सहारनपुर हाईवे पर भड़काऊ करतूत: 'हिंदू रक्षा दल' की महिला कार्यकर्ताओं ने सड़क पर लिखी नफरत की इबारत; पिंकी चौधरी ने ली जिम्मेदारी सहारनपुर | 27 फरवरी 2026 उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। दिल्ली-देहरादून नेशनल हाईवे (NH-72A) पर हिंदू रक्षा दल की महिला कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक संपत्ति पर मुस्लिम विरोधी भड़काऊ नारे लिखने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। यहाँ इस पूरे मामले, संगठन के विवादित इतिहास और वर्तमान स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. घटना का विवरण: हाईवे पर नफरत का 'स्प्रे' यह शर्मनाक घटना सहारनपुर के बिहारीगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डाट मंदिर और मोहण्ड के पास एलिवेटेड रोड की है। भड़काऊ संदेश: गुरुवार देर शाम दो युवतियां, जिन्होंने गले में भगवा गमछा डाला हुआ था, हाईवे किनारे सीमेंटेड ब्लॉक्स और रेलिंग पर स्प्रे पेंट से लिखती नजर आईं। उन्होंने अंग्रेजी में लिखा— "This road is not allowed for Muslims" और हिंदी में लिखा— "यह सड़क मुसलमानों के लिए नहीं है।" वीडियो और नारेबाजी: संदेश लिखने के बाद युवतियों ने 'जय श्री राम' के नारे लगाए। इस पूरी घटना का एक युवक वीडियो बना रहा था, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पहचान का सुराग: वीडियो के अंत में उत्तराखंड नंबर की एक लाल रंग की स्विफ्ट कार दिखाई दे रही है, जिसका इस्तेमाल आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद वहां से भागने के लिए कर रहे थे। 2. पिंकी चौधरी का बयान: "हां, हमने ही लिखा है" हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र उर्फ पिंकी चौधरी ने इस कृत्य की जिम्मेदारी लेते हुए एक विवादित बयान दिया है। तर्क: पिंकी चौधरी ने दावा किया कि यह उनकी महिला कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया कार्य है। उन्होंने तर्क दिया कि "जब मुसलमान सड़क पर चलने का टैक्स नहीं देते, तो वे सड़क पर क्यों चलते हैं?" संगठन के इस खुले समर्थन ने पुलिस के लिए आरोपियों तक पहुंचना और भी आसान बना दिया है, हालांकि यह सामाजिक तनाव को बढ़ावा देने वाला बयान माना जा रहा है। 3. हिंदू रक्षा दल: विवादों और गिरफ्तारियों का लंबा इतिहास यह संगठन और इसके अध्यक्ष पिंकी चौधरी लंबे समय से विवादों के केंद्र में रहे हैं। इनका कार्य करने का तरीका अक्सर कानून की सीमाओं को पार करता रहा है: घटना की अवधि स्थान विवरण सितंबर 2025 गाजियाबाद "सुरक्षा" के नाम पर घरों में तलवारें और फरसे बांटे। पिंकी चौधरी और उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2024 गाजियाबाद झुग्गी बस्ती में रहने वालों को "बांग्लादेशी" बताकर मारपीट की और तोड़फोड़ की। पुलिस ने जेल भेजा था। मई 2024 देहरादून कश्मीरी मुसलमानों को शहर से बाहर निकालने की धमकी दी और "इलाज" करने की बात कही। अगस्त 2021 जंतर-मंतर, दिल्ली मुस्लिम विरोधी नारेबाजी और भड़काऊ भाषण के आरोप में पिंकी चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी। 4. पुलिस की कार्रवाई और कानूनी स्थिति सहारनपुर पुलिस ने इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया है: जांच शुरू: बिहारीगढ़ पुलिस ने वीडियो फुटेज और कार के नंबर के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है। धाराएं: सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने (Hate Speech) की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। अलर्ट: सहारनपुर बॉर्डर और हाईवे पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा ऐसी किसी अप्रिय घटना को अंजाम न दिया जा सके। 5. सामाजिक और कानूनी प्रभाव हाईवे जैसी सार्वजनिक संपत्तियां देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं। संविधान के अनुच्छेद 15 और 19 के तहत धर्म के आधार पर सार्वजनिक स्थानों के उपयोग पर रोक लगाना गैर-कानूनी है। हिंदू रक्षा दल की यह करतूत न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह दिल्ली-देहरादून जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा करती है।
