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उत्तरप्रदेश

यूपी की योगी सरकार का अब तक का सबसे बड़ा बजट, मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना शुरू

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उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में बजट पेश किया. वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए राज्य के बजट का आकार बढ़ाकर 7,36,437 करोड़ रुपये कर दिया है. इसमें 24,863.57 करोड़ रुपये की नई योजनाएं शामिल हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में कुल राजस्व प्राप्तियां 6,06,802.40 करोड़ रुपये और पूंजीगत प्राप्तियां 1,14,531.42 करोड़ रुपये शामिल हैं। बजट में राजकोषीय घाटा 86,530.51 करोड़ रुपये अनुमानित है जो वर्ष के अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 3.46 प्रतिशत है।

किसानों पर मेहरबान सरकार!

उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के वार्षिक बजट में राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए 5.1 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा है। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए तीन नई योजनाओं के लिए कुल 460 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट अनुमान पेश करते हुए कहा कि राज्य में कृषि क्षेत्र के लिए 5.1 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा गया है. उन्होंने कृषि क्षेत्र की प्रगति के लिए तीन योजनाओं की घोषणा की. ‘राज्य कृषि विकास योजना’ के लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान है. दूसरी विश्व बैंक समर्थित ‘यूपी एग्रीस योजना’ के लिए भी 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना भी शुरू

तीसरी योजना राज्य के विकास खंडों और ग्राम पंचायतों में स्वचालित मौसम स्टेशन और स्वचालित वर्षा मापक यंत्र स्थापित करने से संबंधित है, जिसके लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। मंत्री ने कहा कि 50 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना भी शुरू की जा रही है. इसके अलावा किसानों के निजी ट्यूबवेलों को रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने के लिए 2,400 करोड़ रुपये का परिव्यय प्रस्तावित किया गया है. यह राशि चालू वित्तीय वर्ष में दिये गये बजट से 25 प्रतिशत अधिक है.

इसका लाभ किसानों को मिलेगा

वित्त मंत्री ने कहा कि डार्क जोन में नए निजी ट्यूबवेल कनेक्शन देने पर लगी रोक हटा दी गई है, जिसका सीधा फायदा करीब एक लाख किसानों को हुआ है. वर्ष 2023-2024 में अक्टूबर 2023 तक लगभग 37 लाख किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2022-2023 में अक्टूबर 2023 तक लगभग 10 लाख बीमित किसानों को 831 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया।

युवाओं के लिए किया ये ऐलान

वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि राज्य के सभी 75 जिलों में 1,89,796 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 06 माह से 06 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के सर्वांगीण विकास के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं. प्रदेश में लगभग 2 करोड़ 6 लाख हितग्राही पूरक पोषण आहार से लाभान्वित हो रहे हैं। गरम पका हुआ भोजन योजना के अंतर्गत आंगनबाडी केन्द्रों पर 3 से 6 वर्ष के 79.37 लाख बच्चों को गरम पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। पोषण कार्यक्रम के लिए लगभग 5129 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है. आंगनबाडी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के मानदेय भुगतान हेतु लगभग 971 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है। कन्या सुमंगला योजना के लिए 700 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.

हर विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल विकसित किया जाएगा

अयोध्या, वाराणसी, चित्रकूट, लखनऊ, विंध्याचल, प्रयागराज, नैमिषारण्य, गोरखपुर, मथुरा, बटेश्वर धाम, गढ़मुक्तेश्वर, शुकतीर्थ धाम, मां शाकुंभरी देवी, सारनाथ एवं अन्य महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों पर पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण के कार्य किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास भागीदारी योजना के तहत उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक पर्यटन स्थल विकसित करने की योजना है।

