मिस्र (शारम अल-शेख) में लंबे समन्वित कूटनीतिक प्रयासों के बाद इस्राइल और हमास ने एक प्रारम्भिक युद्धविराम और कैदियों/बंधकों की रिहाई पर समझौता किया है। यह समझौता उस फ़्रेमवर्क का पहला चरण माना जा रहा है जो संयुक्त रूप से लागू होने पर ग़ाज़ा में जारी दो साल से चल रहे युद्ध को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। Reuters+1 प्रमुख बिंदु — क्या तय हुआ है समझौते के पहले चरण के तहत, हमास ग़ाज़ा में रखे गए बंधकों में से अनुमानतः ~20 लोगों को जीवित और मृत 28 बंधकों के शव सौंपने जैसी व्यवस्था कर रहा है — बंधकों की अंतिम सूची और रिहाई की शर्तें अभी फाइनल की जा रही हैं। AP News+1 इस्लाईवी कार्रवाई के कुछ क्षेत्रों से इस्राइली सैनिकों का आंशिक वापसी और ग़ाज़ा में मानवीय सहायता (खाना, दवा, इंजीनियरिंग सहायता) तेज़ करने का वादा किया गया है। रिहाई के बदले इस्राइल कई फ़लस्तीनी कैदियों को रिहा करेगा — सूची और संख्या पर अभी भी अंतिम काम चल रहा है (रिपोर्टों में “हज़ारों में नहीं, सैकड़ों-हज़ारों की विस्तृत सूची” के उल्लेखों का अंतर है)। The Washington Post+1 अब तक का मानवीय और मानव-तौल का आँकड़ा (मामूली भिन्नता स्रोतों में) युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में लगभग 1,200 इज़राइली नागरिक मारे गए और सैकड़ों बंधक बनाए गए — यह संख्या स्रोतों में लगातार उद्धृत है। Reuters अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और संसर्गित संस्थाओं के आँकड़ों के अनुसार, ग़ाज़ा में कुल फ़लस्तीनी मृतकों की संख्या अब तक लगभग 67,000 के आसपास रिपोर्ट की जा रही है; इसमें महिलाओं और बच्चों की बहुत बड़ी संख्या शामिल है। अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और एनजीओ-रिपोर्ट्स में बच्चों पर पड़ने वाले नुकसान के आँकड़े अलग-अलग संदर्भ (केवल मृत बच्चों की संख्या बनाम मरे/घायल सहित) के कारण बदलते दिखते हैं — उदाहरण के लिए Save the Children व UNICEF ने बच्चों के भारी मनुषीय नुकसान पर चेतावनी जारी की है। इन स्रोतों के अनुसार बच्चों का नुकसान भारी और लगातार बढ़ रहा है। Reuters+2Save the Children International+2 ट्रम्प की भूमिका और अमेरिका का दबाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनकी टीम (विशेष दूतों सहित) ने इस मसले में सक्रिय कूटनीति की और — कई रिपोर्टों के अनुसार — ट्रम्प ने इस्राइल पर जोर देकर और क्षेत्रीय साझेदारों (मिस्र, क़तर, तुर्की आदि) के साथ समन्वय कर के राजनैतिक दबाव बनाया जिससे समझौते की राह आसान हुई। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से इस परियोजना को अपना डिप्लोमैटिक हासिल करार दिया और कुछ रिपोर्टें बताती हैं कि वे इस पर नोबेल-शांति-पुरस्कार जैसी मान्यताओं की उम्मीद भी ज़ाहिर कर रहे हैं। इन पहलुओं का वर्णन रॉयटर्स, AP, वाशिंगटन पोस्ट व अल-जज़ीरा ने विस्तृत रुप से किया है। The Washington Post+2AP News+2 नेतन्याहू और इज़राइल सरकार की प्रतिक्रिया इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने समझौते को “राष्ट्र, नैतिक और कूटनीतिक जीत” करार दिया — पर उन्होंने साथ ही साफ़ नहीं कहा कि यह युद्ध की पूर्ण समाप्ति है। उनकी आंतरिक राजनीति जटिल है: उनकी गठबंधन सरकार में कट्टर रुख़ वाले सदस्य हैं जो किसी भी समझौते के कड़ा विरोध कर सकते हैं और कहा जा रहा है कि कुछ मंत्री समझौते के खिलाफ हटने की धमकी दे चुके हैं। यही कारण है कि नेतन्याहू के बयान में जश्न के साथ-साथ सावधानी और राजनीतिक गणना भी स्पष्ट दिखती है। Dawn+1 दोनों पक्षों और आम लोगों का मूड ग़ाज़ा में लोगों ने सड़कें और चौक जश्न के स्वरूप में भर दिए — लोगों में राहत और उम्मीद दिखाई दे रही है कि कम से कम कुछ मदद और रिहाई से हालात सहज होंगे। Reuters तेल अवीव और इज़राइल के कुछ हिस्सों में भी बंधकों की वापसी की उम्मीद में भीड़ जुटी और उत्साह मिला-जुला रहा; वहीं सुरक्षा चिंताएँ और शंकाएं बनी रहीं। CBS News+1 किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर संशय/काम बाकी है विशेषज्ञ और अंतरराष्ट्रीय टिप्पणियाँ चेतावनी दे रही हैं कि यह अभी अंतिम शांति नहीं है — कई जटिल और निर्णायक बिंदु अब भी खुले हैं: हमास का हथियारविहीनकरण (disarmament) — क्या और किस तरह से लागू