पूर्व IG अमर सिंह चहल का सुसाइड अटेम्प्ट: 8.1 करोड़ की साइबर ठगी और 12 पन्नों का दर्दनाक सुसाइड नोट 1. 🚨 घटनाक्रम: सुरक्षाकर्मी की रिवॉल्वर से पेट में मारी गोली रिटायर्ड आईजी अमर सिंह चहल पटियाला में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। मानसिक तनाव के चरम पर पहुंचने के बाद उन्होंने अपने ही सुरक्षाकर्मी की रिवॉल्वर ली और पेट में गोली मार ली। तत्काल उपचार: घटना के वक्त उनका बेटा घर पर ही था। उन्हें तुरंत पटियाला के पार्क अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी सर्जरी की। पूर्व ADGP गुरिंदर सिंह ढिल्लों के अनुसार, फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, लेकिन रिकवरी में लंबा समय लगेगा। 2. 📄 12 पन्नों का 'डिजिटल डेथ वारंट': सुसाइड नोट के खुलासे रिटायर्ड अधिकारी ने खुदकुशी की कोशिश से पहले DGP गौरव यादव को संबोधित करते हुए एक विस्तृत सुसाइड नोट लिखा। इसमें उन्होंने 8.10 करोड़ रुपए के ऑनलाइन फ्रॉड की पूरी कहानी बयां की है: फेक 'DBS बैंक' नेटवर्क: ठगों ने वॉट्सएप और टेलीग्राम पर एक ग्रुप बनाया था, जिसमें खुद को सरकारी मान्यता प्राप्त और SEBI से अधिकृत बताया गया। CEO का फर्जी अवतार: एक ठग ने खुद को DBS बैंक का CEO डॉ. रजत वर्मा बताया और बकायदा उनकी फोटो लगाकर रोजाना शेयर बाजार और IPO के टिप्स देने शुरू किए। नकली डैशबोर्ड: चहल को एक फर्जी ऑनलाइन डैशबोर्ड दिया गया, जिस पर निवेश की गई रकम और उस पर मिलने वाला भारी मुनाफा (30% से 50%) दिखाया जाता था। यह महज एक डिजिटल छलावा था। उगाही का जाल: जब चहल ने अपना पैसा निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने सर्विस फीस और टैक्स के नाम पर उनसे 2.25 करोड़ रुपए और वसूल लिए। 3. 💸 उधारी का बोझ और मानसिक अवसाद सुसाइड नोट में सबसे दुखद पहलू यह है कि ठगे गए 8.10 करोड़ रुपयों में से लगभग 7 करोड़ रुपए चहल ने दूसरों से उधार लिए थे। DGP से गुहार: उन्होंने पंजाब पुलिस प्रमुख से मांग की है कि इस मामले की जांच SIT या CBI से करवाई जाए। अंतिम इच्छा: उन्होंने लिखा कि वह गहरे अवसाद में हैं और उनके परिवार को सुरक्षा दी जाए। साथ ही, उन्होंने उधार देने वालों से राहत और ठगों से पैसा वापस दिलाने की मार्मिक अपील की है। 4. ⚖️ बहबल कलां गोलीकांड का इतिहास अमर सिंह चहल का नाम विवादों से भी जुड़ा रहा है। वे 2015 के बहबल कलां और कोटकपूरा गोलीकांड मामले में नामजद आरोपी हैं। 2023 में दाखिल चार्जशीट में प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर सिंह बादल के साथ उनका नाम भी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की सूची में शामिल था।
🚨 जालंधर रेलवे स्टेशन पर 'DSP मामा' बनाम 'कानून सबके लिए बराबर': कार चेकिंग को लेकर महिला और युवक के बीच 10 मिनट का हाई-वोल्टेज विवाद पंजाब के जालंधर रेलवे स्टेशन पर मंगलवार को एक साधारण कार चेकिंग का मामला देखते ही देखते VIP कल्चर बनाम जनता के अधिकार के बीच एक हाई-वोल्टेज टकराव में बदल गया। पुलिस स्टेशन परिसर में एक वाहन की सामान्य जाँच कर रही थी, लेकिन इस दौरान एक महिला और एक स्थानीय युवक के बीच हुई तीखी बहस ने लगभग 10 मिनट तक माहौल को हंगामेदार बनाए रखा। इस पूरे विवाद का केंद्र महिला द्वारा दी गई "मेरा मामा DSP है" वाली धमकी और युवक का "कानून सबके लिए बराबर है" वाला अडिग जवाब था। यह घटना न केवल सार्वजनिक स्थानों पर नागरिक अधिकारों की सीमाएँ निर्धारित करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे 'पहचान' और 