युवाओं के लिए किया ये ऐलान

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्तमान में माध्यमिक स्तर पर 804 सरकारी और 729 सहायता प्राप्त स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रवीण योजना के तहत 301 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के साथ-साथ प्रमाणीकरण का भी प्रावधान है। युवाओं को दीर्घकालिक और अल्पकालिक रोजगार प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को उन्नत किया जा रहा है और निजी संस्थानों की भागीदारी से वंचित क्षेत्रों में नए केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं।

हथकरघा एवं कपड़ा उद्योग

वित्तीय वर्ष 2024-2025 में कपड़ा उद्योग में 40,000 नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य है। राज्य में टेक्सटाइल के नए हब बनाकर निवेश और रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा। हथकरघा बुनकरों के साथ-साथ पावरलूम बुनकरों के उत्थान के लिए अटल बिहारी बाजपेयी पावरलूम विद्युत फ्लैट रेट योजना के लिए राज्य सरकार द्वारा 400 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव है। पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल्स एंड अपैरल योजना के तहत लखनऊ-हरदोई में करीब 1000 एकड़ क्षेत्र में मेगा टेक्सटाइल पार्क को मंजूरी दी गई है. वाराणसी में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना हेतु भूमि क्रय हेतु 150 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है।

गांवों में 18 घंटे बिजली देने का दावा

वर्ष 2023-2024 में अप्रैल से दिसम्बर तक जिला मुख्यालय पर 24 घंटे, तहसील मुख्यालय पर 21.34 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति की गई। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन और अन्य ग्रामीण परिवारों को 50 रुपये की 10 मासिक किश्तें देने की सुविधा प्रदान की गई। इस योजना के तहत 62.18 लाख इच्छुक घरों को बिजली कनेक्शन जारी किये गये।

बुजुर्गों और गरीबों के लिए एक प्रावधान

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Meerut: पांच साल पहले जब्त किये गए 22 ऊंटों को हज़म कर गई मेरठ पुलिस‚ हाईकोर्ट पहुंचा मालिक

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मेरठ: खबर यूपी के मेरठ से है‚ जहां साल 2019 में लिसाड़ी गेट पुलिस ने कुर्बानी के लिए आए 22 ऊंट को जब्त कर लिया था‚ लेकिन पांच साल बाद भी अभी तक मालिक को वापस नही किये।  ऊंटों को वापस लेने के लिए कई बार ऊंट मालिक ने पुलिस सहित प्रशासन से गुहार लगाई है। ऊंट नहीं मिलने पर ऊंट मालिक ने हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर मेरठ पुलिस प्रशासन से जवाब मांगा है।

सांकेतिक चित्र

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्स-ऊ-जमां का कहना है कि जब पुलिस ने ऊंट पकड़े तो मालिक को वापस भी करना होगा। उधर, सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ कोतवाली ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। लिसाड़ी गेट इंस्पेक्टर से रिपोर्ट तलब की है।

मेरठ में वर्ष 2019 के अगस्त माह में ईद के दौरान मेरठ पुलिस व जिला प्रशासन ने ऊंट की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगा दिया था। उस दौरान 22 ऊंट लिसाड़ी गेट पुलिस ने पकड़ लिये थे। पुलिस ने उस समय बताया था कि सभी 22 ऊंट को संरक्षण केंद्र में भिजवा दिया गया है।

ऊंट मालिक मो. अनस का आरोप है कि पकड़े गए ऊंट उसे वापस नहीं मिले। जबकि इस संबंध में कई बार सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट से विधिक स्वामी के पक्ष में ऊंट को सौंपने का आदेश दिया गया था। इसके बाद 2022 में मो. अनस ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ऊंट वापस दिलाने की गुहार लगाई गई।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शम्स-ऊ-जमां का कहना है कि हाईकोर्ट ने 12 जनवरी 2023 को आदेश पारित कर ऊंट वापस दिलाने को कहा है। इस आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। अब पुनः याचिका दायर की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार प्रदेश सरकार के गृह सचिव, मेरठ मंडल की कमिश्नर, डीएम, एसएसपी और सिटी मजिस्ट्रेट को पार्टी बनाया गया है। सरकार और प्रशासन से ऊंट वापस दिलाने की गुहार लगाई गई है। जब पुलिस ने जब्त किया है तो वापस भी दिलाने का काम तो करेगी। 18 मार्च को हाईकोर्ट में इसकी सुनवाई होगी।

