ट्रम्प प्रशासन का बड़ा फैसला: ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट; $110 के पार पहुँचे क्रूड को काबू करने की कोशिश, भारत को मिलेगी राहत? वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 21 मार्च 2026 ईरान-इजराइल जंग के 22वें दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'ऑयल शॉक' से बचाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक दांव खेला है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर लगे कड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अस्थायी छूट (Sextions Waiver) देने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल को छूने लगी थीं। यहाँ इस ऐतिहासिक फैसले, इसके पीछे की रणनीति और भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ने वाले असर की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. क्या है अमेरिकी ट्रेजरी का 'सेंक्शंस वेवर'? अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट द्वारा घोषित यह छूट एक विशेष श्रेणी के लिए है: समय सीमा: यह छूट 20 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। शर्त: यह छूट केवल उन तेल टैंकरों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद (In-transit) हैं। नया तेल लोड करने की अनुमति फिलहाल नहीं दी गई है। उद्देश्य: ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाकर बेकाबू होती कीमतों को नीचे लाना। 2. रूसी तेल पर भी दूसरी बार हटी पाबंदी ट्रम्प प्रशासन ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि रूस के प्रति भी लचीला रुख अपनाया है: नया जनरल लाइसेंस: उन रूसी टैंकरों को तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। वैधता: यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। अपवाद: अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया जैसे क्षेत्रों को इस व्यापारिक छूट से बाहर रखा गया है। 3. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी और महंगाई का गणित जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल $70 के आसपास था, जो अब $112-$114 पर बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह दुनिया की 'ऊर्जा गर्दन' यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। 20% पेट्रोलियम का रास्ता: दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल इसी 167 किमी लंबे जलमार्ग से गुजरता है। भारत का संकट: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। युद्ध के कारण टैंकरों ने इस रूट का इस्तेमाल बंद कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन ठप हो गई है। 🔍 सवाल-जवाब: फैसले की गहराई और भविष्य के संकेत प्रश्न 1: अमेरिका ने अचानक प्रतिबंधों में ढील क्यों दी? उत्तर: युद्ध के तीन हफ्तों ने ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान को तबाह करने की कीमत अमेरिकी और वैश्विक जनता महंगाई के रूप में चुकाए। प्रश्न 2: क्या यह ईरान के प्रति नरम रुख है? उत्तर: नहीं। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह "ईरान के खिलाफ ईरानी बैरल" का इस्तेमाल करने की रणनीति है। अमेरिका चाहता है कि यह तेल चीन को ब्लैक मार्केट में सस्ते दाम पर मिलने के बजाय वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगियों को मिले ताकि बाजार संतुलित रहे। प्रश्न 3: 14 करोड़ बैरल तेल क्या दुनिया के लिए काफी है? उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की केवल डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यह एक 'बैंड-एड' (अस्थायी मरहम) जैसा है। इसके खत्म होने के बाद अमेरिका को या तो होर्मुज खुलवाना होगा या प्रतिबंध पूरी तरह हटाने पड़ेंगे। 4. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और तेल का खेल डोनाल्ड ट्रम्प का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' केवल मिसाइलें दागने तक सीमित नहीं है। सैन्य चोट: अमेरिका ने 100 घंटों में ईरान के 2,000 ठिकाने और 17 जहाज तबाह किए हैं। आर्थिक ढाल: ट्रम्प चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था न चरमराए। इसीलिए तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अनिवार्य हिस्सा है। 📊 ईरान पर प्रतिबंधों का इतिहास: 1979 से 2026 तक वर्ष घटना प्रभाव 1979 अमेरिकी दूतावास संकट पहली बार कड़े प्रतिबंध लगाए गए। 