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जज्बे को सलाम: जिंदगी के लिए 19 घण्टे लड़ा दिलेर, उफनती गंगा में बहे युवक की दास्तान

युवक ने बताया कि शाम 9 बजे हुए हादसे में युवक दिनेश्वर 12 बजे तक गंगा की तेज धारा में बहता रहा 20-22 किलोमीटर दूर तक बहने के बाद उफनती धारा ने रात करीब 12 बजे सोते के सहारे उसे एक टापू के किनारे लगा दिया। जंगल-झाड़ से भरे छोटे से टापू पर पहुंचकर वह दोपहर 12 बजे तक वहां नंग धड़ंग भटकता रहा।

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Author: मनोज कुमार

जांबाज युवक दिनेश्वर

बिहार के एक युवक को जीने की आस से ऐसी हिम्मत आयी कि उसने 19 घंटे लड़कर मौत को भी हरा दिया। यह हिम्मत और जीने के जज्बे की ऐसी ही कहानी है। दरअसल, सोमवार (9 अगस्त) की शाम को गंगा में आरा-छपरा पुल के नीचे पिलर से टकराकर एक बड़ी नाव डूब गई थी। हादसे में नाव में सवार 12 मजदूरों में से 6 को नाविकों ने बचा लिया था।

बाकी 6 लोग गंगा के तेज बहाव में बह गये। इन बहने वालों में बड़हरा प्रखंड के सेमरा गांव का एक 42 वर्षीय युवक दिनेश्वर पुत्र जगन्नाथ राय भी शामिल था। हादसे के बाद परिजन भी उसको खोज रहे थे। तीसरे दिन उनकी हिम्मत भी जवाब दे गयी।

प्रसन्नचित परिवार

युवक की जुबानी…..

युवक ने बताया कि शाम 9 बजे हुए हादसे में युवक दिनेश्वर 12 बजे तक गंगा की तेज धारा में बहता रहा 20-22 किलोमीटर दूर तक बहने के बाद उफनती धारा ने रात करीब 12 बजे सोते के सहारे उसे एक टापू के किनारे लगा दिया। जंगल-झाड़ से भरे छोटे से टापू पर पहुंचकर वह दोपहर 12 बजे तक वहां नंग धड़ंग भटकता रहा।

एक तरफ भयानक जंगल दूसरी तरफ उफनती गंगा

एक तरफ भयानक जंगल और दूसरी तरफ उफान मरती गंगा, दोनों तरफ मौत। काफी दूरी पर नावें दिखतीं तो जोर से चिल्लाता पर आवाज वहां तक पहुंच नहीं पाती थी। धीरे-धीरे दिन चढ़ने लगा तो फिर रात होने का खौफ दिखने लगा था। भूख से बेहाल दिनेश्वर ने हिम्मत नहीं हारी। उसने सोचा कि जंगल में मरने से अच्छा है कि फिर से दरिया में चला जाये। कोई सहारा मिला तो बच जायेंगे।

सूझबूझ: लकड़ियां इकठ्ठी कर बनाये गट्ठर के सहारे 4 घंटे तैरा, मिली मदद

काफी सोचने के बाद एक पेड़ की टहनियों का गट्ठर बनाया और फिर से ईश्वर का नाम लेकर गंगा में उतर गया। मदद की आस लिए करीब चार घंटे तक गट्ठर के सहारे तैरता रहा। मंगलवार शाम में चार बजे पटना जिले के गोरेया स्थान के पास दरवेशपुर गांव के सामने दियारे की ओर डेंगी से आ रहे राकेश दूबे, अल्टा राय व रंजीत राय ने दूर से ही युवक की चीख सुनी।

पूरे शरीर पर चिपकी थी जोंक,

टहनियों के सहारे एक युवक को देखा। किसी तरह इन लोगों ने उसे पानी से निकाला। वह ठीक से बोल नहीं पा रहा था। शरीर पर जोंक लिपटे थे। भूख से तड़प रहे युवक को घर से लाया हुआ चना खाने को दिया। फिर साथियों से रोटी मांगकर खिलाई। उसे जिराखन टोला ले गये। उनके शरीर की मालिश की। तब शरीर में कुछ जान आई।

परिजनों की आंखों से नही रुके खुशी के आँसू

सूचना मिलते ही गांव से परिजन जिराखन टोला गए और बुधवार की सुबह उन्हें घर लेकर आए। दस बजे दिनेश्वर घर पहुंचे तो पत्नी सुनीता खुशी से उछल पड़ी। बड़ी बेटी किरण, सैलेशिमा के साथ साथ बेटे जीतू, सिंटू व मिंटू के खुशी के आंसू नहीं रुक रहे थे।

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