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ट्रम्प का 'सेक्शन 301' प्रहार: भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ का खतरा और वैश्विक व्यापार युद्ध

अमेरिका का 'सेक्शन 301' प्रहार: वैश्विक व्यापार युद्ध और भारत पर इसके प्रभाव का संपूर्ण विश्लेषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। 'सेक्शन 301' के तहत शुरू की गई यह जांच केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह "अमेरिका फर्स्ट" नीति का एक आक्रामक विस्तार है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को इसके हर सूक्ष्म पहलू से समझते हैं। 1. पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प की रणनीति फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित कर दिया था। कोर्ट का तर्क था कि राष्ट्रपति के पास बिना ठोस आधार या विधायी स्पष्टता के इस तरह के एकतरफा टैक्स लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। इस झटके के बाद, ट्रम्प प्रशासन ने पीछे हटने के बजाय 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' के 'सेक्शन 301' का सहारा लिया है। यह एक ऐसा हथियार है जिसे कानूनी रूप से चुनौती देना कठिन है क्योंकि यह "अनुचित व्यापार व्यवहार" (Unfair Trade Practices) की जांच पर आधारित होता है। 2. 'सेक्शन 301' क्या है और यह क्यों खतरनाक है? यह कानून अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को किसी भी विदेशी देश की उन नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है जो: अमेरिकी वाणिज्य को बाधित करती हैं। अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं। अमेरिकी कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बनाती हैं। ताकत: इसके तहत अमेरिका बिना WTO (विश्व व्यापार संगठन) की अनुमति के सीधे जवाबी टैरिफ लगा सकता है। यह एक तरह की "आर्थिक दादागिरी" या "प्रोटेक्शनिज्म" (संरक्षणवाद) का उपकरण माना जाता है। 3. जांच के दायरे में आए 16 देश: एक तुलनात्मक अध्ययन ट्रम्प प्रशासन ने इस बार केवल चीन को निशाना नहीं बनाया है, बल्कि अपने मित्रों और सहयोगियों को भी रडार पर रखा है। श्रेणी देश मुख्य कारण महाशक्ति चीन भारी व्यापार अधिशेष और सब्सिडी रणनीतिक साझेदार भारत, जापान, दक्षिण कोरिया डिजिटल टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग नीतियां पड़ोसी मैक्सिको ऑटोमोबाइल डंपिंग और यूएसएमसीए उल्लंघन यूरोपीय गुट यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे कृषि सब्सिडी और स्टील विवाद दक्षिण-पूर्व एशिया वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, आदि डंपिंग और मुद्रा हेरफेर का संदेह 4. एक्सेस कैपेसिटी (अतिरिक्त क्षमता) का संकट: जूते वाली फैक्ट्री का गणित अमेरिका का सबसे बड़ा आरोप 'एक्सेस कैपेसिटी' पर है। इसे "स्टेट-स्पॉन्सर्ड डंपिंग" भी कहा जाता है। समस्या: चीन और भारत जैसे देश अपनी घरेलू जरूरतों से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता विकसित कर लेते हैं। प्रभाव: जब घरेलू मांग कम होती है, तो वे कंपनियां बंद न हों, इसके लिए सरकारें उन्हें सब्सिडी देती हैं। फिर यह माल वैश्विक बाजार (विशेषकर अमेरिका) में इतनी कम कीमत पर बेचा जाता है कि अमेरिकी स्थानीय कंपनियां दिवालिया होने लगती हैं। उदाहरण: स्टील, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 5. भारत की स्थिति: राहत या चिंता? भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है लेकिन चिंताजनक अधिक है। सकारात्मक: 2024 की तुलना में 2025 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा कम होकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया है। यह दर्शाता है कि भारत से आयात संतुलित हो रहा है। नकारात्मक: कमी के बावजूद, भारत 'टॉप 16' की सूची में है। अमेरिका को भारत की 'मेक इन इंडिया' सब्सिडी और कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में लगने वाले आयात शुल्क से आपत्ति है। यदि सेक्शन 301 के तहत भारत को "दोषी" माना गया, तो हमारे आईटी सेक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। 6. चीन: व्यापार युद्ध का केंद्र बिंदु चीन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2025 में चीन का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया है। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पूरी दुनिया में अपना माल डंप कर रहा है। 'सेक्शन 301' के जरिए चीन पर 60% से 100% तक टैरिफ लगाने की जमीन तैयार की जा रही है। 7. मानवाधिकार और व्यापार: 'फोर्स्ड लेबर' जांच USTR जेमिसन ग्रीर ने एक और मोर्चा खोला है—फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम)। यह जांच नैतिक आधार पर व्यापार को रोकने का प्रयास है। शिनजियांग (चीन) के बाद अब अमेरिका वियतनाम, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों के टेक्सटाइल उद्योगों की जांच कर सकता है। यदि किसी उत्पाद की सप्लाई चेन में बंधुआ मजदूरी का अंश मिला, तो उस पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है। 8. टाइमलाइन: गर्मियों में आएगा 'आर्थिक तूफान' 15 अप्रैल 2026: जनता और व्यापारिक समूहों से फीडबैक लेने की अंतिम तिथि। 5 मई 2026: सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing), जहाँ देश अपना पक्ष रखेंगे। जुलाई 2026: अस्थाई टैरिफ की समय सीमा समाप्त होगी और सेक्शन 301 के नए टैरिफ लागू हो सकते हैं। 9. निष्कर्ष और भविष्य की राह डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदलने वाला है। अमेरिका अब केवल व्यापार नहीं करना चाहता, वह अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता है। एक्सपोर्टर्स के लिए सुझाव: बाजार विविधीकरण (Diversification): केवल अमेरिका पर निर्भर न रहें, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी बाजारों की ओर देखें। अनुपालन (Compliance): अपनी फैक्ट्री में लेबर स्टैंडर्ड और सब्सिडी के कागजातों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखें। लागत प्रबंधन: जुलाई के बाद टैरिफ बढ़ने से आपकी कीमतें बढ़ेंगी, इसलिए अभी से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर विचार करें।