गाजियाबाद में बड़ा खुलासा: रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर; 3.5 करोड़ के कफ सिरप केस में धांधली का आरोप गाजियाबाद में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं बल्कि जिले की क्राइम ब्रांच पर भी बड़ा धब्बा लगा दिया है। क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर रमेश सिंह सिंधु को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई उसी वक्त की गई जब कारोबारी रिश्वत की रकम लेकर क्राइम ब्रांच के कार्यालय पहुंचा और इंस्पेक्टर के हाथ में कैश दिया। यह गिरफ्तारी इसलिए भी और गंभीर मानी जा रही है क्योंकि यह रिश्वत 3 नवंबर को पकड़े गए 3.5 करोड़ रुपये के कफ सिरप के चार ट्रकों को छोड़ने के एवज में मांगी गई थी। यानी जिस केस ने पहले ही लाखों नहीं करोड़ों रुपये के अवैध नशे के कारोबार की पोल खोली थी, उसी केस में जांच कर रहे अधिकारी ने खुद फायदा उठाने की कोशिश कर दी। घटना के बाद पूरा पुलिस विभाग अलर्ट है और मामले की जांच तेजी से की जा रही है। अब आपको पूरी कहानी विस्तार से बताते हैं— कैसे हुआ खुलासा: मिनट-दर-मिनट कार्रवाई गुरुवार शाम तक किसी को अंदाजा नहीं था कि क्राइम ब्रांच के विभागीय अधिकारी पर खुद भ्रष्टाचार की तलवार गिरने वाली है। लेकिन शुक्रवार को जैसे ही कारोबारी (जिसका नाम राहुल बताया गया है) रिश्वत की रकम लेकर क्राइम ब्रांच दफ्तर पहुंचा, सभी दरवाजे सीसीटीवी और टीम की नजर में आ चुके थे। 👉 कारोबारी ने 4 लाख रुपये का पैकेट इंस्पेक्टर रमेश सिंह को दिया। 👉 इंस्पेक्टर ने रकम ऑफिस में रखी ही थी कि तुरंत पुलिस टीम अंदर घुस गई। 👉 कुछ ही सेकंड में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं कारोबारी राहुल भी मौके से भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे भी पकड़ लिया गया। DCP सिटी धवल जायसवाल ने पुष्टि करते हुए कहा कि आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं में केस दर्ज किया जा रहा है। रिश्वत देने वाला कारोबारी भी पुलिस की गिरफ्त में है। सूत्रों के मुताबिक, इंस्पेक्टर की गतिविधियों को लेकर पुलिस कमिश्नर के पास कई शिकायतें आई थीं। इसके बाद पिछले कुछ दिनों से उसकी गुप्त निगरानी की जा रही थी। जैसे ही आरोपी पैसे लेने पहुंचा, उसे पकड़ने की प्लानिंग पहले से तैयार थी। 3 नवंबर को पकड़ा गया था 3.5 करोड़ का कफ सिरप का जखीरा इस पूरे मामले की जड़ कहीं और है—यानी 3 नवंबर 2025 को पकड़ा गया कफ सिरप का बड़ा कंसाइनमेंट, जिसकी कीमत 3.40 करोड़ रुपये से अधिक थी। पुलिस ने मेरठ रोड स्थित मछली गोदाम पर छापा मारकर जो बरामदगी की, वो किसी बड़े नेटवर्क के होने का ही संकेत था। जांच में सामने आया कि— कुल 1,57,350 शीशियां Eskuf और Phensedyl ब्रांड की मिलीं 850 पेटी Eskuf 300 पेटी Phensedyl हर पेटी में 100 ml की शीशियां कुल मात्रा: 15,735 लीटर एक शीशी की कीमत भारत में लगभग ₹210–₹212 कुल मूल्य: ₹3,40,00,000 से अधिक ये सारे सिरपचूने की बोरियों के नीचे छिपाकर रखे गए थे। पुलिस को पहले ही इस अवैध कारोबार की भनक सोनभद्र के केस से लगी थी। 