22 ऊंट प्रकरण में सिटी मजिस्ट्रेट अनिल कुमार श्री वास्तव ने कहा की माननीय न्यायालय का मामला है। इस पर कुछ नहीं कह सकते। पुलिस को पत्र लिख भेजा है जानकारी मिलने पर न्यायाल को अवगत करवा दिया जायेगा। वहीं सीओ कोतवाली आशुतोष कुमार ने कहा की पुराना मामला है पत्रवालियां निकलवाई जा रही है। उच्चाधिकारी और न्यायालय को अवगत करवा दिया जायेगा ।

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केजरीवाल के बाद अब अखिलेश को घेरने में जुटी BJP‚ दस साल पुराने में मामले CBI ने भेजा समन

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लखनऊ: लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी एक-एक करके सभी विपक्षी दलों पर कानूनी शिकंजा कसती जा रही है‚ ताकि चुनाव में कोई उसे टक्कर न दे सके। कांग्रेस‚ टीएमसी‚ झामुमो और आम आदमी पार्टी के बाद अब निशाने पर यूपी के पूर्व सीएम और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आ गए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को उन्हे अवैध खनन मामले में समन भेजा है। CBI ने अखिलेश को 29 फरवरी यानी गुरुवार को पूछताछ के लिए दिल्ली बुलाया है।

अखिलेश

जानकारी के मुताबिक, अखिलेश इस मामले में बतौर गवाह पेश होंगे। हालांकि, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि मीडिया से जानकारी मिली है कि CBI ने अखिलेश यादव को नोटिस जारी किया है। हालांकि अभी तक ऑफिशियल रूप से नोटिस नहीं मिली है। बता दें कि साल 2012-13 में सीएम रहते खनन विभाग अखिलेश यादव के पास था, उस समय अवैध खनन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए थे।

क्या है पूरा मामला

दरअसल सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हमीरपुर में 2012 से 2016 के बीच अवैध खनन का मामला सामने आया था। योगी सरकार बनने पर इस मामले में सीबीआई के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लांड्रिंग एक्ट समेत कई अन्य मामलों में एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें तत्कालीन जिलाधिकारी बी. चंद्रकला समेत सभी 11 लोगों को नामजद किया गया था। सीबीआई ने आईएएस अफसर बी. चंद्रकला के घर भी छापा मारा था। इस मामले में आईएएस बी. चंद्रकला और सपा एमएलसी रहे रमेश चंद्र मिश्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

IAS बी चंद्रकला पर भी लगे थे आरोप

साल 2016 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की जांच शुरू हुई तो उसमें पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम सामने आया। इतना ही नहीं अखिलेश यादव सरकार में कई जिलों की डीएम रहीं बी. चंद्रकला पर भी आरोप लगे और उनके यहां भी छापेमारी हुई। वहीं पिछले काफी समय से अखिलेश यादव सीबीआई और ईडी को लेकर बीजेपी सरकार पर हमलावर रहे हैं। वे लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि चुनाव के वक्त सरकार सीबीआई और ईडी को राजनेताओं पीछे लगा देती है। ऐसे में अब सीबीआई के समन पर भी यूपी की सियासत गरमाने वाली है। माना जा रहा है कि सीबीआई अखिलेश यादव को गिरफ्तार भी कर सकती है।

 

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लखनऊ: कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही अकबरनगर में गरजा योगी का बुल्डोजर‚ सैकड़ों लोग किये बेघर और बेरोजगार

