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महज 8 महीने में बर्बादी के कगार पर पहुंचे Jack Ma‚ जानिए कैसे चीनी सरकार पड़ी पीछे

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 8 महीनों में जैक मां की आधी से ज्यादा दौलत घट गई है। जिसके चलते अब वह दुनिया भर के अमीर लोगों की सूची से भी बाहर हो गए हैं।

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और सरकार के खिलाफ की गई एक टिप्पणी चीन की सबसे बड़ी टेक कंपनी अलीबाबा [ Alibaba ] के मालिक जैक मा [ Jack Ma ] को इतनी भारी पड़ी कि महज 8 महीनों में वो बर्बाद हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले 8 महीनों में जैक मां की आधी से ज्यादा दौलत घट गई है। जिसके चलते अब वह दुनिया भर के अमीर लोगों की सूची से भी बाहर हो गए हैं।

News -18 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 8 महीने पहले तक जैक मा की कंपनी अलीबाबा की वैल्यूएशन लगभग 157 अरब डॉलर थी जो अब घटकर महज 588 अरब डॉलर रह गई है। वही उनकी दूसरी कंपनी द एंट ग्रुप (The Ant Group) का वैल्यूएशन 8 महीने पहले 470 अरब डॉलर था जो अब घटकर करीब 108 डॉलर ही रह गया है। पिछले साल चीनी सरकार ने द एंट ग्रुप के 37 अरब डॉलर के आईपीओ पर रोक लगा दी थी जिसके बाद जैक मा को भारी नुकसान हुआ है।

कभी बोलती थी दुनिया में तूती

बिजनेस की दुनिया में जैक मा एक ऐसा नाम था जिसे शायद ही कोई ना जानता हो। एक समय में दुनिया भर के बाजारों में जैक मा के नाम का डंका बजता था। युवा वर्ग उनकी कंपनी में नौकरी करने के लिए तरसते थे। लाखों लोगों जैक मा से प्रेरणा लेते थे। लेकिन चीनी सरकार के तानाशाह पूर्ण रवैया के खिलाफ आवाज उठाना जैक मा को इतना भारी पड़ा की अब उनकी कंपनियों का अस्तित्व खत्म होने को है।

राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी ज्यादा थी प्रसिद्धि

एक साल पहले तक चीन के सबसे अमीर लोगों की सूची में शामिल होने वाले जैक मा इस सूची से बाहर हो गए हैं। जैक मा की प्रसिद्धि इतनी थी कि उन्हें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी ज्यादा लोग सर्च करते थे। दुनिया के बड़े और दिग्गज बिजनेसमैन लोगों में जैक मा का नाम सबसे पहले आता था।

गूगल‚ अमेज़न और एप्पल के बाद अकेले अलीबाबा ऐसी कंपनी थी जिसकी कीमत सबसे ज्यादा थी। लेकिन सरकार के खिलाफ मामूली टिप्पणी करना जैक मां को इतना भारी पड़ेगा ये उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।

जानिए क्या कहा था जैक मा ने

दरअसल बात 24 अक्टूबर 2020 की है। एक इवेंट के दौरान जैक मा ने चीन के नौकरशाही तंत्र की आलोचना की थी। उन्होने ने भाषण देते हुए वित्‍तीय नियामकों (Financial Regulators) को और सरकारी बैंकों (PSBs) पर कड़ा प्रहार किया था। जैक मा ने चीन के बैंकों की तुलना गिरवी रखने वाले सूदखोरों से की थी। जैक मा ने सरकार से अपील की थी कि ऐसे सिस्टम में बदलाव किया जाए जो युवा और नए कारोबारियों के प्रयास को दबा रहे हैं।

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