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सच्ची कहानियां

अनौखी परम्पराǃ साल में 5 दिन बिना कपड़ों के रहती हैं इस गांव की महिलाएं

मान्यता है कि इन पांच दिनों में अगर कोई भी महिला कपड़े पहनती है तो उसके घर में कुछ अशुभ हो सकता है। इनता नही परंपरा को नही मानने वालों के अनहोनी हो जाती है। बताया जाता है कि सदियों ये परंपरा गांव के प्रत्येक घर में निभाई जाती है।

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नीरज गोला

हिमाचल – देश-दुनिया में सैकड़ों ऐसे रीति-रिवाज और परंपराएं (Tradition) हैं जिन पर भरोसा कर पाना कठिन होता है। इन्हे जानकार हम सोच में पड़ जाते हैं कि आज के दौर में भी ऐसी बातों पर यकीन किया जाता है। हमारे देश में भी संस्कृति और परंपराओं का अनुपालन वर्षों से किया जाता रहा है. आज हम आपको ऐसी विचित्र प्रथा के बारे में बताएंगे जो कि भारत में ही चली आ रही है। इसके बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।


दरअसल हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के मणिकर्ण घाटी में पीणी नामक एक गांव है। यहां पर सदियों से एक ऐसी प्रथा चली आ रही जिसमें पूरे गांव में पांच दिनों तक सभी शाशी शुदा महिलाएं बिना कपड़ों के रहती है। खास बात ये है कि इन पांच दिनों की अवधि के दौरान इन महिलाओं के पति इन्हे हाथ तक नही लगाते हैं और उनसे दूरी बनाए रखते हैं।

सावन में निभाई जाती है यह परंपरा
इस गांव में यह अजीबोगरीब परंपरा हर साल सावन के महीने के दौरान निभाई जाती है। यहां के लोगों की मान्यता है कि इन पांच दिनों में अगर कोई भी महिला कपड़े पहनती है तो उसके घर में कुछ अशुभ हो सकता है। इनता नही परंपरा को नही मानने वालों के अनहोनी हो जाती है। बताया जाता है कि सदियों ये परंपरा गांव के प्रत्येक घर में निभाई जाती है।

5 दिन कोई पुरूष नही करता है नशा

रिपोर्ट के अनुसार इन 5 दिन की अवधि के दौरान गांव का कोई भी पुरूष किसी प्रकार नशा नही करता है। कोई भी पुरुष शराब‚ बीड़ी‚ सिगरेट आदि को हाथ तक नहीं लगाता है।


आपको बता दें कि सावन के महीने के पांच दिनों में पति-पत्नी को एक-दूसरे से दूर रहना होता है ।कहा जाता है कि इस दौरान यहां की महिलाएं कपड़े नहीं पहनती लेकिन इसके बजाए ऊन से बने पहाड़ी कपड़ा; जिसे पट्टू कहा जाता है,

ये है मान्यता

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यहां के रहने वाले लोगों की मान्यता है कि जब यहां के मशहूर देवता लाहुआ घोंड पीणी गांव पहुंचे थे तो उस वक्त कुछ राक्षसों ने यहां अपना कब्जा जमा रखा था। राक्षस सुंदर कपड़े पहनने वाली औरतों को उठा ले जाता था, जिसके चलते उस दौरान महिला ने 5 दिनों तक कपड़े पहनने बंद कर दिए थे। इसके बाद ही गांव में देवताओं ने राक्षसों का अंत किया।

मान्यता है कि लाहुआ देवता आज भी गांव में आते हैं और बुराइयों से लड़ाई लड़ते हैं। अगस्त महीने में आने वाले भादो संक्रांति को यहां के लोग काला महीना भी कहते हैं। इसी दिन लाहुआ घोंड देवता ने पीणी गांव में पांव रखा था और फिर यहां मौजूद राक्षसों का विनाश कर दिया था। उसी के बाद से ही इस रीति-रिवाज की शुरुआत हुई थी और यह प्रथा अभी तक चली आ रही है।

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