2015 परमाणु समझौता (JCPOA) ओबामा प्रशासन ने तेल निर्यात से पाबंदियां हटाईं। 2018 ट्रम्प का बाहर निकलना ईरान की तेल कमाई 'जीरो' करने के लिए कड़े बैन लगाए। 2026 ईरान-इजराइल युद्ध ऊर्जा संकट टालने के लिए 30 दिन का 'सेंक्शंस वेवर'। 🇮🇳 भारत पर असर: राहत की उम्मीद भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। कीमतों में स्थिरता: ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल आने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित ₹10-15 की बढ़ोत्तरी रुक सकती है। सप्लाई सुरक्षा: भारतीय रिफाइनरियां अब उन टैंकरों को क्लीयरेंस दे सकेंगी जो समुद्र में फंसे हुए थे।
ईद 2026: युद्ध की आग और मिसाइलों के साये में दुनिया; 60 साल बाद अल-अक्सा मस्जिद बंद, रूस में उमड़ा जनसैलाब विशेष वैश्विक रिपोर्ट | 21 मार्च 2026 आज पूरी दुनिया में ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार की ईद खुशियों से ज्यादा खौफ और सन्नाटे की गवाह बनी है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध के 22वें दिन, मजहबी जज्बात और सैन्य तनाव का टकराव साफ देखने को मिल रहा है। जहाँ एक ओर यरुशलम में इतिहास दोहराया गया है, वहीं दूसरी ओर रूस और ब्रिटेन जैसे देशों में लाखों की संख्या में नमाज अदा की गई। यहाँ ईद 2026 की विस्तृत वैश्विक कवरेज दी गई है: 1. यरुशलम: 60 साल में पहली बार अल-अक्सा बंद इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के कारण यरुशलम में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व है। ऐतिहासिक पाबंदी: 1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार है, जब अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया। सुरक्षा घेरा: यरुशलम के पुराने शहर (Old City) में केवल स्थानीय निवासियों को प्रवेश की अनुमति है। मस्जिद के बाहर इजराइली पुलिस और नमाजियों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं, जहाँ भीड़ 'अल्लाहु अकबर' के नारों के साथ अंदर जाने की कोशिश कर रही थी। नियम: भीड़ पर सख्त पाबंदी है—मस्जिद के अंदर केवल 100 और बाहर 50 लोगों के इकट्ठा होने की इजाजत दी गई है। 2. ईरान: गम और श्रद्धांजलि की ईद ईरान में शुक्रवार को ईद मनाई गई, लेकिन यहाँ उत्सव के बजाय मातम का माहौल अधिक दिखा। वीरान बाजार: तेहरान के बाजारों में रौनक गायब रही। लोग जश्न मनाने के बजाय उन 170 बच्चों की कब्रों पर श्रद्धांजलि देने पहुँचे, जो पिछले दिनों अमेरिकी-इजराइली स्कूल हमले में मारे गए थे। प्रतीकात्मक नमाज: तेहरान की ग्रैंड मोसल्ला मस्जिद में नमाज के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं ईरान के राष्ट्रीय झंडे में लिपटी नजर आईं, जो युद्ध के समय राष्ट्रवाद और एकजुटता का संदेश दे रही थीं। 3. खाड़ी देश: खुले मैदानों में नमाज पर रोक कतर, यूएई (UAE) और कुवैत जैसे देशों में आज शनिवार को ईद मनाई जा रही है। सुरक्षा अलर्ट: युद्ध की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने 'ईदगाह' या खुले मैदानों में सामूहिक नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। सभी नमाजें केवल मस्जिदों के भीतर कड़ी सुरक्षा में अदा की गईं। यूएई में 4 दिन की छुट्टी: हालांकि अबू धाबी और दुबई के मॉल्स में लाइटिंग की गई है, लेकिन सुरक्षा जांच (Security Checkpoints) के कारण लोगों की आवाजाही कम रही। 4. गाजा और लेबनान: मलबे के ढेर पर इबादत गाजा की तबाही: हमास और इस्लामिक जिहाद के सदस्य तबाही के बीच लोगों को मुबारकबाद देते नजर आए। भुखमरी और आर्थिक संकट के कारण फलों और खिलौनों के दाम आसमान छू रहे हैं। लेबनान का संकट: दक्षिण लेबनान में इजराइली हमलों के कारण हजारों लोग शरणार्थी शिविरों (Shelters) में ईद मनाने को मजबूर हैं। यहाँ अब तक युद्ध में 1,000 से ज्यादा लोग जान गंवा चुके हैं। 5. रूस और तुर्किये: इबादत का बड़ा केंद्र मिडिल ईस्ट के तनाव से दूर रूस में एक अलग तस्वीर देखने को मिली: रूस में रिकॉर्ड भीड़: मॉस्को की 4 प्रमुख मस्जिदों में 2 लाख से ज्यादा लोग नमाज के लिए जुटे। सेंट पीटर्सबर्ग में भी 1 लाख से अधिक लोग शामिल हुए। पुतिन का संदेश: राष्ट्रपति पुतिन ने मुस्लिम समुदाय की तारीफ करते हुए उन्हें 'देशभक्त' बताया और कहा कि कई मुस्लिम सैनिक इस समय मोर्चे पर देश की सुरक्षा कर रहे हैं। तुर्किये: इस्तांबुल की ग्रैंड कैमलिका मस्जिद (तुर्किये की सबसे बड़ी मस्जिद) में हजारों लोगों ने शांति की दुआ मांगी। 