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लखनऊ: विकास और कथित अतिक्रमण के नाम पर बीजेपी सरकार देश भर में अब तक लाखों लोगों को बेघर- बेरोजगार कर चुकी है। इस कड़ी में अब लखनऊ के अकबरनगर में रह रहे हजारो लोगों का भी नंबर आ चुका है। सोमवार को जैसे ही हाईकोर्ट ने रोक हटाई‚ वैसे ही योगी सरकार हरकत में आ गई और अकबरनगर में दर्जनों बुल्डोजर 50 साल पुरानी इस बस्ती को ढहाने पहुंच गए।

सोमवार शाम से ही योगी सरकार के बुल्डोजर लगातार कहर ढाह रहे हैं। मंगलवार को दूसरे दिन भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है. एलडीए ने सुबह से शाम तक 150 से ज्यादा मकानों और दुकानो को नेस्तनाबूद कर दिया। इस बीच हाईकोर्ट ने जीएसटी और इनकम टैक्स चुकाने वाले कब्जाधारियों की याचिका खारिज कर दी. इनमें फैजाबाद रोड के 24 शोरूम संचालक भी शामिल हैं। शाम साढ़े चार बजे कोर्ट के फैसले की कॉपी मिलते ही एलडीए का बुलडोजर शोरूम की ओर बढ़ गया। शोरूम को ध्वस्त करते समय अयोध्या रोड को पूरी तरह खाली करा लिया गया। जब तोड़फोड़ शुरू हुई तो आधे किलोमीटर तक सिर्फ धूल का गुबार नजर आ रहा था. शाम को शुरू हुई कार्रवाई देर रात तक जारी रही।

आपको बता दें कि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने दो माह पहले 50 साल पुराने अकबरनगर में कुकरैल स्थित जमीन पर अवैध कब्जा बताकर ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस जारी किया था। इनमें अयोध्या रोड पर बनी 101 दुकानें और शोरूम भी शामिल हैं। इनमें से 24 शोरूम मालिकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले में तब कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

लेकिन सोमवार को हाईकोर्ट ने याचिका दायर न करने वालों के अवैध निर्माण गिराने की इजाजत दे दी थी. इस पर एलडीए ने सोमवार से अभियान शुरू कर दिया था। यह अभियान मंगलवार को भी जारी रहा. सुबह से दोपहर तक 80 झुग्गियां हटाई गईं। इस बीच हाई कोर्ट ने शोरूम मालिकों की याचिका खारिज कर दी.

हाई कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के दस मिनट के भीतर शोरूम के रैंप तोड़े जाने लगे। इसके बाद कई बुलडोजर एक साथ लगाए गए। सबसे पहले ताजमहल फर्नीचर पर कार्रवाई शुरू हुई। अगले 10 मिनट में सभी 24 शोरूम पंक्चर कर दिए गए और एक घंटे में छह दुकानें ध्वस्त कर दी गईं। बाकी दुकानें भी 50 प्रतिशत तक तोड़ दी गईं। इसके बाद रात में भी कार्रवाई जारी रही।

रोती रही महिलाएं‚ बिलखते रहे बच्चे

प्रशासन की इस कार्रवाई से अकबरनगर के लोगों में भारी रोष व्याप्त है। अपना आशियान छिन जाने से लोग काफी हताश और मजबूर हैं। महिलाएं और बच्चे रोते-बिलखते नजर आ रहे हैं। वहीं प्रशासन अपनी कार्रवाई में पूरी मुस्तैदी से जुटा हुआ है।

रात में अभियान जारी रखने के लिए पूरे इलाके में हाइड्रोजन लाइटें भी लगाई गईं। सुरक्षा के लिहाज से पूरा रास्ता बंद रखा गया। कार्रवाई के दौरान एलडीए वीसी डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी, नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह, डीसीपी रवीना त्यागी समेत कई अफसर मौजूद रहे। पुलिसकर्मी गलियों में गश्त करते रहे, पूरे इलाके में चार ड्रोन से नजर रखी गई और भीड़ जुटने से रोकने के लिए अनाउंसमेंट भी किया जाता रहा।

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