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उत्तरप्रदेश

Meerut News: श्मशान घाट के पास पॉलिथीन बैग में रखकर छोड़ गए परिजन, जिंदा बच्ची पर उछल रहे थे बंदर, कुत्ते

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मेरठ। के टीपीनगर से ममता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। जहां एक कलयुगी मां ने अपनी नवजात बेटी को थैले में बंद कर श्मशान घाट के सामने फेंक दिया. मासूम बच्चे की रोने की आवाज सुनकर इलाके के लोग मौके पर पहुंच गए। देखा तो पॉलीथिन बैग से बच्ची के रोने की आवाज आ रही थी। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने नवजात को अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन डॉक्टरों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया. पुलिस नवजात बच्ची की मां की तलाश कर रही है.

बंदर और कुत्ते पॉलिथीन की थैलियों पर उछल-कूद कर रहे थे

इस बच्चे को सबसे पहले स्थानीय निवासी लक्ष्य ने देखा था. लक्ष्य ने बताया कि उसने बच्चे के रोने की आवाज सुनी. उसने ध्यान से सुना तो उसे मरघट के बाहर से लड़की के रोने की आवाज सुनाई दी। वह उस तरफ गया तो देखा कि एक पॉलिथीन बैग से रोने की आवाज आ रही थी। उस थैले पर बंदर उछल-कूद कर रहे थे। किसी तरह युवक ने बंदरों और कुत्तों को भगाया और जब बैग खोला तो उसके अंदर एक बच्ची थी। वह रो रही थी। टीपीनगर निवासी लक्ष्य ने बताया कि बुधवार सुबह वह मलियाना स्थित श्मशान घाट के पास से गुजर रहा था। इसी दौरान उन्होंने सड़क किनारे पड़े एक थैले पर बंदरों के झुंड को कूदते देखा. बैग में हलचल देखकर लक्ष्य ने उसे खोला तो उसमें एक नवजात बच्ची दर्द से कराह रही थी। यह दृश्य देखकर लक्ष्य के होश उड़ गए।

लड़की को अस्पताल ले जाया गया, मौत हो गई

इसके बाद युवक ने अन्य लोगों को मौके पर बुला लिया। साथ ही पुलिस को भी बुला लिया. जब बच्ची को बैग से बाहर निकाला गया तो उसके हाथ-पैर हिल रहे थे। इसके बाद बच्ची को केएमसी अस्पताल ले जाया गया. जहां कुछ देर बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

श्मशान के पास छोड़ दिया

पुलिस ने नवजात बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. उधर, घटना को लेकर क्षेत्रवासियों में जबरदस्त आक्रोश है। हर कोई कलयुगी मां को कोस रहा था। थाना प्रभारी का कहना है कि नवजात बच्ची को फेंकने वाली मां की तलाश के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। जल्द ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

जिसने भी इसे फेंका उसे बुरी तरह पीटा जाएगा।

इस कार्रवाई से लोग काफी नाराज हैं. लड़की को ढूंढने वाले लक्ष्य ने कहा कि अगर हमें पता होता कि लड़की को किसने छोड़ा है तो हम पहले उस शख्स को मार देते और फिर पुलिस को इसकी सूचना देते. बच्ची महज एक दिन की पैदा हुई थी. बच्ची के शरीर पर कुछ महिलाओं के अंडरगारमेंट्स थे. महिला ने बच्चे को अपने अंडरगारमेंट्स पहनाए हुए थे। ऐसा लगता है जैसे मां ने बच्चे को अपने कपड़े पहनाए और फिर फेंक दिया.

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Meerut: पांच साल पहले जब्त किये गए 22 ऊंटों को हज़म कर गई मेरठ पुलिस‚ हाईकोर्ट पहुंचा मालिक

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मेरठ: खबर यूपी के मेरठ से है‚ जहां साल 2019 में लिसाड़ी गेट पुलिस ने कुर्बानी के लिए आए 22 ऊंट को जब्त कर लिया था‚ लेकिन पांच साल बाद भी अभी तक मालिक को वापस नही किये।  ऊंटों को वापस लेने के लिए कई बार ऊंट मालिक ने पुलिस सहित प्रशासन से गुहार लगाई है। ऊंट नहीं मिलने पर ऊंट मालिक ने हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर मेरठ पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।