📊 वैश्विक ईद 2026: एक नजर में देश / स्थान नमाज की स्थिति विशेष टिप्पणी अल-अक्सा (इजराइल) पूरी तरह बंद 1967 के बाद पहली बार ऐसा हुआ। रूस (मॉस्को) 2 लाख+ नमाजी पुतिन ने मुस्लिम समुदाय को बधाई दी। बर्मिंघम (ब्रिटेन) भारी भीड़ स्मॉल हीथ पार्क में बड़ी नमाज अदा की गई। ईरान सादगी और गम मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी गई। इराक तनावपूर्ण खामेनेई के पोस्टरों के साथ नमाज अदा की गई। 6. कूटनीतिक जीत: पाक-अफगान युद्ध पर 4 दिन का ब्रेक ईद के सम्मान में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। सऊदी अरब, तुर्किये और कतर की मध्यस्थता के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रही जंग 4 दिनों के लिए रोक दी गई है। सीजफायर: यह विराम 18 मार्च से 24 मार्च तक प्रभावी रहेगा। हालांकि, पाकिस्तान ने चेतावनी दी है कि किसी भी आतंकी हमले की स्थिति में ऑपरेशन दोबारा शुरू कर दिया जाएगा। 7. हवाई सेवा: ईद स्पेशल फ्लाइट्स भारतीय यात्रियों और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने जेद्दा (सऊदी अरब) और मस्कट (ओमान) के लिए 16 विशेष उड़ानें संचालित करने का फैसला किया है। युद्ध के कारण कुछ रूट प्रभावित हुए हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाए जा रहे हैं।
सलमान खान की 'मातृभूमि' की रिलीज टली: विलेन प्रशांत तमांग के निधन और स्क्रिप्ट बदलाव से फंसी फिल्म; अब स्वतंत्रता दिवस पर दस्तक की उम्मीद मुंबई | 21 मार्च 2026 बॉलीवुड के सुल्तान सलमान खान के फैंस के लिए एक निराशाजनक खबर सामने आ रही है। सलमान की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' (पूर्व में 'बैटल ऑफ गलवान') की रिलीज डेट फिलहाल टाल दी गई है। इंडिया टुडे की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म की रिलीज में देरी की मुख्य वजह स्क्रिप्ट में अचानक किए गए बदलाव और फिल्म के मुख्य विलेन का किरदार निभा रहे एक्टर-सिंगर प्रशांत तमांग का असामयिक निधन है। यहाँ फिल्म की शूटिंग में आ रही बाधाओं, कास्टिंग चुनौतियों और रिलीज के नए शेड्यूल की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. प्रशांत तमांग का निधन: टीम के सामने 'लॉजिस्टिक' संकट 'इंडियन आइडल 3' के विजेता और अभिनेता प्रशांत तमांग इस फिल्म में एक शक्तिशाली विलेन की भूमिका निभा रहे थे। अधूरे सीन: सूत्र के मुताबिक, प्रशांत ने कई अहम दृश्यों की शूटिंग पूरी कर ली थी, लेकिन जनवरी 2026 में उनके निधन के कारण कुछ महत्वपूर्ण एक्शन सीक्वेंस और क्लोज-अप शॉट्स बाकी रह गए। रीशूट की चुनौती: मेकर्स के लिए सबसे बड़ी दुविधा यह है कि क्या उन दृश्यों को किसी अन्य एक्टर के साथ दोबारा शूट किया जाए या तकनीकी मदद ली जाए। एक्शन सीक्वेंस बड़े स्तर पर फिल्माए जाने थे, जिन्हें दोबारा शूट करना आर्थिक रूप से काफी महंगा साबित होगा। 2. AI और VFX का सहारा ले सकते हैं मेकर्स प्रशांत तमांग के प्रति सम्मान और फिल्म की निरंतरता (Continuity) बनाए रखने के लिए टीम दो विकल्पों पर विचार कर रही है: फेस रिप्लेसमेंट: प्रशांत का चेहरा बाकी बचे दृश्यों में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और VFX के जरिए जोड़ा जा सकता है। इसके लिए मेकर्स को प्रशांत के परिवार से कानूनी अनुमति लेनी होगी। न्यू कास्टिंग: यदि तकनीक काम नहीं करती, तो किसी नए चेहरे को कास्ट कर पूरी विलेन वाली भूमिका दोबारा शूट की जा सकती है, जिससे फिल्म का बजट काफी बढ़ जाएगा। 3. सलमान खान की डेट्स और लुक का पेच फिल्म की देरी का एक और बड़ा कारण खुद 'भाईजान' का बिजी शेड्यूल है: उपलब्धता: सलमान खान फिलहाल अपने अन्य प्रोजेक्ट्स (जैसे 'सिकंदर' और 'टाइगर वर्सेस पठान') में व्यस्त हैं, जिसके कारण 'मातृभूमि' के रीशूट के लिए तुरंत डेट्स मिलना मुश्किल है। लुक की समस्या: फिल्म की शूटिंग के दौरान सलमान का एक विशिष्ट लुक था। समय बीतने के साथ लुक की निरंतरता बनाए रखना टीम के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। 