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BCCI Awards 2026: शुभमन गिल बनेंगे क्रिकेटर ऑफ द ईयर; राहुल द्रविड़ और मिताली राज को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड।

BCCI एनुअल अवॉर्ड्स 2026: शुभमन गिल बनेंगे 'क्रिकेटर ऑफ द ईयर'; राहुल द्रविड़ और मिताली राज को लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान नई दिल्ली | 12 मार्च 2026 भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) एक बार फिर भारतीय क्रिकेट के सितारों को उनके असाधारण प्रदर्शन के लिए सम्मानित करने जा रहा है। न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के अनुसार, 15 मार्च को दिल्ली में आयोजित होने वाले भव्य BCCI एनुअल अवॉर्ड प्रोग्राम में टीम इंडिया के वर्तमान टेस्ट और वनडे कप्तान शुभमन गिल को 'क्रिकेटर ऑफ द ईयर' (Polly Umrigar Award) से नवाजा जाएगा। वहीं, भारतीय क्रिकेट के 'द वॉल' कहे जाने वाले पूर्व हेड कोच राहुल द्रविड़ और महिला क्रिकेट की दिग्गज मिताली राज को उनकी खेल सेवाओं के लिए प्रतिष्ठित लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया जाएगा। यहाँ आगामी बीसीसीआई अवॉर्ड्स की विस्तृत रिपोर्ट और दिग्गजों की उपलब्धियों का लेखा-जोखा दिया गया है: 1. शुभमन गिल: साल 2025 के 'रन मशीन' शुभमन गिल के लिए पिछला साल (2025) सपनों जैसा रहा। तीनों फॉर्मेट में उनकी निरंतरता ने उन्हें इस शीर्ष पुरस्कार का हकदार बनाया: टेस्ट क्रिकेट में दबदबा: गिल ने टेस्ट में 983 रन बनाए। विशेष रूप से इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज में उन्होंने 70 की औसत से 754 रन ठोककर भारत की जीत सुनिश्चित की। वनडे और चैंपियंस ट्रॉफी: गिल ने वनडे में 490 रन बनाए और भारत को ICC चैंपियंस ट्रॉफी 2025 जिताने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कुल आंकड़े: सभी फॉर्मेट मिलाकर उन्होंने 49 की औसत से 1764 रन बनाए, जिसमें 7 शतक और 3 अर्धशतक शामिल रहे। 2. राहुल द्रविड़: कर्नल सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सम्मानित व्यक्तित्वों में से एक राहुल द्रविड़ को सर्वोच्च सम्मान मिलेगा: बतौर खिलाड़ी: द्रविड़ ने टेस्ट में 13,288 और वनडे में 10,889 रन बनाए। बतौर कोच: उनके मार्गदर्शन में भारत ने 2024 का टी-20 वर्ल्ड कप जीता और वनडे वर्ल्ड कप 2023 के फाइनल तक का सफर तय किया। मेंटरशिप: 2018 में उनकी कोचिंग में अंडर-19 टीम वर्ल्ड चैंपियन बनी थी, जिससे शुभमन गिल जैसे सितारे निकले। 3. मिताली राज: महिला क्रिकेट की 'आइकन' को सम्मान पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज को भी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा: 23 साल का सफर: 1999 में डेब्यू करने वाली मिताली ने 2022 तक क्रिकेट जगत पर राज किया। विश्व रिकॉर्ड: उनके नाम वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा 7805 रन दर्ज हैं। दोहरा शतक: टेस्ट क्रिकेट में 214 रन की पारी खेलकर वे दोहरा शतक लगाने वाली सबसे युवा महिला खिलाड़ी बनी थीं। 📊 बीसीसीआई एनुअल अवॉर्ड्स 2026: मुख्य सूची श्रेणी विजेता (संभावित) उपलब्धि क्रिकेटर ऑफ द ईयर शुभमन गिल सभी फॉर्मेट में 1764 रन (2025) लाइफटाइम अचीवमेंट (पुरुष) राहुल द्रविड़ टी-20 वर्ल्ड कप विजेता कोच लाइफटाइम अचीवमेंट (महिला) मिताली राज वनडे में सर्वाधिक रन का रिकॉर्ड लाला अमरनाथ अवॉर्ड आयुष म्हात्रे अंडर-19 वनडे वर्ल्ड कप विजेता कप्तान बेस्ट क्रिकेट एसोसिएशन मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन 4. आयुष म्हात्रे: युवा सनसनी को लाला अमरनाथ अवॉर्ड अंडर-19 टीम के कप्तान आयुष म्हात्रे को सर्वश्रेष्ठ जूनियर क्रिकेटर के लिए लाला अमरनाथ अवॉर्ड दिया जाएगा। उनकी कप्तानी में भारत ने इसी साल की शुरुआत में अंडर-19 वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था। म्हात्रे को भारतीय क्रिकेट का अगला उभरता हुआ सितारा माना जा रहा है। 5. दिल्ली में सजेगी सितारों की महफिल BCCI का यह कार्यक्रम 15 मार्च को दिल्ली में आयोजित होगा। हालांकि बीसीसीआई ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इन नामों की घोषणा नहीं की है, लेकिन सूत्रों के अनुसार लिस्ट फाइनल हो चुकी है। इस समारोह में वर्तमान खिलाड़ियों के साथ-साथ पूर्व दिग्गज भी शामिल होंगे।

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जम्मू में फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला; सिर पर तानी रिवॉल्वर, बाल-बाल बचे। हमलावर कमल सिंह 5 दिन की रिमांड पर।

फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला: शादी समारोह में सिर पर तानी रिवॉल्वर; सुरक्षाकर्मियों की मुस्तैदी से बाल-बाल बचे पूर्व CM, हमलावर गिरफ्तार जम्मू | 12 मार्च 2026 जम्मू-कश्मीर की राजनीति उस समय दहल गई जब नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष और तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला हुआ। हमलावर ने उनके सिर से महज कुछ इंच की दूरी पर रिवॉल्वर तानकर फायरिंग कर दी। गनीमत रही कि सुरक्षा में तैनात NSG और पुलिसकर्मियों ने बिजली की तेजी दिखाते हुए हमलावर का हाथ ऊपर कर दिया, जिससे गोली हवा में चली गई और फारूक अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए। यहाँ इस सनसनीखेज वारदात, सुरक्षा में चूक और हमलावर के कबूलनामे की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. वारदात का आंखों देखा हाल: "मुझे लगा पटाखा फूटा है" घटना जम्मू के एक नामी बैंकेट हॉल की है, जहाँ फारूक अब्दुल्ला और डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी एक शादी समारोह में शिरकत करने पहुँचे थे। अचानक फायरिंग: फारूक अब्दुल्ला जब समारोह से बाहर निकल रहे थे, तभी पीछे से आए एक व्यक्ति ने उन पर निशाना साधा। फारूक अब्दुल्ला का बयान: "ऊपर वाले ने मुझे बचा लिया। मैंने कुछ आवाज सुनी और मुझे लगा कि कोई पटाखा फटा है। बाद में पता चला कि एक शख्स ने मुझ पर दो गोलियां चलाने की कोशिश की थी। सुरक्षाकर्मियों ने उसका हाथ ऊपर कर दिया था।" CCTV फुटेज: घटना के सीसीटीवी फुटेज में साफ दिख रहा है कि हमलावर ने पीछे से आकर उनके सिर के पास पिस्टल तानी। सुरक्षाकर्मी ने तुरंत हमलावर की कोहनी पकड़कर हाथ ऊपर की ओर झटका दिया। 2. कौन है हमलावर? 20 साल पुराना 'मकसद' या नशे की सनक? पुलिस ने हमलावर को मौके से ही दबोच लिया। उसकी पहचान कमल सिंह जमवाल के रूप में हुई है। बदलते बयान: गिरफ्तारी के तुरंत बाद कमल ने दावा किया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था और यही उसकी जिंदगी का मकसद था। हालांकि, अगली सुबह उसने कहा कि "उससे गलती हो गई और उसे पछतावा है।" नशे में था आरोपी: शुरुआती जांच और मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, हमलावर वारदात के समय नशे की हालत में था। वह पेशे से बिजनेसमैन है और उसका लाइसेंसी हथियार पुलिस ने जब्त कर लिया है। रिश्तेदारी का कनेक्शन: चौंकाने वाली बात यह है कि हमलावर कमल सिंह, उस NC कार्यकर्ता (सुरजीत सिंह) का चचेरा भाई है, जिसकी शादी में फारूक अब्दुल्ला आए थे। 📊 फारूक अब्दुल्ला: राजनीतिक कद और सुरक्षा श्रेणी विवरण जानकारी राजनीतिक पद 3 बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री। सुरक्षा श्रेणी Z+ (NSG और स्थानीय पुलिस सुरक्षा) पार्टी जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (अध्यक्ष)। हमले का स्थान रॉयल पार्क, जम्मू (शादी समारोह)। हमलावर की स्थिति 5 दिन की पुलिस रिमांड पर। 3. सुरक्षा पर उठे सवाल: CM उमर अब्दुल्ला ने घेरा हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं: सुरक्षा में चूक: उमर ने सोशल मीडिया (X) पर लिखा— "एक शख्स लोडेड पिस्टल लेकर Z+ सुरक्षा प्राप्त पूर्व CM के इतने करीब कैसे पहुँच गया? यह एक बड़ी सुरक्षा चूक है।" स्थानीय पुलिस की अनुपस्थिति: डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय पुलिस का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं था, केवल फारूक अब्दुल्ला की निजी सुरक्षा टीम ही सक्रिय थी। 4. राजनीतिक प्रतिक्रिया: अमित शाह ने जाना हाल घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार भी अलर्ट मोड पर है: अमित शाह का फोन: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात की और उनका हालचाल जाना। उन्होंने घटना की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन: जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के हजारों कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने इसे "लोकतांत्रिक राजनीति पर हमला" करार दिया। 5. हमलावर के 6 चरणों वाली वारदात (तस्वीरों का सारांश) पीछा करना: कमल सिंह जमवाल भीड़ के बीच फारूक अब्दुल्ला के पीछे-पीछे चल रहा था। निशाना साधना: मौका मिलते ही उसने पॉइंट-ब्लैंक रेंज से सिर पर रिवॉल्वर तानी। सुरक्षाकर्मी की मुस्तैदी: NSG गार्ड ने गोली चलने से ठीक पहले हमलावर की कोहनी पकड़कर हाथ हवा में कर दिया। काबू पाना: सुरक्षाकर्मियों और भीड़ ने तुरंत आरोपी को जमीन पर गिरा दिया। भीड़ का गुस्सा: मौके पर मौजूद लोगों ने पुलिस के आने से पहले आरोपी की पिटाई भी की। कबूलनामा: आरोपी को थाने ले जाया गया जहाँ उसने मर्जी से गोली चलाने की बात स्वीकार की।

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LPG Crisis India: सरकार की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस; होर्मुज स्ट्रैट से 90% सप्लाई बाधित, पैनिक बुकिंग न करने की अपील।

