों में 'कब्रिस्तान जैसी शांति'। सेंसरशिप 180 घंटे से अधिक का इंटरनेट ब्लैकआउट जारी। 3. सड़कों पर मशीनगन और ड्रोन का पहरा तेहरान के निवासियों ने जो दास्तां सुनाई है, वह किसी डरावनी फिल्म जैसी है। मशीनगन का खौफ: एक प्रत्यक्षदर्शी ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, "विदेशी लड़ाके अरबी में चिल्ला रहे थे और जो भी घर से बाहर दिख रहा था, उस पर सीधे फायर कर रहे थे। उन्होंने सरकारी इमारतों और चौराहों पर कब्जा कर लिया है।" ड्रोन निगरानी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 और 17 जनवरी को तेहरान के आसमान में लगातार निगरानी ड्रोन उड़ते देखे गए। इसी डर के कारण फिलहाल सड़कों पर प्रदर्शनकारी नजर नहीं आ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की चिंता: ओस्लो स्थित 'ईरान मानवाधिकार' (IHR) के महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने चेतावनी दी है कि यह 'शांति' केवल डर के कारण है, और विदेशी लड़ाकों की तैनाती अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। 4. इराक के ये लड़ाके ईरान के प्रति वफादार क्यों? ये मिलिशिया ग्रुप भले ही इराक के हैं, लेकिन इनका 'रिमोट कंट्रोल' तेहरान में है। ट्रेनिंग और फंडिंग: IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) इन समूहों को सालाना करोड़ों डॉलर की मदद और हथियारों की सप्लाई करती है। वफादारी: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन लड़ाकों की पहली निष्ठा इराक की सरकार के प्रति नहीं, बल्कि अयातुल्ला खामेनेई के प्रति है। यही कारण है कि वे खामेनेई की सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।

20 घंटे Ago
गाजीपुर में हिंदू कारोबारी लिटन घोष की फावड़े से काटकर हत्या; भारत ने बांग्लादेश सरकार को चेताया।