📊 'मातृभूमि' फिल्म प्रोफाइल: एक नजर में श्रेणी विवरण नया नाम मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस (Matrubhoomi: May War Rest In Peace) पुराना नाम बैटल ऑफ गलवान (Battle of Galwan) मुख्य कलाकार सलमान खान, चित्रांगदा सिंह निर्देशक अपूर्व लाखिया निर्माता सलमा खान (सलमान खान फिल्म्स) नई संभावित रिलीज 15 अगस्त 2026 (स्वतंत्रता दिवस) 4. नाम बदलने के पीछे की कहानी फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' से बदलकर 'मातृभूमि' करने के पीछे मेकर्स की एक खास सोच है। सूत्रों के अनुसार, यह फिल्म केवल युद्ध की वीरता नहीं, बल्कि युद्ध के बीच दबी इंसानियत और शांति के संदेश को भी दर्शाती है। टाइटल में 'मे वॉर रेस्ट इन पीस' जोड़ना इस जज्बात को और गहरा बनाता है। 5. कब होगी रिलीज? पहले यह फिल्म 17 अप्रैल 2026 को रिलीज होने वाली थी। हालांकि, पोस्ट-प्रोडक्शन और रीशूट की जरूरतों को देखते हुए अब इसे स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) के मौके पर रिलीज करने की योजना बनाई जा रही है। फिल्म के भविष्य पर अंतिम फैसला इस महीने के अंत तक ले लिया जाएगा।
मथुरा में तनाव: विख्यात गौरक्षक "फरसा वाले बाबा" की मौत पर बवाल; हाईवे पर पथराव, आंसू गैस के गोले और पुलिस का बड़ा खुलासा मथुरा | 21 मार्च 2026 उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में शनिवार तड़के एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे ब्रज क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। विख्यात गौरक्षक और "फरसा वाले बाबा" के नाम से मशहूर चंद्रशेखर उर्फ चंद्रशेखर बाबा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस घटना के बाद गौरक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा, जिससे दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। जहाँ समर्थक इसे एक सोची-समझी हत्या (Lynch/Murder) बता रहे हैं, वहीं पुलिस इसे घने कोहरे के कारण हुआ एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क हादसा करार दे रही है। यहाँ इस पूरे घटनाक्रम और जमीनी हालात की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. घटना का विवरण: सुबह 4 बजे का वह मंजर यह दर्दनाक वाकया कोसी कलां थाना क्षेत्र की कोटवन चौकी के अंतर्गत नवीपुर गांव के पास हुआ। संदेह और कार्रवाई: सुबह करीब 3:00 से 4:00 बजे के बीच, फरसा वाले बाबा ने शक के आधार पर एक वाहन को रुकवाया था। बाबा को अंदेशा था कि वाहन में गोवंश (गाय) तस्करी की जा रही है। हादसा: इसी दौरान, पीछे से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने बाबा को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। गिरफ्तारी: पुलिस ने मौके से एक आरोपी को हिरासत में लिया है, जबकि तीन अन्य अंधेरे और कोहरे का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे। 2. हाईवे पर संग्राम: पुलिस पर पथराव और आंसू गैस बाबा की मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों की संख्या में गौरक्षक और उनके समर्थक दिल्ली-आगरा हाईवे पर जमा हो गए। चक्का जाम: प्रदर्शनकारियों ने हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हिंसा: आक्रोशित भीड़ ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और देखते ही देखते पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गई हैं। पुलिस की कार्रवाई: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। काफी मशक्कत के बाद आवश्यक बल प्रयोग कर स्थिति को काबू में किया गया। 3. पुलिस का आधिकारिक पक्ष: "यह गोवंश तस्करी नहीं, दुर्घटना है" मथुरा पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए अफवाहों पर लगाम लगाने की कोशिश की है: "चंद्रशेखर उर्फ फरसा बाबा ने संदेह के आधार पर एक कंटेनर को रोका था। घने कोहरे के कारण पीछे से आ रहे तार लदे ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी। जिस कंटेनर को बाबा ने रोका था, उसमें किराने का सामान मिला है। यह एक शुद्ध सड़क दुर्घटना है, गोवंश तस्करी से इसका कोई संबंध नहीं है।" 📊 घटनाक्रम: एक नजर में (21 मार्च 2026) समय घटना प्रभाव 03:30 AM बाबा ने नवीपुर के पास वाहन रुकवाया। कोहरे के कारण विजिबिलिटी कम थी। 04:00 AM पीछे से आए ट्रक ने बाबा को कुचला। मौके पर ही बाबा की मौत। 08:00 AM दिल्ली-आगरा हाईवे पर जाम शुरू। हजारों यात्री बीच रास्ते फंसे। 11:00 AM पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प। पथराव और आंसू गैस का प्रयोग। 02:00 PM पुलिस ने बल प्रयोग कर हाईवे खुलवाया। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात। 4. कौन थे "फरसा वाले बाबा"? चंद्रशेखर बाबा ब्रज क्षेत्र के एक प्रखर गौरक्षक थे। वे हमेशा अपने साथ एक फरसा रखते थे, जिसके कारण उन्हें "फरसा वाले बाबा" कहा जाने लगा। गौ-तस्करी रोकने के लिए वे रात-रात भर हाईवे पर गश्त करते थे। स्थानीय लोगों और गौरक्षकों के बीच उनकी जबरदस्त पैठ थी, यही कारण है कि उनकी मौत ने भावनाओं को उद्वेलित कर दिया है।