18 अक्टूबर को सोनभद्र पुलिस ने जब दो ट्रक पकड़े, तब पता चला कि यह बड़ा नेटवर्क गाजियाबाद से ऑपरेट होता है। बाद में गाजियाबाद पुलिस ने क्राइम ब्रांच को जांच सौंपी थी। क्यों खास है यह कफ सिरप? नशे के रूप में होता है इस्तेमाल अब सवाल है—कफ सिरप ही क्यों? क्योंकि इन ब्रांडों में कोडीन (Codeine) नामक रासायनिक तत्व होता है, जो मादक पदार्थ की श्रेणी में आता है। इसका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है। सूत्रों के मुताबिक— भारत में इसकी एक शीशी ₹210–₹212 वही शीशी बांग्लादेश में काले बाजार में ₹600–₹1000 में बिकती है यानी मुनाफा तीन से चार गुना। जहां शराब बंद है—जैसे बिहार, झारखंड के कुछ हिस्से—वहां कोडीन वाली सिरप की भारी मांग है। यही वजह है कि यह गैंग सिरप की बड़ी खेप वहां भेजता था। पूरे देश में फैल चुका नेटवर्क: 3 साल में 550 ट्रक सप्लाई पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ— गैंग के मास्टरमाइंड सौरव त्यागी और संतोष भड़ाना पिछले तीन साल में 550 ट्रकों से अधिक कफ सिरप सप्लाई कर चुके थे। कुल अनुमानित कीमत— 👉 हजारों करोड़ रुपये का अवैध नशा कारोबार सौरव त्यागी के मुताबिक— सिरप दिल्ली के नकली फार्मा सप्लायरों से खरीदा जाता था। फिर इसे गाजियाबाद में गोदाम में रखा जाता था। वहां से इसे यूपी, बिहार, झारखंड होते हुए बांग्लादेश तक भेज दिया जाता था। गोदाम किराए के खास नियम थे— 👉 एक ट्रक खड़ा करने का किराया: ₹20,000 प्रति दिन यहां तक कि हर बार सिरप छिपाने का तरीका बदला जाता था— कभी चूना, कभी सीमेंट, कभी फल-सब्ज़ियों की बोरियों के नीचे। दुबई से ऑपरेट हो रहा है सिंडिकेट सबसे बड़ा खुलासा यह था कि यह गैंग केवल भारत में नहीं चल रहा था, बल्कि दुबई से ऑपरेट होता था। मुख्य सरगना— आसिफ (मेरठ निवासी) दुबई में बैठकर पूरा नेटवर्क चलाता है वहीं से फंडिंग, निर्देश और डील की जाती है उसके साथ— मेरठ का वसीम वाराणसी का शुभम जायसवाल ये भी इस नेटवर्क का अहम हिस्सा हैं और फिलहाल तीनों फरार हैं। फर्जी फार्मा कंपनियों का इस्तेमाल नेटवर्क की खास बात यह थी कि यह कानूनी फार्मा लाइसेंस और फर्जी कंपनियों के नाम पर सिरप खरीदता था, जिससे पकड़ पाना मुश्किल हो जाता था। सौरव त्यागी के पास— RS Pharma, इंदिरापुरम गाजियाबाद का लाइसेंस था साथ ही फर्जी कंपनियाँ— वान्या इंटरप्राइजेज लेबोरेट फार्मा (पोंटा साहिब) एबॉट फार्मा (बद्दी) इनके नाम पर हजारों पेटियों की खरीद की जाती थी। गोदाम में स्टॉक करने के बाद अलग-अलग रास्तों से सप्लाई की जाती थी ताकि एक ही पैटर्न पुलिस के हाथ न लगे। इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी ने खोल दी पोल यह पूरा नेटवर्क बहुत लंबे समय से चलता आ रहा था। सुराग मिलने के बाद जांच आगे बढ़ी, लेकिन इसी जांच के दौरान इंस्पेक्टर रमेश सिंह पर गंभीर सवाल उठे। इंस्पेक्टर पर आरोप है— उसने चार ट्रकों को छोड़ने के एवज में रिश्वत मांगी पैसे की डील पक्की होने के बाद कारोबारी से 4 लाख रुपये की एडवांस मांग राशि लेते ही गिरफ़्तार यही वजह है कि विभाग ने भी उसे बचाने की कोशिश नहीं की, बल्कि फौरन केस दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी। अब आगे क्या? पुलिस प्रशासन इस केस को बेहद गंभीरता से ले रहा है। आगे की संभावनाएँ— इंस्पेक्टर पर भ्रष्टाचार कानून के तहत कड़ी धाराएँ लगेंगी आसिफ, वसीम और शुभम की गिरफ्तारी के लिए रेड-कार्नर नोटिस तक की तैयारी फर्जी फार्मा कंपनियों के खिलाफ ड्रग विभाग की संयुक्त कार्रवाई 3 साल में 550 ट्रकों की सप्लाई की जांच—हर राज्य की रिपोर्ट निकाली जाएगी इस केस में और अधिकारी शामिल थे? जांच होगी यानी यह सिर्फ एक रिश्वत केस नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े कफ सिरप तस्करी नेटवर्कों में से एक का पर्दाफाश हो चुका है।
