प्रयागराज

अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक मत रखो
Shankaracharya Avimukteshwaranand vs Prayagraj Administration: माघ मेला प्रशासन ने दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम; शंकराचार्य पद को लेकर नोटिस चस्पा।

प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य की पदवी पर आर-पार; प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस, अविमुक्तेश्वरानंद बोले- 'क्या अब प्रशासन तय करेगा कि मैं शंकराचार्य हूं या नहीं?' प्रयागराज | 20 जनवरी 2026 संगम नगरी प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच विवाद ने अब बेहद उग्र रूप ले लिया है। मेला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए शंकराचार्य के शिविर पर नोटिस चस्पा कर दिया है, जिसमें उनसे 24 घंटे के भीतर यह साबित करने को कहा गया है कि वे किस आधार पर खुद को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य लिख रहे हैं। वहीं, सड़क पर धरना दे रहे अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या और संतों का अपमान करार दिया है। 1. रात 12 बजे नोटिस और सुबह की गहमागहमी प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध तब और बढ़ गया जब कानूनी नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू हुई। मिडनाइट ड्रामा: सोमवार रात करीब 12 बजे कानूनगो अनिल कुमार नोटिस लेकर शंकराचार्य के शिविर पहुंचे। हालांकि, शिष्यों ने यह कहकर नोटिस लेने से मना कर दिया कि इतनी रात में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। नोटिस चस्पा: मंगलवार सुबह प्रशासन ने दोबारा शिविर का रुख किया और गेट पर नोटिस चस्पा कर दिया। यह नोटिस मेला प्राधिकरण के उपाध्यक्ष की ओर से जारी किया गया है। मुख्य आधार: नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के 14 अक्टूबर 2022 के आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें ज्योतिषपीठ के पद पर अंतिम फैसला होने तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने या पट्टाभिषेक करने पर रोक लगाई गई थी। 2. अविमुक्तेश्वरानंद का तीखा प्रहार: 'प्रशासन की बंदूक, सुप्रीम कोर्ट का कंधा' नोटिस के जवाब में शंकराचार्य ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सरकार के विरोधाभास: उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान खुद सरकार ने एक आधिकारिक पत्रिका छापी थी, जिसमें उन्हें 'शंकराचार्य' के रूप में संबोधित किया गया था। अब प्रशासन अपनी गलती छिपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहा है। पद की गरिमा: उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई जिलाधिकारी या देश का राष्ट्रपति यह तय नहीं कर सकता कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने कहा, "शंकराचार्य का निर्णय केवल शंकराचार्य ही करेंगे। दो पीठ हमें शंकराचार्य मानती हैं, अब प्रशासन को और क्या प्रमाण चाहिए?" 📊 विवाद के मुख्य बिंदु: पद, परंपरा और कानून श्रेणी प्रशासन का तर्क (नोटिस) शंकराचार्य का तर्क (जवाब) कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केस लंबित रहने तक पट्टाभिषेक पर रोक लगाई है। कोर्ट ने पद पर बैठने से रोका है, लेकिन मान्यता संतों से मिलती है। शिविर का बोर्ड बोर्ड पर "ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य" लिखना कोर्ट की अवहेलना है। सरकार ने खुद अपनी पत्रिका में मुझे शंकराचार्य छापा है। मान्यता पदवी विवादित है (अविमुक्तेश्वरानंद बनाम वासुदेवानंद)। अन्य पीठों के शंकराचार्य मुझे स्वीकार करते हैं, यही सबसे बड़ा प्रमाण है। वर्तमान स्थिति 24 घंटे में प्रमाण देने का अल्टीमेटम। जब तक माफी नहीं, तब तक आश्रम में प्रवेश नहीं; फुटपाथ पर रहेंगे। 3. मौनी अमावस्या का वो विवाद जिसने आग सुलगाई इस पूरे विवाद की जड़ 18 फरवरी (मौनी अमावस्या) को हुई घटना है। पालकी रोकने पर बवाल: शंकराचार्य पालकी में बैठकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल जाने को कहा। झड़प और हिरासत: शिष्यों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने पालकी को खींचकर संगम से 1 किमी दूर कर दिया था। प्रायश्चित धरना: इसी अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने शिविर त्याग दिया है। उन्होंने ऐलान किया है कि वे हर मेले में आएंगे, लेकिन प्रशासन के व्यवहार के विरोध में फुटपाथ पर ही रहेंगे। 4. ज्योतिषपीठ का पुराना विवाद ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य पद को लेकर दशकों से कानूनी लड़ाई चल रही है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा है। प्रशासन इसी कानूनी पेच का सहारा लेकर अविमुक्तेश्वरानंद की आधिकारिक पदवी को चुनौती दे रहा है, जबकि शंकराचार्य इसे अपनी धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप मान रहे हैं।