ट्रम्प प्रशासन का बड़ा फैसला: ईरानी तेल पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट; $110 के पार पहुँचे क्रूड को काबू करने की कोशिश, भारत को मिलेगी राहत? वॉशिंगटन/नई दिल्ली | 21 मार्च 2026 ईरान-इजराइल जंग के 22वें दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'ऑयल शॉक' से बचाने के लिए डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक दांव खेला है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी कच्चे तेल की खरीद पर लगे कड़े प्रतिबंधों में 30 दिनों की अस्थायी छूट (Sextions Waiver) देने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल को छूने लगी थीं। यहाँ इस ऐतिहासिक फैसले, इसके पीछे की रणनीति और भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ने वाले असर की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. क्या है अमेरिकी ट्रेजरी का 'सेंक्शंस वेवर'? अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट द्वारा घोषित यह छूट एक विशेष श्रेणी के लिए है: समय सीमा: यह छूट 20 मार्च 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। शर्त: यह छूट केवल उन तेल टैंकरों के लिए है जो पहले से ही समुद्र में मौजूद (In-transit) हैं। नया तेल लोड करने की अनुमति फिलहाल नहीं दी गई है। उद्देश्य: ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाकर बेकाबू होती कीमतों को नीचे लाना। 2. रूसी तेल पर भी दूसरी बार हटी पाबंदी ट्रम्प प्रशासन ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि रूस के प्रति भी लचीला रुख अपनाया है: नया जनरल लाइसेंस: उन रूसी टैंकरों को तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। वैधता: यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी। अपवाद: अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया जैसे क्षेत्रों को इस व्यापारिक छूट से बाहर रखा गया है। 3. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी और महंगाई का गणित जंग शुरू होने से पहले कच्चा तेल $70 के आसपास था, जो अब $112-$114 पर बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह दुनिया की 'ऊर्जा गर्दन' यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। 20% पेट्रोलियम का रास्ता: दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल इसी 167 किमी लंबे जलमार्ग से गुजरता है। भारत का संकट: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। युद्ध के कारण टैंकरों ने इस रूट का इस्तेमाल बंद कर दिया है, जिससे सप्लाई चेन ठप हो गई है। 🔍 सवाल-जवाब: फैसले की गहराई और भविष्य के संकेत प्रश्न 1: अमेरिका ने अचानक प्रतिबंधों में ढील क्यों दी? उत्तर: युद्ध के तीन हफ्तों ने ग्लोबल सप्लाई चेन को तोड़ दिया है। तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर हैं। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान को तबाह करने की कीमत अमेरिकी और वैश्विक जनता महंगाई के रूप में चुकाए। प्रश्न 2: क्या यह ईरान के प्रति नरम रुख है? उत्तर: नहीं। स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह "ईरान के खिलाफ ईरानी बैरल" का इस्तेमाल करने की रणनीति है। अमेरिका चाहता है कि यह तेल चीन को ब्लैक मार्केट में सस्ते दाम पर मिलने के बजाय वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगियों को मिले ताकि बाजार संतुलित रहे। प्रश्न 3: 14 करोड़ बैरल तेल क्या दुनिया के लिए काफी है? उत्तर: विशेषज्ञों के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की केवल डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यह एक 'बैंड-एड' (अस्थायी मरहम) जैसा है। इसके खत्म होने के बाद अमेरिका को या तो होर्मुज खुलवाना होगा या प्रतिबंध पूरी तरह हटाने पड़ेंगे। 4. 