बांग्लादेश: गाजीपुर में हिंदू कारोबारी की फावड़े से काटकर हत्या; कर्मचारी को बचाने आए लिटन घोष पर हमला; भारत ने जताई गहरी चिंता गाजीपुर (बांग्लादेश) | 17 जनवरी 2026 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार (17 जनवरी) को गाजीपुर जिले के कलिगंज में एक 55 वर्षीय हिंदू कारोबारी लिटन चंद्र घोष की पीट-पीटकर और फावड़े से हमला कर हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब लिटन अपनी दुकान में काम करने वाले एक नाबालिग हिंदू कर्मचारी को कट्टरपंथियों के हमले से बचाने की कोशिश कर रहे थे। 1. मामूली विवाद और मौत का तांडव घटना सुबह करीब 11 बजे कलिगंज नगरपालिका क्षेत्र के बरनगर रोड स्थित 'बैशाखी स्वीटमीट एंड होटल' में हुई। विवाद की शुरुआत: मसूम मिया (28) नाम का युवक दुकान पर आया और 17 साल के कर्मचारी अनंत दास के साथ किसी मामूली बात पर उलझ गया। देखते ही देखते मसूम ने नाबालिग कर्मचारी को पीटना शुरू कर दिया। पूरा परिवार बना हमलावर: विवाद बढ़ा तो मसूम के पिता मोहम्मद स्वपन मिया (55) और मां मजीदा खातून (45) भी मौके पर पहुँच गए। बीच-बचाव की कीमत: दुकान मालिक लिटन चंद्र घोष ने जब अपने कर्मचारी अनंत को बचाने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन पर हमला बोल दिया। इसी दौरान लिटन के सिर पर फावड़े (Spade) से जोरदार वार किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। 2. आक्रोशित भीड़ ने आरोपियों को दबोचा हत्या की खबर मिलते ही स्थानीय हिंदू समुदाय और व्यापारियों में भारी गुस्सा फैल गया। नागरिक कार्रवाई: वहां मौजूद लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे तीनों आरोपियों (पिता, माता और बेटे) को चारों तरफ से घेरकर पकड़ लिया। पुलिस हिरासत: कलिगंज थाने के प्रभारी (OC) मोहम्मद जाकिर हुसैन ने बताया कि तीनों आरोपियों—स्वपन मिया, मजीदा खातून और मसूम मिया को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और हत्या का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। 📊 बांग्लादेश में अल्पसंख्यक: बढ़ता खतरा और डेटा श्रेणी विवरण मृतक लिटन चंद्र घोष उर्फ काली (55 वर्ष), हिंदू कारोबारी। आरोपी मसूम मिया, स्वपन मिया और मजीदा खातून (एक ही परिवार के)। अल्पसंख्यक आबादी बांग्लादेश में अब हिंदू, सूफी और ईसाई 10% से भी कम बचे हैं। भारत का रुख "अल्पसंख्यकों पर हमलों का पैटर्न चिंताजनक" - विदेश मंत्रालय। चुनाव का साया फरवरी 2026 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले हिंसा में 40% की वृद्धि। 3. भारत की कड़ी प्रतिक्रिया: "सांप्रदायिक हिंसा का डरावना पैटर्न" भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना और बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया है। रणधीर जायसवाल (प्रवक्ता): उन्होंने कहा कि हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों और उनकी संपत्तियों पर बार-बार हो रहे हमलों का एक खतरनाक पैटर्न देख रहे हैं। कट्टरपंथ का बचाव: भारत ने चिंता जताई कि कई बार इन हमलों को 'निजी रंजिश' का नाम देकर दबा दिया जाता है, जिससे कट्टरपंथियों को और बल मिलता है। भारत ने मांग की है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार इन घटनाओं से सख्ती से निपटे। 4. सत्तापलट के बाद सुलगता बांग्लादेश 2024 में शेख हसीना के तख्तापलट के बाद से बांग्लादेश में इस्लामी संगठनों (जैसे हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम और जमात-ए-इस्लामी) की सक्रियता बढ़ गई है। असुरक्षा का माहौल: 'बांग्लादेश हिंदू-बौद्ध-ईसाई एकता परिषद' के अनुसार, अल्पसंख्यकों के घरों और मंदिरों को निशाना बनाना अब आम बात हो गई है। यूनुस सरकार का दावा: हालांकि, अंतरिम प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने भारत के दावों को यह कहकर खारिज किया है कि ये खबरें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं, लेकिन लिटन घोष जैसी घटनाएं जमीनी हकीकत को बयां कर रही हैं।

20 घंटे Ago
ईरान में गृहयुद्ध के बीच वतन लौटे भारतीय छात्र; दिल्ली एयरपोर्ट पर छलक उठे आंसू; MEA ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी।