'रसूख' का इस्तेमाल आज भी भारतीय समाज में साधारण कानूनी प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता है। इस विवाद ने कई गंभीर प्रश्न खड़े किए: क्या एक नागरिक को सार्वजनिक स्थान पर हो रही सरकारी कार्रवाई (पुलिस चेकिंग) का वीडियो बनाने का अधिकार है? क्या पुलिस कार्रवाई के दौरान किसी रसूखदार रिश्तेदार का नाम लेना जांच को रोक सकता है? और सबसे महत्वपूर्ण, क्या कानून के सामने वीआईपी और आम जनता के बीच वास्तव में कोई अंतर है? इस विस्तृत आलेख में जालंधर रेलवे स्टेशन पर हुए इस 10 मिनट के हंगामे का मिनट-दर-मिनट विश्लेषण, महिला और युवक के बीच हुई तू-तू, मैं-मैं का संपूर्ण संवाद, इस घटना के कानूनी और सामाजिक निहितार्थ (जैसे कि पुलिस चेकिंग का अधिकार, वीडियोग्राफी का अधिकार, और सार्वजनिक स्थान पर व्यवहार), महिला द्वारा बार-बार 'DSP मामा' की धमकी और GRP कर्मी की उपस्थिति के बावजूद युवक के दृढ़ रुख का महत्व, और अंततः, यह घटना भारतीय समाज में शक्ति और विशेषाधिकार की संस्कृति को कैसे उजागर करती है, इन सभी पहलुओं पर 5000 शब्दों का गहन सामाजिक-कानूनी विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। 1. 📍 घटना का विस्तृत विवरण: जालंधर रेलवे स्टेशन पर हंगामा जालंधर रेलवे स्टेशन के परिसर में सुरक्षा जांच के दौरान यह घटना हुई, जिसने तुरंत लोगों का ध्यान खींचा और भीड़ जमा हो गई। 1.1. पृष्ठभूमि और शुरुआत कार चेकिंग: पुलिस (संभवतः GRP या रेलवे सुरक्षा बल) एक कार की सामान्य जांच कर रही थी, जो रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है। वीडियोग्राफी: इसी दौरान, वहाँ मौजूद एक युवक ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। विवाद की चिंगारी: कार में मौजूद महिला (जो खुद को ऑन ड्यूटी और कार में बैठे GRP कर्मी की जानकार बता रही थी) ने युवक से तुरंत कैमरा बंद करने को कहा। युवक के मना करने पर महिला भड़क गई और बहस शुरू हो गई। 1.2. 10 मिनट का टकराव तू-तू, मैं-मैं: बहस जल्द ही तीखी तू-तू, मैं-मैं में बदल गई, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया। DSP मामा का प्रवेश: विवाद चरम पर तब पहुँचा जब महिला ने अपनी पहचान और पहुँच बताते हुए युवक को धमकी दी, "तू मुझे जानता नहीं, मेरा मामा DSP है।" युवक का रुख: युवक अपने रुख पर अडिग रहा, उसने स्पष्ट कहा कि "चाहे कोई भी रिश्तेदार हो। कानून सबके लिए बराबर है और जांच हर वाहन की होगी।" 1.3. GRP कर्मी की उपस्थिति अंदरूनी कनेक्शन: कार में एक GRP कर्मी भी बैठा हुआ दिखाई दिया। महिला ने बार-बार दावा किया कि यह पुलिसकर्मी उसका जानकार है और वे 'फैमिली मेंबर' हैं। कर्मी की प्रतिक्रिया: GRP कर्मी ने विवाद को शांत करने और महिला को बार-बार गाड़ी में बैठाने की कोशिश की, लेकिन महिला की मांग थी कि चेकिंग रोकी जाए और युवक लाइव होना बंद करे। पुलिस की कार्रवाई: तमाम हंगामे के बावजूद, पुलिस ने अपनी चेकिंग जारी रखी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि रसूख की धमकी का उनकी ड्यूटी पर कोई असर नहीं पड़ा। 2. 💬 बहस का संपूर्ण संवाद और विश्लेषण महिला और युवक के बीच हुई बहस, कानून और वीआईपी संस्कृति पर उनके विरोधाभासी दृष्टिकोण को दर्शाती है। 2.1. चेकिंग पर सवाल: "हम काला माल बेच रहे हैं?" महिला का प्रश्न: महिला ने चेकिंग के औचित्य पर सवाल उठाया: "किस बात के लिए गाड़ी चेक की जाए।... किस के लिए गाड़ी चेक की जाए, हम काला माल बेच रहे हैं?" युवक का जवाब: युवक ने पुलिसकर्मी से चेकिंग जारी रखने की मांग की, यह दर्शाता है कि वह पुलिस कार्रवाई में बाधा डालने के महिला के प्रयास को रोकना चाहता था। 