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Ahoi Ashtami 2021: संतान की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं माताएं‚ ऐसे की जाती अहोई की पूजा

गुरूवार यानि आज माताएं अपने बच्चों के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं। इस दिन माताएं पूरे दिन व्रत रख कर शाम के समय तारे देख कर व्रत का पारण करती हैं। (Ahoi Ashtami 2021 Puja Vidhi, Muhurat Timings, Samagri)

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Ahoi Ashtami 2021: यूं तो हर मां अपने बच्चों के लिए हर समय कुछ भी करने के लिए तैयार रही रहती है। लेकिन साल में एक दिन ऐसा आता है जिस दिन मां अपनी संतान के लिए पूरा दिन व्रत रखती है। गुरूवार यानि आज माताएं अपने बच्चों के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रख रही हैं। इस दिन माताएं पूरे दिन व्रत रख कर शाम के समय तारे देख कर व्रत का पारण करती हैं। (Ahoi Ashtami 2021 Puja Vidhi, Muhurat Timings, Samagri)

आपको ये पता होना चाहिए कि अहोई अष्टमी का व्रत दीपावली पर्व से ठीक एक सप्ताह पहले मनाया जाता है। अहोई माता की पूजा कर महिलाएं अपने बच्चों की दीर्घ आयु की कामना करती हैं। इसके अलावा माताएं अहोई धारण करती हैं जिसे दीवाली के दिन उतारा जाता है।

बच्चे भी देते हैं मां को उपहार

ऐसा नही है कि इस दिन केवल मां ही बच्चों के लिए व्रत रखती हैं। इस दिन बच्चे भी अपनी माताओं को उपहार देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मां अपने बच्चों से उपहार पाकर बेहद खुश होती हैं और उनके लिए मंगल कामनाएं करती हैं।

शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Shubh Muhurat):
जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार अहोई पूजा का शुभ मुहूर्त- 05:39 PM से 06:56 PM रखा गया है।
सयम अवधि- 01 घण्टा 17 मिनट है।
गोवर्धन राधा कुण्ड स्नान गुरुवार, अक्टूबर 28, 2021 को
तारों को देखने के लिए शुभ समय- 06:03 PM है।
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय-11:29 PM है।

पूजा विधि

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार इस दिन महिलाओं को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए इसके बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शुभ मुहूर्त में पूजा के लिए गेरू पर दीवार से अहोई माता का चित्र बनाना चाहिए। इसके बाद सेह और उनके सात पुत्रों का चित्र भी बनाना चाहिए। दीवार पर चित्र बनाने के अलावा आजकल मार्केट में भी कलेंडर उपल्बध हैं।

फिर एक मिट्टी का घड़ा अथवा कलश जल से भरकर पूजा स्थल पर रख दें। फिर चावल और रोली से अहोई माता की पूजा शुरू करें। इसके बाद आप अहोई माता को मीठे पुए या फिर आटे के हलवे का भोग लगाएं। इसके बाद हाथ में गेहूं के सात दाने लेकर अहोई माता की कथा सुनें। फिर शाम के समय तारे निकलने के बाद अर्घ्य देकर अपना व्रत खोलें।

सामग्री: अहोई माता मूर्ति, दीपक, पानी का कलश, माला, करवा, अक्षत, पानी का कलश, पूजा रोली, दूब, कलावा, श्रृंगार का सामान, श्रीफल, चावल की कोटरी, सात्विक भोजन, बयाना, चावल की कोटरी, सिंघाड़े, मूली, फल, खीर, दूध व भात, वस्त्र, चौदह पूरी और आठ पुए आदि।

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