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' और तेल का खेल डोनाल्ड ट्रम्प का 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' केवल मिसाइलें दागने तक सीमित नहीं है। सैन्य चोट: अमेरिका ने 100 घंटों में ईरान के 2,000 ठिकाने और 17 जहाज तबाह किए हैं। आर्थिक ढाल: ट्रम्प चाहते हैं कि सैन्य कार्रवाई के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था न चरमराए। इसीलिए तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अनिवार्य हिस्सा है। 📊 ईरान पर प्रतिबंधों का इतिहास: 1979 से 2026 तक वर्ष घटना प्रभाव 1979 अमेरिकी दूतावास संकट पहली बार कड़े प्रतिबंध लगाए गए। 2015 परमाणु समझौता (JCPOA) ओबामा प्रशासन ने तेल निर्यात से पाबंदियां हटाईं। 2018 ट्रम्प का बाहर निकलना ईरान की तेल कमाई 'जीरो' करने के लिए कड़े बैन लगाए। 2026 ईरान-इजराइल युद्ध ऊर्जा संकट टालने के लिए 30 दिन का 'सेंक्शंस वेवर'। 🇮🇳 भारत पर असर: राहत की उम्मीद भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। कीमतों में स्थिरता: ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल आने से भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित ₹10-15 की बढ़ोत्तरी रुक सकती है। सप्लाई सुरक्षा: भारतीय रिफाइनरियां अब उन टैंकरों को क्लीयरेंस दे सकेंगी जो समुद्र में फंसे हुए थे।
नई दिल्ली, 2025 – 2025 के त्योहारी सीजन में बाजार में रौनक पहले जैसी तो है, लेकिन खरीदारी करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ता अब वैल्यू फॉर मनी, लॉन्ग टर्म यूटिलिटी और फाइनेंशियल प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे फैशन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या होम डेकोर — हर क्षेत्र में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है कि खरीदार अब जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं। खरीदारी पहले से शुरू भारतीय उपभोक्ताओं ने इस बार अपनी खरीदारी साल के पहले ही शुरू कर दी, जो पारंपरिक आखिरी मिनट की खरीदारी से अलग है। रिटेलर्स और ब्रांड्स अब लंबी एंगेजमेंट विंडो देख रहे हैं, जिससे खरीदार आराम से उत्पाद देख, तुलना कर और खरीद सकते हैं। खरीदारी अब सामूहिक अनुभव बन गई है; परिवार के सदस्य चर्चा और निर्णय में शामिल होते हैं। फेस्टिव शॉपिंग में कौन से सेक्टर हैं आगे अपैरल (वस्त्र) लगभग 63% खरीदार नए कपड़े खरीद रहे हैं। एथनिक वियर, समकालीन फ़्यूज़न स्टाइल और हस्तनिर्मित वस्त्र सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। ब्यूटी और वेलनेस कुल खरीदारी का 42% हिस्सा ब्यूटी और वेलनेस का है। प्राकृतिक स्किनकेयर, आयुर्वेदिक वेलनेस और प्रीमियम पर्सनल केयर ब्रांड विशेष रूप से लोकप्रिय। होम डेकोर लगभग 40% खरीदार घर में त्योहारी माहौल बनाने के लिए होम डेकोर पर फोकस कर रहे हैं। मोबाइल और ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता रुझान 43% उपभोक्ता साप्ताहिक रूप से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी कर रहे हैं। 64% खरीदार पूरी त्योहारी खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, भौतिक दुकानों से बचते हैं। AI का इस्तेमाल और पर्सनलाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव दे रहा है। ब्रांड्स खरीदारों को उनकी प्राथमिकताओं, ब्राउज़िंग इतिहास और ट्रेंड्स के आधार पर अनुकूलित सुझाव दे रहे हैं। पारंपरिक ब्राउज़िंग अब आकर्षक और सहज यात्रा में बदल चुकी है। परंपरा और इनोवेशन का संगम भारतीय त्योहारी खरीदारी अब सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं; यह अनुभव, जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बन गई है। आधुनिकता और परंपरा का संतुलित मिश्रण उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से जुड़ने और खरीदारी का आनंद लेने की प्रेरणा देता है।