ऊर्जा संकट पर सरकार का 'महा-मंथन': 60% LPG आयात पर युद्ध की मार; होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से सप्लाई चेन ध्वस्त, कालाबाजारी पर सख्त एक्शन की तैयारी नई दिल्ली | 12 मार्च 2026 मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग ने भारत की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है। देश में गहराते LPG और कच्चे तेल के संकट को लेकर गुरुवार को भारत सरकार के चार प्रमुख मंत्रालयों— विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम और सूचना प्रसारण ने एक ऐतिहासिक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत की 90% गैस सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है, जो युद्ध के कारण फिलहाल 'डेड ज़ोन' बन चुका है। यहाँ इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की मुख्य बातों और मंत्रालयों द्वारा उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. पेट्रोलियम मंत्रालय: डिमांड-सप्लाई मैनेजमेंट और पैनिक बुकिंग पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देश को भरोसा दिलाने की कोशिश की: घरेलू उत्पादन में वृद्धि: सरकार ने सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे LPG उत्पादन को अपनी अधिकतम क्षमता तक ले जाएं। इसके परिणामस्वरूप घरेलू उत्पादन 25% से बढ़कर 28% हो गया है। केरोसिन का अतिरिक्त कोटा: ग्रामीण और जरूरतमंद इलाकों के लिए राज्यों को 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन जारी किया गया है। पैनिक बुकिंग पर रोक: देश में रोजाना 50 लाख सिलेंडर डिलीवर होते हैं, लेकिन युद्ध के डर से बुकिंग कई गुना बढ़ गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि पैनिक बुकिंग ही किल्लत की असली वजह बन रही है। कमर्शियल सिलेंडर: दिल्ली जैसे महानगरों में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिले। 2. शिपिंग मंत्रालय: समुद्र में फंसे भारतीय और दुखद खबरें शिपिंग मंत्रालय के अधिकारी राजेश कुमार सिन्हा ने पर्शियन गल्फ में फंसे नाविकों का डेटा साझा किया: नाविकों की सुरक्षा: वर्तमान में 28 भारतीय जहाज गल्फ क्षेत्र में हैं, जिनमें 778 भारतीय नाविक सवार हैं। सरकार सैटेलाइट के जरिए हर मिनट उनकी लोकेशन ट्रैक कर रही है। दुखद हादसे: युद्ध क्षेत्र में विदेशी झंडे वाले जहाजों पर हुए हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और एक अब भी लापता है। 'स्कायलाइट' और 'एमकेडी व्योम' नाम के जहाजों को निशाना बनाया गया था। 3. विदेश मंत्रालय: सुरक्षित निकासी का 'आर्मेनिया-अजरबैजान' रूट MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ईरान में फंसे 9,000 भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की: वैकल्पिक एग्जिट: क्योंकि ईरान का हवाई क्षेत्र असुरक्षित है, इसलिए भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान की जमीनी सीमा पार करने में दूतावास मदद कर रहा है। वहां से वे कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिए भारत आ सकते हैं। दूतावास की मदद: तेहरान में भारतीय दूतावास 24/7 वीजा और लॉजिस्टिक सहायता प्रदान कर रहा है। 📊 सप्लाई संकट के 2 सबसे बड़े कारण कारण प्रभाव वर्तमान स्थिति होर्मुज स्ट्रैट (167 किमी) 54% LNG इसी रास्ते से आती है। युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद। कतर का प्लांट शटडाउन भारत 40% LNG कतर से लेता है। ईरानी ड्रोन हमलों के डर से कतर ने प्रोडक्शन रोका। 4. कालाबाजारी: ₹900 का सिलेंडर ₹1800 में युद्ध की आड़ में घरेलू स्तर पर जमाखोरी और कालाबाजारी शुरू हो गई है। दोगुनी कीमतें: कुछ राज्यों में ₹900 का सिलेंडर ₹1800 तक बिकने की खबरें हैं। सरकार का एक्शन: केंद्र ने राज्यों को Essential Commodities Act (अनिवार्य वस्तु अधिनियम) के तहत कार्रवाई करने और जिला कलेक्टरों को गैस एजेंसियों के औचक निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। 5. कब तक सुधरेंगे हालात? (भविष्य की रणनीति) इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक के.एम. ठाकुर के अनुसार, सरकार 'प्लान-बी' पर काम कर रही है: वैकल्पिक कार्गो: अमेरिका, अल्जीरिया और रूस से अतिरिक्त तेल और गैस मंगाने के लिए टेंडर जारी किए जा रहे हैं। G7 देशों की मदद: विकसित देश अपने 'इमरजेंसी ऑयल रिजर्व' से तेल छोड़ने पर विचार कर रहे हैं ताकि वैश्विक कीमतें स्थिर हो सकें। स्ट्रीमलाइनिंग डिलीवरी: राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे लाभार्थियों की सूची तैयार करें ताकि सिलेंडर की 'राशनिंग' की जा सके और जरूरतमंदों को प्राथमिकता मिले।

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भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका
विदेश
ट्रम्प का 'सेक्शन 301' प्रहार: भारत समेत 16 देशों पर टैरिफ का खतरा और वैश्विक व्यापार युद्ध