होगा। Al Jazeera इस्राइली सेनाओं का वापस जाना — सीमा/क्षेत्र निर्धारण और सुरक्षा व्यवस्था। Al Jazeera ग़ाज़ा का प्रशासनिक और राजनीतिक भविष्य — कौन शासक होगा और किस तरह की स्थानीय शासनव्यवस्था कायम होगी। Al Jazeera समझौते की निगरानी और उल्लंघन होने पर कार्रवाई के मैकेनिज्म — अंतरराष्ट्रीय टीम/टास्क-फ़ोर्स किस तरह निगरानी करेगी। The Washington Post संक्षेप में — क्या कहा जा सकता है? यह समझौता दो-साल के खूनी संघर्ष को रोकने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है — पर यह अंतिम शांति समझौता बताने के लिए अभी जल्दबाज़ी होगी। रिहाई और मानवीय मदद से तत्काल राहत मिलेगी, पर ग़ाज़ा का दीर्घकालिक भविष्य, हमास-हथियारों का प्रश्न और इज़राइल की सुरक्षा चिंताएँ अभी भी अनुत्तरित हैं — इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय और स्थानीय पार्टियाँ अब बेहतर निगरानी, स्पष्ट शर्तें और टिकाऊ राजनीतिक रजामंदी की दिशा में काम करना आवश्यक होगा।
जारूसलम/बार्सिलोना — बार्सिलोना से रवाना हुए ‘ग्लोबल सुमुद फ्लोटिला’ के लगभग 50 छोटे जहाजों और करीब 500 कार्यकर्ताओं के काफिले को इजरायली नौसेना ने रात भर कार्रवाई करते हुए रोक दिया। आयोजकों के मुताबिक कम से कम 13 से लेकर 19 तक नौकाएँ रोकी गईं और सवार कार्यकर्ताओं को सुरक्षित तरीके से अशदोद बंदरगाह पर ले जाया जा रहा है — जिनमें पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग, मंडला मंडेला और बार्सिलोना की पूर्व मेयर आदा कोलाउ सहित कई यूरोपीय सांसद और नागरिक नेतृत्व शामिल थे। AP News+1 कार्यकर्ता बताते हैं कि उनका उद्देश्य गाज़ा तक प्रतीकात्मक मानवीय सहायता पहुँचाना और 18 साल से जारी समुद्री नाकाबंदी की नाकेबंदी करना था — इस प्रयास को उन्होंने न केवल एक मानवीय आवाज़ बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नैतिकता के परिप्रेक्ष्य से भी न्यायोचित बताया। वहीं, इजरायली अधिकारियों ने इसे 'प्रोवोकेशन' करार देते हुए कहा कि नाउँ blockade का उल्लंघन कर रही थीं और सुरक्षा कारणों से रोका गया। AP News+1 काफिले पर की गई कार्रवाई की तस्वीरें और विडियो लगातार सोशल मीडिया पर आ रहे हैं — कुछ वीडियो में कार्यकर्ताओं पर पानी की बौछार और नौकाओं के इंजिन बंद करने की चेतावनी दिखती है। इज़राइल की कार्रवाई ने न केवल मानवतावादी चिह्न वाले एक अभियान को दमन कर दिया, बल्कि उन देशों और नेताओं के गहन गुस्से को भी भड़का दिया जो इस प्रतिबंध और गाज़ा में मानवीय संकट पर पहले से ही चिंतित हैं। AP News+1 टर्की, कोलंबिया और कई अन्य देशों ने इज़राइल की कार्रवाई की तीखी आलोचना की है और कुछ सरकारों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करार दिया। फिलिस्तीनी लोगों के लिए भेजी जा रही दवाइयां और खाद्य सामग्री—जो प्रतीकात्मक मात्रा में ही सही—इन्हें रोकना उस इलाके में रह रहे लाखों बेघर और भूखे लोगों के प्रति जिम्मेदारी से बचने जैसा है। जब शांतिप्रिय कार्यकर्ताओं को ही लक्ष्य बनाया जाए तो यह सवाल उठते हैं कि वास्तविक सुरक्षा बहस के पीछे क्या मंसूबे हैं। Reuters+1 इज़राइल के दावों के बावजूद, समुद्री नाकाबंदी पर पश्चिमी और मानवाधिकार विशेषज्ञों के बीच लंबे समय से सवाल उठते आए हैं — विशेषकर जब नाकाबंदी के कारण सामान्य नागरिकों तक बेसिक जीवनरक्षक सामग्री पहुँचाने में व्यवधान आता है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से दुनिया के सामने यह कटु सत्य रख दिया है कि सुरक्षा के नाम पर लागू कड़े प्रतिबंध जब मानवीय अधिकारों को नकारते हैं तो उनकी वैधता और नैतिकता पर बहस अनिवार्य हो जाती है। Catalan News+1 अंततः यह घटना केवल एक नौकाओं का रोका जाना नहीं है — यह वैश्विक नागरिक समाज की आवाज़ को शांत करवाने की एक कड़ी और है। जो सरकारें और सेनाएँ मानवीय प्रयासों को बाधित करती हैं, उन्हें यह समझना होगा कि दबाव और दमन से समस्या हल नहीं होती; उल्टा, वैश्विक विरोध और राजनयिक खर्चे बड़े स्तर पर बढ़ते हैं। गाज़ा में फंसे आम लोगों की तकलीफों को औपचारिक चैनलों से भी टाला गया है — यही मुद्दा इस पूरी घटना की सच्ची पहलू बनता है। AP News+1 (सूचना स्रोत: एपी, रॉयटर्स, अल-जज़ीरा और अंतरराष्ट्रीय समाचार कवरेज।)
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