रवि चौहान जनवरी 20, 2026 0
पूर्व डीजी जेल शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत
प्रयागराज हनुमान मंदिर में अभद्रता: रिटायर्ड IPS शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत, 'VIP पास' न होने पर पुलिस ने किया अपमान

पूर्व डीजी जेल शशिकांत ने CM योगी से की शिकायत: इलाहाबाद के बड़े हनुमान जी मंदिर में दर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर अभद्रता का गंभीर आरोप    उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) स्थित पवित्र संगम क्षेत्र के निकट, आस्था और श्रद्धा के प्रतीक बड़े हनुमान जी मंदिर में हुई एक घटना ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और धार्मिक स्थलों पर VIP संस्कृति के बोलबाले पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पंजाब के पूर्व डीजी जेल और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक सम्मानित सेवानिवृत्त अधिकारी शशिकांत ने 25 नवंबर को मंदिर में दर्शन के दौरान अपने साथ हुई अभद्रता का विस्तृत उल्लेख करते हुए सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा किया है। शशिकांत, जो वर्ष 2012 में पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भी नशे के खिलाफ अपनी मुखर मुहिम और सामाजिक सक्रियता के लिए पूरे देश में जाने जाते हैं, उनका यह आरोप साधारण नहीं है। यह घटना दर्शाती है कि जब एक वरिष्ठ नागरिक और एक रिटायर्ड शीर्ष पुलिस अधिकारी को भी अपने ही देश के एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर पुलिसकर्मियों द्वारा सम्मान और सहायता नहीं मिलती, तो आम दर्शनार्थियों और बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार होता होगा। पूर्व डीजी जेल ने इस प्रकरण की शिकायत सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रदेश में आम लोगों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। यह मामला न केवल पुलिसकर्मियों के व्यवहार की जवाबदेही तय करने की मांग करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि पवित्र धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर किस प्रकार की रुखी और धमकी भरी कार्यशैली हावी है। यह विस्तृत आलेख पूर्व डीजी जेल शशिकांत के सोशल मीडिया पर साझा किए गए अनुभव का विस्तृत वर्णन, पुलिसकर्मियों द्वारा की गई अभद्रता की प्रकृति, सीनियर सिटिजन से इस तरह के व्यवहार के सामाजिक निहितार्थ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की गई शिकायत का विवरण, प्रयागराज पुलिस की प्रतिक्रिया, और नशे के खिलाफ शशिकांत की पहचान को केंद्र में रखते हुए इस पूरे घटनाक्रम का 5000 शब्दों में गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है।   1. 🛑 मंदिर में अभद्रता का घटनाक्रम: एक रिटायर्ड IPS का अपमान   25 नवंबर को बड़े हनुमान जी मंदिर, जिसे 'लेटे हुए हनुमान जी' के नाम से भी जाना जाता है, पर हुई घटना ने शशिकांत को सार्वजनिक रूप से अपना गुस्सा व्यक्त करने पर मजबूर कर दिया।   1.1. सहायता का अनुरोध और पहली अभद्रता   स्थान और समय: घटना प्रयागराज के संगम क्षेत्र स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर में दर्शन के दौरान हुई। स्थिति: शशिकांत ने बताया कि मंदिर में उस समय काफी भीड़ थी। एक वरिष्ठ नागरिक होने के नाते उन्हें दर्शन में सहायता की आवश्यकता थी। अनुरोध: उन्होंने मंदिर में सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी से सहायता का अनुरोध किया। पहचान देना: उन्होंने अपनी पहचान एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पंजाब के पूर्व डीजी जेल के रूप में दी। पुलिसकर्मी का व्यवहार: शशिकांत के अनुसार, परिचय देने के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मी ने उनके साथ अभद्रता से बात की और उन्हें सहायता देने के बजाय गेट की ओर भेज दिया।   1.2. गेट पर धमकी भरा लहजा   दूसरी घटना: गेट पर मौजूद पुलिसकर्मी से जब शशिकांत ने अपनी स्थिति और पूर्व परिचय का हवाला दिया, तो वहाँ भी उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा। रुखा व्यवहार: गेट पर तैनात पुलिसकर्मी ने कथित रूप से रुखे और धमकी भरे लहजे में कहा—“पीछे हटो, VIP पास लाओ”। दोहरा मापदंड: शशिकांत ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि यह पुलिसकर्मी उस समय अन्य लोगों को प्रवेश दे रहा था, लेकिन एक वरिष्ठ नागरिक और पूर्व अधिकारी को बिना "VIP पास" के आगे बढ़ने से रोका गया।   