ईरान संकट: मौत के साये से वतन लौटे भारतीय; दिल्ली एयरपोर्ट पर अपनों से लिपटकर रोए छात्र; 'रियाल' के पतन और 3000 मौतों के बीच डरावनी दास्तां नई दिल्ली | 17 जनवरी 2026 ईरान में जारी भीषण गृहयुद्ध और सरकार विरोधी हिंसा के बीच फंसे भारतीय नागरिकों की वतन वापसी शुरू हो गई है। शुक्रवार देर रात दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर एक भावुक नजारा देखने को मिला, जब 'मौत के मुहाने' से निकलकर दर्जनों छात्र और पेशेवर भारतीय धरती पर पहुंचे। ईरान द्वारा अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) खोलने के बाद, भारत सरकार की एडवाइजरी का पालन करते हुए ये नागरिक निजी और विशेष विमानों से वापस लौटे हैं। 1. दिल्ली एयरपोर्ट पर भावुक मंजर: "गाड़ियों के सामने आ जाते थे प्रदर्शनकारी" एयरपोर्ट के अराइवल टर्मिनल पर जैसे ही छात्र बाहर आए, वहां पहले से मौजूद उनके परिवार वाले उन्हें गले लगाकर फूट-फूटकर रोने लगे। छात्रों की जुबानी: मेडिकल स्टूडेंट अर्श दहरा ने बताया कि हालात अब बेकाबू हो चुके हैं। उन्होंने कहा, "भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में था, लेकिन डर इतना था कि हम जल्द से जल्द वहां से निकलना चाहते थे।" एक महीने का नरक: जम्मू-कश्मीर के एक युवक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि पिछले एक महीने से वे घरों में कैद थे। अगर गलती से बाहर निकलते, तो प्रदर्शनकारी गाड़ियों के सामने आ जाते थे। पूरे शहर में गोलियों की आवाजें सुनाई देती हैं। 2. 31 प्रांतों में आग और 3000 से ज्यादा मौतें ईरान में 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब एक पूर्ण विद्रोह का रूप ले चुका है। मौत का आंकड़ा: स्थानीय और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की 'लाइव फायरिंग' में अब तक 3,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। कारण: मुख्य वजह है ईरानी मुद्रा 'रियाल' का ऐतिहासिक पतन ($1 = ~14.5 लाख रियाल) और 70% से ज्यादा महंगाई। लोग ब्रेड और चाय जैसी बुनियादी चीजों के लिए मोहताज हैं। डिजिटल ब्लैकआउट: ईरान में इंटरनेट पूरी तरह बंद है, जिससे वहां फंसे भारतीयों को अपने परिवार से बात करने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। 📊 ईरान में भारतीय: वर्तमान स्थिति और हेल्पलाइन श्रेणी विवरण और डेटा ईरान में कुल भारतीय लगभग 9,000 (अधिकांश छात्र और व्यापारी)। एडवाइजरी विदेश मंत्रालय ने 'उपलब्ध साधनों' से तुरंत देश छोड़ने को कहा है। मुख्य हेल्पलाइन नंबर +989128109115, +989128109109, +989128109102 आधिकारिक ईमेल cons.tehran@mea.gov.in ट्रम्प का रुख अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों की हत्या न रुकने पर 'सैन्य कार्रवाई' की धमकी दी है। 3. विदेश मंत्रालय (MEA) की रणनीति प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार अपने हर नागरिक की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें: सरकार ने ईरान में रह रहे शेष भारतीयों को निर्देश दिया है कि वे अपने पासपोर्ट और वीजा हमेशा तैयार रखें ताकि इमरजेंसी इवैक्यूएशन (निकासी) के समय देरी न हो। एयरस्पेस का मुद्दा: 14 जनवरी को ईरान ने हवाई क्षेत्र बंद किया था, जिससे भारतीय विमान फंस गए थे। 15 जनवरी को इसे फिर से खोला गया, जिसके बाद एयर इंडिया और अन्य निजी एयरलाइंस ने भारतीयों को लाना शुरू किया। 4. विद्रोह की आग के पीछे के 5 बड़े कारण आर्थिक तबाही: रियाल की कीमत शून्य की ओर बढ़ रही है, जिससे मिडिल क्लास पूरी तरह खत्म हो गया है। व्यापारियों की हड़ताल: तेहरान के ऐतिहासिक बाजार 'बाजार-ए-बुजुर्ग' के बंद होने से पूरी सप्लाई चेन टूट गई है। शासन के खिलाफ गुस्सा: लोग अब अयातुल्ला खामेनेई के पोस्टर जला रहे हैं और पुरानी राजशाही की वापसी की मांग कर रहे हैं। इंटरनेट बैन: 180 घंटे से ज्यादा के डिजिटल ब्लैकआउट ने जनता के गुस्से को सड़कों पर और बढ़ा दिया है। वैश्विक दबाव: ट्रम्प प्रशासन के कड़े रुख ने प्रदर्शनकारियों को यह उम्मीद दी है कि उन्हें बाहरी मदद मिल सकती है।

एक दिन Ago
जेल में पारस सोम का खुलासा; 'रूबी ने दी थी भागने की सलाह, उसी के जूते पहनकर भागा था'; 3 साल की लवस्टोरी का सच।

