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उत्तर प्रदेश

गन्ना मूल्य: लागत बढ़ी 75 रूपए‚ योगी सरकार ने बढ़ाए महज 25 रूपए प्रति क्विंटल

गन्ना किसानों का कहना है कि पहले की अपेक्षा अब गन्ने की लागत में 75 रूपए प्रति क्विंटल की लागत बढ़ गई है ऐसे में महज 25 रूपए बढ़ाना किसानों के साथ मजाक है। बता दें कि पहले गन्ना मूल्य 325 रुपए था जिसे अब योगी सरकार ने बढ़ाकर 350 रुपए कर दिया गया है

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) ने अपने कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion) से पहले गन्ने की कीमत में बढ़ोतरी कर दी है. सरकार ने प्रदेश के गन्ना किसानों (Sugarcane Farmers) के लिए 25 रूपए प्रति क्विंटल दाम बढ़ाने का ऐलान किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने गन्ने के मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की घोषणा की है.

हालांकि गन्ना किसानों का कहना है कि पहले की अपेक्षा अब गन्ने की लागत में 75 रूपए प्रति क्विंटल की लागत बढ़ गई है ऐसे में महज 25 रूपए बढ़ाना किसानों के साथ मजाक है। बता दें कि पहले गन्ना मूल्य 325 रुपए था जिसे अब योगी सरकार ने बढ़ाकर 350 रुपए कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि गन्ने का मूल्य बढ़ने से गन्ना किसानों की आय में 8% की वृद्धि होगी.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में किसान सम्मेलन में कहा कि राज्य में अब तक जिस गन्ने का 325 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान होता था. अब सरकार 350 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान करेगी. यही नहीं सामान्य गन्ने का भुगतान जो 315 रुपए प्रति क्विंटल होता था, उसमें भी 25 रुपये की वृद्धि होगी.

सीएम योगी का ऐलान

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में किसान सम्मेलन में कहा कि राज्य में अब तक जिस गन्ने का 325 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान होता था. अब सरकार 350 रुपए प्रति क्विंटल भुगतान करेगी. यही नहीं सामान्य गन्ने का भुगतान जो 315 रुपए प्रति क्विंटल होता था, उसमें भी 25 रुपये की वृद्धि होगी. 340 रुपये का भुगतान उसमें भी होगा. अनुपयुक्त गन्ना जिस किसान के भी पास है, प्रति क्विंटल उन्हें भी 25 रुपए की बढ़ोत्तरी का लाभ दिया जाएगा.

सीएम योगी ने कहा कि बसपा सरकार में 21 चीनी मिलें बंद हुईं थीं. पिछले साढ़े 4 सालों के अंदर हमने किसानों से अन्न की रिकॉर्ड खरीद की है. जो काम यूपी सरकार में हुए हैं, वह पिछले की सरकारें भी कर सकती थीं. 2004 से लेकर 2014 तक का शासन देश और प्रदेश के लिए अंधकार युग था. अराजकता, गुंडागर्दी का बोलबाला था. प्रदेश के किसान आत्महत्या और गरीब भूख से मर रहा था. जो आज किसानों के हितैषी बने हैं, वो तब कहां थे? पिछली सरकार ने 19,02,08 किसानों को 12,808 करोड़ रुपये का गेहूं भुगतान किया था. हमारी सरकार ने 43,75,574 किसानों को 36,504 करोड़ रुपये का गेहूं भुगतान उनके खाते में किया है.

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