लखनऊ। “रात में मेरी पत्नी का रूप बदल जाता है, वह नागिन बन जाती है,” — यह कहना है सीतापुर जिले के महमूदाबाद तहसील के लोधासा गांव निवासी मेराज का। उनका कहना है, “जैसे ही अंधेरा होता है, वह पहले अपने शरीर को अजीब तरीके से हिलाने लगती है, फिर अचानक नागिन का रूप ले लेती है और मेरे ऊपर आकर डसने लगती है। मैं डर से कांप उठता हूं, मदद के लिए चिल्लाता हूं, लेकिन वह रुकती नहीं।” 20 साल पहले पिता ने मार दिया था नाग मेराज का आरोप है कि उसकी पत्नी नसीमन के पिता ने करीब 20 साल पहले एक नाग को मार डाला था। उसी घटना के बाद नागिन ने बदला लेने के लिए जन्म लिया और अब वह अपने साथी नाग की मौत का हिसाब चाहती है। मेराज का कहना है कि शादी के शुरुआती दिनों में उसे पत्नी के बारे में ऐसी कोई बात मालूम नहीं थी, लेकिन वक्त के साथ उसे शक होने लगा। रिश्तेदारों के कहने पर वह उसे लेकर बांसा भी गया। वहां जैसे ही दरखास्त लिखने के दौरान उसने मेराज की उंगली पकड़ी, वह अजीब हरकतें करने लगी। गोल-गोल घूमते हुए उसने कहा कि उसके पिता ने नाग को मारा था और जब उसकी मां गर्भवती थी, उसी दौरान नागिन उसके गर्भ में आ गई। उसने 20 साल इंतजार किया और अब अपने सुहाग का बदला लेगी। मेराज ने बताया कि उसने पहले घरवालों को इसकी जानकारी दी, फिर झाड़-फूंक भी करवाई, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। आखिरकार उसने पुलिस और प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उसका कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा महसूस हो रहा है। क्या कहते हैं डॉक्टर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार तनाव और मानसिक दबाव में इंसान अपनी पहचान को लेकर भ्रम में आ जाता है। King George's Medical University के मानसिक रोग विभाग के डॉक्टर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं, “जब किसी पर बहुत ज्यादा तनाव हावी होता है तो वह खुद को किसी और रूप में महसूस करने लगता है और उसी के अनुसार व्यवहार करने लगता है।” उनका कहना है कि मेराज और नसीमन की मानसिक जांच और काउंसलिंग जरूरी है। वहीं, KGMU के मनोचिकित्सा विभाग के एडिशनल प्रोफेसर और Stanford University की ग्लोबल टॉप 2% सूची में शामिल डॉक्टर सुजीत कर का कहना है, “यह किसी गंभीर मानसिक विकार का संकेत हो सकता है। कई मामलों में ये परेशानी दिन में दबे रूप में रहती है और रात में इसका असर ज्यादा दिखता है। यदि समय पर इलाज न हो तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।”
जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां गौरा बादशाहपुर थाना क्षेत्र के कुछमुछ गांव में 75 वर्षीय बुजुर्ग संगरू राम ने 35 साल की महिला मनभावती से शादी की। शादी के अगले ही दिन उनकी अचानक मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैल गई और लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पत्नी की एक साल पहले हो चुकी थी मौत गांव के लोगों के मुताबिक, संगरू राम की पत्नी की करीब एक साल पहले मृत्यु हो गई थी। उनके कोई संतान नहीं थी और वे अकेले ही खेती-बाड़ी करते थे। संगरू राम के भाई और भतीजे दिल्ली में कारोबार करते हैं। कोर्ट मैरिज और मंदिर में शादी संगरू राम ने जलालपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 35 वर्षीय मनभावती से कोर्ट मैरिज की और बाद में मंदिर में शादी रचाई। मनभावती की भी यह दूसरी शादी थी और उसके पहले पति से तीन बच्चे (दो बेटियां और एक बेटा) हैं। मनभावती ने बताया कि, “शादी के बाद हम देर रात तक बातें करते रहे। सुबह उनकी तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।” भतीजों ने जताई शंका, रोका अंतिम संस्कार घटना के बाद संगरू राम के भतीजों ने अंतिम संस्कार रुकवा दिया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिल्ली से नहीं पहुंचते, अंतिम संस्कार नहीं होगा। उन्होंने मामले को संदिग्ध मानते हुए पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या निकलता है।