मेरठ का सुनीता हत्याकांड: जेल में पारस सोम ने कबूली 3 साल की 'अधूरी लवस्टोरी'; बोला- 'रूबी ने भागने की जिद की, उसने मुझे अपने जूते तक दे दिए' मेरठ | 17 जनवरी 2026 मेरठ के चर्चित सुनीता हत्याकांड में एक नया मोड़ आया है। हत्या के मुख्य आरोपी पारस सोम से उसके वकील बलराम सोम ने मेरठ जिला जेल के मुलाकाती कमरे में करीब एक घंटे तक बातचीत की। इस दौरान पारस ने अपनी और रूबी की 3 साल पुरानी प्रेम कहानी का खुलासा किया। पारस का दावा है कि वह निर्दोष है और पूरी साजिश रूबी के परिवार की ओर से उसकी शादी कहीं और तय करने के बाद शुरू हुई थी। 1. 9वीं का छात्र और 12वीं की छात्रा: स्कूल से शुरू हुआ सफर पारस ने बताया कि उनके प्यार की शुरुआत गांव के जनता इंटर कॉलेज से हुई थी। पहली मुलाकात: पारस तब 9वीं में था और रूबी 12वीं की छात्रा थी। उम्र में रूबी उससे बड़ी थी। स्कूल में पानी पीने के दौरान हुई एक मुस्कुराहट दोस्ती में बदल गई। शादी में इकरार: स्कूल छूटने के बाद करीब 3 साल पहले गांव की एक शादी में दोनों दोबारा मिले। वहीं से उनकी दोस्ती ने प्यार का रूप लिया। पारस ने बताया कि वे घंटों फोन पर बात करते थे और रूबी उसे 'लव लेटर' भी भेजती थी। 2. जब परिवार को पता चला 'अफेयर' का सच साल 2024 में दोनों के रिश्ते की खबर पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद स्थितियां बिगड़ गईं: पंचायती समझौता: दोनों परिवारों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद पारस से उसका मोबाइल छीन लिया गया। छिपकर बातचीत: मोबाइल न होने पर पारस अपनी मां के फोन से या दोस्तों के फोन से रूबी से बात करता था। रूबी भी उसे कॉल करती थी। पारस का दावा है कि उसके पास आज भी वे चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स सुरक्षित हैं। 3. भागने की प्लानिंग: "जबरन शादी नहीं करूंगी" पारस के अनुसार, रूबी के घरवाले उसकी शादी कहीं और तय कर चुके थे। रूबी का अल्टीमेटम: रूबी ने अपने माता-पिता से साफ कह दिया था कि वह पारस के अलावा किसी से शादी नहीं करेगी। भागने की जिद: पारस ने वकील को बताया कि भागने की पूरी योजना रूबी की थी। उसने फोन पर रोते हुए कहा था, "हमें घर से भागना ही होगा, वरना ये लोग मेरी शादी जबरन करा देंगे।" 📊 केस फाइल: पारस और रूबी की फरारी का सच घटनाक्रम विवरण हत्या का दिन पारस का दावा है कि उसने सुनीता (रूबी की मां) को नहीं मारा, वह निर्दोष है। नंगे पांव फरारी कपसाड़ से भागते समय पारस का जूता नहर में बह गया। तब रूबी ने अपने जूते उतारकर पारस को दिए। सफर ट्रक से लिफ्ट लेकर सहारनपुर पहुंचे। पकड़े जाने के समय भी पारस ने रूबी के ही जूते पहने थे। पारस की मांग "मैं आज भी रूबी से शादी करना चाहता हूं, वह दबाव में झूठ बोल रही है।" 4. रूबी के यू-टर्न पर पारस का दर्द जेल में पारस इस बात को लेकर सबसे ज्यादा परेशान दिखा कि रूबी अब उसके खिलाफ बयान क्यों दे रही है। दबाव का शक: पारस ने वकील से कहा, "मुझे समझ नहीं आ रहा वह झूठ क्यों बोल रही है। शायद उसके घरवाले उसे डरा रहे हैं या बंधक बना लिया है।" सबूतों का दावा: पारस ने बताया कि उसके पास रूबी के लिखे लव लेटर, साथ में खिंचवाई गई फोटो और चैट्स के बैकअप मौजूद हैं, जो वह कोर्ट में पेश करेगा। 5. वकील का पक्ष: "पारस अभी सदमे में है" वकील बलराम सोम के अनुसार, पारस फिलहाल मानसिक तनाव और घबराहट में है। कानूनी रणनीति: बचाव पक्ष अब उन कॉल डिटेल्स और मैसेज को जुटाने में लगा है, जो यह साबित कर सकें कि रूबी अपनी मर्जी से पारस के साथ गई थी। अगली मुलाकात: वकील अब पारस की मुलाकात उसके माता-पिता से कराएंगे ताकि वह सामान्य हो सके और घटना वाली रात का पूरा विवरण दे सके।