अमेरिका का 'सेक्शन 301' प्रहार: वैश्विक व्यापार युद्ध और भारत पर इसके प्रभाव का संपूर्ण विश्लेषण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने एक बार फिर वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। 'सेक्शन 301' के तहत शुरू की गई यह जांच केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह "अमेरिका फर्स्ट" नीति का एक आक्रामक विस्तार है। आइए इस पूरे घटनाक्रम को इसके हर सूक्ष्म पहलू से समझते हैं। 1. पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और ट्रम्प की रणनीति फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को 'अवैध' घोषित कर दिया था। कोर्ट का तर्क था कि राष्ट्रपति के पास बिना ठोस आधार या विधायी स्पष्टता के इस तरह के एकतरफा टैक्स लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। इस झटके के बाद, ट्रम्प प्रशासन ने पीछे हटने के बजाय 'ट्रेड एक्ट ऑफ 1974' के 'सेक्शन 301' का सहारा लिया है। यह एक ऐसा हथियार है जिसे कानूनी रूप से चुनौती देना कठिन है क्योंकि यह "अनुचित व्यापार व्यवहार" (Unfair Trade Practices) की जांच पर आधारित होता है। 2. 'सेक्शन 301' क्या है और यह क्यों खतरनाक है? यह कानून अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) को किसी भी विदेशी देश की उन नीतियों की जांच करने का अधिकार देता है जो: अमेरिकी वाणिज्य को बाधित करती हैं। अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं। अमेरिकी कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल बनाती हैं। ताकत: इसके तहत अमेरिका बिना WTO (विश्व व्यापार संगठन) की अनुमति के सीधे जवाबी टैरिफ लगा सकता है। यह एक तरह की "आर्थिक दादागिरी" या "प्रोटेक्शनिज्म" (संरक्षणवाद) का उपकरण माना जाता है। 3. जांच के दायरे में आए 16 देश: एक तुलनात्मक अध्ययन ट्रम्प प्रशासन ने इस बार केवल चीन को निशाना नहीं बनाया है, बल्कि अपने मित्रों और सहयोगियों को भी रडार पर रखा है। श्रेणी देश मुख्य कारण महाशक्ति चीन भारी व्यापार अधिशेष और सब्सिडी रणनीतिक साझेदार भारत, जापान, दक्षिण कोरिया डिजिटल टैक्स और मैन्युफैक्चरिंग नीतियां पड़ोसी मैक्सिको ऑटोमोबाइल डंपिंग और यूएसएमसीए उल्लंघन यूरोपीय गुट यूरोपीय संघ, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे कृषि सब्सिडी और स्टील विवाद दक्षिण-पूर्व एशिया वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, आदि डंपिंग और मुद्रा हेरफेर का संदेह 4. एक्सेस कैपेसिटी (अतिरिक्त क्षमता) का संकट: जूते वाली फैक्ट्री का गणित अमेरिका का सबसे बड़ा आरोप 'एक्सेस कैपेसिटी' पर है। इसे "स्टेट-स्पॉन्सर्ड डंपिंग" भी कहा जाता है। समस्या: चीन और भारत जैसे देश अपनी घरेलू जरूरतों से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता विकसित कर लेते हैं। प्रभाव: जब घरेलू मांग कम होती है, तो वे कंपनियां बंद न हों, इसके लिए सरकारें उन्हें सब्सिडी देती हैं। फिर यह माल वैश्विक बाजार (विशेषकर अमेरिका) में इतनी कम कीमत पर बेचा जाता है कि अमेरिकी स्थानीय कंपनियां दिवालिया होने लगती हैं। उदाहरण: स्टील, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। 5. भारत की स्थिति: राहत या चिंता? भारत के लिए यह खबर मिली-जुली है लेकिन चिंताजनक अधिक है। सकारात्मक: 2024 की तुलना में 2025 में अमेरिका के साथ भारत का व्यापार घाटा कम होकर 45,801 मिलियन डॉलर रह गया है। यह दर्शाता है कि भारत से आयात संतुलित हो रहा है। नकारात्मक: कमी के बावजूद, भारत 'टॉप 16' की सूची में है। अमेरिका को भारत की 'मेक इन इंडिया' सब्सिडी और कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में लगने वाले आयात शुल्क से आपत्ति है। यदि सेक्शन 301 के तहत भारत को "दोषी" माना गया, तो हमारे आईटी सेक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। 6. चीन: व्यापार युद्ध का केंद्र बिंदु चीन के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2025 में चीन का व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया है। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पूरी दुनिया में अपना माल डंप कर रहा है। 'सेक्शन 301' के जरिए चीन पर 60% से 100% तक टैरिफ लगाने की जमीन तैयार की जा रही है। 7. मानवाधिकार और व्यापार: 'फोर्स्ड लेबर' जांच USTR जेमिसन ग्रीर ने एक और मोर्चा खोला है—फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम)। यह जांच नैतिक आधार पर व्यापार को रोकने का प्रयास है। शिनजियांग (चीन) के बाद अब अमेरिका वियतनाम, बांग्लादेश और कंबोडिया जैसे देशों के टेक्सटाइल उद्योगों की जांच कर सकता है। यदि किसी उत्पाद की सप्लाई चेन में बंधुआ मजदूरी का अंश मिला, तो उस पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है। 8. टाइमलाइन: गर्मियों में आएगा 'आर्थिक तूफान' 15 अप्रैल 2026: जनता और व्यापारिक समूहों से फीडबैक लेने की अंतिम तिथि। 5 मई 2026: सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearing), जहाँ देश अपना पक्ष रखेंगे। जुलाई 2026: अस्थाई टैरिफ की समय सीमा समाप्त होगी और सेक्शन 301 के नए टैरिफ लागू हो सकते हैं। 9. निष्कर्ष और भविष्य की राह डोनाल्ड ट्रम्प का यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदलने वाला है। अमेरिका अब केवल व्यापार नहीं करना चाहता, वह अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहता है। एक्सपोर्टर्स के लिए सुझाव: बाजार विविधीकरण (Diversification): केवल अमेरिका पर निर्भर न रहें, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी बाजारों की ओर देखें। अनुपालन (Compliance): अपनी फैक्ट्री में लेबर स्टैंडर्ड और सब्सिडी के कागजातों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रखें। लागत प्रबंधन: जुलाई के बाद टैरिफ बढ़ने से आपकी कीमतें बढ़ेंगी, इसलिए अभी से फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर विचार करें।

रवि चौहान मार्च 12, 2026 0
Photo:PIXABAY
Festive Shopping 2025: भारतीय उपभोक्ता बदलते अंदाज़ में कर रहे खरीदारी

