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Story: 18 साल से जंजीरों में जकड़ी है हरिसिंह की जिंदगी, शादी के सप्ताह बाद ही खो दिया था मानसिक संतुलन‚ ये है वजह…

जंजीर में कैद हरिसिंह

भले ही सरकार लोगों को मुफ्त जांच और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के दावे कर रही है, लेकिन इसके विपरीत, गरीबी और अशिक्षा के कारण लोग अभी भी अपने प्रियजनों का इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जैसलमेर जिले के भनियाना उपखंड क्षेत्र के ग्राम रूपसर में सामने आया है। यहां, मानसिक बीमारी से पीड़ित 45 वर्षीय हरि सिंह 18 साल से जंजीरों में कैद हैं।

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जैसलमेर जिले के भनियाना उपखंड क्षेत्र के ग्राम रूपासर के हरि सिंह के जीवन में लगभग 18 साल पहले सब कुछ ठीक- ठाक चल रहा था। वह मजदूरी करने के बाद परिवार की देखभाल कर रहा था। इसके बाद परिवार ने हरि सिंह की शादी कर दी। लेकिन शादी के एक हफ्ते बाद परिवार पर ऐसा कहर ढाया कि हरि सिंह अपना मानसिक संतुलन खो बैठे। मानो परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। गरीबी की स्थिति के बावजूद, सेठ से साहूकारों से कर्ज लिया। नई नवेली पत्नी के गहने बेचकर जोधपुर के मथुरा दास माथुर अस्पताल में उनका इलाज कराया। कुछ फर्क महसूस हुआ तो परिवार वाले उसको अपने घर ले आया।

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कुछ दिनों के बाद हरि सिंह ने फिर से वही काम करना शुरू कर दिया। एक बार फिर जोधपुर (जोधपुर) ले गए। उन्होंने कई जगहों पर इलाज करवाया और लाखों रुपये खर्च किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे उसका अधिक इलाज भी नहीं करवा सकते थे। इससे तंग आकर वह हरि सिंह को घर ले आये और घर से बाहर एक पेड़ से खुले आसमान के नीचे, एक जानवर के बाड़े में जंजीर से बांध दिया।  चाहे सर्दी हो या गर्मी हो या बारिश हो हरि सिंह पिछले 18 वर्षों से इस स्थिति में पेड़ से बंधे रह रहे हैं।

परिवार का क्या कहना है

परिवार के सदस्यों ने कहा कि मानसिक संतुलन खराब होने के कारण हरि सिंह कूड़ा करकट समेत कुछ भी खा लेते हैं। अगर जंजीरें खोल दो तो वह कहीं भी चला जाता है लोगो को पत्थर मारता है। इस वजह से, उसे 18 साल से  बांधना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में, माँ, पत्नी को केवल हरि सिंह को अपने हाथों से खाना खिलाना, नहलाना, जैसे नित्य कर्म करने पड़ते है।  बेटे की दयनीय हालत देखकर मां का दिल दहल जात  है और पत्नी का भी रो रोकर बुरा हाल है हालांकि उसने अब अपनी किस्मत समझ कर उससे समझौता कर लिया है।

संतान का सुख नहीं मिला

हरि सिंह की शादी के एक हफ्ते बाद, ऐसा मानसिक संतुलन बिगड़ गया कि 18 साल  की वैवाहिक उम्र बीतने पर भी पत्नी को संतान का सुख नहीं मिला, तो हरिसिंह की माँ भी दुखी मन के साथ कहती है कि अगर उसका मानसिक संतुलन न गड़बड़ाता तो हरि को संतान सुख मिलता। मेरी भी पोते को देखने की इच्छा पूरी हो जाती।

दो वक्त का खाना मिलना है मुश्किल

परिवार के एकमात्र कमाने वाले हरिसिंह 18 साल से जंजीरों में कैद हैं। ऐसे में परिवार में कोई दूसरा कमाने वाला नहीं है।  हरि के मानसिक संतुलन खोने से दुखी पिता की सदमे से मृत्यु हो गई। ऐसी स्थिति में, केवल हरि सिंह की मां ही पिछले 18 वर्षों से अपने बेटे की परवरिश कर रही हैं।

BPL कार्ड का भी लाभ नही

जहां साधन संपन्न लोग बीपीएल खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ ले रहे हैं, लेकिन इसके विपरीत, हरि सिंह का परिवार इतना गरीब है कि 70 साल की विधवा मां के पास भी प्रतिदिन दो भोजन हो रहे हैं। सरकार द्वारा न तो बीपीएल खाद्य सुरक्षा, पेंशन सुविधा दी जा रही है। हरि सिंह की मां ने हरि सिंह का इलाज कराने और परिवार की मदद के लिए सरकारी प्रशासन से मांग की है।

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