क्या होती है जीरो FIR‚ किन मामलों में होती है दर्ज ॽ

रवि चौहान-  Zero FIR:  जब कोई अपराध या दुर्घटना होती है तो पुलिस रिपोर्ट दर्ज करती है। जिसे एफआईआर कहा जाता है। लेकिन अधिकतर कुछ पुलिसकर्मी यह कहकर रिपोर्ट लिखने से मना कर देते हैं, कि अपराध उनके थाना क्षेत्र में नहीं हुआ है। ऐसे में आम व्यक्ति को बहुत अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।

Zero FIR

देर से शिकायत लिखने के कारण भी पीड़ित को इंसाफ नहीं मिल पाता है। आम व्यक्ति की इन्हीं कठिनाइयों को दूर करने के लिए जीरो एफ आई आर का प्रावधान किया गया हैं। आज की इस वीडियो में हम जीरो एफआईआर के बारे में ही विस्तारपूर्वक जानेंगे।

जीरो एफ आईआर क्या होती हैॽ

सबसे पहले जानते हैं कि जीरो एफ आईआर क्या होती है। तो आपको बता दें कि जीरो एफ आईआर सामान्य एफआईआर की तरह ही होती है। लेकिन इसका सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि इसमें किसी भी तरह के अधिकार क्षेत्र की अड़चनें पैदा नहीं होती हैं। आमतौर पर पुलिस एफआईआर तभी लिखती है, जब अपराध उसके थानाक्षेत्र के अंतर्गत हुआ हो। लेकिन जीरो एफआईआर में ऐसा नहीं होता है। इसमें पीड़ित व्यक्ति कहीं भी एफ आईआर दर्ज करा सकता है। इसे ही जीरो एफआईआर कहा जाता है। जीरो एफआईआर के आधार पर पुलिस अपनी जांच शुरू करती है। और बाद में केस संबंधित क्षेत्र के थाने में ट्रांसफर कर देती है।

जीरो एफआईआर की शुरूआत

जीरो एफआईआर की शुरूआत की बात करें तो साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद ही जीरो एफआईआर की शुरूआत की गई थी। इस दौरान कानूनों में सुधार करने के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने महिलाओं के प्रति होने वाले आपराधिक मामलों को कम करने और पुलिस को अधिक सशक्त बनाने के लिए कई कड़े कानूनों का सुझाव दिया था। साथ ही कुछ पुराने कानूनों में भी संशोधन किया था। इसी कमेटी ने ही जीरो एफआईआर की सुविधा का सुझाव दिया। जीरो एफआईआर के बाद पुलिस ऑफिसर को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर भी एक्‍शन लेने की छूट मिलती है।

जीरो एफआईआर के फायदें

जीरो एफआईआर के फायदों के बारे में बात करें तो जीरो एफआईआर के कई फायदे हैं। इसका पहला फायदा यह है कि
बिना देरी किए पुलिस को घटना की जानकारी मिल जाती है। जिससे कार्रवाई भी जल्द शुरू होती है। इसकी सबसे बड़ी खास बात यह है कि जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस को एक्शन लेना ही पड़ता है, भले ही मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर ही क्यों ना हो। तीसरे फायदे की बात करें तो समय पर कार्रवाई होने पर कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों व सबूतों को नष्ट होने से बचाया जा सकता है। वहीं पीड़ित व्यक्ति को इंसाफ पाने के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ता है।

किन स्थितियों में दर्ज करा सकते हैं जीरो एफआईआर

अब बात करतें हैं कि आप किन स्थितियों में जीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। बता दें कि बेहद संगीन मामलों में ही आप जीरो एफ आईआर दर्ज करा सकते हैं। संगीन मामलों का मतलब रेप, हत्या‚ जानलेवा हमला और डकैती जैसे अपराधों से होता है। इन मामलों में आप तुरन्त जीरो एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। हालांकि जीरो एफआईआर ज्यादातर रेप केस में ही दर्ज होती हैं, ताकि पीड़िता की तुरंत मेडिकल जांच की जा सके और उसे समय से न्याय मिल सके।

धन्यवाद।