एक दिन Ago
दावा-ईरान ने 5000 लड़ाकों की मदद से प्रदर्शन को कुचला
विदेश
ईरान में नरसंहार के लिए खामेनेई ने बुलाए इराकी शिया लड़ाके; 3500 मौतें; प्रदर्शन कुचलने का डरावना खुलासा।

खामेनेई का 'खूनी प्लान': ईरान में नरसंहार के लिए बुलाए 5,000 इराकी लड़ाके; जब सेना ने अपनों पर गोली चलाने से किया इनकार, तब विदेशी मिलिशिया ने मचाई तबाही तेहरान/न्यूयॉर्क | 17 जनवरी 2026 ईरान में पिछले तीन हफ्तों से जारी ऐतिहासिक विद्रोह को कुचलने के लिए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। CNN और न्यूयॉर्क पोस्ट की ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों का दमन करने के लिए इराक से 5,000 से अधिक कट्टरपंथी शिया लड़ाकों को तैनात किया है। यह खुलासा तब हुआ है जब ईरान की अपनी सेना और सुरक्षा बलों ने अपने ही नागरिकों पर सीधी गोलीबारी करने से मना कर दिया था। विदेशी लड़ाकों के इस 'नरसंहार' के बाद ईरान की सड़कों पर फिलहाल सन्नाटा है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है। 1. खामेनेई की रणनीति: सेना के इनकार के बाद विदेशी 'भाड़े के सैनिक' रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनों के दूसरे हफ्ते में ईरानी सेना के भीतर असंतोष फैलने लगा था। कई सैनिकों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर मशीनगन चलाने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। सहानुभूति का डर: खामेनेई को डर था कि स्थानीय पुलिस और सेना के जवान अपने ही भाई-बहनों और रिश्तेदारों के प्रति नरम पड़ सकते हैं। विदेशी लड़ाकों का चुनाव: इसीलिए जान-बूझकर ऐसे लड़ाकों को बुलाया गया जिनकी ईरान के लोगों के साथ कोई भाषाई या भावनात्मक जुड़ाव नहीं है। ये लड़ाके अरबी भाषी हैं, जबकि ईरान की मुख्य भाषा फारसी है। इससे प्रदर्शनकारियों और लड़ाकों के बीच सहानुभूति पनपने की कोई गुंजाइश नहीं रही। 2. 'तीर्थयात्री' बनकर आईं मौत की बसें इन लड़ाकों को ईरान लाने के लिए एक बेहद गुप्त और शातिर तरीका अपनाया गया। धार्मिक कवर: 11 जनवरी को इराक-ईरान बॉर्डर पर 60 से ज्यादा बसों का काफिला देखा गया। इराकी गृह मंत्रालय के अधिकारी अली डी. के अनुसार, इन्हें 'तीर्थयात्री' बताया गया। पहचान: इन बसों में न तो महिलाएं थीं, न बच्चे और न ही बुजुर्ग। सभी लड़ाके जवान थे और उन्होंने एक जैसी काली टी-शर्ट पहनी हुई थी। इन्हें इराक के मायसान, वासित और दियाला प्रांतों के रास्ते ईरान में दाखिल कराया गया। संगठन: ये लड़ाके पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के तहत आने वाले कताइब हिजबुल्लाह, अल-नुजाबा और बद्र संगठन जैसे कट्टरपंथी समूहों से जुड़े हैं, जिन्हें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ही पैसा और हथियार देती है। 📊 ईरान नरसंहार: डेटा और जमीनी हकीकत श्रेणी विवरण और साक्ष्य कुल विदेशी लड़ाके 5,000+ (शुरुआती अनुमान 800 था)। मौतों का आंकड़ा अब तक लगभग 3,500 प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं। प्रमुख हथियार सड़कों पर तैनात लड़ाकों के पास भारी मशीनगन और ड्रोन हैं। वर्तमान स्थिति तेहरान और प्रमुख शहरों में 'कब्रिस्तान जैसी शांति'। सेंसरशिप 180 घंटे से अधिक का इंटरनेट ब्लैकआउट जारी। 3. सड़कों पर मशीनगन और ड्रोन का पहरा तेहरान के निवासियों ने जो दास्तां सुनाई है, वह किसी डरावनी फिल्म जैसी है। मशीनगन का खौफ: एक प्रत्यक्षदर्शी ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया, "विदेशी लड़ाके अरबी में चिल्ला रहे थे और जो भी घर से बाहर दिख रहा था, उस पर सीधे फायर कर रहे थे। उन्होंने सरकारी इमारतों और चौराहों पर कब्जा कर लिया है।" ड्रोन निगरानी: रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 16 और 17 जनवरी को तेहरान के आसमान में लगातार निगरानी ड्रोन उड़ते देखे गए। इसी डर के कारण फिलहाल सड़कों पर प्रदर्शनकारी नजर नहीं आ रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों की चिंता: ओस्लो स्थित 'ईरान मानवाधिकार' (IHR) के महमूद अमीरी-मोगद्दाम ने चेतावनी दी है कि यह 'शांति' केवल डर के कारण है, और विदेशी लड़ाकों की तैनाती अंतरराष्ट्रीय कानूनों का घोर उल्लंघन है। 4. इराक के ये लड़ाके ईरान के प्रति वफादार क्यों? ये मिलिशिया ग्रुप भले ही इराक के हैं, लेकिन इनका 'रिमोट कंट्रोल' तेहरान में है। ट्रेनिंग और फंडिंग: IRGC (ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड) इन समूहों को सालाना करोड़ों डॉलर की मदद और हथियारों की सप्लाई करती है। वफादारी: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन लड़ाकों की पहली निष्ठा इराक की सरकार के प्रति नहीं, बल्कि अयातुल्ला खामेनेई के प्रति है। यही कारण है कि वे खामेनेई की सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं।