राजस्थान। Jaisalmer से Jodhpur जा रही एक प्राइवेट बस में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मरने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसा Jaisalmer–Jodhpur Highway पर हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस मोडिफाइड थी और उसकी बॉडी में एक्स्ट्रा क्लोथिंग व फाइबर लगाए गए थे, जो अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री है। यही कारण था कि आग कुछ ही मिनटों में पूरी बस में फैल गई और यात्रियों को भागने का मौका तक नहीं मिल पाया। 🔥 दरवाजे नहीं खुले, कई यात्री बाहर नहीं निकल सके बस में कोई अतिरिक्त दरवाजा नहीं था। आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खुला और यात्री अंदर फंस गए। कुछ यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की और अपनी जान बचाई। बाद में राहतकर्मियों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा। 💥 डिग्गी में पटाखे रखे होने का शक खबरों के मुताबिक बस की डिग्गी में पटाखे रखे होने की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बस में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी। 🏥 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को जोधपुर भेजा गया जैसलमेर में बर्न आईसीयू न होने के कारण घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर रेफर किया गया। 16 गंभीर रूप से झुलसे यात्रियों को इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और राहतकर्मियों ने मिलकर बचाव कार्य किया। 🕯️ 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत पोकरण से भाजपा विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक यात्री ने जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह हादसा बस के रवाना होने के लगभग 10 मिनट बाद ही हुआ। 🚒 सीएम पहुंचे घटनास्थल पर हादसे की जानकारी मिलते ही Bhajanlal Sharma मंगलवार रात ही जैसलमेर पहुंचे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया और चिकित्सा सुविधाओं के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। बस अग्निकांड हादसे में सरकार ने एक्शन लिया है। हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था। बस बॉडी को अप्रूव करने वाले चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया है। इधर, मंगलवार देर रात पहली FIR दर्ज हुई। हादसे का शिकार हुए पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में केस दर्ज कराया। इधर अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं।
मिडल ईस्ट महाजंग Day 11: ईरान पर आज होगा 'सबसे भीषण' हमला; अमेरिकी रक्षा मंत्री की चेतावनी— "तेहरान को मिटाने की तैयारी", 116 डॉलर के पार पहुँचा कच्चा तेल तेहरान/वॉशिंगटन/दुबई | 10 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब अपने सबसे निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। आज जंग का 11वां दिन है और दुनिया की सांसें थमी हुई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐलान किया है कि मंगलवार को ईरान पर "इतिहास का सबसे तीव्र हवाई हमला" किया जाएगा। इस बीच, खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने के कारण दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। यहाँ 11वें दिन की युद्ध स्थिति, वैश्विक ऊर्जा संकट और राजनीतिक बयानबाजी की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. वॉर रूम अपडेट: "ईरान पर आज होगा महाप्रलय" अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' के अगले चरण की घोषणा की है: सबसे बड़ा हमला: रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, आज मंगलवार को ईरान के सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा। इसमें B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की लहरें शामिल होंगी। ईरान का पलटवार: ईरान ने सोमवार रात इजराइल पर 1 टन वारहेड वाली मिसाइलें दागकर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। साथ ही, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ट्रम्प की चेतावनी: डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो अमेरिका ईरान के उन ठिकानों को मिटा देगा जिन्हें दोबारा बनाना असंभव होगा। 2. ऊर्जा संकट: तेल की किल्लत से दुनिया में मची 'इमरजेंसी' ईरान-इजराइल युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले 'ऊर्जा क्षेत्र' को पंगु बना दिया है: भारत पर असर: भारत अपनी 59% LNG कतर और UAE से खरीदता है। होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से सप्लाई रुक गई है, जिससे देश में महंगाई और ईंधन की कमी का खतरा बढ़ गया है। अब तक 52,000 भारतीय सुरक्षित वतन लौट चुके हैं। पाकिस्तान और अन्य देश: पाकिस्तान में मंत्रियों की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई है और स्कूल 2 हफ्ते के लिए बंद हैं। थाईलैंड में लोगों को लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने और 'वर्क फ्रॉम होम' करने को कहा गया है। सऊदी अरामको की चेतावनी: दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने कहा है कि दुनिया में तेल का भंडार पिछले 5 साल के न्यूनतम स्तर पर है। सप्लाई बाधित होने से वैश्विक मंदी (Global Recession) आना तय है। 