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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली(national capital Delhi) में प्रदूषण(pollution) की समस्या को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई की और दिल्ली सरकार(Delhi government) को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि प्रदूषण के बीच स्कूल क्यों खोले गए. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि जब आपने अपने कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम लागू किया है तो बच्चों को स्कूल जाने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है.

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3-4 साल के बच्चे जा रहे हैं स्कूल : CJI
प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस पर आपत्ति जताते हुए दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि आप कर्मचारियों को घर से काम करवा रहे हैं और बच्चों को स्कूल भेजा जा रहा है. चीफ जस्टिस ने कहा कि 3-4 साल के बच्चे स्कूल जा रहे हैं. उन्होंने दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए सवाल किया कि आपने स्कूल बंद नहीं किए. खबर में आ रहा है कि छोटे बच्चे अभी भी स्कूल जा रहे हैं।

29 नवंबर को स्कूल खुले
आपको बता दें कि दिल्ली सरकार ने 29 नवंबर से राज्य में स्कूल खोलने की घोषणा की थी. उसके बाद से पिछले कुछ दिनों में दिल्ली की हवा बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है. दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के स्तर के बीच स्कूल खोलने पर सुप्रीम कोर्ट ने अब दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है.

सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में दिया स्पष्टीकरण
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति पर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए, जिन्होंने अदालत को बताया कि अधिकारी इस दिशा में गंभीरता से और तेजी से काम कर रहे हैं और उन उद्योगों को बंद किया जा रहा है. जो नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हालांकि इस बीच कोर्ट ने कड़े लहजे में कहा, हमें नहीं लगता कि प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बावजूद कुछ किया जा रहा है.

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क्यों बढ़ रहा है प्रदूषण का स्तर: CJI
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे आदेशों के बावजूद प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अगर इतने प्रयास चल रहे हैं और निर्देशों पर अमल किया जा रहा है तो आपको क्या लगता है कि इस तरह से प्रदूषण का स्तर कैसे बढ़ेगा? हर आम आदमी यह सवाल पूछेगा कि अगर कोर्ट इतना कुछ कर रही है तो प्रदूषण का स्तर क्यों बढ़ रहा है? समस्या कहाँ है? जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा, ‘मैं भी पूछ रहा हूं कि सोर्स क्या है? एसजी क्या आपके अधिकारियों की पहचान हो गई है?’ इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘मैंने अधिकारियों से बात की है. मुख्य स्रोत औद्योगिक प्रदूषण और वाहन प्रदूषण हैं।

दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा की गति धीमी होने से प्रदूषण के तत्व जमा होंगे, जिससे आने वाले 1-2 दिनों में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ सकता है. दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बुधवार (1 दिसंबर) को सुबह 9 बजे 357 रहा, जबकि मंगलवार को 24 घंटे का औसत AQI 328 था। पड़ोसी फरीदाबाद में एक्यूआई 342, गाजियाबाद में 361, ग्रेटर नोएडा में 310, गुड़गांव में 359 और नोएडा में 336 था।

हवा को कब बुरा माना जाता है?
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) को तब अच्छा माना जाता है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शून्य से 50 के बीच होता है, जबकि 51 से 100 के बीच एक्यूआई को ‘संतोषजनक’ श्रेणी में माना जाता है। जबकि, जब एक्यूआई 101 और 200 के बीच होता है, तो प्रदूषण को ‘मध्यम’ माना जाता है, जबकि 201 से 300 के बीच इसे खराब माना जाता है। 301 से 400 के बीच की हवा को ‘बहुत खराब’ माना जाता है, जबकि 401 और 500 के बीच एक्यूआई को ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

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Bharti Sharma

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