रवि चौहान जनवरी 17, 2026 0
Photo:PIXABAY
Festive Shopping 2025: भारतीय उपभोक्ता बदलते अंदाज़ में कर रहे खरीदारी

नई दिल्ली, 2025 – 2025 के त्योहारी सीजन में बाजार में रौनक पहले जैसी तो है, लेकिन खरीदारी करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ता अब वैल्यू फॉर मनी, लॉन्ग टर्म यूटिलिटी और फाइनेंशियल प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे फैशन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या होम डेकोर — हर क्षेत्र में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है कि खरीदार अब जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं। खरीदारी पहले से शुरू भारतीय उपभोक्ताओं ने इस बार अपनी खरीदारी साल के पहले ही शुरू कर दी, जो पारंपरिक आखिरी मिनट की खरीदारी से अलग है। रिटेलर्स और ब्रांड्स अब लंबी एंगेजमेंट विंडो देख रहे हैं, जिससे खरीदार आराम से उत्पाद देख, तुलना कर और खरीद सकते हैं। खरीदारी अब सामूहिक अनुभव बन गई है; परिवार के सदस्य चर्चा और निर्णय में शामिल होते हैं। फेस्टिव शॉपिंग में कौन से सेक्टर हैं आगे अपैरल (वस्त्र) लगभग 63% खरीदार नए कपड़े खरीद रहे हैं। एथनिक वियर, समकालीन फ़्यूज़न स्टाइल और हस्तनिर्मित वस्त्र सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। ब्यूटी और वेलनेस कुल खरीदारी का 42% हिस्सा ब्यूटी और वेलनेस का है। प्राकृतिक स्किनकेयर, आयुर्वेदिक वेलनेस और प्रीमियम पर्सनल केयर ब्रांड विशेष रूप से लोकप्रिय। होम डेकोर लगभग 40% खरीदार घर में त्योहारी माहौल बनाने के लिए होम डेकोर पर फोकस कर रहे हैं। मोबाइल और ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता रुझान 43% उपभोक्ता साप्ताहिक रूप से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी कर रहे हैं। 64% खरीदार पूरी त्योहारी खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, भौतिक दुकानों से बचते हैं। AI का इस्तेमाल और पर्सनलाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव दे रहा है। ब्रांड्स खरीदारों को उनकी प्राथमिकताओं, ब्राउज़िंग इतिहास और ट्रेंड्स के आधार पर अनुकूलित सुझाव दे रहे हैं। पारंपरिक ब्राउज़िंग अब आकर्षक और सहज यात्रा में बदल चुकी है। परंपरा और इनोवेशन का संगम भारतीय त्योहारी खरीदारी अब सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं; यह अनुभव, जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बन गई है। आधुनिकता और परंपरा का संतुलित मिश्रण उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से जुड़ने और खरीदारी का आनंद लेने की प्रेरणा देता है।