Meerut: मेरठ पुलिस ने सोमवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगरेप के आरोपी और 25 हजार के इनामी अपराधी को मुठभेड़ में मार गिराया। यह मुठभेड़ Sarurpur थाना क्षेत्र के जंगलों के पास हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पुलिस टीम पर फायरिंग की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया। मारे गए बदमाश की पहचान शहजाद उर्फ निक्की (34) के रूप में हुई है। उसके खिलाफ गैंगरेप, पॉक्सो एक्ट, छेड़छाड़ और चोरी जैसे 7 संगीन आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 🧾 इस तरह हुई मुठभेड़ पुलिस को सोमवार सुबह सूचना मिली कि शहजाद जंगलों की तरफ देखा गया है। सूचना पर Meerut Police की टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया। खुद को घिरता देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की, जिसमें गोली आरोपी के सीने में लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। 👮 पुलिस का बयान Vipin Tada (एसएसपी मेरठ) ने बताया, “शहजाद उर्फ निक्की मेरठ के बहसूमा थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर शकिस्त गांव का रहने वाला था। उस पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज थे। 7 साल की एक बच्ची से रेप के मामले में वह मुख्य आरोपी था। घटना के बाद से ही वह फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।” ⚖️ कई मामलों में था वांछित पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर गैंगरेप के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज था। इसके अलावा उस पर छेड़छाड़, चोरी और मारपीट जैसे अपराधों में भी मुकदमे दर्ज थे। पुलिस लंबे समय से उसकी तलाश में थी। 🚔 मुठभेड़ स्थल से बरामदगी पुलिस को मौके से एक तमंचा, कारतूस और कुछ निजी सामान बरामद हुआ है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आरोपी का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। 🛡️ पुलिस की सख्ती जारी एसएसपी ने कहा कि जिले में सक्रिय अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार अपराधियों को या तो गिरफ्तार किया जाएगा या उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मेरठ। सत्ता की हनक में गाली गलौच करते हुए कार सवार युवक से बीच सड़क नाक रगड़वाने वाले छुटभैया नेता (भाजपा किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष) विकुल चपराणा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के खिलाफ मेडिकल थाने में केस दर्ज किया गया है। विकुल उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर का करीबी है। माना जा रहा है कि घटना का वीडियो वायरल हाेने के बाद मजबूरी में मेरठ पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। बता दें कि विकुल चपराणा की दबंगई का वीडियो सामने आया है‚ जिसमें वह कार सवार दो युवको के साथ बेहद क्रूर बरताव करता हुआ नजर आ रहा है। उर्जा राज्य मंत्री डॉक्टर सोमेंद्र तोमर के दफ्तर के नीचे कार पार्किंग विवाद में विकुल ने अपने साथियों के साथ दो युवकों को घेर लिया था। धमकाया और उनकी कार के शीशे तोड़ डाले। वीडियो में एक युवक हाथ जोड़कर माफी मांगता और सड़क पर सिर झुकाकर नाक रगड़ता दिख रहा है। पास खड़ा युवक चिल्लाता है...हाथ जोड़कर बोल, सोमेंद्र तोमर तेरा बाप है...