सांकेतिक चित्र ( साभार सोशल मीडिया)

UP News: गाजियाबाद की कंपनी द्वारा बनाए गए कफ सिरप पीने से उज्बेकिस्तान में 18 मासूम बच्चों की मौत हो गई। यह बात दिसंबर 2022 की है। यूपी पुलिस ने करीब चार महीने बाद कंपनी से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि दवाई के जो सैंपल लिए गए थे वाे जांच में सही नहीं पाए गए। इसके बाद गाजियाबाद के ड्रग इंस्पेक्टर की शिकायत पर थाना फेस-3 में शुक्रवार रात मुकदमा दर्ज किया गया जिसके बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की है।

गिरफ्तार किए गए लोगों में कंपनी के ऑपरेशन हेड सहित तीन अन्य शामिल है। जबकि कंपनी के मालिक फरार हैं और उनकी तलाश की जा रही है. आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) विभाग ने सेक्टर-67 स्थित दवा फर्म मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड का लाइसेंस पहले ही निलंबित कर दिया था।

कफ सिरप मानकों के ऊपर खरा नहीं उतरा
इस मामले में जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि गाजियाबाद के ड्रग इंस्पेक्टर आशीष ने थाना फेस -3 में बीती रात को रिपोर्ट दर्ज कराई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि सेक्टर 67 स्थित एक दवा बनाने की कंपनी में निर्मित कफ सिरप मानकों के ऊपर खरा नहीं उतरा है। इस मामले में कंपनी की डायरेक्टर जया जैन, सचिन जैन, ऑपरेशन हेड तुहीन भट्टाचार्य, मैन्युफैक्चरिंग केमिस्ट अतुल रावल तथा मूल सिंह आदि के खिलाफ धारा 274, 275, 276 ,औषधि प्रसाधन सामग्री अधिनियम 17,17ए,17 -बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

अक्टूबर 2022 में हरियाणा की मेडन फार्मास्युटिकल्स का सिरप पीने से कथित तौर पर हुई थी 48 बच्चों की मौत

आपको बता दें साल 2022 में भारतीय कंपनियो द्वारा निर्मित दवाइयों से कथित तौर 66 बच्चों की मौत हुई थी। इनमें अक्टूबर 2022 में हरियाणा की मेडन फार्मास्युटिकल्स द्वारा बनाई गई ‘विषाक्त’ दवाओं का सेवन करने से गांबिया में 48 बच्चों की कथित तौर पर मौत हुई थी। जबकि दिसंबर 2022 में गाजियाबाद की मैरियन बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित कप सिरप पीने से कथित तौर पर 18 मासूम बच्चों की जान चली गई।

अमेरिका की सीडीसी रिपोर्ट ने ठहराया जिम्मेदार

सीडीसी, डब्ल्यूएचओ और गांबियन राष्ट्रीय सभा के लोगो. बैकग्राउंड में कफ सीरप की तस्वीर (फोटो साभार द-वायर)

आपको बता दें कि यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (यूएस-सीडीसी) ने इस मामले अपनी तीसरी रिपोर्ट जारी की है। जांच में अब पाया गया है कि भारत स्थित मेडेन फार्मास्युटिकल्स द्वारा बनाई गई ‘विषाक्त’ दवाओं का गांबिया में पिछले साल अगस्त और दिसंबर के बीच हुई 66 बच्चों की मौत से ‘संबंध’ था. यूएस-सीडीसी रिपोर्ट 3 मार्च को प्रकाशित हुई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले साल पश्चिमी अफ्रीकी देश गांबिया के बच्चों में किडनी की घातक दिक्कतों से चार कफ सीरप बच्चों की मौत का कारण बने।

हालांकि, भारत सरकार ने गांबिया को निर्यात किए गए उसी बैच के कंट्रोल सैंपल (नियंत्रण नमूनों) के परीक्षण के बाद जांच में सही पाया था। जिसके बाद घटना में फर्म को क्लीनचिट दे दी गई थी. लेकिन डब्ल्यूएचओ ने इस रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था और इस साल जनवरी में विवादित चार उत्पादों के खिलाफ नए सिरे से अलर्ट जारी किया था। इन उत्पादों में प्रोमेथेजिन ओरल सॉल्यूशन, कोफेक्समलिन बेबी कफ सीरप, मैकॉफ बेबी कफ सीरप और मैग्रिप एन कोल्ड सीरप शामिल हैं।

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