1.3. सहयोगी पुलिसकर्मियों की चुप्पी   इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एक और चिंताजनक पहलू सामने आया: मूक दर्शक: शशिकांत ने लिखा कि आसपास मौजूद अन्य पुलिस कर्मी इस पूरी स्थिति पर मुस्कुराते रहे। हस्तक्षेप का अभाव: किसी भी अन्य पुलिसकर्मी ने हस्तक्षेप नहीं किया या शशिकांत को सहायता देने की कोशिश नहीं की। यह एक सामूहिक कार्यशैली या उच्चाधिकारियों के निर्देशों की कमी को दर्शाता है, जहाँ ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी विनम्रता और सहायता की भावना को दरकिनार करते हैं।   2. 🚨 सीनियर सिटिजन और आम आदमी का अपमान   शशिकांत का यह प्रकरण केवल एक व्यक्तिगत अपमान नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक सेवाओं और धार्मिक स्थलों पर आम जनता, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों, के प्रति पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।   2.1. VIP संस्कृति का वर्चस्व   पास की मांग: पुलिसकर्मी द्वारा "VIP पास लाओ" की मांग स्पष्ट रूप से दिखाती है कि धार्मिक स्थलों पर भी VIP संस्कृति का दबदबा है। यह आस्था के स्थल को पहुँच के आधार पर विभाजित करता है, जहाँ आम दर्शनार्थियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा: शशिकांत जैसे एक वरिष्ठ नागरिक (सीनियर सिटिजन) के साथ ऐसा बर्ताव भारत के उस सांस्कृतिक मूल्य के विपरीत है, जहाँ बुजुर्गों के प्रति सम्मान अपेक्षित है। यदि एक रिटायर्ड डीजी जेल के साथ ऐसा हो सकता है, तो कमजोर और साधनहीन सीनियर सिटिजन के साथ पुलिसकर्मी कैसा व्यवहार करते होंगे, इसकी कल्पना करना मुश्किल नहीं है।   2.2. सरकारी निर्देशों की अवहेलना   योगी आदित्यनाथ सरकार अक्सर कानून-व्यवस्था और सरकारी कर्मचारियों के विनम्र व्यवहार पर जोर देती रही है। इस तरह की घटनाएँ दर्शाती हैं कि शीर्ष स्तर के निर्देश जमीनी स्तर पर या तो पहुँच नहीं रहे हैं, या उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।   3. 🎯 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधी शिकायत   शशिकांत ने इस मामले को हल्के में न लेते हुए सीधे राज्य के सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी से शिकायत दर्ज कराई है।   3.1. शिकायत का आधार   अस्वीकार्य व्यवहार: पूर्व डीजी जेल ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदेश में आम लोगों और वरिष्ठ नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। जवाबदेही की मांग: उनकी शिकायत का मुख्य उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत अपमान का विरोध करना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि पुलिसकर्मियों के व्यवहार की जवाबदेही तय हो और भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।   3.2. शशिकांत की सामाजिक पहचान   शशिकांत की पहचान इस शिकायत को और भी वजन देती है। पूर्व डीजी जेल, पंजाब: वह पंजाब पुलिस में एक उच्च पद पर कार्यरत थे। नशे के खिलाफ मुहिम: वह वर्ष 2012 में सेवानिवृत्त होने के बाद से नशे के खिलाफ अपनी कड़े रुख और मुहिम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पंजाब में ड्रग्स के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्य किए हैं और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रूप से अपनी आवाज उठाते रहे हैं। सक्रियता: एक पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के बावजूद उनकी सक्रियता यह सुनिश्चित करती है कि यह मामला दबाया न जाए और प्रयागराज पुलिस को आवश्यक कार्रवाई करनी पड़े।   4. 👮 प्रयागराज पुलिस की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई   मामले को एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी द्वारा सोशल मीडिया पर उठाए जाने और सीधे मुख्यमंत्री से शिकायत किए जाने के बाद प्रयागराज पुलिस को तत्काल प्रतिक्रिया देनी पड़ी।   4.1. डीसीपी सिटी का बयान   सुरक्षा उद्देश्य: डीसीपी सिटी ने बताया कि बड़े हनुमान जी मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुगमता के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है। विनम्रता के निर्देश: उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे दर्शनार्थियों से मृदुल व्यवहार करें और उनकी सहायता सुनिश्चित करें। यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से उन निर्देशों के उल्लंघन को स्वीकार करता है जो ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किए। जांच का आश्वासन: डीसीपी ने कहा कि प्रकरण की जानकारी ली जा रही है और आवश्यक होने पर कार्रवाई भी की जाएगी।   