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उत्तर प्रदेश

UP Panchayat Chunav 2021: यूपी के इन जिलों में कम हो जाएगी प्रधानों की संख्या‚ जानिए क्या है वजह…

लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में होने जा रहे पंचायत चुनावों (Panchayat Election) की तैयारी राज्य चुनाव आयोग ने पूरी कर ली है. संभावना जताई जा रही है कि मार्च या अप्रैल में चुनाव कराएं जा सकते हैं. ऐसे में यूपी के 75 जिलों में परिसीमन के बाद साल 2015 की तुलना में पांच सालों में पंचायतों का दायरा सिमट गया है. 2015 में जिला पंचायतों के 3120 वार्ड थे लेकिन अब येघटकर 3051 रह गए हैं.

जिसके चलते कुछ जिलों में ग्राम प्रधानों की संख्या कम हो जाएगी तो कही पर ये संख्या बढ़ जाएगी. यूपी के गोंडा, संभल, मुरादाबाद और गाजीपुर में ग्राम प्रधानों की संख्या बढ़ जाएगी. मिली जानकारी के अनुसार गोंडा में पिछली बार 1054 प्रधान चुने गए थे वहीं इस बार ये संख्या 1214 हो जाएगी. वही मुरादाबाद में 588 से 643, संभल में 556 से बढ़कर 670 और गाजीपुर में 1237 से बढ़कर 1238 ग्राम प्रधान हो जाएंगे.

इसके अलावा बाकी के 71 जिलों में या तो ग्राम प्रधानों की संख्या बीते चुनाव जितनी ही है या कम हो गई है। ज्यादातर जिले ऐसे हैं, जिनमें संख्या कम हुई है।

गुरूवार को राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव में खर्च के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है. इस गाइडलाइन ने पंचायत चुनाव में पहली बार उतरने का मन बना रहे लोगों को बड़ी राहत दी है. क्योकि आयोग ने उनका चुनाव प्रचार पर होने वाले खर्च पर रोक लगा दी है. यानि इस बार चुनावी खर्च बेहद कम कर दिया है. पिछले पंचायत चुनाव (2015) में ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए खर्च की जो अधिकतम सीमा 75 हजार रुपये थी, वह अब घटाकर महज 30 हजार रुपये कर दी गई है.

इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी को पिछले चुनाव में डेढ़ लाख रुपये खर्च की सीमा निर्धारित थी, वो अब आधी यानी 75 हजार रुपये हो गई है. इसी तरह बीडीसी सदस्य के चुनाव के लिए 25 हजार रुपये, ब्लॉक प्रमुख के लिए 75 हजार रुपये, वार्ड मेंबर के लिए 5 हजार रुपये और जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए दो लाख रुपये की खर्च सीमा निर्धारित की गई है.


निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन में साफ कर दिया गया है कि चुनावी खर्च सीमा से ज्यादा अगर कोई भी प्रत्याशी खर्च करेगा तो उसका उसे लिखित जवाब खर्च के हिसाब के साथ देना होगा. चाहे वह प्रधान पद प्रत्याशी हों या फिर वार्ड मेंम्बर, बीडीसी सदस्य, ब्लाक प्रमुख सहित कोई भी पद हो, सभी को चम्मच से लेकर कुर्सी और दरी तक का हिसाब देना पड़ेगा.

आरक्षण का काम लगभग पूरा
जानकारी मिल रही कि ग्राम पंचायतों के चुनाव के लिए आरक्षण का काम लगभग पूरा हो गया है। क्षेत्र और जिला पंचायत के आरक्षण लगभग फाइनल हैं जबकि ग्राम पंचायतों में आरक्षण तय किए जाने का काम अंतिम दौर में है। हालांकि इनके जारी होने में अभी इंतजार होगा।

सूत्रों के अनुसार चुनाव की तारीख लगभग तय होने के बाद जिलों में आरक्षण की स्थिति पर आपत्तियां मांगी जाएंगी। इसके बाद इन्हें फाइनल किया जाएगा।

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