📊 युद्ध का प्रभाव: 11 दिनों की भयावहता (डेटा शीट) प्रभाव क्षेत्र विवरण वर्तमान स्थिति मानवीय क्षति (ईरान) तेहरान और अन्य शहर 1,200+ मौतें, 10,000+ घायल बच्चों की मौत ईरान सरकार का दावा 193 बच्चों की जान गई वायु रक्षा (बहरीन) इंटरसेप्ट की गई मिसाइलें 105 मिसाइलें, 176 ड्रोन रिफाइनरी हमला अबू धाबी (रुवैस कॉम्प्लेक्स) ड्रोन हमले से भीषण आग हवाई यातायात मिडिल ईस्ट एयरस्पेस इराक, ईरान, इजराइल, UAE बंद 3. रणनीतिक तैनाती: तुर्किये और दक्षिण कोरिया का रुख युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक फैल रही है: तुर्किये में पैट्रियट: तुर्किये ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए नाटो (NATO) के सहयोग से मालात्या शहर में MIM-104 पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। दक्षिण कोरिया की चिंता: दक्षिण कोरिया से अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम को युद्ध क्षेत्र में भेजने की खबरों से वहां तनाव है, हालांकि राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि वे अमेरिका को अपने हथियार ले जाने से नहीं रोक सकते। रूस को फायदा: यूरोपीय परिषद ने दावा किया है कि इस युद्ध से सबसे ज्यादा फायदा रूस को हो रहा है, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से उसकी आय बढ़ी है और दुनिया का ध्यान यूक्रेन से हट गया है। 4. ईरान की 'नो सीजफायर' पॉलिसी ईरान के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं: अली लारीजानी का जवाब: उन्होंने ट्रम्प को चेतावनी दी कि ईरान को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद मिट जाएंगे। ईरान ने किसी भी प्रकार के युद्धविराम (Ceasefire) से इनकार किया है। होर्मुज स्ट्रैट पर टैक्स: ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर 'सिक्योरिटी टैक्स' लगाने की योजना बना रहा है, ताकि अमेरिका के सहयोगियों पर दबाव बनाया जा सके।
⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025 — दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है। इस दिन शुभता, समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना की जाती है। आमतौर पर धनतेरस पर कई वस्तुएँ खरीदी जाती हैं — जैसे कि कौड़ी, कमलगट्टा, धनिया, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सोना-चांदी, और झाड़ू। लेकिन इस वर्ष का दिन विशेष राजनीति ग्रहों के संयोग के कारण कुछ वस्तुओं की खरीदारी को अनुकूल नहीं माना गया है। क्यों न करें आज झाड़ू और सरसों का तेल की खरीदारी? शनिवार का दिन इस वर्ष धनतेरस का दिन शनिवार को है। ज्योतिषीय मतानुसार शनिवार को झाड़ू खरीदना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यदि इसे ऐसे दिन खरीदा जाए, तो कहा जाता है कि लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है। सरसों का तेल सरसों का तेल शनि ( शनिदेव ) का प्रतीक माना जाता है। इस दिन इसे खरीदने का दृष्टिकोण नकारात्मक माना गया है — इसके बजाय कहा गया है कि यदि तेल की आवश्यकता हो, तो दान किया जाए। प्रदोष व्रत का महत्व इस दिन के साथ शनि प्रदोष व्रत भी है। इस दिन शाम को शनिदेव को दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही, महादेव की पूजा अर्चना करते समय काले तिल अर्पित करने से शनिदोष कम होता है। अन्य सुझाव व उपाय धनतेरस की खरीदारी को 午दोपहर 12:18 बजे से शुरू मानते हुए 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे तक खरीदी करना उपयुक्त माना गया है। लेकिन इस अवधि में भी झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए। जिन लोगों पर शनिदोष हो, वे इस दिन विशेष पूजा करें। यदि आज स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या कर्ज का बोझ हो, तो इस व्रत से लाभ मिलने की मान्यता है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”