4.2. आवश्यक कार्रवाई की प्रकृति   प्रयागराज पुलिस के लिए यह मामला एक त्वरित और पारदर्शी जांच की मांग करता है। आवश्यक कार्रवाई में निम्न शामिल हो सकते हैं: पहचान: अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों की पहचान करना। स्पष्टीकरण: उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांगना। दंडात्मक कार्रवाई: दोषी पाए जाने पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई या निलंबन। संवेदनशीलता प्रशिक्षण: भविष्य में ऐसे व्यवहार को रोकने के लिए धार्मिक स्थलों पर तैनात पुलिस बल के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण सुनिश्चित करना।   5. 🔔 निष्कर्ष: पुलिस सुधार और धार्मिक स्थलों पर सम्मान   शशिकांत के साथ बड़े हनुमान जी मंदिर में हुई अभद्रता की घटना केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह भारतीय पुलिस बल में आवश्यक व्यवहार परिवर्तन और संवेदनशीलता की कमी को दर्शाती है। व्यवस्था बनाम संवेदना: धार्मिक स्थलों पर व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का कर्तव्य है, लेकिन यह कर्तव्य विनम्रता और सहायता की भावना के साथ निभाया जाना चाहिए, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के प्रति। पारदर्शिता की मांग: यह मामला पुलिस को यह सुनिश्चित करने का अवसर देता है कि VIP संस्कृति को समाप्त किया जाए और सभी नागरिकों के साथ समान और सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। CM योगी का हस्तक्षेप: अब यह देखना बाकी है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ से इस गंभीर शिकायत पर कितनी त्वरित और निर्णायक कार्रवाई होती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर आम नागरिक या सीनियर सिटिजन को "VIP पास" न होने के कारण अपमान का सामना न करना पड़े।

रवि चौहान नवम्बर 29, 2025 0
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“रात में पत्नी बन जाती है नागिन,” युवक ने लगाई प्रशासन से गुहार

लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।”   20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग   मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया।   वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है।   क्या कहते हैं डॉक्टर   मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”

75 साल के बुजुर्ग ने की 35 साल की महिला से शादी‚ सुहागरात की अगली सुबह हुई मौत

जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत   गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं।   कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी   संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।”   भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार   घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।

मेरठ में एनकाउंटर: गैंगरेप का 25 हजार का इनामी आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर

  Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।   🧾 इस तरह हुई मुठभेड़   पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।   👮 पुलिस का बयान   Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।”   ⚖️ कई मामलों में था वांछित   पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी   पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।   🛡️ पुलिस की सख्ती जारी   एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

दीवाली पर जुगाड़ करके बनाई कार्बाइड गन ने छीनी 14 बच्चों की आँखों की रोशनी

भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है।   कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा।   कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम   यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं।   42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार   शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।

मेरठ: कार सवार युवक से बीच सड़क पर नाक रगड़वाने वाला BJP नेता गिरफ्तार

मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल  उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है।  पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा...   पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ

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रवि चौहान जनवरी 21, 2026 0