नई दिल्ली, 2025 – 2025 के त्योहारी सीजन में बाजार में रौनक पहले जैसी तो है, लेकिन खरीदारी करने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उपभोक्ता अब वैल्यू फॉर मनी, लॉन्ग टर्म यूटिलिटी और फाइनेंशियल प्लानिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। चाहे फैशन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स या होम डेकोर — हर क्षेत्र में यह ट्रेंड साफ दिख रहा है कि खरीदार अब जागरूक और जिम्मेदार हो गए हैं। खरीदारी पहले से शुरू भारतीय उपभोक्ताओं ने इस बार अपनी खरीदारी साल के पहले ही शुरू कर दी, जो पारंपरिक आखिरी मिनट की खरीदारी से अलग है। रिटेलर्स और ब्रांड्स अब लंबी एंगेजमेंट विंडो देख रहे हैं, जिससे खरीदार आराम से उत्पाद देख, तुलना कर और खरीद सकते हैं। खरीदारी अब सामूहिक अनुभव बन गई है; परिवार के सदस्य चर्चा और निर्णय में शामिल होते हैं। फेस्टिव शॉपिंग में कौन से सेक्टर हैं आगे अपैरल (वस्त्र) लगभग 63% खरीदार नए कपड़े खरीद रहे हैं। एथनिक वियर, समकालीन फ़्यूज़न स्टाइल और हस्तनिर्मित वस्त्र सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। ब्यूटी और वेलनेस कुल खरीदारी का 42% हिस्सा ब्यूटी और वेलनेस का है। प्राकृतिक स्किनकेयर, आयुर्वेदिक वेलनेस और प्रीमियम पर्सनल केयर ब्रांड विशेष रूप से लोकप्रिय। होम डेकोर लगभग 40% खरीदार घर में त्योहारी माहौल बनाने के लिए होम डेकोर पर फोकस कर रहे हैं। मोबाइल और ऑनलाइन शॉपिंग का बढ़ता रुझान 43% उपभोक्ता साप्ताहिक रूप से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट के माध्यम से खरीदारी कर रहे हैं। 64% खरीदार पूरी त्योहारी खरीदारी ऑनलाइन करते हैं, भौतिक दुकानों से बचते हैं। AI का इस्तेमाल और पर्सनलाइजेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उपभोक्ताओं को व्यक्तिगत खरीदारी अनुभव दे रहा है। ब्रांड्स खरीदारों को उनकी प्राथमिकताओं, ब्राउज़िंग इतिहास और ट्रेंड्स के आधार पर अनुकूलित सुझाव दे रहे हैं। पारंपरिक ब्राउज़िंग अब आकर्षक और सहज यात्रा में बदल चुकी है। परंपरा और इनोवेशन का संगम भारतीय त्योहारी खरीदारी अब सिर्फ वस्तुओं तक सीमित नहीं; यह अनुभव, जुड़ाव और सांस्कृतिक पहचान का माध्यम बन गई है। आधुनिकता और परंपरा का संतुलित मिश्रण उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से जुड़ने और खरीदारी का आनंद लेने की प्रेरणा देता है।

जैसलमेर में बड़ा हादसा ( फोटो क्रेडिट NDTV )
जैसलमेर में बड़ा हादसाǃ स्लीपर बस में लगी आग‚ दरवाजा नही खुलने से जिंदा जले 21 यात्री

राजस्थान। Jaisalmer से Jodhpur जा रही एक प्राइवेट बस में मंगलवार को भीषण आग लग गई। इस हादसे में 21 यात्रियों की जिंदा जलने से मौत हो गई। मरने वालों में कई छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसा Jaisalmer–Jodhpur Highway पर हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस मोडिफाइड थी और उसकी बॉडी में एक्स्ट्रा क्लोथिंग व फाइबर लगाए गए थे, जो अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री है। यही कारण था कि आग कुछ ही मिनटों में पूरी बस में फैल गई और यात्रियों को भागने का मौका तक नहीं मिल पाया।   🔥 दरवाजे नहीं खुले, कई यात्री बाहर नहीं निकल सके   बस में कोई अतिरिक्त दरवाजा नहीं था। आग लगने के बाद दरवाजा नहीं खुला और यात्री अंदर फंस गए। कुछ यात्रियों ने खिड़की तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की और अपनी जान बचाई। बाद में राहतकर्मियों ने जेसीबी की मदद से बस का दरवाजा तोड़ा।   💥 डिग्गी में पटाखे रखे होने का शक   खबरों के मुताबिक बस की डिग्गी में पटाखे रखे होने की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बस में आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर पहुंचने में करीब 50 मिनट लग गए। तब तक बस पूरी तरह जलकर खाक हो चुकी थी।   🏥 ग्रीन कॉरिडोर बनाकर मरीजों को जोधपुर भेजा गया   जैसलमेर में बर्न आईसीयू न होने के कारण घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर जोधपुर रेफर किया गया। 16 गंभीर रूप से झुलसे यात्रियों को इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया। स्थानीय लोगों, सेना के जवानों और राहतकर्मियों ने मिलकर बचाव कार्य किया।   🕯️ 21 यात्रियों की दर्दनाक मौत   पोकरण से भाजपा विधायक प्रताप पुरी ने बताया कि हादसे में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और एक यात्री ने जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। यह हादसा बस के रवाना होने के लगभग 10 मिनट बाद ही हुआ।   🚒 सीएम पहुंचे घटनास्थल पर   हादसे की जानकारी मिलते ही Bhajanlal Sharma मंगलवार रात ही जैसलमेर पहुंचे। जिला प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया और चिकित्सा सुविधाओं के साथ हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया। बस अग्निकांड हादसे में सरकार ने एक्शन लिया है। हादसे का शिकार हुई बस की बॉडी को चित्तौड़गढ़ में परिवहन विभाग ने अप्रूव किया था। बस बॉडी को अप्रूव करने वाले चित्तौड़गढ़ के कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नी लाल को सस्पेंड कर दिया है। इधर, मंगलवार देर रात पहली FIR दर्ज हुई। हादसे का शिकार हुए पत्रकार राजेंद्र चौहान के भाई ने बस मालिक और ड्राइवर के खिलाफ जैसलमेर के सदर थाने में केस दर्ज कराया। इधर अग्निकांड में मृतकों की संख्या 22 हो गई है। हादसे में झुलसे 10 साल के यूनुस ने बुधवार सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार 4 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। 

अमेरिका बोला- आज ईरान पर सबसे बड़े हमले होंगे
Israel-Iran War Day 11: अमेरिका की ईरान को 'महा-हमले' की धमकी; होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से वैश्विक तेल संकट, $116 पहुँचा कच्चा तेल।

