Councilor Salary: जानिए नगर निगम पर्षदों को कितनी मिलती है सैलरीॽ

Councilor Salary

Counselor Mahapor Salary: सभाषद या पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार लाखों रूपये खर्च करते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि पार्षद का टिकट पाने और जीतने के लिए लाखों खर्च करने वाले पार्षदों को कितना वेतन (Councilor Salary) मिलता है। अगर नही जानते हैं तो आज हम आपको यही बताने वाले हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि लाखों रूपये खर्च करके चुनाव जीतने वाले निगम पार्षदों को वेतन के तौर पर कुछ नही मिलता है। हालांकि कुछ राज्यों में हर महीने 2 हजार रूपए से लेकर 6 हजार रूपये तक मानदेय मिलता हैं। इसके अलावा एक मोबाइल सिम मिलता है‚ जिसका रिचार्ज भी पार्षदों को खुद अपनी जेब से कराना पड़ता है।

पार्षदों के लिए अपने वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए कोई विशेष निधि नहीं होती है। लेकिन एक पार्षद 30 लाख रूपए सालाना अपने क्षेत्र में विकास कार्य करा सकता है। हालांकि जिन पार्षदों की पहुंच अच्छी होती है‚ वह लोग 30 लाख रूपए से भी ज्यादा का बजट बनाकर विकास कार्य करा लेते हैं।

दिल्ली में पार्षदों कितने रूपए मिलते हैंॽ

दिल्ली जैसे बड़े राज्य की बात करें तो यहां एक पार्षद को हर साल एक करोड़ रूपए क्षेत्र में विकास कराने के लिए मिलते हैं। लेकिन जानकारी नही होने की वजह से ज्यादातर पार्षद इस रकम का उपयोग नही कर पाते हैं। वहीं कुछ राज्यों में पार्षदों को अपने वार्ड से मिलने वाले कुल संपत्ती कर का केवल 50 फिसदी हिस्सा ही विकास कार्यों के लिए मिलता है। इसके अलावा निगम में होने वाली प्रत्येक बैठक के हिसाब से 250 रूपए भत्ता भी मिलता है।

हर महीने लगभग एक या दो मीटिंग होती हैं। यानि पूरे कार्यकाल में 45 से 50 बैठके होती हैं। इस हिसाब से एक पार्षद को अपने कार्यकाल के दौरान बैठक भत्ते के रूप में केवल 15000 रूपये ही मिलते हैं। कार्यकाल पूरा होने पर जिस प्रकार विधायक अथवा सांसदो को पेंशन मिलती है‚ इस प्रकार वार्ड पार्षदों के लिए पेंशन का कोई प्रावधान नहीं है। यानि पार्षदों को पेंशन भी नही मिलती है।

हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी कम सुविधा मिलने के बाद भी पार्षद अपने पूरे कार्यकाल में करोड़ों रूपए कमा लेते हैं। और किस प्रकार कमाते हैं यह बात आप लोग अच्छे से जानते हैं।

पार्षद बनने के लिए योग्यता की बात करें तो वह सिर्फ इतनी है कि जिस वार्ड से प्रत्याशी चुनाव लड़ना चाहता है‚ उस वार्ड के वोटर लिस्ट में उसका नाम होना जरूरी है। इसके अलावा उसकी उम्र कम से कम 21 साल होनी चाहिए। इसके साथ ही प्रत्याशी का 10 वीं पास होना भी अनिवार्य है। हालांकि अलग-अलग राज्यों में योग्यता के लिए अलग-अलग नियम हैं। आशा करते हैं कि वीडियो में दी गई जानकारी आपको जरूर पसंद आयी होगी।