जैसलमेर में बड़ा हादसा ( फोटो क्रेडिट NDTV )
जैसलमेर में बड़ा हादसाǃ स्लीपर बस में लगी आग‚ दरवाजा नही खुलने से जिंदा जले 21 यात्री

राजस्थान। Jaisalmer से Jodhpur जा रही एक प्राइवेट बस में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मरने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसा Jaisalmer–Jodhpur Highway पर हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस मोडिफाइड थी और उसकी बॉडी में एक्स्ट्रा क्लोथिंग व फाइबर लगाए गए थे, जो अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री है। यही कारण था कि आग कुछ ही मिनटों में पूरी बस में फैल गई और यात्रियों को भागने का मौका तक नहीं मिल पाया।   🔥 दरवाजे नहीं खुले, कई यात्री बाहर नहीं निकल सके   बस में कोई अतिरिक्त दरवाजा नहीं था। आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खुला और यात्री अंदर फंस गए। कुछ यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की और अपनी जान बचाई। बाद में राहतकर्मियों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा।   💥 डिग्गी में पटाखे रखे होने का शक   खबरों के मुताबिक बस की डिग्गी में पटाखे रखे होने की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बस में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।   🏥 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को जोधपुर भेजा गया   जैसलमेर में बर्न आईसीयू न होने के कारण घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर रेफर किया गया। 16 गंभीर रूप से झुलसे यात्रियों को इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और राहतकर्मियों ने मिलकर बचाव कार्य किया।   🕯️ 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत   पोकरण से भाजपा विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक यात्री ने जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह हादसा बस के रवाना होने के लगभग 10 मिनट बाद ही हुआ।   🚒 सीएम पहुंचे घटनास्थल पर   हादसे की जानकारी मिलते ही Bhajanlal Sharma मंगलवार रात ही जैसलमेर पहुंचे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया और चिकित्सा सुविधाओं के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। बस अग्निकांड हादसे में सरकार ने एक्शन लिया है। हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था। बस बॉडी को अप्रूव करने वाले चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया है। इधर, मंगलवार देर रात पहली FIR दर्ज हुई। हादसे का शिकार हुए पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में केस दर्ज कराया। इधर अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। 

शेयर मार्केट डाउन
Share Market Closing 26 September 2025: सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट, सिर्फ कुछ कंपनियों के शेयर बढ़त में