मिडल ईस्ट महाजंग Day 11: ईरान पर आज होगा 'सबसे भीषण' हमला; अमेरिकी रक्षा मंत्री की चेतावनी— "तेहरान को मिटाने की तैयारी", 116 डॉलर के पार पहुँचा कच्चा तेल तेहरान/वॉशिंगटन/दुबई | 10 मार्च 2026 अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब अपने सबसे निर्णायक और विनाशकारी मोड़ पर पहुँच गया है। आज जंग का 11वां दिन है और दुनिया की सांसें थमी हुई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ऐलान किया है कि मंगलवार को ईरान पर "इतिहास का सबसे तीव्र हवाई हमला" किया जाएगा। इस बीच, खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई रुकने के कारण दुनिया भर में हाहाकार मचा हुआ है। यहाँ 11वें दिन की युद्ध स्थिति, वैश्विक ऊर्जा संकट और राजनीतिक बयानबाजी की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है: 1. वॉर रूम अपडेट: "ईरान पर आज होगा महाप्रलय" अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने 'ऑपरेशन थंडरबोल्ट' के अगले चरण की घोषणा की है: सबसे बड़ा हमला: रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक, आज मंगलवार को ईरान के सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होगा। इसमें B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर्स और अत्याधुनिक फाइटर जेट्स की लहरें शामिल होंगी। ईरान का पलटवार: ईरान ने सोमवार रात इजराइल पर 1 टन वारहेड वाली मिसाइलें दागकर अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। साथ ही, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ट्रम्प की चेतावनी: डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रैट (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो अमेरिका ईरान के उन ठिकानों को मिटा देगा जिन्हें दोबारा बनाना असंभव होगा। 2. ऊर्जा संकट: तेल की किल्लत से दुनिया में मची 'इमरजेंसी' ईरान-इजराइल युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले 'ऊर्जा क्षेत्र' को पंगु बना दिया है: भारत पर असर: भारत अपनी 59% LNG कतर और UAE से खरीदता है। होर्मुज स्ट्रैट बंद होने से सप्लाई रुक गई है, जिससे देश में महंगाई और ईंधन की कमी का खतरा बढ़ गया है। अब तक 52,000 भारतीय सुरक्षित वतन लौट चुके हैं। पाकिस्तान और अन्य देश: पाकिस्तान में मंत्रियों की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई है और स्कूल 2 हफ्ते के लिए बंद हैं। थाईलैंड में लोगों को लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने और 'वर्क फ्रॉम होम' करने को कहा गया है। सऊदी अरामको की चेतावनी: दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने कहा है कि दुनिया में तेल का भंडार पिछले 5 साल के न्यूनतम स्तर पर है। सप्लाई बाधित होने से वैश्विक मंदी (Global Recession) आना तय है। 📊 युद्ध का प्रभाव: 11 दिनों की भयावहता (डेटा शीट) प्रभाव क्षेत्र विवरण वर्तमान स्थिति मानवीय क्षति (ईरान) तेहरान और अन्य शहर 1,200+ मौतें, 10,000+ घायल बच्चों की मौत ईरान सरकार का दावा 193 बच्चों की जान गई वायु रक्षा (बहरीन) इंटरसेप्ट की गई मिसाइलें 105 मिसाइलें, 176 ड्रोन रिफाइनरी हमला अबू धाबी (रुवैस कॉम्प्लेक्स) ड्रोन हमले से भीषण आग हवाई यातायात मिडिल ईस्ट एयरस्पेस इराक, ईरान, इजराइल, UAE बंद 3. रणनीतिक तैनाती: तुर्किये और दक्षिण कोरिया का रुख युद्ध की आग अब पड़ोसी देशों तक फैल रही है: तुर्किये में पैट्रियट: तुर्किये ने अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए नाटो (NATO) के सहयोग से मालात्या शहर में MIM-104 पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। दक्षिण कोरिया की चिंता: दक्षिण कोरिया से अमेरिकी पैट्रियट सिस्टम को युद्ध क्षेत्र में भेजने की खबरों से वहां तनाव है, हालांकि राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने कहा है कि वे अमेरिका को अपने हथियार ले जाने से नहीं रोक सकते। रूस को फायदा: यूरोपीय परिषद ने दावा किया है कि इस युद्ध से सबसे ज्यादा फायदा रूस को हो रहा है, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से उसकी आय बढ़ी है और दुनिया का ध्यान यूक्रेन से हट गया है। 4. ईरान की 'नो सीजफायर' पॉलिसी ईरान के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं: अली लारीजानी का जवाब: उन्होंने ट्रम्प को चेतावनी दी कि ईरान को मिटाने की कोशिश करने वाले खुद मिट जाएंगे। ईरान ने किसी भी प्रकार के युद्धविराम (Ceasefire) से इनकार किया है। होर्मुज स्ट्रैट पर टैक्स: ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर 'सिक्योरिटी टैक्स' लगाने की योजना बना रहा है, ताकि अमेरिका के सहयोगियों पर दबाव बनाया जा सके।

Shaheen Malik Case: 16 साल का इंतज़ार, 25 सर्जरी और अंत में आरोपियों की रिहाई
Shaheen Malik Case: 16 साल का इंतज़ार, 25 सर्जरी और अंत में आरोपियों की रिहाई; शाहीन मलिक ने कहा- 'सिस्टम ने मुझे तोड़ दिया'