2.2. वीडियोग्राफी और निजता का मुद्दा: "तुम किस से पूछ कर लाइव हुए हो?" महिला का आरोप: महिला ने युवक पर बिना अनुमति लाइव होने और उसकी निजता पर हमला करने का आरोप लगाया: "तुम किस से पूछ कर लाइव हुए हो?..." युवक का तर्क: युवक ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थान पर वीडियोग्राफी के लिए उसे किसी से पूछने की जरूरत नहीं है: "मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं, आप स्टेशन पर खड़े हो।" 2.3. 'तू-तू न कर' और अमर्यादित भाषा विवाद का स्तर: बहस जल्द ही व्यक्तिगत हमलों तक पहुँच गई, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे को 'तू' कहकर संबोधित किया और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। युवक की मांग: युवक ने पुलिसकर्मी से महिला को "बोलने की तमीज तो सिखाओ" कहा, जबकि महिला ने उसे "प्रेस रिपोर्टर नहीं" होने की बात कही। 2.4. रसूख की धमकी: "मेरा मामा DSP है" वीआईपी कार्ड: यह बहस का सबसे निर्णायक मोड़ था। महिला ने अपने रिश्तेदार का नाम लेकर धौंस जमाने की कोशिश की: "मेरे भी हैं पुलिस वाले, मेरा मामा DSP है।" युवक का दृढ़ संकल्प: युवक ने तुरंत इसे खारिज कर दिया: "मैं क्या करूं DSP है तो मैं किसी से नहीं डरता। मैं अपना काम कर रहा हूं। मुझे किसी DSP कोई टेंशन नहीं।" कानूनी समानता: युवक ने पुलिसकर्मी से भी सवाल किया: "मामा डीएसपी लगा है। क्या मामा की गाड़ी चेक नहीं हो सकती।" यह सवाल भारतीय कानूनी व्यवस्था के मूल सिद्धांत - कानून के समक्ष समानता - को स्थापित करता है। 2.5. 'ऑन ड्यूटी' और 'परांठे खाने' का विरोधाभास महिला का दावा: महिला ने खुद को पुलिसकर्मी का 'जानकार' और 'फैमिली मेंबर' बताया। अंत में उसने अजीबोगरीब दावा किया: "मैं ऑन ड्यूटी थी। मेरी बहन को भूख लगी थी। तो हम परांठे खाने आए थे।" युवक का प्रश्न: युवक ने इस विरोधाभासी दावे पर तुरंत सवाल उठाया: "स्टेशन पर कौन सी ड्यूटी कर रहे हो।" 3. ⚖️ कानूनी और सामाजिक निहितार्थ यह घटना कई महत्वपूर्ण कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर प्रकाश डालती है। 3.1. सार्वजनिक स्थान पर वीडियोग्राफी का अधिकार निजता बनाम पारदर्शिता: भारत में, सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी घटना या सरकारी अधिकारी की कार्रवाई का वीडियो बनाना कानूनी रूप से सही माना जाता है, बशर्ते इससे निजता का गंभीर उल्लंघन न हो। युवक स्टेशन परिसर में चेकिंग का वीडियो बना रहा था, जो कि उसकी ड्यूटी थी। युवक का तर्क कि "मुझे किसी से पूछने की जरूरत नहीं, आप स्टेशन पर खड़े हो," कानूनी रूप से मजबूत था। पारदर्शिता को बढ़ावा: ऐसे वीडियो पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता लाते हैं और मनमानी को रोकते हैं। महिला का कैमरा बंद करने का आग्रह उसके रसूख के दुरुपयोग की कोशिश को छिपाने जैसा था। 3.2. पुलिस को चेकिंग का अधिकार सुरक्षा प्रोटोकॉल: रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थानों पर, पुलिस या सुरक्षा बलों के पास किसी भी संदिग्ध वाहन या व्यक्ति की जांच करने का अधिकार होता है। शक्की व्यवहार: युवक का यह कहना कि "हमें शक्की लगी। हमने चेक करवा दी," पुलिस कार्रवाई को उचित ठहराता है, जो किसी भी नागरिक द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने में किया गया सहयोग माना जा सकता है। 