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गुजरात: जूनागढ़ नेशनल पार्क में पिछले दो सालों में हो गयी 313 शेरो की मौत

गुजरात: जूनागढ़ के गिर राष्ट्रीय उद्यान में पिछले दो वर्षों में कुल 313 शेर मारे गए हैं। यह जानकारी वन मंत्री गणपत सिंह वसावा ने लाठी निर्वाचन क्षेत्र के कांग्रेस विधायक वीरजीभाई थुमर के एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए सदन को दी। गिर दुनिया में एशियाई शेरों का निवास स्थान है।

शेरो की म्रत्यु का यह है आंकड़ा

वन मंत्री गणपत सिंह वासावा ने बताया कि जनवरी 2019 से दिसंबर 2020 तक दो सालों में गुजरात में कुल 313 शेर मारे गए।  जिनमें से 69 शेरों की स्वाभाविक रूप से मृत्यु हो गई है, जबकि दो शेरो की अस्वाभाविक रूप से मृत्यु हुई है। और 77 शेरनियों की स्वाभाविक रूप से मृत्यु हो गई है, जबकि 13 की अस्वाभाविक रूप से मृत्यु हुई है। इस दौरान 152  मौतों में से शेरों के बच्चों की मौत हुई है जिनमे 144 बच्चों की स्वाभाविक रूप से मृत्यु हो गई, जबकि आठ अप्राकृतिक कारणों से मारे गए। इस तरह दो साल के अंदर 313 शेरों की म्रत्यु हुई है जिनमे से 290 शेरों की प्राक्रतिक मौत हुई है जबकि 23 शेरों की मौत अप्राकृतिक है, जो एक चिंता का विषय है।

गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी में 29 प्रतिशत की वृद्धि

थुमेर ने आरोप लगाया कि गिर के जंगल के बाहर के इलाकों से मवेशियों के शवों को गिर क्षेत्र में लाए जाने के कारण शेरों की अप्राकृतिक मौतें हुईं। मंत्री ने जवाब दिया कि सरकार को ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है और ऐसा पाए जाने पर निपटा जाएगा। शेर की जनगणना 2020 के अनुसार, गुजरात में 674 एशियाई शेर थे, 2015 में अंतिम जनगणना के बाद से गुजरात में एशियाई शेरों की आबादी में 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

विधायक ने एक और सवाल किया कि बड़ी बिल्लियों की अप्राकृतिक मौतों को रोकने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस सवाल पर मंत्री ने कहा कि वन विभाग द्वारा वाहनों, हथियारों, वॉकी-टॉकी सेटों पर दिन-रात गश्त की जाती है। वेस्ट गुजरात विज कंपनी लिमिटेड के साथ संयुक्त गश्त भी की गई है।

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