Connect with us

Hi, what are you looking for?

राजस्थान

राजस्थान: एक ही परिवार के 4 लोगो की सामूहिक आत्महत्या का खुला राज, जानिए क्या है दुःखद वजह…

राजस्थान के सीकर जिले में एक परिवार के 4 सदस्यों के आत्महत्या की दिल दहला देने वाली घटना सामने आने के बाद सबकी जुबान पर एक ही बात है, क्या बेटे की मौत का गम इतना बड़ा है कि दो युवा बेटियों के साथ जीवन नहीं जिया जा सकता था? एक ही परिवार की जलती हुई 4 चिता ने सभी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया। एक चिता पर दंपति का और दूसरी चिता पर उनकी दो बेटियों का अंतिम संस्कार किया गया। घर में बचे बुजुर्गों के आंसू थम नहीं रहे हैं। अब उसके सामने न तो उसका बेटा है और न ही बहू और पोती। वह सिर्फ यह कह रही है कि मेरे बच्चे ने अपने बेटे के दुःख में क्या किया। आखिर ऐसा क्या था जिसके कारण पूरे परिवार ने इतना बड़ा कदम उठाया।

राजस्थान: एक ही परिवार के 4 लोगो ने की सामूहिक आत्महत्या, बेटे की मौत के बाद से तनाव में था पूरा परिवार

ये था पूरा मामला

दरअसल 48 वर्षीय हनुमान प्रसाद, उनकी पत्नी तारा (45), दो बेटियां, 24 वर्षीय पूजा एमएससी प्रथम वर्ष और 22 वर्षीय चीकू बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। उनका इकलौता बेटा अमर सबकी आंखों का तारा था। 27 सितंबर 2020 को, अमर को अचानक दिल का दौरा पड़ा और उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना के बाद पूरा परिवार  सदमे में चला गया। अगर कोई उनको समझाने आया भी तो वह उनसे मिलना नहीं चाहते थे।

आत्महत्या की तैयारी

घर में सामूहिक आत्महत्या के लिए कोई जगह नहीं थी। तब हनुमान प्रसाद ने एक लोहे का गार्ड खरीदा और उसे दीवारों में फांस दिया। हनुमान के छोटे भाई के लड़के ने पूछा कि इसका क्या होगा। हनुमान ने कहा कि इस पर चार घंटियाँ लटकाई जानी हैं। कौन जानता था कि हनुमान किस घंटी की बात कर रहे थे। परिवार के सभी सदस्य घर में रहते थे। बस हनुमान नौकरी पर जाते थे।  जब कोई पूछता था, तो मैं कहता था कि मैं नौकरी करने जा रहा हूं। वह एक सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी था।

मौत से पहले बहन ने लिखी ये बात

बड़ी बेटी पूजा का शव की बाँहों में मेहंदी से लिखी हुई एक लाइन थी।। ‘We are coming Motu’
(‘हम आ रहे हैं मोटू’)  दोनों बहनें अपने भाई को प्यार से मोटू बुलाती थीं। उन्होंने उसकी मृत्यु के शोक में कुछ महीने बिताए लेकिन फिर एक दिन उसने खुद ही मौत को गले लगा लिया।

सुसाइड नोट में लिखी यह बात

हनुमान के घर से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपने बेटे की मौत के दुख में आत्महत्या स्वीकार की है। वे कहते हैं कि वे स्वेच्छा से मौत को गले लगा रहे हैं क्योंकि बेटे के बिना रहना बेकार है। उन्होंने बेटे के बिना रहने की बहुत कोशिश की लेकिन उनके बिना नहीं रह सकते। हमारा बेटा अमर हमारा जीवन था अगर वह नहीं है, तो वह उसके बिना रहकर क्या करेगें?

खबर शेयर करें
Click to comment

Leave a Reply

Advertisement
Advertisement