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मप्र- सदियों पुराना गोटमार मेला: वार्षिक पत्थरबाजी की परंपरा में 400 घायल, ज्यादातर नाबालिग

बताया जाता है कि पिछले 300 सालों से आयोजित इस मेले में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है लेकिन पुलिस प्रशासन या सरकार इस पर कोई अंकुश नहीं लगा पाया। इस मेले के आयोजन के बारे में अधिकारियों ने बताया कि जिले के इस वार्षिक पथराव मेले के लिए 1000 से अधिक पुलिसकर्मियों और 35 डॉक्टरों के एक दल को तैनात किया गया था। यहां ड्रोन कैमरों की माध्यम से भी स्थिति की निगरानी की गई थी।

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Manoj kumar

मेले में पत्थरबाजी का एक दृश्य सौजन्य सोशल मीडिया

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में सदियों पुरानी वार्षिक गोटमार मेले में मंगलवार को पत्थरबाजी के दौरान 400 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में ज्यादातर नाबालिग है। इनमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हैं जिनको बेहतर उपचार के लिए नागपुर भेजा गया है। वहीं छिंदवाड़ा डीएम ने बताया कि इस बार पिछले साल की तुलना में कम लोग घायल हुए हैं।

क्या है गोटमार मेला

छिंदवाड़ा जिले में जाम नदी के एक किनारे पर सावरगांव के लोग और दूसरे किनारे पर पांढुर्ना गांव के लोग जमा होते हैं। एक पेड़ नदी के बीच में रखा जाता है। इस दौरान दोनों किनारों पर हाथ मे पत्थर लिए लोग खड़े होते हैं। दोनो गांवो के लोग झंडे को लेकर एक दूसरे के ऊपर पथराव करते हुए उस पेड़ की तरफ दौड़ लगाते हैं। और जो पक्ष पहले झंडा फहरा लेता है उसे विजेता घोषित किया जाता है।

प्रेम प्रसंग से जुड़ी बताई जाती है यह परंपरा

किवदंती के अनुसार बताया गया कि लगभग 300 साल पहले पांढुर्ना के एक युवक और सावरगांव की एक युवती के बीच प्रेम संबंध हो गए थे। एक दिन प्रेमी युवक सावरगांव पहुंच गया और युवती को भगाकर पांढुर्ना ले जाने लगा। जैसे ही दोनों प्रेमी युगल जाम नदी के बीच पहुंचे तो सावरगांव के लोगो को खबर लगी और उन्होंने प्रेमी युगल को रोकने के लिए पत्थर बरसाए। अपने गांव के लड़के पर हमला होते देख पांढुर्ना गांव के लोगों ने भी सावरगांव के लोगों पर पत्थर बरसाए।

डीएम सौरभ कुमार सुमन ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष कुछ कम लोग घायल हुए। उन्होंने लोगों से अपील की है कि समय के साथ इस मेले को प्रतीकात्मक तरीके से ही आयोजित करें।

छिंदवाड़ा एसपी विवेक अग्रवाल ने कहा कि मेले के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के सभी दिशा निर्देशों का पालन किया गया। स्थिति की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात किया गया था।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ जीसी चौरसिया ने कहा कि मंगलवार को आयोजित हुए गोटमार मेले में पत्थरबाजी के दौरान 400 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों में ज्यादातर नाबालिग हैं।

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