नई दिल्ली, 26 सितंबर 2025 – भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ कारोबार बंद किया। हफ्ते के आखिरी दिन बीएसई सेंसेक्स 733.22 अंकों (0.90%) की गिरावट के साथ 80,426.46 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 236.15 अंकों (0.95%) की गिरावट के साथ 24,654.70 अंक पर बंद हुआ। बाजार पर दबाव का कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 अक्टूबर, 2025 से ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं के इंपोर्ट पर 100% तक के टैरिफ की घोषणा की है। इसके असर से आज फार्मा सेक्टर सहित कई अन्य सेक्टर्स में बिकवाली हुई और बाजार में भारी दबाव देखा गया। सेंसेक्स और निफ्टी का हाल सेंसेक्स की 30 कंपनियों में सिर्फ 4 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए, जबकि बाकी 25 कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ लाल निशान में रहे। निफ्टी 50 में भी सिर्फ 6 कंपनियों के शेयर बढ़त में, जबकि 44 कंपनियों के शेयर नुकसान के साथ बंद हुए। आज सेंसेक्स में एलएंडटी का शेयर सबसे अधिक 2.38% की बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर सबसे ज्यादा 3.62% गिरा। पॉजिटिव मूव के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर टाटा मोटर्स: 1.32% बढ़त आईटीसी: 1.21% बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज: 0.39% बढ़त गिरावट के साथ बंद हुए प्रमुख शेयर एटरनल: 3.39% गिरावट टाटा स्टील: 2.81% गिरावट बजाज फाइनेंस: 2.75% गिरावट एशियन पेंट्स: 2.62% गिरावट सनफार्मा: 2.55% गिरावट टेक महिंद्रा: 2.51% गिरावट इंफोसिस: 2.43% गिरावट टीसीएस: 2.04% गिरावट एचसीएल टेक: 2.00% गिरावट बीईएल: 1.87% गिरावट और अन्य प्रमुख शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। निष्कर्ष आज के कारोबार में वैश्विक और घरेलू घटनाओं ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाला। फार्मा सेक्टर पर अमेरिकी टैरिफ का असर और त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है। आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू नीति निर्णयों पर निर्भर करेगी।

Shaheen Malik Case: 16 साल का इंतज़ार, 25 सर्जरी और अंत में आरोपियों की रिहाई
Shaheen Malik Case: 16 साल का इंतज़ार, 25 सर्जरी और अंत में आरोपियों की रिहाई; शाहीन मलिक ने कहा- 'सिस्टम ने मुझे तोड़ दिया'

⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।

मां लक्ष्मी
धनतेरस आजǃ भूलकर भी ना खरीदें ये चीज़ें, नहीं तो नाराज हो सकती हैं मां लक्ष्मी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025 — दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है। इस दिन शुभता, समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना की जाती है। आमतौर पर धनतेरस पर कई वस्तुएँ खरीदी जाती हैं — जैसे कि कौड़ी, कमलगट्टा, धनिया, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सोना-चांदी, और झाड़ू। लेकिन इस वर्ष का दिन विशेष राजनीति ग्रहों के संयोग के कारण कुछ वस्तुओं की खरीदारी को अनुकूल नहीं माना गया है।    क्यों न करें आज झाड़ू और सरसों का तेल की खरीदारी?   शनिवार का दिन इस वर्ष धनतेरस का दिन शनिवार को है। ज्योतिषीय मतानुसार शनिवार को झाड़ू खरीदना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यदि इसे ऐसे दिन खरीदा जाए, तो कहा जाता है कि लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है।  सरसों का तेल सरसों का तेल शनि ( शनिदेव ) का प्रतीक माना जाता है। इस दिन इसे खरीदने का दृष्टिकोण नकारात्मक माना गया है — इसके बजाय कहा गया है कि यदि तेल की आवश्यकता हो, तो दान किया जाए।  प्रदोष व्रत का महत्व इस दिन के साथ शनि प्रदोष व्रत भी है। इस दिन शाम को शनिदेव को दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही, महादेव की पूजा अर्चना करते समय काले तिल अर्पित करने से शनिदोष कम होता है।    अन्य सुझाव व उपाय   धनतेरस की खरीदारी को 午दोपहर 12:18 बजे से शुरू मानते हुए 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे तक खरीदी करना उपयुक्त माना गया है। लेकिन इस अवधि में भी झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए।  जिन लोगों पर शनिदोष हो, वे इस दिन विशेष पूजा करें। यदि आज स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या कर्ज का बोझ हो, तो इस व्रत से लाभ मिलने की मान्यता है।

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मेहराज और उसकी पत्नी नसीमन
“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

अक्टूबर 11, 2025

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