मनोज कुमार

तिरुपति बालाजी मंदिर

आंध्र प्रदेश: दक्षिण भारत के सभी मंदिर अपनी भव्यता और सुंदरता के लिए मशहूर हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर सबसे ज्यादा लोकप्रिय और विश्व विख्यात है। रोज करोड़ों रुपए का दान आने के कारण इस मंदिर को भारत का सबसे धनी मंदिर माना जाता है। शनिवार को मंदिर ने अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर की कुल संपत्ति 2.26 लाख करोड़ की है। जो कई देशों की कुल जीडीपी से कहीं ज्यादा है।

श्री तिरुपति बालाजी

शनिवार को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम  की तरफ से जारी किये गए श्वेत पत्र के अनुसार तिरुपति बालाजी मंदिर का लगभग 10.3 टन सोना और 15938 हजार करोड़ रुपए की नकदी राष्ट्रीयकृत बैंको में सुरक्षित रखी हुई है। इसके अलावा मंदिर के पास अलग-अलग जगहों पर 7 हजार 123 एकड़ में फैली कुल 960 प्रॉपर्टीज हैं। यहां चांदी कीमती पत्थर, सिक्के, कंपनी के शेयर और प्रॉपर्टी जैसी चीजें भी दान की जाती हैं। इस तरह कुल मिलाकर मंदिर के पास लगभग 2.26 लाख करोड़ रुपए की संपति है। मंदिर ने 90 सालों में पहली बार अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक किया है। 

फोटो: सोशल मीडिया

इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि यह मेरूपर्वत के सप्त शिखरों पर बना हुआ है, इसकी सात चोटियां शेषनाग के सात फनों का प्रतीक कही जाती हैं। इन चोटियों को शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरुड़ाद्रि, अंजनाद्रि, वृषटाद्रि, नारायणाद्रि और व्यंकटाद्रि कहा जाता है। किवदंतियों के अनुसार माना जाता है की व्यंकटाद्रि नाम की चोटी पर भगवान विष्णु विराजमान रहते हैं। जिस वजह से उन्हें व्यंकटेश्वर के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक सरोवर के किनारे निवास किया था। श्री वेंकटेश्‍वर मंदिर समुद्र तल से 3200 फीट ऊंचाई पर स्थित तिरुमला की पहाड़ियों पर बना है।

तिरुपति बालाजी मंदिर की कुछ रोचक जानकारी:-

तिरुपति मंदिर में बालाजी के दिन में तीन बार दर्शन होते हैं। पहला दर्शन सुबह के समय होता है जो विश्वरूप कहलाता है। दूसरा दर्शन दोपहर को और तीसरा दर्शन रात को होता है। भगवान बालाजी की सम्पूर्ण मूर्ति के दर्शन केवल शुक्रवार सुबह को अभिषेक के समय ही किए जा सकते हैं।

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में बालाजी मंदिर के अलावा और भी कई मंदिर हैं। जैसे आकाश गंगा,वैकुंठ तीर्थ,पापनाशक तीर्थ,जालावितीर्थ, तिरुच्चानूर। ये सभी जगहें भगवान की लीलाओं से जुड़ी हुई हैं।

सभी अन्य वैष्णव मंदिरों की तरह यहां पर भगवान को रोज तुलसी पत्र चढ़ाया जाता है। पूजा के बाद उस तुलसी पत्र को मंदिर परिसर में मौजूद कुएं में डाल दिया जाता है। उसे भक्तों को प्रसाद के रूप में नहीं दिया जाता।

यहां पर मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने मन से सभी पाप और बुराइयों को यहां छोड़ जाता है, उसके सभी दुःख देवी लक्ष्मी खत्म कर देती हैं। इसलिए यहां अपनी सभी बुराइयों और पापों के रूप में लोग अपने बाल छोड़ जाते हैं।

कहा जाता है कि श्रीरामानुजाचार्य जी लगभग डेढ़ सौ साल तक जीवित रहे और उन्होंने सारी उम्र भगवान विष्णु की सेवा की, जिसके फलस्वरूप यहीं पर भगवान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे।

Manoj Kumar