गलती हो गई। इस दौरान पुलिसवाले भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने आरोपियों को रोका नहीं। घटना 19 अक्टूबर की रात 10 बजे मेडिकल थाना क्षेत्र के तेजगढ़ी इलाके में हुई, लेकिन वीडियो आज सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पीड़ित युवकों के नाम सिद्धार्थ पॉल निवासी प्रभात नगर और सत्यम रस्तोगी निवासी शास्त्री नगर डी ब्लॉक है। कार के आगे-पीछे के शीशे भी तोड़े प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया, 'राज्यमंत्री के ऑफिस के नीचे बलेनो कार खड़ी थी। उसमें दो युवक आगे बैठे थे। एक युवक ड्राइविंग सीट पर था, जबकि दूसरा बगल की सीट पर बैठा था। बाहर काफी भीड़ लगी थी। लोग कार को घेरे हुए खड़े थे। पुलिस भी चुपचाप खड़ी थी। कार के अंदर बैठे युवकों पर बाहर के युवक गाली देकर डांट रहे थे। अंदर से युवक माफी मांग रहे थे। तभी किसी ने कार के पीछे के शीशे पर लाठी मारी और कांच तोड़ दिया। इसके बाद एक युवक ने कार के फ्रंट शीशे को मुक्का मारकर तोड़ दिया। तभी भीड़ से दो पुलिसवाले आए और कार के अंदर पीछे की सीट पर जाकर बैठ गए। बाहर खड़े विकुल चपराणा और अन्य लोग इन दोनों युवकों को धमकाते रहे। बाद में विंडो सीट पर बैठा युवक बाहर आया, उससे माफी मंगवाई गई। 19 सेकेंड में क्या दिख रहा, जानिए वीडियो में दिख रहा है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी है। गाड़ी के साथ एक आदमी मौजूद है, जो हाथ जोड़कर माफी मांगता है। सड़क पर सिर झुकाता और नाक रगड़ता है। आसपास सिक्योरिटी गार्ड भी खड़े हैं। पास खड़ा एक युवक बहुत गुस्से में है, जो बार-बार राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर का नाम लेकर युवक को गालियां देता और चिल्लाता दिख रहा है। युवक कहता है...हाथ जोड़कर कह, सोमेंद्र तोमर गलती हो गई... तेरा बाप है सोमेंद्र तोमर... तेरी... सोमेंद्र तोमर भइया है मेरा, चल निकल उधर जा... पूरे मामले में SP ने कहा है कि- जांच के बाद सख्त एक्शन लेंगे इस घटना ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और आरोपियों को रोका तक नहीं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।........... इ
भोपाल। भोपाल में चलन में आई ‘जुगाड़ बंदूक’ ने दीवाली के जश्न को मातम में बदल दिया। महज 150 रुपए में मिलने वाली यह खतरनाक गन अब तक 14 बच्चों की आँखों की रोशनी छीन चुकी है और शहरभर में 200 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिनकी आँखों में गंभीर चोट आई है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गन से निकलने वाली चिंगारी और धुएं में मौजूद केमिकल्स आँखों की नाजुक झिल्ली को जला देते हैं, जिससे स्थायी रूप से दृष्टि चली जाती है। कार्बाइड और पानी की रासायनिक प्रतिक्रिया से यह गन आवाज और रोशनी पैदा करती है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर बच्चों ने इसे खरीदा और खेल-खेल में खुद को नुकसान पहुंचा बैठे। एम्स भोपाल और हमीदिया अस्पताल में अब तक 14 से ज्यादा बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। वहीं 80 से अधिक बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस के अनुसार इस गन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाएगा। कैल्शियम कार्बाइड गन – कैसे करती है काम यह गन प्लास्टिक, एल्यूमिनियम पाइप और आतिशबाजी के उपकरणों से बनाई जाती है। इसके अंदर कार्बाइड डाला जाता है और पानी की कुछ बूंदें मिलाने पर गैस बनती है, जो विस्फोटक आवाज और तेज़ चमक पैदा करती है। यह गैस बेहद खतरनाक होती है और आँखों, त्वचा व श्वसन तंत्र के लिए हानिकारक है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस गन के प्रयोग से न केवल आँखों की रोशनी जा सकती है बल्कि गंभीर जलन और दाग भी हो सकते हैं। 42 कार्बाइड गन के साथ युवक गिरफ्तार शाहजहानाबाद पुलिस ने सड़क किनारे गन बेचते हुए एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके पास से 42 कार्बाइड गन जब्त की गईं। पूछताछ में युवक ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर यह गन बनाने का तरीका देखा और दीवाली पर बेचने के लिए बड़ी संख्या में तैयार कर लीं। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और इस गन की बिक्री पर सख्त निगरानी के आदेश जारी किए हैं।