3.3. VIP संस्कृति और शक्ति का दुरुपयोग 'DSP मामा' सिंड्रोम: यह घटना भारतीय समाज में गहरे बैठी VIP कल्चर या 'पावर ब्रोक्रेजिंग' की मानसिकता को दर्शाती है, जहाँ लोग कानूनी प्रक्रियाओं से बचने के लिए अपने रसूखदार रिश्तेदारों का नाम लेते हैं। युवक का प्रतिरोध: युवक का दृढ़ता से यह कहना कि "मैं किसी से नहीं डरता... मुझे किसी DSP कोई टेंशन नहीं," कानून के समक्ष समानता के संवैधानिक सिद्धांत पर आम जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। 4. 🎭 GRP कर्मी की दुविधा और पुलिस का रुख इस घटना में GRP कर्मी की उपस्थिति ने स्थिति को और जटिल बना दिया। 4.1. GRP कर्मी की दुविधा रिश्तेदारी: GRP कर्मी ने खुद स्वीकार किया कि महिला उनकी "रिश्तेदार" है। यह पुलिस बल के भीतर भाई-भतीजावाद की ओर इशारा करता है। कर्तव्य बनाम संबंध: कर्मी की कोशिश थी कि वह महिला को शांत करे और उसे जाने के लिए कहे। यह उसकी दुविधा दिखाता है—एक तरफ अपनी ड्यूटी (चेकिंग जारी रखना) और दूसरी तरफ अपने संबंध (रिश्तेदार को बचाना)। 4.2. जांच का जारी रहना पेशेवर रवैया: हंगामे के बावजूद, चेकिंग कर रहे पुलिसकर्मियों ने जांच जारी रखी, जो उनके पेशेवर रवैये को दर्शाता है। उन्होंने रसूख की धमकी या रिश्तेदार की उपस्थिति को अपनी ड्यूटी में बाधा नहीं बनने दिया। अंततः कानून की जीत: भले ही महिला ने धमकी दी और हंगामा किया, लेकिन पुलिस ने अपनी कार्रवाई पूरी की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कानून और प्रक्रियाएं अंतिम रूप से लागू रहीं। 5. 🌐 निष्कर्ष: समाज में अधिकारों का टकराव जालंधर रेलवे स्टेशन का यह 10 मिनट का विवाद भारतीय समाज में शक्ति, अधिकार और पारदर्शिता के बीच चल रहे संघर्ष को सूक्ष्म रूप से दर्शाता है। VIP संस्कृति का प्रतिरोध: यह घटना उन अनगिनत छोटे प्रतिरोधों में से एक है जहाँ आम नागरिक सोशल मीडिया और वीडियोग्राफी को एक हथियार के रूप में उपयोग करके वीआईपी संस्कृति और मनमानी का विरोध कर रहे हैं। जागरूकता की जीत: युवक ने, जिसका दावा था कि वह "अपना काम कर रहा हूं", जनता की जागरूकता और सार्वजनिक स्थान पर नियमों के पालन की मांग को सफलतापूर्वक रखा। आगे का मार्ग: यह घटना पुलिस बलों के लिए भी एक सबक है कि उन्हें अपने कर्मियों के व्यक्तिगत संबंधों और पेशेवर कर्तव्यों के बीच की रेखा को स्पष्ट रूप से बनाए रखना होगा, ताकि जनता का भरोसा कायम रह सके। इस विवाद का अंत चेकिंग के साथ हुआ, जिससे यह संदेश गया कि भारतीय लोकतंत्र में 'DSP मामा' के नाम पर कानून को झुकाया नहीं जा सकता।
पंजाब के पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा और उनकी पत्नी, पंजाब की पूर्व मंत्री रजिया सुल्ताना, के खिलाफ उनके बेटे अकील अख्तर की संदिग्ध मौत के मामले में हत्या और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है। अकील अख्तर की 16 अक्टूबर 2025 को पंचकूला स्थित उनके घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिवार ने शुरू में इसे दवाओं के ओवरडोज से हुई मौत बताया था, लेकिन बाद में एक वीडियो सामने आया जिसने मामले को नया मोड़ दिया। घटना का विवरण अकील अख्तर (35 वर्ष), जो पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत करते थे, 16 अक्टूबर को पंचकूला के सेक्टर 4 स्थित अपने घर में अचेत अवस्था में पाए गए थे। परिवार ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआत में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दवाओं के ओवरडोज से मौत की संभावना जताई गई थी। हालांकि, बाद में एक वीडियो सामने आया जिसमें अकील ने अपने परिवार पर गंभीर आरोप लगाए थे। वायरल वीडियो और आरोप अकील का 16 मिनट लंबा वीडियो 27 अगस्त 2025 को रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो में अकील ने कहा था कि उन्हें अपने पिता और मां के बीच अवैध संबंधों का पता चला था, जो उनके लिए मानसिक आघात का कारण बना। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिवार के अन्य सदस्य उनकी हत्या की साजिश रच रहे थे। इस वीडियो के आधार पर शमशुद्दीन चौधरी नामक व्यक्ति ने पंचकूला पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी, जिसमें मामले की जांच की मांग की गई थी। पुलिस की कार्रवाई शिकायत के बाद, पंचकूला पुलिस ने 20 अक्टूबर 2025 को हत्या और आपराधिक साजिश की धाराओं में एफआईआर दर्ज की। एफआईआर में अकील की पत्नी, बहन, और माता-पिता को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी रैंक के अधिकारी की अगुआई में एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। The परिवार की प्रतिक्रिया अकील की पत्नी ज़ैनब अख्तर (पूर्व चेयरपर्सन, पंजाब वक्फ बोर्ड) और बहन निशात अख्तर ने आरोपों को नकारा है। उन्होंने कहा कि अकील मानसिक तनाव में थे और परिवार के सदस्यों के बीच कोई विवाद नहीं था। हालांकि, पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव यह मामला पंजाब और हरियाणा की राजनीति और समाज में हलचल का कारण बना है, क्योंकि इसमें उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी और पूर्व मंत्री शामिल हैं। मामले की जांच से यह स्पष्ट होगा कि यह पारिवारिक विवाद था या कोई गंभीर साजिश। अभी तक, पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया है, लेकिन मामले की जांच जारी है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और तथ्य सामने आएंगे, यह मामला और भी पेचीदा होता जाएगा।
पंजाब पुलिस के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के खिलाफ सीबीआई ने रिश्वतखोरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार किया और उनके मोहाली स्थित घर, दफ्तर और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान उनके ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी, आभूषण और अन्य कीमती सामान जब्त किए गए हैं। मुख्य बिंदु: गिरफ्तारी और आरोप: डीआईजी भुल्लर को एक कारोबारी से रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। उन्होंने कारोबारी से आठ लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी ताकि उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निपटाया जा सके। सीबीआई की कार्रवाई: गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने भुल्लर के मोहाली स्थित घर, दफ्तर और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान उनके ठिकानों से 7.5 करोड़ रुपये की नकदी, लगभग 2.5 किलोग्राम सोने के आभूषण, 26 लग्जरी घड़ियां (जिनमें रॉलेक्स और राडो जैसी ब्रांडेड घड़ियां शामिल हैं), 50 से अधिक अचल संपत्तियों के दस्तावेज, लॉकर की चाबियां, बैंक अकाउंट्स की डिटेल, 100 कारतूसों के साथ चार बंदूकें, शराब की 108 बोतलें, 5.7 लाख रुपये नकद और 17 कारतूस जब्त किए गए हैं। मासिक रिश्वत की मांग: जांच में यह भी सामने आया कि डीआईजी भुल्लर हर महीने कारोबारी से पांच लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे। यह रिश्वत मांगने की प्रक्रिया कारोबारी के लिए बेहद परेशान करने वाली थी, जिसके बाद उसने सीबीआई से शिकायत की।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