सांकेतिक चित्र

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्स-ऊ-जमां का कहना है कि जब पुलिस ने ऊंट पकड़े तो मालिक को वापस भी करना होगा। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कोतवाली ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। लिसाड़ी गेट इंस्पेक्टर से रिपोर्ट तलब की है।

मेरठ में वर्ष 2019 के अगस्त माह में ईद के दौरान मेरठ पुलिस व जिला प्रशासन ने ऊंट की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस दौरान 22 ऊंट लिसाड़ी गेट पुलिस ने पकड़ लिये थे। पुलिस ने उस समय बताया था कि सभी 22 ऊंट को संरक्षण केंद्र में भिजवा दिया गया है।

ऊंट मालिक मो. अनस का आरोप है कि पकड़े गए ऊंट उसे वापस नहीं मिले। जबकि इस संबंध में कई बार सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिक स्वामी के पक्ष में ऊंट को सौंपने का आदेश दिया गया था। इसके बाद 2022 में मो. अनस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ऊंट वापस दिलाने की गुहार लगाई गई।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्स-ऊ-जमां का कहना है कि हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2023 को आदेश पारित कर ऊंट वापस दिलाने को कहा है। इस आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। अब पुनः याचिका दायर की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रदेश सरकार के गृह सचिव, मेरठ मंडल की कमिश्नर, डीएम, एसएसपी और सिटी मजिस्ट्रेट को पार्टी बनाया गया है। सरकार और प्रशासन से ऊंट वापस दिलाने की गुहार लगाई गई है। जब पुलिस ने जब्त किया है तो वापस भी दिलाने का काम तो करेगी। 18 मार्च को हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई होगी।

22 ऊंट प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार श्री वास्तव ने कहा की माननीय न्यायालय का मामला है। इस पर कुछ नहीं कह सकते। पुलिस को पत्र लिख भेजा है जानकारी मिलने पर न्यायाल को अवगत करवा दिया जायेगा। वहीं सीओ कोतवाली आशुतोष कुमार ने कहा की पुराना मामला है पत्रवालियां निकलवाई जा रही है। उच्चाधिकारी और न्यायालय को अवगत करवा दिया जायेगा ।

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केजरीवाल के बाद अब अखिलेश को घेरने में जुटी BJP‚ दस साल पुराने में मामले CBI ने भेजा समन

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी एक-एक करके सभी विपक्षी दलों पर कानूनी शिकंजा कसती जा रही है‚ ताकि चुनाव में कोई उसे टक्कर न दे सके। कांग्रेस‚ टीएमसी‚ झामुमो और आम आदमी पार्टी के बाद अब निशाने पर यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को उन्हे अवैध खनन मामले में समन भेजा है। CBI ने अखिलेश को 29 फरवरी यानी गुरुवार को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।

अखिलेश

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश इस मामले में बतौर गवाह पेश होंगे। हालांकि, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि मीडिया से जानकारी मिली है कि CBI ने अखिलेश यादव को नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक ऑफिशियल रूप से नोटिस नहीं मिली है। बता दें कि साल 2012-13 में सीएम रहते खनन विभाग अखिलेश यादव के पास था, उस समय अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

क्या है पूरा मामला

दरअसल सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हमीरपुर में 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन का मामला सामने आया था। योगी सरकार बनने पर इस मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग एक्ट समेत कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला समेत सभी 11 लोगों को नामजद किया गया था। सीबीआई ने आईएएस अफसर बी. चंद्रकला के घर भी छापा मारा था। इस मामले में आईएएस बी. चंद्रकला और सपा एमएलसी रहे रमेश चंद्र मिश्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

IAS बी चंद्रकला पर भी लगे थे आरोप

साल 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो उसमें पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम सामने आया। इतना ही नहीं अखिलेश यादव सरकार में कई जिलों की डीएम रहीं बी. चंद्रकला पर भी आरोप लगे और उनके यहां भी छापेमारी हुई। वहीं पिछले काफी समय से अखिलेश यादव सीबीआई और ईडी को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे हैं। वे लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव के वक्त सरकार सीबीआई और ईडी को राजनेताओं पीछे लगा देती है। ऐसे में अब सीबीआई के समन पर भी यूपी की सियासत गरमाने वाली है। माना जा रहा है कि सीबीआई अखिलेश यादव को गिरफ्तार भी कर सकती है।