⚖️ 'न्याय व्यवस्था ने मुझे मार दिया': एसिड अटैक पीड़िता शाहीन मलिक की 16 साल लंबी जंग और सिस्टम की हार 1. 🥀 एक पल में राख हो गई दुनिया: 2009 का वो काला दिन 2009 में शाहीन मलिक महज़ 26 साल की थीं। वे दिल्ली के एक रूढ़िवादी परिवार की बंदिशों को तोड़कर हरियाणा के पानीपत पहुंची थीं। वहां वे एमबीए कर रही थीं और एक कॉलेज में स्टूडेंट काउंसलर के रूप में काम कर रही थीं। उनके सपने बड़े थे, लेकिन उनके सहकर्मियों की ईर्ष्या ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी। ऑफिस के बाहर उन पर तेजाब फेंका गया। शाहीन को आज भी उस लिक्विड का रंग याद है—उन्हें लगा शायद कोई मज़ाक है, लेकिन कुछ ही पलों में उठने वाली असहनीय जलन ने उनके चेहरे, आंखों और भविष्य को झुलसा दिया। 2. 🏥 25 सर्जरी और एक आंख की रोशनी: दर्द का कभी न खत्म होने वाला सिलसिला हमले के बाद शाहीन की पूरी उम्र अस्पतालों और सर्जरी के नाम हो गई। चेहरे को दोबारा जोड़ने की कोशिश में उन्होंने 25 से ज्यादा बड़ी सर्जरी करवाईं। उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। लेकिन इस शारीरिक दर्द से ज्यादा उन्हें जो शक्ति दे रही थी, वह थी न्याय की उम्मीद। शाहीन का मानना था कि भले ही उनका चेहरा बदल गया हो, लेकिन जिस दिन कोर्ट दोषियों को सजा सुनाएगा, उस दिन वे फिर से जी उठेंगी। 3. 🏛️ रोहिणी कोर्ट का झटका: 16 साल बाद आरोपी बरी बुधवार को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट (अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जगमोहन सिंह) ने 2009 के इस मामले में तीन मुख्य आरोपियों—यशविंदर, बाला और मनदीप मान को 'सबूतों के अभाव' में बरी कर दिया। अदालत ने माना कि घटना दुखद है, लेकिन साजिश रचने के ठोस सबूत पेश नहीं किए जा सके। इस फैसले ने शाहीन को तोड़ दिया। 42 साल की शाहीन ने सिसकते हुए कहा, "मैं हार गई, इसलिए नहीं कि मुझ पर हमला हुआ, बल्कि इसलिए कि सिस्टम न्याय नहीं दे सका।" 4. 🕯️ दूसरों की रोशनी बनीं शाहीन: 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' शाहीन ने अपने दर्द को अपनी ताकत बनाया। 2021 में उन्होंने 'ब्रेव सोल्स फाउंडेशन' की शुरुआत की और ‘अपना घर’ नाम का शेल्टर होम बनाया। इसके जरिए उन्होंने 300 से ज्यादा एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद की। उन्हें मुआवजा दिलाया, उनकी सर्जरी कराई और उन्हें जीना सिखाया। लेकिन आज वही सर्वाइवर्स उनसे पूछ रही हैं—"दीदी, अगर आपको 16 साल बाद भी न्याय नहीं मिला, तो हमारी क्या उम्मीद है?" शाहीन के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है। 5. ✊ हिम्मत अभी बाकी है: हाई कोर्ट में अपील की तैयारी शाहीन कहती हैं कि जो लोग इस दर्द को कभी नहीं झेलते, वे फाइलों के आधार पर हमारे जीवन का फैसला कर देते हैं। न्याय व्यवस्था की इस संवेदनहीनता के बावजूद, शाहीन ने हार नहीं मानी है। उन्होंने घोषणा की है कि वे इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील करेंगी। वह टूटे हुए दिल के साथ एक बार फिर से 'सच' और 'सिस्टम' के बीच की जंग लड़ने के लिए तैयार हैं।

मां लक्ष्मी
धनतेरस आजǃ भूलकर भी ना खरीदें ये चीज़ें, नहीं तो नाराज हो सकती हैं मां लक्ष्मी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2025 — दिवाली के पावन पर्व की शुरुआत धनतेरस के दिन होती है। इस दिन शुभता, समृद्धि और मां लक्ष्मी की कृपा की कामना की जाती है। आमतौर पर धनतेरस पर कई वस्तुएँ खरीदी जाती हैं — जैसे कि कौड़ी, कमलगट्टा, धनिया, गोमती चक्र, हल्दी की गांठ, सोना-चांदी, और झाड़ू। लेकिन इस वर्ष का दिन विशेष राजनीति ग्रहों के संयोग के कारण कुछ वस्तुओं की खरीदारी को अनुकूल नहीं माना गया है।    क्यों न करें आज झाड़ू और सरसों का तेल की खरीदारी?   शनिवार का दिन इस वर्ष धनतेरस का दिन शनिवार को है। ज्योतिषीय मतानुसार शनिवार को झाड़ू खरीदना अशुभ माना जाता है, क्योंकि इसे देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यदि इसे ऐसे दिन खरीदा जाए, तो कहा जाता है कि लक्ष्मी जी नाराज हो सकती हैं और घर की समृद्धि प्रभावित हो सकती है।  सरसों का तेल सरसों का तेल शनि ( शनिदेव ) का प्रतीक माना जाता है। इस दिन इसे खरीदने का दृष्टिकोण नकारात्मक माना गया है — इसके बजाय कहा गया है कि यदि तेल की आवश्यकता हो, तो दान किया जाए।  प्रदोष व्रत का महत्व इस दिन के साथ शनि प्रदोष व्रत भी है। इस दिन शाम को शनिदेव को दीप अर्पित करना शुभ माना गया है। साथ ही, महादेव की पूजा अर्चना करते समय काले तिल अर्पित करने से शनिदोष कम होता है।    अन्य सुझाव व उपाय   धनतेरस की खरीदारी को 午दोपहर 12:18 बजे से शुरू मानते हुए 19 अक्टूबर की दोपहर 1:51 बजे तक खरीदी करना उपयुक्त माना गया है। लेकिन इस अवधि में भी झाड़ू और सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए।  जिन लोगों पर शनिदोष हो, वे इस दिन विशेष पूजा करें। यदि आज स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या कर्ज का बोझ हो, तो इस व्रत से लाभ मिलने की मान्यता है।

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मेहराज और उसकी पत्नी नसीमन
“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

अक्टूबर 11, 2025

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