जाति है की जाती नही: संभल में बढ़ईयों ने किया दलित महिला की अर्थी बनाने से इंकार, पुलिस ने दूसरे गांव से बुलाकर बनवाई अर्थी, फिर हुआ अंतिम संस्कार

Manoj Kumar
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संवाददाता: मोहित भारद्वाज

अर्थी तैयार करता दूसरे गांव का बढ़ई

उत्तर प्रदेश: संभल में एक दलित महिला की मौत के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार के लिये गांव से बढ़ई को बुलाया तो उसने दलित महिला की अर्थी बनाने से इंकार कर दिया। एक बढ़ई के मना करने के बाद परिजन दूसरे के पास गए तो उसने भी दलित महिला की अर्थी बनाने के लिए मना कर दिया। बताया जा रहा है कि इस तरह एक-एक तीन बढ़इयों ने अर्थी बनाने से मना कर दिया तो गांव के लोग उग्र हो गए। इसके बाद पुलिस ने दूसरे गांव से बढ़ई को बुलाकर अर्थी बनवाई गई, तब महिला का अंतिम संस्कार हो सका।

घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस photo social media

जानकारी के अनुसार, ऐचौड़ा कंबोह क्षेत्र के गांव बाबूखेड़ा निवासी धर्मपाल की पत्नी 60 वर्षीय इंद्रेश की बीमारी के चलते रविवार सुबह मौत हो गई। सूचना पाकर ग्रामीणों के अलावा मृतका के रिश्तेदार भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए गांव पहुंच गए। मृतक महिला के देवर सुभाष ने बताया कि भाभी की मौत के बाद गांव निवासी सभी बढ़ईयो से अर्थी बनाने को कहा गया तो उसने अर्थी तैयार करने को मना कर दिया। कोई भी बढ़ई अर्थी बनाने को तैयार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि  पहले से ही गांव की सभी अर्थियां बढ़ई ही बनाते थे।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने भी बढ़ईयों को समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने दलित होने के कारण अर्थी नहीं बनाई। जबकि पहले यही लोग अर्थी बनाते थे। गांव में इस घटना की जानकारी थाना पुलिस को मिली तो वह गांव पहुंची। पुलिस ने मृतकों के परिजनों और बढ़ईयों से बातचीत की। लेकिन गांव के बढ़ई अर्थी बनाने को तैयार नहीं हुए। जिसके बाद  दूसरे गांव से बढ़ई को बुलाकर अर्थी को तैयार किया।

जिसके बाद परिजन दोपहर बाद करीब 3 बजे दलित महिला का अंतिम संस्कार कर सके। घटना के बाद दलित परिवारों में गांव के बढ़ईयों के प्रति नाराजगी है। इस बारे में जब अपर पुलिस अधीक्षक श्रीश्चंद्र से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि ऐसा मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। थाना पुलिस से जानकारी की जा रही है। यदि ऐसे भेदभाव का मामला है तो गलत है।

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