 

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लखनऊ: कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही अकबरनगर में गरजा योगी का बुल्डोजर‚ सैकड़ों लोग किये बेघर और बेरोजगार

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लखनऊ: विकास और कथित अतिक्रमण के नाम पर बीजेपी सरकार देश भर में अब तक लाखों लोगों को बेघर- बेरोजगार कर चुकी है। इस कड़ी में अब लखनऊ के अकबरनगर में रह रहे हजारो लोगों का भी नंबर आ चुका है। सोमवार को जैसे ही हाईकोर्ट ने रोक हटाई‚ वैसे ही योगी सरकार हरकत में आ गई और अकबरनगर में दर्जनों बुल्डोजर 50 साल पुरानी इस बस्ती को ढहाने पहुंच गए।

सोमवार शाम से ही योगी सरकार के बुल्डोजर लगातार कहर ढाह रहे हैं। मंगलवार को दूसरे दिन भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है. एलडीए ने सुबह से शाम तक 150 से ज्यादा मकानों और दुकानो को नेस्तनाबूद कर दिया। इस बीच हाईकोर्ट ने जीएसटी और इनकम टैक्स चुकाने वाले कब्जाधारियों की याचिका खारिज कर दी. इनमें फैजाबाद रोड के 24 शोरूम संचालक भी शामिल हैं। शाम साढ़े चार बजे कोर्ट के फैसले की कॉपी मिलते ही एलडीए का बुलडोजर शोरूम की ओर बढ़ गया। शोरूम को ध्वस्त करते समय अयोध्या रोड को पूरी तरह खाली करा लिया गया। जब तोड़फोड़ शुरू हुई तो आधे किलोमीटर तक सिर्फ धूल का गुबार नजर आ रहा था. शाम को शुरू हुई कार्रवाई देर रात तक जारी रही।

आपको बता दें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने दो माह पहले 50 साल पुराने अकबरनगर में कुकरैल स्थित जमीन पर अवैध कब्जा बताकर ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें अयोध्या रोड पर बनी 101 दुकानें और शोरूम भी शामिल हैं। इनमें से 24 शोरूम मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में तब कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

लेकिन सोमवार को हाईकोर्ट ने याचिका दायर न करने वालों के अवैध निर्माण गिराने की इजाजत दे दी थी. इस पर एलडीए ने सोमवार से अभियान शुरू कर दिया था। यह अभियान मंगलवार को भी जारी रहा. सुबह से दोपहर तक 80 झुग्गियां हटाई गईं। इस बीच हाई कोर्ट ने शोरूम मालिकों की याचिका खारिज कर दी.

हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के दस मिनट के भीतर शोरूम के रैंप तोड़े जाने लगे। इसके बाद कई बुलडोजर एक साथ लगाए गए। सबसे पहले ताजमहल फर्नीचर पर कार्रवाई शुरू हुई। अगले 10 मिनट में सभी 24 शोरूम पंक्चर कर दिए गए और एक घंटे में छह दुकानें ध्वस्त कर दी गईं। बाकी दुकानें भी 50 प्रतिशत तक तोड़ दी गईं। इसके बाद रात में भी कार्रवाई जारी रही।

रोती रही महिलाएं‚ बिलखते रहे बच्चे

प्रशासन की इस कार्रवाई से अकबरनगर के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। अपना आशियान छिन जाने से लोग काफी हताश और मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं। वहीं प्रशासन अपनी कार्रवाई में पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है।

रात में अभियान जारी रखने के लिए पूरे इलाके में हाइड्रोजन लाइटें भी लगाई गईं। सुरक्षा के लिहाज से पूरा रास्ता बंद रखा गया। कार्रवाई के दौरान एलडीए वीसी डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह, डीसीपी रवीना त्यागी समेत कई अफसर मौजूद रहे। पुलिसकर्मी गलियों में गश्त करते रहे, पूरे इलाके में चार ड्रोन से नजर रखी गई और भीड़ जुटने से रोकने के लिए अनाउंसमेंट भी किया जाता रहा।

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